दिल्ली एनसीआर · Delhi

दिल्ली एनसीआर में नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

12 अक्टूबर 2026 को अश्विन शुक्ल द्वितीया के दिन नवरात्रि का दूसरा दिन मनाया जाएगा। इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। यह देवी तपस्या और संयम का प्रतीक हैं। पूजा में मुख्य रूप से लाल रंग पहनना, सफेद फूल, मिश्री और नारियल पानी चढ़ाना शुभ माना जाता है। सही मुहूर्त ऊपर टेबल में देख सकते हैं।

🕐 दिल्ली एनसीआर के लिए नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी का समय

तिथिDwitiya (Shukla Paksha)22:13 तक
नक्षत्रSwati, पाद 223:52 तक
योग · करणVishkambha · Balava
अभिजित मुहूर्त11:44-12:29
राहुकाल07:49-09:15
यमगंड · गुलिक10:41-12:07 · 13:33-14:59
सूर्योदय · सूर्यास्त06:23 · 17:51

दिल्ली एनसीआर (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी पर क्या करें

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ लाल रंग के कपड़े पहनें।
  2. पूजा स्थान को साफ करके माँ ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  3. माँ को सफेद फूल और रुद्राक्ष की माला अर्पित करें।
  4. प्रसाद में मिश्री और नारियल पानी का भोग लगाएं।
  5. घी का दीपक और धूप जलाकर माँ का ध्यान करें।
  6. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
  7. अंत में श्रद्धापूर्वक माँ की आरती उतारें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Day 2 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:2311:44-12:2907:49-09:15
मुंबई06:3512:01-12:4708:02-09:29
नोएडा06:2311:43-12:2907:48-09:14
गुरुग्राम06:2411:44-12:3007:49-09:15
बेंगलुरु06:1311:42-12:2907:41-09:09
हैदराबाद06:1111:38-12:2507:38-09:06
पुणे06:3111:57-12:4307:58-09:25
कोलकाता05:3510:59-11:4507:01-08:28
चेन्नई06:0211:31-12:1807:30-08:58
अहमदाबाद06:3812:02-12:4808:04-09:31

नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी क्यों मनाया जाता है

नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार, ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी। माँ का यह स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तपस्विनी का है। वह नंगे पैर चलती हैं, उनके एक हाथ में जप की माला (रुद्राक्ष) और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उन्होंने सफेद साड़ी धारण की हुई है, जो पवित्रता और सादगी को दर्शाती है। यह दिन हमें जीवन में संयम, त्याग और वैराग्य का महत्व सिखाता है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर कठिन से कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति आती है। देवी का यह रूप हमें यह बताता है कि जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठोर परिश्रम और तपस्या की आवश्यकता होती है। बिना तप के कोई भी बड़ी सफलता नहीं मिल सकती। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन देवी की आराधना करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध मंगल ग्रह (Mars) से है। मंगल ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का कारक है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या मंगल कमजोर स्थिति में होता है, उन्हें नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा करने की सलाह दी जाती है। इस दिन की पूजा से मंगल दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। मंगल की उग्रता को शांत करने के लिए ही देवी को सफेद फूल और मिश्री अर्पित की जाती है। इसके अलावा, जो लोग जीवन में आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। माँ की आराधना से मन का डर दूर होता है और व्यक्ति के भीतर एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास (Confidence boost) का संचार होता है। लाल रंग मंगल का रंग है, इसलिए इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनना और माँ की उपासना करना विशेष फलदायी माना जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में यह दूसरा दिन आत्म-नियंत्रण का भी है। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर काबू पाना चाहता है, उसे माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करना चाहिए। यह पूजा केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर झांकने और अपनी कमियों को दूर करने का एक अवसर है। जब हम माँ को सफेद फूल और मिश्री चढ़ाते हैं, तो हम असल में अपने मन की मलिनता को दूर कर जीवन में मिठास और शांति लाने की प्रार्थना कर रहे होते हैं। इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को मानसिक शांति और जीवन में सही दिशा प्रदान करती है।

🪔 नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि

  1. स्नान और वस्त्रसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि यह रंग मंगल ग्रह और माँ को प्रिय है।
  2. पूजा स्थान की सफाईअपने घर के मंदिर या पूजा क्षेत्र को अच्छी तरह साफ करें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें।
  3. मूर्ति स्थापनाएक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  4. संकल्प लेंहाथ में थोड़ा सा जल और फूल लेकर आज की पूजा और व्रत (यदि कर रहे हैं) का संकल्प लें।
  5. जल और स्नानमाँ की मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराएं। यदि तस्वीर है तो उस पर जल के छींटे दें।
  6. पुष्प और मालामाँ ब्रह्मचारिणी को सफेद फूल अर्पित करें और उन्हें रुद्राक्ष की माला पहनाएं।
  7. दीपक और धूपमाँ के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप या अगरबत्ती लगाएं, जिससे उनकी उपस्थिति का आह्वान हो।
  8. प्रसाद और भोगदेवी को मिश्री और नारियल पानी का भोग लगाएं, यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।
  9. मंत्र जापशांत मन से बैठें और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  10. आरतीअंत में परिवार के साथ मिलकर माँ ब्रह्मचारिणी की आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह जल्दी नहाकर साफ लाल कपड़े पहनें और पूजा स्थान को साफ करें।
  2. माँ ब्रह्मचारिणी की तस्वीर के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।
  3. देवी को सफेद फूल, रुद्राक्ष की माला, मिश्री और नारियल पानी अर्पित करें。
  4. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
  5. माँ की आरती उतारें और दिन भर मन में उनका ध्यान रखें।

🛒 नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या मूर्ति
  • लाल कपड़ा (चौकी के लिए)
  • गाय का घी और रुई की बत्ती
  • सफेद फूल
  • मिश्री
  • नारियल पानी
  • रुद्राक्ष की माला
  • धूप या अगरबत्ती

वैकल्पिक

  • कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • ताजे फल

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि नारियल पानी उपलब्ध नहीं है, तो साफ जल का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि मिश्री उपलब्ध नहीं है, तो साधारण चीनी का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि सफेद फूल उपलब्ध नहीं हैं, तो कोई भी साफ और ताजे फूल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हैं।

🌙 नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: अश्विन शुक्ल द्वितीया (12 अक्टूबर 2026) की सुबह स्नान के बाद संकल्प लेकर व्रत शुरू करें।

क्या खा सकते हैं

  • ताजे फल
  • दूध और दूध से बनी चीजें
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का भोजन
  • साबूदाना
  • सेंधा नमक

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अन्न (गेहूं, चावल)
  • प्याज
  • लहसुन
  • मांसाहार
  • शराब
  • साधारण नमक

पारण: अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद या पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में देवी को भोग लगाकर व्रत खोलें।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें निर्जला या कठोर व्रत नहीं करना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, मधुमेह के रोगी हैं या किसी भी प्रकार की दवा ले रहे हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं हैं।

नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं करवा चौथ की तरह इस व्रत में पानी पी सकती हूँ?

हाँ, नवरात्रि के व्रत में पानी पीना पूरी तरह से स्वीकार्य है। आप नारियल पानी या नींबू पानी भी ले सकते हैं।

क्या नवरात्रि के दूसरे दिन बाल धो सकते हैं?

पारंपरिक रूप से नवरात्रि के दौरान बाल धोने की मनाही होती है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो व्रत रख रही हैं। हालांकि, कई परिवार इसे केवल पहले दिन तक सीमित मानते हैं।

क्या आज के दिन नाखून काट सकते हैं?

नहीं, नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक नाखून काटना, बाल कटवाना या शेविंग करना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है।

क्या मैं पूजा के बाद खाना खा सकती हूँ?

यदि आपने फलाहारी व्रत रखा है, तो आप शाम की पूजा और आरती के बाद सात्विक फलाहार (जैसे साबूदाना या फल) खा सकती हैं।

क्या आज के दिन सेंधा नमक खा सकते हैं?

हाँ, व्रत के दौरान साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है। यह व्रत के नियमों के अनुकूल है।

क्या इस दिन नए कपड़े या सामान की खरीदारी कर सकते हैं?

नवरात्रि के दिन बहुत शुभ माने जाते हैं। आप इस दिन नए कपड़े, गहने या घर का सामान बिल्कुल खरीद सकते हैं।

क्या ऑफिस का काम या नई जॉब शुरू कर सकते हैं?

हाँ, नवरात्रि का समय किसी भी नए और शुभ कार्य को शुरू करने के लिए उत्तम है। आप नई जॉब या प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं।

क्या व्रत में चाय या कॉफी पी सकते हैं?

हाँ, व्रत में चाय और कॉफी पीने की मनाही नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

क्या आज के दिन यात्रा करना शुभ है?

सामान्य यात्रा करने में कोई दोष नहीं है। लेकिन अगर आपने घर में कलश स्थापना की है, तो घर को सूना छोड़कर लंबी यात्रा पर जाने से बचना चाहिए।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

नवरात्रि में देवी की पूजा सुबह और शाम दोनों समय की जाती है। आप शाम या रात के समय भी आरती और मंत्र जाप कर सकते हैं।

अगर गलती से कुछ ऐसा खा लिया जो व्रत में नहीं खाते, तो क्या करें?

अगर अनजाने में गलती हुई है, तो माँ से क्षमा मांग लें और अपना व्रत जारी रखें। देवी भाव की भूखी हैं, अनजाने में हुई भूल से व्रत नहीं टूटता।

क्या इस दिन लहसुन-प्याज खा सकते हैं अगर व्रत नहीं रखा है?

भले ही आपने व्रत न रखा हो, लेकिन नवरात्रि के दौरान घर में लहसुन, प्याज, मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना जाता है।

क्या पीरियड्स में माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा कर सकते हैं?

परंपरा के अनुसार पीरियड्स के दौरान सीधे पूजा का सामान छूना या मंदिर जाना वर्जित है। आप दूर बैठकर मन में मंत्र जाप कर सकती हैं।

क्या करें

  • Observe strict celibacy.
  • Practice self-control.
  • Chant mantras regularly.
  • Maintain cleanliness.
  • Offer white flowers.

क्या न करें

  • Avoid non-vegetarian food.
  • Do not consume alcohol.
  • Refrain from anger.
  • Do not lie.

⚠️ आम गलतियाँ

  • पूजा के दौरान मन में क्रोध या बुरे विचार लाना व्रत को अपूर्ण बनाता है।
  • माँ ब्रह्मचारिणी को लाल फूल चढ़ाना, जबकि उन्हें सफेद फूल प्रिय हैं, एक सामान्य भूल है जिससे पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रत के दौरान दिन के समय सोना पारंपरिक नियमों के खिलाफ माना जाता है और इससे व्रत खंडित माना जाता है।
  • घर में कलश स्थापना करने के बाद घर को अकेला छोड़कर जाना अनुचित माना जाता है।
  • पूजा के बर्तन और भगवान के कपड़े गंदे हाथों से छूने से पूजा का फल पूरा नहीं मिलता।
  • नवरात्रि के दौरान घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार पकाना पूरे अनुष्ठान को खंडित कर सकता है।
  • मंत्रों का गलत उच्चारण करना या जल्दबाजी में आरती करना पूजा को अपूर्ण बनाता है।

📿 मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः

ॐ, ऐं, ह्रीं, क्लीं बीज मंत्र हैं जो ज्ञान, ऊर्जा और आकर्षण का प्रतीक हैं। हम माँ ब्रह्मचारिणी को नमन करते हैं जो तपस्या और पवित्रता की देवी हैं।

कम से कम 108 बार (एक माला)। सुबह की पूजा के समय और शाम की आरती से पहले, शांत मन से बैठकर।

📖 नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। उस समय देवर्षि नारद ने उन्हें उपदेश दिया था कि यदि वे कठोर तपस्या करें, तो उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हो सकते हैं। नारद जी के वचनों को सुनकर देवी ने भगवान शिव को पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या शुरू कर दी। इसी कठिन तपस्या के कारण ही उन्हें 'ब्रह्मचारिणी' नाम दिया गया। कथा के अनुसार, उन्होंने एक हजार साल तक केवल फल और फूल खाकर अपना जीवन बिताया। इसके बाद सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक (सब्जियां) खाकर तपस्या की। कुछ समय तक उन्होंने कठिन उपवास रखे और खुले आसमान के नीचे सर्दी, गर्मी और बारिश के भयानक कष्ट सहे। उनकी तपस्या इतनी कठोर थी कि उन्होंने तीन हजार वर्षों तक केवल टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शिव की आराधना की। इसके बाद देवी ने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया और कई हजार वर्षों तक बिना पानी और बिना भोजन के तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण उनका एक नाम 'अपर्णा' भी पड़ गया। इस अत्यंत कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर बहुत कमजोर हो गया। उनकी यह दशा देखकर उनकी माता मैना बहुत दुखी हुईं और उन्होंने देवी को तपस्या से रोकने के लिए 'उमा' कहकर पुकारा, जिसके बाद देवी का एक नाम उमा भी हो गया। तीनों लोकों में देवी की इस कठोर तपस्या की चर्चा होने लगी। सभी देवता, ऋषि और मुनि उनकी तपस्या की प्रशंसा करने लगे। अंत में, ब्रह्मा जी ने आकाशवाणी के माध्यम से उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि हे देवी, आज तक किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की है। तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूरी होगी और भगवान शिव तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तुम तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कठिन से कठिन लक्ष्य को भी दृढ़ निश्चय, संयम और तपस्या के बल पर प्राप्त किया जा सकता है।

🪔 आरती

माँ ब्रह्मचारिणी की आरती सुबह की पूजा के अंत में और शाम को सूर्यास्त के बाद की जानी चाहिए। आरती करते समय एक साफ थाली में गाय के घी का दीपक, कपूर और कुछ फूल रखें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर पूरे भक्ति भाव से आरती गाएं। आरती के बाद देवी से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और पूरे घर में कपूर का धुआं दिखाएं, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सके।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी के उपाय

धन और आर्थिक अस्थिरता

चूंकि माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध मंगल ग्रह से है, जो ऊर्जा का कारक है। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इस दिन लाल कपड़े में थोड़ी सी मिश्री बांधकर देवी के चरणों में रखें। पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें, इससे आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ता है।

करियर और नौकरी में बाधाएं

करियर में सफलता और आत्मविश्वास (Confidence boost) के लिए माँ ब्रह्मचारिणी को नारियल पानी अर्पित करें। मंगल दोष के कारण कार्यक्षेत्र में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।

विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में तनाव

मंगल दोष (Mars dosha) अक्सर विवाह में देरी या तनाव का कारण बनता है। नवरात्रि के दूसरे दिन देवी को सफेद फूल और रुद्राक्ष की माला अर्पित करें। यह उपाय मंगल की उग्रता को शांत करता है और वैवाहिक जीवन में संयम और शांति लाने में मदद करता है।

संतान प्राप्ति या बच्चों के भविष्य की चिंता

बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए, माँ ब्रह्मचारिणी के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें मिश्री का भोग लगाएं। बाद में यह मिश्री बच्चों को प्रसाद के रूप में दें। इससे बच्चों में साहस और आत्म-नियंत्रण की भावना का विकास होता है।

घर में क्लेश और अशांति

घर की शांति के लिए देवी की पूजा में लाल रंग के आसन का प्रयोग करें। माँ ब्रह्मचारिणी तप और शांति की प्रतीक हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर देवी की आरती करें और घर के मुख्य द्वार पर जल का छिड़काव करें। इससे मंगल का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञात भय

मन के डर को दूर करने और आत्मविश्वास (Confidence boost) बढ़ाने के लिए माँ ब्रह्मचारिणी को रुद्राक्ष की माला अर्पित करें। मंगल ग्रह साहस का प्रतीक है। देवी के मंत्र का जाप करने से आपके आस-पास एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है, जो हर तरह की नकारात्मकता को दूर रखता है।

क्या नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी आपके लिए विशेष है?

ऊपर बताए गए उपाय और मंगल ग्रह के प्रभाव सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। यह सच है कि माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा मंगल दोष को शांत करती है, लेकिन एक सामान्य लेख यह नहीं बता सकता कि आपके जीवन में मंगल किस भाव में बैठा है। हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए ग्रहों का प्रभाव भी अलग पड़ता है। यहीं पर एक व्यक्तिगत परामर्श आपकी मदद करता है। यदि आप करियर, धन या जीवन की दशा का सटीक समय जानना चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग सही दिशा दिखाती है। विवाह में अड़चनों या जीवनसाथी के चुनाव के लिए Kundali Milan उपयोगी है। हाथों की रेखाओं के लिए Hastrekha और सपनों के अर्थ समझने के लिए Swapna Shastra रीडिंग ली जा सकती है। त्रिकाल वाणी के रोहित गुप्ता, जिन्हें पाराशर परंपरा में 16 वर्षों का अनुभव है, आपकी व्यक्तिगत समस्याओं का वास्तविक समाधान दे सकते हैं।

दिल्ली एनसीआर में नवरात्रि दिवस 2 - माँ ब्रह्मचारिणी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि 2026 में माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा कब है?

नवरात्रि का दूसरा दिन 12 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि है, जो माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। यह तिथि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नौ दिनों के उत्सव का हिस्सा है।

पूजा का सही मुहूर्त और समय क्या है?

दिन के सटीक शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलते रहते हैं। आप इस पेज पर ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर का लाइव समय देख सकते हैं। पूजा हमेशा राहुकाल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए?

पूजा के लिए मुख्य रूप से देवी की तस्वीर, सफेद फूल, मिश्री और नारियल पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा रुद्राक्ष की माला, गाय का घी, धूप और लाल कपड़ा भी जरूरी है। अगर कोई सामग्री न मिले तो सच्चे मन से जल भी अर्पित किया जा सकता है।

इस दिन कौन सा रंग पहनना शुभ होता है?

नवरात्रि के दूसरे दिन लाल रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है। माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध मंगल ग्रह से है और लाल रंग मंगल का प्रतीक है। यह रंग ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

माँ ब्रह्मचारिणी का मुख्य मंत्र क्या है?

माँ का मुख्य मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' है। पूजा के समय इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। यह मंत्र मन को शांति और जीवन में आत्मविश्वास प्रदान करता है।

क्या मैं इस दिन निर्जला व्रत रख सकती हूँ?

यह पूरी तरह से आपकी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। कई लोग केवल फलाहार पर व्रत रखते हैं, जबकि कुछ निर्जला उपवास करते हैं। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या है, तो निर्जला व्रत से बचना चाहिए।

व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

व्रत में आप ताजे फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा और सेंधा नमक खा सकते हैं। गेहूं, चावल, साधारण नमक, प्याज, लहसुन और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

क्या इस दिन नए काम की शुरुआत की जा सकती है?

हाँ, नवरात्रि के सभी दिन बेहद पवित्र होते हैं। आप इस दिन कोई भी नया व्यापार, नौकरी या प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से नए कार्यों में सफलता और स्थिरता मिलती है।

क्या मैं नवरात्रि के दूसरे दिन शॉपिंग कर सकती हूँ?

बिल्कुल, इस दिन नए कपड़े, गहने या घर का सामान खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। त्यौहार का समय खुशियों का होता है, इसलिए खरीदारी करने में कोई धार्मिक मनाही नहीं है। बस ध्यान रखें कि सात्विक चीजें ही खरीदें।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से किस दोष का निवारण होता है?

ज्योतिष के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा मुख्य रूप से मंगल दोष को शांत करने के लिए की जाती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमजोर है, उन्हें यह पूजा जरूर करनी चाहिए। इससे जीवन में आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है।

क्या पूजा में लाल फूल चढ़ा सकते हैं?

यद्यपि माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध लाल रंग (मंगल) से है, लेकिन उन्हें मुख्य रूप से सफेद फूल प्रिय हैं। इसलिए पूजा में उन्हें सफेद फूल ही अर्पित करने चाहिए। लाल फूल आप अन्य देवियों को चढ़ा सकते हैं।

व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण से पहले देवी को भोग लगाएं और ब्राह्मण या कन्या को कुछ दान दें। पारण का सटीक समय पंचांग के अनुसार ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा का मुख्य संदेश क्या है?

माँ की कथा हमें सिखाती है कि कठोर तपस्या और संयम से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए हजारों साल तक कठिन तप किया था। यह हमें जीवन में धैर्य और दृढ़ निश्चय का महत्व बताता है।

क्या इस दिन दान करना जरूरी है?

नवरात्रि में दान का विशेष महत्व है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार सफेद वस्तुएं जैसे चीनी, चावल या सफेद कपड़े दान कर सकते हैं। इससे देवी प्रसन्न होती हैं और घर में बरकत आती है।

अगर मैं व्रत नहीं रख पा रहा हूँ तो क्या करूँ?

यदि आप स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से व्रत नहीं रख सकते, तो कोई बात नहीं। आप केवल सात्विक भोजन करें, प्याज-लहसुन से बचें और सुबह-शाम माँ की पूजा और आरती में शामिल हों। देवी केवल सच्चे भाव को देखती हैं।

क्या शहर के अनुसार पूजा का समय बदल जाता है?

हाँ, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए राहुकाल और शुभ मुहूर्त भी बदल जाते हैं। इसीलिए हमारी वेबसाइट पर आपके शहर के अनुसार लाइव समय दिखाया जाता है। हमेशा अपने स्थानीय समय का ही पालन करें।

माँ शैलपुत्री और माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में क्या अंतर है?

माँ शैलपुत्री की पूजा पहले दिन होती है और उनका वाहन वृषभ है, जबकि माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा दूसरे दिन होती है और वे नंगे पैर चलती हैं। शैलपुत्री चंद्रमा से जुड़ी हैं, जबकि ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करती हैं। दोनों के मंत्र और भोग भी अलग हैं।

क्या ऑफिस जाने वाले लोग शॉर्टकट में पूजा कर सकते हैं?

हाँ, यदि आपके पास समय की कमी है तो आप संक्षिप्त पूजा कर सकते हैं। बस स्नान के बाद देवी को प्रणाम करें, घी का दीपक जलाएं और 11 बार मंत्र का जाप करें। मन की श्रद्धा समय से अधिक महत्वपूर्ण होती है।

मंगल दोष दूर करने के लिए विशेष उपाय क्या है?

मंगल दोष कम करने के लिए इस दिन लाल कपड़े पहनकर माँ को रुद्राक्ष की माला और सफेद फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मंगल की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

पारंपरिक रूप से गर्भवती महिलाओं को कठोर या निर्जला व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। वे फल और दूध लेकर हल्का व्रत कर सकती हैं। हालांकि, कोई भी व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित और आवश्यक है।

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