Family Astrology

पारिवारिक ज्योतिष — भाई-बहन, माता-पिता, संतान की कुंडली

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

पारिवारिक ज्योतिष तृतीय (भाई-बहन), चतुर्थ-नवम (माता-पिता) और पंचम (संतान) भाव को साथ पढ़ता है। चंद्र, सूर्य, शुक्र और गुरु इन भावों में रिश्तों की प्रकृति तय करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को चंद्रमा से जोड़ा जाता है — यह निदान नहीं, परंपरागत पठन है। Trikaal Vaani पर ₹51 में पूर्ण Kundali Milan।

Deep Dive Analysis

पारिवारिक ज्योतिष क्या है

पारिवारिक ज्योतिष कुंडली के चार मुख्य भावों — तृतीय (भाई-बहन), चतुर्थ और नवम (माता-पिता), और पंचम (संतान) — को एक साथ पढ़कर परिवार के रिश्तों, भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक कर्म-पैटर्न को समझने की पद्धति है। चंद्रमा, सूर्य, शुक्र और गुरु जैसे ग्रह इन भावों में बैठकर बताते हैं कि परिवार के साथ आपका रिश्ता सहज रहेगा या संघर्षपूर्ण, और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है।

यह पेज Trikaal Vaani के पारिवारिक ज्योतिष हब की पिलर है — नीचे दिए गए चार विषयों में से हर एक का अपना विस्तृत गाइड है, जिसमें भाव-वार, ग्रह-वार और दशा-वार विश्लेषण मिलता है। एक व्यापक जीवन-क्षेत्र दृष्टिकोण के लिए हमारा Family Astrology लाइफ-डोमेन गाइड भी देखें।

भाई-बहन का ज्योतिष — तृतीय और एकादश भाव

तृतीय भाव भाई-बहनों का मुख्य भाव है, और एकादश भाव बड़े भाई-बहनों तथा उनके साथ भविष्य के रिश्ते को दिखाता है। शुक्र या सूर्य का तृतीय भाव में बलवान होना भाई-बहनों की संख्या और उनसे मिलने वाले साथ का संकेत देता है[1]। गिनती की पूरी विधि, मंगल-बुध-शनि-राहु-केतु की भूमिका, जुड़वाँ और सौतेले भाई-बहनों के योग, और दशा-समय के साथ पूरा विश्लेषण पढ़ें: भाई-बहन कुंडली से — पूरी गाइड।

माता-पिता का रिश्ता — चतुर्थ और नवम भाव

चतुर्थ भाव माता, घर और भावनात्मक नींव का भाव है; नवम भाव पिता, धर्म और पैतृक भाग्य का। चंद्रमा का चतुर्थ भाव में पूर्ण और बलवान होना माता की दीर्घायु का संकेत देता है[2], और सूर्य का नवम भाव में बलवान होना पिता की दीर्घायु तथा धन का[3]। बुध-गुरु की भूमिका, पितृ दोष, D12 चार्ट और दशा-समय सहित पूरा विश्लेषण पढ़ें: माता-पिता का रिश्ता कुंडली से — पूरी गाइड।

संतान और बच्चों की संख्या — पंचम भाव

पंचम भाव संतान का भाव है, और गुरु (बृहस्पति) पुत्रकारक — संतान-सुख का कारक ग्रह। पंचमेश केंद्र या त्रिकोण में हो तो पूर्ण संतान-सुख कहा जाता है[4], और D7 (सप्तांश) चार्ट क्रमिक गिनती विधि से बच्चों की संख्या और लिंग की पुष्टि करता है। पूरी BPHS विधि, देरी के योग, और शनि-राहु की भूमिका सहित पूरा गाइड पढ़ें: कितने बच्चे होंगे कुंडली से — पूरी गाइड।

मानसिक स्वास्थ्य — चंद्रमा और भावनात्मक कुंडली

चंद्रमा मन और मानस का कारक है, इसलिए पारिवारिक ज्योतिष में मानसिक स्वास्थ्य को चतुर्थ भाव (घर, भावनात्मक सहारा) के साथ जोड़कर पढ़ा जाता है। केमद्रुम योग, चंद्र-मंगल संयोजन, ग्रहण योग और शनि का प्रभाव भावनात्मक पैटर्न को आकार देते हैं — लेकिन यह निदान नहीं, एक परंपरागत पठन है। पूरा विश्लेषण, सुरक्षा-निर्देशों सहित, पढ़ें: कुंडली और मानसिक स्वास्थ्य — पूरी जानकारी।

परिवार को एक इकाई के रूप में क्यों पढ़ा जाता है

भाई-बहन, माता-पिता और संतान — तीनों रिश्ते अलग-अलग भावों से जुड़े होते हुए भी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, चतुर्थ भाव (माता, भावनात्मक नींव) कमजोर होने पर बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और आगे चलकर उसके अपने पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। इसी तरह पंचमेश और नवमेश के बीच संबंध परिवार में विस्तार (संतान) और स्थिरता (पिता का भाग्य) के बीच का पैटर्न दिखाता है। इसीलिए Trikaal Vaani पारिवारिक कुंडली को चार अलग पेजों में बाँटते हुए भी उन्हें एक हब में जोड़कर रखता है — ताकि कोई भी एक भाव को पूरे परिवार के संदर्भ से अलग करके न पढ़े।

पारिवारिक दोष — एक संक्षिप्त परिचय

कुछ पारिवारिक पैटर्न शास्त्रों में विशेष दोषों के रूप में दर्ज हैं। पितृ दोष — जब सूर्य, राहु या नवम भाव दूषित हो — पैतृक पक्ष से जुड़ी रुकावटों से जोड़ा जाता है; पूरा गाइड यहाँ पढ़ें: Pitra Dosha — पूरी गाइड और उपाय। मंगल दोष का असर भाई-बहनों के साथ तनाव पर भी देखा जाता है — इसकी पूरी जानकारी Mangal Dosh गाइड में है। ध्यान रहे: दोष होने का मतलब निश्चित नुकसान नहीं — यह एक प्रवृत्ति है, जिसे सही उपाय और समझ से संतुलित किया जा सकता है।

आम गलतफहमियां

पहली गलतफहमी — "बुरा ग्रह हमेशा बुरा रिश्ता देता है।" वास्तव में शुभ दृष्टि या मजबूत घर-स्वामी अक्सर पाप ग्रह के असर को संतुलित कर देते हैं, जैसा ऊपर सूर्य के तृतीय और नवम भाव वाले उदाहरणों में देखा[1][3]। दूसरी — "एक भाव पूरे रिश्ते की कहानी बता देता है।" असल में भाव, उसका स्वामी, कारक ग्रह (मंगल-बुध-गुरु-शनि), दृष्टि और दशा — चारों को साथ पढ़ना पड़ता है। तीसरी — "संतान न होना हमेशा दोष है।" शास्त्र अपुत्रता को एक प्रवृत्ति के रूप में दर्ज करते हैं, अभिशाप के रूप में नहीं[4], और आधुनिक चिकित्सा तथा व्यक्तिगत विकल्प इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।

Trikaal Vaani का पठन सामान्य रिपोर्ट से गहरा क्यों है

ज़्यादातर ऑनलाइन कुंडली रिपोर्ट एक ही सामान्य टेम्पलेट सबको भेज देती हैं। Trikaal Vaani पर Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect, हर कुंडली को भृगुसूत्रम्, बृहत् पराशर होरा शास्त्र (BPHS) और चमत्कारचिन्तामणि जैसे शास्त्रीय ग्रंथों के विरुद्ध व्यक्तिगत रूप से जाँचते हैं — जिसमें ग्रह की स्थिति, दृष्टि और दशा तीनों साथ देखे जाते हैं, न कि केवल राशि। Swiss Ephemeris की गणितीय सटीकता के साथ classical BPHS तकनीक जोड़कर, हर पठन डर फैलाने की बजाय व्यावहारिक उपाय देने पर केंद्रित रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, सीधे उत्तर

पारिवारिक ज्योतिष से जुड़े सबसे आम सवालों के सीधे, शास्त्र-आधारित उत्तर नीचे दिए गए हैं। विस्तृत विश्लेषण के लिए ऊपर दिए गए चार विषय-पेज देखें।

गुरु, चंद्र, शुक्र — तीन पारिवारिक कारक ग्रह

वैदिक ज्योतिष में हर पारिवारिक रिश्ते का एक स्वाभाविक कारक ग्रह होता है — यानी वह ग्रह जो उस रिश्ते को सबसे सीधे दर्शाता है। चंद्रमा माता का कारक है, सूर्य पिता का, गुरु (बृहस्पति) संतान और पति का, मंगल भाई-बहन का, और शुक्र दांपत्य सुख का। कुंडली पढ़ते समय सिर्फ भाव (तृतीय, चतुर्थ, पंचम, नवम) ही नहीं, इन कारक ग्रहों की स्थिति भी साथ देखी जाती है — क्योंकि भाव कमजोर हो पर कारक ग्रह मजबूत हो, तो परिणाम बदल सकता है। यही वजह है कि अनुभवी ज्योतिषी कभी अकेले भाव के आधार पर निर्णय नहीं देते।

तृतीय, चतुर्थ, पंचम, नवम भाव — एक साथ कैसे पढ़ें

पारिवारिक ज्योतिष की सबसे बड़ी भूल यह है कि लोग एक भाव को अलग करके पढ़ते हैं। सही तरीका यह है कि पहले लग्न और चंद्र दोनों से इन चार भावों की स्थिति देखी जाए, फिर हर भाव के स्वामी की स्थिति जांची जाए, फिर भाव पर पड़ने वाली दृष्टियां (शुभ या पाप) नोट की जाएं, और अंत में इन चारों भावों के बीच आपसी संबंध (जैसे भाव-स्वामियों की युति या दृष्टि) देखा जाए। उदाहरण के लिए, अगर पंचमेश (संतान) और नवमेश (भाग्य, पिता) के बीच शुभ संबंध हो, तो यह परिवार में समग्र सामंजस्य का संकेत देता है — अकेले किसी एक भाव से यह नहीं पता चलता।

दशा और पारिवारिक घटनाएं — कब क्या होता है

कुंडली में कोई योग होना एक बात है, और वह योग वास्तव में कब फलित होगा यह दूसरी बात है। पारिवारिक घटनाओं का समय — भाई-बहन का जन्म, विवाह से पहले माता-पिता से दूरी, संतान का जन्म — विंशोत्तरी दशा और अंतर्दशा से तय होता है। जिस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, वह ग्रह जिस भाव का स्वामी है या जिस भाव में बैठा है, उस भाव से जुड़ी घटनाएं उसी समय सक्रिय होती हैं। उदाहरण के लिए पंचमेश की दशा या अंतर्दशा में संतान से जुड़ी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। इसीलिए अकेले जन्म कुंडली देखकर समय नहीं बताया जा सकता — दशा का विश्लेषण ज़रूरी है।

जन्म कुंडली बनाम गोचर — पारिवारिक भविष्यवाणी में अंतर

जन्म कुंडली (नेटल चार्ट) स्थिर होती है — यह जन्म के समय की ग्रह-स्थिति को हमेशा के लिए दर्ज करती है, और यह बताती है कि किसी व्यक्ति की पारिवारिक प्रवृत्ति और क्षमता क्या है। गोचर (transit) बदलता रहता है — यह बताता है कि अभी आकाश में ग्रह कहां हैं, और यह जन्म कुंडली के भावों को कब सक्रिय करते हैं। पारिवारिक भविष्यवाणी के लिए दोनों को साथ पढ़ना ज़रूरी है: जन्म कुंडली बताती है क्या संभव है, गोचर बताता है कब। उदाहरण के लिए गुरु का गोचर पंचम भाव के ऊपर से गुज़रना अक्सर संतान से जुड़े शुभ समय से जोड़ा जाता है।

D12 द्वादशांश — माता-पिता का विशेष चार्ट

मुख्य जन्म कुंडली (D1) के अलावा, वैदिक ज्योतिष में विभाग चार्ट (varga charts) का प्रयोग विशेष विषयों की गहराई से पुष्टि के लिए होता है। माता-पिता के लिए यह चार्ट D12 (द्वादशांश) है — हर राशि को बारह बराबर हिस्सों में बांटकर बनाया गया एक सूक्ष्म चार्ट। जब D1 में चतुर्थ या नवम भाव कमजोर दिखे, तो अनुभवी ज्योतिषी D12 चार्ट में उसी भाव और उसके स्वामी की स्थिति दोबारा जांचते हैं — कई बार D12 में मिलने वाली मजबूती D1 के कठिन संकेत को संतुलित कर देती है। यह वैकल्पिक नहीं, पुष्टिकरण (confirmation) की एक शास्त्रीय विधि है।

सौतेले परिवार और गोद लिए बच्चे — कुंडली क्या दिखाती है

आधुनिक पारिवारिक ढांचे — सौतेले माता-पिता, गोद लिए बच्चे, मिश्रित परिवार — शास्त्रीय ज्योतिष के मूल ढांचे में सीधे नामित नहीं हैं, लेकिन भाव-सिद्धांत फिर भी लागू होता है। चतुर्थ भाव भावनात्मक नींव और घर का प्रतिनिधित्व करता है चाहे वह जैविक हो या न हो; पंचम भाव संतान-सुख का प्रतिनिधित्व करता है चाहे संतान जन्म से हो या गोद ली गई हो। इसलिए कुंडली इन रिश्तों में मिलने वाले भावनात्मक अनुभव और लगाव के पैटर्न को उतनी ही स्पष्टता से दिखा सकती है — बस यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि शास्त्रीय श्लोक सीधे इन आधुनिक स्थितियों का उल्लेख नहीं करते, इसलिए यह पठन सिद्धांत-आधारित व्याख्या है, शब्दशः शास्त्रीय कथन नहीं। संबंधित पारिवारिक दोषों की जानकारी Pitra Dosha गाइड में है।

वैदिक बनाम पाश्चात्य ज्योतिष — पारिवारिक भाव

पाश्चात्य ज्योतिष भी चौथे भाव को घर और जड़ों से, और पांचवें भाव को संतान से जोड़ता है — इस हद तक दोनों परंपराएं मिलती हैं। लेकिन दो बड़े अंतर हैं: पहला, वैदिक ज्योतिष सायन (sidereal) राशिचक्र प्रयोग करता है जबकि पाश्चात्य ज्योतिष निरयन (tropical) — इससे ग्रहों की राशि-स्थिति करीब 24 डिग्री अलग हो सकती है। दूसरा, वैदिक पद्धति दशा प्रणाली से समय बताती है, जबकि पाश्चात्य ज्योतिष मुख्यतः गोचर और प्रोग्रेशन पर निर्भर करती है। इसलिए एक ही व्यक्ति की दोनों पद्धतियों से बनी कुंडली अलग समय-सीमा दिखा सकती हैं — यह सामान्य है, कोई गड़बड़ी नहीं।

एक उदाहरण — मजबूत भाई-बहन भाव, कमजोर माता-पिता भाव

मान लीजिए किसी कुंडली में तृतीय भाव में शुक्र बलवान बैठा है, जिससे भाई-बहनों से गहरा जुड़ाव और सहयोग बनता है। लेकिन उसी कुंडली में चतुर्थ भाव पर शनि की दृष्टि है, जिससे माता के साथ भावनात्मक दूरी या घर से जल्दी अलग होने की प्रवृत्ति बनती है। ऐसे मामले में जातक को भाई-बहनों का मजबूत साथ मिलता है, पर माता-पिता के घर से अपेक्षाकृत जल्दी और भावनात्मक रूप से अलग होना पड़ सकता है। यह दिखाता है कि परिवार के भीतर अलग-अलग रिश्ते अलग-अलग तीव्रता के हो सकते हैं — एक ही कुंडली में एक रिश्ता मजबूत और दूसरा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

दूसरा उदाहरण — संतुलित पारिवारिक कुंडली

इसके विपरीत, कुछ कुंडलियों में चारों भाव (तृतीय, चतुर्थ, पंचम, नवम) अपेक्षाकृत संतुलित और शुभ ग्रहों से दृष्ट होते हैं — ऐसे में भाई-बहन, माता-पिता और संतान तीनों रिश्तों में सामान्य से बेहतर सामंजस्य देखा जाता है। ऐसी कुंडली में भी हर रिश्ते की अपनी बारीकियां होंगी — बस चुनौतियां तीव्र नहीं, प्रबंधनीय स्तर की होंगी। ध्यान रहे, किसी भी कुंडली में "सब कुछ परफेक्ट" जैसी कोई स्थिति नहीं होती — संतुलित कुंडली का मतलब है अपेक्षाकृत कम तीव्र चुनौतियां, चुनौतियों का पूर्ण अभाव नहीं।

राशि-वार त्वरित नोट्स — तृतीय भाव की कगार पर राशि

तृतीय भाव की राशि भाई-बहनों के स्वभाव पर एक हल्का रंग चढ़ाती है। मेष या वृश्चिक (मंगल-शासित) तृतीय भाव में हों तो भाई-बहन प्रतिस्पर्धी या मुखर स्वभाव के हो सकते हैं। मिथुन या कन्या (बुध-शासित) हों तो संवाद और बौद्धिक जुड़ाव प्रमुख रहता है। कर्क (चंद्र-शासित) हो तो भावनात्मक निकटता अधिक रहती है। यह सामान्य संकेत हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं — पूरी तस्वीर के लिए भाव-स्वामी और दृष्टियां भी देखनी होंगी।

राशि-वार त्वरित नोट्स — चतुर्थ भाव की कगार पर राशि

चतुर्थ भाव की राशि घर के माहौल और माता के स्वभाव पर संकेत देती है। कर्क या वृषभ (चंद्र/शुक्र-शासित) चतुर्थ भाव में हों तो घर में भावनात्मक गर्माहट और आराम की प्रवृत्ति रहती है। मकर या कुंभ (शनि-शासित) हों तो घर में अनुशासन और संरचना प्रमुख रह सकती है, भावनात्मक अभिव्यक्ति थोड़ी संयमित। यह भी सामान्य प्रवृत्ति संकेत हैं — निश्चित नियम नहीं।

पारिवारिक ज्योतिष में क्या नहीं बताया जा सकता

ईमानदारी से कहें तो कुंडली कुछ चीज़ें नहीं बता सकती: यह किसी विशेष रिश्तेदार का नाम, सटीक स्वभाव का हर पहलू, या भविष्य की कोई निश्चित घटना गारंटी के साथ नहीं बता सकती। यह किसी रिश्ते के टूटने या बनने का निश्चित कारण अकेले नहीं बता सकती — जीवन में व्यक्तिगत चुनाव, परवरिश, और परिस्थितियां भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती हैं। ज्योतिष एक प्रवृत्ति और संभावना का नक्शा देता है, निश्चित पटकथा नहीं।

कब पेशेवर सलाह लें

अगर परिवार में लगातार गंभीर तनाव, भावनात्मक दूरी, या रिश्तों में टूटन महसूस हो रही है, तो ज्योतिषीय पठन को एक सहायक दृष्टिकोण की तरह लें, अकेला समाधान नहीं। पारिवारिक परामर्शदाता (family counsellor) या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करना — खासकर जब मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण हों — कुंडली पठन का विकल्प नहीं, उसका ज़रूरी साथी है। Trikaal Vaani की कोई भी रीडिंग चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक सलाह की जगह नहीं लेती। मानसिक स्वास्थ्य और कुंडली के संबंध की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

त्रिकाल वाणी की कार्यप्रणाली — सिर्फ कंप्यूटर जनरेटेड नहीं

Trikaal Vaani पर पारिवारिक कुंडली विश्लेषण दो परतों में होता है — पहली, Swiss Ephemeris पर आधारित गणितीय रूप से सटीक ग्रह-स्थिति; दूसरी, Rohiit Gupta द्वारा भृगुसूत्रम् और बृहत् पराशर होरा शास्त्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों के विरुद्ध व्यक्तिगत जांच। यह दोनों परतें साथ काम करती हैं — गणना अकेले भावनात्मक संदर्भ नहीं दे सकती, और शास्त्रीय ज्ञान अकेले सटीक गणना के बिना सही भाव-स्थिति नहीं बता सकता। पूर्ण व्यक्तिगत पठन के लिए Kundali Milan देखें — सिर्फ ₹51 में।

आगे क्या पढ़ें

यह पेज Trikaal Vaani के पारिवारिक ज्योतिष हब की पिलर है। एक व्यापक जीवन-क्षेत्र तस्वीर के लिए Family Astrology गाइड देखें, या नीचे किसी एक विषय पर सीधे जाएँ:

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

तृतीय भाव
कुंडली का तीसरा भाव — भाई-बहन, साहस और पराक्रम का भाव।
चतुर्थ भाव
कुंडली का चौथा भाव — माता, घर और भावनात्मक नींव का भाव।
नवम भाव
कुंडली का नौवाँ भाव — पिता, भाग्य और धर्म का भाव।
पंचम भाव
कुंडली का पाँचवाँ भाव — संतान, बुद्धि और रचनात्मकता का भाव।
पितृ दोष
सूर्य, राहु या नवम भाव के दूषित होने से बनने वाली एक परंपरागत प्रवृत्ति, जो पैतृक पक्ष से जुड़ी रुकावटों से जोड़ी जाती है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑भृगुसूत्रम्भृगुसूत्रम् · Maharishi Bhrigu
    भावाधिपे बलयुते उच्चस्वक्षेत्रे भ्रातृवृद्धिः दुःस्थाने पापयुते भ्रातृनाशः
    — भृगुसूत्रम्, अध्याय 6 · श्लोक 22 · sanskritdocuments

    तीसरे भाव का स्वामी बलवान हो और शुक्र तीसरे भाव में हो, तो भाई-बहनों की बढ़ोतरी कही गई है।

    When the lord of the 3rd house is strong and Venus occupies the 3rd house, an increase in siblings is indicated.

  2. [2]↑भृगुसूत्रम्भृगुसूत्रम् · Maharishi Bhrigu
    पूर्णचन्द्रं स्वक्षेत्रे बलवान् मातृदीर्घायुः क्षीणचन्द्रे पापयुते मातृनाशः
    — भृगुसूत्रम्, अध्याय 2 · श्लोक 22 · sanskritdocuments

    चन्द्रमा पूर्ण हो, अपनी राशि में और चतुर्थ भाव में बलवान हो, तो माता की दीर्घायु कही गई है।

    When the Moon is full, in its own sign and strong in the 4th house, long life for the mother is indicated.

  3. [3]↑भृगुसूत्रम्भृगुसूत्रम् · Maharishi Bhrigu
    — भृगुसूत्रम्, अध्याय 1 · श्लोक 84-85 · sanskritdocuments

    सूर्य उच्च या अपनी राशि में नवम भाव में हो, या शुभ ग्रह के साथ हो, तो पिता की दीर्घायु और धन-समृद्धि कही गई है।

    When the Sun is exalted or in its own sign in the 9th house, or joined with a benefic, long life and wealth for the father are indicated.

  4. [4]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    केन्द्रत्रिकोणसंस्थे वा पूर्णं पुत्रसुखं वदेत् । षष्ठाष्टमव्ययस्थे तु सुताधीशे त्वपुत्रता
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 16 — पुत्र भाव फलाध्याय · श्लोक 2 · sanskritdocuments

    पंचमेश केंद्र या त्रिकोण में हो तो पूर्ण पुत्र-सुख कहा जाता है; षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो अपुत्रता की प्रवृत्ति कही जाती है।

    If the 5th lord is in a kendra or trikona, full happiness from children is declared; if in the 6th, 8th or 12th house, a tendency toward childlessness is declared.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

इस हब के सभी पेज

यह भी देखें · See also

श्रेणी: Family Astrology · family