Trikaal Vaani Logo
Trikaal Vaani
चेन्नई · Tamil Nadu

चेन्नई में पोंगल

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

वर्ष 2027 में पोंगल का मुख्य पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, रेवती नक्षत्र और शिव योग रहेगा। इस पावन अवसर पर प्रातःकाल स्नान करके प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य की आराधना की जाती है और नई फसल के आगमन पर प्रकृति व सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

🕐 चेन्नई के लिए पोंगल का समय

सूर्योदय की तिथिSaptami (Shukla Paksha) — 14:13 तक
पर्व की तिथिSankranti 14:13 से
नक्षत्रRevati, पाद 2 — 23:51 तक
योग · करणShiva · Vanija
अभिजित मुहूर्त11:54-12:40
राहुकाल10:52-12:17
यमगंड · गुलिक15:07-16:32 · 08:02-09:27
सूर्योदय · सूर्यास्त06:38 · 17:57

चेन्नई (13.0827, 80.2707) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ पोंगल पर क्या करें

  1. प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार को अच्छी तरह स्वच्छ करें।
  3. तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर पूजा स्थान पर तैयार रखें।
  4. पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य देव का ध्यान करें।
  5. ऊपर तालिका में दिए गए शुभ मुहूर्त में सूर्य देव को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें।
  6. परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर सूर्य देव की आरती करें।
  7. पूजा संपन्न होने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें और प्रसाद सभी में बांटें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

The Sun enters Makara at 14 Jan 2027 21:10 IST. The Tamil rule opens the month on the sankranti day when the transit is before sunset; here it falls after, so the month opens next day. Thai therefore begins on 15 Jan 2027. (Report of the Calendar Reform Committee, Govt of India 1955, “Rules of Samkranti”, p.244)

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

पोंगल क्यों मनाया जाता है

पोंगल मुख्य रूप से सूर्य देव और प्रकृति की असीम कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक पावन पर्व है। भारतीय ज्योतिष और वैदिक परंपरा में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता और समस्त चराचर जगत की आत्मा माना गया है। जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तो इस खगोलीय संक्रमण को मकर संक्रांति कहा जाता है। शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार मकर राशि में सूर्य का यह प्रवेश उत्तरायण के छह मासों का आरंभ करता है[1]। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, इस संक्रांति पर्व को 'थाई पोंगल' के रूप में बड़े हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। तमिल पंचांग के अनुसार सौर मास 'थाई' का पहला दिन अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। संक्रांति काल के निर्धारण के लिए पारंपरिक नियमों के आधार पर पुण्य काल का विशेष विचार किया जाता है[2]। जब सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होता है, तब तमिल परंपरा के नियमानुसार नए मास और उत्सव का आरंभ अगले दिन के सूर्योदय से माना जाता है। इसी शास्त्रीय गणना के तहत यह पर्व उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। कृषि प्रधान समाज में यह समय खेतों से नई धान की फसल कटकर घर आने का होता है, इसलिए यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर संपूर्ण परिवार और समाज के लिए प्रकृति के साथ जुड़ने का उत्सव बन जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस पर्व के अधिपति ग्रह स्वयं सूर्य देव हैं। कालपुरुष की कुंडली में सूर्य को मान-सम्मान, प्राण शक्ति, स्वास्थ्य, पिता और नेतृत्व का कारक माना गया है। जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं, तो उनकी किरणों में दिव्यता और तेज की वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि सूर्य के आशीर्वाद से व्यक्ति के भीतर कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और सेवा भावना का विकास होता है। पारंपरिक रूप से पोंगल का संदेश त्याग, कृतज्ञता और सद्भाव का है। किसान अपने कठोर परिश्रम से अन्न उपजाते हैं, लेकिन उस अन्न को पकाने और जीवन को गति देने वाली ऊर्जा भगवान सूर्य से ही प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन सबसे पहले सूर्य को नमन किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर सूर्य के तेज का आदर करते हैं, जिससे गृह-क्लेश दूर होते हैं और आपसी प्रेम में प्रगाढ़ता आती है। यह उत्सव हमें सिखाता है कि जो कुछ भी हमें प्रकृति और ईश्वरीय शक्तियों से प्राप्त हुआ है, उसके लिए निस्वार्थ भाव से धन्यवाद ज्ञापित करना हमारा परम धर्म है।

🪔 पोंगल पूजा विधि

  1. आत्म शुद्धि — प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत करके पूर्व दिशा की ओर बैठें।
  2. स्थान शुद्धि — पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल छिड़क कर पवित्र करें और धूप-दीप प्रज्वलित करें।
  3. संकल्प — हाथ में जल और अक्षत लेकर सूर्य देव के समक्ष आज की पूजा का मानसिक संकल्प लें।
  4. सूर्य ध्यान — प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए उनके तेजस्वी और जीवनदायी स्वरूप का स्मरण करें।
  5. अर्घ्य समर्पण — तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  6. धूप और दीप — सूर्य देव के निमित्त शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप अर्पित करें।
  7. पुष्प अर्पण — पूजा की थाली से ताजे पुष्प और रोली सूर्य देव के प्रतीक स्वरूप अर्पित करें।
  8. कृतज्ञता प्रार्थना — नई फसल और जीवन में अन्न-जल प्रदान करने के लिए सूर्य देव और प्रकृति का आभार व्यक्त करें।
  9. सूर्य आरती — परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर सूर्य देव की कपूर अथवा घी के दीपक से आरती करें।
  10. प्रसाद वितरण — पूजा के उपरांत सूर्य देव को अर्पित नैवेद्य को परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मन में सूर्य देव का ध्यान करें।
  2. तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें अक्षत और कुमकुम मिलाएं।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और ऊपर दिए गए समय में सूर्य को अर्घ्य दें।
  4. हाथ जोड़कर जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और उत्तम स्वास्थ्य बनाए रखने की प्रार्थना करें।
  5. सूर्य देव को प्रणाम करें और घर के बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

🛒 पोंगल पूजा सामग्री

आवश्यक

  • तांबे का लोटा अर्घ्य के लिए
  • शुद्ध जल
  • रोली अथवा कुमकुम
  • अक्षत (अखंडित चावल)
  • शुद्ध घी का दीपक
  • धूपबत्ती अथवा अगरबत्ती
  • कपूर
  • आरती की थाली

वैकल्पिक

  • लाल या पीले ताजे पुष्प
  • गंगाजल
  • हल्दी
  • चंदन
  • ताजा फल
  • नैवेद्य के लिए गुड़ या मिष्ठान
  • पूजा की चौकी और लाल वस्त्र

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि तांबे का लोटा उपलब्ध न हो, तो पीतल या किसी अन्य शुद्ध धातु का पात्र पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि गंगाजल उपलब्ध न हो, तो सामान्य शुद्ध और स्वच्छ जल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि ताजे लाल पुष्प उपलब्ध न हों, तो अक्षत और रोली अर्पित करना पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि गाय का घी उपलब्ध न हो, तो तिल का शुद्ध तेल दीपक के लिए पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि चंदन उपलब्ध न हो, तो शुद्ध रोली या कुमकुम का तिलक लगाना पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

❓ पोंगल: क्या करें और क्या न करें

क्या पोंगल के दिन सिर धोकर स्नान कर सकते हैं?

हाँ, इस दिन सूर्योदय से पूर्व सिर धोकर शुद्ध स्नान करना पारंपरिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है। किसी भी पवित्र पर्व पर सूर्य पूजा से पहले पूर्ण शारीरिक शुद्धि को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या इस दिन बाल या नाखून काटना उचित है?

त्योहार और पर्व के पावन दिन पर बाल, दाढ़ी या नाखून काटना पारंपरिक मान्यताओं में वर्जित माना जाता है। ऐसी गतिविधियां पर्व से एक दिन पहले ही पूर्ण कर लेने की सलाह दी जाती है।

क्या पोंगल की पूजा में नमक का सेवन किया जा सकता है?

पूजा संपन्न होने के बाद बनने वाले भोजन में सामान्य नमक का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, पूजा से पहले का समय पूरी तरह पवित्र रखा जाता है और केवल सात्विक आहार ही ग्राह्य होता है।

क्या इस पावन दिन पर यात्रा की जा सकती है?

यदि आवश्यक हो तो यात्रा करने में कोई धार्मिक मनाही नहीं है। परंतु परंपरा यही कहती है कि यह पर्व परिवार के साथ एकत्र होकर घर पर ही मनाना श्रेयस्कर होता है।

क्या पोंगल के दिन नया काम या नया व्यापार शुरू कर सकते हैं?

सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है, इसलिए नया कार्य आरंभ किया जा सकता है। कार्य शुरू करने से पूर्व ऊपर दी गई तालिका में शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त अवश्य देख लें।

क्या इस दिन खरीदारी या नए कपड़े खरीदना शुभ है?

हाँ, पोंगल पर नए वस्त्र, घरेलू सामग्री और बर्तनों की खरीदारी करना बहुत मंगलकारी माना जाता है। नई फसल के स्वागत के इस पर्व में घर में नई वस्तुओं का प्रवेश समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

क्या सूर्य पूजा के तुरंत बाद भोजन किया जा सकता है?

हाँ, भगवान सूर्य को अर्घ्य और नैवेद्य अर्पित करने के तुरंत बाद प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। इसके पश्चात परिवार के सभी सदस्य बैठकर पारंपरिक रूप से तैयार भोजन का आनंद ले सकते हैं।

क्या पोंगल की पूजा रात्रि में की जा सकती है?

नहीं, पोंगल की मुख्य पूजा भगवान सूर्य को समर्पित होती है, इसलिए यह केवल दिन के समय, विशेषकर प्रातःकाल ही की जाती है। सूर्यास्त के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने का कोई शास्त्रीय विधान नहीं है।

क्या इस दिन घर में तामसिक भोजन बन सकता है?

इस पावन पर्व पर घर में मांस, मदिरा, प्याज या लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित माना गया है। घर में केवल शुद्ध, सात्विक और ताजा भोजन ही बनना चाहिए।

क्या दोपहर में सोना या दिन में विश्राम करना उचित है?

पर्व के दिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय सोना अनुचित माना जाता है, क्योंकि यह समय सूर्य उपासना का होता है। पूजा और सभी आवश्यक कार्य संपन्न करने के बाद सामान्य विश्राम किया जा सकता है।

क्या इस दिन घर में कलह या अपशब्दों से बचना चाहिए?

हाँ, संक्रांति और पोंगल के दिन घर का वातावरण शांत, सौहार्दपूर्ण और प्रसन्न रहना चाहिए। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या कटु वचनों से पर्व की सात्विक ऊर्जा क्षीण मानी जाती है।

क्या मासिक धर्म के दौरान महिलाएं यह पूजा कर सकती हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान प्रत्यक्ष पूजा अनुष्ठान और नैवेद्य बनाने से दूर रहने का विधान है। हालांकि, मन ही मन भगवान सूर्य का स्मरण और नमन बिना किसी रोक-टोक के किया जा सकता है।

क्या पोंगल पर दान-पुण्य करना आवश्यक माना गया है?

संक्रांति काल में अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों में सूर्य संक्रांति के अवसर पर किए गए निस्वार्थ दान को विशेष महत्व दिया गया है।

0

⚠️ आम गलतियाँ

  • सूर्योदय के काफी समय बाद तक सोते रहना और पूजा में विलंब करना इस पर्व के अनुष्ठान को अधूरा बनाता है।
  • बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
  • सूर्य देव को अर्घ्य देते समय तांबे के अलावा अशुद्ध या खंडित पात्र का उपयोग करने से विधि अधूरी रह जाती है।
  • पूजा के दौरान मन में क्रोध, तनाव या दूसरों के प्रति द्वेष रखने से पर्व का आध्यात्मिक उद्देश्य पूरा नहीं होता।
  • ऊपर तालिका में दिए गए शुभ मुहूर्त का ध्यान न रखकर राहुकाल के समय पूजा आरंभ करने से अनुष्ठान अपूर्ण माना जाता है।
  • घर के बुजुर्गों और माता-पिता का अनादर करके की गई सूर्य पूजा पारंपरिक रूप से फलित नहीं मानी जाती।
  • नई फसल और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किए बिना केवल औपचारिकता निभाना इस पर्व की मूल भावना के विपरीत है।

📖 पोंगल कथा

पोंगल और मकर संक्रांति से जुड़ी पारंपरिक कथाएं भगवान सूर्य और प्रकृति के सनातन संबंध को उजागर करती हैं। एक लोकप्रिय पौराणिक आख्यान के अनुसार, भगवान शिव ने एक बार अपने वाहन नंदी बैल को पृथ्वी लोक पर एक संदेश देने भेजा था। महादेव ने नंदी से कहा था कि वे मनुष्यों से कहें कि वे प्रतिदिन तेल लगाकर स्नान करें और महीने में केवल एक बार भोजन करें। परंतु नंदी ने पृथ्वी पर पहुंचकर संदेश को समझने में भूल कर दी। उन्होंने मानव समाज से कह दिया कि वे रोज भोजन करें और महीने में केवल एक बार स्नान करें। जब नंदी वापस कैलाश पहुंचे और उन्होंने भगवान शिव को अपने द्वारा दिए गए संदेश के बारे में बताया, तो महादेव रुष्ट हो गए। महादेव ने नंदी से कहा कि तुम्हारे गलत संदेश के कारण अब पृथ्वी पर अन्न की भारी कमी हो जाएगी, क्योंकि मनुष्य प्रतिदिन भोजन करेगा। अतः तुम्हें पृथ्वी पर ही रहकर किसानों की सहायता करनी होगी और खेतों को जोतकर भारी मात्रा में अन्न उपजाने में उनका साथ देना होगा। इसी मान्यता के कारण पोंगल के पर्व पर कृषि कार्यों में सहायता करने वाले बैलों और मवेशियों के प्रति भी आदर व्यक्त किया जाता है, जो अगले दिन मट्टू पोंगल के रूप में दिखता है। इसके साथ ही एक अन्य शास्त्रीय कथा सूर्य देव और उनके पुत्र शनि देव के आपसी संबंध से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और शनि देव के मध्य वैचारिक मतभेद थे। परंतु जब सूर्य देव अपने भ्रमण क्रम में मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो कि शनि देव की स्वराशि है, तब पिता स्वयं अपने पुत्र के घर जाते हैं। इस दिन शनि देव अपने पिता सूर्य देव का स्वागत करते हैं और दोनों के संबंध मधुर होते हैं। यह कथा सिखाती है कि पोंगल का पर्व पुराने मनमुटाव, कड़वाहट और पारिवारिक मतभेदों को भुलाकर प्रेम, सौहार्द और परस्पर सम्मान स्थापित करने का सर्वोत्तम अवसर है। नई फसल का नैवेद्य सूर्य को अर्पित कर परिवार में सुख और शांति की कामना की जाती है।

🪔 आरती

भगवान सूर्य की आरती प्रातःकाल अर्घ्य समर्पण और पूजन के मुख्य चरण के तुरंत बाद की जाती है। आरती की थाली में शुद्ध गाय के घी का दीपक अथवा कपूर प्रज्वलित करें। आरती करते समय थाली को सूर्य देव के विग्रह अथवा पूर्व दिशा की ओर घड़ी की सुई की दिशा में गोलाकार घुमाएं। परिवार के सभी सदस्य श्रद्धाभाव से आरती में सम्मिलित हों। आरती पूर्ण होने पर दोनों हाथों से आरती की लौ का स्पर्श लेकर अपनी आंखों और मस्तक पर लगाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार पोंगल के उपाय

धन का ठहराव न होना

तांबे के लोटे में शुद्ध जल और थोड़े अक्षत डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। कब: पोंगल की सुबह स्नान करने के तुरंत बाद। खर्च: free. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य देव कुंडली में ऐश्वर्य और आत्मबल के स्वामी हैं इसलिए उनकी प्रत्यक्ष कृपा से आर्थिक स्थिरता को बल मिलता है।

करियर और कार्यक्षेत्र में उन्नति न मिलना

किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सवा मुट्ठी साफ गुड़ या ताजे फल का दान करें। कब: पोंगल के दिन दोपहर होने से पहले। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य ग्रह मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और आजीविका के मुख्य कारक हैं जिससे कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

दांपत्य जीवन में कटुता या विवाह में अड़चन

घर के ईशान कोण में शुद्ध जल का छिड़काव करें और मन में सूर्य देव से सुखद गृहस्थ जीवन की प्रार्थना करें। कब: पोंगल की सुबह सूर्य पूजा के तुरंत बाद। खर्च: free. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से रिश्तों में जमी कड़वाहट दूर होकर पारिवारिक सौहार्द और स्पष्टता आती है।

संतान के स्वास्थ्य या पढ़ाई में एकाग्रता की कमी

एक तांबे के पात्र में जल भरकर सूर्य के सम्मुख रखें और पूजा के बाद वह जल संतान को आचमन कराएं। कब: पोंगल की सुबह स्नान और सूर्य दर्शन के बाद। खर्च: free. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य जीवन शक्ति और मेधा के स्वामी हैं जो संतान को तेज, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं।

घर के सदस्यों के बीच बार-बार मतभेद होना

परिवार के सभी सदस्य मिलकर एक साथ सूर्य देव को प्रणाम करें और सूर्य की धूप में कुछ क्षण बैठें। कब: पोंगल के दिन सुबह की पूजा के ठीक बाद। खर्च: free. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य के शनि की राशि में प्रवेश की यह तिथि पिता-पुत्र और परिजनों के आपसी मतभेद मिटाने का प्रतीक है।

घर में नकारात्मक ऊर्जा और भारीपन महसूस होना

मुख्य द्वार पर शुद्ध जल में चुटकी भर हल्दी मिलाकर छिड़कें और देहरी को स्वच्छ करें। कब: पोंगल के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 1. आपके लिए क्यों: सूर्य की प्रकाशमयी ऊर्जा अंधकार और नकारात्मकता का नाश कर घर में चैतन्य और आरोग्य लाती है।

क्या पोंगल आपके लिए विशेष है?

इस पृष्ठ पर दी गई सूर्य और संक्रांति की जानकारी एक सामान्य ज्योतिषीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह समझना आवश्यक है कि गोचर में सूर्य का प्रभाव पूरे संसार के लिए समान होता है, लेकिन आपकी अपनी जन्मकुंडली में सूर्य किस भाव में बैठे हैं, उनकी स्थिति और दशा क्या है, यह हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल अलग होता है। सामान्य उपाय केवल प्राथमिक मार्गदर्शन देते हैं, वे व्यक्तिगत जीवन की विशिष्ट उलझनों का पूर्ण समाधान नहीं हो सकते। यदि आप अपने जीवन के विभिन्न पक्षों को गहराई से समझना चाहते हैं, तो त्रिकाल वाणी में व्यक्तिगत परामर्श ले सकते हैं। व्यक्तिगत Kundli विश्लेषण से आप अपने करियर, धन, वर्तमान दशा और सही समय (timing) की सटीक स्थिति जान सकते हैं। विवाह से जुड़े निर्णयों के लिए Kundali Milan के माध्यम से वैवाहिक अनुकूलता देखी जाती है। इसके अतिरिक्त, रेखाओं के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए Hastrekha और अवचेतन मन के संकेतों को डिकोड करने के लिए Swapna Shastra का सहारा लिया जा सकता है।

शब्दावली · Glossary

संक्रांति
सूर्य का एक सौर राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की खगोलीय घटना को संक्रांति कहा जाता है।
उत्तरायण
मकर संक्रांति से सूर्य की उत्तर दिशा की ओर गति आरंभ होती है, जिसे अत्यंत शुभ अवधि माना जाता है।
अर्घ्य
तांबे के पात्र में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आदरपूर्वक किसी देवता को समर्पित करने की शास्त्रीय क्रिया।
अभिजीत मुहूर्त
दिन का वह अत्यंत शुभ समय जो दोपहर के मध्य में पड़ता है और सभी शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
राहुकाल
दिन का वह अशुभ समय जिसमें कोई भी नया या मांगलिक कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है।
थाई मास
तमिल सौर पंचांग का अत्यंत पावन मास जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑सूर्य सिद्धांत
    अयनम्।अथ आयन द्वयमाहभानोर्मकरसंस्क्रान्तेः षण्मासा उत्तरायणम्। कर्कादेस्तु तथैव स्यात् षण्मासा दक्षिणायनम्
    — सूर्य सिद्धांत, अध्याय 10 — ज्योतिषाधिकारः · श्लोक 9

    सूर्य के मकर संक्रांति में प्रवेश से छह मास का उत्तरायण काल आरंभ होता है।

    The six months of Uttarayana begin from the Sun's transit into Capricorn.

  2. [2]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    संक्रान्तिकालादुभयत्र नाडिकाः पुण्या मताः षोडश षोडशोष्णगोः । निशीथतोऽर्वागपरत्र संक्रमे पूर्वाpराह्रांतिमपूर्वभागकौ ॥ ५ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 3 — संक्रान्तिप्रकरणम् · श्लोक 5

    सूर्य संक्रांति काल के दोनों ओर की सोलह-सोलह नाड़ियां पुण्यदायी मानी गई हैं।

    Sixteen nadikas both before and after the solar transit are considered meritorious.

चेन्नई में पोंगल — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वर्ष 2027 में पोंगल का पर्व किस तारीख को मनाया जाएगा?

वर्ष 2027 में पोंगल का मुख्य पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सूर्य देव का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी की रात्रि में होने के कारण तमिल सौर कैलेंडर के नियमानुसार संक्रांति का दिन 15 जनवरी को पड़ता है। इस दिन प्रातःकाल से ही पोंगल के पारंपरिक अनुष्ठान आरंभ हो जाते हैं। श्रद्धालु पूरे दिन सूर्य देव की उपासना और कृतज्ञता ज्ञापन के साथ इस उत्सव को मनाते हैं।

पोंगल 2027 पर पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?

पोंगल पर पूजा का मुख्य समय प्रातःकाल सूर्योदय के दौरान होता है, क्योंकि यह उत्सव प्रत्यक्ष सूर्य देव की आराधना का है। अपने शहर के सटीक सूर्योदय का समय जानने के लिए इस पृष्ठ पर ऊपर दी गई तालिका को देखें। इसके अतिरिक्त आप दिए गए शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में भी सूर्य पूजा संपन्न कर सकते हैं। राहुकाल की अवधि में मुख्य पूजा आरंभ करने से बचना चाहिए।

पोंगल और मकर संक्रांति में क्या अंतर है?

खगोलीय दृष्टि से दोनों ही पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाए जाते हैं। मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है, जबकि पोंगल विशेष रूप से दक्षिण भारत और तमिल परंपरा का चार दिवसीय प्रमुख पर्व है। पोंगल में मुख्य रूप से नई फसल के स्वागत, भगवान सूर्य के प्रति आभार और कृषि पशुओं के सम्मान पर जोर दिया जाता है। दोनों की तिथि सौर गणना पर आधारित होती है, परंतु क्षेत्रीय रीति-रिवाज भिन्न होते हैं।

वर्ष 2027 में पोंगल के दिन कौन सा पंचांग योग और नक्षत्र रहेगा?

त्रिकाल वाणी ज्योतिष पंचांग के अनुसार 15 जनवरी 2027 को सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। इस दिन नक्षत्र रेवती और योग शिव का शुभ संयोग बन रहा है। वार के रूप में यह दिन शुक्रवार रहेगा, जो माता लक्ष्मी और समृद्धि का दिन माना जाता है। यह समस्त खगोलीय संयोग नई शुरुआत और सात्विक आराधना के लिए अत्यंत अनुकूल माने जाते हैं।

पोंगल के पावन दिन पर सबसे मुख्य कार्य क्या करना चाहिए?

इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य प्रातःकाल स्नान करके भगवान सूर्य को शुद्ध जल से अर्घ्य देना है। इसके साथ ही नई फसल के अन्न से बना पारंपरिक पकवान सूर्य देव को नैवेद्य के रूप में समर्पित किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर प्रकृति, सूर्य और धरती माता के प्रति आभार प्रकट करते हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और परस्पर सौहार्द बढ़ाना भी इस दिन का अनिवार्य अंग है।

क्या पोंगल के दिन व्रत रखने का कोई शास्त्रीय नियम है?

पोंगल मूल रूप से उपवास की जगह नई फसल के स्वागत और सात्विक भोज का पर्व है। पारंपरिक रूप से अधिकांश लोग सुबह की सूर्य पूजा और अर्घ्य देने तक ही निराहार रहते हैं। एक बार जब सूर्य देव को नैवेद्य अर्पित कर दिया जाता है, उसके बाद पूरा परिवार मिलकर प्रसाद ग्रहण करता है। यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से भूखा नहीं रह सकता, तो वह फलाहार ले सकता है।

पोंगल की पूजा के लिए कौन-कौन सी आवश्यक सामग्री चाहिए?

पूजा के लिए तांबे का लोटा, शुद्ध जल, रोली या कुमकुम, अक्षत और शुद्ध घी का दीपक सबसे आवश्यक वस्तुएं हैं। इसके अलावा सुगंधित धूपबत्ती, कपूर, ताजे पुष्प और आरती की एक स्वच्छ थाली की आवश्यकता होती है। यदि संभव हो तो सूर्य देव को भोग लगाने के लिए गुड़, ताजा फल या मिष्ठान की व्यवस्था भी की जा सकती है। यदि कोई सामग्री न मिले, तो उसकी जगह अक्षत और शुद्ध जल से भी भावपूर्वक पूजा की जा सकती है।

पोंगल के दिन क्या खाने से बचना चाहिए?

इस पवित्र पर्व पर घर में किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन और मदिरा पूरी तरह वर्जित मानी जाती है। इसके साथ ही भोजन में प्याज और लहसुन जैसे तामसिक तत्वों का प्रयोग करने से भी बचना चाहिए। बासी, जला हुआ या अत्यधिक तीखा भोजन इस दिन नहीं पकाया जाता। घर में केवल शुद्ध, सात्विक और ताजा शाकाहारी भोजन ही तैयार किया जाना चाहिए।

पोंगल पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि क्या है?

प्रातःकाल स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें थोड़ी रोली व अक्षत मिलाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और लोटे को दोनों हाथों से सिर के स्तर तक उठाएं। जल की धारा के मध्य से सूर्य देव के तेजस्वी स्वरूप के दर्शन करते हुए धीरे-धीरे जल भूमि पर अर्पित करें। ध्यान रखें कि अर्पित किए जा रहे जल के छींटे आपके पैरों पर न पड़ें।

क्या पोंगल के दिन कोई विशेष मंत्र जपना अनिवार्य है?

इस पर्व के लिए पंचांग में किसी विशेष गुप्त या कठिन मंत्र का उल्लेख नहीं है। आप केवल शांत चित्त से भगवान सूर्य का ध्यान कर सकते हैं और सामान्य रूप से 'सूर्य देव' का स्मरण कर सकते हैं। अपनी मातृभाषा में सहज भाव से की गई प्रार्थना भी ईश्वर तक पहुंचती है। सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव किसी भी औपचारिक मंत्रोच्चार से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

पोंगल के दिन कौन सी पौराणिक कथा सुनी या पढ़ी जाती है?

इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव के वाहन नंदी बैल और भगवान सूर्य-शनि के मधुर मिलन की कथाएं सुनी जाती हैं। नंदी की कथा मनुष्य के लिए कृषि और गोवंश के अटूट महत्व को दर्शाती है। वहीं सूर्य और शनि की कथा पारिवारिक मतभेदों को मिटाकर आपसी प्रेम और सम्मान स्थापित करने का संदेश देती है। ये कथाएं हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और कृतज्ञ बने रहने की प्रेरणा देती हैं।

पोंगल के दिन क्या नया काम, व्यापार या गृह प्रवेश शुरू किया जा सकता है?

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश उत्तरायण की शुभ शुरुआत माना जाता है, इसलिए नए कार्यों के लिए यह अनुकूल समय है। कोई भी नया कार्य, दुकान का उद्घाटन या व्यापारिक अनुबंध इस दिन किए जा सकते हैं। हालांकि, कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले इस पृष्ठ पर दिए गए शुभ मुहूर्त और राहुकाल का ध्यान अवश्य रखें। शुभ चौघड़िया में शुरू किया गया कार्य बिना रुकावट के आगे बढ़ता है।

क्या पोंगल के दिन खरीदारी करना या नए वस्त्र पहनना शुभ होता है?

हाँ, पोंगल पर नए वस्त्र पहनना और घर के लिए नई वस्तुओं की खरीदारी करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। दक्षिण भारत में इस दिन लोग पारंपरिक नए परिधान धारण करके ही सूर्य देव की आराधना करते हैं। नई फसल और नई समृद्धि के प्रतीक के रूप में घर में नए बर्तन या उपयोगी सामान लाना शुभ माना जाता है। यह परंपरा परिवार में नए उत्साह और उमंग का संचार करती है।

पोंगल के दिन दान करने का क्या महत्व है और क्या दान करना चाहिए?

मकर संक्रांति और पोंगल के पावन अवसर पर दान करने का शास्त्रों में विशेष महात्म्य बताया गया है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को गुड़, अन्न, तिल, ताजे फल या शीत निवारक वस्त्रों का दान करना चाहिए। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए किए गए निस्वार्थ दान से आत्मिक शांति प्राप्त होती है। दान हमेशा विनम्रतापूर्वक और बिना किसी अहंकार के दिया जाना चाहिए।

सूर्य देव को मजबूत करने के लिए पोंगल पर कौन सा सरल उपाय किया जा सकता है?

इस दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय है। इसके अलावा दोपहर से पहले किसी निर्धन व्यक्ति को थोड़ा सा गुड़ अथवा मौसमी फल आदरपूर्वक भेंट करें। अपने पिता और घर के सभी बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद अवश्य लें। यह सात्विक आचरण कुंडली में सूर्य की ऊर्जा को सकारात्मक रूप से सक्रिय करता है।

अलग-अलग शहरों में पोंगल की पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?

सूर्य पूजा सीधे तौर पर सूर्योदय के खगोलीय समय पर निर्भर करती है, जो हर शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार बदलता है। पूर्वी शहरों में सूर्योदय पहले होता है, जबकि पश्चिमी शहरों में यह कुछ समय बाद दिखाई देता है। इसी कारण दिल्ली, चेन्नई, मुंबई या कोलकाता में पूजा का सटीक समय अलग-अलग मिनटों पर पड़ता है। अपने नगर का सही समय जानने के लिए हमेशा स्थानीय पंचांग तालिका ही देखनी चाहिए।

क्या पोंगल की पूजा घर की छत या बालकनी से की जा सकती है?

हाँ, पोंगल की पूजा खुले स्थान, आंगन, बालकनी या घर की छत से करना सबसे उत्तम माना जाता है। चूंकि यह पूजा प्रत्यक्ष सूर्य नारायण को समर्पित है, इसलिए खुले आकाश के नीचे सूर्य की किरणों की उपस्थिति में पूजा करना श्रेष्ठ है। यदि आपके घर में ऐसी व्यवस्था न हो, तो आप पूर्व दिशा की खिड़की के पास खड़े होकर भी अर्घ्य दे सकते हैं। मन की शुद्धि और एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण है।

क्या पोंगल के दिन बाल धोना या कपड़े धोना वर्जित है?

पोंगल के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व सिर धोकर स्नान करना पारंपरिक रूप से अत्यंत शुभ माना गया है। घर की सामान्य साफ-सफाई और वस्त्र धोना वर्जित नहीं है, परंतु यह कार्य पूजा से पहले ही निपटा लेना चाहिए। पूजा के समय पहने जाने वाले वस्त्र पूरी तरह स्वच्छ और धुले हुए होने चाहिए। अशुद्ध या मैले वस्त्र पहनकर सूर्य देव की आराधना करने से बचना चाहिए।

पोंगल के दिन घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

इस पावन दिन पर परिवार के किसी भी सदस्य के साथ वाद-विवाद, कटु वाणी या कलह से बचना चाहिए। घर की देहरी और मुख्य द्वार को स्वच्छ रखें तथा वहां सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या नकारात्मक विचार न आने दें। सभी के साथ मिलकर प्रसन्नतापूर्वक पर्व मनाना ही इस दिन की वास्तविक आध्यात्मिक साधना है।

वर्ष 2027 में पोंगल की तिथि 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी को क्यों है?

वर्ष 2027 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात को सूर्यास्त के बाद हो रहा है। भारत सरकार के कैलेंडर सुधार समिति (1955) के संक्रांति नियमों और शास्त्रीय तमिल परंपरा के अनुसार, यदि संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो, तो नया मास और उत्सव अगले दिन शुरू होता है। इसी कारण तमिल सौर मास 'थाई' का आरंभ 15 जनवरी 2027 को माना गया है। अतः पोंगल का मुख्य उत्सव 15 जनवरी को ही विधिपूर्वक मनाया जाएगा।

चेन्नई में आने वाले त्योहार

और देखें

Free Vedic Calculators

Curious what this means for YOUR chart? Try these free tools — no signup: