दिल्ली एनसीआर · Delhi

दिल्ली एनसीआर में தமிழ்ப் புத்தாண்டு

बुधवार, 14 अप्रैल 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

तमिल नववर्ष इस वर्ष 14 अप्रैल 2027, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस पावन दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, जिससे सौर मास चिथिरई की शुरुआत होती है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य देना मुख्य परंपरा है।

🕐 दिल्ली एनसीआर के लिए தமிழ்ப் புத்தாண்டு का समय

सूर्योदय की तिथिAshtami (Shukla Paksha) — 15:24 तक
पर्व की तिथिSankranti 15:24 से
नक्षत्रPunarvasu, पाद 4 — 10:52 तक
योग · करणSukarma · Bava
अभिजित मुहूर्त11:56-12:46
राहुकाल12:21-13:56
यमगंड · गुलिक07:36-09:11 · 10:46-12:21
सूर्योदय · सूर्यास्त06:01 · 18:42

दिल्ली एनसीआर (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ தமிழ்ப் புத்தாண்டு पर क्या करें

  1. सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर की अच्छी तरह सफाई करें।
  2. स्नानोपरांत स्वच्छ या नए पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
  3. पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध और पवित्र करें।
  4. तांबे के लोटे में जल लेकर भगवान सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें।
  5. पूजा स्थल पर घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  6. नए वर्ष में परिवार की उन्नति और स्वास्थ्य के लिए सूर्य देव से प्रार्थना करें।
  7. घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

The Sun enters Mesha at 14 Apr 2027 15:28 IST. The Tamil rule opens the month on the sankranti day, the transit being before sunset. Chithirai therefore begins on 14 Apr 2027. (Report of the Calendar Reform Committee, Govt of India 1955, “Rules of Samkranti”, p.244)

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में தமிழ்ப் புத்தாண்டு का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:0111:56-12:4612:21-13:56
मुंबई06:2612:14-13:0312:39-14:12
नोएडा06:0011:55-12:4512:20-13:55
गुरुग्राम06:0211:56-12:4712:22-13:57
बेंगलुरु06:1111:54-12:4412:19-13:51
हैदराबाद06:0411:51-12:4012:16-13:49
पुणे06:2212:09-12:5912:34-14:07
कोलकाता05:2111:11-12:0111:36-13:10
चेन्नई06:0011:44-12:3312:09-13:41
अहमदाबाद06:2412:14-13:0512:40-14:14

தமிழ்ப் புத்தாண்டு क्यों मनाया जाता है

सौर गणना पर आधारित परंपराओं में वर्ष की शुरुआत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। तमिल सौर पंचांग के अनुसार यह दिन चिथिरई मास का पहला दिन होता है, जिसे नववर्ष के रूप में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह वह कालखंड है जब प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव मीन राशि की अपनी यात्रा समाप्त करके मेष राशि में प्रवेश करते हैं। वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मेष राशि में सूर्य अपनी परम उच्च स्थिति में आ जाते हैं[2]। सूर्य देव को संपूर्ण जगत की आत्मा, ऊर्जा का स्रोत और आरोग्य का कारक माना गया है। जब सूर्य अपनी उच्च राशि में गोचर करते हैं, तो प्रकृति में नई ऊर्जा, तेज और जीवन शक्ति का संचार होता है। इसी कारण इस संक्रांति काल को केवल एक पंचांगीय घटना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में नई शुरुआत, आत्मबल की वृद्धि और सकारात्मक संकल्पों को दोहराने का अवसर माना जाता है। इस दिन किए गए दान, स्नान और ईश-वंदन से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है[4]। संक्रांति के इस पावन पर्व पर ग्रहों के अधिपति भगवान भास्कर की प्रत्यक्ष उपासना का विधान बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में संक्रांति के समय सूर्य देव की विधिवत अर्चना और ध्यान का निर्देश मिलता है[1]। यह दिन ऋतु परिवर्तन और कृषि जीवन के नए चक्र के आरंभ का भी प्रतीक है। खेतों में नई फसलों का आगमन और प्रकृति में नया उल्लास इस उत्सव को जन-जन के उल्लास से जोड़ देता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष का पहला दिन व्यक्ति के आगामी पूरे वर्ष के स्वभाव और दिशा को तय करता है। इसलिए इस दिन कटुता, कलह और आलस्य को त्यागकर मन में धैर्य और आनंद का भाव रखने की सलाह दी जाती है। जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बनाए रखने के लिए परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर नए वर्ष का स्वागत करते हैं। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि समय के हर नए चक्र के साथ हमें अपने विचारों और कर्मों को भी परिष्कृत करना चाहिए, ताकि आगामी जीवन अधिक सार्थक और कल्याणकारी बन सके।

🪔 தமிழ்ப் புத்தாண்டு पूजा विधि

  1. शुद्धि एवं स्वच्छता — प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय उठकर स्नान करें और स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की तैयारी — घर के मंदिर और पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  3. दीप प्रज्वलन — भगवान सूर्य के समक्ष घी या तिल के तेल का एक दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती जलाएं।
  4. आचमन एवं संकल्प — हथेली में जल लेकर आचमन करें और नए वर्ष में सुख, शांति तथा आरोग्य की कामना का मानसिक संकल्प लें।
  5. सूर्य अर्घ्य — तांबे के लोटे में शुद्ध जल, अक्षत और लाल पुष्प डालकर पूर्व दिशा में भगवान सूर्य को अर्घ्य समर्पित करें।
  6. ध्यान एवं नमन — दोनों हाथ जोड़कर जीवनदाता सूर्य देव के तेज और प्रकाश का श्रद्धापूर्वक मानसिक ध्यान करें।
  7. नैवेद्य समर्पण — घर में उपलब्ध शुद्ध सात्विक भोजन, फल या मिठाई का भगवान को भोग अर्पित करें।
  8. आरती — दीपक से भगवान सूर्य और अपने ईष्ट देव की शांत मन से श्रद्धापूर्वक आरती उतारें।
  9. क्षमा प्रार्थना — पूजा के अंत में जाने-अनजाने हुई किसी भी त्रुटि या भूल के लिए भगवान से हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।
  10. गुरु एवं वरिष्ठ आशीर्वाद — पूजा संपन्न होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके नए वर्ष का आशीर्वाद प्राप्त करें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  2. तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर भगवान सूर्य को श्रद्धा से अर्घ्य दें।
  3. पूजा घर में घी का दीपक जलाकर भगवान के समक्ष हाथ जोड़ें।
  4. नए वर्ष में उत्तम स्वास्थ्य, शांति और सफलता की मन ही मन प्रार्थना करें।
  5. घर के बड़े-बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और मीठा खाएं।

🛒 தமிழ்ப் புத்தாண்டு पूजा सामग्री

आवश्यक

  • तांबे का लोटा (सूर्य को अर्घ्य देने हेतु)
  • शुद्ध जल
  • दीपक (मिट्टी या पीतल का)
  • घी या तिल का तेल
  • रुई की बत्ती
  • अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
  • रोली अथवा चंदन
  • धूप या अगरबत्ती
  • माचिस

वैकल्पिक

  • लाल या पीले ताजे पुष्प
  • गंगाजल
  • भोग के लिए ताजे मौसमी फल
  • गुड़ या सात्विक नैवेद्य
  • कपूर
  • आरती की थाली

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि तांबे का लोटा उपलब्ध न हो, तो पीतल या कांसे का पात्र पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि लाल पुष्प उपलब्ध न हों, तो कोई भी ताजे पुष्प या अक्षत पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हैं।
  • यदि गाय का घी उपलब्ध न हो, तो तिल का शुद्ध तेल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि गंगाजल उपलब्ध न हो, तो स्वच्छ जल में तुलसी दल डालकर प्रयोग करना पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि विशेष नैवेद्य उपलब्ध न हो, तो सामान्य गुड़ या मिश्री का भोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

❓ தமிழ்ப் புத்தாண்டு: क्या करें और क्या न करें

क्या इस दिन सिर धोकर स्नान कर सकते हैं?

हाँ, पर्व के दिन प्रातःकाल सिर से स्नान करना अत्यंत शुभ और पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है।

क्या इस दिन नाखून या बाल काटना चाहिए?

किसी भी नववर्ष या संक्रांति पर्व पर बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस प्रकार के कार्य पर्व से एक दिन पूर्व कर लेना ही उचित रहता है।

क्या इस दिन नमक का सेवन किया जा सकता है?

हाँ, इस दिन सामान्य सात्विक भोजन में नमक का प्रयोग पूरी तरह मान्य है। किसी विशेष व्यक्तिगत संकल्प के बिना नमक छोड़ने का कोई शास्त्रीय नियम नहीं है।

क्या इस दिन यात्रा की जा सकती है?

आवश्यक यात्रा की जा सकती है, लेकिन यथासंभव परिवार के साथ घर पर समय बिताना और पूजा करना अधिक श्रेष्ठ माना जाता है। यदि यात्रा जरूरी हो तो सूर्य देव को जल अर्पित करके ही प्रस्थान करें।

क्या इस दिन नया व्यापार या नया कार्य शुरू कर सकते हैं?

संक्रांति का दिन नई शुरुआत और संकल्पों के लिए बहुत शुभ माना गया है। किसी भी नए और मांगलिक कार्य के लिए दोपहर के संक्रांति समय और स्थानीय चौघड़िया का ध्यान रखना चाहिए।

क्या इस दिन नए कपड़े, सोना या वाहन की खरीदारी कर सकते हैं?

हाँ, नए संवत्सर के आगमन पर नए वस्त्र, आभूषण या घरेलू सामान की खरीदारी अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक मानी जाती है।

क्या मुख्य पूजा रात के समय की जा सकती है?

नहीं, यह पर्व भगवान सूर्य और संक्रांति से जुड़ा है, इसलिए इसकी मुख्य पूजा प्रातःकाल या दोपहर के संक्रांति काल में ही की जाती है। रात में केवल सामान्य संध्या दीप जलाया जा सकता है।

क्या पूजा के बाद तुरंत भोजन किया जा सकता है?

हाँ, सूर्य देव को अर्घ्य देने और भोग लगाने के बाद परिवार के साथ प्रेमपूर्वक सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है।

क्या इस दिन घर में मांसाहार या मदिरा का सेवन किया जा सकता है?

बिल्कुल नहीं, नववर्ष और संक्रांति के पावन दिन पर पूर्ण सात्विकता बनाए रखनी चाहिए। तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

क्या इस दिन किसी को धन उधार देना या लेना चाहिए?

नववर्ष के प्रथम दिन धन का बड़ा लेन-देन या कर्ज लेने और देने से बचना चाहिए। पारंपरिक मान्यता है कि वर्ष के पहले दिन धन घर में ही स्थिर रहना चाहिए।

क्या इस दिन घर की सफाई या पुरानी चीजें बाहर निकाल सकते हैं?

घर की भारी साफ-सफाई पर्व से एक दिन पूर्व ही पूरी कर लेनी चाहिए। उत्सव के मुख्य दिन केवल हल्का झाड़ू-पोंछा करें और कचरा या पुरानी चीजें बाहर न फेंकें।

क्या इस दिन दान-पुण्य करना आवश्यक है?

संक्रांति के अवसर पर अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या शीतल जल का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

क्या इस दिन किसी से वाद-विवाद या कलह से बचना चाहिए?

हाँ, वर्ष के पहले दिन मन को शांत, प्रसन्न और वाणी को मधुर रखना चाहिए। इस दिन किसी से क्रोध, वाद-विवाद या कटु वचन बोलने से बचना चाहिए।

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⚠️ आम गलतियाँ

  • सूर्योदय के बहुत बाद तक सोते रहने से नववर्ष की प्रारंभिक पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से अनुष्ठान का पूर्ण फल नहीं मिलता।
  • संक्रांति के समय घर में अशांति, कलह या अपशब्दों का प्रयोग करने से मानसिक शांति का संकल्प अधूरा रह जाता है।
  • सूर्य को अर्घ्य देते समय ताम्र पात्र के स्थान पर प्लास्टिक या लोहे के बर्तन का उपयोग करने से अर्घ्य विधि अपूर्ण मानी जाती है।
  • पूजा के दौरान केवल औपचारिकता निभाना और एकाग्र चित्त से प्रार्थना न करना उपासना को निष्फल कर देता है।
  • नववर्ष के दिन घर के बुजुर्गों और माता-पिता के चरण स्पर्श न करने से पारिवारिक आशीर्वाद का नियम अधूरा रहता है।
  • संक्रांति के पावन अवसर पर द्वार पर आए किसी जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाने से दान की मर्यादा खंडित मानी जाती है।

📖 தமிழ்ப் புத்தாண்டு कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समय की गणना और सृष्टि के कालचक्र का गहरा संबंध भगवान सूर्य की गति से है। एक प्राचीन कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का विचार किया, तो उन्होंने काल और ऋतुओं के निर्धारण के लिए सूर्य देव को केंद्र में स्थापित किया। सूर्य का मेष राशि में प्रवेश उस दिव्य क्षण का प्रतीक माना गया जब प्रकृति में नया जीवन, नवचेतना और गतिशीलता का प्राकट्य हुआ। एक अन्य लोककथा देवराज इंद्र और पृथ्वी के संबंधों से जुड़ी है। माना जाता है कि इस पावन दिन देवराज इंद्र स्वयं पृथ्वी पर शांति, वर्षा और समृद्धि का आशीर्वाद देने के लिए विचरण करते हैं। संक्रांति के इस पुण्य काल में प्रकृति अपने पुराने आवरण को उतारकर नए पल्लवों और पुष्पों से आच्छादित हो जाती है। ज्योतिषीय और पौराणिक परंपराओं में यह मान्यता दृढ़ है कि जब सूर्य अपनी राशि बदलते हैं, तो उस संक्रांति काल के पूर्व और पश्चात की सोलह घड़ियां विशेष रूप से पुण्यदायक मानी जाती हैं[3]। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि संक्रांति के अवसर पर जल, गो और अन्न का सत्कार करने से मनुष्य के जीवन में स्थिरता आती है। इस दिन राजा और प्रजा दोनों ही अपने अहंकार को भूलकर प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते थे। एक समय जब दक्षिण भारत के एक राजा ने अपने राज्य में अकाल और अशांति देखी, तब ऋषियों ने उन्हें मेष संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की विधिवत अर्चना करने और प्रजा में समरसता स्थापित करने का परामर्श दिया। राजा ने पूरे राज्य के साथ मिलकर सूर्य देव की उपासना की और सभी अभावग्रस्तों को सहायता प्रदान की। इसके प्रभाव से राज्य में समय पर वर्षा हुई, खेतों में हरियाली लौटी और प्रजा का जीवन सुखमय हो गया। तभी से इस दिन को नए वर्ष के रूप में उल्लास, सेवा और समर्पण के साथ मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह कथा संदेश देती है कि प्रकृति के नियमों का सम्मान ही जीवन का आधार है।

🪔 आरती

आरती सदैव मुख्य पूजा और भोग समर्पण के उपरांत की जाती है। पीतल या तांबे की थाली में शुद्ध घी या कपूर का दीपक जलाएं। दीपक को भगवान सूर्य अथवा अपने ईष्ट देव के सम्मुख घड़ी की सुई की दिशा में वृत्ताकार घुमाते हुए एकाग्र मन से आरती करें। आरती के समय मन में श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखें। इसके पश्चात आरती की लौ को दोनों हाथों से ग्रहण कर अपने माथे और नयनों से लगाएं तथा उपस्थित सभी परिजनों में इसका वितरण करें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार தமிழ்ப் புத்தாண்டு के उपाय

आर्थिक तंगी और धन की बचत न होना

एक तांबे के पात्र में थोड़ा सा अक्षत और गुड़ रखकर भगवान सूर्य को अर्पित करें। कब: संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान करने के तुरंत बाद। खर्च: ₹10. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: मेष संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना से धन प्रवाह में संतुलन और स्थिरता आती है।

नौकरी और आजीविका में रुकावट

तांबे के लोटे में सादा जल भरकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें और अपनी उन्नति की प्रार्थना करें। कब: संक्रांति की सुबह सूर्योदय के समय। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 21 दिन। आपके लिए क्यों: सूर्य देव को प्रतिष्ठा और आजीविका का अधिपति माना जाता है।

विवाह वार्ता में अनावश्यक विलंब

पूजा के बाद दो चुटकी हल्दी जल में मिलाकर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर छिड़कें। कब: संक्रांति के दिन दोपहर में पूजा संपन्न होने पर। खर्च: ₹5. कितने दिन: 7 दिन। आपके लिए क्यों: संक्रांति पर ऊर्जा का शुद्धिकरण पारिवारिक सौहार्द और नए संबंधों के मार्ग खोलता है।

संतान की एकाग्रता और स्वास्थ्य की चिंता

बच्चे के हाथ से ताजे लाल फल या थोड़ा सा गुड़ किसी गाय को खिलवाएं। कब: संक्रांति के दिन दोपहर भोजन से पहले। खर्च: ₹20. कितने दिन: 1 दिन। आपके लिए क्यों: सूर्य के मेष प्रवेश के समय सात्विक दान से बच्चों में तेज और सकारात्मकता बढ़ती है।

घर में अशांति और परिजनों में मनमुटाव

एक कटोरी में थोड़ा सा सेंधा नमक रखकर घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें। कब: संक्रांति की शाम को सूर्यास्त के बाद। खर्च: ₹5. कितने दिन: 3 दिन। आपके लिए क्यों: सौर ऊर्जा के परिवर्तन काल में घर के वातावरण से नकारात्मक कंपन दूर होते हैं।

मन में भारीपन और नकारात्मक विचार

स्नान के जल में दो बूंद गंगाजल मिलाकर स्नान करें और मन को शांत रखें। कब: संक्रांति के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 11 दिन। आपके लिए क्यों: नववर्ष की पावन संक्रांति पर आत्मशुद्धि से मानसिक दुर्बलता का शमन होता है।

क्या தமிழ்ப் புத்தாண்டு आपके लिए विशेष है?

इस पर्व और सूर्य गोचर से जुड़े सामान्य उपाय सभी के लिए एक सामान्य दिशा निर्देश भर हैं। ज्योतिष का एक मौलिक नियम है कि किसी ग्रह की राशि स्थिति का सामान्य प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। आपकी अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में सूर्य और अन्य ग्रहों की स्थिति, उनकी दृष्टि तथा वर्तमान महादशा ही आपके वास्तविक जीवन की दिशा तय करती है। त्रिकाल वाणी में रोहित गुप्त व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से आपकी इसी विशिष्ट ग्रह स्थिति का गहन विश्लेषण करते हैं। कुण्डली विश्लेषण से आप करियर, धन, दशा और सही समय के बारे में स्पष्टता पा सकते हैं। कुण्डली मिलान से वैवाहिक अनुकूलता और दांपत्य जीवन के तालमेल को समझा जा सकता है। हस्तरेखा विश्लेषण आपकी हथेली की रेखाओं से जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जबकि स्वप्न शास्त्र के माध्यम से आप बार-बार आने वाले सपनों के वास्तविक अर्थ और संकेतों को जान सकते हैं।

शब्दावली · Glossary

मेष संक्रांति
जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, उस खगोलीय संक्रमण को मेष संक्रांति कहते हैं।
चिथिरई
तमिल सौर पंचांग का प्रथम मास, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के दिन से प्रारंभ होता है।
पुण्य काल
संक्रांति के समय का वह विशेष कालखंड जिसमें किया गया दान, जप और देव-अर्चन अक्षय फलदायी माना जाता है।
अर्घ्य
तांबे के पात्र में शुद्ध जल, अक्षत और पुष्प लेकर श्रद्धापूर्वक सूर्य देव को समर्पित करने की वैदिक क्रिया।
चौघड़िया
दिन और रात के समय को शुभ और अशुभ भागों में बांटने वाली एक पारंपरिक ज्योतिषीय समय-सारणी।
राहुकाल
प्रत्येक दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह समय जिसमें कोई भी नया या मांगलिक कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    चन्द्रादित्याकृती पार्श्वे मध्ये संक्रान्तिमर्चयेत्।ह् । प्रतिमां पूजने पूर्वं वस्त्रयुग्मं निवेदयेत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 90 · श्लोक 10

    संक्रांति के समय सूर्य और चन्द्र की आकृतियों के साथ संक्रांति का पूजन करना चाहिए।

    At the time of Sankranti, one should worship the deities including Surya and Chandra.

  2. [2]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    मेषो वृषो मृगः कन्या कर्को मीनस्तथा तुला । सूर्यादीनां क्रमादेते कथिता उच्चराशयः
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 · श्लोक 49

    मेष राशि को सूर्य की उच्च राशि कहा गया है।

    Mesha is declared as the exaltation sign of Surya and other planets respectively.

  3. [3]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    संक्रान्तिकालादुभयत्र नाडिकाः पुण्या मताः षोडश षोडशोष्णगोः । निशीथतोऽर्वागपरत्र संक्रमे पूर्वाpराह्रांतिमपूर्वभागकौ ॥ ५ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 3 — संक्रान्तिप्रकरणम् · श्लोक 5

    सूर्य संक्रांति के पहले और बाद की सोलह घड़ियां पुण्यदायक मानी गई हैं।

    Sixteen ghatikas before and after the Sankranti of the Sun are considered auspicious.

  4. [4]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    तथायनांशाः खरसाहताश्च स्पष्टार्कगत्या विहृता दिनाद्यैः । मेषादितः प्राक्चलसंक्रमाः स्युर्दाने जपादौ बहुपुण्यदास्ते ॥ ९ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 3 — संक्रान्तिप्रकरणम् · श्लोक 9

    मेष आदि राशियों की संक्रांतियां दान और जप आदि के लिए अत्यंत पुण्यदायी होती हैं।

    The solar transits beginning with Mesha are exceedingly meritorious for charity and japa.

दिल्ली एनसीआर में தமிழ்ப் புத்தாண்டு — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में तमिल नववर्ष (पुथांडु) कब है?

वर्ष 2027 में तमिल नववर्ष 14 अप्रैल, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन सूर्य देव का मेष राशि में गोचर दोपहर के समय सूर्यास्त से पहले हो रहा है। इसलिए तमिल सौर पंचांग के नियमानुसार चिथिरई मास का प्रारंभ इसी दिन मान्य होगा। दिल्ली एनसीआर के पंचांग अनुसार उस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र और सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा।

इस पर्व का सही पूजा मुहूर्त क्या है?

संक्रांति पर्व की मुख्य पूजा का समय संक्रांति काल और दोपहर के पुण्य काल में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। सूर्य देव की आराधना के लिए प्रातःकाल सूर्योदय का समय भी अत्यंत मंगलकारी रहता है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त ऊपर दी गई तालिका में दर्शाया गया है। राहुकाल के समय को छोड़कर आप दिन के किसी भी शुभ चौघड़िया में पूजा संपन्न कर सकते हैं।

अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों आता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय प्रत्येक शहर के भौगोलिक अक्षांश और देशांतर पर निर्भर करता है। जब पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, तो पूर्व के शहरों में सूर्योदय पहले और पश्चिम के शहरों में कुछ समय बाद होता है। इसी कारण संक्रांति का सटीक प्रभाव और स्थानीय चौघड़िया हर नगर में कुछ मिनटों के अंतर से बदलता है। आप जिस शहर में हैं, उसी के स्थानीय पंचांग समय का पालन करना शास्त्र सम्मत होता है।

पुथांडु के दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर घर की पूर्ण स्वच्छता करनी चाहिए और स्वयं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे से भगवान सूर्य को जल अर्पित करना सबसे मुख्य कर्म माना गया है। घर के मंदिर में दीप जलाकर परिवार की खुशहाली के लिए ईश-प्रार्थना करें। अंत में अपने घर के माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर नए संवत्सर का आशीर्वाद लें।

इस पर्व पर किन कार्यों से बचना चाहिए?

इस पावन दिन किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, क्रोध और अपशब्दों के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। घर में मांसाहार, मदिरा अथवा किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तु का प्रवेश और सेवन न करें। इस दिन देर तक सोते रहना और आलस्य में समय व्यतीत करना भी अशुभ माना जाता है। किसी जरूरतमंद को अपने द्वार से खाली हाथ लौटाने की भूल भी इस दिन नहीं करनी चाहिए।

क्या पुथांडु के दिन व्रत रखना अनिवार्य है?

पारंपरिक रूप से यह पर्व नए वर्ष के स्वागत और सात्विक पारिवारिक भोज का उत्सव है, इसलिए इसमें निर्जला या कठोर उपवास अनिवार्य नहीं है। कई श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा के अनुसार केवल दोपहर की पूजा तक या सूर्यास्त तक फलाहार रखते हैं। यदि आप कोई व्रत रखना चाहते हैं, तो अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही सात्विक नियम अपनाएं। यदि आप अस्वस्थ हैं, गर्भवती हैं या दवाएं ले रहे हैं, तो किसी भी प्रकार के उपवास से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

इस दिन भोजन में क्या खाना चाहिए?

नववर्ष के इस पावन अवसर पर शुद्ध सात्विक, शाकाहारी और ताजा बना भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। परंपरा में इस दिन खट्टे, मीठे, कड़वे और तीखे सभी स्वादों से युक्त विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं, जो जीवन के हर अनुभव के संतुलन को दर्शाते हैं। भोजन में मौसमी फल, खीर और सात्विक दाल-चावल का प्रयोग उत्तम माना जाता है। लहसुन और प्याज से रहित शुद्ध भोजन बनाकर पहले भगवान को भोग लगाएं।

पूजा के लिए कौन सी आवश्यक सामग्री चाहिए?

सूर्य पूजा के लिए एक तांबे का लोटा, शुद्ध जल, रोली या चंदन और बिना टूटे हुए चावल सबसे आवश्यक हैं। इसके साथ ही पूजा स्थल पर जलाने के लिए मिट्टी या पीतल का दीपक, शुद्ध घी या तिल का तेल और रुई की बत्ती रखें। धूप, अगरबत्ती और ताजे लाल या पीले पुष्प पूजा की थाली को पूर्ण करते हैं। भोग के लिए घर में उपलब्ध कोई भी मौसमी फल या गुड़ की डली पर्याप्त होती है।

पुथांडु से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी काल में भगवान ब्रह्मा ने समय और ऋतु चक्र की व्यवस्था प्रारंभ की थी। सूर्य देव का मेष राशि में प्रवेश प्रकृति में नवजीवन और ऊर्जा के पुनर्जन्म का प्रतीक माना गया है। प्राचीन समय में राजाओं ने संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना कर राज्य में अकाल और अशांति को समाप्त किया था। तभी से लोक कल्याण, वर्षा और समृद्धि की कामना के साथ यह पर्व हर वर्ष उल्लास से मनाया जाता है।

ज्योतिष में इस दिन का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान सूर्य इस दिन अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं। सूर्य देव सभी ग्रहों के राजा और मानवीय चेतना, आत्मबल तथा स्वास्थ्य के प्रत्यक्ष कारक हैं। जब वे अपनी सबसे मजबूत स्थिति में आते हैं, तो संपूर्ण सृष्टि में सकारात्मकता और नई शुरुआत की ऊर्जा बढ़ती है। इसलिए इस दिन किया गया कोई भी शुभ संकल्प दीर्घकालिक सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है।

क्या इस दिन नया व्यापार या नया काम शुरू किया जा सकता है?

हाँ, मेष संक्रांति और नववर्ष का दिन किसी भी नए कार्य के आरंभ के लिए बहुत शुभ और प्रशस्त माना जाता है। नए व्यापार, नई नौकरी के कार्यभार या किसी नई योजना की नींव रखने के लिए यह दिन अत्यंत अनुकूल है। केवल इस बात का ध्यान रखें कि कार्य की शुरुआत दिन के राहुकाल में न की जाए। दोपहर के शुभ चौघड़िया या संक्रांति के समय कार्य प्रारंभ करना श्रेष्ठ परिणाम देता है।

क्या इस दिन स्वर्ण, वस्त्र या वाहन की खरीदारी कर सकते हैं?

नए वर्ष के अवसर पर नई वस्तुओं, सोने-चांदी के आभूषणों अथवा नए वाहनों की खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि वर्ष के पहले दिन घर में नई और उपयोगी वस्तुएं लाने से वर्ष भर सुख और समृद्धि का वास रहता है। खरीदारी करने से पूर्व अपने बजट और आवश्यकता का ध्यान अवश्य रखें। खरीदारी के बाद लाई गई नई वस्तु को सबसे पहले भगवान के मंदिर में रखकर नमन करना चाहिए।

इस दिन किस मंत्र का जप करना चाहिए?

इस पावन दिन सूर्य देव के सामान्य पौराणिक नामों का स्मरण अथवा गायत्री मंत्र का शांत मन से जप करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि आपको कोई मंत्र कंठस्थ न हो, तो केवल 'ॐ सूर्याय नमः' का मन ही मन स्मरण कर सकते हैं। मंत्र जप के दौरान अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और मन को शांत एवं एकाग्र बनाए रखें। बिना किसी दिखावे के सच्चे भाव से लिया गया ईश्वर का नाम ही पूर्ण फल देता है।

इस दिन किस प्रकार का दान करना सबसे फलदायी होता है?

संक्रांति के अवसर पर तांबे का पात्र, शुद्ध गुड़, गेहूं अथवा मौसमी फलों का दान करना अत्यंत उत्तम माना गया है। ग्रीष्म ऋतु का आरंभ होने के कारण राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना या घड़े का दान करना बहुत पुण्यकारी होता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्त्र प्रदान करें। दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और बिना किसी अहंकार के किया जाना चाहिए।

क्या इस दिन ग्रह शांति के सरल उपाय किए जा सकते हैं?

हाँ, सूर्य के उच्च राशि में जाने के दिन सूर्य जनित दोषों और आत्मविश्वास की कमी को दूर करने के उपाय बहुत सरल होते हैं। सुबह स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना और सूर्य को अर्घ्य देना सबसे सीधा उपाय है। इसके अलावा किसी असहाय व्यक्ति को भोजन कराना भी ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है। मन में सकारात्मक विचार रखकर बड़ों का सम्मान करना ही सबसे बड़ा आध्यात्मिक उपाय है।

पुथांडु और विशु या बैसाखी में क्या अंतर है?

ये सभी पर्व सौर नववर्ष और सूर्य के मेष राशि में प्रवेश अर्थात मेष संक्रांति पर ही मनाए जाते हैं। पुथांडु तमिलनाडु की तमिल परंपरा का नववर्ष है, जबकि विशु केरल में और बैसाखी पंजाब में मनाई जाती है। मूल खगोलीय घटना एक ही होती है, परंतु स्थानीय संस्कृति, भोजन और अनुष्ठान के तौर-तरीके अलग होते हैं। इसलिए पंचांग के सौर नियम समान होने पर भी इनके उत्सव का क्षेत्रीय स्वरूप भिन्न होता है।

पुथांडु और उगादी में क्या अंतर है?

पुथांडु सौर गणना पर आधारित तमिल पंचांग का नववर्ष है, जो सदैव सूर्य के मेष राशि में आने पर अप्रैल में पड़ता है। इसके विपरीत उगादी चंद्रमा की गति पर आधारित चंद्र पंचांग का आरंभ है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है। उगादी मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मनाया जाता है। दोनों ही नववर्ष हैं, लेकिन एक सौर कैलेंडर से और दूसरा चंद्र कैलेंडर से निर्धारित होता है।

क्या किराए के मकान में रहने वाले भी यह पूजा विधिपूर्वक कर सकते हैं?

पूजा का संबंध आपके हृदय की श्रद्धा और स्थान की पवित्रता से है, मकान के स्वामित्व से नहीं। आप जिस भी घर में निवास कर रहे हैं, उसके पूर्व कोने को स्वच्छ करके भगवान सूर्य की आराधना कर सकते हैं। तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करने के लिए केवल खुले आकाश या बालकनी की आवश्यकता होती है। ईश्वर केवल आपके समर्पण और सात्विक भाव को स्वीकार करते हैं।

क्या इस दिन महिलाओं को विशेष नियम मानने होते हैं?

इस पर्व में महिलाओं के लिए कोई अलग या कठिन नियम निर्धारित नहीं किए गए हैं। सामान्य दिनों की तरह स्वच्छता और सात्विकता का पालन करते हुए घर की पूजा और भोजन की तैयारी की जाती है। यदि कोई महिला अस्वस्थ है या शारीरिक रूप से असमर्थ है, तो उसे कठिन कार्यों से विश्राम लेना चाहिए। परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर घर की व्यवस्था और पूजा संपन्न कर सकते हैं।

क्या रात के समय संक्रांति की पूजा की जा सकती है?

संक्रांति और सौर नववर्ष का सीधा संबंध प्रत्यक्ष देवता सूर्य से है, इसलिए इसकी मुख्य पूजा दिन के प्रकाश में ही होती है। रात के समय सूर्य देव को अर्घ्य देना या मुख्य संक्रांति पूजा करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। यदि आप दिन में व्यस्त हैं, तो शाम को केवल अपने घर के मंदिर में सामान्य संध्या दीप जला सकते हैं। मुख्य संकल्प और जल अर्पण का कार्य हमेशा दिन के समय ही पूर्ण करना चाहिए।

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