चेन्नई · Tamil Nadu

चेन्नई में मकर संक्रांति

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस वर्ष मकर संक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, रेवती नक्षत्र और शिव योग का संयोग रहेगा। सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात सूर्यास्त के बाद होने के कारण पुण्य काल अगले दिन मान्य होगा। इस दिन प्रातःकाल स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य और सामर्थ्य अनुसार दान करना मुख्य कर्तव्य है।

🕐 चेन्नई के लिए मकर संक्रांति का समय

सूर्योदय की तिथिSaptami (Shukla Paksha) — 14:13 तक
पर्व की तिथिSankranti 14:13 से
नक्षत्रRevati, पाद 2 — 23:51 तक
योग · करणShiva · Vanija
अभिजित मुहूर्त11:54-12:40
राहुकाल10:52-12:17
यमगंड · गुलिक15:07-16:32 · 08:02-09:27
सूर्योदय · सूर्यास्त06:38 · 17:57

चेन्नई (13.0827, 80.2707) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ मकर संक्रांति पर क्या करें

  1. प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्वच्छ जल से स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  2. तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चंदन और अक्षत मिलाएं।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और सूर्य देव का ध्यान करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।
  4. अपने पूजा स्थल पर घी या तिल के तेल का एक दीपक प्रज्वलित करें।
  5. मन ही मन सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और अपनी भूलों की क्षमा मांगें।
  6. सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंद लोगों के लिए अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री अलग निकालें।
  7. घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और परिवार में सात्विक भाव बनाए रखें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

The Sun enters Makara at 14 Jan 2027 21:10 IST. Because that falls after sunset, the punya kaal is taken on the following day.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में मकर संक्रांति का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
चेन्नई06:3811:54-12:4010:52-12:17
दिल्ली एनसीआर07:1912:09-12:5011:12-12:30
मुंबई07:1812:25-13:0911:25-12:47
नोएडा07:1812:08-12:5011:11-12:29
गुरुग्राम07:1912:09-12:5111:12-12:30
बेंगलुरु06:4912:05-12:5111:03-12:28
हैदराबाद06:5312:02-12:4711:02-12:25
पुणे07:1312:21-13:0511:20-12:43
कोलकाता06:2211:23-12:0610:24-11:45
अहमदाबाद07:2612:27-13:1011:27-12:48

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है

मकर संक्रांति का पर्व भारतीय ज्योतिष और आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत विशिष्ट स्थान रखता है। यह केवल एक लोक उत्सव नहीं है, बल्कि सौर गणना पर आधारित एक प्रमुख खगोलीय घटना है। जब सूर्य देव धनु राशि की अपनी यात्रा समाप्त करके अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तब इस संक्रांति का निर्माण होता है। इसी क्षण से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर होने लगती है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से आरंभ होने वाले छह महीने के इस काल को शास्त्रों में उत्तरायण की संज्ञा दी गई है [1]। वैदिक दृष्टिकोण में उत्तरायण के छह मासों को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को उनकी रात्रि माना गया है [2]। इसलिए इस संक्रांति काल को सकारात्मक ऊर्जा, प्रकाश, ज्ञान और नवीन चेतना के विस्तार का समय माना जाता है। शीत ऋतु की कठोरता धीरे-धीरे कम होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और उसके उपरांत दान करने की सुदीर्घ परंपरा है। शास्त्रों और परंपरा में इस बात पर बल दिया गया है कि संक्रांति के संक्रमण काल में किए गए पुण्य कर्म जीवन में स्थिरता लाते हैं। ज्योतिषीय ग्रंथों में इस अवसर पर संक्रांति स्वरूप का विधिवत अर्चन करने और वस्त्र अर्पित करने की विशेष परंपरा का उल्लेख मिलता है [3]। ज्योतिषीय दृष्टि से इस संक्रांति के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं। सूर्य को नवग्रहों में आत्मा, पिता, मान-सम्मान और जीवनी शक्ति का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो कर्म, अनुशासन, न्याय और श्रम के प्रतीक हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर पधारते हैं। यह मिलन पिता और पुत्र के बीच के मतभेदों को भुलाकर परस्पर आदर, क्षमा और सद्भाव स्थापित करने की प्रेरणा देता है। इसलिए यह पर्व पारिवारिक संबंधों में सुधार और मन के मैल को धोने का भी सुंदर अवसर प्रदान करता है। भारत के विभिन्न राज्यों में इस पर्व को अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुजरात में इसे बड़े उल्लास के साथ उत्तरायण (Uttarayan) के नाम से जाना जाता है, जहाँ लोग खुले आकाश के नीचे एकत्र होकर सूर्य के प्रकाश का स्वागत करते हैं। तमिलनाडु में यह उत्सव कृतज्ञता और प्रकृति पूजन के रूप में थाई पोंगल (Thai Pongal) कहलाता है, जहाँ नई फसल और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। वहीं पश्चिम बंगाल में इसे पौष संक्रांति (Poush Sankranti) के रूप में मनाया जाता है, जहाँ गंगासागर स्नान और पारंपरिक अनुष्ठानों का विशेष विधान है। इस पर्व का सबसे गहरा संदेश त्याग और लोक कल्याण से जुड़ा है। अपने पास जो कुछ भी श्रेष्ठ है, उसमें से एक अंश समाज के निर्बल और अभावग्रस्त लोगों को समर्पित करना ही इस दिन की वास्तविक साधना मानी गई है। जब व्यक्ति अपने अहंकार को छोड़कर सूर्य की भांति निष्काम भाव से देने की भावना अपनाता है, तभी यह पर्व सार्थक होता है।

🪔 मकर संक्रांति पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान — सूर्योदय से पूर्व उठकर स्वच्छ जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और साफ, सात्विक वस्त्र धारण करें।
  2. आचमन एवं शुद्धि — पूजा स्थल पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और हाथ में जल लेकर आत्मशुद्धि करें।
  3. दीप प्रज्वलन — अपने पूजा स्थान पर घी या शुद्ध तिल के तेल का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
  4. सूर्य अर्घ्य तैयारी — तांबे के स्वच्छ पात्र में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल चंदन या कुमकुम तथा बिना टूटे अक्षत मिलाएं।
  5. सूर्य अर्घ्य समर्पण — खुले आकाश के नीचे पूर्व दिशा में खड़े होकर दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  6. ध्यान एवं नमन — अर्घ्य देते समय मन को शांत रखें और सूर्य के प्रकाश एवं ऊर्जा का ध्यान करते हुए उन्हें प्रणाम करें।
  7. संक्रांति स्वरूप स्मरण — घर के पूजा घर में संक्रांति स्वरूप का ध्यान करते हुए पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएं।
  8. संकल्प एवं प्रार्थना — अपनी वाणी और आचरण में सत्यता बनाए रखने का संकल्प लें और पूर्वजों व बड़ों का स्मरण करें।
  9. दान सामग्री स्पर्श — जरूरतमंदों को दी जाने वाली अन्न, वस्त्र या द्रव्य की सामग्री पर जल छिड़क कर दान का संकल्प लें।
  10. आरती एवं समापन — दीपक से सप्रेम आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए विनम्रता से क्षमा मांगें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मन को शांत रखें।
  2. तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें रोली और अक्षत डालें।
  3. पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर उगते सूर्य को दोनों हाथों से अर्घ्य दें।
  4. पूजा स्थान पर घी का एक दीपक जलाकर सूर्य देव को नमन करें।
  5. किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए अन्न या वस्त्र का दान अलग निकालें।

🛒 मकर संक्रांति पूजा सामग्री

आवश्यक

  • तांबे का पात्र या लोटा
  • शुद्ध जल या गंगाजल
  • दीपक (घी या तिल के तेल का)
  • बैठने के लिए स्वच्छ आसन
  • लाल चंदन अथवा रोली
  • अक्षत (बिना टूटे साबुत चावल)

वैकल्पिक

  • पीतल की बड़ी पूजा थाली
  • धूप अथवा अगरबत्ती
  • कपूर और आरती दानी
  • पूजा वेदी के लिए लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा
  • ताजे लाल पुष्प

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि तांबे का पात्र उपलब्ध न हो, तो पीतल का शुद्ध लोटा पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि गंगाजल उपलब्ध न हो, तो सामान्य शुद्ध जल में तुलसी का पत्ता डालकर उपयोग करना पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि लाल चंदन उपलब्ध न हो, तो शुद्ध रोली या कुमकुम का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि कुशा का आसन उपलब्ध न हो, तो स्वच्छ ऊनी या सूती आसन पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

🌙 मकर संक्रांति व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: संक्रांति के दिन व्रत का संकल्प प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व स्नान के समय लिया जाता है। जो लोग पूर्ण उपवास रखते हैं, वे दिन भर निराहार या फलाहार का नियम लेते हैं, जबकि अधिकांश लोग पुण्य काल में स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान संपन्न होने तक बिना कुछ खाए-पिए रहने का पारंपरिक नियम निभाते हैं।

क्या खा सकते हैं

  • ताजे मौसमी फल
  • दूध, दही और छाछ
  • नारियल पानी
  • मेवे (काजू, बादाम, अखरोट)
  • साबूदाना या कूटू का सात्विक आहार
  • सेंधा नमक (यदि फलाहार में नमक लेने का नियम हो)

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अनाज (गेहूं, चावल, दालें — दान और पूजा पूर्ण होने से पूर्व)
  • प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक खाद्य
  • साधारण समुद्री या सफेद नमक
  • मांसाहार और मदिरा
  • बासी या गरिष्ठ बाजार का भोजन

पारण: परंपरा के अनुसार संक्रांति का पारण दोपहर में पुण्य काल के भीतर स्नान-दान संपन्न करने के पश्चात किया जाता है। कई परिवारों में शाम को सूर्यास्त के बाद परिवार के साथ बैठकर सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: पारंपरिक रूप से गर्भवती स्त्रियों, स्तनपान कराने वाली माताओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को कड़ा उपवास न रखने की छूट दी गई है। ऐसे लोगों को केवल सात्विक आहार लेकर स्नान-दान के नियमों का मानसिक रूप से पालन करने की सलाह दी जाती है।

यह उपवास पूरी तरह से एक पारंपरिक और धार्मिक प्रथा है, इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह न समझें; यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं या किसी प्रकार की नियमित दवा ले रहे हैं, तो उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

❓ मकर संक्रांति: क्या करें और क्या न करें

क्या मकर संक्रांति के दिन सिर धोकर स्नान कर सकते हैं?

हाँ, संक्रांति के दिन सिर से स्नान करना अत्यंत शुभ और पारंपरिक रूप से आवश्यक माना गया है। तिल के तेल का उबटन लगाकर या जल में तिल और गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा कई परिवारों में है।

क्या इस दिन बाल या नाखून काट सकते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार संक्रांति के पावन दिन बाल, दाढ़ी या नाखून काटना वर्जित माना जाता है। यदि आवश्यक हो तो यह कार्य संक्रांति से एक दिन पूर्व ही संपन्न कर लेना उचित रहता है।

क्या संक्रांति की पूजा में नमक खा सकते हैं?

जो लोग इस दिन पूर्ण उपवास रखते हैं, वे सामान्य नमक का त्याग करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर केवल फलाहार में सेंधा नमक लेते हैं। यदि आप केवल पुण्य काल तक उपवास रख रहे हैं, तो दान के बाद सात्विक भोजन में नमक लिया जा सकता है।

क्या इस दिन यात्रा करना उचित है?

संक्रांति के दिन अनावश्यक और लंबी यात्राओं से बचने की पारंपरिक सलाह दी जाती है ताकि व्यक्ति पुण्य काल में स्नान और दान शांतिपूर्वक कर सके। हालांकि, किसी तीर्थ स्थल की यात्रा या पवित्र नदी के तट पर जाना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या मकर संक्रांति के दिन नया व्यापार या नया काम शुरू कर सकते हैं?

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही उत्तरायण प्रारंभ होता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। फिर भी, संक्रांति के संधिकाल के तुरंत बाद स्थानीय पंचांग में शुभ मुहूर्त देखकर ही नया कार्य आरंभ करना चाहिए।

क्या इस पावन दिन पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है?

हाँ, मकर संक्रांति पर तांबे के बर्तन, नए वस्त्र और दान से संबंधित सामग्री खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। घरेलू उपयोग की उपयोगी वस्तुएं भी लोग उत्साहपूर्वक खरीदते हैं, लेकिन तामसिक वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए।

क्या पूजा के तुरंत बाद भोजन किया जा सकता है?

पूजा और सूर्य अर्घ्य संपन्न करने के बाद यदि आपने किसी जरूरतमंद को दान का संकल्प पूरा कर लिया है, तो आप सात्विक भोजन कर सकते हैं। जब तक दान न दिया जाए, तब तक भोजन करने से बचने की परंपरा है।

क्या संक्रांति की मुख्य पूजा रात के समय की जा सकती है?

नहीं, संक्रांति की मुख्य पूजा और सूर्य अर्घ्य दिन के उजाले में, विशेषकर सुबह सूर्योदय के समय या दोपहर के पुण्य काल में ही किया जाता है। रात्रि में केवल नियमित संध्या वंदन या ईश्वर का नाम स्मरण किया जा सकता है।

क्या महिलाएं मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान यह पूजा कर सकती हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान देव प्रतिमाओं का स्पर्श या नियमित पूजा अनुष्ठान नहीं किया जाता है। महिलाएं दूर बैठकर मानसिक रूप से सूर्य देव को प्रणाम कर सकती हैं और परिवार के अन्य सदस्यों से दान करवा सकती हैं।

क्या घर में बिना स्नान किए चाय या पानी पी सकते हैं?

परंपरा यह मानती है कि संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान और सूर्य देव को जल अर्पित किए बिना अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। यदि स्वास्थ्य संबंधी मजबूरी या दवा लेने की आवश्यकता हो, तो सादा जल लिया जा सकता है।

क्या इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित है?

संक्रांति के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचने की परंपरा कई क्षेत्रों में मानी जाती है। यदि पूजन के लिए तुलसी दल की आवश्यकता हो, तो उसे एक दिन पूर्व ही तोड़कर रख लेना चाहिए।

क्या मकर संक्रांति पर तामसिक भोजन या शराब का सेवन किया जा सकता है?

बिल्कुल नहीं, इस पवित्र पर्व पर मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इस दिन परिवार में पूर्ण सात्विकता और पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।

यदि घर में कोई सूतक या पातक लगा हो तो क्या करें?

सूतक या पातक की स्थिति में प्रत्यक्ष मूर्ति पूजा या अर्घ्य नहीं दिया जाता, केवल मानसिक नमन किया जाता है। इस दौरान दान की सामग्री भी अलग रखकर शुद्धि के बाद किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से दान कराई जाती है।

क्या संक्रांति के दिन क्रोध या वाद-विवाद से बचना जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों में संक्रांति के दिन वाणी पर संयम रखने और किसी भी प्रकार के कलह से दूर रहने पर विशेष बल दिया गया है। यह पर्व पिता-पुत्र और पारिवारिक संबंधों में मिठास लाने का संदेश देता है, इसलिए मन को शांत रखना चाहिए।

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⚠️ आम गलतियाँ

  • बिना स्नान किए सूर्य को जल अर्पित करने से अर्घ्य का अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • केवल पूजा संपन्न करके बिना किसी जरूरतमंद को दान दिए पर्व का धार्मिक संकल्प अपूर्ण रह जाता है।
  • सूर्य अर्घ्य देते समय तांबे के अतिरिक्त लोहे या प्लास्टिक के पात्र का उपयोग करने से विधि खंडित मानी जाती है।
  • संक्रांति के पावन समय पर मन में कटुता या परिजनों से विवाद रखने से आध्यात्मिक फल प्राप्त नहीं होता।
  • पुण्य काल बीत जाने के बाद बिना किसी कारण स्नान-दान करने से संक्रांति का विशेष महत्व पूरा नहीं होता।
  • अर्घ्य का जल पैरों पर पड़ने देने से सूर्य उपासना का आदर कम होता है, इसलिए जल किसी पात्र या क्यारी में गिरना चाहिए।
  • संकल्प के बिना की गई पूजा और दान केवल सामान्य कर्म बनकर रह जाते हैं, उनमें धार्मिक पूर्णता नहीं आती।

📖 मकर संक्रांति कथा

मकर संक्रांति से जुड़ी सबसे प्रमुख और पावन कथा सूर्य देव और उनके पुत्र शनि देव के परस्पर संबंध की है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, शनि देव का स्वरूप और स्वभाव अपने पिता सूर्य देव से भिन्न था, जिसके कारण दोनों के बीच वैचारिक मतभेद और दूरी उत्पन्न हो गई थी। सूर्य देव के तेज के सामने शनि देव असहज रहते थे और पिता भी पुत्र की गतिविधियों से असंतुष्ट हो गए थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि को अपने से दूर कर दिया था और पिता-पुत्र के मध्य एक लंबा अलगाव बना रहा। समय बीतने पर सूर्य देव ने अपने मन के भारीपन को त्यागकर पुत्र के प्रति स्नेह और कर्तव्य का विचार किया। संक्रांति के दिन सूर्य देव स्वयं शनि देव के घर, यानी उनकी राशि मकर में पधारे। जब शनि देव ने देखा कि उनके पिता स्वयं उनके द्वार पर चलकर आए हैं, तो वे अत्यंत प्रसन्न और भावविभोर हो गए। उस समय शनि देव के पास अपने पिता के भव्य सत्कार के लिए कोई विशेष वैभव नहीं था, इसलिए उन्होंने काले तिलों से अपने पिता का सादर पूजन किया और अपनी विनम्रता प्रकट की। पुत्र की इस निष्कपट भक्ति, आदर और क्षमा भाव से सूर्य देव अत्यंत संतुष्ट हुए। उन्होंने शनि देव को वरदान दिया कि जब भी वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, शनि का घर सुख, समृद्धि और नई चेतना से भर जाएगा। इस मिलन ने संसार को यह अमर संदेश दिया कि संतानों और माता-पिता के बीच के पुराने मतभेद चाहे कितने भी गहरे हों, उन्हें क्षमा और आदर के साथ समाप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, महाभारत काल में भी इस पर्व का एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग मिलता है। भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। कुरुक्षेत्र के युद्ध में बाणों की शय्या पर लेटे होने के बावजूद उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी। उन्होंने संक्रांति के पावन काल में ही अपने नश्वर शरीर को त्यागकर मोक्ष की प्राप्ति की थी।

🪔 आरती

मकर संक्रांति की पूजा में आरती मुख्य अनुष्ठान और सूर्य अर्घ्य के तुरंत बाद की जाती है। पूजा घर में या खुले प्रांगण में एक स्वच्छ थाली में घी का दीपक और कपूर सजाकर खड़े हों। सूर्य देव और अपने कुलदेवता का स्मरण करते हुए थाली को घड़ी की सुई की दिशा में गोलाकार घुमाएं। आरती के समय घंटी की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है। आरती पूर्ण होने पर दोनों हाथों से उसकी ऊष्मा लेकर नयनों और माथे पर लगाएं।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार मकर संक्रांति के उपाय

money

तांबे के लोटे में स्वच्छ जल और चुटकी भर रोली डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें और आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करें। कब: पर्व की सुबह स्नान के तुरंत बाद। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 11. आपके लिए क्यों: सूर्य देव कुंडली में प्रतिष्ठा और समृद्धि के नैसर्गिक कारक ग्रह हैं।

career

प्रातःकाल स्नान के पश्चात तांबे के पात्र से सूर्य को जल दें और अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा बनाए रखने का संकल्प लें। कब: संक्रांति के दिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय। खर्च: free. कितने दिन: 21. आपके लिए क्यों: सूर्य की अनुकूलता कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान में वृद्धि करती है।

marriage

एक लोटे जल में थोड़े से अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्पित करें और पारिवारिक रिश्तों में कटुता दूर करने की प्रार्थना करें। कब: संक्रांति की सुबह पूजा के समय। खर्च: free. कितने दिन: 7. आपके लिए क्यों: पिता और पुत्र के मिलन का यह पर्व संबंधों में समझ और मधुरता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

children

स्नान के बाद सूर्य के सम्मुख खड़े होकर उन्हें नमन करें और किसी जरूरतमंद बालक को पढ़ने की सात्विक सामग्री भेंट करें। कब: संक्रांति के दिन दोपहर से पहले। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य देव की कृपा से एकाग्रता, आत्मबल और तेज का विकास होता है।

home

घर के मुख्य द्वार पर स्वच्छ जल का छिड़काव करें और पूजा स्थान पर घी का एक दीपक जलाकर शांति की प्रार्थना करें। कब: संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद। खर्च: free. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य का उत्तरायण प्रवेश घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश का संचार करता है।

negativity

तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करने के उपरांत अपने पूजा घर में कपूर जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध दिखाएं। कब: पर्व के दिन दोपहर के समय। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 3. आपके लिए क्यों: सूर्य की प्रखर ऊर्जा और कपूर का शुद्ध प्रभाव मानसिक संशय व नकारात्मकता को शांत करने में सहायक है।

क्या मकर संक्रांति आपके लिए विशेष है?

इस पृष्ठ पर दी गई सूर्य और संक्रांति की जानकारी एक सामान्य पारंपरिक और ज्योतिषीय विवरण है। सूर्य का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली में उनके लग्न, भाव और ग्रहों की परस्पर युति के अनुसार एकदम भिन्न होता है। एक सामान्य उपाय सभी के लिए एक जैसा परिणाम नहीं दे सकता, क्योंकि आपकी व्यक्तिगत महादशा और ग्रहों का वास्तविक बल केवल आपकी जन्मपत्री से ही स्पष्ट होता है। त्रिकाल वाणी में हम आपकी व्यक्तिगत स्थिति का गहराई से अध्ययन करते हैं। हमारी सेवाएं आपकी वास्तविक आवश्यकताओं पर केंद्रित हैं: कुंडली विश्लेषण से आप करियर, धन, वर्तमान दशा और सही समय की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं; कुंडली मिलान से वैवाहिक अनुकूलता और दांपत्य जीवन की स्पष्टता मिलती है; हस्तरेखा विश्लेषण आपकी हथेलियों की रेखाओं के माध्यम से प्रवृत्तियों को समझने में मदद करता है; और स्वप्न शास्त्र आपके बार-बार आने वाले स्वप्नों के पीछे छिपे संकेतों को स्पष्ट करता है। यह मार्गदर्शन आपके जीवन को समझने का एक निष्पक्ष और ईमानदार प्रयास है।

शब्दावली · Glossary

संक्रांति
सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की खगोलीय घटना को संक्रांति कहा जाता है।
उत्तरायण
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश के बाद उत्तर दिशा की ओर गति करने का छह माह का पावन काल।
पुण्य काल
संक्रांति के समय का वह विशेष कालखंड जिसमें स्नान, दान और पूजन करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।
अर्घ्य
सूर्य देव को तांबे अथवा पवित्र पात्र से जल, रोली और अक्षत समर्पित करने की पारंपरिक विधि।
पारण
किसी व्रत या उपवास की निर्धारित समयावधि पूर्ण होने के बाद विधिवत सात्विक आहार लेकर व्रत खोलने की प्रक्रिया।
राहु काल
दिन का वह समय खंड जिसमें पारंपरिक रूप से नए या मांगलिक कार्य का आरंभ करना वर्जित माना जाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑सूर्य सिद्धांत
    अयनम्।अथ आयन द्वयमाहभानोर्मकरसंस्क्रान्तेः षण्मासा उत्तरायणम्। कर्कादेस्तु तथैव स्यात् षण्मासा दक्षिणायनम्
    — सूर्य सिद्धांत, अध्याय 10 — ज्योतिषाधिकारः · श्लोक 9

    सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से आरंभ होने वाले छह मास उत्तरायण कहलाते हैं।

    The six months starting from the Sun's entry into Capricorn are known as Uttarayana.

  2. [2]↑मनुस्मृति
    दैवे रात्रि.अहनी वर्षं प्रविभागस् तयोः पुनः । अहस् तत्र-उदगयनं रात्रिः स्याद् दक्षिणायनम् ॥ ६७ ॥
    — मनुस्मृति, अध्याय 1 · श्लोक 67

    देवताओं के दिन-रात के विभाजन में उत्तरायण दिन और दक्षिणायन रात्रि कहलाता है।

    In the division of the divine day and night, Uttarayana is the day and Dakshinayana is the night.

  3. [3]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    चन्द्रादित्याकृती पार्श्वे मध्ये संक्रान्तिमर्चयेत्।ह् । प्रतिमां पूजने पूर्वं वस्त्रयुग्मं निवेदयेत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 90 · श्लोक 10

    संक्रांति स्वरूप का अर्चन करना चाहिए और पूजन से पूर्व वस्त्र युग्म अर्पित करना चाहिए।

    One should worship the personified Sankranti and offer a pair of garments before the ritual.

चेन्नई में मकर संक्रांति — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में मकर संक्रांति किस तारीख को मनाई जाएगी?

वर्ष 2027 में मकर संक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, रेवती नक्षत्र और शिव योग का पंचांग संयोग रहेगा। यद्यपि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात सूर्यास्त के बाद होगा, लेकिन धर्मशास्त्रों के अनुसार रात्रि संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन मान्य होता है। इसलिए सभी धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और दान 15 जनवरी को ही संपन्न किए जाएंगे।

मकर संक्रांति 14 जनवरी की बजाय 15 जनवरी को क्यों मनाई जा रही है?

ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का निर्धारण सूर्य के राशि परिवर्तन के सटीक क्षण से होता है। वर्ष 2027 में सूर्य का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी की रात लगभग नौ बजकर दस मिनट पर होगा, जो कि सूर्यास्त के बाद का समय है। धर्मशास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि सूर्यास्त के बाद संक्रांति होने पर उसका पुण्य काल अगले दिन के सूर्योदय से माना जाता है। इसी शास्त्रीय नियम और निरयण गणना के आधार पर पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

संक्रांति का पुण्य काल मुहूर्त कैसे देखें और इसका क्या महत्व है?

संक्रांति के दिन पुण्य काल वह पावन समय होता है जिसमें स्नान, तर्पण और दान का फल सर्वाधिक माना गया है। आपके नगर के अनुसार सटीक पुण्य काल और महापुण्य काल का समय ऊपर दी गई तालिका में प्रदर्शित किया गया है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार हर शहर में इस समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इस निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी पूजा और दान संपन्न करना सबसे उत्तम माना जाता है।

मकर संक्रांति के पावन दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके पश्चात तांबे के पात्र से पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। पूजा संपन्न करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या द्रव्य का दान दें। अंत में अपने माता-पिता और बड़ों का चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

संक्रांति के दिन किन बातों और कार्यों से बचना चाहिए?

इस दिन घर में किसी भी प्रकार का कलह, कटु वाणी और वाद-विवाद करने से बचना चाहिए। बिना स्नान किए भोजन या चाय का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही किसी भिक्षुक को द्वार से खाली हाथ लौटाना चाहिए। तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रखना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल या नाखून काटना भी परंपरा के विरुद्ध माना जाता है।

क्या मकर संक्रांति पर व्रत रखना अनिवार्य होता है?

मकर संक्रांति पर कठोर उपवास रखना हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है, यह एक ऐच्छिक साधना है। कई लोग केवल सुबह के समय स्नान और दान पूर्ण होने तक ही निराहार रहते हैं। कुछ श्रद्धालु दिन भर फलाहार रखकर शाम को सात्विक भोजन से पारण करते हैं। यदि आपका स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो आप केवल सात्विक आहार लेकर भी पर्व का पुण्य लाभ ले सकते हैं।

संक्रांति के दिन भोजन में क्या खाना चाहिए?

संक्रांति के दिन पूरी तरह सात्विक, ताजा और सुपाच्य भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। अधिकांश क्षेत्रों में इस दिन नए चावल, दाल और घी से बने भोजन का सेवन विशेष रूप से किया जाता है। साथ ही मौसमी सब्जियां और पारंपरिक सात्विक पकवान भी प्रेमपूर्वक बनाए जाते हैं। इस दिन गरिष्ठ, तला-भुना और बासी भोजन करने से बचना चाहिए ताकि शरीर और मन शुद्ध रहे।

सूर्य पूजा के लिए आवश्यक सामग्री क्या होनी चाहिए?

सूर्य देव की पूजा के लिए सबसे प्रमुख सामग्री एक स्वच्छ तांबे का लोटा और शुद्ध जल है। इसके अतिरिक्त अर्घ्य में मिलाने के लिए रोली या लाल चंदन और साबुत अक्षत की आवश्यकता होती है। पूजा स्थान पर प्रज्वलित करने के लिए एक दीपक, शुद्ध घी और बैठने के लिए कुशा या ऊन का आसन चाहिए। यदि उपलब्ध हो तो ताजे लाल पुष्प भी अर्घ्य में अर्पित किए जा सकते हैं।

मकर संक्रांति की पौराणिक कथा संक्षेप में क्या है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर यानी मकर राशि में पधारते हैं। पिता-पुत्र के मध्य लंबे समय से चले आ रहे मतभेद इस दिन प्रेम और आदर के साथ समाप्त हुए थे। शनि देव ने अपने पिता का स्वागत आदरपूर्वक किया था, जिससे सूर्य देव अत्यंत प्रसन्न हुए। यह कथा हमें पारिवारिक रिश्तों में क्षमा और सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

मकर संक्रांति का आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व क्या है?

इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है, जिससे प्रकृति में प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है, जो साधना और ज्ञान के विस्तार के लिए श्रेष्ठ है। शीत ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है और नई फसलों के आगमन से जीवन में उल्लास भरता है। यह पर्व मनुष्य को प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।

क्या इस दिन कोई नया व्यापार या शुभ कार्य शुरू कर सकते हैं?

सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश सभी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है। संक्रांति के संधिकाल के तुरंत बाद स्थानीय पंचांग में शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त देखकर कार्य आरंभ किया जा सकता है। नए व्यापार की नींव रखने या नया अनुबंध करने के लिए यह एक सकारात्मक दिन है। फिर भी, कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत कुंडली के ग्रहों की स्थिति भी देख लेनी चाहिए।

क्या मकर संक्रांति पर नई चीजें या घरेलू सामान खरीदना चाहिए?

हाँ, मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर धातु, विशेषकर तांबे या पीतल के बर्तनों की खरीदारी बहुत फलदायी मानी जाती है। कई लोग इस दिन नए वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें और उपयोगी घरेलू वस्तुएं भी उत्साह के साथ खरीदते हैं। इस दिन खरीदी गई सामग्री घर में स्थायित्व और शुभता लाती है, ऐसी जनमान्यता है। केवल ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की अशुभ या तामसिक वस्तुएं इस दिन न खरीदी जाएं।

संक्रांति पर कौन सा मंत्र जपना चाहिए यदि कोई मंत्र याद न हो?

यदि आपको कोई विशेष वैदिक मंत्र ज्ञात नहीं है, तो मन ही मन सूर्य देव का नाम लेना ही पर्याप्त माना जाता है। आप शांत भाव से 'सूर्य' का स्मरण करते हुए उन्हें अर्घ्य अर्पित कर सकते हैं। शास्त्रों में भाव और निष्कपट भक्ति को किसी भी जटिल उच्चारण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए बिना किसी संशय के केवल श्रद्धा भाव से अपनी प्रार्थना प्रभु तक पहुंचाएं।

मकर संक्रांति पर किन वस्तुओं का दान सबसे उत्तम माना जाता है?

संक्रांति पर जरूरतमंदों को नए वस्त्र, तांबे के पात्र और अनाज का दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शीत ऋतु होने के कारण गरीबों को कंबल या गर्म वस्त्र भेंट करना अत्यधिक पुण्यदायी कर्म है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिया गया छोटा सा दान भी पूर्ण श्रद्धा के साथ दिया जाए तो विशेष फल देता है। दान हमेशा सुपात्र व्यक्ति को ही सम्मानपूर्वक और बिना किसी अहंकार के देना चाहिए।

सूर्य देव को अनुकूल करने के लिए इस दिन क्या साधारण उपाय करें?

सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय प्रातःकाल तांबे के लोटे से उन्हें जल अर्पित करना है। इसके साथ ही अपने पिता और घर के सभी वृद्धजनों का आदर करें और उनके चरण स्पर्श करें। किसी गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं या पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। यह सात्विक आचरण आपकी आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होता है।

अलग-अलग शहरों में संक्रांति के पुण्य काल के समय में अंतर क्यों होता है?

भारत के विभिन्न नगरों के अक्षांश और देशांतर में अंतर होने के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भिन्न होता है। जब सूर्य का राशि प्रवेश होता है, तो उसका स्थानीय प्रभाव उस शहर के सूर्योदय के अनुसार ही आंका जाता है। पूर्वी राज्यों में सूर्योदय पहले होता है जबकि पश्चिमी राज्यों में कुछ समय बाद। इसी भौगोलिक कारण से हमारी वेबसाइट पर हर शहर के अनुसार अलग-अलग सटीक समय दिखाया जाता है।

मकर संक्रांति और थाई पोंगल में क्या मुख्य संबंध है?

मकर संक्रांति पूरे देश में मनाया जाने वाला मुख्य सौर पर्व है जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। तमिलनाडु में इसी पावन सौर संक्रमण के स्वागत को थाई पोंगल के रूप में चार दिवसीय उत्सव की तरह मनाया जाता है। वहीं गुजरात में इसे उत्तरायण के नाम से पतंग उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यद्यपि इन सभी उत्सवों का समय एक ही खगोलीय घटना से जुड़ा है, लेकिन इनके क्षेत्रीय रीति-रिवाज स्थानीय संस्कृति के अनुसार हैं।

संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा का क्या कारण है?

गुजरात और कई अन्य क्षेत्रों में संक्रांति पर खुले मैदानों या छतों पर पतंग उड़ाने की सुंदर परंपरा है। इसका मुख्य व्यावहारिक कारण सुबह के समय सूर्य की कोमल धूप में समय बिताना है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। खुले आकाश में उड़ती पतंगें मनुष्य की उच्च आकांक्षाओं और उल्लास का प्रतीक मानी जाती हैं। परिवार के साथ मिलकर यह खेल खेलने से सामाजिक सौहार्द और आनंद की वृद्धि होती है।

यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर कैसे स्नान करें?

यदि आपके लिए गंगा या किसी पवित्र नदी के तट पर जाना संभव नहीं है, तो बिल्कुल चिंतित न हों। अपने घर पर ही सामान्य स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल की मिला लें। स्नान करते समय मन में पवित्र नदियों का स्मरण करें और स्वयं को शुद्ध महसूस करें। शास्त्रों के अनुसार शुद्ध भाव से घर पर किया गया यह स्नान भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य देता है।

क्या अस्वस्थ या गर्भवती महिलाएं इस दिन उपवास रख सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं, अस्वस्थ व्यक्तियों और नियमित दवा ले रहे लोगों को किसी भी प्रकार का कड़ा उपवास नहीं रखना चाहिए। परंपरा में शारीरिक स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखा गया है और ऐसे लोगों को व्रत की बाध्यता नहीं है। आप केवल स्नान करके मानसिक रूप से सूर्य देव को प्रणाम कर सकती हैं और सामान्य पौष्टिक भोजन ले सकती हैं। उपवास से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।

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