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बेंगलुरु में शरद नवरात्रि

रविवार, 11 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस साल शरद नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 को शुरू हो रही है। यह अश्विन शुक्ल प्रतिपदा का दिन है, जब हम माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और घटस्थापना करते हैं। कलश स्थापना का सही मुहूर्त आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं। पूरे नौ दिन व्रत और सात्विक नियमों का पालन किया जाता है।

🕐 बेंगलुरु के लिए शरद नवरात्रि का समय

तिथिPratipada (Shukla Paksha)21:31 तक
नक्षत्रChitra, पाद 222:32 तक
योग · करणVaidhriti · Kimstughna
अभिजित मुहूर्त11:41-12:29
राहुकाल16:30-17:59
यमगंड · गुलिक12:05-13:33 · 15:02-16:30
सूर्योदय · सूर्यास्त06:12 · 17:59

बेंगलुरु (12.9716, 77.5946) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

शरद नवरात्रि पर क्या करें

  1. पूजा की जगह को साफ करके गंगाजल छिड़कें और पवित्र करें।
  2. एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माँ दुर्गा की तस्वीर रखें।
  3. मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं और उसके बीच कलश स्थापित करें।
  4. कलश में जल, सिक्का, हल्दी की गांठ, सुपारी और आम के पत्ते डालें।
  5. कलश के ऊपर लाल चुनरी में लपेटा हुआ एक जटा वाला नारियल रखें।
  6. माता को रोली, अक्षत, लाल फूल और मिठाई अर्पित करें।
  7. धूप और घी का दीपक जलाकर सच्चे मन से माता की आरती करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Pratipada pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). Ghatasthapana is paraviddha: when Ashwin Shukla Pratipada prevails at sunrise on two days, the later is taken.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में शरद नवरात्रि का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
बेंगलुरु06:1211:41-12:2916:30-17:59
दिल्ली एनसीआर06:2311:44-12:3016:25-17:52
मुंबई06:3512:01-12:4816:47-18:15
नोएडा06:2211:43-12:2916:24-17:51
गुरुग्राम06:2311:45-12:3116:26-17:53
हैदराबाद06:1111:38-12:2516:25-17:53
पुणे06:3011:57-12:4316:43-18:11
कोलकाता05:3510:59-11:4615:44-17:11
चेन्नई06:0211:31-12:1816:19-17:48
अहमदाबाद06:3812:02-12:4916:47-18:14

शरद नवरात्रि क्यों मनाया जाता है

शरद नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत गहरा महत्व है। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि नौ दिनों तक चलने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा है। अश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन माता के एक खास रूप को समर्पित होता है, जो हमें जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझने और उन्हें बेहतर बनाने की शक्ति देता है। नवरात्रि साल में चार बार आती है, लेकिन शरद नवरात्रि को सबसे मुख्य और प्रभावशाली माना गया है। यह वह समय है जब मौसम बदल रहा होता है, सर्दियां दस्तक दे रही होती हैं, और प्रकृति एक नया रूप ले रही होती है। ऐसे समय में व्रत और पूजा करने से हमारा शरीर और मन दोनों इस बदलाव के लिए तैयार होते हैं। यह मौसम हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत संवेदनशील होता है, इसलिए व्रत रखने से शरीर शुद्ध होता है। इस त्योहार का सीधा संबंध चंद्रमा से भी है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता और शांति का कारक माना गया है। शरद ऋतु में चंद्रमा अपनी पूरी शक्ति और शीतलता के साथ चमकता है। जब हम इन नौ दिनों में माता की आराधना करते हैं, तो चंद्रमा के प्रभाव से हमारे मन की उलझनें दूर होती हैं। जो लोग बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं, जिन्हें नींद नहीं आती, या जिनका मन अशांत रहता है, उनके लिए यह समय ध्यान और पूजा के जरिए मानसिक शांति पाने का बहुत अच्छा अवसर होता है। चंद्रमा का मजबूत होना हमारे आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। पुराणों के अनुसार, इन्हीं नौ दिनों में माँ दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस से युद्ध किया था और दसवें दिन उसका वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी। इसलिए यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हम सच्चाई के रास्ते पर हैं, तो जीत हमारी ही होगी। माता की शक्ति हमें जीवन की हर चुनौती से लड़ने का साहस देती है। पारंपरिक रूप से लोग इन दिनों में अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। जौ बोने की परंपरा भी यह दिखाती है कि हम प्रकृति से जुड़े हुए हैं और माता से प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर में हमेशा सुख, शांति और अन्न की कमी न रहे। यह नौ दिन खुद को भीतर से साफ करने, अपनी बुरी आदतों को छोड़ने और एक नई शुरुआत करने का समय है।

🪔 शरद नवरात्रि पूजा विधि

  1. तैयारी और शुद्धिसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा घर की सफाई करके पूरे स्थान पर गंगाजल छिड़कें।
  2. चौकी सजानाएक लकड़ी की चौकी लें और उस पर साफ लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसे पूजा के मुख्य स्थान पर रखें।
  3. मूर्ति स्थापनाचौकी पर माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को पूरे सम्मान के साथ स्थापित करें।
  4. कलश की तैयारीएक मिट्टी या तांबे का कलश लें। उसमें शुद्ध जल, थोड़ा सा गंगाजल, एक सिक्का, हल्दी की गांठ और सुपारी डालें।
  5. पल्लव और नारियलकलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच पत्ते (पल्लव) रखें। एक जटा वाले नारियल को लाल चुनरी और कलावा से लपेटकर कलश के ऊपर रखें।
  6. जौ बोना (खेतरी)मिट्टी के एक चौड़े बर्तन में साफ मिट्टी डालें और उसमें जौ बो दें। इस बर्तन के बीच में तैयार किया हुआ कलश स्थापित करें।
  7. संकल्प लेनादाहिने हाथ में थोड़ा सा जल, फूल और चावल लेकर नौ दिन की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
  8. आह्वान और पूजनमाँ दुर्गा का आह्वान करें। उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल और चुनरी अर्पित करें।
  9. भोग लगानामाता को ताजे फल, मिठाई और मेवे का भोग लगाएं। हर दिन माता के अलग-अलग स्वरूप के हिसाब से भी भोग लगाया जा सकता है।
  10. आरती और प्रार्थनाधूप और घी का दीपक जलाकर माता की आरती करें। अंत में अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और पूरे परिवार के लिए प्रार्थना करें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह पर माता की तस्वीर के सामने शांत मन से बैठें।
  2. माता को लाल फूल, रोली, अक्षत और एक लाल चुनरी अर्पित करें।
  3. एक घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर पूजा का माहौल बनाएं।
  4. माता को फल या घर में बनी किसी सात्विक मिठाई का भोग लगाएं।
  5. सच्चे मन से माता की आरती करें और दिन भर के लिए उनका आशीर्वाद लें।

🛒 शरद नवरात्रि पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति
  • लाल कपड़ा
  • कलश (मिट्टी या तांबे का)
  • जटा वाला नारियल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • जौ
  • मिट्टी का बर्तन (जौ बोने के लिए)
  • रोली
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • कलावा (मौली)
  • लाल फूल
  • धूप
  • घी
  • दीपक
  • प्रसाद (फल या मिठाई)

वैकल्पिक

  • लाल चुनरी
  • श्रृंगार का सामान (बिंदी, चूड़ी, सिंदूर)
  • पान के पत्ते
  • लौंग
  • इलायची
  • सुपारी
  • कपूर
  • पंचामृत

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर आम के पत्ते न मिलें, तो अशोक के पत्ते पारंपरिक रूप से मान्य हैं।
  • अगर मिट्टी का कलश न हो, तो तांबे या पीतल का कलश इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अगर लाल फूल न मिलें, तो कोई भी साफ और ताजे फूल चढ़ाए जा सकते हैं।
  • अगर जौ बोने के लिए मिट्टी का बर्तन न हो, तो किसी भी साफ चौड़े बर्तन का उपयोग किया जा सकता है।

🌙 शरद नवरात्रि व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत अश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ शुरू होता है और पूरे नौ दिन चलता है।

क्या खा सकते हैं

  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • साबूदाना
  • समा के चावल
  • आलू
  • शकरकंद
  • सभी तरह के ताजे फल
  • दूध
  • दही
  • पनीर
  • सेंधा नमक

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अनाज (गेहूं, चावल)
  • दालें
  • साधारण नमक
  • प्याज
  • लहसुन
  • मांस
  • मदिरा
  • किसी भी तरह का तामसिक भोजन

पारण: व्रत का पारण नवमी या दशमी के दिन कन्या पूजन करने और माता को विदा करने के बाद किया जाता है, जिसका सही समय ऊपर टेबल में देखा जा सकता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और वे लोग जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह नौ दिन का कठिन व्रत नहीं करना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं।

शरद नवरात्रि: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं नवरात्रि के दौरान बाल धो सकती हूँ?

पारंपरिक रूप से व्रत रखने वाली महिलाओं को पहले दिन कलश स्थापना से पहले बाल धोने की सलाह दी जाती है। व्रत के बीच में बाल धोना आमतौर पर वर्जित माना जाता है।

क्या व्रत में सेंधा नमक रोज खा सकते हैं?

जी हां, अगर आप फलाहारी व्रत रख रहे हैं, तो आप दिन में एक बार सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं। यह पूरी तरह सात्विक माना जाता है।

क्या नवरात्रि में नाखून और बाल काटना मना है?

हां, हिंदू मान्यताओं के अनुसार इन नौ दिनों में बाल कटवाना, शेविंग करना या नाखून काटना पूरी तरह मना होता है। इसे पूजा के नियमों के खिलाफ माना जाता है।

क्या इन नौ दिनों में यात्रा की जा सकती है?

अगर आपने घर में कलश स्थापना की है या अखंड ज्योत जलाई है, तो घर को खाली छोड़कर लंबी यात्रा पर नहीं जाना चाहिए। जरूरी काम से छोटी यात्रा की जा सकती है।

क्या मैं नवरात्रि में नया काम या बिजनेस शुरू कर सकता हूँ?

बिल्कुल, नवरात्रि के नौ दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं। इस दौरान कोई भी नया काम या बिजनेस शुरू करना माता के आशीर्वाद से सफलता लेकर आता है।

क्या व्रत के दौरान दिन में सोना चाहिए?

पारंपरिक नियमों के अनुसार व्रत के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए। इसके बजाय खाली समय में माता के भजन या मंत्रों का जाप करना ज्यादा अच्छा माना जाता है।

क्या नवरात्रि में नई गाड़ी या सामान खरीद सकते हैं?

हां, नवरात्रि में नई गाड़ी, घर का सामान या प्रॉपर्टी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। यह घर में सुख और समृद्धि का प्रतीक है।

क्या कलश स्थापना रात में की जा सकती है?

जी नहीं, कलश स्थापना हमेशा सुबह के शुभ मुहूर्त में ही की जाती है। इसका सही समय आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।

क्या व्रत न रखने वाले परिवार के सदस्य प्याज-लहसुन खा सकते हैं?

अगर घर में कलश स्थापना हुई है, तो पूरे परिवार को सात्विक भोजन ही करना चाहिए। घर में प्याज-लहसुन पकाना या बाहर से लाकर खाना पूजा की पवित्रता को कम करता है।

क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान नवरात्रि की पूजा कर सकते हैं?

इस दौरान पूजा के बर्तन या माता की मूर्ति को छूना मना होता है। आप दूर बैठकर मानसिक रूप से माता का ध्यान कर सकती हैं और घर का कोई अन्य सदस्य पूजा कर सकता है।

क्या व्रत में चाय या कॉफी पी जा सकती है?

हां, व्रत के दौरान चाय या कॉफी पी जा सकती है, लेकिन इसे बहुत ज्यादा पीने से बचना चाहिए क्योंकि खाली पेट यह एसिडिटी कर सकती है।

क्या नौ दिन तक अखंड ज्योत जलाना जरूरी है?

अखंड ज्योत जलाना अनिवार्य नहीं है, यह आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है। अगर आप इसे जलाते हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि वह नौ दिनों तक बुझने न पाए।

क्या मैं सिर्फ पहले और आखिरी दिन व्रत रख सकता हूँ?

हां, अगर आपके लिए पूरे नौ दिन व्रत रखना संभव नहीं है, तो आप प्रतिपदा (पहले दिन) और अष्टमी या नवमी के दिन व्रत रखकर भी माता की कृपा पा सकते हैं।

⚠️ आम गलतियाँ

  • कलश स्थापना का मुहूर्त निकल जाने के बाद पूजा करने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • अखंड ज्योत को बीच में बुझने देना या उसे अकेला छोड़ देना एक सामान्य भूल है जिससे पूजा अधूरी रह जाती है।
  • जौ बोने के बाद उसमें जरूरत से ज्यादा या बहुत कम पानी डालने से वे ठीक से नहीं उगते, जिसे अच्छा नहीं माना जाता।
  • माता की चौकी पर गंदे या बिना धुले कपड़े बिछाने से पूजा की पवित्रता कम हो जाती है।
  • व्रत के दौरान क्रोध करने या किसी का अपमान करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता ऐसा माना गया है।
  • कन्या पूजन में कन्याओं को बिना आदर सत्कार के सिर्फ खाना खिलाकर विदा करने से अनुष्ठान पूरा नहीं होता।
  • कलश के ऊपर रखे नारियल की दिशा गलत रखने से पारंपरिक नियमों का उल्लंघन होता है।

📖 शरद नवरात्रि कथा

शरद नवरात्रि से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा की है। प्राचीन काल में रंभासुर का पुत्र महिषासुर नाम का एक बेहद शक्तिशाली राक्षस था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और उनसे वरदान मांगा कि कोई भी देवता, दानव या मनुष्य उसे मार न सके। ब्रह्मा जी ने उसकी तपस्या से खुश होकर उसे यह वरदान दे दिया। वरदान पाकर महिषासुर बहुत घमंडी हो गया। उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया और स्वर्ग पर हमला करके इंद्र देव और बाकी सभी देवताओं को वहां से बाहर निकाल दिया। परेशान होकर सभी देवता त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव)—के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई। महिषासुर के अत्याचारों के बारे में सुनकर त्रिदेवों को बहुत क्रोध आया। उनके और बाकी सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य तेज निकला। यह सारा तेज एक जगह इकट्ठा हुआ और उससे एक बेहद खूबसूरत और शक्तिशाली देवी का जन्म हुआ, जिन्हें हम माँ दुर्गा के नाम से जानते हैं। शिव जी ने माता को अपना त्रिशूल दिया, विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र, इंद्र ने वज्र, वरुण देव ने शंख, और इसी तरह सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र माता को सौंप दिए। हिमालय पर्वत ने माता को सवारी के लिए एक शेर दिया। इसके बाद माँ दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। महिषासुर और माँ दुर्गा के बीच पूरे नौ दिनों तक भयंकर युद्ध चला। महिषासुर बार-बार अपना रूप बदल रहा था। कभी वह भैंसा बन जाता, कभी शेर, तो कभी हाथी बनकर माता पर हमला करता। लेकिन माता ने उसके हर वार को विफल कर दिया। दसवें दिन, जैसे ही महिषासुर ने फिर से भैंसे का रूप लिया, माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उसकी छाती पर वार किया और उसका वध कर दिया। इसीलिए माँ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है। इन नौ दिनों तक चले युद्ध की याद में ही नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। यह कथा हमें यह विश्वास दिलाती है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और धर्म की ही होती है।

🪔 आरती

नवरात्रि में माता की आरती दिन में दो बार की जाती है—एक बार सुबह की पूजा के बाद और दूसरी बार शाम को सूर्यास्त के बाद। आरती करते समय एक साफ थाली में घी का दीपक, कपूर और कुछ फूल रखें। पूरे परिवार के साथ मिलकर सच्चे मन से माता की आरती गाएं। आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले माता को आरती दें, फिर पूरे घर में उस दीपक की रोशनी दिखाएं और अंत में सभी सदस्य माता का आशीर्वाद लें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार शरद नवरात्रि के उपाय

आर्थिक परेशानी और धन की कमी

आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए नवरात्रि के दौरान चंद्रमा को मजबूत करना बहुत लाभदायक माना गया है। शाम के समय माता को सफेद रंग की मिठाई जैसे रसगुल्ला या खीर का भोग लगाएं। चंद्रमा धन और मन की शांति का कारक है, इसलिए इस उपाय से घर में बरकत आती है और बेवजह के खर्चे रुकते हैं।

करियर और नौकरी में रुकावट

अगर नौकरी या व्यापार में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो नवरात्रि के नौ दिन माता के सामने एक घी का दीपक जलाएं और उसमें दो लौंग डाल दें। चंद्रमा की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए कार्यस्थल पर साफ-सफाई रखें। इससे आपका मन काम में लगेगा, सही फैसले लेने की क्षमता बढ़ेगी और करियर में तरक्की के रास्ते खुलेंगे।

विवाह में देरी या रिश्ते टूटना

विवाह में देरी हो रही है या रिश्ते टूट रहे हैं, तो नवरात्रि में माता को लाल चुनरी और श्रृंगार का पूरा सामान अर्पित करें। चूंकि इस त्योहार का संबंध चंद्रमा से है, जो भावनाओं को नियंत्रित करता है, इसलिए माता से प्रार्थना करने से रिश्तों में आ रही कड़वाहट दूर होती है और एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश पूरी होती है।

संतान से जुड़ी चिंताएं

संतान से जुड़ी चिंताओं के लिए यह समय बहुत खास है। माता को साबूदाने की खीर का भोग लगाएं और इसे प्रसाद के रूप में बच्चों को खिलाएं। चंद्रमा का संबंध पोषण और मातृत्व से है। यह उपाय बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उनके मन को शांत रखने में मदद करता है, जिससे वे पढ़ाई में भी ध्यान लगा पाते हैं।

घर में क्लेश और अशांति

घर में अगर हमेशा क्लेश रहता है या शांति नहीं है, तो नवरात्रि के दौरान हर शाम घर के मुख्य दरवाजे पर दोनों तरफ घी के दीपक जलाएं। चंद्रमा मन का कारक है, और माता की कृपा से घर के सदस्यों के बीच आपसी समझ बढ़ती है। इससे घर का माहौल सकारात्मक होता है और परिवार में प्रेम बना रहता है।

नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष

अगर आपको लगता है कि घर में कोई नकारात्मक ऊर्जा है या नजर लग गई है, तो नवरात्रि के दौरान कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। चंद्रमा की शीतलता और माता की शक्ति मिलकर आपके घर से हर तरह की नकारात्मकता को बाहर निकालती है और एक सुरक्षित, शांत वातावरण तैयार करती है।

क्या शरद नवरात्रि आपके लिए विशेष है?

त्योहारों के उपाय और चंद्रमा से जुड़े ये नियम प्रभावशाली होते हैं, लेकिन ये सामान्य बातें हैं जो हर किसी पर लागू होती हैं। इंटरनेट की कोई भी जानकारी आपकी अपनी जन्म कुंडली का विकल्प नहीं हो सकती। हो सकता है कि आपकी परेशानी की असली वजह आपके ग्रहों की कोई विशेष दशा हो, जो सिर्फ आपके लिए है। यहीं पर व्यक्तिगत परामर्श काम आता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी नौकरी कब लगेगी या आर्थिक स्थिति कब सुधरेगी, तो Kundli रीडिंग से स्पष्ट जवाब मिलता है। विवाह में आ रही अड़चनों के लिए Kundali Milan सही रास्ता दिखाता है। जीवन के अन्य सवालों के लिए Hastrekha विश्लेषण आपकी मदद कर सकता है। वहीं, अगर आपको अजीब सपने परेशान करते हैं, तो Swapna Shastra आपके मन की उलझनों को सुलझाता है। त्रिकाल वाणी पर हम आपकी कुंडली देखकर आपको आपकी अपनी जिंदगी का सच बताते हैं।

बेंगलुरु में शरद नवरात्रि — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शरद नवरात्रि 2026 में कब से शुरू हो रही है?

इस साल शरद नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 को शुरू हो रही है। यह अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे नौ दिनों तक चलती है। इसी दिन सुबह कलश स्थापना की जाती है और माता के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है।

कलश स्थापना या घटस्थापना का सही मुहूर्त क्या है?

कलश स्थापना का सही मुहूर्त हर शहर के सूर्योदय और पंचांग के हिसाब से थोड़ा अलग होता है। आप इस पेज पर ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर का सटीक मुहूर्त देख सकते हैं। यह समय विशेष रूप से स्विस एफेमेरिस और वैदिक नियमों के आधार पर निकाला गया है ताकि आपसे कोई चूक न हो।

नवरात्रि के पहले दिन मुख्य रूप से क्या किया जाता है?

नवरात्रि के पहले दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई करके पूजा का स्थान पवित्र किया जाता है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना की जाती है और मिट्टी में जौ बोए जाते हैं। फिर माँ दुर्गा का आह्वान करके उन्हें फल, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है और नौ दिन के व्रत का संकल्प लिया जाता है।

क्या इन नौ दिनों में प्याज और लहसुन खाना पूरी तरह मना है?

जी हां, पारंपरिक नियमों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों तक प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है, जो मन में चंचलता और क्रोध बढ़ाते हैं। अगर आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए।

नवरात्रि का व्रत कैसे रखा जाता है और इसके नियम क्या हैं?

नवरात्रि का व्रत प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ शुरू होता है। कुछ लोग पूरे नौ दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के दौरान सादगी से रहना, जमीन पर सोना और माता के भजनों में ध्यान लगाना अच्छा माना जाता है।

व्रत के दौरान मैं कौन-कौन सी चीजें खा सकता हूँ?

व्रत के दौरान आप कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें, साबूदाना, और समा के चावल खा सकते हैं। इसके अलावा सभी तरह के ताजे फल, दूध, दही, पनीर और आलू का सेवन भी किया जा सकता है। बस यह ध्यान रखें कि खाने में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का ही इस्तेमाल हो।

कलश स्थापना के लिए कौन सी सामग्री सबसे ज्यादा जरूरी है?

कलश स्थापना के लिए आपको एक मिट्टी या तांबे का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल, और आम या अशोक के पत्ते चाहिए। इसके साथ ही एक जटा वाला नारियल, लाल चुनरी, कलावा, और जौ बोने के लिए मिट्टी का बर्तन भी आवश्यक है। रोली, अक्षत और ताजे फूल भी पूजा की थाली में जरूर होने चाहिए।

नवरात्रि में जौ (खेतरी) क्यों बोए जाते हैं?

जौ बोने की परंपरा हमें प्रकृति और खेती से जोड़ती है, क्योंकि यह हमारी सबसे पहली फसल मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जौ जितनी तेजी से और हरे-भरे उगते हैं, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है। यह माता से प्रार्थना करने का एक तरीका है कि हमारे घर में कभी अन्न की कमी न रहे।

शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर होता है?

चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है और इसके आखिरी दिन राम नवमी मनाई जाती है, जबकि शरद नवरात्रि सर्दियों की शुरुआत में आती है। शरद नवरात्रि को सबसे बड़ा और मुख्य माना जाता है, जिसके दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दोनों ही नवरात्रियों में माता के नौ रूपों की पूजा होती है, लेकिन शरद नवरात्रि का उत्सव ज्यादा भव्य होता है।

क्या मैं नवरात्रि के दौरान नया बिजनेस शुरू कर सकता हूँ?

नवरात्रि के नौ दिनों को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और पवित्र माना गया है। इन दिनों में किसी भी नए काम या बिजनेस की शुरुआत करना बहुत अच्छा माना जाता है। माता के आशीर्वाद से नए काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए कई लोग इन दिनों का खास इंतजार करते हैं।

क्या इन नौ दिनों में नई गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदना शुभ होता है?

बिल्कुल, नवरात्रि के दौरान नई गाड़ी, घर का सामान, या प्रॉपर्टी खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। चूंकि यह समय नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए लोग इस दौरान जमकर खरीदारी करते हैं। माता की कृपा से खरीदी गई चीजें घर में बरकत और खुशियां लेकर आती हैं।

पूजा के दौरान माता का कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

इस पेज पर हमने कोई खास मंत्र नहीं दिया है क्योंकि हर व्यक्ति की श्रद्धा और परंपरा अलग होती है। आप माता का कोई भी सरल मंत्र जो आपको याद हो, जैसे "जय माता दी" या "ओम दुं दुर्गायै नमः" का जाप कर सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि आपका मन साफ हो और आप पूरी श्रद्धा के साथ माता को याद करें।

क्या मैं अपने शहर के हिसाब से पूजा का समय बदल सकता हूँ?

जी नहीं, पूजा और कलश स्थापना का मुहूर्त सूर्योदय और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है, जो हर शहर के लिए अलग होता है। दिल्ली का मुहूर्त मुंबई या पटना में पूरी तरह सही नहीं बैठेगा। इसलिए हमेशा अपने शहर के लिए निकाले गए सटीक मुहूर्त का ही पालन करना चाहिए, जो आप ऊपर टेबल में देख सकते हैं।

नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या महत्व है और यह कब होता है?

कन्या पूजन आमतौर पर अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है, जिसमें छोटी बच्चियों को माता का रूप मानकर पूजा जाता है। उनके पैर धोकर उन्हें सम्मान के साथ बैठाया जाता है और हलवा, पूरी, चने का भोग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कन्याओं को प्रसन्न करने से माता दुर्गा सीधे तौर पर अपना आशीर्वाद देती हैं।

नवरात्रि के दौरान किस चीज का दान करना सबसे अच्छा माना गया है?

नवरात्रि में अन्न, वस्त्र और शिक्षा से जुड़ी चीजों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप किसी गरीब को फल, मिठाई या लाल रंग के कपड़े दान कर सकते हैं। इसके अलावा कन्याओं को पढ़ाई की चीजें जैसे किताबें या स्टेशनरी देना भी माता को बहुत प्रसन्न करता है।

महिषासुर मर्दिनी की कथा का असली संदेश क्या है?

महिषासुर मर्दिनी की कथा हमें यह सिखाती है कि अहंकार और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। जब सारी शक्तियां एक साथ मिलती हैं, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल को हराया जा सकता है। यह कथा हमें मुश्किल समय में हिम्मत न हारने और हमेशा सच्चाई का साथ देने की प्रेरणा देती है।

अगर मैं पूरे नौ दिन व्रत न रख पाऊं तो क्या करूं?

अगर आपकी सेहत या काम आपको पूरे नौ दिन का व्रत रखने की इजाजत नहीं देता, तो इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है। आप सिर्फ पहले दिन (प्रतिपदा) और अष्टमी या नवमी के दिन व्रत रख सकते हैं। माता सिर्फ आपकी सच्ची श्रद्धा देखती हैं, इसलिए जितने दिन संभव हो, उतने दिन सात्विक रहें और पूजा करें।

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए नवरात्रि में क्या उपाय करें?

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए नवरात्रि में चंद्रमा को मजबूत करने वाले उपाय किए जाते हैं। आप माता को सफेद मिठाई जैसे रसगुल्ला या साबूदाने की खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक जलाना भी पैसों की आवक बढ़ाने में मदद करता है।

क्या पीरियड्स के दौरान नवरात्रि का व्रत और पूजा की जा सकती है?

पारंपरिक नियमों के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पूजा के बर्तन या माता की मूर्ति को छूने से मना किया जाता है। हालांकि, आप मन ही मन माता का ध्यान कर सकती हैं और मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकती हैं। घर का कोई अन्य सदस्य आपकी तरफ से कलश स्थापना और रोज की आरती कर सकता है।

नवरात्रि के व्रत का पारण (व्रत खोलना) कैसे और कब किया जाता है?

व्रत का पारण यानी व्रत खोलना आमतौर पर नवमी या दशमी के दिन कन्या पूजन के बाद किया जाता है। पारण का सही समय पंचांग के अनुसार तय होता है, जिसे आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं। व्रत खोलने के लिए माता का प्रसाद ग्रहण किया जाता है और उसके बाद सात्विक भोजन किया जाता है।

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