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विवाह, मुंडन, नामकरण शुभ मुहूर्त 2026-27

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

2026 में अब बची हुई शुद्ध विवाह तिथियाँ 25, 26, 30 नवंबर और 2, 3, 11 दिसंबर हैं। 2027 में कुल 35 शुद्ध तिथियाँ हैं — जनवरी से जून और नवंबर-दिसंबर में, जबकि जुलाई से अक्टूबर शुक्र अस्त और चातुर्मास के कारण बंद है। मुंडन 2027 मकर संक्रांति से मध्य जुलाई तक और नए घर का गृह प्रवेश माघ, फाल्गुन, वैशाख व ज्येष्ठ में होता है।

Deep Dive Analysis

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

विवाह मुहूर्त 2026 में जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई, नवंबर और दिसंबर में उपलब्ध हैं — अगस्त से अक्टूबर तक चातुर्मास के कारण कोई शुभ विवाह मुहूर्त नहीं होता। मुंडन और नामकरण संस्कार के मुहूर्त पंचांग के तिथि, नक्षत्र और वार पर निर्भर करते हैं, और शहर के अनुसार सटीक समय बदलता है। यह पेज 2026-27 की तारीखें, नियम और अपवाद — तीनों बताता है।

पंचांग के पांच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

हर शुभ मुहूर्त पंचांग के पांच अंगों की जांच से तय होता है — तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा की स्थिति), योग (सूर्य-चंद्र संयोग) और करण (तिथि का आधा भाग)। विवाह, मुंडन और नामकरण — तीनों संस्कारों में इन पांचों अंगों का शुभ संयोजन देखा जाता है, साथ ही ग्रहों की स्थिति भी। किसी एक अंग के शुभ होने मात्र से मुहूर्त पूरी तरह शुभ नहीं माना जाता — पांचों का मेल जरूरी है।

विवाह मुहूर्त तय करने में लग्न की भूमिका

विवाह मुहूर्त में लग्न (उदय होने वाली राशि) की शुद्धि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर-वधू दोनों की जन्म कुंडली से लग्न, चंद्र राशि और सप्तम भाव को मिलाकर विवाह-लग्न तय किया जाता है, ताकि यह दोनों की व्यक्तिगत कुंडली से टकराए नहीं। सामान्य पंचांग में दी गई तारीखें राष्ट्रीय स्तर पर शुभ मानी जाती हैं, लेकिन व्यक्तिगत कुंडली मिलाकर लग्न-शुद्धि करना ज्यादा सटीक और सुरक्षित तरीका है।

विवाह पंचक दोष क्या है

पंचक उन पांच नक्षत्रों — धनिष्ठा (उत्तरार्ध), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती — के समय को कहते हैं, जिनमें कुछ विशेष कार्य वर्जित माने जाते हैं। विवाह के लिए पंचक दोष उतना गंभीर नहीं माना जाता जितना दक्षिण दिशा यात्रा या छत डालने के लिए, लेकिन कई परिवार सावधानीवश इस समय विवाह टालना पसंद करते हैं। शुभ मुहूर्त चुनते समय पंचक की जांच जरूर करें, खासकर अगर परिवार में इसकी परंपरा मानी जाती हो।

गुरु अस्त और शुक्र अस्त काल में विवाह क्यों वर्जित

जब गुरु (बृहस्पति) या शुक्र ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट आकर अस्त (दिखना बंद) हो जाते हैं, तो इस काल में विवाह वर्जित माना जाता है — क्योंकि शुक्र विवाह और सुख का कारक ग्रह है और गुरु ज्ञान व मार्गदर्शन का। यह परंपरा शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथों में स्थापित है, हालांकि इसे कठोर खगोलीय नियम से ज्यादा व्यापक रूप से पालित सामाजिक-धार्मिक परंपरा समझना उचित है। पंचांग में हर साल गुरु-शुक्र अस्त की तारीखें प्रकाशित होती हैं, जिन्हें विवाह मुहूर्त चुनने से पहले जरूर देखना चाहिए।

चातुर्मास में विवाह मुहूर्त क्यों नहीं होते

चातुर्मास — देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, लगभग जुलाई मध्य से नवंबर तक चलने वाला काल — में विष्णु जी के शयन में जाने की मान्यता के कारण कोई भी मांगलिक कार्य वर्जित होता है। यही कारण है कि 2026 में अगस्त से अक्टूबर तक कोई विवाह मुहूर्त पंचांग में नहीं मिलता। देवउठनी एकादशी के बाद ही विवाह मुहूर्त फिर शुरू होते हैं, जो नवंबर 2026 की तारीखों में दिखता है।

होलाष्टक और पितृ पक्ष का असर मुहूर्त पर

होलाष्टक (होली से आठ दिन पहले) और पितृ पक्ष (श्राद्ध के सोलह दिन) — दोनों काल में भी विवाह, मुंडन और नामकरण जैसे मांगलिक संस्कार वर्जित माने जाते हैं। मार्च में होलाष्टक और सितंबर के आसपास पितृ पक्ष के दौरान पंचांग में मुहूर्त नहीं मिलेंगे, भले ही अन्य ग्रह स्थिति शुभ दिखे। मुहूर्त सूची में इन दोनों कालों की तारीखें पहले से हटाकर ही अंतिम तारीखें दी गई हैं।

शहर के अनुसार मुहूर्त का समय क्यों अलग होता है

पंचांग की गणना सूर्योदय और स्थानीय अक्षांश-देशांतर पर आधारित होती है, इसलिए दिल्ली, मुंबई, लखनऊ या पटना में एक ही तिथि का शुभ मुहूर्त शुरू और खत्म होने का सटीक समय अलग-अलग हो सकता है — अक्सर 15 से 40 मिनट तक का अंतर। इस पेज पर दी गई तारीखें नई दिल्ली के मानक पंचांग पर आधारित हैं। अपने शहर का सटीक मिनट-दर-मिनट समय जानने के लिए व्यक्तिगत पंचांग जांच या ज्योतिषी परामर्श जरूरी है।

अभिजीत मुहूर्त क्या है और यह कब काम आता है

अभिजीत मुहूर्त दिन का वह लगभग 48 मिनट का समय है जो स्थानीय दोपहर के ठीक आसपास आता है, और इसे लगभग हर दिन शुभ माना जाता है — रविवार को छोड़कर। अगर किसी परिवार को किसी विशेष तारीख पर मुख्य विवाह मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो अभिजीत मुहूर्त एक सुरक्षित वैकल्पिक खिड़की के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते राहु काल और भद्रा उस दिन अभिजीत काल से न टकराएं।

विवाह मुहूर्त 2026 — जनवरी

जनवरी 2026 में शुभ विवाह मुहूर्त 14, 23 और 28 जनवरी को हैं। यह नए साल का पहला मुहूर्त-सीजन है, इसलिए इन तारीखों पर वेन्यू और पंडित जल्दी बुक हो जाते हैं। तीनों तारीखें पौष और माघ मास के बीच पड़ती हैं — पौष मास में विवाह वर्जित होने की परंपरा है, इसलिए ध्यान रखें कि 14 जनवरी मकर संक्रांति के बाद माघ मास शुरू होने पर ही शुभ मानी गई है।

विवाह मुहूर्त 2026 — फरवरी

फरवरी 2026 साल का सबसे व्यस्त विवाह महीना है — 2-3, 5-6, 8, 12-13, 19-20, 21 और 25-26 फरवरी को शुभ मुहूर्त हैं। माघ और फाल्गुन मास की शुरुआत में यह विंडो सबसे लंबी और सुविधाजनक मानी जाती है, इसलिए फरवरी में डेस्टिनेशन और बड़े शहरी विवाहों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। मार्च की शुरुआत में होलाष्टक लगने से पहले यह आखिरी बड़ी विंडो है।

विवाह मुहूर्त 2026 — मार्च

मार्च 2026 में सिर्फ 10, 13 और 14 मार्च को मुहूर्त हैं, क्योंकि महीने के बाकी हिस्से में होलाष्टक और उसके बाद होली का समय पड़ता है। होलाष्टक शुरू होने से पहले की यह छोटी विंडो बुक करने वालों को अक्सर पंडित और वेन्यू दोनों जल्दी मिल जाते हैं क्योंकि बड़ी भीड़ फरवरी में निपट चुकी होती है।

विवाह मुहूर्त 2026 — अप्रैल

अप्रैल 2026 में 19-21, 26-27 और 29 अप्रैल को शुभ मुहूर्त हैं। होली और होलाष्टक बीत जाने के बाद यह वसंत ऋतु की दूसरी बड़ी विंडो है। चैत्र और वैशाख मास के संधिकाल में पड़ने वाली यह तारीखें गर्मी शुरू होने से पहले की आखिरी आरामदायक विवाह विंडो मानी जाती हैं।

विवाह मुहूर्त 2026 — मई

मई 2026 में मुहूर्त की भरमार है — 3, 13-14, 17-18, 22, 24-26 और 27-28 मई को शुभ तारीखें उपलब्ध हैं। वैशाख और ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली यह विंडो साल की सबसे लंबी मुहूर्त-सीरीज़ में से एक है, इसलिए गर्मी की छुट्टियों के साथ विवाह प्लान करने वाले परिवार अक्सर मई को प्राथमिकता देते हैं।

विवाह मुहूर्त 2026 — जून

जून 2026 में 1-2, 4, 10, 19, 24 और 26-27 जून को मुहूर्त हैं। यह ज्येष्ठ और आषाढ़ मास की शुरुआत का समय है। जून के अंत में देवशयनी एकादशी नजदीक आते ही मुहूर्त कम होते जाते हैं, इसलिए महीने के पहले पखवाड़े की तारीखें ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं।

विवाह मुहूर्त 2026 — जुलाई

जुलाई 2026 में सिर्फ 6-7 और 16 जुलाई को मुहूर्त हैं — यह चातुर्मास शुरू होने से ठीक पहले की आखिरी दो तारीखें हैं। देवशयनी एकादशी के बाद विष्णु जी शयन में चले जाते हैं और अगले चार महीनों के लिए सारे विवाह मुहूर्त बंद हो जाते हैं, इसलिए जुलाई के मुहूर्त साल के इस हिस्से में मांग में सबसे ज्यादा रहते हैं।

अगस्त से अक्टूबर 2026 में विवाह मुहूर्त क्यों नहीं

अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 — पूरे तीन महीने — पंचांग में कोई शुभ विवाह मुहूर्त नहीं दिखाएंगे। इसका कारण चातुर्मास है, जो देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक चलता है। इस अवधि में सावन, भाद्रपद और अश्विन मास आते हैं, जिनमें पितृ पक्ष भी शामिल है। परिवार अक्सर इस गैप को न समझकर पंडित से पूछते हैं — यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली शास्त्रीय व्यवस्था है।

विवाह मुहूर्त 2026 — नवंबर

देवउठनी एकादशी (शुक्रवार 20 नवंबर 2026) के बाद त्रिकाल वाणी की सख़्त शुद्ध सूची में नवंबर 2026 की तीन विवाह तिथियाँ हैं: 25 नवंबर (बुधवार) — रोहिणी नक्षत्र, शाम 4:55 से अगली सुबह 7:10 तक, 26 नवंबर (गुरुवार) — मृगशिरा नक्षत्र, सुबह 7:10 से शाम 5:50 तक, और 30 नवंबर (सोमवार) — मघा नक्षत्र, सुबह 9:47 से दोपहर 2:32 तक। 19, 20 और 21 नवंबर चातुर्मास के भीतर या देवउठनी के दिन ही पड़ती हैं, इसलिए वे शुद्ध सूची में नहीं हैं। समय दिल्ली के हैं — हर दिन का लग्न नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त पर देखें।

विवाह मुहूर्त 2026 — दिसंबर

दिसंबर 2026 में तीन शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 2 दिसंबर (बुधवार) — उत्तरा फाल्गुनी, रात 10:53 से अगली सुबह 7:13 तक, 3 दिसंबर (गुरुवार) — उत्तरा फाल्गुनी, सुबह 7:13 से (भद्रा से पहले का हिस्सा श्रेष्ठ), और 11 दिसंबर (शुक्रवार) की रात — उत्तराषाढ़ा, 12 दिसंबर की सुबह 3:05 से 7:15 तक। 17 दिसंबर से खरमास (सूर्य धनु में) शुरू होता है और विवाह 15 जनवरी 2027 तक रुकते हैं। पूरा विवरण दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त पर है।

विवाह मुहूर्त 2027 — जनवरी

खरमास ख़त्म होने के बाद जनवरी 2027 में तीन शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 15 जनवरी (शुक्रवार) — रेवती नक्षत्र, सुबह 7:10 से दोपहर 2:15, 18 जनवरी (सोमवार) — रोहिणी नक्षत्र, रात 10:34 से अगली सुबह 7:09, और 20 जनवरी (बुधवार) — मृगशिरा नक्षत्र, सुबह 7:08 से शाम 5:43। हर दिन का लग्न और विवरण जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त पर है।

विवाह मुहूर्त 2027 — फरवरी

फरवरी 2027 में पाँच शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 1 फरवरी (सोमवार) — अनुराधा, सुबह 7:01 से 8:16, 3 फरवरी (बुधवार) — मूल, दोपहर 1:54 से 2:19, 10 फरवरी (बुधवार) — उत्तरा भाद्रपद, सुबह 3:10 से 6:55, 11 फरवरी (गुरुवार) — रेवती, सुबह 6:54 से रात 3:19 तक, और 22 फरवरी (सोमवार) — उत्तरा फाल्गुनी, दोपहर 1:25 से अगली सुबह 6:45। बसंत पंचमी 2027 (11 फरवरी) इसी सूची में आती है। पूरा विवरण फरवरी 2027 विवाह मुहूर्त पर है।

विवाह मुहूर्त 2027 — मार्च

मार्च 2027 में पाँच शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 1 मार्च (सोमवार) — मूल, रात 2:29 से सुबह 6:39, 3 मार्च (बुधवार) — उत्तराषाढ़ा, सुबह 4:28 से 6:38, 4 मार्च (गुरुवार) — उत्तराषाढ़ा, सुबह 6:37 से 7:27, 10 मार्च (बुधवार) — उत्तरा भाद्रपद, लगभग पूरा दिन, और 11 मार्च (गुरुवार) — रेवती, सुबह 6:31 से दोपहर 1:01। इसके बाद 14 से 21 मार्च होलाष्टक और 15 मार्च से 14 अप्रैल मीन खरमास है, इसलिए मार्च में 11 तारीख़ के बाद कोई विवाह मुहूर्त नहीं है।

विवाह मुहूर्त 2027 — अप्रैल

अप्रैल 2027 में विवाह मुहूर्त मीन खरमास ख़त्म होने (14 अप्रैल) के बाद खुलते हैं। शुद्ध सूची में पाँच तिथियाँ हैं: 16 अप्रैल (शुक्रवार) — मघा, 21 अप्रैल (बुधवार) — स्वाति, रात 3:35 से सुबह 5:55, 22 अप्रैल (गुरुवार) — स्वाति, 23 अप्रैल (शुक्रवार) — अनुराधा, शाम 5:24 से अगली सुबह 4:24, और 28 अप्रैल (बुधवार) — उत्तराषाढ़ा, सुबह 5:50 से दोपहर 12:35। मुहूर्त चिंतामणि सूर्य के मेष राशि में रहते विवाह को शुभ मानता है,[1] और अप्रैल का यह पूरा हिस्सा उसी दौर में आता है। कुछ पंचांग 18, 19 या 24 से 27 अप्रैल भी दिखाते हैं — वे दिन रिक्ता तिथि, भद्रा या कमज़ोर लग्न की सख़्त जाँच में नहीं टिकते।

विवाह मुहूर्त 2027 — मई

मई 2027 में तीन शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं, तीनों रात के लग्न वाली: 7 मई (शुक्रवार) — रोहिणी, रात 1:14 से सुबह 5:44, 24 मई (सोमवार) — उत्तराषाढ़ा, रात 11:58 से अगली सुबह 5:33, और 31 मई (सोमवार) — रेवती, रात 10:00 से अगली सुबह 5:30। वैशाख मास में सूर्य मेष और फिर वृषभ में रहता है, जो दोनों विवाह के लिए शुभ राशियाँ हैं। गर्मी की छुट्टियों में शादी की योजना हो तो इन तारीख़ों पर वेन्यू जल्दी बुक होते हैं।

विवाह मुहूर्त 2027 — जून

जून 2027 में तीन शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 10 जून (गुरुवार) — मघा, सुबह 7:13 से शाम 6:18, 16 जून (बुधवार) — अनुराधा, रात 9:27 से अगली सुबह 3:22, और 21 जून (सोमवार) — उत्तराषाढ़ा, सुबह 6:56 से अगली सुबह 5:26। 13 जुलाई को देवशयनी एकादशी आते ही चातुर्मास शुरू होगा, और उससे पहले 7 जुलाई से शुक्र अस्त है, इसलिए 21 जून 2027 साल के पहले हिस्से की आख़िरी शुद्ध विवाह तिथि है।

जुलाई से अक्टूबर 2027 में विवाह मुहूर्त क्यों नहीं

2027 में जुलाई से अक्टूबर तक लगातार तीन बाधाएँ एक साथ हैं: शुक्र अस्त 7 जुलाई से 17 सितंबर, चातुर्मास 13 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से 9 नवंबर, और गुरु अस्त 17 अगस्त से 14 सितंबर। शुक्र विवाह का कारक है और गुरु शुभता का — दोनों अस्त हों तो विवाह नहीं होता, और चातुर्मास में परंपरा से कोई मांगलिक संस्कार नहीं किया जाता। इसलिए इन चार महीनों में रोका या सगाई की जा सकती है, विवाह नवंबर के लिए रखें।

विवाह मुहूर्त 2027 — नवंबर

देवउठनी एकादशी (10 नवंबर 2027) से विवाह फिर शुरू होते हैं और नवंबर 2027 साल का सबसे व्यस्त महीना है — आठ शुद्ध तिथियाँ: 10 नवंबर (बुधवार, उत्तरा भाद्रपद), 11 नवंबर (गुरुवार, रेवती), 12 नवंबर (शुक्रवार, रेवती), 15 नवंबर (सोमवार, रोहिणी), 24 नवंबर (बुधवार, हस्त), 25 नवंबर (गुरुवार, स्वाति, रात में), 26 नवंबर (शुक्रवार, स्वाति) और 29 नवंबर (सोमवार, मूल, रात में)। 15 और 25 नवंबर को स्थिर (सिंह) लग्न मिलता है, जो सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

विवाह मुहूर्त 2027 — दिसंबर

दिसंबर 2027 में तीन शुद्ध विवाह तिथियाँ हैं: 2 दिसंबर (गुरुवार) — उत्तराषाढ़ा, दोपहर 1:48 से रात 4:18, 8 दिसंबर (बुधवार) — उत्तरा भाद्रपद, सुबह 7:14 से 10:09, और 9 दिसंबर (गुरुवार) — रेवती, सुबह 9:45 से शाम 7:10। 17 दिसंबर से धनु खरमास शुरू होता है, इसलिए 9 दिसंबर 2027 साल की आख़िरी विवाह तिथि है। 2028 की पहली तिथियाँ मकर संक्रांति के बाद मिलेंगी।

विवाह के शुभ नक्षत्र और तिथि — मुहूर्त चिंतामणि का नियम

मुहूर्त चिंतामणि के विवाह प्रकरण में विवाह के लिए ग्यारह नक्षत्र गिनाए गए हैं — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती — बशर्ते उन पर किसी पाप ग्रह का वेध न हो, और तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।[3] इसके ऊपर सूर्य की राशि (मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर, कुंभ) का नियम लगता है,[1] और दक्षिणायन में या गुरु-शुक्र के अस्त रहते विवाह नहीं होता।[4] ऊपर की हर तारीख़ इन सब नियमों के साथ भद्रा और लग्न की शुद्धि पर भी जाँची गई है। अपनी और साथी की जन्म-कुंडली से व्यक्तिगत तारीख़ के लिए विवाह मुहूर्त जन्म तिथि से देखें।

खरमास ख़त्म — अप्रैल में शादियाँ कब से शुरू होती हैं

हर साल सूर्य के मीन राशि में रहने का लगभग एक महीना खरमास कहलाता है, जिसमें विवाह नहीं किए जाते। 2027 में यह मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक है और मेष संक्रांति के साथ ख़त्म होता है। मुहूर्त चिंतामणि विवाह के लिए सूर्य की जिन राशियों को शुभ मानता है, उनमें मेष, वृषभ और मिथुन शामिल हैं,[1] इसीलिए अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से जून तक विवाह का बड़ा मौसम चलता है। 2027 की शुभ तिथियाँ और योग 2027 शुभ तिथि और योग में, और रोज़ का पंचांग आज का पंचांग पर देखिए।

होलाष्टक में विवाह क्यों नहीं होते

होली से पहले के आठ दिन, जिन्हें होलाष्टक कहा जाता है, विवाह के लिए वर्जित माने जाते हैं। यह केवल लोक-मान्यता नहीं है — मुहूर्त चिंतामणि स्पष्ट कहता है कि विवाह जैसे कार्यों के लिए होलिका से पहले के आठ दिन इष्ट नहीं हैं।[2] इसी कारण मार्च 2027 में 14 मार्च के बाद मुहूर्त रुक जाते हैं और उसके बाद खरमास लग जाता है। होलाष्टक की तिथि आज का पंचांग से देखिए, और दूसरे वर्जित कालों की पूरी सूची के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड पढ़िए।

2026 में हिंदू पंचांग के अनुसार विवाह के शुभ मुहूर्त कब हैं? — पूरी सूची

संक्षेप में — 2026 में अब बची हुई शुद्ध विवाह तिथियाँ: नवंबर (25, 26, 30) और दिसंबर (2, 3, 11 की रात)। साल की शुरुआत की तिथियाँ ऊपर माह-वार दी गई हैं। 2027 की पूरी सूची (35 तिथियाँ): जनवरी (15, 18, 20), फरवरी (1, 3, 10, 11, 22), मार्च (1, 3, 4, 10, 11), अप्रैल (16, 21, 22, 23, 28), मई (7, 24, 31), जून (10, 16, 21), जुलाई से अक्टूबर (कोई नहीं), नवंबर (10, 11, 12, 15, 24, 25, 26, 29) और दिसंबर (2, 8, 9)। सारी तारीख़ें सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार को हैं, और समय दिल्ली के अनुसार है — दूसरे शहर में घंटे-मिनट बदलेंगे। हर तिथि का लग्न विवाह मुहूर्त 2027 की लाइव सूची पर है।

क्या मुहूर्त के बिना विवाह हो सकता है

धार्मिक दृष्टि से मुहूर्त के बिना विवाह वर्जित नहीं है, लेकिन शास्त्रीय परंपरा शुभ पंचांग-संयोग को नवदंपति के जीवन की शुरुआत के लिए अनुकूल मानती है। कोर्ट मैरिज या रजिस्टर्ड विवाह में अक्सर मुहूर्त नहीं देखा जाता, जबकि पारंपरिक हिंदू विवाह संस्कार में मुहूर्त लगभग हमेशा जरूरी माना जाता है। यह पूरी तरह परिवार की मान्यता और परंपरा पर निर्भर करने वाला निर्णय है, कोई सख्त शास्त्रीय बाध्यता नहीं।

जन्म कुंडली मिलान और मुहूर्त का संबंध

कुंडली मिलान (गुण मिलान) और विवाह मुहूर्त — दोनों अलग चीजें हैं जो अक्सर एक-दूसरे से जोड़ दी जाती हैं। गुण मिलान वर-वधू की जन्म कुंडली की आपसी अनुकूलता जांचता है, जबकि मुहूर्त विवाह के दिन और समय की शुद्धता जांचता है। सबसे मजबूत तरीका दोनों को साथ करना है — पहले कुंडली मिलान से अनुकूलता, फिर दोनों की कुंडली को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत मुहूर्त तय करना।

विवाह मुहूर्त बुक करने से पहले क्या तैयारी करें

वेन्यू और पंडित बुक करने से कम से कम दो-तीन महीने पहले परिवार को चाहिए: दोनों पक्षों की जन्म कुंडली तैयार रखें, पसंदीदा महीना और शहर तय करें, गुरु-शुक्र अस्त व चातुर्मास की तारीखें जांच लें, और अंत में ज्योतिषी से व्यक्तिगत मुहूर्त की पुष्टि करवा लें। लोकप्रिय महीनों जैसे फरवरी और मई में वेन्यू छह महीने पहले तक बुक हो जाते हैं, इसलिए योजना जितनी जल्दी बने उतना बेहतर।

मुंडन संस्कार का महत्व

मुंडन (चूड़ाकर्म) सोलह संस्कारों में से एक है, जिसमें बच्चे के जन्म के बाद पहली बार बाल उतारे जाते हैं। इसे आमतौर पर पहले या तीसरे वर्ष में किया जाता है, हालांकि परिवार-परंपरा के अनुसार यह उम्र बदल सकती है। मान्यता है कि जन्म के बाल पिछले जन्म की अशुद्धियों से जुड़े होते हैं, इसलिए मुंडन बच्चे को नई शुरुआत और दीर्घायु के आशीर्वाद के साथ जोड़ता है।

मुंडन के लिए शुभ नक्षत्र

मुंडन के लिए अश्विनी, पुष्य, हस्त, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती नक्षत्र सबसे शुभ माने जाते हैं। इनमें से पुष्य नक्षत्र को लगभग हर मांगलिक कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, हालांकि परंपरागत रूप से पुष्य में विवाह वर्जित है — मुंडन में यह नियम लागू नहीं होता। कृत्तिका, आर्द्रा और मघा नक्षत्र मुंडन के लिए वर्जित माने गए हैं।

मुंडन में वर्जित नक्षत्र, तिथि और दिन

नक्षत्रों के अलावा, अमावस्या तिथि और शनिवार का दिन मुंडन के लिए वर्जित माना जाता है — बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे शुभ दिन माना गया है। शुक्ल पक्ष की तृतीया, पंचमी और सप्तमी तिथियां प्राथमिकता में रहती हैं। इसके अलावा चातुर्मास, पितृ पक्ष और होलाष्टक के दौरान भी मुंडन नहीं किया जाता, ठीक वैसे ही जैसे विवाह में इन कालों से बचा जाता है। अपने बच्चे की जन्म-कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत मुंडन-तारीख के लिए हमारा मुंडन मुहूर्त कैलकुलेटर देखें, जो 45 दिन मुफ्त और ₹51 में 6 महीने तक की तारीखें देता है।

मुंडन मुहूर्त 2026 — फरवरी से मार्च

फरवरी 2026 में 6, 12, 26 और 27 फरवरी को मुंडन मुहूर्त हैं, जबकि मार्च में 4 और 9 मार्च को। जनवरी 2026 में पंचांग के अनुसार कोई शुभ मुंडन तिथि उपलब्ध नहीं है, इसलिए नई दिल्ली में जन्मे बच्चों के लिए फरवरी पहली उपलब्ध विंडो बनती है।

मुंडन मुहूर्त 2026 — अप्रैल से मई

अप्रैल 2026 में 20, 22, 23 और 29 अप्रैल को, और मई में 6, 7, 8 और 14 मई को मुंडन मुहूर्त उपलब्ध हैं। यह वसंत और गर्मी की शुरुआत की विंडो है, और मार्च के होलाष्टक-अंतराल के बाद अप्रैल की यह पहली तारीख (20 अप्रैल) खासतौर पर मांग में रहती है।

मुंडन मुहूर्त 2026 — जून से जुलाई

जून 2026 में 17, 24 और 26 जून को, और जुलाई में 1 व 9 जुलाई को मुंडन मुहूर्त हैं — यह चातुर्मास से पहले की आखिरी विंडो है। इसके बाद अगस्त से दिसंबर 2026 तक पंचांग में कोई शुभ मुंडन तिथि नहीं मिलेगी, ठीक विवाह मुहूर्त वाले पैटर्न की तरह।

मुंडन मुहूर्त 2027 — जनवरी से जुलाई की पूरी सूची

मुहूर्त चिंतामणि कहता है कि चौल (मुंडन) कर्म दक्षिणायन में और गुरु-शुक्र के अस्त या बाल्य काल में नहीं करना चाहिए।[4] इसलिए 2027 में मुंडन की खिड़की मकर संक्रांति (14 जनवरी) से मध्य जुलाई तक है — उसमें भी मीन खरमास और होलाष्टक छोड़कर। अश्विनी, पुष्य, हस्त, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती नक्षत्र, शुभ तिथि (रिक्ता और अमावस्या नहीं) और सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार — इन सबके मेल से दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार, दिन के समय की ये तारीख़ें बनती हैं: 15 जनवरी (शुक्रवार, रेवती), 11 फरवरी (गुरुवार, रेवती), 19 फरवरी (शुक्रवार, पुष्य, सुबह 11:15 तक), 25 फरवरी (गुरुवार, स्वाति), 5 मार्च (शुक्रवार, श्रवण), 10 मार्च (बुधवार, रेवती), 11 मार्च (गुरुवार, रेवती), 12 मई (बुधवार, पुष्य), 31 मई (सोमवार, रेवती, दोपहर बाद), 2 जून (बुधवार, अश्विनी, सुबह 8:30 से 12:20), 23 जून (बुधवार, धनिष्ठा, दोपहर 3:45 के बाद), 24 जून (गुरुवार, धनिष्ठा) और 5 जुलाई (सोमवार, पुष्य)। 16 जुलाई से दक्षिणायन शुरू होता है, इसलिए नवंबर-दिसंबर 2027 में भी मुंडन मुहूर्त नहीं है। बच्चे की अपनी जन्म-कुंडली से तारा बल और चंद्र बल मिलाने के लिए मुंडन मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

नामकरण संस्कार कब करें — 11वें और 12वें दिन का नियम

पारंपरिक नियम है कि नामकरण संस्कार बच्चे के जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाए। अगर यह दिन किसी वर्जित तिथि, नक्षत्र या ग्रहण काल पर पड़ जाए, तो परिवार अगली उपलब्ध शुभ तारीख — आमतौर पर 16वें, 21वें दिन या फिर पहले महीने के भीतर — चुन सकते हैं। ज्यादातर पंडित 12वें दिन को सबसे व्यावहारिक विकल्प मानते हैं क्योंकि यह सूतक काल (जन्म के बाद अशुद्धि काल) समाप्त होने के तुरंत बाद आता है।

नामकरण के लिए शुभ नक्षत्र

नामकरण के लिए पुष्य, रोहिणी, हस्त, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, श्रवण और मृगशिरा नक्षत्र सबसे शुभ माने जाते हैं। इनमें से हर नक्षत्र प्रसन्नता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। कई परिवार बच्चे के जन्म-नक्षत्र और नामकरण-नक्षत्र दोनों को ध्यान में रखते हुए दिन तय करते हैं, ताकि दोनों में तालमेल बना रहे।

नामकरण में किन तिथियों और दिनों से बचें

अमावस्या, चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी तिथियां, साथ ही ग्रहण काल और संक्रांति के दिन नामकरण के लिए वर्जित माने जाते हैं। 2026 में जून और जुलाई महीनों में अधिक मास (एक अतिरिक्त चंद्र मास) पड़ने के कारण पंचांग में इन दो महीनों के लिए कोई शुभ नामकरण मुहूर्त उपलब्ध नहीं है — यह गणना में चूक नहीं, बल्कि पंचांग की स्वाभाविक व्यवस्था है।

राशि व नक्षत्र अनुसार नाम का पहला अक्षर

शास्त्रीय परंपरा में बच्चे के जन्म-समय की चंद्र राशि और नक्षत्र-चरण के आधार पर नाम का पहला अक्षर तय किया जाता है — इसे राशि-नक्षत्र नामकरण पद्धति कहते हैं। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, और हर चरण से जुड़ा एक विशेष अक्षर होता है। पूरी नक्षत्र-अनुसार अक्षर तालिका और विस्तृत विधि हमारे समर्पित नक्षत्र अनुसार शुभ नाम अक्षर पेज पर दी गई है।

नामकरण मुहूर्त 2026 माह-वार उदाहरण

जनवरी 2026 में 1-2 और 4-5 जनवरी को, तथा अगस्त में 2 और 5 अगस्त को शुभ नामकरण मुहूर्त पंचांग में दर्ज हैं। हर महीने की पूरी सूची जन्म-तिथि के अनुसार बदलती है क्योंकि 11वें-12वें दिन का नियम हर बच्चे के लिए अलग तारीख बनाता है — इसलिए सामान्य सूची से ज्यादा भरोसेमंद तरीका है अपने बच्चे की जन्म-तारीख के आधार पर व्यक्तिगत मुहूर्त जांच करवाना।

मुंडन बनाम नामकरण मुहूर्त में अंतर

नामकरण जन्म के 11-12 दिन के भीतर, एक निश्चित समय-सीमा में करना होता है, जबकि मुंडन के लिए पहले या तीसरे वर्ष तक की व्यापक खिड़की उपलब्ध रहती है। इसी वजह से नामकरण का मुहूर्त चुनने की स्वतंत्रता सीमित होती है — अक्सर उपलब्ध कुछ ही तारीखों में से चुनना पड़ता है — जबकि मुंडन के लिए पूरे साल में फैली कई तारीखों में से सुविधानुसार चुनाव किया जा सकता है।

कुंडली मिलान पहले, मुहूर्त बाद

सबसे अच्छा मुहूर्त भी उस रिश्ते को नहीं बचा सकता जिसकी कुंडलियाँ मेल न खाती हों, इसलिए सही क्रम है — पहले कुंडली मिलान, फिर तारीख़। अष्टकूट के 36 गुणों का अर्थ 36 गुण मिलान समझिए में है; जन्म समय न पता हो तो नाम से कुंडली मिलान एक शुरुआती रास्ता है। प्रेम विवाह में मिलान कैसे देखें, यह लव मैरिज कुंडली मिलान में समझाया गया है। मिलान करने के लिए कुंडली मिलान टूल इस्तेमाल कीजिए।

मांगलिक हों तो विवाह मुहूर्त कैसे चुनें

मांगलिक दोष होने पर मुहूर्त चुनते समय मंगल की स्थिति और लग्न शुद्धि पर ख़ास ध्यान दिया जाता है, पर इसका मतलब यह नहीं कि शादी रुकेगी। पहले मांगलिक दोष कैलकुलेटर से पुष्टि कीजिए, फिर मांगलिकों के लिए अलग बनी मांगलिक विवाह मुहूर्त 2026 सूची देखिए। मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी पर पूरा सच मांगलिक और नॉन-मांगलिक विवाह में है, और घबराहट हो तो मैं मांगलिक हूँ, क्या करूँ से शुरुआत कीजिए।

जन्म तिथि से अपना व्यक्तिगत विवाह मुहूर्त

इस पेज की तारीख़ें सबके लिए सामान्य शुभ दिन हैं; व्यक्तिगत मुहूर्त में वर और कन्या दोनों की चंद्र राशि, तारा बल और चंद्र बल भी जोड़े जाते हैं। इसलिए एक ही शुभ तारीख़ किसी एक जोड़े के लिए बेहतर और दूसरे के लिए कमज़ोर हो सकती है। जन्म तिथि से मुहूर्त निकालने की विधि जन्म तिथि से विवाह मुहूर्त में है; अपना व्यक्तिगत मुहूर्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से निकालिए, और पूरी पद्धति शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड में समझिए।

सगाई और विवाह पंजीकरण के मुहूर्त

विवाह से पहले सगाई और बाद में विवाह पंजीकरण — दोनों के लिए भी शुभ दिन देखा जाता है, पर इनके नियम विवाह से थोड़े सरल हैं। सगाई के शुभ नक्षत्र और दिन सगाई का शुभ मुहूर्त में हैं, और कोर्ट मैरिज या पंजीकरण की तारीख़ चुनने की विधि विवाह पंजीकरण का शुभ मुहूर्त में। कई परिवार विवाह का मुहूर्त दूर होने पर पहले सगाई कर लेते हैं; उसकी तारीख़ भी शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से निकाली जा सकती है।

शादी में देरी हो तो मुहूर्त से पहले कारण देखें

अगर विवाह की बात बार-बार अटक रही है, तो समस्या तारीख़ में नहीं, कुंडली के योग में हो सकती है। कुंडली में विवाह के योग कैसे देखे जाते हैं, यह कुंडली में विवाह योग में है, और शादी कब होगी इसका अंदाज़ा शादी कब होगी कैलकुलेटर देता है। पितरों से जुड़ी रुकावट के लिए पितृ दोष और विवाह में देरी, और राहु-केतु से जुड़ी रुकावट के लिए काल सर्प दोष और विवाह पढ़िए।

मुंडन और नामकरण मुहूर्त के विस्तृत पन्ने

इस पेज पर मुंडन और नामकरण की मुख्य तारीख़ें हैं, पर हर संस्कार का अपना समर्पित पेज भी है जहाँ नियम विस्तार से दिए गए हैं। नामकरण के लिए नामकरण का शुभ मुहूर्त और पहले भोजन के संस्कार के लिए अन्नप्राशन का शुभ मुहूर्त देखिए। बच्चे के जन्म नक्षत्र से नाम का पहला अक्षर जानने के लिए नक्षत्र से बेबी नाम कैलकुलेटर इस्तेमाल कीजिए।

विवाह के लिए लग्न शुद्धि — पंडित से क्या पूछें

तारीख़ शुभ हो, फिर भी फेरों का सही समय लग्न से तय होता है। पंडित से तीन बातें ज़रूर पूछिए: उस समय कौन सा लग्न उदित है, सातवाँ भाव शुद्ध है या नहीं, और चंद्रमा वर-कन्या की राशि से अशुभ भाव में तो नहीं। 2027 के शुभ लग्नों की जानकारी 2027 शुभ राशि और लग्न में है। मांगलिक दोष को लेकर फैलाए गए डर से बचने के लिए मांगलिक मिथक पढ़िए, और लग्न तय होने से पहले कुंडली मिलान पूरा कर लीजिए।

विवाह मुहूर्त बनाम विवाह दशा टाइमिंग में फर्क

यह पेज पंचांग-आधारित कैलेंडर तारीखें बताता है — यानी साल की कौन सी तारीखें सामान्य रूप से शुभ हैं। इससे अलग एक सवाल है: किसी व्यक्ति विशेष की कुंडली में विवाह किस उम्र या किस दशा-अवधि में संभावित है। यह दशा-आधारित व्यक्तिगत विश्लेषण कुंडली में विवाह योग पेज पर विस्तार से है, और शादी का संभावित समय शादी कब होगी कैलकुलेटर से भी देखा जा सकता है।

गृह प्रवेश मुहूर्त 2027 और वाहन खरीद मुहूर्त कहां देखें

यह पेज मुख्य रूप से विवाह, मुंडन और नामकरण पर केंद्रित है, पर गृह प्रवेश की तारीख़ें भी यहाँ संक्षेप में हैं। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए घर का गृह प्रवेश उत्तरायण में माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ मास में, मृदु और ध्रुव नक्षत्रों में होता है।[5] इस नियम से गृह प्रवेश मुहूर्त 2027 की मुख्य तारीख़ें हैं: 10-11 फरवरी, 22, 24-25 और 27 फरवरी, 3-4 मार्च, 10-11 मार्च, 7-8 मई, 15, 17, 20-21, 24 और 31 मई, 4-5 जून, 11, 14, 16, 21 और 26 जून, तथा 1-2 जुलाई। पुराने या मरम्मत किए घर के लिए कार्तिक और मार्गशीर्ष में भी प्रवेश की छूट है, इसलिए नवंबर-दिसंबर 2026 में भी तारीख़ें मिलती हैं। पूरी सूची नक्षत्र और समय सहित गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त पर है, और वाहन खरीद के लिए वाहन खरीद का शुभ मुहूर्त देखें।

ज्योतिषी से व्यक्तिगत मुहूर्त जांच क्यों जरूरी

पंचांग की सामान्य तारीखें पूरे देश के लिए सामान्य शुभता बताती हैं, लेकिन वर-वधू या बच्चे की व्यक्तिगत जन्म कुंडली से टकराव, गोचर ग्रहों की स्थिति, और परिवार की व्यक्तिगत परिस्थितियां — ये सामान्य पंचांग में शामिल नहीं होतीं। इसीलिए किसी भी बड़ी तारीख को अंतिम रूप देने से पहले जन्म कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत पुष्टि करवाना सबसे सुरक्षित तरीका है।

त्रिकाल वाणी की ओर से ईमानदार बात

हम यह दावा नहीं करेंगे कि किसी एक पंचांग-तारीख पर विवाह, मुंडन या नामकरण कर लेने मात्र से जीवन में समस्याएं खत्म हो जाएंगी — यह ईमानदार दावा नहीं होगा। मुहूर्त एक सहायक परंपरा है, गारंटी नहीं। जो हम ईमानदारी से कह सकते हैं: सही पंचांग-गणना और अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सत्यापन, दोनों मिलकर सबसे भरोसेमंद नींव बनाते हैं — सिर्फ इंटरनेट पर मिली तारीख उठाकर बुक कर लेने से बेहतर।

Apna Personalized Analysis Lein

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शब्दावली · Glossary

मुहूर्त
किसी शुभ कार्य के लिए पंचांग से चुना गया अनुकूल समय।
खरमास
सूर्य के धनु या मीन राशि में रहने का लगभग एक-एक महीना, जिसमें विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
होलाष्टक
होली से पहले के आठ दिन, जो विवाह के लिए वर्जित माने जाते हैं।
चातुर्मास
देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक के लगभग चार महीने, जिनमें विवाह नहीं होते।
लग्न शुद्धि
फेरों के समय उदित लग्न और उसके भावों की शुद्धता की जाँच।
पंचांग
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों वाला हिंदू कैलेंडर।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑मुहूर्त चिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मिथुनकुंभमृगालिवृषाजगे मिथुनगेऽपि रवौ त्रिलवे शुचेः । अलिमृगाजगते करपीडनं भवति कार्तिकपौषमधुष्वपि ॥ १३ ॥
    — मुहूर्त चिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 13

    सूर्य के मिथुन, कुंभ, मकर, वृश्चिक, वृषभ या मेष राशि में रहते विवाह शुभ है; सूर्य वृश्चिक, मकर या मेष में हो तो कार्तिक, पौष और चैत्र में भी विवाह हो सकता है।

    Marriage is auspicious when the Sun is in Mithuna, Kumbha, Makara, Vrishchika, Vrishabha or Mesha; with the Sun in Vrishchika, Makara or Mesha it is allowed even in Kartika, Pausha and Chaitra.

  2. [2]↑मुहूर्त चिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    विपादेरावतीतीरे शल्याश्च त्रिपुष्करे। विवाहादिदिने नेष्टं होलिकाप्राग्दिनाष्टकम्॥
    — मुहूर्त चिन्तामणि, अध्याय 1 — शुभाशुभप्रकरणम् · श्लोक 40

    होलिका से पहले के आठ दिन (होलाष्टक) विवाह आदि कार्यों के लिए इष्ट नहीं हैं।

    The eight days before Holika are not desirable for marriage and similar ceremonies.

  3. [3]↑मुहूर्त चिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    निर्वध:. शशिकरसूलमैत्रपित्र्य- बराह्यान्त्योत्तरपवनेः शुभो विवाहः । रिक्तामारहिततिथौ शुभेऽह्नि वेश्व- ्रान्त्याङिःघ्रः श्रुतितिथिभागतोऽभिजित्स्यात्‌
    — मुहूर्त चिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 55

    वेध-रहित मृगशिरा, हस्त, मूल, अनुराधा, मघा, रोहिणी, रेवती, तीनों उत्तरा और स्वाति नक्षत्र में, रिक्ता और अमावस्या को छोड़कर शुभ वार में विवाह शुभ है।

    Marriage is auspicious in Mrigashira, Hasta, Mula, Anuradha, Magha, Rohini, Revati, the three Uttaras and Swati, free of vedha, on a tithi that is not rikta or amavasya, on a benefic weekday.

  4. [4]↑मुहूर्त चिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    गीर्वाणास्बुप्रतिष्ठापरिणयदहना धानगेहप्रवेशा- इचौलं राजाभिषेको ब्रतमपि शुभदं नेव याम्यायने स्यात्‌ । नो वा बाल्यास्तवाध्ये सुरगुरसितयो्ने ब केतुदये स्या- त्पश्तं बाद्धं च केचिज्जहति तमपरे यावदीक्षां तदुग्रे
    — मुहूर्त चिन्तामणि, अध्याय 5 — संस्कारप्रकरणम् · श्लोक 26

    देव-प्रतिष्ठा, विवाह, गृह प्रवेश, चौल (मुंडन), राज्याभिषेक और व्रत दक्षिणायन में शुभ नहीं, और न ही गुरु या शुक्र के बाल्य या अस्त काल में।

    Installation of deities and wells, marriage, griha pravesh, chaula (mundan), royal consecration and vrata are not auspicious in Dakshinayana, nor while Jupiter or Venus is in its infant or combust state.

  5. [5]↑मुहूर्त चिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    सौम्यायने ज्येष्ठतपोऽन्त्यमाधवे यात्रानिवृत्तौ नृपतेर्नवे गृहे । स्यात्प्रवेशनं द्वारभमृदुध्रुवोडुभिर्जन्मर्क्षलग्नोपचयोदये स्थिरे ॥ १ ॥
    — मुहूर्त चिन्तामणि, अध्याय 13 — गृहप्रवेशप्रकरणम् · श्लोक 1

    नए घर में प्रवेश उत्तरायण में ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन और वैशाख मास में, मृदु और ध्रुव नक्षत्रों में, स्थिर लग्न में किया जाता है।

    Entry into a new house is done in Uttarayana, in the months of Jyeshtha, Magha, Phalguna and Vaishakha, in mridu and dhruva nakshatras, with a fixed lagna.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

2026 में विवाह के लिए सबसे शुभ महीने कौन से हैं?

फरवरी और मई 2026 में सबसे ज्यादा शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं — फरवरी में 2-3, 5-6, 8, 12-13, 19-20, 21, 25-26 और मई में 3, 13-14, 17-18, 22, 24-28 की तारीखें शामिल हैं।

अगस्त से अक्टूबर 2026 में विवाह मुहूर्त क्यों नहीं है?

इस दौरान चातुर्मास चलता है — देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक विष्णु जी के शयन में जाने की मान्यता के कारण सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

मुंडन संस्कार के लिए कौन सा नक्षत्र सबसे अच्छा है?

अश्विनी, पुष्य, हस्त, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती नक्षत्र मुंडन के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं, जबकि कृत्तिका, आर्द्रा और मघा नक्षत्र वर्जित हैं।

नामकरण संस्कार किस दिन करना चाहिए?

पारंपरिक नियम जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण करने का है। अगर यह दिन वर्जित तिथि या नक्षत्र पर पड़े, तो अगली उपलब्ध शुभ तारीख चुनी जा सकती है।

जून-जुलाई 2026 में नामकरण मुहूर्त क्यों उपलब्ध नहीं हैं?

2026 में जून-जुलाई के आसपास अधिक मास (अतिरिक्त चंद्र मास) पड़ने के कारण पंचांग में इन महीनों के लिए शुभ नामकरण तिथि दर्ज नहीं है — यह सामान्य पंचांग व्यवस्था है, कोई त्रुटि नहीं।

विवाह पंचक दोष कितना गंभीर माना जाता है?

विवाह के लिए पंचक दोष उतना गंभीर नहीं माना जाता जितना यात्रा या निर्माण कार्य के लिए, फिर भी सावधानीवश कई परिवार इस समय विवाह टालना पसंद करते हैं।

क्या हर शहर के लिए मुहूर्त का समय एक जैसा होता है?

नहीं। पंचांग की गणना स्थानीय सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए दिल्ली, मुंबई या पटना में एक ही तारीख का सटीक शुभ समय 15-40 मिनट तक अलग हो सकता है।

गुरु अस्त और शुक्र अस्त काल में विवाह क्यों नहीं होता?

शुक्र विवाह-सुख का और गुरु ज्ञान-मार्गदर्शन का कारक ग्रह है। इनके सूर्य के निकट आकर अस्त होने के दौरान विवाह मुहूर्त पारंपरिक रूप से वर्जित माने जाते हैं।

नाम का पहला अक्षर कैसे तय होता है?

बच्चे के जन्म-समय की चंद्र राशि और नक्षत्र-चरण के आधार पर नाम का पहला अक्षर तय होता है — पूरी अक्षर-तालिका हमारे नक्षत्र अनुसार नाम अक्षर पेज पर उपलब्ध है।

क्या कुंडली मिलान और विवाह मुहूर्त एक ही चीज़ है?

नहीं। कुंडली मिलान वर-वधू की आपसी अनुकूलता जांचता है, जबकि मुहूर्त विवाह के दिन-समय की शुद्धता जांचता है। सबसे मजबूत तरीका दोनों को साथ मिलाकर देखना है।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayen

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