दिल्ली एनसीआर · Delhi

दिल्ली एनसीआर में गोवर्धन पूजा

सोमवार, 9 नवंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

साल 2026 में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व दिवाली के ठीक अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। इस दिन मुख्य रूप से सुबह के समय अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। आपके शहर के अनुसार पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त और समय ऊपर टेबल में दिया गया है।

🕐 दिल्ली एनसीआर के लिए गोवर्धन पूजा का समय

सूर्योदय की तिथिAmavasya (Krishna Paksha)12:32 तक
पर्व की तिथिPratipada 12:32 से
नक्षत्रSwati, पाद 407:24 तक
योग · करणSaubhagya · Naga
पूजा मुहूर्त06:42-08:50 (प्रातः)
अभिजित मुहूर्त11:42-12:25
राहुकाल08:02-09:23
यमगंड · गुलिक10:43-12:04 · 13:24-14:45
सूर्योदय · सूर्यास्त06:42 · 17:26

दिल्ली एनसीआर (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

गोवर्धन पूजा पर क्या करें

  1. टेबल में दिए गए मुहूर्त के अनुसार पूजा की तैयारी शुरू करें।
  2. घर के आंगन या पूजा स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लें।
  3. गाय के ताजे गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं।
  4. गोवर्धन पर्वत को ताजे फूल और रोली से सजाएं।
  5. भगवान को घर में बने अन्नकूट का भोग अर्पित करें।
  6. गोवर्धन जी की सात या ग्यारह बार परिक्रमा करें।
  7. परिवार के साथ मिलकर आरती करें और प्रसाद बांटें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Pratipada pervades pratah kaal on one day only (100% of the window). The annakut is offered in the morning, so Kartik Shukla Pratipada is judged in pratah kaal. The annakut is offered on the morning following the Diwali amavasya. Anchored to the day after 2026-11-08.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में गोवर्धन पूजा का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:4211:42-12:2508:02-09:23
मुंबई06:4611:59-12:4408:10-09:34
नोएडा06:4211:42-12:2508:02-09:23
गुरुग्राम06:4311:43-12:2608:03-09:24
बेंगलुरु06:1911:40-12:2507:45-09:11
हैदराबाद06:2111:36-12:2107:45-09:10
पुणे06:4111:55-12:3908:05-09:29
कोलकाता05:4910:57-11:4207:11-08:34
चेन्नई06:0811:29-12:1407:34-09:00
अहमदाबाद06:5312:01-12:4508:15-09:38

गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है

गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का एक विशेष पर्व है। यह त्योहार हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। दिवाली की अमावस्या के ठीक अगले दिन सुबह के समय अन्नकूट का भोग लगाने की पुरानी परंपरा है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा का विधान है, जो हमें यह सिखाता है कि मनुष्य का जीवन पूरी तरह से प्रकृति, पर्यावरण और पशुओं पर निर्भर है। इस पर्व का ज्योतिषीय महत्व भी बहुत गहरा है। गोवर्धन पूजा के दिन का स्वामी ग्रह बृहस्पति (Jupiter) है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को धर्म, ज्ञान, विस्तार, अन्न और समृद्धि का कारक माना गया है। जब हम इस दिन अन्नकूट (विभिन्न प्रकार के पकवान और अनाज) का दान या भोग लगाते हैं, तो यह सीधे तौर पर बृहस्पति ग्रह की ऊर्जा से जुड़ता है। गुरु ग्रह की कृपा से जीवन में सात्विकता और ठहराव आता है। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि हमारे पास जो भी भोजन या संसाधन उपलब्ध हैं, वे सब ईश्वर और प्रकृति की देन हैं, और हमें उनका सम्मान करना चाहिए। पंचांग गणना के अनुसार, यह पूजा उस दिन की जाती है जब प्रतिपदा तिथि प्रातः काल में व्याप्त होती है। साल 2026 में यह स्थिति 9 नवंबर को बन रही है। इस दिन सुबह के समय अन्नकूट अर्पित करने का विशेष महत्व है। गोवर्धन पूजा केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह अहंकार को त्यागकर प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। बृहस्पति ग्रह का प्रभाव इस दिन को और भी खास बना देता है। जिन लोगों को जीवन में दिशा की कमी महसूस होती है या जो लोग अपने ज्ञान और विवेक को बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए इस दिन सात्विक भाव से पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। अन्न का दान और गायों की सेवा करना बृहस्पति को मजबूत करने के पारंपरिक उपाय हैं। यह त्योहार हमें एक साथ मिलकर रहना, अपनी जड़ों से जुड़े रहना और अपने पर्यावरण की रक्षा करना सिखाता है। इस दिन बनाए गए गोबर के गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से मन में शांति और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। समाज में इस पर्व का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह सामूहिक रूप से मनाया जाता है। लोग अपने घरों और मंदिरों में छप्पन भोग बनाते हैं और फिर उसे प्रसाद के रूप में बांटते हैं। यह साझा करने की भावना गुरु ग्रह के 'विस्तार' और 'उदारता' के गुणों को दर्शाती है। जब हम दूसरों को भोजन कराते हैं, तो हम अनजाने में ही बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभावों को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं।

🪔 गोवर्धन पूजा पूजा विधि

  1. स्नान और सफाईसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  2. गोवर्धन पर्वत बनानाघर के आंगन या बालकनी में ताजे गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं।
  3. सजावटगोवर्धन पर्वत को फूलों, रोली, और रंगों से सजाएं।
  4. सामग्री तैयार करनापूजा के लिए धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल और फूल एक थाली में सजा लें।
  5. अन्नकूट बनानारसोई में सात्विक भोजन और विभिन्न प्रकार के पकवान (अन्नकूट) तैयार करें।
  6. पूजा आरंभऊपर दिए गए शुभ मुहूर्त में गोवर्धन जी के सामने घी का दीपक जलाएं।
  7. भोग लगानातैयार किया गया अन्नकूट और मिठाइयां गोवर्धन जी को अर्पित करें।
  8. परिक्रमागोवर्धन पर्वत की सात या ग्यारह बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय हाथ में जल का लोटा रखें और जल गिराते हुए चलें।
  9. आरतीपरिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर आरती करें।
  10. प्रसाद वितरणपूजा संपन्न होने के बाद अन्नकूट का प्रसाद सभी में बांटें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहन लें और पूजा की थाली तैयार करें।
  2. घर में एक छोटे से हिस्से में गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन बनाएं।
  3. शुभ मुहूर्त में गोवर्धन जी को रोली, फूल और जल अर्पित करें।
  4. घर में बना कोई भी सात्विक भोजन या मिठाई का भोग लगाएं।
  5. एक परिक्रमा करके हाथ जोड़ लें और प्रसाद ग्रहण करें।

🛒 गोवर्धन पूजा पूजा सामग्री

आवश्यक

  • गाय का गोबर
  • रोली
  • अक्षत (चावल)
  • फूल
  • जल का लोटा
  • दीपक और घी
  • अन्नकूट का प्रसाद

वैकल्पिक

  • छप्पन भोग
  • मिठाइयां
  • पंचामृत
  • कलवा (मौली)
  • धूप बत्ती
  • फल

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if गाय का गोबर is unavailable, मिट्टी या चित्र से पूजा is traditionally accepted
  • if छप्पन भोग is unavailable, घर में बना सामान्य सात्विक भोजन is traditionally accepted
  • if ताजे फूल is unavailable, अक्षत (चावल) is traditionally accepted

गोवर्धन पूजा: क्या करें और क्या न करें

क्या गोवर्धन पूजा के दिन बाल धो सकते हैं?

हां, यह एक खुशी का त्योहार है और इस दिन बाल धोने की कोई मनाही नहीं है। आप सुबह स्नान करते समय आराम से बाल धोकर शुद्ध हो सकते हैं।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

त्योहार के दिन नाखून काटना पारंपरिक रूप से शुभ नहीं माना जाता है। बेहतर होगा कि आप पूजा से एक दिन पहले ही यह काम कर लें।

क्या अन्नकूट के प्रसाद में लहसुन-प्याज डाल सकते हैं?

बिल्कुल नहीं, अन्नकूट का प्रसाद पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए। इसमें लहसुन और प्याज का इस्तेमाल करने से पूजा अपूर्ण मानी जाती है।

क्या गोवर्धन पूजा रात में की जा सकती है?

पंचांग के अनुसार अन्नकूट का भोग मुख्य रूप से सुबह के समय लगाया जाता है। इसलिए ऊपर दिए गए मुहूर्त के अनुसार सुबह पूजा करना ही उचित है।

क्या महिलाएं गोवर्धन पर्वत बना सकती हैं?

हां, घर की महिलाएं खुशी-खुशी गोबर से गोवर्धन पर्वत बना सकती हैं। इसमें कोई पाबंदी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार का सामूहिक काम है।

क्या इस दिन नए कपड़े पहनना जरूरी है?

नए कपड़े पहनना जरूरी नहीं है, लेकिन आपके कपड़े साफ और शुद्ध होने चाहिए। आप धुले हुए पुराने कपड़े पहनकर भी श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं।

क्या गोवर्धन पूजा के दिन यात्रा कर सकते हैं?

इस दिन यात्रा करने में कोई दोष नहीं है। पूजा संपन्न करने और प्रसाद ग्रहण करने के बाद आप अपनी जरूरत के अनुसार यात्रा कर सकते हैं।

क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?

दिवाली के अगले दिन आने वाला यह पर्व बहुत ही शुभ होता है। आप ऊपर टेबल में दिए गए शुभ मुहूर्त को देखकर कोई भी नया काम शुरू कर सकते हैं।

क्या हम पूजा से पहले कुछ खा सकते हैं?

पारंपरिक रूप से पूजा और अन्नकूट का भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। हालांकि, अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो आप चाय या फल ले सकते हैं।

क्या पीरियड्स के दौरान गोवर्धन पूजा कर सकते हैं?

मासिक धर्म के दौरान सीधे पूजा में बैठने या भगवान का भोग बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। आप दूर बैठकर मानसिक रूप से प्रार्थना कर सकती हैं और परिवार के अन्य सदस्य पूजा कर सकते हैं।

क्या बाजार से मिठाई लाकर भोग लगा सकते हैं?

वैसे तो घर में बना अन्नकूट सबसे उत्तम होता है। लेकिन अगर समय की कमी है, तो आप बाजार से शुद्ध सात्विक मिठाई लाकर भी भगवान को अर्पित कर सकते हैं।

क्या गाय का गोबर न मिलने पर पूजा रुक जाएगी?

नहीं, अगर गोबर उपलब्ध नहीं है तो आप मिट्टी से प्रतीकात्मक पर्वत बना सकते हैं। कई लोग भगवान के चित्र के सामने भी श्रद्धापूर्वक अन्नकूट का भोग लगाकर परंपरा निभाते हैं।

क्या इस दिन घर में झाड़ू-पोंछा कर सकते हैं?

हां, पूजा से पहले घर की साफ-सफाई करना बहुत जरूरी है। आप सुबह उठकर झाड़ू-पोंछा कर सकते हैं ताकि पूजा स्थल पूरी तरह से पवित्र हो जाए।

⚠️ आम गलतियाँ

  • मुहूर्त का ध्यान रखे बिना गलत समय पर पूजा करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • अन्नकूट के भोग में लहसुन या प्याज का इस्तेमाल करने से अनुष्ठान अपूर्ण रह जाता है।
  • गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा बीच में ही छोड़ देने से पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
  • बासी या जूठे फूलों का उपयोग करने से पूजा का फल पूरा नहीं मिलता।
  • बिना स्नान किए या अशुद्ध कपड़ों में भोग तैयार करने से यह परंपरा अधूरी मानी जाती है।
  • परिक्रमा करते समय दिशा का ध्यान न रखने (उल्टी परिक्रमा करने) से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • पूजा के तुरंत बाद गोवर्धन पर्वत को हटा देने से पूजा की पूर्णता में कमी आती है।

📖 गोवर्धन पूजा कथा

गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद है। यह कथा हमें प्रकृति के महत्व और अहंकार के पतन के बारे में बताती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रजवासी हर साल देवराज इंद्र की पूजा किया करते थे। उनका मानना था कि इंद्र की कृपा से ही अच्छी बारिश होती है और उनकी फसलें लहलहाती हैं। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि सभी लोग इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने नंदबाबा और अन्य बड़े-बुजुर्गों से इसका कारण पूछा। जब उन्हें बताया गया कि यह सब इंद्र को प्रसन्न करने के लिए है, तो श्रीकृष्ण ने कहा कि हमें इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। गोवर्धन पर्वत हमारे पशुओं को चारा देता है, वहां से हमें लकड़ियां मिलती हैं और उसी के कारण बारिश होती है। इसलिए असली रक्षक गोवर्धन पर्वत है। श्रीकृष्ण की बात मानकर सभी ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा बंद कर दी और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे, साथ ही उन्हें छप्पन भोग (अन्नकूट) अर्पित किए। जब देवराज इंद्र को यह बात पता चली, तो उन्हें बहुत क्रोध आया। उन्होंने इसे अपना अपमान समझा और गुस्से में आकर ब्रजमंडल पर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। बारिश इतनी तेज थी कि चारों तरफ पानी ही पानी हो गया। ब्रजवासी घबरा गए और श्रीकृष्ण के पास मदद मांगने पहुंचे। तब श्रीकृष्ण ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सभी ब्रजवासी अपने पशुओं के साथ उस पर्वत के नीचे आ गए और लगातार सात दिनों तक वहीं सुरक्षित रहे। इंद्र ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वे गोवर्धन पर्वत को टस से मस नहीं कर पाए। अंततः देवराज इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ। उनका अहंकार टूट गया और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। उसी दिन से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की यह पावन परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है।

🪔 आरती

गोवर्धन पूजा के समापन पर आरती करने का विशेष महत्व है। जब आप गोवर्धन पर्वत की पूजा कर लें, अन्नकूट का भोग लगा दें और परिक्रमा पूरी कर लें, उसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ मिलकर आरती करनी चाहिए। आरती के लिए घी का दीपक जलाएं और श्रद्धा भाव से भगवान की आरती उतारें। आरती पूरी होने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करें और दूसरों में बांटें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार गोवर्धन पूजा के उपाय

Money

आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए गोवर्धन पूजा के दिन बृहस्पति ग्रह का ध्यान करते हुए चने की दाल और गुड़ का दान करें। गुरु ग्रह धन का कारक है, इसलिए इस दिन सात्विक भाव से अन्न का दान करने से घर में बरकत आती है और पैसों की तंगी दूर होती है।

Career

नौकरी या व्यापार में तरक्की के लिए गोवर्धन पूजा की सुबह पूजा के समय पीले रंग के कपड़े पहनें। बृहस्पति ग्रह करियर में विस्तार और ज्ञान का प्रतीक है। इस दिन गोवर्धन जी को बेसन की मिठाई का भोग लगाने से कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

Marriage

विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए इस दिन बृहस्पति देव का स्मरण करें। गोवर्धन पूजा के दौरान हल्दी और कुमकुम का तिलक गोवर्धन पर्वत को लगाएं और फिर वही तिलक अपने माथे पर भी लगाएं। गुरु ग्रह विवाह का मुख्य कारक है, जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं।

Children

संतान सुख या बच्चों की तरक्की के लिए गोवर्धन पूजा के दिन गाय को हरा चारा या अपने हाथों से बना अन्नकूट खिलाएं। बृहस्पति ग्रह संतान का भी कारक माना जाता है। गाय की सेवा करने से गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव मिलते हैं और बच्चों के जीवन में सकारात्मकता आती है।

Home

घर में सुख-शांति और क्लेश खत्म करने के लिए गोवर्धन पूजा के दिन पूरे घर में गंगाजल में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर छिड़काव करें। बृहस्पति ग्रह सात्विकता का प्रतीक है। यह उपाय घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और समझ को बढ़ाता है।

Negativity

मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों से बचने के लिए गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट का प्रसाद ज्यादा से ज्यादा लोगों में बांटें। गुरु ग्रह उदारता सिखाता है। जब आप दूसरों को भोजन कराते हैं, तो मन की मलिनता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्या गोवर्धन पूजा आपके लिए विशेष है?

गोवर्धन पूजा और बृहस्पति ग्रह से जुड़े ये उपाय पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। एक सामान्य लेख में हम जो भी बताते हैं, वह सभी के लिए एक जैसा होता है। बृहस्पति ग्रह ज्ञान और धन का कारक है, यह बात सच है, लेकिन आपकी अपनी कुंडली में बृहस्पति किस भाव में बैठा है और आप पर क्या प्रभाव डाल रहा है, यह कोई सामान्य पेज नहीं बता सकता। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। यदि आप करियर, पैसे या दशा के बारे में सटीक समय जानना चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग आपके लिए है। शादी के लिए सही जीवनसाथी की तलाश है, तो Kundali Milan आपकी मदद करेगा। अगर आप अपने हाथों की रेखाओं में छिपे संकेत समझना चाहते हैं, तो Hastrekha रीडिंग चुनें। वहीं, अगर आपको अजीब सपने आते हैं और आप उनका मतलब जानना चाहते हैं, तो Swapna Shastra रीडिंग से आपको अपने सवालों के सही जवाब मिल सकते हैं।

दिल्ली एनसीआर में गोवर्धन पूजा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

साल 2026 में गोवर्धन पूजा कब मनाई जाएगी?

साल 2026 में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को मनाई जाएगी। पंचांग की गणना के अनुसार यह पर्व कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। यह तिथि दिवाली की अमावस्या के ठीक अगले दिन सुबह के समय व्याप्त होती है, इसलिए इसी दिन अन्नकूट अर्पित किया जाता है।

मेरे शहर में पूजा का सही मुहूर्त क्या है?

हर शहर का सूर्योदय और पंचांग का समय थोड़ा अलग होता है, इसलिए मुहूर्त भी बदल जाता है। आपके शहर के अनुसार पूजा का एकदम सटीक समय ऊपर दी गई टेबल में दिखाया गया है। आप उस टेबल में देखकर अपने अनुष्ठान की योजना बना सकते हैं।

क्या शहरों के बीच गोवर्धन पूजा के समय में अंतर होता है?

हां, भौगोलिक स्थिति के कारण सूर्योदय के समय में बदलाव होता है। हमारी वेबसाइट का इंजन आपके स्थान के अनुसार सटीक खगोलीय गणना करके मुहूर्त दिखाता है। इसलिए हमेशा अपने शहर का लोकल समय देखकर ही पूजा की शुरुआत करनी चाहिए।

गोवर्धन पूजा के दिन मुख्य रूप से क्या किया जाता है?

इस दिन मुख्य रूप से गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। उसके बाद भगवान को अन्नकूट यानी विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। अंत में परिवार के साथ मिलकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है और आरती होती है।

क्या गोवर्धन पूजा के दिन व्रत रखा जाता है?

पारंपरिक रूप से गोवर्धन पूजा के दिन व्रत रखने का कोई कड़ा नियम नहीं है। यह पर्व मुख्य रूप से अन्नकूट के भोग और प्रसाद ग्रहण करने का त्योहार है। लोग इस दिन तरह-तरह के सात्विक पकवान बनाते हैं और परिवार के साथ मिलकर आनंद लेते हैं।

अन्नकूट के प्रसाद में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?

अन्नकूट में मुख्य रूप से मौसमी सब्जियां, कढ़ी, चावल, पूरी और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां शामिल होती हैं। कई मंदिरों और घरों में छप्पन भोग भी तैयार किए जाते हैं। ध्यान रहे कि यह भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए, जिसमें लहसुन और प्याज का उपयोग न हो।

गोवर्धन पूजा में किन बातों से बचना चाहिए?

इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, घर में किसी भी प्रकार का क्लेश या वाद-विवाद करने से बचना चाहिए। प्रकृति और पशुओं का अपमान करना भी इस दिन बहुत अशुभ माना जाता है।

पूजा के लिए सबसे जरूरी सामग्री कौन सी है?

गोवर्धन पूजा में सबसे महत्वपूर्ण सामग्री गाय का गोबर है, जिससे पर्वत की आकृति बनाई जाती है। इसके अलावा फूल, रोली, अक्षत, जल का लोटा और दीपक की आवश्यकता होती है। भोग लगाने के लिए घर में बना शुद्ध अन्नकूट का प्रसाद भी अनिवार्य है।

गोवर्धन पूजा की शुरुआत कैसे हुई थी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा था। जब इंद्र ने क्रोधित होकर भारी बारिश की, तो श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर सबकी रक्षा की थी। उसी समय से प्रकृति के प्रति आभार जताने के लिए यह पूजा शुरू हुई।

इस त्योहार का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

गोवर्धन पूजा के दिन का स्वामी ग्रह बृहस्पति (Jupiter) है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विस्तार और अन्न का कारक माना जाता है। इस दिन सात्विक भाव से पूजा करने और अन्न का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

क्या गोवर्धन पूजा के दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?

हां, गोवर्धन पूजा का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। दिवाली के तुरंत बाद आने वाले इस दिन आप कोई भी नया व्यापार या शुभ कार्य शुरू कर सकते हैं। ऊपर टेबल में दिए गए शुभ मुहूर्त को देखकर आप अपने नए काम की शुरुआत कर सकते हैं।

क्या इस दिन शॉपिंग या खरीदारी करना ठीक है?

बिल्कुल, त्योहार का माहौल होने के कारण इस दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। आप अपने घर के लिए जरूरी सामान, कपड़े या पूजा की सामग्री खरीद सकते हैं। बस राहुकाल के समय खरीदारी करने से बचने की सलाह दी जाती है, जो ऊपर टेबल में दिया गया है।

पूजा के समय कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

गोवर्धन पूजा के लिए कोई एक विशेष या जटिल मंत्र अनिवार्य नहीं है। आप सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन नाथ का ध्यान कर सकते हैं। ओम नमो भगवते वासुदेवाय या केवल श्री कृष्ण नाम का जाप करना भी पूरी तरह से फलदायी होता है।

इस दिन दान करने का क्या महत्व है?

गोवर्धन पूजा के दिन अन्न और भोजन का दान करना सबसे उत्तम माना गया है। चूंकि इस दिन का स्वामी बृहस्पति ग्रह है, इसलिए चने की दाल, गुड़ या पीले फलों का दान बहुत शुभ होता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और धन की कमी दूर होती है।

क्या गोवर्धन पूजा के उपाय मेरी सभी समस्याएं दूर कर देंगे?

ये उपाय पारंपरिक मान्यताओं और गुरु ग्रह की ऊर्जा पर आधारित हैं। इनसे जीवन में सकारात्मकता आती है और मानसिक शांति मिलती है। लेकिन किसी भी उपाय को जादू की तरह नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आपकी अपनी कुंडली के ग्रहों का असर आपके जीवन पर सबसे ज्यादा होता है।

क्या फ्लैट में रहने वाले लोग गोवर्धन पूजा कर सकते हैं?

शहरों में फ्लैट में रहने वालों के लिए गाय का गोबर मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आप एक छोटी सी थाली या गमले की मिट्टी से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बना सकते हैं। कई लोग भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के चित्र या मूर्ति की पूजा करके भी परंपरा निभाते हैं।

गोवर्धन पूजा और भाई दूज में क्या अंतर है?

गोवर्धन पूजा दिवाली के ठीक अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा है। वहीं, भाई दूज इसके अगले दिन यानी द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और रक्षा का प्रतीक है।

अगर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए जगह न हो तो क्या करें?

अगर आपके घर में इतनी जगह नहीं है कि आप परिक्रमा कर सकें, तो आप अपने स्थान पर ही खड़े होकर गोल घूम सकते हैं। इसे आत्म-परिक्रमा कहा जाता है और यह भी मान्य है। भगवान भाव के भूखे होते हैं, इसलिए मन में सच्ची श्रद्धा होना सबसे जरूरी है।

गोवर्धन जी की परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए?

पारंपरिक रूप से गोवर्धन पर्वत की सात या ग्यारह बार परिक्रमा करने का विधान है। परिक्रमा हमेशा नंगे पैर और हाथ में जल का लोटा लेकर करनी चाहिए। यदि कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो आप केवल एक या तीन परिक्रमा करके भी पूजा संपन्न कर सकते हैं।

अगर सुबह का मुहूर्त निकल जाए तो क्या पूजा नहीं कर सकते?

पंचांग के अनुसार अन्नकूट का भोग सुबह के समय लगाना सबसे उत्तम है। लेकिन अगर किसी कारणवश आप सुबह पूजा नहीं कर पाते हैं, तो आप दिन में किसी भी शुभ समय पर पूजा कर सकते हैं। हालांकि इसे अनुष्ठानिक रूप से अपूर्ण माना जा सकता है, लेकिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।

दिल्ली एनसीआर में आने वाले त्योहार

और देखें

Free Vedic Calculators

Curious what this means for YOUR chart? Try these free tools — no signup: