दिल्ली एनसीआर · Delhi

दिल्ली एनसीआर में होली

मंगलवार, 23 मार्च 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

वर्ष 2027 में होली का मुख्य पर्व 23 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि सूर्योदयव्यापिनी है, साथ ही हस्त नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। इस पावन दिन पर सुबह भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को अबीर-गुलाल अर्पित करें, होलिका की भस्म का तिलक लगाएं और फिर अपनों के साथ सौहार्दपूर्वक रंग खेलकर गुझिया व ठंडाई का आनंद लें।

🕐 दिल्ली एनसीआर के लिए होली का समय

तिथिPratipada (Krishna Paksha) — 14:28 तक
नक्षत्रHasta, पाद 2 — 19:49 तक
योग · करणVriddhi · Kaulava
अभिजित मुहूर्त12:03-12:52
राहुकाल15:29-16:59
यमगंड · गुलिक09:27-10:57 · 12:28-13:58
सूर्योदय · सूर्यास्त06:26 · 18:30

दिल्ली एनसीआर (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ होली पर क्या करें

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान साफ करें।
  2. भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के चरणों में लाल या गुलाबी गुलाल अर्पित करें।
  3. होलिका दहन की पवित्र भस्म से अपने और परिवार के माथे पर तिलक लगाएं।
  4. घर के बुजुर्गों के चरणों में गुलाल रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
  5. भगवान को गुझिया, बताशे और ठंडाई का भोग लगाएं।
  6. मन के पुराने गिले-शिकवे भुलाकर सभी को प्रेमपूर्वक गुलाल लगाएं।
  7. परिजनों और मित्रों के साथ मिल-बांटकर पारंपरिक मिठाइयां खाएं।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Pratipada pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). Suryodaya-vyapini: the tithi prevailing at sunrise governs the day, which is the general rule for vrats where no special kaal applies. Amanta (South and West India): The same day. Chaitra Krishna Pratipada in purnimanta reckoning is Phalguna Krishna Pratipada in amanta.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में होली का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:2612:03-12:5215:29-16:59
मुंबई06:4412:20-13:0915:45-17:15
नोएडा06:2512:02-12:5115:28-16:58
गुरुग्राम06:2612:03-12:5215:29-16:59
बेंगलुरु06:2512:01-12:5015:26-16:56
हैदराबाद06:2111:57-12:4615:22-16:52
पुणे06:4012:16-13:0515:41-17:11
कोलकाता05:4111:18-12:0614:43-16:13
चेन्नई06:1411:50-12:3915:15-16:45
अहमदाबाद06:4512:22-13:1015:47-17:17

होली क्यों मनाया जाता है

होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, समाज और मानवीय चेतना के नवीनीकरण का महापर्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार जब फाल्गुन मास की पूर्णिमा समाप्त होकर चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होती है, तब यह पावन पर्व मनाया जाता है। ऋतु परिवर्तन के इस संधिकाल में शीत ऋतु की विदाई होती है और वसंत ऋतु अपने पूरे यौवन पर होती है। प्रकृति में नए पल्लव और फूल खिलते हैं, जो हमारे भीतर भी नई ऊर्जा और उल्लास का संचार करते हैं। धार्मिक दृष्टि से इस पर्व की जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं। अथर्व परिशिष्ट में फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में होलाका पर्व मनाने का स्पष्ट उल्लेख आता है[1]। इसके साथ ही, मुहूर्त ग्रंथों में यह व्यवस्था दी गई है कि होलिका दहन से पूर्व के आठ दिनों में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, जिसे लोक परंपरा में होलाष्टक कहा जाता है[2]। इस काल में वातावरण में उग्र ऊर्जा का प्रभाव माना जाता है, जो होलिका दहन की पावन अग्नि के साथ ही शांत और भस्म हो जाता है। इस पर्व की मूल भावना भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और प्रभु नारायण की कृपा से जुड़ी है। जहाँ एक ओर अहंकारी हिरण्यकश्यप का दंभ चूर हुआ, वहीं अग्नि में न जलने का वरदान पाने वाली होलिका स्वयं भस्म हो गई। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सत्य और निष्ठा की रक्षा परमात्मा सदैव करते हैं। द्वापर युग में इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी ने ब्रज में गोप-गोपियों संग दिव्य प्रेम के रंगों की जो लीला रची थी, वह आज भी इस उत्सव की आत्मा है। ज्योतिषीय दृष्टि से होली का संबंध मन के कारक ग्रह चंद्रमा से है। चंद्रमा हमारे भावों, संवेदनाओं और मानसिक शांति को नियंत्रित करता है। रंगों का स्पर्श और आपसी मेलजोल सीधे तौर पर मन को प्रफुल्लित करता है और अवसाद को दूर भगाता है। इसके अतिरिक्त, यह पर्व कुंडली में मौजूद मंगल दोष और अनियंत्रित क्रोध की प्रवृत्ति को शांत करने का पारंपरिक अवसर माना गया है। लाल और गुलाबी रंगों का प्रयोग तथा मीठे पकवानों का आदान-प्रदान भीतर की उग्रता को सहज रूप से मधुरता में बदल देता है।

🪔 होली पूजा विधि

  1. शुद्धि एवं संकल्प — प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखकर पूजा का संकल्प लें।
  2. सामग्री एकत्रीकरण — होलिका पूजन के लिए सूखी लकड़ी, रोली, अक्षत, कच्चा सूत, नारियल, बताशे और नई फसल के अन्न एकत्रित करें।
  3. होलिका पूजन एवं अर्घ्य — होलिका स्थल पर गंगाजल छिड़कें, धूप-दीप प्रज्वलित करें और रोली-अक्षत अर्पित कर जल का अर्घ्य दें।
  4. आहुति समर्पण — होलिका की अग्नि में नारियल, बताशे, नई गेहूं की बालियां या चने की बालियां श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
  5. परिक्रमा एवं रक्षा प्रार्थना — अग्नि देव की तीन या सात बार परिक्रमा करें और परिवार की सुरक्षा व नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना करें।
  6. भस्म धारण — अग्नि शांत होने के बाद उसकी पवित्र भस्म (राख) को सम्मानपूर्वक लाकर अपने और परिजनों के माथे पर तिलक लगाएं।
  7. राधा-कृष्ण पूजन — घर के मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के चरणों में लाल और गुलाबी गुलाल अर्पित करें।
  8. मंत्र जप — "ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमो नमः" मंत्र का शांत भाव से स्मरण व जप करें।
  9. नैवेद्य भोग — भगवान को पारंपरिक गुझिया, बताशे और ठंडाई का प्रेमपूर्वक भोग लगाएं।
  10. रंगोत्सव एवं सौहार्द — सर्वप्रथम बड़ों के चरणों में गुलाल लगाकर आशीर्वाद लें, फिर मित्रों और परिजनों के साथ प्रेमपूर्वक रंग खेलें व मिठाइयां बांटें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. स्नान के बाद मंदिर में दीपक जलाएं और राधा-कृष्ण की मूर्ति के समक्ष हाथ जोड़ें।
  2. भगवान के चरणों में लाल या गुलाबी गुलाल और मीठे बताशे अर्पित करें।
  3. "ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमो नमः" मंत्र का ग्यारह बार मन में जप करें।
  4. होलिका की पवित्र भस्म या रोली का तिलक अपने माथे पर लगाएं।
  5. घर के सभी सदस्यों को गुझिया का प्रसाद दें और प्रेमपूर्वक गुलाल लगाकर दिन की शुरुआत करें।

🛒 होली पूजा सामग्री

आवश्यक

  • प्राकृतिक गुलाल (लाल और गुलाबी)
  • होलिका दहन के लिए सूखी लकड़ी
  • सूखा या पानी वाला नारियल
  • मीठे बताशे
  • पारंपरिक गुझिया
  • ताजी ठंडाई
  • रोली और अक्षत
  • स्वच्छ जल और गंगाजल

वैकल्पिक

  • नई फसल की गेहूं या चने की बालियां
  • कलावा (मौली)
  • दीपक और गाय का घी
  • सुगंधित अगरबत्ती या धूप
  • ताजे फूल या माला

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि प्राकृतिक गुलाल उपलब्ध न हो, तो कुमकुम या चंदन पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि गुझिया उपलब्ध न हो, तो बताशे या घर की बनी कोई भी सात्विक मिठाई पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि ठंडाई उपलब्ध न हो, तो सादा मीठा दूध या मिश्री का जल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि नारियल उपलब्ध न हो, तो साबुत सुपारी पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

❓ होली: क्या करें और क्या न करें

क्या होली के दिन बाल धो सकते हैं?

हाँ, होली के दिन सामान्य रूप से प्रातः स्नान करते समय बाल धोने में कोई दोष नहीं है। पूजा और रंग खेलने से पहले शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र पहनना पारंपरिक रूप से श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या इस दिन नाखून या बाल काटना उचित है?

त्योहार के दिन बाल या नाखून काटना पारंपरिक दृष्टि से वर्जित माना जाता है। यदि आवश्यक हो तो यह कार्य पर्व से एक दिन पूर्व ही कर लेना चाहिए।

क्या होली पर नमक का सेवन किया जा सकता है?

हाँ, होली के दिन भोजन में सामान्य नमक का सेवन पूरी तरह अनुमत है। इस दिन किसी प्रकार के कड़े उपवास का नियम नहीं होता, इसलिए पारंपरिक पकवान खाए जा सकते हैं।

क्या होली के दिन यात्रा करना सुरक्षित और शास्त्रसम्मत है?

सामान्य पारिवारिक मेल-मिलाप के लिए छोटी यात्राएं की जा सकती हैं। हालांकि दूर की अनावश्यक यात्राओं से बचना चाहिए ताकि मार्ग में रंग या हुड़दंग से कोई असुविधा न हो।

क्या इस पावन दिन नया काम या व्यापार शुरू कर सकते हैं?

होली का दिन आनंद और उत्सव का है, इसलिए नए व्यावसायिक अनुबंध या दुकान के उद्घाटन के लिए यह उपयुक्त नहीं माना जाता। नए कार्यों की शुरुआत के लिए आगे के शुभ दिन चुनना बेहतर है।

क्या होली के दिन नई खरीदारी या नए कपड़े खरीदना ठीक है?

होली के उत्सव के लिए सफेद या हल्के रंग के वस्त्र और पूजा सामग्री पहले ही खरीद ली जाती है। इस दिन सोना, वाहन या संपत्ति जैसी बड़ी खरीदारी करने से पारंपरिक रूप से बचा जाता है।

क्या पूजा करने के बाद ही भोजन करना चाहिए?

हाँ, प्रातःकाल भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और कुलदेवता को गुलाल व नैवेद्य अर्पित करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। भगवान को पहला भोग लगाने के बाद ही स्वयं प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।

क्या होली की मुख्य पूजा रात में की जाती है?

होलिका दहन का विधान फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में प्रदोष काल के दौरान होता है। रंगों की होली यानी धुलंडी की पूजा प्रातःकाल सूर्योदय के समय घर के मंदिर में की जाती है।

क्या घर में कलह या वाद-विवाद से बचना जरूरी है?

बिल्कुल, होली का मूल उद्देश्य ही मन की कड़वाहट और पुराने विवादों को समाप्त करना है। इस दिन किसी से झगड़ा करने पर पर्व की आध्यात्मिक शुद्धि अधूरी रह जाती है।

क्या किसी पर जबरन या रासायनिक रंग डालना उचित है?

कदापि नहीं, दूसरों की सहमति के बिना या जबरदस्ती रंग लगाना पारंपरिक और नैतिक दोनों दृष्टि से गलत है। हमेशा प्राकृतिक गुलाल का प्रयोग करें और सभी के सम्मान का ध्यान रखें।

क्या इस दिन मदिरा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जा सकता है?

नहीं, शास्त्र सम्मत परंपरा में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ या नशे का सेवन पूरी तरह निषिद्ध है। नशा करने से उत्सव की पवित्रता नष्ट होती है और पूजा का फल नहीं मिलता।

क्या पानी की अत्यधिक बर्बादी करना उचित है?

नहीं, पानी का अत्यधिक अपव्यय करना सामाजिक और धार्मिक रूप से अनुचित माना गया है। सूखे प्राकृतिक गुलाल और अबीर से प्रेमपूर्वक होली मनाना ही सबसे उत्तम विधान है।

क्या किसी शोकाकुल परिवार में जाकर रंग खेल सकते हैं?

जिस परिवार में हाल ही में किसी का देहांत हुआ हो, वहाँ रंग नहीं खेला जाता। ऐसे घर में केवल सांत्वना देने और बड़ों के चरणों में हल्का अबीर रखकर आशीर्वाद लेने की परंपरा है।

क्या होलिका की भस्म को घर में रखना शुभ माना जाता है?

हाँ, होलिका दहन की ठंडी राख को लाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कना या माथे पर लगाना बहुत शुभ माना जाता है। यह नकारात्मक शक्तियों से परिवार की रक्षा करने का पारंपरिक उपाय है।

✓ क्या करें

  • Apply colors respectfully.
  • Share traditional sweets.
  • Visit friends, family.
  • Forgive past grievances.
  • Celebrate with joy.

✗ क्या न करें

  • Waste water excessively.
  • Force colors on others.
  • Consume intoxicants.
  • Engage in arguments.

⚠️ आम गलतियाँ

  • बिना स्नान किए और बिना भगवान को गुलाल अर्पित किए सीधे रंग खेलना शुरू करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • होलिका दहन में प्लास्टिक, कूड़ा या अशुद्ध सामग्री डालने से अग्नि पूजन की शुद्धि अधूरी मानी जाती है।
  • परिवार के वरिष्ठ सदस्यों और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिए बिना उत्सव मनाना पारंपरिक रूप से अधूरा माना गया है।
  • मन में ईर्ष्या, क्रोध या पुरानी शत्रुता रखकर केवल औपचारिकता के लिए रंग लगाने से पर्व की भावना अधूरी रहती है।
  • होलिका की परिक्रमा के समय आवश्यक मर्यादा और श्रद्धा का ध्यान न रखने से रक्षा अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • रासायनिक और हानिकारक रंगों का प्रयोग करने से पारंपरिक सात्विक उत्सव का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
  • भगवान को गुझिया और बताशे का पहला भोग लगाए बिना स्वयं पकवान खाने से नैवेद्य समर्पण अधूरा माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमो नमः

हे वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण, आप समस्त दुःखों और कष्टों को हरने वाले परमात्मा हैं, मैं आपको बारंबार नमन करता हूँ। यह मंत्र जीवन में शांति, भक्ति और मानसिक स्पष्टता प्रदान करने वाला माना गया है।

108 बार (एक माला) अथवा समयाभाव में 11 या 21 बार। प्रातःकाल भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को गुलाल अर्पित करने के बाद तथा होलिका परिक्रमा के समय।

📖 होली कथा

पौराणिक आख्यानों के अनुसार, प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत अहंकारी दैत्य राजा था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था, जिससे न तो वह दिन में मारा जा सकता था न रात में, न मनुष्य द्वारा न पशु द्वारा, और न घर के भीतर न बाहर। इस असीम शक्ति के मद में चूर होकर उसने अपनी पूरी प्रजा को केवल अपनी ही पूजा करने का आदेश दिया। किंतु उसके अपने घर में उसके पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ, जो बचपन से ही भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद का ध्यान प्रभु भक्ति से हटाने के लिए अनेक यातनाएं दीं। कभी उन्हें ऊंचे पहाड़ों से नीचे फिंकवाया, कभी विषधर सांपों के बीच छोड़ा, तो कभी भूखे हाथियों के पैरों तले कुचलवाने का प्रयास किया। परंतु भगवान की कृपा से बालक प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ। अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को अग्नि देव से एक दिव्य वस्त्र मिला था, जिसे ओढ़ने पर आग उसे जला नहीं सकती थी। अपने भाई के कहने पर होलिका बालक प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर प्रज्वलित चिता पर बैठ गई। प्रह्लाद हाथ जोड़कर प्रभु नाम का निरंतर स्मरण करते रहे। तभी अचानक परमात्मा की लीला से तेज हवा चली और वह रक्षात्मक वस्त्र होलिका के शरीर से उड़कर प्रह्लाद पर आ गिरा। होलिका उस भयंकर आग में जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए। अहंकार और अधर्म पर भक्ति व सत्य की इस अद्भुत विजय की स्मृति में ही रात्रि को होलिका दहन किया जाता है। अगले दिन प्रातःकाल लोगों ने उसी पवित्र अग्नि की राख को माथे पर लगाया और एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल लगाकर इस विजय का उत्सव मनाया, जो आज तक रंगोत्सव के रूप में प्रचलित है।

🪔 आरती

होलिका दहन के समय अग्नि प्रज्वलित होने पर और अगले दिन प्रातः मंदिर में श्रीकृष्ण-राधा जी के पूजन के उपरांत आरती की जाती है। घी के दीपक या कपूर से सजी थाली को दक्षिणावर्त सात बार घुमाएं। आरती करते समय परिवार के सभी सदस्य हाथ जोड़कर खड़े हों और मन में प्रभु के प्रति कृतज्ञता रखें। आरती पूर्ण होने पर दोनों हथेलियों से ज्योति की ऊष्मा ग्रहण कर सिर और नयनों पर लगाएं तथा सभी में प्रसाद वितरित करें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार होली के उपाय

धन संबंधी बाधाएं

एक सूखे नारियल में थोड़े बताशे भरकर होलिका दहन की पवित्र अग्नि में अर्पित करें। कब: होलिका दहन के समय सायंकाल। खर्च: ₹20. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: अग्नि में मिष्ठान्न की आहुति देने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और चंद्रमा की शुभता से आर्थिक निर्णय सुधरते हैं।

करियर और कार्यक्षेत्र में रुकावट

भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के चरणों में थोड़ा लाल गुलाल अर्पित कर अपनी उन्नति की प्रार्थना करें। कब: होली की सुबह स्नान के तुरंत बाद। खर्च: ₹10. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: लाल रंग उत्साह का प्रतीक है और यह कर्मक्षेत्र में आत्मबल को जाग्रत करने में सहायक होता है।

विवाह में देरी और मांगलिक प्रभाव

होलिका की सात बार परिक्रमा करते हुए मौली का धागा लपेटें और मन ही मन मंगल शांति की प्रार्थना करें। कब: होलिका दहन के समय रात्रि में। खर्च: ₹10. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: अग्नि की परिक्रमा से कुंडली का मांगलिक प्रभाव और वैवाहिक अवरोध शांत होने की मान्यता है।

बच्चों की चंचलता और एकाग्रता की कमी

बच्चे के माथे पर होलिका की ठंडी भस्म का हल्का सा तिलक लगाएं। कब: होली के दिन सुबह के समय। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: भस्म धारण करने से मानसिक चंचलता घटती है और चंद्रमा का अनुकूल प्रभाव एकाग्रता बढ़ाता है।

घर में कलह और पारिवारिक अशांति

परिवार के सभी सदस्य मिलकर एक-दूसरे को गुलाबी गुलाल लगाएं और प्रेमपूर्वक गुझिया बांटें। कब: होली के दिन दोपहर से पहले। खर्च: ₹20. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: गुलाबी रंग सौहार्द बढ़ाता है जिससे चंद्रमा के कारकत्व वाले पारिवारिक प्रेम में वृद्धि होती है।

अत्यधिक क्रोध और नकारात्मक विचार

एक तांबे के पात्र में जल और थोड़ा सा लाल चंदन मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। कब: होली की सुबह सूर्योदय के तुरंत बाद। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: यह सरल क्रिया भीतर के अनियंत्रित मंगल तत्व और उग्र क्रोध को शांत करने में मदद करती है।

क्या होली आपके लिए विशेष है?

त्योहार पर किए जाने वाले सामान्य उपाय सभी के लिए शुभ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं। किंतु ज्योतिष का बुनियादी नियम है कि ग्रहों का सामान्य प्रभाव समूचे संसार के लिए समान होता है, जबकि आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में उन ग्रहों की स्थिति, दृष्टि और दशा बिल्कुल अनूठी होती है। होली का चंद्रमा या मंगल सभी पर एक जैसा फल नहीं देता। आपकी जन्मकुंडली करियर, धन, पारिवारिक सुख और आगामी दशाओं के सटीक समय को स्पष्ट करती है। यदि विवाह का प्रश्न हो, तो कुंडली मिलान दो आत्माओं और परिवारों की अनुकूलता परखता है। हस्तरेखा आपके हाथ की रेखाओं से जीवन के व्यावहारिक उतार-चढ़ाव उजागर करती है, और स्वप्न शास्त्र आपके अवचेतन मन के संकेतों को डिकोड करता है। अपने जीवन के विशिष्ट प्रश्नों के लिए आप त्रिकाल वाणी से व्यक्तिगत परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।

शब्दावली · Glossary

प्रतिपदा
पक्ष की प्रथम तिथि जो पूर्णिमा या अमावस्या के तुरंत बाद आती है।
होलिका दहन
फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में बुराई पर अच्छाई की विजय स्वरूप जलाई जाने वाली पवित्र अग्नि।
सूर्योदयव्यापिनी
वह तिथि जो स्थानीय सूर्योदय के क्षण उपस्थित हो और पूरे दिन के पर्व-कर्म को निर्धारित करे।
हस्त नक्षत्र
सत्ताईस नक्षत्रों में तेरहवां नक्षत्र, जो चंद्रमा के स्वामित्व और शुभ कार्यों से जुड़ा माना जाता है।
वृद्धि योग
सत्ताईस योगों में ग्यारहवां योग, जो मांगलिक कर्मों और पारिवारिक उन्नति में शुभता लाता है।
होलाष्टक
होलिका दहन से पूर्व के आठ दिन, जिनमें शुभ व मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से वर्जित रहते हैं।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑अथर्व परिशिष्ट
    अथ फाल्गुन्यां पौर्णमास्यां रात्रौ होलाका ॥
    — अथर्व परिशिष्ट, अध्याय 18 — राजकर्मसांवत्सरीयम् · श्लोक 18b.12.1

    अथर्व परिशिष्ट के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि में होलाका (होली) का पर्व होता है।

    Atharva Parishishta states that the Holaka festival occurs on the full moon night of Phalguna.

  2. [2]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    विपादेरावतीतीरे शल्याश्च त्रिपुष्करे। विवाहादिदिने नेष्टं होलिकाप्राग्दिनाष्टकम्॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 1 · श्लोक 40

    मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार होलिका से पहले के आठ दिन विवाहादि शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने गए हैं।

    Muhurta Chintamani states that the eight days preceding Holika are not auspicious for rites like marriage.

दिल्ली एनसीआर में होली — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में होली कब है और मुख्य तारीख क्या है?

वर्ष 2027 में होली का पावन रंगोत्सव 23 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित रहेगी। इससे पूर्व 22 मार्च की रात्रि को होलिका दहन का शास्त्रसम्मत अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। पूरे देश में इसी दिन पारंपरिक उल्लास के साथ अबीर-गुलाल से होली खेली जाएगी।

होली पर पूजा का शुभ मुहूर्त किस समय रहेगा?

होली की मुख्य पूजा का समय सूर्योदयव्यापिनी प्रतिपदा तिथि के अनुसार निर्धारित किया गया है। स्थानीय सूर्योदय के साथ ही प्रातःकाल की पूजा का अत्यंत शुभ समय प्रारंभ हो जाता है। आपके शहर के सटीक मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया का विवरण ऊपर दी गई लाइव तालिका में देखा जा सकता है। शुभ समय में भगवान को गुलाल अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

अलग-अलग शहरों में होली के मुहूर्त में अंतर क्यों होता है?

भारत के विभिन्न नगरों के रेखांश और अक्षांश अलग-अलग होने के कारण स्थानीय सूर्योदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर आता है। वैदिक ज्योतिष के नियम के अनुसार सभी तिथियां और लग्न स्थानीय सूर्योदय से ही संचालित होते हैं। इसी कारण दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे शहरों में पूजा और पर्व के समय में थोड़ा अंतर दिखाई देता है। आप अपने नगर के सटीक समय के लिए इस पृष्ठ पर ऊपर प्रस्तुत पंचांग चार्ट का उपयोग कर सकते हैं।

होलिका दहन और धुलंडी (रंगों की होली) में क्या अंतर है?

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रूप में अग्नि जलाकर मनाया जाता है। इसके विपरीत, धुलंडी या मुख्य होली अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को रंगों और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाई जाती है। होलिका दहन एक गंभीर तांत्रिक व वैदिक रक्षा अनुष्ठान है, जबकि धुलंडी आनंद, मेल-मिलाप और उत्सव का दिन है। दोनों ही दिन एक ही महापर्व के दो परस्पर जुड़े हुए अभिन्न अंग हैं।

2027 में होली के दिन कौन से नक्षत्र और योग का संयोग बन रहा है?

वर्ष 2027 में होली के दिन सूर्योदय के समय कन्या राशि में हस्त नक्षत्र का सुंदर प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही इस दिन वृद्धि योग का शुभ संयोग भी पंचांग में निर्मित हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में हस्त नक्षत्र को रचनात्मकता, शिल्पकला और पारिवारिक आनंद का सूचक माना जाता है। वहीं वृद्धि योग में किए गए पुण्य कर्म और सामाजिक सौहार्द के प्रयासों में निरंतर वृद्धि होती है।

होली के दिन सबसे पहले क्या करना चाहिए?

होली के दिन प्रातःकाल उठकर नित्यक्रिया से निवृत्त होकर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। इसके पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करके घर के पूजा स्थल में दीपक प्रज्वलित करें। सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के श्रीचरणों में लाल या गुलाबी गुलाल अर्पित करना चाहिए। तत्पश्चात अपने घर के वरिष्ठ जनों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना दिन की सबसे उत्तम शुरुआत मानी जाती है।

क्या होली के दिन उपवास या व्रत रखने का कोई नियम है?

होली के मुख्य दिन यानी धुलंडी पर उपवास रखने का कोई शास्त्रीय नियम नहीं है, क्योंकि यह उत्सव और मिष्ठान्न सेवन का दिन है। कुछ श्रद्धालु केवल होलिका दहन की शाम तक सात्विक उपवास रखते हैं और अग्नि पूजन के बाद ही भोजन करते हैं। जो लोग अस्वस्थ हैं, बुजुर्ग हैं या गर्भवती महिलाएं हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का कड़ा व्रत नहीं रखना चाहिए। अपने स्वास्थ्य और चिकित्सीय परामर्श को ध्यान में रखकर ही किसी नियम का पालन करें।

होली के दिन भोजन में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए?

इस दिन पारंपरिक रूप से गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और घर के बने सात्विक पकवान खाए जाते हैं। भोजन पूरी तरह शाकाहारी, शुद्ध और ताजा होना चाहिए ताकि उत्सव की सात्विकता बनी रहे। इस दिन तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज का अत्यधिक प्रयोग, मांसाहार और मदिरा से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। अपने मित्रों और पड़ोसियों को भी प्रेमपूर्वक घर की बनी मिठाइयां ही भेंट करें।

होली की पूजा के लिए कौन सी आवश्यक सामग्री होनी चाहिए?

पूजा के लिए शुद्ध प्राकृतिक गुलाल, विशेषकर लाल और गुलाबी रंग, रोली और अक्षत अत्यंत आवश्यक हैं। इसके साथ ही होलिका दहन की पवित्र भस्म, मीठे बताशे, गुझिया और ताजी ठंडाई की व्यवस्था रखनी चाहिए। अग्नि पूजा के लिए सूखा नारियल और नई फसल की गेहूं की बालियां भी रखी जाती हैं। इन सभी सामग्रियों को एक स्वच्छ थाली में सजाकर प्रभु के समक्ष अर्पित किया जाता है।

यदि बाजार का गुलाल न मिले तो पूजा में क्या उपयोग कर सकते हैं?

यदि प्राकृतिक या शुद्ध गुलाल उपलब्ध न हो, तो घर में रखी रोली या कुमकुम का उपयोग भगवान के चरणों में किया जा सकता है। आप शुद्ध चंदन या हल्दी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर भी प्रभु को समर्पित कर सकते हैं। ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, इसलिए बाह्य सामग्री के अभाव में मानसिक समर्पण भी पूर्ण फलदायी होता है। किसी भी परिस्थिति में रासायनिक या अशुद्ध रंगों को पूजा में सम्मिलित नहीं करना चाहिए।

होली के पीछे की मुख्य पौराणिक कथा क्या है?

यह पर्व मुख्य रूप से भक्त प्रह्लाद की रक्षा और पापिनी होलिका के दहन की पावन स्मृति में मनाया जाता है। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका वरदान के बल पर प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठी थी, किंतु वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद बच गए। इसके साथ ही द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रज में राधा रानी और गोपियों संग खेली गई रंग-लीला भी इस दिन की प्रधान कथा है। यह कथा अधर्म के विनाश और विशुद्ध ईश्वरीय प्रेम का संदेश देती है।

ज्योतिष में होली का संबंध किस ग्रह और दोष से माना गया है?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार होली का मुख्य संचालन ग्रह चंद्रमा है, जो हमारे मन और मनोभावों का स्वामी है। इसके अतिरिक्त यह दिन कुंडली के मंगल दोष और उग्र स्वभाव या क्रोध की समस्याओं को शांत करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। लाल और गुलाबी रंगों का प्रयोग मंगल और चंद्रमा के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है। इस दिन किए गए सात्विक उपाय मानसिक तनाव को कम कर मन में शांति लाते हैं।

होली के दिन किस मंत्र का जप करना सबसे कल्याणकारी माना जाता है?

इस पावन दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के पावन नाम का स्मरण करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आप "ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमो नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप कर सकते हैं। इस मंत्र का कम से कम 11, 21 या 108 बार मानसिक जप करने से चित्त को असीम शांति मिलती है। यह जप पूजा के समय या गुलाल अर्पित करने के बाद एकांत में बैठकर किया जाना चाहिए।

क्या होली के दिन नया व्यवसाय शुरू करना या नए अनुबंध करना उचित है?

होली का दिन विशुद्ध रूप से उत्सव, सामाजिक सौहार्द और विश्राम के लिए निर्धारित है। पारंपरिक दृष्टि से इस दिन व्यापारिक उद्घाटन, दुकान की शुरुआत या बड़े कानूनी अनुबंध करने से बचा जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पंचांग के अनुसार अन्य स्थिर व शुभ लग्न वाले दिन अधिक श्रेयस्कर माने गए हैं। इस दिन केवल संबंधों को मजबूत करने और उत्सव का आनंद लेने पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

क्या होली के पावन अवसर पर नई संपत्ति या वाहन की खरीदारी करनी चाहिए?

सामान्य रूप से लोग होली के उत्सव से जुड़ी वस्तुएं, वस्त्र और पूजा सामग्री पहले ही खरीद लेते हैं। जमीन, मकान या नए वाहन जैसी स्थायी संपत्तियों की बड़ी खरीदारी के लिए यह दिन पारंपरिक रूप से प्राथमिकता में नहीं आता। यदि कोई अत्यंत जरूरी खरीदारी हो, तो ऊपर दिए गए शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में ही विचार करें। हालांकि पारंपरिक मान्यता उत्सव के दिन धन के बड़े लेन-देन से बचने की सलाह देती है।

होली के दिन किन कार्यों से पूरी तरह बचना चाहिए?

इस दिन किसी के ऊपर जबरदस्ती रंग फेंकने या रासायनिक रंगों का प्रयोग करने से पूरी तरह बचना चाहिए। पानी का अत्यधिक अपव्यय करना और सड़क पर हुड़दंग मचाना सामाजिक व धार्मिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित है। किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ या मदिरा का सेवन इस पवित्र दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को नष्ट कर देता है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति से विवाद या कटु वचन बोलने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

होली पर दान करने का क्या महत्व है और क्या दान करना चाहिए?

होली के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और मिष्ठान्न का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। आप किसी निर्धन परिवार को गेहूं, नए वस्त्र या भोजन के पैकेट श्रद्धापूर्वक दे सकते हैं। इस दिन किया गया गुप्त दान परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि करता है। दान करते समय मन में किसी प्रकार का अहंकार न रखकर केवल सेवा भाव ही रखना चाहिए।

यदि किसी को बहुत अधिक क्रोध आता हो तो होली पर क्या उपाय करना चाहिए?

जिन जातकों को अत्यधिक क्रोध आता है, उनके लिए होली की सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है। तांबे के लोटे में शुद्ध जल, एक चुटकी रोली और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को गुलाबी गुलाल लगाकर अपने माथे पर होलिका की भस्म का टीका लगाएं। यह सरल क्रिया मन के आवेश को शांत करने और मानसिक स्थिरता लाने में पारंपरिक रूप से सहायक मानी जाती है।

होलिका दहन की भस्म का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए?

होलिका दहन की अगली सुबह जब अग्नि शांत हो जाए, तब उसकी पवित्र राख को आदरपूर्वक घर लाएं। इस भस्म से परिवार के सभी सदस्यों के मस्तक पर तिलक लगाना अत्यंत शुभ और रक्षाकारी माना जाता है। थोड़ी सी भस्म को घर के मुख्य द्वार पर भी छिड़कने की पुरानी परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। शेष भस्म को किसी शुद्ध स्थान या गमले की मिट्टी में विसर्जित कर देना चाहिए।

2027 में होली पर अपने परिवार के संबंधों को मधुर बनाने के लिए क्या करें?

वर्ष 2027 की होली पर परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर पूजा और भोजन करना चाहिए। यदि परिवार के किसी सदस्य से पहले से कोई मनमुटाव चल रहा हो, तो पहल करके उन्हें गुलाल लगाएं और क्षमा मांगें। घर में बनी ताजी गुझिया और ठंडाई सभी के साथ मिलकर प्रेमपूर्वक बांटकर खाएं। अहंकार का त्याग करके अपनों को गले लगाना ही इस पावन उत्सव का सबसे सच्चा और सुंदर अनुष्ठान है।

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