बेंगलुरु में छठ पूजा
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
छठ पूजा इस साल 15 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दिन मुख्य रूप से सूर्यास्त के समय सायाह्न काल में सूर्य देव को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। आप अपने शहर का सटीक पूजा मुहूर्त और समय ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।
🕐 बेंगलुरु के लिए छठ पूजा का समय
| तिथि | Shashthi (Shukla Paksha) — 02:01 (16 Nov) तक |
| नक्षत्र | Uttara Ashadha, पाद 2 — 23:29 तक |
| योग · करण | Shula · Kaulava |
| पूजा मुहूर्त | 15:29-17:46 (सायाह्न) |
| अभिजित मुहूर्त | 11:40-12:26 |
| राहुकाल | 16:20-17:46 |
| यमगंड · गुलिक | 12:03-13:29 · 14:54-16:20 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:21 · 17:46 |
बेंगलुरु (12.9716, 77.5946) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ छठ पूजा पर क्या करें
- पूजा की थाली और अर्घ्य का सूप तैयार कर लें।
- टेबल में दिए गए सूर्यास्त के समय से पहले घाट या पूजा स्थल पर पहुँच जाएँ।
- सूर्य देव की ओर मुख करके जल में खड़े हो जाएँ।
- अर्घ्य देते समय सूर्य देव का ध्यान करें।
- पूजा के बाद वहीं खड़े होकर परिक्रमा करें।
- परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें।
- व्रत के नियमों का पालन करते हुए अगले दिन सुबह के अर्घ्य की तैयारी करें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Shashthi pervades sayahna kaal on one day only (100% of the window). The principal sandhya arghya is offered at sunset, so Kartik Shukla Shashthi is judged in sayahna kaal.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में छठ पूजा का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| बेंगलुरु | 06:21 | 11:40-12:26 | 16:20-17:46 |
| दिल्ली एनसीआर | 06:47 | 11:43-12:26 | 16:03-17:23 |
| मुंबई | 06:49 | 12:00-12:44 | 16:32-17:56 |
| नोएडा | 06:46 | 11:42-12:25 | 16:02-17:22 |
| गुरुग्राम | 06:48 | 11:44-12:27 | 16:04-17:24 |
| हैदराबाद | 06:24 | 11:37-12:22 | 16:12-17:36 |
| पुणे | 06:44 | 11:56-12:40 | 16:29-17:53 |
| कोलकाता | 05:52 | 10:58-11:42 | 15:26-16:49 |
| चेन्नई | 06:11 | 11:30-12:15 | 16:09-17:35 |
| अहमदाबाद | 06:56 | 12:01-12:45 | 16:29-17:51 |
छठ पूजा क्यों मनाया जाता है
🪔 छठ पूजा पूजा विधि
- स्नान और वस्त्र धारण — पूजा से पहले अच्छी तरह स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पारंपरिक रूप से इस दिन नए कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
- सामग्री की तैयारी — बांस के सूप या टोकरी में पूजा की सभी आवश्यक सामग्री जैसे फल, गन्ना, और दीपक को अच्छी तरह से सजा लें।
- घाट पर पहुँचना — अपने शहर के सूर्यास्त मुहूर्त (जिसे आप ऊपर टेबल में देख सकते हैं) से पहले घाट या जल स्रोत के पास समय से पहुँच जाएँ।
- जल में प्रवेश — जूते-चप्पल उतारकर जल में प्रवेश करें और सूर्य देव की दिशा में मुख करके पूरी श्रद्धा के साथ खड़े हों।
- दीपक जलाना — सूप में रखे हुए दीपक को जलाएं और सूप को अपने दोनों हाथों में मजबूती और सम्मान के साथ पकड़ें।
- अर्घ्य अर्पित करना — अस्त होते हुए सूर्य देव को सूप दिखाते हुए अर्घ्य अर्पित करें। इस दौरान आपका पूरा ध्यान सूर्य देव पर होना चाहिए।
- सूर्य देव का ध्यान — अर्घ्य देते समय मन ही मन सूर्य देव का ध्यान करें और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- परिक्रमा करना — अर्घ्य देने के ठीक बाद जल में ही अपनी जगह पर खड़े होकर एक परिक्रमा पूरी करें।
- प्रार्थना और आरती — घाट पर बाहर आकर बैठें, सूर्य देव की आरती करें और उनसे आशीर्वाद मांगे।
- घर वापसी — शाम की पूजा समाप्त होने पर परिवार के साथ घर लौट आएं और अगले दिन सुबह के अर्घ्य की तैयारी शुरू करें।
⚡ 5-मिनट विधि
- स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और अर्घ्य का सूप तैयार करें।
- सूर्यास्त से पहले जल स्रोत या घाट पर पहुँच जाएँ।
- जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- सूर्य देव का मन ही मन ध्यान करें और परिक्रमा करें।
- प्रार्थना के बाद बड़ों का आशीर्वाद लेकर घर लौटें।
🛒 छठ पूजा पूजा सामग्री
आवश्यक
- बांस का सूप या दउरा
- नारियल (पानी वाला)
- गन्ना (पत्ते के साथ)
- दीपक और बाती
- सिंदूर
- फल
वैकल्पिक
- नए वस्त्र
- फूलों की माला
- मिठाई
- सूखे मेवे
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- अगर बांस का सूप उपलब्ध न हो, तो पीतल या तांबे की थाली का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
- अगर नदी या तालाब न हो, तो घर की छत पर किसी बड़े बर्तन या टब में साफ जल भरकर पूजा की जा सकती है।
- अगर गन्ने का पूरा पेड़ न मिले, तो गन्ने के छोटे टुकड़े इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
🌙 छठ पूजा व्रत विधि
व्रत कब शुरू करें: यह व्रत नहाय-खाय के दिन से शुरू होकर पारण तक चलता है। मुख्य निर्जला व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है।
क्या खा सकते हैं
- व्रत से पहले सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
- पारण के समय प्रसाद खाकर व्रत खोला जाता है।
क्या नहीं खाना चाहिए
- व्रत के दौरान अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता है।
- लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
पारण: अगले दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण का सही समय ऊपर टेबल में देखा जा सकता है।
किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह कठिन निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए।
यह व्रत बहुत कठिन होता है। अगर आप गर्भवती हैं, बीमार हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक नियमों को कभी भी मेडिकल सलाह की जगह नहीं लेना चाहिए।
❓ छठ पूजा: क्या करें और क्या न करें
क्या मैं व्रत के दौरान पानी पी सकती हूँ?
पारंपरिक रूप से यह एक निर्जला व्रत है, जिसमें पानी पीना वर्जित माना जाता है। हालांकि, अगर स्वास्थ्य ठीक न हो तो व्रत न रखने की सलाह दी जाती है।
क्या मैं पूजा के दिन बाल धो सकती हूँ?
हाँ, पूजा से पहले स्नान करते समय बाल धोना एक सामान्य और पवित्र प्रक्रिया मानी जाती है। स्वच्छता इस पर्व का मुख्य हिस्सा है।
क्या मैं व्रत में नमक खा सकता हूँ?
नहीं, मुख्य व्रत के दिन किसी भी प्रकार का अन्न या नमक नहीं खाया जाता है। यह पूरी तरह से निराहार और निर्जला होता है।
क्या पूजा रात में की जा सकती है?
यह पूजा मुख्य रूप से सूर्यास्त और सूर्योदय के समय की जाती है। रात के समय अर्घ्य देने की परंपरा नहीं है।
क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?
अगर बहुत जरूरी न हो तो यात्रा से बचना चाहिए, क्योंकि पूजा के नियमों और समय का पालन यात्रा के दौरान करना मुश्किल होता है।
क्या हम घर की छत पर अर्घ्य दे सकते हैं?
हाँ, अगर आस-पास कोई नदी या तालाब नहीं है, तो छत पर एक साफ टब में पानी भरकर अर्घ्य देना पूरी तरह से स्वीकार्य है।
क्या मैं इस दिन नए कपड़े खरीद सकती हूँ?
हाँ, इस पर्व के लिए नए और साफ कपड़े खरीदना और पहनना शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।
क्या पूजा के तुरंत बाद खाना खा सकते हैं?
नहीं, शाम की पूजा के बाद व्रत जारी रहता है। खाना अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही खाया जाता है।
क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?
पारंपरिक रूप से व्रत और पूजा के दिन नाखून या बाल काटने से बचने की सलाह दी जाती है। यह काम आप पर्व शुरू होने से पहले कर सकते हैं।
क्या मैं इस दिन नया काम शुरू कर सकता हूँ?
हाँ, सूर्य देव को सफलता का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन कोई भी शुभ काम शुरू करना अच्छा माना जाता है।
क्या बिना व्रत रखे पूजा में शामिल हो सकते हैं?
बिल्कुल, अगर आप व्रत नहीं रख रहे हैं, तब भी आप पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल हो सकते हैं और अर्घ्य देने में मदद कर सकते हैं।
क्या पूजा में प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग कर सकते हैं?
पारंपरिक रूप से बांस, पीतल, तांबे या मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग किया जाता है। प्लास्टिक के उपयोग से बचना चाहिए।
क्या इस दिन दवा खा सकते हैं?
अगर आपको दवा खानी है, तो आपको निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य सबसे पहले है, इसलिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
⚠️ आम गलतियाँ
- बिना स्नान किए पूजा की सामग्री को छूने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
- अर्घ्य देते समय गलत दिशा में मुख करने से अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता।
- पूजा के बर्तनों को साफ किए बिना दोबारा उपयोग करने से व्रत खंडित माना जाता है।
- सूर्यास्त का समय निकल जाने के बाद अर्घ्य देने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
- पूजा के दौरान मन में क्रोध या नकारात्मक विचार रखने से अनुष्ठान अधूरा रह जाता है।
- अर्घ्य के जल में पवित्रता का ध्यान न रखने से पूजा की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है।
- व्रत के नियमों के बीच में अन्न या जल ग्रहण कर लेने से व्रत पूरा नहीं माना जाता।
📖 छठ पूजा कथा
🪔 आरती
छठ पूजा में आरती का विशेष महत्व होता है। जब आप जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर लेते हैं, उसके बाद घाट पर या अपने पूजा स्थल पर आरती की जाती है। आरती करते समय दीपक को पूरे सम्मान के साथ घुमाया जाता है और सूर्य देव से परिवार की भलाई की प्रार्थना की जाती है। यह आरती आपके मन को शांति देती है और पूजा को पूरी तरह से संपन्न करती है।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार छठ पूजा के उपाय
पैसे और आर्थिक तंगी की समस्या
सूर्य देव को सफलता और समृद्धि का कारक माना जाता है। आर्थिक स्थिरता के लिए पूजा के दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि सूर्य की कृपा से व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है, जिससे धन लाभ के रास्ते खुलते हैं।
करियर या नौकरी में रुकावट
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नेतृत्व, अधिकार और सरकारी नौकरी का मुख्य ग्रह माना गया है। करियर में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए इस दिन सूर्य देव की उपासना करें। माना जाता है कि सूर्य के मजबूत होने से कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान और प्रमोशन के अवसर बढ़ते हैं।
विवाह में हो रही देरी
विवाह के लिए आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत जरूरी है, जो सूर्य के प्रभाव से आती है। विवाह में आ रही अड़चनों को कम करने के लिए इस दिन व्रत रखें या पूरी श्रद्धा से सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सकारात्मकता और अच्छे रिश्ते आते हैं।
संतान से जुड़ी चिंताएं
छठ का पर्व मुख्य रूप से परिवार और संतान की भलाई के लिए ही किया जाता है। सूर्य देव जीवन और ऊर्जा के स्रोत हैं। अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए इस दिन सूर्य देव से प्रार्थना करें। पारंपरिक मान्यता है कि इससे बच्चों को दीर्घायु प्राप्त होती है।
घर में अशांति और क्लेश
सूर्य का प्रकाश हर तरह के अंधकार को मिटाता है। अगर घर में अशांति है, तो पूजा के दिन घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें और सूर्य देव की रोशनी को घर में आने दें। माना जाता है कि सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा से घर का माहौल शांत और खुशहाल बनता है।
नकारात्मक ऊर्जा और डर
सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। जब सूर्य मजबूत होता है, तो व्यक्ति के अंदर से हर तरह का डर और नकारात्मकता खत्म हो जाती है। मानसिक शांति के लिए अर्घ्य देते समय सूर्य देव का ध्यान करें। यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
क्या छठ पूजा आपके लिए विशेष है?
बेंगलुरु में छठ पूजा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा 2026 में कब है?
इस साल यह पवित्र पर्व 15 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार यह कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है। आप इस खास दिन अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर सूर्य देव की उपासना कर सकते हैं और उन्हें संध्या अर्घ्य दे सकते हैं।
इस दिन पूजा का सही मुहूर्त क्या है?
इस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय सूर्यास्त का होता है, जब सायाह्न काल में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। आपके शहर के लिए सूर्यास्त का सटीक समय ऊपर दी गई टेबल में लाइव देखा जा सकता है। आपको उसी समय के अनुसार अपनी तैयारी करके घाट पर पहुँचना चाहिए।
शहरों के अनुसार पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?
सूर्य के अस्त होने का समय हर शहर की भौगोलिक स्थिति और अक्षांश के अनुसार अलग-अलग होता है। इसलिए दिल्ली में सूर्यास्त का समय पटना, रांची या मुंबई से बिल्कुल अलग हो सकता है। इसी कारण से हम आपको आपके अपने शहर का सटीक समय टेबल में दिखाते हैं ताकि पूजा में कोई चूक न हो।
इस दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?
इस दिन का सबसे मुख्य कार्य डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देना है। आपको साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखते हुए पूजा की थाली और सूप सजाना चाहिए। इसके बाद जल में खड़े होकर सूर्य देव की प्रार्थना करनी चाहिए और परिवार की भलाई की कामना करनी चाहिए।
पूजा के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए?
पूजा के दौरान किसी भी प्रकार की अशुद्धता या गंदगी से पूरी तरह बचना चाहिए। बिना स्नान किए पूजा की किसी भी सामग्री को नहीं छूना चाहिए। इसके अलावा व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति बुरे विचार या क्रोध भी नहीं लाना चाहिए।
क्या इस दिन उपवास रखना जरूरी है?
यह पूरी तरह से आपकी अपनी श्रद्धा, आस्था और शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। पारंपरिक रूप से लोग इस दिन कठिन निर्जला व्रत रखते हैं, लेकिन यह सबके लिए अनिवार्य नहीं है। आप बिना व्रत रखे भी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल होकर अर्घ्य देने में मदद कर सकते हैं।
व्रत के दौरान क्या खा सकते हैं?
मुख्य षष्ठी तिथि के दिन यह व्रत पूरी तरह से निर्जला होता है, इसलिए इस दिन कुछ भी खाया या पिया नहीं जाता है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। पारण के समय आप पूजा का सात्विक प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोल सकते हैं।
पूजा के लिए कौन सी सामग्री सबसे जरूरी है?
पूजा के लिए बांस का सूप या दउरा, पानी वाला नारियल, पत्ते वाला गन्ना, दीपक, सिंदूर और ताजे फल सबसे जरूरी माने जाते हैं। ये सभी चीजें सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ी होती हैं। अगर इनमें से कोई चीज न मिले तो आप अपनी श्रद्धा अनुसार कोई भी पारंपरिक विकल्प चुन सकते हैं।
छठ पूजा की कथा क्या है?
इस पर्व की सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम और माता सीता के वनवास से लौटने से जुड़ी है। रावण वध के बाद पाप मुक्ति के लिए उन्होंने सूर्य देव की उपासना की थी। इसके अलावा महाभारत काल में कर्ण और द्रौपदी द्वारा भी सूर्य पूजा करने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
इस पर्व का धार्मिक महत्व क्या है?
यह पर्व साक्षात सूर्य देव को समर्पित है, जो पूरी पृथ्वी पर जीवन और ऊर्जा का मुख्य आधार हैं। यह पर्व हमें प्रकृति का सम्मान करना और उसे सहेजना सिखाता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का गहरा प्रतीक है कि हर अंत के बाद एक नई और उज्जवल शुरुआत होती है।
क्या इस दिन नया काम शुरू किया जा सकता है?
हाँ, वैदिक ज्योतिष में सूर्य देव को सफलता, ऊर्जा और मान-सम्मान का सबसे बड़ा कारक माना गया है। इसलिए इस दिन कोई भी नया और शुभ काम शुरू करना बहुत अच्छा माना जाता है। यह आपके नए काम में अनुशासन, सकारात्मकता और भरपूर ऊर्जा लाता है।
क्या पूजा के दिन खरीदारी कर सकते हैं?
बिल्कुल, इस दिन आप पूजा की आवश्यक सामग्री, नए कपड़े या घर का कोई भी जरूरी सामान बिना किसी संकोच के खरीद सकते हैं। खरीदारी करने में कोई पारंपरिक मनाही नहीं है। बस आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा के समय से पहले आप अपने घाट या पूजा स्थल पर पहुँच जाएँ।
इस पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
इस पारंपरिक पर्व में किसी विशेष या कठिन मंत्र के जाप की कोई सख्त बाध्यता नहीं होती है। आप अपनी ही भाषा में सीधे और सरल शब्दों में सूर्य देव से प्रार्थना कर सकते हैं। सच्चे मन और साफ नीयत से की गई प्रार्थना ही इस पूजा में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या इस दिन दान करना शुभ होता है?
हाँ, सूर्य देव की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को ताजे फल, अन्न या साफ वस्त्र का दान कर सकते हैं। पारंपरिक रूप से दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
नौकरी में सफलता के लिए क्या उपाय करें?
सूर्य देव को करियर, नेतृत्व और सरकारी नौकरी का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है। नौकरी में सफलता पाने के लिए आप तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे आपके कार्यक्षेत्र में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं और तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
पैसे की तंगी दूर करने के लिए क्या करें?
आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सूर्य देव की आराधना करना बहुत लाभकारी माना गया है। आप पूजा के दिन अपने घर की साफ-सफाई रखें और सुबह के समय सूर्य की रोशनी को घर में आने दें। पारंपरिक मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और धन का आगमन होता है।
छठ पूजा और मकर संक्रांति में क्या अंतर है?
ये दोनों ही पर्व सूर्य देव से गहराई से जुड़े हैं, लेकिन इन्हें मनाने के तरीके बिल्कुल अलग हैं। छठ पूजा कार्तिक महीने में षष्ठी तिथि को होती है और इसमें डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। जबकि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है और इसमें नदी स्नान का महत्व होता है।
क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?
यह व्रत बहुत कठिन होता है और इसमें पानी पीना भी वर्जित होता है। गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत का सबसे पहले ध्यान रखना चाहिए और कोई भी व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। वे चाहें तो व्रत रखे बिना भी पूजा की प्रक्रिया में खुशी-खुशी भाग ले सकती हैं।
अगर नदी या तालाब न हो तो अर्घ्य कैसे दें?
आजकल बड़े शहरों में साफ नदी या तालाब मिलना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में आप अपने घर की छत या बालकनी में एक साफ टब में पानी भरकर उसमें खड़े हो सकते हैं। सूर्य देव की दिशा में मुख करके इस तरह अर्घ्य देना भी पूरी तरह से मान्य और स्वीकार्य है।
व्रत का पारण कैसे किया जाता है?
व्रत का पारण अगले दिन सुबह उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। सबसे पहले पूजा का चढ़ाया हुआ सात्विक प्रसाद खाकर यह व्रत खोला जाता है। पारण का सही और सटीक समय आप ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर के अनुसार आसानी से देख सकते हैं।
बेंगलुरु में आने वाले त्योहार
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Anant Chaturdashi 20262026-09-25
- Pitru Paksha 20262026-09-26
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
- Navratri Day 2 - Maa Brahmacharini 20262026-10-12
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