दुर्गा पूजा
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
इस साल दुर्गा पूजा 16 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन आश्विन शुक्ल षष्ठी यानी महा षष्ठी का है, जहाँ से मुख्य पूजा की शुरुआत होती है। पश्चिम बंगाल में इसे 'দুর্গা পুজো' (Durga Pujo) कहा जाता है। इस दिन कलश स्थापना (Ghatasthapana) कर माँ दुर्गा का आह्वान करना सबसे महत्वपूर्ण है।
🕐 भारत के लिए दुर्गा पूजा का समय
| तिथि | Shashthi (Shukla Paksha) — 05:54 (17 Oct) तक |
| नक्षत्र | Jyeshtha, पाद 4 — 06:47 तक |
| योग · करण | Shobhana · Kaulava |
| अभिजित मुहूर्त | 11:43-12:28 |
| राहुकाल | 10:41-12:06 |
| यमगंड · गुलिक | 14:56-16:21 · 07:51-09:16 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:26 · 17:46 |
भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
🌊 Durga Visarjan
| विसर्जन का दिन | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 |
| विसर्जन मुहूर्त | 13:12-15:27(अपराह्न) |
Immersion follows Vijayadashami, after sindoor khela on the morning of Dashami.
✅ दुर्गा पूजा पर क्या करें
- स्नान करके साफ और धुले हुए कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
- माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें।
- कलश स्थापना (Ghatasthapana) करें और उसमें शुद्ध जल भरें।
- माँ को ताजे फूल अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं।
- पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती करें और प्रसाद का भोग लगाएं।
- दिन भर मन में देवी का ध्यान करें और सकारात्मक रहें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
This is Navratri Day 6 under another name, so it takes that day. Day 6 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में दुर्गा पूजा का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| कोलकाता | 05:37 | 10:59-11:45 | 09:55-11:22 |
दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है
🪔 दुर्गा पूजा पूजा विधि
- Ghatasthapana (कलश स्थापना) — सबसे पहले मुहूर्त के अनुसार कलश स्थापना (Ghatasthapana) करें, जो माँ दुर्गा की उपस्थिति और ब्रह्मांड का प्रतीक है।
- संकल्प — हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूरे मन से पूजा का संकल्प लें।
- Pran Pratishtha (प्राण प्रतिष्ठा) — मूर्ति या तस्वीर में दिव्यता और ऊर्जा जगाने के लिए प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) की विधि संपन्न करें।
- स्नान और वस्त्र — माँ दुर्गा को पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं, फिर उन्हें लाल चुनरी और वस्त्र अर्पित करें।
- श्रृंगार — देवी को सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
- Pushpanjali (पुष्पांजलि) — माँ को ताजे लाल फूल अर्पित करते हुए पुष्पांजलि (Pushpanjali) दें और अपनी प्रार्थना कहें।
- नैवेद्य (भोग) — फल, मिठाई और घर में बने सात्विक भोजन का माँ को भोग लगाएं।
- Aarti (आरती) — दीपक, धूप और भक्ति गीतों के साथ पूरे परिवार के साथ माँ दुर्गा की आरती (Aarti) करें।
- क्षमा प्रार्थना — पूजा के अंत में अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माँ से क्षमा मांगें।
- Visarjan (विसर्जन) — दशमी के दिन (20 अक्टूबर 2026) सम्मानपूर्वक मूर्ति का विसर्जन (Visarjan) करें।
⚡ 5-मिनट विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।
- लाल फूल और जो भी ताजे फल घर में हों, उनका भोग लगाएं।
- सच्चे मन से देवी का ध्यान करें और दुर्गा आरती गाएं।
- काम पर या घर से बाहर निकलने से पहले माँ का आशीर्वाद लें।
🛒 दुर्गा पूजा पूजा सामग्री
आवश्यक
- माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर
- कलश
- लाल चुनरी
- ताजे फूल (विशेषकर लाल)
- रोली और कुमकुम
- अक्षत (साबुत चावल)
- देसी घी
- रुई की बत्ती
- धूप और अगरबत्ती
- फल और मिठाई
वैकल्पिक
- श्रृंगार का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां)
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी)
- पान के पत्ते और सुपारी
- नारियल
- कपूर
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- if ताजे फूल is unavailable, अक्षत (साबुत चावल) is traditionally accepted
- if कलश के लिए आम के पत्ते is unavailable, अशोक के पत्ते is traditionally accepted
- if मिठाई is unavailable, बताशे या गुड़ is traditionally accepted
- if लाल चुनरी is unavailable, कोई भी साफ लाल रंग का कपड़ा is traditionally accepted
🌙 दुर्गा पूजा व्रत विधि
व्रत कब शुरू करें: सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
क्या खा सकते हैं
- ताजे फल
- दूध और दूध से बनी चीजें
- कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
- साबूदाना
- सेंधा नमक
क्या नहीं खाना चाहिए
- अनाज (गेहूं, चावल)
- लहसुन और प्याज
- मांसाहार (Non-vegetarian food)
- शराब (Alcohol)
- साधारण नमक
पारण: व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद या अष्टमी/नवमी तिथि के समापन पर किया जाता है।
किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए।
यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
❓ दुर्गा पूजा: क्या करें और क्या न करें
क्या दुर्गा पूजा के दौरान बाल धो सकते हैं?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत वाले दिन बाल धोने से मना किया जाता है। आप व्रत शुरू होने से एक दिन पहले अपने बाल धो सकते हैं।
क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?
नहीं, नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान नाखून काटना वर्जित माना जाता है। इसे पूजा शुरू होने से पहले ही कर लेना चाहिए।
क्या व्रत में साधारण नमक खा सकते हैं?
व्रत में साधारण नमक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बजाय सेंधा नमक का उपयोग करना पूरी तरह से मान्य और पारंपरिक है।
क्या हम इस दौरान यात्रा कर सकते हैं?
हाँ, यात्रा करने में कोई मनाही नहीं है, लेकिन कोशिश करें कि आपकी पूजा का नियम न टूटे। आप सफर के दौरान मानसिक रूप से भी माँ का ध्यान कर सकते हैं।
क्या दुर्गा पूजा में नया काम शुरू कर सकते हैं?
यह समय किसी भी नए और शुभ काम को शुरू करने के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। माँ दुर्गा का आशीर्वाद लेकर आप नया व्यापार या काम शुरू कर सकते हैं।
क्या हम दुर्गा पूजा में शॉपिंग कर सकते हैं?
बिल्कुल, इस दौरान नए कपड़े और पूजा का सामान खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। लोग परिवार के लिए जमकर खरीदारी करते हैं।
क्या पूजा के बाद हम खाना खा सकते हैं?
यदि आपने व्रत रखा है, तो आप फलाहार कर सकते हैं। अगर व्रत नहीं रखा है, तो पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है।
क्या रात के समय पूजा की जा सकती है?
हाँ, शाम और रात के समय माँ की आरती और उपासना का विशेष महत्व है। बहुत से पंडालों में मुख्य आरती रात में ही होती है।
क्या दुर्गा विसर्जन उसी दिन होता है?
नहीं, विसर्जन (Bhasan / Bisarjan) 16 अक्टूबर को नहीं होता। विसर्जन हमेशा विजयदशमी के दिन होता है, जो इस बार 20 अक्टूबर 2026 को है।
क्या हम लहसुन-प्याज खा सकते हैं?
दुर्गा पूजा के दौरान लहसुन और प्याज पूरी तरह से वर्जित होते हैं। घर में केवल सात्विक भोजन ही बनाना और खाना चाहिए।
क्या महिलाएं सिंदूर खेला में हिस्सा ले सकती हैं?
हाँ, दशमी के दिन सुबह सिंदूर खेला की बहुत सुंदर परंपरा होती है। इसमें विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
क्या इस दिन मांसाहार या शराब का सेवन कर सकते हैं?
बिल्कुल नहीं। दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार और शराब का सेवन सख्त मना है। यह पूजा की पवित्रता को नष्ट करता है।
क्या हम दिन में सो सकते हैं?
व्रत रखने वालों को दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। खाली समय में देवी के मंत्रों का जाप या भजन करना चाहिए।
क्या पूजा में काले कपड़े पहन सकते हैं?
पारंपरिक रूप से पूजा में काले कपड़े पहनने से बचा जाता है। लाल, पीला या कोई भी चमकीला रंग पहनना शुभ माना जाता है।
✓ क्या करें
- Maintain cleanliness and purity.
- Offer fresh flowers daily.
- Chant Durga Mantras.
- Attend Aarti ceremonies.
- Practice selfless service.
✗ क्या न करें
- Avoid non-vegetarian food.
- Refrain from consuming alcohol.
- Do not speak ill.
- Avoid negative thoughts.
⚠️ आम गलतियाँ
- पूजा स्थल के आसपास गंदगी रखना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
- कलश स्थापना के बाद उसे उसकी जगह से हिलाना सही नहीं माना जाता।
- बासी या सूखे हुए फूल माँ दुर्गा को अर्पित करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
- आरती के बीच में उठकर चले जाना पूजा के क्रम को तोड़ता है।
- पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति बुरे विचार लाना अनुचित है।
- बिना स्नान किए या अशुद्ध कपड़ों में पूजा के बर्तन छूना वर्जित है।
- विसर्जन के दिन बिना पूरी विधि किए मूर्ति को जल में प्रवाहित कर देना सही नहीं है।
📖 दुर्गा पूजा कथा
🪔 आरती
माँ दुर्गा की आरती सुबह और शाम दोनों समय की जाती है। आरती के समय एक थाली में घी का दीपक, कपूर और धूप जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर तालियों और घंटियों की ध्वनि के बीच आरती गाएं। आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले माँ को आरती दिखाएं और फिर सभी लोग उसे ग्रहण करें। यह वह समय है जब घर का पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार दुर्गा पूजा के उपाय
money
चंद्रमा धन के प्रवाह और मन की स्थिरता का कारक है। अगर पैसे टिकते नहीं हैं, तो दुर्गा पूजा के दौरान माँ को सफेद फूल अर्पित करें और शाम के समय घी का दीपक जलाएं। यह पारंपरिक उपाय मन को शांत करता है जिससे आप बेहतर आर्थिक निर्णय ले पाते हैं और धन संचय में मदद मिलती है।
career
नौकरी या व्यापार में अस्थिरता अक्सर कमजोर चंद्रमा के कारण होती है। काम में स्थिरता लाने के लिए दुर्गा पूजा के दिनों में किसी जरूरतमंद को दूध या चावल का दान करें। माना जाता है कि इससे चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और करियर में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं।
marriage
अगर वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो इसका कारण भावनाओं (चंद्रमा) का असंतुलन हो सकता है। पति-पत्नी साथ मिलकर माँ दुर्गा की आरती करें और देवी को लाल चुनरी चढ़ाएं। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि इससे आपसी समझ बढ़ती है और रिश्ते में मधुरता आती है।
children
बच्चों का मन पढ़ाई में न लगना या उनका चिड़चिड़ापन चंद्रमा के प्रभाव से जुड़ा हो सकता है। दुर्गा पूजा के दौरान बच्चों के हाथ से माँ को ताजे फल अर्पित करवाएं। यह एक सरल उपाय है जो बच्चों के मन को एकाग्र करने और उनमें सकारात्मक ऊर्जा भरने के लिए जाना जाता है।
home
घर में कलह या अशांति का माहौल हो, तो दुर्गा पूजा के समय घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ जल से भरा एक-एक छोटा कलश रखें। चंद्रमा जल का प्रतिनिधित्व करता है। यह उपाय घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और परिवार में शांति का वातावरण बनाता है।
negativity
अगर आपको लगता है कि आप पर या आपके घर पर नकारात्मक विचारों का प्रभाव है, तो दुर्गा पूजा के दौरान शाम के समय कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं। चंद्रमा मन का स्वामी है, और कपूर की सुगंध से मन के डर दूर होते हैं। यह पारंपरिक रूप से घर को शुद्ध करने का अचूक तरीका है।
क्या दुर्गा पूजा आपके लिए विशेष है?
भारत में दुर्गा पूजा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दुर्गा पूजा 2026 में कब से शुरू हो रही है?
इस साल दुर्गा पूजा की मुख्य शुरुआत 16 अक्टूबर 2026 को हो रही है। यह आश्विन शुक्ल षष्ठी की तिथि है, जिसे महा षष्ठी भी कहा जाता है। इसी दिन कलश स्थापना और माँ का आह्वान किया जाता है, जो ऊपर दी गई टेबल में आपके शहर के अनुसार दिखाया गया है।
दुर्गा पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का शुभ मुहूर्त हर शहर के सूर्योदय और पंचांग के अनुसार बदलता रहता है। आप ऊपर दिए गए मुहूर्त सेक्शन में अपने शहर का सटीक समय देख सकते हैं। उसी समय के अनुसार कलश स्थापना और पूजा आरंभ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
इस दिन पूजा में सबसे महत्वपूर्ण काम क्या है?
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य कलश स्थापना (Ghatasthapana) और प्राण प्रतिष्ठा है। इसके जरिए माँ दुर्गा की उपस्थिति का आह्वान किया जाता है। साथ ही, ताजे फूल अर्पित करना और आरती करना भी इस पूजा का मुख्य हिस्सा है।
क्या दुर्गा पूजा के दौरान व्रत रखना जरूरी है?
व्रत रखना पूरी तरह से आपकी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। बहुत से लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहले और आठवें दिन व्रत करते हैं। यदि आप व्रत नहीं रख सकते, तो सात्विक भोजन खाकर भी पूजा कर सकते हैं।
व्रत के दौरान हम क्या खा सकते हैं?
व्रत में आप ताजे फल, दूध, साबूदाना, और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं। इसके अलावा सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है। यह आहार आपको ऊर्जा देता है और व्रत के नियमों का पालन भी करता है।
दुर्गा पूजा में किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
इस दौरान मांसाहार, शराब, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। इसके अलावा किसी की निंदा करना या मन में नकारात्मक विचार लाना भी गलत माना जाता है। पूजा के दिनों में घर और मन दोनों की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
पूजा की सामग्री में क्या-क्या होना चाहिए?
पूजा के लिए माँ दुर्गा की मूर्ति, कलश, लाल चुनरी, ताजे फूल, रोली, अक्षत, और धूप-दीप आवश्यक हैं। अगर कोई सामग्री न मिल पाए, तो आप मानसिक रूप से भी उसे अर्पित कर सकते हैं। श्रद्धा और भाव सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।
दुर्गा पूजा की कथा का मुख्य संदेश क्या है?
यह कथा महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय की कहानी है। इसका मुख्य संदेश यह है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सच्चाई और धर्म के आगे उसे हारना ही पड़ता है। यह हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने का साहस देती है।
दुर्गा पूजा का महत्व क्या है?
यह पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन चंद्रमा का प्रभाव होता है, जो मन को शांति और स्थिरता देता है। पश्चिम बंगाल में इसे 'দুর্গা পুজো' (Durga Pujo) के रूप में बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है।
क्या दुर्गा पूजा के दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?
हाँ, यह समय किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। चाहे वह नया व्यापार हो, नई नौकरी हो, या कोई महत्वपूर्ण खरीदारी, माँ दुर्गा का नाम लेकर आप इसे शुरू कर सकते हैं। यह सफलता के मार्ग खोलता है।
क्या हम इस दौरान शॉपिंग कर सकते हैं?
बिल्कुल, दुर्गा पूजा के दौरान नए कपड़े, गहने और घर का सामान खरीदना बहुत शुभ होता है। लोग इस समय अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए उपहार खरीदते हैं। यह उत्सव की खुशी को और भी बढ़ा देता है।
दुर्गा पूजा का कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
पारंपरिक रूप से माँ दुर्गा के कई मंत्र हैं, लेकिन इस पृष्ठ के तथ्यों में कोई विशेष मंत्र दर्ज नहीं है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार 'जय माता दी' या माँ के किसी भी सरल नाम का जाप कर सकते हैं। सच्ची श्रद्धा से लिया गया हर नाम मंत्र के समान ही फलदायी होता है।
दुर्गा पूजा के दौरान दान का क्या महत्व है?
इस पर्व में निस्वार्थ सेवा (selfless service) और दान का बहुत बड़ा महत्व है। आप अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को भोजन, कपड़े या धन का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे माँ दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में बरकत आती है।
दुर्गा विसर्जन (Bhasan) कब होता है?
दुर्गा विसर्जन 16 अक्टूबर को नहीं, बल्कि विजयदशमी के दिन होता है। इस साल विसर्जन 20 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। विसर्जन से पहले सुबह दशमी के दिन सिंदूर खेला की परंपरा निभाई जाती है।
दुर्गा पूजा और नवरात्रि में क्या अंतर है?
दोनों ही पर्व माँ दुर्गा को समर्पित हैं और एक ही समय पर आते हैं। नवरात्रि पूरे नौ दिनों तक चलती है जिसमें देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। जबकि दुर्गा पूजा मुख्य रूप से षष्ठी से शुरू होकर दशमी (विसर्जन) तक चलती है, जो पूर्वी भारत का मुख्य उत्सव है।
शहर के अनुसार पूजा के समय में क्यों अंतर होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है। इसलिए पंचांग की तिथियां और मुहूर्त भी शहरों के हिसाब से बदल जाते हैं। आप हमारे पेज पर जो समय देख रहे हैं, वह खास आपके शहर के लिए ही निकाला गया है।
क्या गर्भवती महिलाएं दुर्गा पूजा का व्रत रख सकती हैं?
पारंपरिक रूप से गर्भवती महिलाओं को कठोर व्रत न रखने की सलाह दी जाती है। वे बिना व्रत रखे भी पूजा में शामिल हो सकती हैं। यदि आप फिर भी व्रत रखना चाहती हैं, तो कृपया पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
अगर ताजे फूल न मिलें तो पूजा कैसे करें?
अगर किसी कारणवश ताजे फूल उपलब्ध न हों, तो चिंता की कोई बात नहीं है। आप अक्षत (साबुत चावल) को फूल मानकर माँ को अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा मानसिक रूप से फूल चढ़ाना भी शास्त्रों में पूरी तरह से मान्य है।
क्या हम दुर्गा पूजा में काले कपड़े पहन सकते हैं?
पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। लाल, पीला, हरा या कोई भी चमकीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। लाल रंग माँ दुर्गा को विशेष रूप से प्रिय है।
पुष्पांजलि (Pushpanjali) का क्या अर्थ है?
पुष्पांजलि का मतलब है अंजलि (दोनों हाथों को मिलाकर) में फूल लेकर देवता को अर्पित करना। दुर्गा पूजा में मंत्रों के साथ माँ को फूल अर्पित किए जाते हैं। यह देवी के प्रति हमारे सम्मान और समर्पण को दर्शाने का एक सुंदर तरीका है।
भारत में आने वाले त्योहार
- Raksha Bandhan 20262026-08-28
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Anant Chaturdashi 20262026-09-25
- Pitru Paksha 20262026-09-26
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
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