अनंत चतुर्दशी
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप और भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। यह तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त होती है, इसलिए इसी दिन व्रत का विधान है। पूजा का सटीक मुहूर्त आप ऊपर टेबल में देख सकते हैं।
🕐 भारत के लिए अनंत चतुर्दशी का समय
| तिथि | Chaturdashi (Shukla Paksha) — 23:07 तक |
| नक्षत्र | Shatabhisha, पाद 4 — 11:22 तक |
| योग · करण | Shula · Garaja |
| पूजा मुहूर्त | 11:00-13:23(मध्याह्न) |
| अभिजित मुहूर्त | 11:48-12:35 |
| राहुकाल | 10:42-12:12 |
| यमगंड · गुलिक | 15:11-16:40 · 07:43-09:13 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:14 · 18:10 |
भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ अनंत चतुर्दशी पर क्या करें
- पूजा की थाली में कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल सजा लें।
- भगवान विष्णु और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र भगवान के सामने रखें।
- दीप जलाकर भगवान का ध्यान करें।
- भगवान को पंचामृत और फल अर्पित करें।
- अनंत सूत्र की पूजा कर उसे अपनी दाईं या बाईं कलाई पर बांध लें।
- पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांटें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Chaturdashi pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). Suryodaya-vyapini: the tithi prevailing at sunrise governs the day, which is the general rule for vrats where no special kaal applies.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में अनंत चतुर्दशी का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| दिल्ली एनसीआर | 06:14 | 11:48-12:35 | 10:42-12:12 |
| मुंबई | 06:31 | 12:05-12:53 | 10:59-12:29 |
| नोएडा | 06:14 | 11:47-12:35 | 10:42-12:11 |
| गुरुग्राम | 06:15 | 11:49-12:36 | 10:43-12:13 |
| बेंगलुरु | 06:12 | 11:47-12:34 | 10:41-12:11 |
| हैदराबाद | 06:08 | 11:43-12:30 | 10:37-12:07 |
| पुणे | 06:27 | 12:01-12:49 | 10:55-12:25 |
| कोलकाता | 05:29 | 11:03-11:51 | 09:57-11:27 |
| चेन्नई | 06:01 | 11:36-12:23 | 10:30-12:00 |
| अहमदाबाद | 06:32 | 12:06-12:54 | 11:00-12:30 |
अनंत चतुर्दशी क्यों मनाया जाता है
🪔 अनंत चतुर्दशी पूजा विधि
- स्नान और तैयारी — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान को साफ करके वहां एक लकड़ी की चौकी रखें।
- मूर्ति स्थापना — चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- कलश स्थापना — एक कलश की स्थापना करें और उसके पास अष्टदल कमल बनाएं।
- अनंत सूत्र निर्माण — सूती धागे में कुमकुम या हल्दी लगाकर चौदह गांठें लगाएं और अनंत सूत्र तैयार करें।
- सूत्र अर्पण — तैयार किए गए अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के सामने पूरे सम्मान के साथ रखें।
- विष्णु पूजा — भगवान विष्णु को रोली, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- गणेश पूजा — भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक या किसी भी मिठाई का भोग लगाएं।
- आरती और कथा — धूप और दीप जलाकर भगवान की आरती करें और अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- सूत्र धारण — पूजा पूरी होने के बाद पुरुष अपने दाएं हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र बांधें।
- दान और पारण — अंत में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं, दान दें और समय अनुसार व्रत का पारण करें।
⚡ 5-मिनट विधि
- स्नान के बाद भगवान विष्णु और गणेश जी के सामने दीप जलाएं।
- चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र भगवान के चरणों में रखें।
- भगवान को पीले फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- थोड़ी देर ध्यान करें और भगवान से प्रार्थना करें।
- अनंत सूत्र को अपनी कलाई पर बांध लें और काम पर निकलें।
🛒 अनंत चतुर्दशी पूजा सामग्री
आवश्यक
- भगवान विष्णु और गणेश जी की मूर्ति या चित्र
- चौदह गांठों वाला सूती धागा (अनंत सूत्र)
- हल्दी या कुमकुम
- पीले फूल
- तुलसी के पत्ते
- दीप और बाती
- कलश
वैकल्पिक
- पंचामृत
- केले के पत्ते
- मिठाई या मोदक
- सुपारी और लौंग
- पीला कपड़ा
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- if पीले फूल is unavailable, कोई भी ताजे फूल is traditionally accepted
- if सूती धागा is unavailable, रेशमी धागा या कलावा is traditionally accepted
- if तुलसी दल is unavailable, भगवान विष्णु का मानसिक ध्यान is traditionally accepted
🌙 अनंत चतुर्दशी व्रत विधि
व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय के समय स्नान और संकल्प के साथ होती है।
क्या खा सकते हैं
- फल
- दूध और दूध से बनी चीजें
- साबूदाना
- कुट्टू या सिंघाड़े का आटा
क्या नहीं खाना चाहिए
- अन्न (गेंहू, चावल)
- नमक (सेंधा नमक खा सकते हैं)
- लहसुन और प्याज
- मांस और मदिरा
पारण: व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद या चतुर्दशी तिथि समाप्त होने पर किया जाता है। ऊपर दी गई टेबल में पारण का समय देखें।
किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बुजुर्ग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह व्रत नहीं रखना चाहिए।
यदि आप गर्भवती हैं, बीमार हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।
❓ अनंत चतुर्दशी: क्या करें और क्या न करें
क्या अनंत चतुर्दशी के दिन बाल धो सकते हैं?
व्रत रखने वालों को इस दिन बाल धोने से बचने की सलाह दी जाती है। आप एक दिन पहले बाल धो सकते हैं।
क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?
पारंपरिक रूप से व्रत के दिन नाखून और बाल काटना वर्जित माना जाता है। इसे पूजा से पहले ही कर लेना चाहिए।
क्या व्रत में नमक खा सकते हैं?
इस व्रत में साधारण नमक नहीं खाया जाता है। यदि आवश्यक हो तो आप सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं।
अनंत सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए?
परंपरा के अनुसार पुरुष इसे अपने दाएं हाथ में और महिलाएं इसे अपने बाएं हाथ में बांधती हैं।
क्या इस दिन यात्रा कर सकते हैं?
हां, यात्रा करने में कोई मनाही नहीं है। बस अपनी पूजा का समय और मुहूर्त ध्यान में रखें।
क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान पूजा कर सकती हैं?
मासिक धर्म के दौरान सीधे मूर्ति या पूजा सामग्री को छूने से बचा जाता है। आप मानसिक रूप से भगवान का ध्यान कर सकती हैं।
क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?
भगवान विष्णु और गणेश जी का दिन होने के कारण यह नए काम की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
क्या इस दिन खरीदारी कर सकते हैं?
हां, आप पूजा का सामान, कपड़े या घर की जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं। इसमें कोई दोष नहीं है।
क्या पूजा रात में की जा सकती है?
अनंत चतुर्दशी की मुख्य पूजा सुबह या दोपहर के समय की जाती है। सटीक मुहूर्त ऊपर टेबल में दिया गया है।
अनंत सूत्र को कितने दिन तक बांधना चाहिए?
कई लोग इसे पूरे एक साल तक बांधते हैं। यदि यह संभव न हो तो कम से कम चौदह दिन तक बांधना चाहिए।
पुराने अनंत सूत्र का क्या करें?
पुराने सूत्र को नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या किसी पवित्र पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।
क्या पूजा के तुरंत बाद खाना खा सकते हैं?
यदि आपने व्रत रखा है, तो पारण के समय ही भोजन करें। यदि व्रत नहीं है, तो पूजा के बाद प्रसाद खाकर भोजन कर सकते हैं।
क्या इस दिन लहसुन-प्याज खा सकते हैं?
व्रत न रखने वाले परिवार के सदस्यों को भी इस दिन घर में लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन बनाने से बचना चाहिए।
⚠️ आम गलतियाँ
- अनंत सूत्र में चौदह से कम या ज्यादा गांठें लगाना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का उपयोग न करना एक सामान्य भूल है।
- पूजा के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखना और अशुद्ध कपड़ों में बैठना ठीक नहीं माना जाता।
- अनंत सूत्र को बिना भगवान को अर्पित किए सीधे कलाई पर बांध लेना पूजा विधि के खिलाफ है।
- व्रत पारण का सही समय न देखना और समय से पहले अन्न खा लेना व्रत को खंडित करता है।
- पूजा के समय भगवान गणेश की पूजा पहले न करना एक बड़ी चूक मानी जाती है।
- अनंत चतुर्दशी की कथा को बीच में ही छोड़ देना या ध्यान से न सुनना व्रत को अधूरा कर देता है।
📖 अनंत चतुर्दशी कथा
🪔 आरती
अनंत चतुर्दशी की पूजा के अंत में भगवान विष्णु और भगवान गणेश की आरती की जाती है। आरती हमेशा खड़े होकर और पूरी श्रद्धा के साथ गानी चाहिए। आरती की थाली में कपूर या घी का दीपक जलाएं। सबसे पहले भगवान गणेश की आरती करें, क्योंकि वे प्रथम पूज्य हैं। उसके बाद भगवान विष्णु की आरती उतारें। आरती के बाद परिवार के सभी सदस्यों को आरती लेनी चाहिए और भगवान से अपनी गलतियों की क्षमा मांगनी चाहिए।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार अनंत चतुर्दशी के उपाय
money
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल और हल्दी अर्पित करें। चूंकि इस दिन भगवान के अनंत रूप की पूजा होती है, इसलिए यह उपाय आपके आर्थिक जीवन में स्थिरता लाता है। पूजा के बाद एक सिक्का भगवान के पास रखें और उसे अपनी तिजोरी में संभाल लें।
career
यदि नौकरी या व्यापार में बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन भगवान गणेश को चौदह दूर्वा अर्पित करें। अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन का भी दिन है, इसलिए विघ्नहर्ता से प्रार्थना करने से करियर में आने वाली सभी रुकावटें दूर होती हैं और नए अवसर मिलते हैं।
marriage
विवाह में देरी हो रही हो तो अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ पूजा करें। उन्हें पीले वस्त्र और केले का भोग लगाएं। यह दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने का है, जो सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
children
संतान सुख या बच्चों की तरक्की के लिए इस दिन भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं। अनंत सूत्र बांधते समय भगवान से अपनी संतान की रक्षा की प्रार्थना करें। यह चौदह गांठों वाला सूत्र बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है।
home
घर में शांति और सकारात्मकता के लिए अनंत चतुर्दशी के दिन घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण बांधें। भगवान गणेश की पूजा के बाद घर के सभी कमरों में गंगाजल छिड़कें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है।
negativity
मन में डर या नकारात्मक विचार आते हों तो इस दिन चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र जरूर धारण करें। भगवान विष्णु के अनंत रूप का ध्यान करते हुए इस रक्षा सूत्र को बांधने से आत्मविश्वास बढ़ता है और हर प्रकार की नकारात्मकता से बचाव होता है।
क्या अनंत चतुर्दशी आपके लिए विशेष है?
भारत में अनंत चतुर्दशी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनंत चतुर्दशी 2026 में कब है?
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है।
पूजा का सही मुहूर्त क्या है?
पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और तिथि के समय पर निर्भर करता है। आप इस पेज के ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर का मुहूर्त देख सकते हैं। उसी समय के अनुसार पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी के दिन मुख्य रूप से क्या किया जाता है?
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कलाई पर चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। साथ ही भगवान गणेश की पूजा भी होती है। कई जगहों पर इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है।
क्या इस दिन व्रत रखना जरूरी है?
यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए यह व्रत रखते हैं। यदि आप व्रत नहीं रख सकते, तो केवल पूजा करके भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
व्रत के दौरान आप फल, दूध, साबूदाना और कुट्टू के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं। इस दिन अन्न और साधारण नमक का सेवन नहीं किया जाता है। जरूरत पड़ने पर सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।
अनंत चतुर्दशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। किसी का अपमान करने या झूठ बोलने से बचना चाहिए। इसके अलावा बाल और नाखून काटने की भी मनाही होती है।
अनंत सूत्र कैसे बनाया जाता है?
अनंत सूत्र सूती या रेशमी धागे से बनाया जाता है। इसमें कुमकुम या हल्दी लगाकर चौदह गांठें लगाई जाती हैं। ये चौदह गांठें भगवान विष्णु के चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं।
अनंत सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए?
पारंपरिक नियमों के अनुसार पुरुषों को यह सूत्र अपने दाएं हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए। वहीं महिलाओं को इसे अपने बाएं हाथ की कलाई पर बांधने की सलाह दी जाती है। इसे पूरे सम्मान के साथ धारण करना चाहिए।
अनंत चतुर्दशी की कथा सुनना क्यों जरूरी है?
व्रत और पूजा के दौरान कथा सुनने से ही अनुष्ठान पूरा माना जाता है। कथा हमें इस व्रत के महत्व और भगवान के प्रति श्रद्धा का संदेश देती है। बिना कथा सुने व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।
क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?
हां, अनंत चतुर्दशी का दिन किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु और गणेश जी की कृपा से नए काम में सफलता मिलती है। आप अपनी सुविधा के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर काम शुरू कर सकते हैं।
क्या इस दिन खरीदारी करना शुभ होता है?
इस दिन कपड़े, गहने या घर का सामान खरीदना पूरी तरह से शुभ है। इसमें कोई दोष नहीं लगता। बस ध्यान रखें कि पूजा के समय को छोड़कर आप कभी भी खरीदारी कर सकते हैं।
अनंत चतुर्दशी पर दान का क्या महत्व है?
पूजा और व्रत के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। आप अन्न, वस्त्र या धन का दान कर सकते हैं। इससे व्रत का पारण भी शुद्ध तरीके से होता है।
अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?
हिंदू पंचांग में तिथियां सूर्योदय के आधार पर तय होती हैं। हर शहर में सूर्योदय का समय अलग होता है, इसलिए मुहूर्त भी बदल जाता है। आप हमारी वेबसाइट पर अपने शहर का सटीक समय देख सकते हैं।
अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन में क्या संबंध है?
अनंत चतुर्दशी के दिन ही दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ बप्पा की भी विशेष पूजा होती है। इसी दिन लोग भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं।
पूजा के लिए कौन सी सामग्री सबसे जरूरी है?
पूजा के लिए चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र, भगवान विष्णु की मूर्ति, पीले फूल और हल्दी सबसे जरूरी हैं। इसके अलावा कलश और दीप भी आवश्यक हैं। यदि कोई सामग्री न मिले तो मानसिक ध्यान से भी पूजा की जा सकती है।
क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?
गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। परंपरा अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य सबसे पहले आता है। आप बिना भूखे रहे केवल पूजा में शामिल होकर भी पुण्य कमा सकती हैं।
अनंत सूत्र को कितने समय तक पहनना चाहिए?
कुछ लोग इसे पूरे एक साल तक पहनते हैं और अगले साल अनंत चतुर्दशी पर ही बदलते हैं। यदि यह संभव न हो, तो कम से कम चौदह दिन तक इसे जरूर पहनना चाहिए। बाद में इसे जल में प्रवाहित कर दें।
क्या इस दिन कोई विशेष मंत्र जपना चाहिए?
इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी के सामान्य मंत्रों का जाप किया जा सकता है। वैसे इस पर्व के लिए कोई एक विशेष मंत्र अनिवार्य नहीं है। आप सच्चे मन से भगवान का ध्यान कर सकते हैं।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद या जब चतुर्दशी तिथि समाप्त हो जाए, तब किया जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। सटीक पारण समय के लिए ऊपर दी गई टेबल देखें।
यदि पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?
ईश्वर केवल आपकी सच्ची भावना देखते हैं। यदि अनजाने में कोई गलती हो जाए, तो पूजा के अंत में भगवान से क्षमा मांग लें। आरती के बाद 'क्षमा प्रार्थना' करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है।
भारत में आने वाले त्योहार
- Raksha Bandhan 20262026-08-28
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Pitru Paksha 20262026-09-26
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
- Navratri Day 2 - Maa Brahmacharini 20262026-10-12
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