चेन्नई · Tamil Nadu

चेन्नई में दशहरा

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

दशहरा इस साल 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान राम और माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। लोग रावण दहन करते हैं, शमी के पत्ते बांटते हैं और नए काम की शुरुआत करते हैं। पूजा का सटीक समय ऊपर टेबल में दिया गया है।

🕐 चेन्नई के लिए दशहरा का समय

सूर्योदय की तिथिNavami (Shukla Paksha)12:50 तक
पर्व की तिथिDashami 12:50 से
नक्षत्रShravana, पाद 318:02 तक
योग · करणShula · Kaulava
पूजा मुहूर्त13:03-15:23 (अपराह्न)
अभिजित मुहूर्त11:29-12:16
राहुकाल14:48-16:15
यमगंड · गुलिक08:58-10:25 · 11:53-13:20
सूर्योदय · सूर्यास्त06:03 · 17:43

चेन्नई (13.0827, 80.2707) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

दशहरा पर क्या करें

  1. पूजा की थाली में शमी के पत्ते और अपराजिता के फूल रखें।
  2. भगवान राम और माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  3. केसरिया और लाल रंग के कपड़े पहनें या भगवान को अर्पित करें।
  4. अपने वाहन, औजारों और किताबों की पूजा करें।
  5. ॐ श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का जाप करें।
  6. पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें और शमी पत्र दें।
  7. रावण दहन के बाद शांति से घर लौटें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Dashami pervades aparahna kaal on more than one day (2026-10-20 100%, 2026-10-21 43%) — tithi-vriddhi. The rule named for this festival takes the earlier day. Vijaya muhurta falls in aparahna, so Ashwin Shukla Dashami is judged in the afternoon quarter. Shukla Dashami is purva-viddha — “संपूर्णे दशमी कार्या मिश्रिता, पूर्वेयाथवा” — so when two afternoons qualify the earlier is taken. Alternative reckoning: Alternative reckoning observance falls on 21 Oct 2026 this year, since both days carry vyapti.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में दशहरा का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
चेन्नई06:0311:29-12:1614:48-16:15
दिल्ली एनसीआर06:2811:42-12:2714:53-16:17
मुंबई06:3711:59-12:4515:15-16:41
नोएडा06:2711:42-12:2714:53-16:17
गुरुग्राम06:2911:43-12:2814:54-16:18
बेंगलुरु06:1411:40-12:2714:59-16:26
हैदराबाद06:1311:36-12:2314:53-16:20
पुणे06:3311:55-12:4215:12-16:38
कोलकाता05:3810:57-11:4314:11-15:37
अहमदाबाद06:4212:01-12:4615:15-16:40

दशहरा क्यों मनाया जाता है

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। यह अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान राम और माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। भगवान राम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध किया था। दूसरी ओर, माँ दुर्गा ने नौ दिनों के भयंकर युद्ध के बाद महिषासुर नाम के राक्षस का अंत किया था। इसलिए, पश्चिम बंगाल में इसे Bijoya Dashami (বিজয়া দশমী) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। तेलंगाना में इसे Dasara (దసరా) और कर्नाटक में Mysuru Dasara (ಮೈಸೂರು ದಸರಾ) के नाम से जाना जाता है, जहाँ इसकी रौनक देखने लायक होती है। ज्योतिष के अनुसार, दशहरे का ruling planet सूर्य (Sun) है। सूर्य आत्मा, शक्ति, नेतृत्व और विजय का कारक है। जब आप इस दिन भगवान राम की पूजा करते हैं, तो सूर्य ग्रह की ऊर्जा आपके जीवन में सकारात्मकता लाती है। यह दिन करियर में सफलता और दुश्मनों पर जीत (Victory over enemies) पाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन नए काम की शुरुआत करना बहुत अच्छा माना जाता है। लोग अपने वाहनों, हथियारों और औजारों की पूजा करते हैं। इसे आयुध पूजा भी कहते हैं। इसके पीछे की सोच यह है कि जो चीजें हमारे काम आती हैं, हम उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें। विद्यार्थी अपनी किताबों की पूजा करते हैं और माँ सरस्वती से ज्ञान का आशीर्वाद मांगते हैं। शमी के पेड़ की पूजा का भी इस दिन खास महत्व है। महाभारत काल में पांडवों ने अपने हथियार शमी के पेड़ पर ही छिपाए थे। इसलिए लोग शमी के पत्ते एक-दूसरे को देकर सम्मान और प्यार बांटते हैं। इसे सोने की पत्ती भी कहा जाता है। इस साल दशमी तिथि दो दिन दोपहर (aparahna kaal) में पड़ रही है। पंचांग के नियमों और tithi-vriddhi के कारण, जब दशमी purva-viddha होती है, तो पहले दिन को ही मुख्य माना जाता है। इसलिए मुख्य पूजा 20 अक्टूबर 2026 को होगी। हालांकि, कुछ जगहों पर alternative reckoning के अनुसार इसे 21 अक्टूबर को भी मनाया जा सकता है। आपके शहर का सटीक muhurat और timing ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

🪔 दशहरा पूजा विधि

  1. स्नान और तैयारीसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। केसरिया या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
  2. पूजा स्थान की सफाईघर के मंदिर या पूजा की जगह को अच्छे से साफ करें। वहां एक छोटी चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  3. मूर्ति स्थापनाचौकी पर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी और माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  4. आयुध और वाहन पूजाअपने काम के औजार, लैपटॉप, वाहन और बच्चों की किताबों को पूजा स्थान के पास रखें। उन पर तिलक लगाएं।
  5. फूल और पत्ते अर्पित करनाभगवान को अपराजिता के फूल और शमी के पत्ते चढ़ाएं। यह इस दिन की विशेष परंपरा है।
  6. धनुष-बाण चढ़ानाभगवान राम की पूजा में एक छोटा सा धनुष और बाण अर्पित करें। यह बुराई पर जीत का प्रतीक है।
  7. मंत्र जापहाथ में फूल लेकर 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का जाप करें।
  8. आरती करनाधूप और दीप जलाकर भगवान राम और माँ दुर्गा की आरती करें।
  9. प्रसाद वितरणपूजा के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रसाद बांटें।
  10. शमी पत्र का आदान-प्रदानशाम के समय बड़ों के पैर छूकर उन्हें शमी के पत्ते दें और उनका आशीर्वाद लें।

5-मिनट विधि

  1. साफ कपड़े पहनकर भगवान राम और माँ दुर्गा की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
  2. भगवान को अपराजिता के फूल और शमी के पत्ते अर्पित करें।
  3. अपने काम के औजारों, लैपटॉप या किताबों पर रोली से तिलक करें।
  4. ॐ श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का 11 बार जाप करें।
  5. भगवान को प्रणाम करके अपने काम की शुरुआत करें।

🛒 दशहरा पूजा सामग्री

आवश्यक

  • भगवान राम और माँ दुर्गा की तस्वीर
  • रोली और चावल (अक्षत)
  • दीपक और घी
  • शमी के पत्ते
  • अपराजिता के फूल
  • लाल या केसरिया कपड़ा

वैकल्पिक

  • छोटा धनुष और बाण
  • नई किताबें
  • मिठाई
  • धूप बत्ती
  • कलश

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर अपराजिता के फूल न मिलें, तो कोई भी लाल या पीले फूल इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
  • अगर शमी के पत्ते न मिलें, तो आम या अशोक के पत्तों से काम चलाया जा सकता है।
  • अगर छोटा धनुष-बाण न हो, तो केवल मन में भगवान राम के स्वरूप का ध्यान करना ही काफी है।

दशहरा: क्या करें और क्या न करें

क्या दशहरे के दिन बाल धो सकते हैं?

हाँ, दशहरे के दिन बाल धोने में कोई मनाही नहीं है। यह एक शुभ दिन है और आप साफ-सफाई के साथ पूजा कर सकते हैं।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

परंपरागत रूप से त्योहार के दिन नाखून काटना अच्छा नहीं माना जाता। इसे एक दिन पहले या बाद में काटना बेहतर है।

क्या दशहरे पर नया काम शुरू कर सकते हैं?

बिल्कुल। दशहरे का दिन नए काम, बिजनेस या प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।

क्या इस दिन गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं?

हाँ, यह दिन खरीदारी के लिए बहुत शुभ है। बहुत से लोग इस दिन नई गाड़ी या प्रॉपर्टी की बुकिंग करते हैं।

क्या दशहरे के दिन यात्रा कर सकते हैं?

हाँ, दशहरे के दिन यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है। इसे 'सीमोल्लंघन' (सीमा पार करना) कहते हैं, जो सफलता का प्रतीक है।

क्या इस दिन नॉन-वेज या शराब का सेवन कर सकते हैं?

नहीं। यह एक पवित्र त्योहार है। इस दिन शराब और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

क्या दशहरे पर बाल कटवा सकते हैं?

आमतौर पर शुभ त्योहारों के दिन बाल कटवाने से बचा जाता है। आप इसे त्योहार के बाद करवा सकते हैं।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

दशहरे की मुख्य पूजा और विजया मुहूर्त दोपहर (aparahna kaal) में होता है। इसलिए पूजा दिन में करना ज्यादा शुभ है।

क्या इस दिन किसी से उधार ले सकते हैं?

त्योहार के दिन उधार लेने या देने से बचना चाहिए। यह दिन समृद्धि का है, इसलिए सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें।

क्या दशहरे पर झाड़ू खरीद सकते हैं?

हाँ, झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। हालांकि यह दीवाली पर ज्यादा आम है, लेकिन दशहरे पर भी इसे खरीदना गलत नहीं है।

क्या इस दिन लड़ाई-झगड़ा करने से कोई दोष लगता है?

हाँ, इस दिन किसी से भी झगड़ा करने या बड़ों का अपमान करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता।

क्या दशहरे के दिन कपड़े धो सकते हैं?

हाँ, आप कपड़े धो सकते हैं। इसमें कोई धार्मिक मनाही नहीं है। साफ-सफाई रखना हमेशा अच्छा होता है।

क्या हम दशहरे पर पुरानी चीजें दान कर सकते हैं?

दान हमेशा अच्छी भावना से करना चाहिए। अगर पुरानी चीजें अच्छी हालत में हैं, तो आप जरूरतमंदों को दे सकते हैं।

क्या दशहरे के दिन सोना खरीदना शुभ है?

हाँ, दशहरे के दिन सोना या चांदी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। यह घर में बरकत लाता है।

क्या करें

  • Worship weapons and vehicles
  • Burn Ravana effigy
  • Exchange Shami leaves
  • Start new ventures

क्या न करें

  • Avoid starting fights
  • Do not insult elders
  • No alcohol

⚠️ आम गलतियाँ

  • पूजा में शमी के पत्ते और अपराजिता के फूल शामिल न करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • अपने काम के औजारों या किताबों की पूजा न करना इस दिन की एक बड़ी चूक मानी जाती है।
  • बड़ों का अपमान करने या उनसे बहस करने से इस शुभ दिन की सकारात्मकता खत्म हो जाती है।
  • रावण दहन के बाद घर लौटते समय पीछे मुड़कर देखने की परंपरा नहीं है, ऐसा करना अधूरापन माना जाता है।
  • पूजा के समय लाल या केसरिया रंग की जगह काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
  • विजया मुहूर्त (दोपहर का समय) में पूजा न करके इसे रात के लिए टालना सही नहीं माना जाता।
  • इस दिन शराब या तामसिक भोजन का सेवन करने से त्योहार का पालन खंडित माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ श्री राम जय राम जय जय राम

भगवान राम की जय हो। यह मंत्र मन को शांति देता है और जीवन में आने वाली हर बाधा पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है।

108 बार (एक माला) पूजा के समय, भगवान राम की मूर्ति के सामने बैठकर।

📖 दशहरा कथा

दशहरे की कथा मुख्य रूप से दो महान घटनाओं से जुड़ी है। पहली कथा भगवान राम की है और दूसरी माँ दुर्गा की। त्रेता युग में, लंका के राजा रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। रावण बहुत ज्ञानी और शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार बहुत बड़ा था। भगवान राम, अपने भाई लक्ष्मण, हनुमान जी और वानर सेना के साथ माता सीता को बचाने के लिए लंका पहुंचे। राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। यह युद्ध कई दिनों तक चला। अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को, भगवान राम ने रावण का वध किया और बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की। इसी जीत की खुशी में हर साल दशहरा मनाया जाता है और रावण के पुतले जलाए जाते हैं ताकि हमें याद रहे कि अहंकार का हमेशा अंत होता है। दूसरी कथा माँ दुर्गा से जुड़ी है। महिषासुर नाम का एक राक्षस था जिसने देवताओं को बहुत परेशान कर रखा था। उसे वरदान था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे नहीं मार सकता। तब सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को मिलाकर माँ दुर्गा का रूप बनाया। माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक लगातार युद्ध चला। दसवें दिन, यानी अश्विन शुक्ल दशमी को, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। इसलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में Bijoya Dashami (বিজয়া দশমী) के दिन माँ दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। महाभारत की एक और कथा भी इस दिन से जुड़ी है। जब पांडवों को अज्ञातवास मिला था, तो उन्होंने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र एक शमी के पेड़ पर छिपा दिए थे। अज्ञातवास खत्म होने के बाद, दशहरे के दिन ही उन्होंने अपने हथियार वापस लिए थे और कौरवों पर जीत हासिल की थी। इसलिए इस दिन शमी के पेड़ की पूजा की जाती है और हथियारों की पूजा (आयुध पूजा) का भी विधान है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है।

🪔 आरती

दशहरे की पूजा के अंत में भगवान राम और माँ दुर्गा की आरती की जाती है। आरती हमेशा परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर करनी चाहिए। एक थाली में घी का दीपक, कपूर और कुछ फूल रखें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें, फिर भगवान राम और माँ दुर्गा की आरती उतारें। आरती के बाद शंख बजाना शुभ माना जाता है। अंत में सभी को आरती दें और प्रसाद बांटें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार दशहरा के उपाय

करियर में रुकावट या नौकरी में परेशानी

दशहरे का ruling planet सूर्य है, जो करियर और सफलता का कारक है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें और अपने काम के औजारों या लैपटॉप की पूजा करें। इससे सूर्य मजबूत होता है और करियर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

दुश्मनों या विरोधियों से परेशानी

अगर आपको कार्यक्षेत्र या निजी जीवन में विरोधियों का सामना करना पड़ रहा है, तो दशहरे के दिन भगवान राम को अपराजिता के फूल अर्पित करें। अपराजिता का मतलब ही है जिसे कोई हरा न सके। यह उपाय आपको दुश्मनों पर जीत (Victory over enemies) दिलाने में मदद करता है।

आर्थिक तंगी या पैसों की कमी

पैसों की समस्या दूर करने के लिए दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करें। शाम के समय शमी के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं और कुछ पत्ते तिजोरी या पैसे रखने की जगह पर रखें। इसे सोने की पत्ती माना जाता है जो बरकत लाती है।

घर में नकारात्मक ऊर्जा या क्लेश

घर से हर तरह की नकारात्मकता दूर करने के लिए दशहरे के दिन 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। सूर्य ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा आपके घर में शांति और खुशहाली लाएगी।

बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता की कमी

दशहरे के दिन माँ सरस्वती की पूजा का भी विधान है। बच्चों की नई किताबों की पूजा करवाएं और उन पर रोली से तिलक लगाएं। भगवान राम को अर्पित किए गए अपराजिता के फूल बच्चों की किताबों में रख दें। इससे उनकी एकाग्रता और ज्ञान में वृद्धि होती है।

आत्मविश्वास की कमी या डर

सूर्य ग्रह आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक है। अगर आपमें आत्मविश्वास की कमी है, तो दशहरे के दिन केसरिया या लाल रंग के कपड़े पहनें। भगवान राम को एक छोटा सा धनुष-बाण अर्पित करें। यह उपाय आपके अंदर के डर को खत्म करके आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

क्या दशहरा आपके लिए विशेष है?

त्योहारों के उपाय और ग्रहों की स्थिति के बारे में जो बातें यहाँ बताई गई हैं, वे सामान्य नियम हैं। दशहरे का ruling planet सूर्य है, जो करियर और सफलता देता है। लेकिन हर इंसान की कुंडली अलग होती है। सूर्य आपकी कुंडली में किस घर में बैठा है, यह आपके जीवन पर सीधा असर डालता है। एक सामान्य लेख यह नहीं बता सकता कि आपके लिए कौन सा समय सबसे अच्छा है। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। अगर आप करियर, पैसे या सही समय (dasha) को लेकर परेशान हैं, तो Kundli रीडिंग आपको सटीक रास्ता दिखा सकती है। शादी या रिश्तों में आ रही उलझनों के लिए Kundali Milan सही जवाब देता है। आपके हाथों की लकीरें क्या कहती हैं, यह Hastrekha से जाना जा सकता है। और अगर आपको बार-बार अजीब सपने आते हैं, तो Swapna Shastra उनका मतलब समझा सकता है। त्रिकाल वाणी (Trikaal Vaani) पर रोहित गुप्ता जी के 16 साल के अनुभव से आप अपने जीवन के इन सवालों के सही और स्पष्ट जवाब पा सकते हैं।

चेन्नई में दशहरा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दशहरा 2026 में कब है?

इस साल दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि दो दिन दोपहर में पड़ रही है, लेकिन नियमों (purva-viddha) के कारण पहले दिन को ही मुख्य माना गया है। कुछ जगहों पर इसे 21 अक्टूबर को भी मनाया जा सकता है।

दशहरे की पूजा का सही समय (muhurat) क्या है?

दशहरे की मुख्य पूजा विजया मुहूर्त में की जाती है, जो दोपहर (aparahna kaal) के समय आता है। आपके शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय, राहु काल और अभिजित मुहूर्त ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है। राहु काल में पूजा करने से बचना चाहिए।

दशहरे के दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन भगवान राम और माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अपने काम के औजारों, वाहनों और किताबों की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। शाम के समय रावण दहन के बाद बड़ों को शमी के पत्ते देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

क्या दशहरे के दिन कोई व्रत रखा जाता है?

दशहरे के दिन आमतौर पर कोई विशेष व्रत नहीं रखा जाता है। यह दिन उत्सव और जीत का है। हालांकि, जो लोग नवरात्रि के पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, वे दशमी के दिन अपना व्रत खोलते (paran) हैं।

दशहरे की पूजा में कौन सी सामग्री जरूरी है?

पूजा के लिए भगवान राम और माँ दुर्गा की तस्वीर, रोली, चावल, दीपक और लाल कपड़ा जरूरी है। इसके अलावा शमी के पत्ते और अपराजिता के फूल इस दिन की विशेष सामग्री हैं। अगर अपराजिता के फूल न मिलें, तो कोई भी लाल फूल इस्तेमाल कर सकते हैं।

दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?

महाभारत काल में पांडवों ने अपने हथियार शमी के पेड़ पर ही छिपाए थे। इसलिए इसे शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। लोग इसके पत्तों को 'सोना' मानकर एक-दूसरे को बांटते हैं और सम्मान प्रकट करते हैं।

क्या दशहरे के दिन नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं?

हाँ, दशहरा साल के सबसे शुभ दिनों (साढ़े तीन मुहूर्त) में से एक माना जाता है। इस दिन नया बिजनेस, प्रोजेक्ट या कोई भी नया काम शुरू करना बहुत अच्छा होता है। इसके लिए किसी विशेष मुहूर्त को देखने की जरूरत नहीं होती।

दशहरे के दिन कौन सा रंग पहनना शुभ होता है?

इस दिन केसरिया (Saffron) और लाल रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है। ये रंग सूर्य ग्रह और ऊर्जा का प्रतीक हैं। पूजा के समय काले या बहुत गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

दशहरे पर किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

दशहरे के दिन 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का जाप करना सबसे अच्छा माना जाता है। आप पूजा के समय इस मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप कर सकते हैं। यह मंत्र जीवन में शांति और सफलता लाता है।

क्या दशहरे के दिन गाड़ी या सोना खरीद सकते हैं?

बिल्कुल, दशहरे के दिन खरीदारी करना बहुत शुभ होता है। लोग इस दिन नई गाड़ी, प्रॉपर्टी, सोना या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते हैं। माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई चीजों में हमेशा बरकत होती है।

आयुध पूजा क्या होती है और यह कैसे की जाती है?

आयुध पूजा का मतलब है अपने हथियारों या काम के औजारों की पूजा करना। आज के समय में लोग अपने लैपटॉप, मशीनरी, वाहनों और किताबों की पूजा करते हैं। इन चीजों को साफ करके उन पर रोली से तिलक लगाया जाता है और फूल चढ़ाए जाते हैं।

दशहरे का ruling planet कौन सा है और इसका क्या असर होता है?

दशहरे का ruling planet सूर्य (Sun) है। सूर्य सफलता, नेतृत्व और ऊर्जा का कारक है। इस दिन पूजा करने से करियर में तरक्की मिलती है और दुश्मनों पर जीत (Victory over enemies) हासिल करने की शक्ति आती है।

दशहरे के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

इस दिन किसी से भी लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए और न ही बड़ों का अपमान करना चाहिए। शराब या किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। यह एक पवित्र दिन है, इसलिए मन और कर्म दोनों साफ रखने चाहिए।

क्या दशहरे के दिन यात्रा (travel) करना शुभ है?

हाँ, दशहरे के दिन यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है। प्राचीन काल में राजा इसी दिन युद्ध या विजय यात्रा के लिए निकलते थे। इसे 'सीमोल्लंघन' कहा जाता है, जो सफलता और तरक्की का प्रतीक है।

रावण दहन के बाद क्या करना चाहिए?

रावण दहन देखने के बाद शांति से घर लौटना चाहिए। घर आकर परिवार के बड़ों के पैर छूकर उन्हें शमी के पत्ते देने चाहिए। इसे एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार जताने का तरीका माना जाता है।

क्या दशहरे और दीवाली में कोई संबंध है?

हाँ, ये दोनों त्योहार भगवान राम से जुड़े हैं। दशहरे के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसके ठीक बीस दिन बाद, जब वे माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो उस खुशी में दीवाली मनाई गई थी।

अलग-अलग शहरों में दशहरे की timing अलग क्यों होती है?

त्योहारों की timing सूर्योदय और पंचांग की गणना पर निर्भर करती है। हर शहर में सूर्योदय का समय अलग होता है, इसलिए विजया मुहूर्त और राहु काल भी बदल जाते हैं। आप अपने शहर का सही समय ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में दशहरे को किस नाम से जाना जाता है?

पश्चिम बंगाल में इसे Bijoya Dashami (বিজয়া দশমী) के नाम से जाना जाता है। इस दिन माँ दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और 'शुभ बिजोया' कहकर बधाई देते हैं।

क्या दशहरे के दिन बाल और नाखून काट सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ त्योहार के दिन बाल या नाखून काटने से बचना चाहिए। आप त्योहार से एक दिन पहले या उसके अगले दिन यह काम कर सकते हैं। त्योहार के दिन साफ-सफाई और पूजा पर ध्यान देना चाहिए।

दशहरे के दिन दान करने का क्या महत्व है?

दशहरे के दिन दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। आप जरूरतमंदों को अन्न, कपड़े या किताबों का दान कर सकते हैं। ऐसा करने से सूर्य ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

चेन्नई में आने वाले त्योहार

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