बेंगलुरु · Karnataka

बेंगलुरु में देवउठनी एकादशी

शनिवार, 21 नवंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस साल स्मार्त संप्रदाय के लिए देवउठनी एकादशी 21 नवंबर 2026 को है, और वैष्णव संप्रदाय इसे 22 नवंबर 2026 को मनाएंगे। यह कार्तिक शुक्ल एकादशी का दिन है जब चतुर्मास समाप्त होता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान के जागने का उत्सव मनाते हैं। आपके शहर का सटीक मुहूर्त ऊपर टेबल में दिया गया है।

🕐 बेंगलुरु के लिए देवउठनी एकादशी का समय

तिथिEkadashi (Shukla Paksha)06:31 तक
नक्षत्रUttara Bhadrapada, पाद 406:50 तक
योग · करणSiddhi · Vishti
अभिजित मुहूर्त11:42-12:27
राहुकाल09:14-10:39
यमगंड · गुलिक13:30-14:55 · 06:24-07:49
सूर्योदय · सूर्यास्त06:24 · 17:46

बेंगलुरु (12.9716, 77.5946) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

देवउठनी एकादशी पर क्या करें

  1. पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करके वहां एक साफ आसन बिछाएं।
  2. ऊपर टेबल में दिए गए मुहूर्त के अनुसार हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें।
  3. भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करें।
  4. ताजे फल, फूल और जो भी सात्विक नैवेद्य घर में हो, वह अर्पित करें।
  5. एकादशी व्रत की कथा को शांति से बैठ कर पढ़ें या सुनें।
  6. परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर श्रद्धा भाव से आरती करें।
  7. अगले दिन पारण के सही समय पर सात्विक भोजन के साथ अपना व्रत खोलें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Ekadashi pervades arunodaya kaal on one day only (82% of the window). As Ekadashi. Vaishnava: Vaishnava observance is on 22 Nov 2026. Vaishnavas keep the dwadashi-joined day where the two traditions differ. Smarta: Smarta observance is on 21 Nov 2026.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में देवउठनी एकादशी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
बेंगलुरु06:2411:42-12:2709:14-10:39
दिल्ली एनसीआर06:5211:45-12:2709:29-10:47
मुंबई06:5212:01-12:4509:37-11:00
नोएडा06:5111:44-12:2609:28-10:46
गुरुग्राम06:5211:46-12:2809:29-10:48
हैदराबाद06:2711:38-12:2309:14-10:37
पुणे06:4811:57-12:4209:34-10:57
कोलकाता05:5610:59-11:4308:38-10:00
चेन्नई06:1311:31-12:1609:03-10:28
अहमदाबाद07:0012:03-12:4609:42-11:03

देवउठनी एकादशी क्यों मनाया जाता है

देवउठनी एकादशी का भारतीय परंपरा में बहुत गहरा महत्व है। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह वह दिन है जब भगवान अपनी चार महीने की लंबी योग निद्रा से जागते हैं। इन चार महीनों को चतुर्मास कहा जाता है, जिस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, या गृह प्रवेश नहीं किया जाता। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान के जागने के साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है और शुभ समय की शुरुआत होती है। इस पर्व का सीधा संबंध गुरु ग्रह (Jupiter) से है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को विवाह, ज्ञान, संतान, धन और धर्म का कारक माना गया है। जब भगवान निद्रा में होते हैं, तो गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव पूरी तरह से फलित नहीं हो पाता। यही कारण है कि चतुर्मास में शादियां नहीं होतीं। देवउठनी एकादशी के दिन गुरु ग्रह की ऊर्जा फिर से सक्रिय और शुभ हो जाती है। गुरु ग्रह की कृपा से ही जीवन में स्थिरता और तरक्की आती है। यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में ठहराव और गति, दोनों का अपना महत्व है। जैसे भगवान चार महीने विश्राम करते हैं, वैसे ही प्रकृति भी इस दौरान खुद को नया करती है। बारिश का मौसम खत्म होता है और सर्दियां शुरू होती हैं। जब भगवान जागते हैं, तो प्रकृति भी एक नई ऊर्जा के साथ तैयार होती है। यह एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत का प्रतीक है। कई परिवारों में इस दिन गन्ने का मंडप बनाकर विशेष पूजा की जाती है। लोग अपने घरों के आंगन में रंगोली बनाते हैं और दीप जलाते हैं। यह एक तरह की दिवाली ही है, जिसे देव दिवाली के रूप में भी महसूस किया जाता है। गुरु ग्रह के प्रभाव के कारण इस दिन किए गए दान और पूजा का विशेष फल मिलता है। जो लोग विवाह में आ रही अड़चनों से परेशान हैं, उनके लिए यह दिन बहुत खास होता है क्योंकि गुरु ग्रह विवाह का मुख्य कारक है। इस दिन व्रत रखने से मन और शरीर दोनों की शुद्धि होती है। यह एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष में आती है, जो साल के सबसे पवित्र समय में से एक है। परंपरा के अनुसार, इस दिन सात्विक जीवन जीना चाहिए और किसी के प्रति बुरे विचार नहीं रखने चाहिए। भगवान के जागने का मतलब सिर्फ उनका जागना नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की चेतना और ज्ञान के जागने का भी समय है। जब गुरु ग्रह मजबूत होता है, तो हमारी निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है और हम सही रास्ते पर चलते हैं।

🪔 देवउठनी एकादशी पूजा विधि

  1. स्नान और तैयारीसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, धुले हुए कपड़े पहनें। मन में व्रत और पूजा का विचार लाएं।
  2. स्थान की सफाईपूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ करें और वहां थोड़ा सा गंगाजल या साफ जल छिड़कें।
  3. आसन और चौकीएक लकड़ी की चौकी पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और वहां पूजा की तैयारी करें।
  4. दीपक प्रज्वलित करनाभगवान के सामने घी का दीपक और धूप या अगरबत्ती जलाएं। यह सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
  5. संकल्प लेनाहाथ में थोड़ा सा जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें और भगवान से पूजा सफल होने की प्रार्थना करें।
  6. पुष्प और फल अर्पणभगवान को ताजे फूल और फलों का भोग लगाएं। गुरु ग्रह के लिए पीले फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
  7. गन्ने का उपयोगअगर संभव हो तो गन्ने का छोटा सा मंडप बनाएं, जो इस दिन की एक बहुत ही सुंदर और पुरानी परंपरा है।
  8. कथा का पाठएकादशी की कथा को पूरे ध्यान और शांति से पढ़ें या किसी अन्य सदस्य से सुनें।
  9. आरती करनापरिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर भगवान की आरती गाएं और वातावरण को भक्तिमय बनाएं।
  10. क्षमा प्रार्थनापूजा के अंत में हाथ जोड़कर क्षमा मांगें कि अगर पूजा में कोई भूल-चूक हुई हो तो भगवान उसे माफ करें।

5-मिनट विधि

  1. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं।
  2. भगवान को ताजे फूल, फल और जो भी सात्विक मिठाई घर में हो, वह अर्पित करें।
  3. हाथ जोड़कर भगवान के जागने का ध्यान करें और उनका आशीर्वाद लें।
  4. समय कम हो तो केवल एकादशी की कथा का सार याद करें और आरती कर लें।
  5. दिन भर मन में सात्विक विचार रखें और किसी से भी विवाद करने से बचें।

🛒 देवउठनी एकादशी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • घी
  • रुई की बत्ती
  • दीपक
  • ताजे फूल
  • फल
  • धूप या अगरबत्ती
  • साफ जल
  • चौकी के लिए साफ कपड़ा

वैकल्पिक

  • गन्ना
  • रंगोली के रंग
  • पीली मिठाई
  • हल्दी

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर घी उपलब्ध न हो, तो तिल के तेल का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जा सकता है।
  • अगर ताजे फूल न मिलें, तो केवल साफ जल अर्पित किया जा सकता है।
  • अगर पीली मिठाई न हो, तो गुड़ या शक्कर का भोग लगाया जा सकता है।

🌙 देवउठनी एकादशी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से ही सात्विक भोजन के साथ हो जाती है और एकादशी की सुबह संकल्प लिया जाता है।

क्या खा सकते हैं

  • ताजे फल
  • दूध और दूध से बनी चीजें
  • साबूदाना
  • कुट्टू या सिंघाड़े का आटा
  • सेंधा नमक
  • आलू

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अनाज (गेहूं, चावल, दालें)
  • साधारण नमक
  • प्याज और लहसुन
  • मांस और मदिरा
  • बासी या जूठा भोजन

पारण: व्रत का पारण अगले दिन (द्वादशी को) ऊपर टेबल में दिए गए पारण मुहूर्त के दौरान सात्विक भोजन के साथ किया जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और वे लोग जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह कठिन व्रत नहीं करना चाहिए।

यह व्रत से जुड़ी पारंपरिक मान्यता है। यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

देवउठनी एकादशी: क्या करें और क्या न करें

क्या देवउठनी एकादशी पर बाल धो सकते हैं?

पारंपरिक रूप से एकादशी के दिन बाल धोना वर्जित माना जाता है। बेहतर होगा कि आप एक दिन पहले ही बाल धो लें।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

नहीं, एकादशी के दिन नाखून काटना या बाल काटना शुभ नहीं माना जाता है। इसे एक दिन पहले कर लेना चाहिए।

क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?

हां, व्रत के दौरान साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग पूरी तरह से स्वीकार्य और पारंपरिक है।

व्रत कब खोलना चाहिए?

व्रत हमेशा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को खोला जाता है। इसका सही समय ऊपर दी गई टेबल में पारण मुहूर्त के रूप में मौजूद है।

क्या इस दिन चावल खा सकते हैं?

एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है, चाहे आपने व्रत रखा हो या नहीं।

क्या एकादशी के दिन यात्रा कर सकते हैं?

हां, यदि बहुत जरूरी हो तो यात्रा की जा सकती है। बस यात्रा के दौरान अपने विचारों को सात्विक बनाए रखें।

क्या इस दिन नए काम की शुरुआत कर सकते हैं?

यह दिन नए काम की शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ है, क्योंकि भगवान के जागने के साथ ही सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

क्या इस दिन शॉपिंग की जा सकती है?

बिल्कुल, इस दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। आप घर के लिए नई चीजें या कपड़े खरीद सकते हैं।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

हां, देवउठनी एकादशी पर शाम या रात के समय भगवान को जगाने के भाव से पूजा करना बहुत ही पारंपरिक है।

क्या व्रत के दौरान सो सकते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के व्रत में दिन के समय सोना अच्छा नहीं माना जाता है।

क्या इस दिन झाड़ू लगाना चाहिए?

इस दिन बहुत गहराई से झाड़ू लगाने से बचा जाता है ताकि किसी छोटे जीव को अनजाने में नुकसान न पहुंचे।

क्या एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?

नहीं, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लेने चाहिए।

क्या बिना व्रत रखे भी पूजा कर सकते हैं?

हां, बिल्कुल। आप बिना व्रत रखे भी सात्विक मन से पूजा कर सकते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

अगर व्रत बीच में टूट जाए तो क्या करें?

अगर अनजाने में व्रत टूट जाए, तो भगवान से क्षमा मांगें और बाकी का दिन सात्विक विचारों के साथ बिताएं।

⚠️ आम गलतियाँ

  • एकादशी के दिन घर में चावल पकाना या खाना व्रत को अपूर्ण बनाता है।
  • पारण के समय का ध्यान न रखना और गलत समय पर व्रत खोलना अनुष्ठान को अधूरा छोड़ देता है।
  • पूजा के दौरान मन में दूसरों के प्रति क्रोध या ईर्ष्या रखना शुभ फलों को कम करता है।
  • दशमी की रात को भारी या तामसिक भोजन करना एकादशी के नियमों के खिलाफ माना जाता है।
  • भगवान को बासी या बिना धोए फूल अर्पित करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रत के दिन दिन के समय सोना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता है।
  • पारण के समय सात्विक भोजन की बजाय तामसिक चीजों से व्रत खोलना अनुचित है।

📖 देवउठनी एकादशी कथा

देवउठनी एकादशी की कथा बहुत ही रोचक और गहरी है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान ने लगातार कई वर्षों तक कठोर तपस्या और युद्ध किए। असुरों के साथ हुए लंबे युद्धों के बाद भगवान बहुत थक गए थे। उनके विश्राम का कोई निश्चित समय नहीं था, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा था। कभी-कभी भगवान बहुत लंबे समय तक जागते रहते और कभी-कभी अचानक कई दिनों के लिए सो जाते। भगवान के इस अनिश्चित विश्राम के कारण सभी देवता, संत और मनुष्य परेशान रहने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कब भगवान की पूजा की जाए और कब शुभ कार्य किए जाएं। तब सभी देवता मिलकर भगवान के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे अपने सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें, ताकि सृष्टि का चक्र सुचारू रूप से चल सके। देवताओं की इस प्रार्थना को सुनकर भगवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब से वे हर साल चार महीने के लिए योग निद्रा में जाएंगे। यह समय आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक रहेगा। इन चार महीनों के दौरान भगवान विश्राम करेंगे और सृष्टि का कार्यभार अन्य देवों के पास रहेगा। इसी परंपरा के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान अपनी चार महीने की लंबी निद्रा से जागते हैं। उनके जागने की खुशी में सभी देवता और मनुष्य उत्सव मनाते हैं। जब भगवान जागते हैं, तो उनका आशीर्वाद पूरी सृष्टि पर बरसता है। इस दिन से गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव भी फिर से सक्रिय हो जाता है, जिससे रुके हुए सभी मांगलिक कार्य, जैसे विवाह और मुंडन, फिर से शुरू हो जाते हैं। यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में काम के साथ-साथ विश्राम भी बहुत जरूरी है। जब हम सही समय पर विश्राम करके उठते हैं, तो हम नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ अपने कर्तव्य निभा सकते हैं। इसी तरह, देवउठनी एकादशी नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक है।

🪔 आरती

देवउठनी एकादशी की पूजा के अंत में आरती करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब आप कथा पढ़ लें और सभी भोग अर्पित कर दें, तब परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ मिलकर आरती करनी चाहिए। आरती के लिए घी का दीपक या कपूर का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। आरती करते समय मन में पूरी श्रद्धा रखें और भगवान के जागने का भाव महसूस करें। आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार देवउठनी एकादशी के उपाय

Money

देवउठनी एकादशी पर गुरु ग्रह के प्रभाव को मजबूत करने के लिए पीले फलों और मिठाइयों का दान करें। गुरु धन का कारक है, इसलिए जब भगवान जागते हैं, तो इस दिन किसी जरूरतमंद को चने की दाल या पीले वस्त्र दान करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन के नए रास्ते खुलते हैं।

Career

नौकरी या व्यापार में तरक्की के लिए यह दिन बहुत शुभ है। गुरु ग्रह ज्ञान और करियर में वृद्धि देता है। इस दिन भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने काम की जगह पर गुरु के निमित्त थोड़ी सी हल्दी छिड़कें। भगवान के जागने के साथ ही आपके करियर की बाधाएं दूर होने लगेंगी।

Marriage

गुरु ग्रह विवाह का सबसे बड़ा कारक है और चतुर्मास के बाद इसी दिन से शादियां शुरू होती हैं। यदि विवाह में देरी हो रही है, तो देवउठनी एकादशी के दिन पानी में थोड़ी सी हल्दी डालकर स्नान करें और भगवान को पीले फूल अर्पित करें। यह उपाय गुरु को बलवान बनाता है।

Children

संतान सुख और बच्चों की तरक्की के लिए गुरु ग्रह की कृपा बहुत जरूरी है। इस दिन बच्चों के हाथों से किसी मंदिर में केले या पीले फलों का दान करवाएं। भगवान के जागने के इस पवित्र अवसर पर ऐसा करने से बच्चों के जीवन में विद्या और बुद्धि का विकास होता है।

Home

घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए देवउठनी एकादशी की शाम को घर के मुख्य द्वार पर और आंगन में घी के दीपक जलाएं। चूंकि गुरु ग्रह धर्म और शांति का प्रतीक है, इसलिए घर में रोशनी करने से सकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम बढ़ता है।

Negativity

अगर आपको लगता है कि जीवन में बहुत अधिक नकारात्मकता आ गई है, तो इस एकादशी के दिन व्रत रखें और पूरे दिन सात्विक विचार रखें। गुरु ग्रह की ऊर्जा नकारात्मकता को खत्म करती है। शाम के समय घर में गुग्गुल या चंदन की धूप जलाएं, जिससे घर का वातावरण शुद्ध हो जाए।

क्या देवउठनी एकादशी आपके लिए विशेष है?

देवउठनी एकादशी और गुरु ग्रह के ये उपाय बहुत प्रभावशाली हैं, लेकिन ये सामान्य उपाय हैं जो हर किसी के लिए लिखे गए हैं। एक लेख आपको यह बता सकता है कि गुरु ग्रह विवाह या धन का कारक है, लेकिन वह यह नहीं बता सकता कि आपकी अपनी जन्म कुंडली में गुरु किस भाव में बैठा है। यहीं पर एक व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श काम आता है। त्रिकाल वाणी की 'Kundli' रीडिंग से आप अपने करियर, धन और दशा का सही समय जान सकते हैं। अगर आप विवाह के लिए सही साथी की तलाश में हैं, तो 'Kundali Milan' आपको सटीक उत्तर देता है। 'Hastrekha' रीडिंग आपके हाथों की लकीरों में छिपे भविष्य को उजागर करती है, जबकि 'Swapna Shastra' आपके सपनों के पीछे के असली अर्थ को समझाता है। एक सामान्य पेज आपको रास्ता दिखा सकता है, लेकिन आपकी अपनी कुंडली ही आपकी असली कहानी बताती है।

बेंगलुरु में देवउठनी एकादशी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवउठनी एकादशी 2026 में कब मनाई जाएगी?

इस साल देवउठनी एकादशी की तिथि को लेकर स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय में अंतर है। स्मार्त परंपरा को मानने वाले इसे 21 नवंबर 2026 को मनाएंगे। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोग इसे 22 नवंबर 2026 को मनाएंगे, क्योंकि वे द्वादशी से जुड़ी एकादशी को प्राथमिकता देते हैं।

मेरे शहर में पूजा का सही मुहूर्त क्या है?

चूंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग-अलग होता है, इसलिए पूजा का मुहूर्त भी बदल जाता है। आपके शहर के लिए एकदम सटीक मुहूर्त, राहुकाल और शुभ समय ऊपर दी गई टेबल में लाइव दिखाया गया है। कृपया अपनी पूजा की योजना उसी टेबल के अनुसार बनाएं।

देवउठनी एकादशी का क्या महत्व है?

यह दिन बहुत ही पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। इन चार महीनों को चतुर्मास कहा जाता है, जिसमें कोई शुभ कार्य नहीं होता। भगवान के जागते ही गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव शुरू हो जाता है और शादियां व अन्य मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं।

इस दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने चाहिए। भगवान के सामने घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शाम के समय गन्ने का मंडप बनाकर भगवान के जागने का उत्सव मनाना सबसे शुभ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी के दिन किन चीजों से बचना चाहिए?

इस दिन चावल खाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है, चाहे आपने व्रत रखा हो या नहीं। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिए। मन में किसी के प्रति बुरे विचार लाना या क्रोध करना भी इस दिन अच्छा नहीं माना जाता।

क्या इस दिन नए काम की शुरुआत की जा सकती है?

हां, यह दिन नए काम की शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। चूंकि भगवान जागते हैं और गुरु ग्रह की कृपा मिलनी शुरू होती है, इसलिए रुके हुए काम फिर से शुरू किए जा सकते हैं। व्यापार शुरू करने या कोई नई डील साइन करने के लिए यह एक बेहतरीन दिन है।

क्या देवउठनी एकादशी पर शॉपिंग करना शुभ होता है?

बिल्कुल, इस दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। आप घर के लिए नई चीजें, कपड़े, या पूजा का सामान खरीद सकते हैं। गुरु ग्रह के प्रभाव के कारण इस दिन खरीदी गई चीजें जीवन में बरकत और सकारात्मकता लाती हैं।

व्रत के दौरान क्या-क्या खाया जा सकता है?

व्रत रखने वाले लोग दिन भर में ताजे फल, दूध और दूध से बनी चीजें ले सकते हैं। इसके अलावा साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और आलू भी खाए जा सकते हैं। नमक के रूप में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करना चाहिए।

व्रत का पारण (व्रत खोलना) कब करना चाहिए?

एकादशी का व्रत हमेशा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को खोला जाता है। व्रत खोलने का एक निश्चित मुहूर्त होता है जिसे पारण का समय कहते हैं। आपके शहर के अनुसार पारण का सही समय ऊपर दी गई टेबल में मौजूद है, उसी समय व्रत खोलना चाहिए।

पूजा के लिए कौन सी सामग्री सबसे जरूरी है?

पूजा के लिए घी, रुई की बत्ती, ताजे फूल, फल और साफ जल सबसे ज्यादा जरूरी हैं। देवउठनी एकादशी पर गन्ने का विशेष महत्व है, इसलिए यदि संभव हो तो गन्ना जरूर रखें। इसके अलावा गुरु ग्रह की प्रसन्नता के लिए पीली मिठाइयां भी रखनी चाहिए।

देवउठनी एकादशी की कथा सुनना क्यों जरूरी है?

कथा सुनने से मन एकाग्र होता है और व्रत का पूरा फल मिलता है। यह कथा हमें याद दिलाती है कि भगवान ने सृष्टि के संतुलन के लिए विश्राम का नियम बनाया था। कथा पढ़ने या सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार में शांति बनी रहती है।

क्या इस दिन कोई विशेष मंत्र जपना चाहिए?

हमारे शास्त्रों में भगवान के स्मरण के कई तरीके हैं, लेकिन इस विशेष दिन के लिए कोई एक अनिवार्य मंत्र निर्धारित नहीं है। आप मन ही मन भगवान के किसी भी सरल नाम या मंत्र का जाप कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण आपकी सच्ची श्रद्धा और सात्विक भाव है।

देवउठनी एकादशी पर दान का क्या महत्व है?

इस दिन दान करने का कई गुना अधिक फल मिलता है। गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए पीले वस्त्र, चने की दाल, या पीले फलों का दान किसी जरूरतमंद को करना चाहिए। दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

क्या बिना व्रत रखे भी इस दिन का लाभ मिल सकता है?

हां, यदि आप स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से व्रत नहीं रख सकते, तो भी आप पूजा कर सकते हैं। दिन भर सात्विक भोजन करें, चावल और तामसिक चीजों से दूर रहें। सच्चे मन से की गई प्रार्थना और सात्विक जीवन शैली भी आपको उतना ही शुभ फल देती है।

देवउठनी एकादशी और देवशयनी एकादशी में क्या अंतर है?

देवशयनी एकादशी आषाढ़ महीने में आती है, जिस दिन भगवान चार महीने के लिए योग निद्रा में जाते हैं और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। इसके विपरीत, देवउठनी एकादशी कार्तिक महीने में आती है, जब भगवान जागते हैं। इसी दिन से सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

परंपरागत रूप से यह व्रत काफी कठिन होता है। यदि आप गर्भवती हैं, तो आपको अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। आप चाहें तो बिना भूखे रहे, केवल सात्विक भोजन खाकर भी पूजा का हिस्सा बन सकती हैं।

गुरु ग्रह (Jupiter) का इस एकादशी से क्या संबंध है?

ज्योतिष में गुरु ग्रह को विवाह, ज्ञान और शुभ कार्यों का कारक माना गया है। चतुर्मास के दौरान गुरु का प्रभाव धीमा रहता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागने के साथ ही गुरु ग्रह पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है, जिससे शादियों और मांगलिक कार्यों के योग बनते हैं।

क्या इस दिन बाल और नाखून काटे जा सकते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन बाल धोना, बाल काटना या नाखून काटना वर्जित माना जाता है। यह नियम शरीर और मन की शुद्धि के लिए बनाए गए हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप ये सभी कार्य एकादशी से एक दिन पहले ही पूरे कर लें।

अगर पारण के समय व्रत न खोल पाएं तो क्या होगा?

व्रत का पारण सही मुहूर्त में करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी कारणवश आप सही समय पर व्रत नहीं खोल पाते हैं, तो व्रत को अपूर्ण माना जाता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में भगवान से क्षमा मांगकर सात्विक भोजन के साथ अपना व्रत खोल लेना चाहिए।

अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?

वैदिक पंचांग पूरी तरह से खगोलीय घटनाओं, जैसे सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होता है। चूंकि दिल्ली, मुंबई या कोलकाता में सूर्योदय अलग-अलग समय पर होता है, इसलिए तिथियों का समय भी बदल जाता है। इसी वजह से ऊपर दी गई टेबल आपके शहर का सटीक समय दिखाती है।

बेंगलुरु में आने वाले त्योहार

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