दिवाली

रविवार, 8 नवंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह कार्तिक अमावस्या का दिन है, जब मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। इस दिन घर को साफ करके दीयों से सजाना और प्रदोष काल में पूजा करना सबसे महत्वपूर्ण है, जिसका सटीक मुहूर्त आप ऊपर देख सकते हैं।

🕐 भारत के लिए दिवाली का समय

सूर्योदय की तिथिChaturdashi (Krishna Paksha)11:28 तक
पर्व की तिथिAmavasya 11:28 से
नक्षत्रSwati, पाद 107:24 (09 Nov) तक
योग · करणAyushman · Shakuni
पूजा मुहूर्त17:27-20:06 (प्रदोष)
अभिजित मुहूर्त11:43-12:26
राहुकाल16:06-17:27
यमगंड · गुलिक12:04-13:25 · 14:45-16:06
सूर्योदय · सूर्यास्त06:42 · 17:27

भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

दिवाली पर क्या करें

  1. सूर्यास्त से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई और शुद्धिकरण कर लें।
  2. लाल और सुनहरे रंग के साफ या नए कपड़े पहनें।
  3. एक साफ चौकी पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें।
  4. चौकी पर कमल के फूल, गेंदे की माला और चांदी के सिक्के सजाएं।
  5. घी का दीपक, धूप और खील-बताशे अर्पित करें।
  6. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जाप करते हुए ध्यान करें।
  7. पूजा के बाद एक घी का दीया रात भर जलने के लिए सुरक्षित जगह पर रख दें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Amavasya pervades pradosh kaal on one day only (100% of the window). Lakshmi puja is performed in pradosh, so Amavasya must pervade the dusk window. When Amavasya touches pradosh on two evenings, the later is taken.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में दिवाली का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:4211:43-12:2616:06-17:27
मुंबई06:4511:59-12:4316:33-17:58
नोएडा06:4111:42-12:2516:05-17:26
गुरुग्राम06:4211:43-12:2616:07-17:28
बेंगलुरु06:1911:40-12:2516:21-17:47
हैदराबाद06:2111:36-12:2216:13-17:38
पुणे06:4111:55-12:4016:30-17:55
कोलकाता05:4810:57-11:4115:28-16:51
चेन्नई06:0811:29-12:1416:10-17:36
अहमदाबाद06:5212:00-12:4516:31-17:54

दिवाली क्यों मनाया जाता है

दिवाली केवल दीपों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन से अंधकार और दरिद्रता को दूर करने का एक बहुत ही गहरा और पारंपरिक अवसर है। यह पर्व हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। अमावस्या की रात साल की सबसे अंधेरी रात होती है, और इसी घने अंधेरे को चीरते हुए जब हम घर के हर कोने में दीये जलाते हैं, तो यह केवल एक रस्म नहीं होती, बल्कि यह हमारे भीतर और बाहर की नकारात्मकता को खत्म करने का प्रतीक है। ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो इस दिन का संबंध शुक्र (Venus) ग्रह से है। शुक्र ग्रह हमारे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, वैभव और आकर्षण का कारक माना जाता है। जब हम दिवाली के दिन लाल और सुनहरे (Red and Gold) रंगों का इस्तेमाल करते हैं, तो हम असल में शुक्र ग्रह की ऊर्जा को अपने घर में आमंत्रित कर रहे होते हैं। लाल रंग सक्रियता और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि सुनहरा रंग संपन्नता और देवी लक्ष्मी के आशीर्वाद को दर्शाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा का भी एक विशेष महत्व है। माँ लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य की देवी हैं, लेकिन बिना बुद्धि और विवेक के धन कभी टिकता नहीं है और न ही सही दिशा में इस्तेमाल होता है। भगवान गणेश शुभता, बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं। इसलिए परंपरा कहती है कि लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा अनिवार्य है, ताकि जो भी समृद्धि हमारे जीवन में आए, वह सही मार्ग पर चले और हमारे लिए शुभ साबित हो। दिवाली का दिन उन लोगों के लिए भी बहुत खास माना जाता है जो जीवन में आर्थिक परेशानियों या दरिद्रता का सामना कर रहे हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा लक्ष्मी दोष को शांत करने में मदद करती है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि केवल बाहरी सफाई काफी नहीं है, बल्कि मन के भीतर से भी क्रोध, विवाद और कड़वे शब्दों को निकालकर बाहर करना चाहिए। त्रिकाल वाणी की गणना के अनुसार, यह कार्तिक अमावस्या प्रदोष काल को पूरी तरह से स्पर्श कर रही है। माँ लक्ष्मी की पूजा हमेशा प्रदोष काल (शाम के समय) में ही की जाती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी समय देवी भ्रमण पर निकलती हैं। जब आप पूरे घर को साफ करके, दीये जलाकर और कमल के फूल सजाकर देवी का स्वागत करते हैं, तो यह आपके घर के वातावरण को एक सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा से भर देता है।

🪔 दिवाली पूजा विधि

  1. घर की सफाई और शुद्धिकरणसूर्यास्त होने से पहले पूरे घर को अच्छी तरह साफ कर लें और गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें।
  2. चौकी की स्थापनापूजा के स्थान पर एक साफ लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या सुनहरे रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
  3. मूर्ति स्थापनाचौकी पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें। ध्यान रहे कि दोनों एक साथ हों।
  4. दीपक प्रज्वलित करनामूर्तियों के सामने एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं और साथ ही धूप या अगरबत्ती भी प्रज्वलित करें।
  5. पुष्प और माला अर्पणमाँ लक्ष्मी को विशेष रूप से कमल के फूल अर्पित करें और दोनों देवी-देवताओं को गेंदे की माला पहनाएं।
  6. रंगोली और सजावटपूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सके।
  7. प्रसाद और नैवेद्यदेवी-देवताओं को पारंपरिक खील-बताशे, खीर और अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं।
  8. चांदी और सिक्केपूजा की थाली में या चौकी पर चांदी के सिक्के और अन्य चांदी की वस्तुएं रखें, यह शुक्र ग्रह को बल देता है।
  9. मंत्र जापॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का शांति से बैठकर जाप करें।
  10. आरतीपरिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें।
  11. अखंड दीपकपूजा के बाद एक घी का दीया ऐसी जगह रखें जो रात भर जलता रहे और बुझे नहीं।

5-मिनट विधि

  1. एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति रखें।
  2. उनके सामने घी का दीपक, धूप जलाएं और गेंदे की माला व कमल के फूल अर्पित करें।
  3. खील-बताशे और खीर का भोग लगाकर 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का 11 बार जाप करें।
  4. श्रद्धापूर्वक आरती करें और घर के मुख्य द्वार पर दीये जलाएं।
  5. एक घी का दीपक रात भर जलने के लिए सुरक्षित स्थान पर रख दें।

🛒 दिवाली पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति
  • लाल या सुनहरा कपड़ा
  • घी और रुई की बत्ती
  • खील-बताशे
  • कमल के फूल
  • गेंदे की माला
  • रोली और अक्षत (साबुत चावल)
  • मिट्टी के दीये

वैकल्पिक

  • चांदी के सिक्के
  • चांदी के बर्तन
  • खीर
  • धूप
  • रंगोली के रंग
  • गंगाजल

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि कमल का फूल उपलब्ध न हो, तो लाल गुलाब का उपयोग किया जा सकता है।
  • यदि चांदी के सिक्के न हों, तो सामान्य साफ सिक्के धोकर पूजा में रखे जा सकते हैं।
  • यदि खील-बताशे न मिलें, तो घर की बनी कोई भी शुद्ध मिठाई या खीर अर्पित की जा सकती है।

दिवाली: क्या करें और क्या न करें

क्या दिवाली के दिन बाल धो सकते हैं?

परंपरागत रूप से दिवाली के दिन बाल धोने की मनाही नहीं है, लेकिन इसे पूजा की तैयारी से पहले, यानी दिन के समय ही कर लेना चाहिए।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

अमावस्या के दिन नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता है। बेहतर होगा कि आप एक दिन पहले ही यह काम कर लें।

क्या मैं दिवाली पर यात्रा कर सकता हूँ?

दिवाली के दिन यात्रा करने से बचना चाहिए। यह दिन घर में रहकर माँ लक्ष्मी का स्वागत करने और परिवार के साथ समय बिताने का है।

क्या पूजा के बाद खाना खा सकते हैं?

हाँ, पूजा और आरती संपन्न होने के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

क्या दिवाली के दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?

दिवाली का दिन नए काम, बहीखाते या व्यापार की शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

क्या इस दिन किसी को पैसे उधार दे सकते हैं?

नहीं, दिवाली के दिन किसी को भी पैसे उधार देने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन घर से लक्ष्मी बाहर नहीं भेजनी चाहिए।

क्या दिवाली पर नॉन-वेज या शराब का सेवन कर सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। यह एक अत्यंत पवित्र दिन है और इस दिन घर में केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही बनना और खाया जाना चाहिए।

क्या मैं पूजा दिन में कर सकता हूँ?

माँ लक्ष्मी की मुख्य पूजा हमेशा प्रदोष काल यानी शाम या रात के समय ही की जाती है। दिन में पूजा करना अपूर्ण माना जाता है।

क्या दिवाली पर शॉपिंग कर सकते हैं?

दिवाली के दिन खरीदारी की जा सकती है, लेकिन बड़े सामान या धातुओं की खरीदारी धनतेरस के दिन करना ज्यादा पारंपरिक है।

क्या पुराने दीये दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं?

पूजा में हमेशा नए दीयों का इस्तेमाल करना चाहिए। घर की सजावट के लिए आप पुराने दीयों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

रात भर जलने वाले दीये का क्या महत्व है?

यह दीया माँ लक्ष्मी के मार्ग को रोशन करने के लिए होता है। इसे सुरक्षित जगह पर रखें ताकि यह रात भर जलता रहे।

क्या दिवाली पर जुआ खेलना सही है?

पारंपरिक रूप से कुछ जगहों पर इसे खेला जाता है, लेकिन शास्त्रों में जुआ खेलने और फिजूलखर्ची करने को सख्त मना किया गया है।

क्या इस दिन झाड़ू खरीदना चाहिए?

हाँ, कई परिवारों में दिवाली के दिन नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है क्योंकि इसे दरिद्रता दूर करने का प्रतीक माना गया है।

क्या करें

  • Clean and light the entire home
  • Worship Lakshmi and Ganesha together
  • Donate food or clothes to the needy
  • Wear new or clean clothes
  • Keep a diya burning overnight

क्या न करें

  • Avoid gambling and overspending
  • Do not lend money today
  • Avoid arguments and harsh words
  • Avoid non-vegetarian food and alcohol

⚠️ आम गलतियाँ

  • माँ लक्ष्मी की पूजा अकेले करना और भगवान गणेश को शामिल न करना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
  • पूजा के समय घर के किसी भी हिस्से में अंधेरा छोड़ देना पारंपरिक दृष्टि से सही नहीं माना जाता।
  • दिवाली के दिन घर के सदस्यों के बीच विवाद या ऊंचे स्वर में बात करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता।
  • रात भर जलने वाले मुख्य दीपक में पर्याप्त घी न डालना, जिससे वह बीच में ही बुझ जाए, एक सामान्य भूल है।
  • पूजा में बासी या मुरझाए हुए फूलों का इस्तेमाल करना पूजा विधि को अधूरा कर देता है।
  • सूर्यास्त के बाद घर की सफाई करना या कूड़ा बाहर फेंकना पारंपरिक नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
  • पूजा के दौरान लाल या सुनहरे रंग के बजाय काले या बहुत गहरे रंग के कपड़े पहनना उचित नहीं माना जाता।

📿 मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

यह माँ लक्ष्मी का अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है, जो धन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए जपा जाता है।

कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करना पारंपरिक रूप से उचित माना गया है। प्रदोष काल में पूजा के दौरान, जब घी का दीपक और धूप जल रही हो, तब शांत मन से इसका जाप करें।

📖 दिवाली कथा

दिवाली के त्योहार से जुड़ी कई प्राचीन कथाएं हैं, जो इस दिन के महत्व को गहराई से समझाती हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की है। रामायण के अनुसार, जब भगवान राम ने लंकापति रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की, तो वे कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन अपनी नगरी अयोध्या वापस लौटे थे। उस दिन अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राजा के स्वागत में पूरे राज्य को घी के दीयों से रोशन कर दिया था। अमावस्या की वह घनी अंधेरी रात लाखों दीयों की रोशनी से जगमगा उठी थी। तब से लेकर आज तक, हम उसी परंपरा का पालन करते हुए अपने घरों को दीयों से सजाते हैं, ताकि हमारे जीवन से भी अज्ञान और दुखों का अंधकार दूर हो सके। दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा का कारण एक और पौराणिक कथा से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तो उसमें से कई अनमोल रत्न निकले थे। उसी समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन माँ लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। देवी लक्ष्मी को धन, वैभव, सौंदर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनके प्रकट होने पर सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की और उन्हें प्रसन्न किया। यही कारण है कि इस विशेष दिन पर माँ लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घर-घर में विशेष पूजा की जाती है। यह माना जाता है कि दिवाली की रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता, शांति और प्रकाश होता है, वहां वे निवास करती हैं। इसके साथ ही, भगवान गणेश जो कि बुद्धि के देवता हैं, उनकी पूजा इसलिए की जाती है ताकि माँ लक्ष्मी द्वारा दिया गया धन सही दिशा में और शुभ कार्यों में इस्तेमाल हो सके। यह कथा हमें सिखाती है कि बाहरी प्रकाश के साथ-साथ मन की शुद्धता भी बहुत आवश्यक है।

🪔 आरती

माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती पूजा के बिल्कुल अंत में की जाती है। जब आप सभी सामग्री, फूल, और भोग अर्पित कर लें, तब एक थाली में घी का दीपक या कपूर जलाकर पूरे परिवार के साथ खड़े होकर श्रद्धापूर्वक आरती करें। आरती गाते समय मन में शांति रखें और तालियों या घंटी की मधुर ध्वनि के साथ इसे संपन्न करें। आरती के बाद पूरे घर में दीपक का प्रकाश दिखाएं।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार दिवाली के उपाय

आर्थिक तंगी या पैसों की कमी (Money)

दिवाली का दिन दरिद्रता दूर करने के लिए विशेष है। पैसों की कमी से जूझ रहे हैं तो पूजा के समय माँ लक्ष्मी को चांदी के सिक्के और कमल का फूल अर्पित करें। यह शुक्र ग्रह को मजबूत करता है। पूजा के बाद इन सिक्कों को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर लाल कपड़े में बांधकर रख दें।

करियर या व्यापार में रुकावट (Career)

अगर आपके व्यापार या नौकरी में तरक्की नहीं हो रही है, तो दिवाली की रात भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी को खील-बताशे का भोग लगाएं। इसके बाद 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करते हुए अपने कार्यस्थल की चाबी या बहीखाते को पूजा की चौकी पर रखें। यह आपके काम में शुक्र की सकारात्मक ऊर्जा लाएगा।

विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में तनाव (Marriage)

शुक्र ग्रह को प्रेम और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। यदि विवाह में अड़चन आ रही है, तो दिवाली के दिन लाल और सुनहरे रंग के साफ कपड़े पहनें। पूजा के दौरान माँ लक्ष्मी को लाल गेंदे की माला अर्पित करें और उनसे अपने वैवाहिक जीवन में शांति और सुख की प्रार्थना करें।

संतान से जुड़ी चिंताएं (Children)

संतान की उन्नति या उनसे जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए दिवाली की शाम को बच्चों के हाथ से दान करवाएं। परंपरा के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या साफ कपड़े दान करने से लक्ष्मी दोष शांत होता है और परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

घर में अशांति या क्लेश (Home)

घर की शांति भंग हो गई है तो दिवाली के दिन पूरे घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। सूर्यास्त से पहले घर को शुद्ध करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं। रात भर एक घी का दीया जलाकर रखें और ध्यान रहे कि घर में कोई भी ऊंचे स्वर में बात न करे। यह नकारात्मकता को रोकता है।

नकारात्मक ऊर्जा या नजर दोष (Negativity)

अगर आपको लगता है कि घर में नकारात्मक ऊर्जा है, तो दिवाली के दिन घर के हर कोने में दीये जलाएं। शुक्र ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए घर में सुगंधित धूप जलाएं। यह वातावरण को पवित्र करता है और किसी भी तरह की दरिद्रता या नकारात्मकता को घर से बाहर निकालने में मदद करता है।

क्या दिवाली आपके लिए विशेष है?

दिवाली के इस पर्व पर माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और शुक्र ग्रह से जुड़े जो नियम यहाँ बताए गए हैं, वे सामान्य पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। यह समझना जरूरी है कि किसी भी ग्रह की स्थिति हर व्यक्ति पर एक जैसा प्रभाव नहीं डालती। शुक्र ग्रह का प्रभाव सभी के लिए एक है, लेकिन आपकी अपनी जन्म कुंडली में शुक्र किस भाव में है, यह केवल आपका व्यक्तिगत चार्ट देखकर ही जाना जा सकता है। यहीं त्रिकाल वाणी की व्यक्तिगत सेवाएं आपकी मदद करती हैं। यदि आप करियर, पैसे या जीवन की दशा के बारे में सटीक जानकारी चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग चुनें। विवाह और आपसी तालमेल के सवालों के लिए Kundali Milan की सुविधा है। हाथों की रेखाओं से भविष्य समझने के लिए Hastrekha विश्लेषण लें। यदि आपको अजीब सपने आते हैं, तो Swapna Shastra आपके सवालों के जवाब दे सकता है। एक सामान्य लेख जो नहीं बता सकता, वह आपकी अपनी कुंडली स्पष्ट बता सकती है।

भारत में दिवाली — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली 2026 में कब है और इसका क्या महत्व है?

साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह कार्तिक महीने की अमावस्या का दिन होता है, जिसे बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत के रूप में देखा जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

दिवाली की पूजा का सही मुहूर्त कैसे पता करें?

माँ लक्ष्मी की पूजा हमेशा प्रदोष काल यानी शाम के समय की जाती है, क्योंकि इसी समय अमावस्या तिथि का प्रभाव सबसे शुभ माना जाता है। आपके शहर के अनुसार सटीक पूजा का समय और मुहूर्त आप इस पेज पर ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं। त्रिकाल वाणी का इंजन आपके शहर के अक्षांश के अनुसार यह समय बताता है।

दिवाली के दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई और शुद्धिकरण करना चाहिए। शाम के समय लाल या सुनहरे रंग के साफ कपड़े पहनकर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा घर के हर कोने को दीयों से रोशन करना और जरूरतमंदों को दान देना बहुत शुभ माना जाता है।

दिवाली के दिन किन चीजों से बचना चाहिए?

इस दिन किसी से भी विवाद करने, क्रोध करने या कड़वे शब्द बोलने से पूरी तरह बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किसी को भी पैसे उधार नहीं देने चाहिए। इसके अलावा जुआ खेलना, फिजूलखर्ची करना और घर में गंदगी रखना भी पारंपरिक रूप से वर्जित है।

क्या दिवाली के दिन व्रत रखना जरूरी होता है?

दिवाली के दिन आमतौर पर कोई कठोर व्रत रखने की परंपरा नहीं है। ज्यादातर लोग इस दिन सात्विक आहार लेते हैं और शाम की पूजा संपन्न होने के बाद ही मुख्य भोजन ग्रहण करते हैं। यदि आप कोई व्रत संकल्प लेते हैं, तो अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

दिवाली के दिन खाने में क्या बनाना और खाना चाहिए?

इस दिन घर में पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी भोजन ही बनना चाहिए। आप पारंपरिक मिठाइयां, खीर, पूड़ी और अन्य सात्विक व्यंजन बना सकते हैं। किसी भी स्थिति में नॉन-वेज (मांसाहार) या शराब का सेवन इस पवित्र दिन पर नहीं करना चाहिए।

पूजा के लिए कौन सी सामग्री सबसे जरूरी है?

पूजा के लिए माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति, घी का दीपक, रुई की बत्ती और लाल या सुनहरा कपड़ा सबसे जरूरी है। इसके अलावा कमल के फूल, गेंदे की माला, खील-बताशे और चांदी के सिक्के भी पूजा में शामिल किए जाते हैं। यदि कोई सामग्री न मिले तो श्रद्धापूर्वक मानसिक पूजा भी की जा सकती है।

दिवाली क्यों मनाई जाती है, इसके पीछे की कथा क्या है?

सबसे प्रमुख कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काटकर और रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या को दीयों से सजाया गया था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन माँ लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।

माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?

माँ लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभता के देवता हैं। बिना बुद्धि के धन का सही उपयोग नहीं हो सकता और वह विनाश का कारण बन सकता है। इसलिए परंपरा कहती है कि धन के साथ सद्बुद्धि बनी रहे, इसके लिए दोनों की साथ पूजा अनिवार्य है।

क्या दिवाली के दिन नया काम या व्यापार शुरू कर सकते हैं?

हाँ, दिवाली का दिन किसी भी नए काम, व्यापार या निवेश की शुरुआत के लिए साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। कई व्यापारी इस दिन अपने नए बहीखाते (अकाउंट बुक्स) शुरू करते हैं। इसे चोपड़ा पूजन या मुहूर्त ट्रेडिंग भी कहा जाता है।

क्या दिवाली के दिन खरीदारी करना शुभ होता है?

दिवाली के दिन आप सामान्य खरीदारी कर सकते हैं, जैसे कपड़े, मिठाइयां या पूजा का सामान। हालांकि, सोना, चांदी, बर्तन या कोई बड़ा वाहन खरीदने के लिए धनतेरस का दिन ज्यादा पारंपरिक और शुभ माना जाता है। दिवाली का मुख्य जोर खरीदारी से ज्यादा पूजा और दीपदान पर होता है।

पूजा के समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

पूजा के दौरान 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम माना गया है। यह माँ लक्ष्मी का बीज मंत्र है जो शुक्र ग्रह की ऊर्जा और समृद्धि को आकर्षित करता है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार शांत मन से जाप करना चाहिए।

दिवाली पर दान करने का क्या महत्व है?

दिवाली के दिन जरूरतमंदों को भोजन, साफ कपड़े या मिठाइयां दान करना बहुत ही पुण्य का काम माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी दोष शांत होता है। दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

दरिद्रता दूर करने के लिए दिवाली पर क्या उपाय करें?

दरिद्रता दूर करने के लिए पूजा के समय माँ लक्ष्मी को कमल का फूल और चांदी के सिक्के अर्पित करें। पूजा के बाद एक घी का दीपक ऐसी जगह रखें जो रात भर सुरक्षित रूप से जलता रहे। साथ ही, घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सके।

क्या अलग-अलग शहरों में पूजा का समय अलग होता है?

हाँ, पूजा का मुहूर्त सूर्यास्त और प्रदोष काल पर निर्भर करता है, जो हर शहर के अक्षांश (latitude) के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए दिल्ली में पूजा का समय मुंबई या कोलकाता से थोड़ा अलग हो सकता है। आप अपने शहर का बिल्कुल सटीक समय इस पेज पर दी गई टेबल में देख सकते हैं।

दिवाली और छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) में क्या अंतर है?

छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं, दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती है और इसका संबंध भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से है। जबकि मुख्य दिवाली कार्तिक अमावस्या को होती है और यह माँ लक्ष्मी की पूजा और भगवान राम के अयोध्या लौटने का मुख्य पर्व है। दोनों के नियम और पूजा विधि अलग होते हैं।

रात भर दीपक जलाने का क्या कारण है?

पारंपरिक मान्यता है कि दिवाली की रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। रात भर जलने वाला दीपक उनके स्वागत और मार्ग को रोशन करने का प्रतीक है। यह घर से अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने का भी काम करता है।

पूजा के समय किस रंग के कपड़े पहनने चाहिए?

दिवाली की पूजा में लाल और सुनहरे (Red and Gold) रंग के कपड़े पहनना सबसे शुभ माना जाता है। ये रंग शुक्र ग्रह और माँ लक्ष्मी की ऊर्जा से जुड़े हैं। काले या बहुत गहरे और मलिन रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से बचना चाहिए।

दिवाली का शुक्र ग्रह से क्या संबंध है?

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को धन, वैभव, विलासिता, सौंदर्य और सुख का कारक माना गया है। माँ लक्ष्मी भी इन्हीं सब चीजों की देवी हैं। इसलिए दिवाली के दिन किए गए उपाय, साफ-सफाई और लाल-सुनहरे रंगों का उपयोग सीधे तौर पर आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह को बल देता है।

दिवाली से पहले घर की सफाई इतनी जरूरी क्यों है?

शास्त्रों में कहा गया है कि माँ लक्ष्मी का वास वहीं होता है जहाँ स्वच्छता, पवित्रता और सुगंध होती है। गंदगी और अव्यवस्था दरिद्रता (राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव) को आकर्षित करती है। इसलिए सूर्यास्त से पहले पूरे घर को साफ करके शुद्ध करना पूजा का सबसे पहला और जरूरी कदम है।

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