चेन्नई · Tamil Nadu

चेन्नई में जन्माष्टमी

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का है। मुख्य रूप से इस दिन व्रत रखा जाता है और मध्यरात्रि यानी निशिता काल में बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करके पूजा की जाती है। महाराष्ट्र में इसे गोकुळाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।

🕐 चेन्नई के लिए जन्माष्टमी का समय

तिथिAshtami (Krishna Paksha)00:14 (05 Sep) तक
नक्षत्रRohini, पाद 123:04 तक
योग · करणHarshana · Balava
पूजा मुहूर्त23:43-00:31(निशीथ)
अभिजित मुहूर्त11:43-12:31
राहुकाल10:35-12:07
यमगंड · गुलिक15:10-16:42 · 07:32-09:04
सूर्योदय · सूर्यास्त06:01 · 18:14

चेन्नई (13.0827, 80.2707) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

जन्माष्टमी पर क्या करें

  1. पूजा स्थल को साफ करके भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें।
  2. बाल गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं।
  3. भगवान को नए और सुंदर वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करें।
  4. माखन-मिश्री, पंजीरी और तुलसी दल का भोग लगाएं।
  5. ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा मंत्र का जाप करें।
  6. ऊपर दिए गए निशिता काल मुहूर्त में मध्यरात्रि की पूजा और आरती करें।
  7. पूजा के बाद चरणामृत को प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Ashtami pervades nishita kaal on one day only (36% of the window). Krishna was born at nishita. Smarta observance takes Ashtami prevailing at nishita; Vaishnava and ISKCON require Ashtami to have passed sunrise and prefer the following day, especially with Rohini nakshatra. Both are returned. Amanta (South and West India): The same day. Bhadrapada Krishna Ashtami in purnimanta reckoning is Shravana Krishna Ashtami in amanta.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में जन्माष्टमी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
चेन्नई06:0111:43-12:3110:35-12:07
दिल्ली एनसीआर06:0411:54-12:4410:45-12:19
मुंबई06:2712:12-13:0111:04-12:37
नोएडा06:0311:53-12:4310:44-12:18
गुरुग्राम06:0511:55-12:4510:46-12:20
बेंगलुरु06:1211:54-12:4210:46-12:18
हैदराबाद06:0611:49-12:3910:42-12:14
पुणे06:2412:08-12:5811:01-12:33
कोलकाता05:2311:10-11:5910:02-11:35
अहमदाबाद06:2612:13-13:0211:05-12:38

जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है

जन्माष्टमी, जिसे महाराष्ट्र में गोकुळाष्टमी (Gokulashtami) भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सबसे बड़े और आनंदमय पर्वों में से एक है। यह दिन भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। त्रिकाल वाणी की गणना के अनुसार, इस साल यह तिथि 4 सितंबर 2026 को पड़ रही है। यह वह पावन दिन है जब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए पृथ्वी पर कृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह सिर्फ एक जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में ज्ञान, प्रेम और आनंद के आगमन का प्रतीक है। भगवान कृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और कर्म के मार्ग पर कैसे अडिग रहा जाए। चाहे वह मथुरा की जेल हो या कुरुक्षेत्र का युद्ध का मैदान, कृष्ण की उपस्थिति हर जगह शांति और संतुलन लाती है। ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो जन्माष्टमी का सीधा संबंध चंद्रमा (Moon) से है। भगवान कृष्ण का जन्म चंद्र वंश में हुआ था और इस दिन के ruling planet भी चंद्रमा ही हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को हमारे मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक माना गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, तो उसे मानसिक तनाव, चिंता और निर्णय लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जन्माष्टमी की रात को निशिता काल में की गई पूजा और व्रत सीधे तौर पर चंद्रमा को बल प्रदान करते हैं। यह माना जाता है कि जो लोग इस दिन सच्चे मन से बाल गोपाल की उपासना करते हैं, उन्हें मानसिक शांति (Mental peace) की प्राप्ति होती है। चंद्रमा की शीतलता और कृष्ण की कृपा मिलकर जीवन के मानसिक संतापों को दूर करने में मदद करते हैं। स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय में इस व्रत को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। स्मार्त लोग उस दिन व्रत करते हैं जिस रात निशिता काल में अष्टमी तिथि व्याप्त होती है, क्योंकि कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था। वहीं, वैष्णव और इस्कॉन (ISKCON) परंपरा में उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष ध्यान रखा जाता है। दक्षिण और पश्चिम भारत में, जहाँ अमांत पंचांग का पालन होता है, यह श्रावण महीने की कृष्ण अष्टमी कहलाती है, लेकिन दिन वही रहता है। इस दिन पीले और नीले रंग (Yellow and Blue) का विशेष महत्व है। भगवान को यह रंग अति प्रिय हैं। जब आप व्रत रखते हैं और रात में माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं, तो यह केवल एक कर्मकांड नहीं रह जाता, बल्कि यह आपके भीतर के उस बाल भाव और पवित्रता को जगाने का प्रयास है जो कृष्ण को प्रिय है।

🪔 जन्माष्टमी पूजा विधि

  1. संकल्प और तैयारीस्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत व पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके सजाएं।
  2. मूर्ति स्थापनाएक साफ चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कृष्ण (बाल गोपाल) की मूर्ति स्थापित करें।
  3. पंचामृत स्नानमध्यरात्रि के मुहूर्त में बाल गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से स्नान कराएं।
  4. शुद्ध जल से स्नानपंचामृत के बाद भगवान को शुद्ध जल से धोकर एक साफ और मुलायम कपड़े से पोंछ लें।
  5. वस्त्र और श्रृंगारबाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं और आभूषणों से उनका सुंदर श्रृंगार करें।
  6. मोर पंख और बांसुरीश्रृंगार पूरा होने पर मूर्ति के पास मोर पंख और बांसुरी जरूर रखें।
  7. धूप, दीप और पुष्पभगवान को पीले फूल, चंदन अर्पित करें और उनके सामने धूप तथा घी का दीपक जलाएं।
  8. भोग लगानामाखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों का विशेष भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल अवश्य डालें।
  9. मंत्र जाप और भजनपरिवार के साथ बैठकर कृष्ण भजनों का आनंद लें और पवित्र मंत्रों का जाप करें।
  10. मध्यरात्रि आरतीऊपर दिए गए निशिता काल मुहूर्त में भगवान की आरती उतारें और जन्म का उत्सव मनाएं।
  11. प्रसाद वितरणपूजा संपन्न होने के बाद चरणामृत और माखन-मिश्री का प्रसाद सभी में बांटें।

5-मिनट विधि

  1. एक साफ चौकी पर बाल गोपाल की मूर्ति स्थापित करके घी का दीपक जलाएं।
  2. भगवान को थोड़े से पंचामृत या केवल शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
  3. उन्हें साफ वस्त्र पहनाएं और माखन-मिश्री या किसी भी उपलब्ध मिठाई का भोग लगाएं।
  4. ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा मंत्र का 108 बार जाप करें।
  5. खड़े होकर भगवान की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करके प्रसाद ग्रहण करें।

🛒 जन्माष्टमी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • बाल गोपाल की मूर्ति
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • माखन-मिश्री
  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • रोली या चंदन
  • धूप और दीपक
  • पंजीरी

वैकल्पिक

  • मोर पंख
  • नई बांसुरी
  • भगवान के लिए नए वस्त्र और आभूषण
  • झूला (पालना)
  • गंगाजल
  • चरणामृत के लिए बर्तन
  • फल और मेवे

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if माखन-मिश्री is unavailable, किसी भी शुद्ध दूध की मिठाई का भोग लगाना is traditionally accepted
  • if ताजे पीले फूल are unavailable, गेंदे के फूल या कोई भी उपलब्ध ताजे फूल is traditionally accepted
  • if पंचामृत की सभी सामग्री is unavailable, केवल कच्चे दूध और शुद्ध जल से स्नान कराना is traditionally accepted

🌙 जन्माष्टमी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत अष्टमी तिथि के दिन सुबह स्नान के बाद संकल्प लेकर की जाती है।

क्या खा सकते हैं

  • फलाहार
  • दूध और दही
  • साबूदाना
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
  • फल और मेवे

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अन्न (चावल, गेहूं)
  • साधारण नमक
  • लहसुन और प्याज
  • किसी भी प्रकार का तामसिक या मांसाहारी भोजन

पारण: व्रत का पारण मध्यरात्रि में पूजा और आरती के बाद, या अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें निर्जला या कठोर व्रत नहीं करना चाहिए।

यह व्रत की पारंपरिक विधि है। यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो कृपया व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

जन्माष्टमी: क्या करें और क्या न करें

क्या जन्माष्टमी के दिन बाल धो सकते हैं?

हाँ, व्रत वाले दिन सुबह स्नान करते समय बाल धोकर शुद्ध होना पारंपरिक रूप से अच्छा माना जाता है।

क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?

हाँ, जो लोग फलाहारी व्रत रखते हैं, वे सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं, हालांकि कुछ लोग मीठा व्रत भी रखते हैं।

क्या इस दिन नाखून या बाल काट सकते हैं?

नहीं, किसी भी व्रत या शुभ दिन पर नाखून या बाल काटना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है।

क्या जन्माष्टमी के दिन यात्रा कर सकते हैं?

यात्रा करने में कोई मनाही नहीं है, बस ध्यान रखें कि आप व्रत के नियमों और पूजा के समय का पालन कर सकें।

क्या व्रत के दौरान सो सकते हैं?

बीमार या कमजोर लोग आराम कर सकते हैं, लेकिन स्वस्थ लोगों के लिए दिन में सोना व्रत के नियमों के खिलाफ माना जाता है।

क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?

हाँ, यह एक बेहद शुभ दिन है। भगवान कृष्ण का नाम लेकर कोई भी नया और अच्छा काम शुरू किया जा सकता है।

क्या हम जन्माष्टमी पर नई चीजें या कपड़े खरीद सकते हैं?

बिल्कुल, त्योहार के लिए नए कपड़े, पूजा का सामान और घर की सजावट की चीजें खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

पूजा किस समय करनी चाहिए?

मुख्य पूजा मध्यरात्रि यानी निशिता काल में की जाती है। आपके शहर का सटीक मुहूर्त ऊपर टेबल में दिया गया है।

क्या बिना मूर्ति के पूजा की जा सकती है?

हाँ, यदि मूर्ति नहीं है, तो आप भगवान कृष्ण की तस्वीर या चित्र के सामने भी पूरी श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं।

क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में व्रत रख सकती हैं?

व्रत रखा जा सकता है और मानसिक रूप से मंत्र जाप भी किया जा सकता है, लेकिन मूर्ति स्पर्श या पूजा की सामग्री छूना पारंपरिक रूप से वर्जित है।

क्या तुलसी के पत्ते रात में तोड़ सकते हैं?

नहीं, तुलसी के पत्ते सूर्यास्त के बाद नहीं तोड़ने चाहिए। इन्हें पूजा के लिए एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लेना चाहिए।

व्रत कब खोलना चाहिए?

कुछ लोग मध्यरात्रि की पूजा के तुरंत बाद चरणामृत और प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन सुबह पारण करते हैं।

क्या जन्माष्टमी के दिन लहसुन-प्याज खा सकते हैं?

नहीं, इस दिन घर में लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार का तामसिक या मांसाहारी भोजन बनाना या खाना पूरी तरह वर्जित है।

क्या करें

  • Observe a full day fast.
  • Decorate home and Puja altar.
  • Chant Lord Krishna's Mantras.
  • Offer fruits and sweets.
  • Visit a Krishna temple.

क्या न करें

  • Consume non-vegetarian food.
  • Engage in negative thoughts.
  • Break fast before midnight.
  • Disrespect elders or animals.

⚠️ आम गलतियाँ

  • भगवान कृष्ण को भोग लगाते समय उसमें तुलसी दल न डालना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
  • मध्यरात्रि से पहले ही व्रत खोल लेना व्रत के संकल्प को अधूरा कर देता है।
  • बाल गोपाल को स्नान कराते समय पुराने या अशुद्ध जल का उपयोग करना सही नहीं माना जाता।
  • घर के बड़ों या जानवरों का अपमान करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
  • पूजा के दौरान मन में नकारात्मक विचार रखना या क्रोध करना व्रत की शुद्धता को कम कर देता है।
  • भगवान को बासी फूल या अशुद्ध बर्तन में भोग अर्पित करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • बिना संकल्प लिए व्रत शुरू करना पारंपरिक रूप से एक अपूर्ण अभ्यास माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

हे भगवान कृष्ण, जो गायों, ग्वालों और गोपियों के प्रिय हैं, मैं आपको प्रणाम करता हूँ और अपना सब कुछ आपको समर्पित करता हूँ।

कम से कम 108 बार (एक माला)। मध्यरात्रि की पूजा के दौरान, या दिन भर मन ही मन मानसिक जाप के रूप में।

📖 जन्माष्टमी कथा

जन्माष्टमी की कथा द्वापर युग से जुड़ी है, जब मथुरा पर क्रूर राजा कंस का शासन था। कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था। जब देवकी का विवाह वासुदेव के साथ हुआ, तो कंस खुद रथ हांक कर उन्हें विदा करने जा रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी का आठवां पुत्र तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। यह सुनकर कंस घबरा गया और उसने देवकी और वासुदेव को तुरंत कारागार (जेल) में डाल दिया। कंस ने एक-एक करके देवकी के सात बच्चों को जन्म लेते ही निर्दयता से मार डाला। जब आठवें बच्चे के जन्म का समय आया, तो भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। उस रात घनघोर वर्षा हो रही थी और चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था। ठीक मध्यरात्रि (निशिता काल) में भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए, जेल के ताले अपने आप टूट गए और दरवाजे खुल गए। भगवान विष्णु ने वासुदेव को दर्शन दिए और कहा कि मुझे गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आओ और वहां जन्मी कन्या को यहां ले आओ। वासुदेव जी ने बाल कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उफनती हुई यमुना नदी को पार करके गोकुल पहुंचे। यमुना जी ने भी भगवान के चरण स्पर्श किए और उन्हें रास्ता दे दिया। गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के घर सभी गहरी नींद में थे। वासुदेव जी ने कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और वहां जन्मी योगमाया (कन्या) को लेकर वापस मथुरा आ गए। जब कंस को आठवें बच्चे के जन्म का पता चला, तो वह उसे मारने आया। लेकिन जैसे ही उसने कन्या को पत्थर पर पटकना चाहा, वह कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई और बोली कि तुझे मारने वाला तो गोकुल में जन्म ले चुका है। इसी दिन की याद में हर साल जन्माष्टमी का यह पावन पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

🪔 आरती

भगवान कृष्ण की मुख्य आरती मध्यरात्रि में, ठीक उनके जन्म के समय (निशिता काल) की जाती है। आरती से पहले बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर, घी का दीपक या कपूर जलाकर पूरी श्रद्धा के साथ आरती गाते हैं। आरती के दौरान घंटी और शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है। आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले भगवान को आरती दी जाती है और फिर सभी भक्त उसे ग्रहण करते हैं।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार जन्माष्टमी के उपाय

आर्थिक समस्याएं और धन की कमी

आर्थिक समस्याओं के लिए, जन्माष्टमी की रात चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें। चूंकि चंद्रमा इस पर्व के ruling planet हैं, इसलिए चांदी के बर्तन में दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को अर्पित करने से मन शांत होता है और धन से जुड़े सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

करियर और नौकरी में अस्थिरता

यदि नौकरी या व्यापार में अस्थिरता है, तो जन्माष्टमी की पूजा में बाल गोपाल को पीले और नीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। चंद्रमा की कमजोरी दूर करने के लिए इस दिन किसी जरूरतमंद को दूध या चावल का दान करें। इससे करियर में आने वाली मानसिक बाधाएं दूर होती हैं।

विवाह में देरी या वैवाहिक कलह

वैवाहिक जीवन में कलह या विवाह में देरी हो रही हो, तो जन्माष्टमी की रात पति-पत्नी साथ मिलकर 'ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा' मंत्र का जाप करें। भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। इससे रिश्तों में चंद्रमा जैसी शीतलता और प्रेम बढ़ता है।

संतान प्राप्ति या बच्चों का स्वास्थ्य

संतान प्राप्ति या बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए, इस दिन बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की विशेष पूजा करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और वह पंचामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। भगवान कृष्ण का बाल रूप मन को शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

घर में क्लेश और तनाव

घर में अक्सर तनाव रहता हो, तो जन्माष्टमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर मोर पंख लगाएं और शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। चंद्रमा मन का कारक है, और कृष्ण पूजा से घर का वातावरण शांत होता है, जिससे पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं।

नकारात्मकता और मानसिक अशांति

मन में बहुत अधिक नकारात्मक विचार आते हों या डिप्रेशन महसूस होता हो, तो जन्माष्टमी का व्रत रखें और रात में निशिता काल में ध्यान करें। भगवान को पीले फूल अर्पित करें। चंद्रमा को बल मिलने से मानसिक शांति (Mental peace) प्राप्त होती है और नकारात्मकता का नाश होता है।

क्या जन्माष्टमी आपके लिए विशेष है?

जन्माष्टमी के ये उपाय और चंद्रमा से जुड़ी बातें प्रभावशाली हैं, लेकिन ये सामान्य सिद्धांत हैं। हर व्यक्ति का जीवन अलग होता है, क्योंकि जन्म के समय ग्रहों की स्थिति अलग होती है। एक सामान्य लेख यह नहीं बता सकता कि आपकी अपनी कुंडली में चंद्रमा किस भाव में बैठा है। यहीं पर एक व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श काम आता है। त्रिकाल वाणी (Trikaal Vaani) की सेवाएं आपके जीवन के सटीक सवालों के जवाब देती हैं। यदि आप करियर, पैसे या जीवन के सही समय (dasha) को लेकर उलझन में हैं, तो 'Kundli' रीडिंग मदद करेगी। शादी के लिए सही जीवनसाथी की तलाश है, तो 'Kundali Milan' मार्गदर्शन देता है। हाथों की लकीरें भविष्य के बारे में क्या कहती हैं, यह 'Hastrekha' से जाना जा सकता है। वहीं, अगर अजीब सपने आते हैं, तो 'Swapna Shastra' उनका असली मतलब समझा सकता है।

चेन्नई में जन्माष्टमी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जन्माष्टमी 2026 में कब है?

इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ती है। इसी दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

जन्माष्टमी की पूजा का सही समय (muhurat) क्या है?

भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा निशिता काल में की जाती है। आपके शहर के अनुसार निशिता काल का सटीक समय ऊपर टेबल में दिया गया है। उसी समय पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।

स्मार्त और वैष्णव जन्माष्टमी में क्या अंतर है?

स्मार्त लोग उस दिन व्रत रखते हैं जब रात में अष्टमी तिथि होती है। जबकि वैष्णव और इस्कॉन परंपरा में सूर्योदय के समय अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र को महत्व दिया जाता है। इसलिए कई बार यह दो अलग-अलग दिनों में मनाई जाती है।

जन्माष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत के दौरान आप फलाहार कर सकते हैं, जैसे फल, दूध, दही, और मेवे। इसके अलावा साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें भी खाई जा सकती हैं। अन्न और साधारण नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

क्या जन्माष्टमी पर निर्जला व्रत रखना जरूरी है?

नहीं, निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, यह आपकी शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। बहुत से लोग पानी और फलाहार के साथ यह व्रत रखते हैं। बीमार या गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत नहीं रखना चाहिए।

जन्माष्टमी व्रत का पारण (व्रत खोलना) कब करना चाहिए?

व्रत का पारण आमतौर पर मध्यरात्रि में भगवान की पूजा और आरती के बाद किया जाता है। कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। यह पूरी तरह से आपके परिवार की स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

पूजा में बाल गोपाल को किस चीज का भोग लगाना चाहिए?

भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री सबसे ज्यादा प्रिय है, इसलिए इसका भोग अवश्य लगाएं। इसके अलावा पंजीरी, चरणामृत और ताजे फलों का भोग भी लगाया जाता है। भोग में तुलसी का पत्ता डालना न भूलें।

क्या जन्माष्टमी के दिन बाल और नाखून काट सकते हैं?

पारंपरिक रूप से किसी भी शुभ त्योहार या व्रत के दिन बाल और नाखून काटना अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए जन्माष्टमी के दिन ऐसा करने से बचना चाहिए। यह काम आप एक दिन पहले कर सकते हैं।

क्या मैं जन्माष्टमी के दिन नया व्यापार शुरू कर सकता हूँ?

हाँ, जन्माष्टमी का दिन बेहद शुभ होता है और इसे नए काम की शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेकर आप कोई भी नया प्रोजेक्ट या व्यापार शुरू कर सकते हैं। इससे काम में सफलता मिलने की मान्यता है।

गोकुळाष्टमी क्या है और यह जन्माष्टमी से कैसे अलग है?

गोकुळाष्टमी और जन्माष्टमी एक ही त्योहार के दो नाम हैं। महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में इसे गोकुळाष्टमी (Gokulashtami) के नाम से जाना जाता है। इस दिन दही-हांडी का विशेष आयोजन भी किया जाता है।

पूजा के दौरान कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?

पूजा के समय 'ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा' मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम है। आप इस मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप कर सकते हैं। यह मानसिक शांति और भगवान की कृपा दिलाता है।

क्या घर में बिना मूर्ति के जन्माष्टमी की पूजा हो सकती है?

बिल्कुल, अगर आपके पास बाल गोपाल की मूर्ति नहीं है, तो आप भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने भी पूजा कर सकते हैं। श्रद्धा और भाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। तस्वीर को साफ करके उसके सामने दीपक जलाएं और भोग लगाएं।

जन्माष्टमी पर किन रंगों का उपयोग करना शुभ होता है?

इस दिन पीले और नीले रंग का उपयोग करना बहुत शुभ माना जाता है। भगवान कृष्ण को पीतांबर (पीले वस्त्र) बहुत प्रिय हैं। आप खुद भी पीले कपड़े पहन सकते हैं और भगवान को भी पीले वस्त्र अर्पित कर सकते हैं।

क्या हम जन्माष्टमी पर खरीदारी (shopping) कर सकते हैं?

हाँ, त्योहार के लिए खरीदारी करना बहुत शुभ होता है। आप पूजा का सामान, नए कपड़े, या घर के लिए नई चीजें खरीद सकते हैं। शुभ दिन पर की गई खरीदारी घर में बरकत लाती है।

जन्माष्टमी का ruling planet कौन सा है और इसका क्या प्रभाव है?

जन्माष्टमी का ruling planet चंद्रमा (Moon) है। चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं का कारक है। इस दिन व्रत और पूजा करने से चंद्रमा को बल मिलता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।

क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान जन्माष्टमी की पूजा कर सकती हैं?

मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मानसिक रूप से भगवान का ध्यान और मंत्र जाप कर सकती हैं। हालांकि, मूर्ति को छूना या पूजा की सामग्री तैयार करना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है। वे दूर बैठकर आरती में शामिल हो सकती हैं।

चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है?

पंचामृत पांच चीजों—दूध, दही, घी, शहद और शक्कर—से बनता है, जिससे भगवान को स्नान कराया जाता है। जब स्नान के बाद यह जल भगवान के चरणों से होकर बर्तन में इकट्ठा होता है, तो उसमें तुलसी डालकर उसे चरणामृत कहा जाता है।

जन्माष्टमी के दिन किन चीजों का दान करना चाहिए?

इस दिन चंद्रमा को मजबूत करने के लिए दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप किसी गौशाला में गायों के लिए चारा भी दान कर सकते हैं। इससे मानसिक शांति मिलती है।

अलग-अलग शहरों में पूजा का समय (muhurat) अलग क्यों होता है?

पूजा का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तय होता है, जो हर शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए निशिता काल हर जगह थोड़ा अलग होता है। आप अपने शहर का सही समय ऊपर दिए गए टूल में देख सकते हैं।

जन्माष्टमी की कथा का मुख्य संदेश क्या है?

जन्माष्टमी की कथा हमें सिखाती है कि चाहे कितना भी अंधकार या अन्याय क्यों न हो, सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है। भगवान कृष्ण का जन्म यह साबित करता है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं। हमें बस अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।

चेन्नई में आने वाले त्योहार

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