गुरुग्राम · Haryana

गुरुग्राम में राम नवमी

गुरुवार, 15 अप्रैल 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

साल 2027 में राम नवमी का पावन पर्व 15 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय के समय चैत्र शुक्ल नवमी तिथि, पुष्य नक्षत्र और धृति योग का शुभ संयोग रहेगा। इस दिन का मुख्य अनुष्ठान मध्याह्न के समय भगवान श्री राम की विधिवत पूजा करना, सात्विक उपवास रखना, रामायण के पावन अंशों का पाठ करना और जरूरतमंदों की सेवा करना है।

🕐 गुरुग्राम के लिए राम नवमी का समय

तिथिNavami (Shukla Paksha) — 13:21 तक
नक्षत्रPushya, पाद 4 — 09:33 तक
योग · करणDhriti · Kaulava
पूजा मुहूर्त11:05-13:38 (मध्याह्न)
अभिजित मुहूर्त11:56-12:47
राहुकाल13:57-15:32
यमगंड · गुलिक06:01-07:36 · 09:11-10:46
सूर्योदय · सूर्यास्त06:01 · 18:43

गुरुग्राम (28.4595, 77.0266) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ राम नवमी पर क्या करें

  1. सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें और एक सुंदर वेदी तैयार करें।
  2. वेदी पर भगवान श्री राम का चित्र अथवा मूर्ति आदरपूर्वक स्थापित करें।
  3. प्रभु को पीले या केसरिया वस्त्र, लाल फूल और ताजे तुलसी दल अर्पित करें।
  4. पंचामृत, ताजे फल, नारियल, पान और सुपारी का पावन भोग लगाएं।
  5. घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर शांत भाव से प्रार्थना करें।
  6. 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र या राम स्तुति का एकाग्र मन से पाठ करें।
  7. प्रभु की आरती करें और अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी जरूरतमंद की सहायता करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Navami pervades madhyahna kaal on one day only (89% of the window). Rama was born at madhyahna, so Chaitra Shukla Navami is judged at midday.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में राम नवमी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
गुरुग्राम06:0111:56-12:4713:57-15:32
दिल्ली एनसीआर06:0011:55-12:4613:56-15:31
मुंबई06:2512:13-13:0314:11-15:45
नोएडा05:5911:55-12:4513:55-15:31
बेंगलुरु06:1011:54-12:4313:51-15:23
हैदराबाद06:0411:51-12:4013:49-15:22
पुणे06:2112:09-12:5814:07-15:40
कोलकाता05:2011:11-12:0113:10-14:44
चेन्नई06:0011:44-12:3313:41-15:13
अहमदाबाद06:2312:14-13:0414:13-15:47

राम नवमी क्यों मनाया जाता है

राम नवमी सनातन परंपरा का अत्यंत पावन पर्व है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह पावन दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अवतरण का उत्सव है। वैदिक परंपरा में भगवान राम को केवल एक राजा या नायक के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मर्यादा के साक्षात स्वरूप के रूप में देखा गया है। उनका संपूर्ण जीवन हमें कर्तव्यनिष्ठा, मातृ-पितृ भक्ति, धैर्य और मानवीय संबंधों के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग दिखाता है। महर्षि पराशर ने वृहत्पाराशर होराशास्त्र में स्पष्ट कहा है कि भगवान श्री राम साक्षात पूर्ण अवतार हैं[2]। ज्योतिषीय दृष्टि से भगवान राम का सीधा संबंध सूर्य देव से माना गया है। पराशर शास्त्र में उन्हें सूर्य का दिव्य अवतार बताया गया है[3]। सूर्य हमारे आत्मबल, तेज, प्रतिष्ठा, पिता और प्रशासनिक क्षमता के कारक ग्रह हैं। इसलिए चैत्र शुक्ल नवमी के दिन की गई साधना से साधक के जीवन में सूर्य ग्रह को स्वाभाविक बल प्राप्त होता है। जिन जातकों को समाज में यश, कीर्ति और मान-सम्मान की चाह होती है, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। इस पावन तिथि का निर्धारण मध्याह्न काल की व्याप्ति से होता है। वाल्मीकि रामायण और स्मृति ग्रंथों के अनुसार भगवान राम का प्राकट्य दोपहर के समय ठीक मध्याह्न काल में हुआ था। जब चैत्र शुक्ल नवमी मध्याह्न के समय व्याप्त होती है, तभी यह व्रत और पूजन सबसे फलदायी माना जाता है। सूर्य के अपने सर्वोच्च तेज पर होने का समय ही मध्याह्न है, जो भगवान राम के सूर्यवंशीय तेज को भी रेखांकित करता है। इस समय की गई प्रार्थना सीधे अंतःकरण को प्रकाशित करती है। इस दिन घर-परिवार में सात्विक वातावरण बनाकर भगवान राम की आराधना की जाती है। परिवार के सदस्य साथ मिलकर रामायण की चौपाइयों का पाठ करते हैं और प्रभु के आदर्शों को अपने आचरण में उतारने का संकल्प लेते हैं। यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अहंकार और कटुता को त्यागकर सत्य और मर्यादा के पथ पर चलने की एक नई शुरुआत है। जब हम सच्चे मन से इस दिन प्रार्थना करते हैं, तो अंतःकरण में शांति और आत्मिक शक्ति का संचार होता है। इसके साथ ही यह दिन हमें दीन-दुखियों और जरूरतमंदों की सेवा करने की प्रेरणा देता है। भगवान राम का जीवन हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाने का संदेश देता है। इसलिए इस दिन पूजा और जप के साथ किसी भूखे को अन्न खिलाना या किसी असहाय की सहायता करना उपासना का अनिवार्य अंग माना जाता है। इस प्रकार यह पावन पर्व व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और आत्मिक शांति का सुंदर समन्वय स्थापित करता है।

🪔 राम नवमी पूजा विधि

  1. वेदी निर्माण — पूजा स्थल को स्वच्छ जल से धोकर साफ करें और लकड़ी की चौकी पर पीला अथवा केसरिया वस्त्र बिछाकर वेदी तैयार करें।
  2. मूर्ति स्थापना — वेदी के मध्य में भगवान श्री राम की सुंदर मूर्ति या चित्र ससम्मान स्थापित करें और गंगाजल या शुद्ध जल से प्रोक्षण करें।
  3. ध्यान व संकल्प — हाथ में थोड़ा जल और पुष्प लेकर प्रभु श्री राम का ध्यान करें और मन ही मन पूजा का सात्विक संकल्प लें।
  4. दीप व धूप प्रज्वलन — भगवान के सम्मुख गाय के घी का एक दीपक जलाएं और सुगंधित धूपबत्ती प्रज्वलित करके वातावरण को शुद्ध करें।
  5. पुष्प व तुलसी अर्पण — भगवान श्री राम को लाल रंग के प्रिय फूल और विशेष रूप से ताजे तुलसी दल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
  6. पंचामृत स्नान — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से भगवान का सांकेतिक स्नान कराएं अथवा भोग के रूप में अर्पित करें।
  7. नैवेद्य भोग — प्रभु को मौसमी फल, मिष्ठान्न, नारियल और पान-सुपारी का सात्विक भोग अत्यंत आदर के साथ लगाएं।
  8. मंत्र जाप — 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का तुलसी की माला से अथवा शांत बैठकर एकाग्र चित्त से जाप करें।
  9. स्तुति व पाठ — परिवार सहित बैठकर राम स्तुति का गायन करें अथवा रामायण के सुंदर अंशों का शांत मन से पठन करें।
  10. आरती व क्षमा याचना — कपूर अथवा घी के दीपक से भगवान की आरती उतारें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  11. सेवा व प्रसाद वितरण — पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद सभी में बांटें और अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. स्नान करके पूजा स्थल पर भगवान श्री राम का चित्र अथवा मूर्ति स्थापित करें।
  2. प्रभु के सामने घी का दीपक और सुगंधित धूपबत्ती जलाएं।
  3. भगवान राम को लाल फूल, तुलसी दल और थोड़ा पंचामृत या फल अर्पित करें।
  4. शांत भाव से 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का ग्यारह बार स्मरण करें।
  5. प्रभु से परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हुए हाथ जोड़कर नमन करें।

🛒 राम नवमी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • भगवान श्री राम की मूर्ति या चित्र
  • तुलसी दल
  • पंचामृत
  • लाल फूल
  • नारियल
  • पान और सुपारी
  • गाय का घी और दीपक
  • धूपबत्ती
  • ताजे फल
  • सात्विक मिष्ठान्न

वैकल्पिक

  • केसरिया अथवा पीला वस्त्र
  • रोली और अक्षत
  • चंदन
  • गंगाजल
  • हवन सामग्री
  • कपूर
  • पीला आसन

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि तुलसी दल उपलब्ध न हो, तो शुद्ध जल में दुर्वा या शुद्ध भाव से अक्षत पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि पंचामृत उपलब्ध न हो, तो गाय का कच्चा दूध या शुद्ध जल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि लाल फूल उपलब्ध न हो, तो कोई भी पीले या ताजे सुगंधित फूल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हैं।
  • यदि पान सुपारी उपलब्ध न हो, तो साबुत लौंग और इलायची पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि केसरिया वस्त्र उपलब्ध न हो, तो साफ पीला अथवा श्वेत सूती वस्त्र पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

🌙 राम नवमी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: राम नवमी का व्रत सूर्योदय के साथ आरंभ होता है। सुबह स्नान के पश्चात हाथ में जल लेकर दिनभर सात्विक रहने और प्रभु राम के स्मरण का संकल्प लिया जाता है।

क्या खा सकते हैं

  • ताजे मौसमी फल
  • गाय का ताजा दूध
  • दही और छाछ
  • सूखे मेवे (बादाम, काजू, किशमिश)
  • नारियल पानी
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का सात्विक फलाहार
  • सेंधा नमक (यदि फलाहार ले रहे हों)

क्या नहीं खाना चाहिए

  • मांसाहारी भोजन
  • शराब और किसी भी प्रकार का नशा
  • लहसुन और प्याज
  • साधारण अनाज (गेहूं, चावल, दालें)
  • सफेद नमक
  • क्रोध, कटु वचन और वाद-विवाद
  • नकारात्मक विचार

पारण: व्रत का पारण नवमी तिथि के समापन के बाद अथवा अगले दिन सूर्योदय के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करके किया जाता है। कई परिवारों में मध्याह्न पूजा और आरती के बाद सात्विक फलाहार लेकर व्रत को पूर्ण माना जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, अत्यधिक वृद्धजन और किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति पारंपरिक रूप से यह कठोर उपवास नहीं रखते हैं।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी नियमित दवा का सेवन कर रहे हैं, तो उपवास रखने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

❓ राम नवमी: क्या करें और क्या न करें

क्या राम नवमी के दिन बाल धो सकते हैं?

हाँ, इस दिन सुबह स्नान करते समय सामान्य रूप से बाल धोए जा सकते हैं। पारंपरिक रूप से पूजा या व्रत से पहले सिर से स्नान करना शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

क्या इस दिन नाखून या बाल कटवा सकते हैं?

इस पावन पर्व पर बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं में व्रत और बड़े त्योहारों के दिन शरीर के बाल या नाखून काटना वर्जित माना जाता है।

क्या व्रत में साधारण नमक खा सकते हैं?

नहीं, उपवास के दौरान साधारण सफेद नमक का सेवन नहीं किया जाता है। यदि आप फलाहार ले रहे हैं और नमक की आवश्यकता है, तो केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।

क्या राम नवमी के दिन यात्रा कर सकते हैं?

यदि कोई आकस्मिक या बहुत आवश्यक कार्य हो तो यात्रा की जा सकती है। हालांकि, यह दिन प्रभु के भजन और घर पर पूजा-अर्चना के लिए समर्पित रखने की परंपरा है।

क्या इस दिन नया व्यापार या नया काम शुरू कर सकते हैं?

हाँ, राम नवमी को अत्यंत शुभ दिन माना जाता है और नए सात्विक कार्य शुरू करने के लिए यह बहुत उत्तम है। किसी भी नए उद्यम की शुरुआत प्रभु का आशीर्वाद लेकर की जा सकती है।

क्या इस पावन दिन पर नई खरीदारी कर सकते हैं?

हाँ, इस दिन धार्मिक सामग्री, वाहन, वस्त्र या घर के उपयोगी सामान की खरीदारी करना पारंपरिक रूप से शुभ माना गया है। बस खरीदारी में सात्विकता और मर्यादा का ध्यान रखें।

क्या मध्याह्न पूजा के तुरंत बाद भोजन खा सकते हैं?

यदि आपने निराहार या केवल फलाहार व्रत का संकल्प लिया है, तो पूरा दिन व्रत के नियमों का पालन करें। जो लोग केवल पूजा करते हैं और उपवास नहीं रखते, वे दोपहर की आरती और प्रसाद के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं।

क्या राम नवमी की मुख्य पूजा रात में करनी चाहिए?

नहीं, भगवान राम का प्राकट्य दोपहर मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा दोपहर में ही की जाती है। रात के समय आप भजन, कीर्तन या रामायण का पाठ कर सकते हैं।

क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान यह व्रत रख सकती हैं?

शारीरिक अस्वस्थता या मासिक धर्म के दिनों में महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पूजा सामग्री को स्पर्श नहीं करती हैं। वे केवल मानसिक रूप से मंत्र का स्मरण कर सकती हैं और उपवास का निर्णय अपने स्वास्थ्य के अनुसार ले सकती हैं।

क्या घर में कलह या बहस होने से पूजा का फल कम होता है?

हाँ, इस दिन मन को शांत रखना और किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से दूर रहना आवश्यक है। कटु वचन बोलने और क्रोध करने से व्रत की सात्विकता और साधना खंडित मानी जाती है।

क्या इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़े जा सकते हैं?

तुलसी दल पूजा के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसे नवमी की सुबह स्नान के बाद शुद्ध भाव से ही तोड़ना चाहिए। यदि संभव हो तो पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

क्या इस दिन लहसुन और प्याज का भोजन बन सकता है?

नहीं, राम नवमी के पूरे दिन घर की रसोई में लहसुन, प्याज या किसी भी तामसिक भोजन का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होता है। घर के सभी सदस्यों को सात्विक और शुद्ध भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

क्या इस दिन जरूरतमंदों को दान देना आवश्यक है?

हाँ, भगवान राम की पूजा सेवा और त्याग के बिना अधूरी मानी जाती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार भूखों को भोजन या जरूरतमंदों को वस्त्र देना इस पर्व का मुख्य अंग है।

✓ क्या करें

  • Observe a fast.
  • Chant Ram mantras.
  • Offer prayers sincerely.
  • Read Ramayana excerpts.
  • Help those in need.

✗ क्या न करें

  • Avoid non-vegetarian food.
  • Do not consume alcohol.
  • Refrain from negative thoughts.
  • Do not engage in arguments.

⚠️ आम गलतियाँ

  • भगवान राम की पूजा में तुलसी दल अर्पित न करने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • मध्याह्न काल के मुख्य समय को छोड़कर केवल शाम को पूजा करने से पूजन विधि अपूर्ण रह जाती है।
  • पूजा के समय मन में क्रोध, ईर्ष्या या कटु विचार रखने से व्रत का आध्यात्मिक फल प्राप्त नहीं होता।
  • भगवान को भोग लगाते समय बिना स्नान किए या अशुद्ध वस्त्रों में नैवेद्य तैयार करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • रामायण के पावन अंशों का श्रवण या पाठ किए बिना केवल औपचारिकता से पूजा समाप्त कर देना अधूरा माना जाता है।
  • अपनी सामर्थ्य होने पर भी किसी भूखे या जरूरतमंद की उपेक्षा करने से इस दिन की सेवा साधना अपूर्ण रह जाती है।
  • मंत्र जाप करते समय ध्यान को स्थिर न रखने और जल्दबाजी में संख्या पूरी करने से मानसिक शांति का उद्देश्य अधूरा रहता है।

📿 मंत्र

ॐ श्री राम जय राम जय जय राम

इस पावन मंत्र का अर्थ है कि मैं समस्त जगत के आधार, सर्वव्यापी और परम कल्याणकारी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की बारंबार जयकार करता हूँ और उन्हें नमन करता हूँ। यह मंत्र मन को एकाग्र करता है और अंतःकरण में सात्विक ऊर्जा भरता है।

108 बार (एक माला) पूजा के समय धूप और दीप प्रज्वलित करने के बाद, शांत बैठकर

📖 राम नवमी कथा

त्रेतायुग में अयोध्या के प्रतापी सूर्यवंशी राजा दशरथ के कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा दशरथ और उनकी तीनों रानियां—कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा अत्यंत दुखी रहते थे। राज्य में सब कुछ होते हुए भी उत्तराधिकारी के अभाव में राजमहल में उदासी छाई रहती थी। तब राजा दशरथ ने अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी से अपना दुख व्यक्त किया। महर्षि वशिष्ठ के परामर्श पर महर्षि ऋष्यश्रृंग के पावन मार्गदर्शन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ का भव्य आयोजन सरयू तट पर किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति पर यज्ञ कुंड से साक्षात अग्निदेव प्रकट हुए। उनके हाथों में दिव्य खीर से भरा एक सुवर्ण पात्र था। उन्होंने राजा दशरथ को वह खीर अपनी रानियों में बांटने का आदेश दिया। राजा दशरथ ने उस दिव्य हविष्य का आधा भाग महारानी कौशल्या को दिया और शेष आधा भाग कैकेयी और सुमित्रा में प्रेमपूर्वक वितरित कर दिया। उस पावन प्रसाद के दिव्य प्रभाव से तीनों रानियां गर्भवती हुईं और संपूर्ण अयोध्या में आशा की नई किरण फैल गई। इसके उपरांत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ठीक दोपहर मध्याह्न काल में संपूर्ण प्रकृति में एक अलौकिक परिवर्तन दिखाई देने लगा। आकाश में शुभ ग्रह और नक्षत्र उदित हुए और मंद-मंद सुगंधित वायु बहने लगी। उसी पावन घड़ी में महारानी कौशल्या की कोख से साक्षात परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का प्राकट्य हुआ। इसके साथ ही रानी कैकेयी ने भरत को और सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान राम के जन्म लेते ही संपूर्ण अयोध्या नगरी असीम आनंद और उत्सव में डूब गई। गंधर्व मधुर गान करने लगे, अप्सराएं नृत्य करने लगीं और देवताओं ने आकाश से मंदार पुष्पों की वर्षा की। अयोध्या की गलियों में सोहर गाए गए, गरीबों और याचकों को अन्न व वस्त्र बांटे गए और घर-घर दीप जलाए गए। चारों दिशाओं में प्रभु की जय-जयकार होने लगी। तभी से चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम के अवतरण दिवस के रूप में श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से मनाया जाता है।

🪔 आरती

भगवान श्री राम की आरती मध्याह्न पूजा के अंत में, जब मंत्र जाप और स्तुति का पाठ पूर्ण हो जाए, तब अत्यंत श्रद्धापूर्वक की जाती है। आरती की थाली में गाय के घी का एक मुखी दीपक अथवा शुद्ध कपूर रखें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर शंख, घंटा और घड़ियाल की मधुर ध्वनि के साथ आरती करें। आरती को भगवान के श्री चरणों से आरंभ करके मुखमंडल तक घुमाएं, और अंत में सभी लोग दोनों हाथों से आरती की पवित्र लौ का स्पर्श लेकर आशीर्वाद ग्रहण करें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार राम नवमी के उपाय

धन संबंधी रुकावट

सुबह स्नान के बाद भगवान राम को एक लाल पुष्प और तुलसी दल अर्पित करके 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' का शांत भाव से जाप करें। कब: राम नवमी के दिन सुबह स्नान के तुरंत बाद। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 21 दिन। आपके लिए क्यों: सूर्य देव के मजबूत होने से कार्यक्षेत्र में स्थिरता आती है और धन के रास्ते की बाधाएं दूर होती हैं।

करियर में पदोन्नति और सम्मान की कमी

तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़ा सा कुमकुम मिलाकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें और भगवान राम का ध्यान करें। कब: राम नवमी की सुबह सूर्योदय के समय। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 40 दिन। आपके लिए क्यों: भगवान राम सूर्य के अवतार हैं और सूर्य का बल बढ़ने से कार्यक्षेत्र में यश, प्रतिष्ठा और अधिकार की प्राप्ति होती है।

विवाह में अनावश्यक देरी

पूजा के समय भगवान श्री राम को केसरिया या पीला वस्त्र अर्पित करें और दांपत्य सुख की प्रार्थना करें। कब: राम नवमी के दिन दोपहर मध्याह्न पूजा के समय। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 11 दिन। आपके लिए क्यों: भगवान राम की कृपा और सूर्य के प्रभाव से जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है तथा विवाह मार्ग की अड़चनें शांत होती हैं।

संतान के स्वास्थ्य या शिक्षा में चिंता

भगवान राम को पंचामृत का भोग लगाएं और उस पंचामृत को संतान को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कराएं। कब: राम नवमी की दोपहर आरती के तुरंत बाद। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 7 दिन। आपके लिए क्यों: मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सात्विक ऊर्जा परिवार में सकारात्मक संस्कारों और संतान के आत्मविश्वास को बल देती है।

पारिवारिक कलह और अशांति

घर के ईशान कोण में गाय के घी का एक दीपक जलाएं और परिवार सहित बैठकर राम स्तुति का शांत पाठ करें। कब: राम नवमी की संध्या के समय। खर्च: ₹10–20. कितने दिन: 9 दिन। आपके लिए क्यों: सूर्य के सात्विक तेज से घर का वातावरण शुद्ध होता है और आपसी रिश्तों में समझ तथा सम्मान बढ़ता है।

मानसिक तनाव और नकारात्मक विचार

प्रतिदिन सुबह भगवान राम के चित्र के सामने बैठकर 108 बार उनके पावन नाम मंत्र का एकाग्र चित्त से जाप करें। कब: राम नवमी के दिन सुबह पूजा के बाद। खर्च: निःशुल्क। कितने दिन: 21 दिन। आपके लिए क्यों: सूर्य आत्मकारक ग्रह है और राम नाम के जाप से आत्मबल मजबूत होता है तथा नकारात्मक विचार शांत होते हैं।

क्या राम नवमी आपके लिए विशेष है?

त्योहार के ये सामान्य नियम और उपाय परंपरा पर आधारित हैं और सभी के लिए एक जैसा मार्गदर्शन देते हैं। किंतु ज्योतिष का एक गहरा सत्य यह भी है कि सूर्य अथवा अन्य किसी ग्रह का सामान्य प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन में एक समान नहीं होता। आपकी जन्म कुंडली में सूर्य किस भाव में बैठा है, उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है और वर्तमान में आपकी कौन सी दशा चल रही है—यह केवल आपकी व्यक्तिगत जन्मपत्रिका देखकर ही जाना जा सकता है। त्रिकाल वाणी में रोहीत गुप्ता आपकी व्यक्तिगत समस्याओं का प्रामाणिक विश्लेषण करते हैं। यदि आप करियर, आर्थिक स्थिति या ग्रहों की दशा को लेकर चिंतित हैं, तो विस्तृत 'कुंडली' परामर्श आपके लिए उपयुक्त है। वैवाहिक तालमेल और भावी जीवनसाथी के स्वभाव को समझने के लिए 'कुंडली मिलान' मार्ग दिखाता है। जन्म समय अज्ञात होने पर 'हस्तरेखा' विश्लेषण हाथ की रेखाओं से स्थिति स्पष्ट करता है, और अकारण आने वाले गहरे सपनों का संकेत 'स्वप्न शास्त्र' परामर्श से समझा जा सकता है।

शब्दावली · Glossary

तिथि
चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर पर आधारित वैदिक पंचांग का दिन।
मध्याह्न काल
दिन का वह मध्य भाग जब सूर्य अपने उच्चतम बिंदु पर होता है, जिसमें प्रभु राम का जन्म हुआ था।
पारण
किसी धार्मिक उपवास या व्रत को विधिवत सात्विक आहार लेकर पूर्ण करने की क्रिया।
पुष्य नक्षत्र
वैदिक ज्योतिष में अत्यंत पवित्र माना जाने वाला नक्षत्र, जिसे सभी नक्षत्रों का राजा कहा जाता है।
धृति योग
पंचांग के सत्ताईस योगों में से एक शुभ योग, जो स्थिरता, धैर्य और संकल्प शक्ति का प्रतीक है।
तारक मंत्र
वह पावन मंत्र जो साधक को संसार के भय और बंधनों से पार कराकर आत्मिक शांति प्रदान करता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑उत्तर कालामृतउत्तरकालामृतम् · Kalidasa
    वर्षादिप्रतिपन्नवेधसहिता ग्राह्या रघूणां पतेः मध्याह्नं नवमीतिथौ भगवती जन्माभवत्सा तिथिः। साक्षान्मोक्षविधायिनी व्रतवृतां श्रीरामपूजायुजां त्याज्या पूर्वदिनान्त्यवेधसहिता ह्यादित्यभेनोत्तमा ॥३८॥
    — उत्तर कालामृत, अध्याय 9 — कर्मकाण्ड खण्ड · श्लोक 38

    भगवान श्री राम का जन्म नवमी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए वही तिथि पूजा के लिए ग्राह्य है।

    Lord Rama was born at midday on Navami tithi, making that sacred tithi the one to be observed.

  2. [2]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    रामः कृष्णश्च भो विप्र नृसिंहः सूकरस्तथा । एते पूर्णावताराश्च ह्यन्ये जीवांशकान्विताः
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 2 · श्लोक 2

    पराशर शास्त्र में भगवान राम, कृष्ण, नृसिंह और वराह को पूर्ण अवतार कहा गया है।

    Parashara states that Rama, Krishna, Narasimha, and Varaha are the complete incarnations of the Divine.

  3. [3]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    रामोऽवतारः सूर्यस्य चन्द्रस्य यदुनायकः । नृसिंहो भूमिपुत्रस्य बुद्धः सोमसुतस्य च
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 2 · श्लोक 5

    महर्षि पराशर के अनुसार भगवान श्री राम सूर्य देव के पूर्णावतार हैं।

    Maharishi Parashara declares that Lord Rama is the divine incarnation of the Sun.

गुरुग्राम में राम नवमी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में राम नवमी कब है और किस दिन पड़ रही है?

साल 2027 में राम नवमी का पावन पर्व 15 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी, जो कि भगवान श्री राम के प्राकट्य का पावन दिन है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु के स्वरूपों की पूजा के लिए ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पूरे देश के मंदिरों और घरों में विशेष उत्सव और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

राम नवमी की मुख्य पूजा का समय किस पहर में होता है?

राम नवमी की मुख्य पूजा दोपहर के समय मध्याह्न काल में की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री राम का जन्म ठीक दोपहर के समय हुआ था, इसलिए इसी समय उनकी विशेष अर्चना की जाती है। आप अपने शहर के अनुसार ऊपर दी गई तालिका में मध्याह्न का शुभ मुहूर्त देख सकते हैं। इसी अवधि में भगवान का अभिषेक, भोग और आरती करना सबसे उत्तम माना जाता है।

राम नवमी के दिन का पंचांग क्या संकेत दे रहा है?

वर्ष 2027 में 15 अप्रैल को सूर्योदय के समय नवमी तिथि, पुष्य नक्षत्र और धृति योग का सुंदर योग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना गया है, जो किसी भी धार्मिक कार्य के लिए अत्यंत कल्याणकारी होता है। धृति योग व्यक्ति के कार्यों में स्थिरता और धैर्य का संचार करने वाला माना गया है। यह पंचांग त्रिकाल वाणी ज्योतिष गणना के अनुसार निर्धारित किया गया है।

क्या अलग-अलग शहरों में राम नवमी की पूजा के समय में अंतर होता है?

हाँ, प्रत्येक शहर में सूर्योदय और दोपहर के स्थानीय समय में कुछ मिनटों का अंतर अवश्य होता है। मध्याह्न काल की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है। इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या बेंगलुरु जैसे अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में थोड़ा फेरबदल दिखता है। अपने नगर का सही समय जानने के लिए इस पृष्ठ पर दी गई तालिका का उपयोग करें।

राम नवमी के दिन कौन से मुख्य धार्मिक कार्य करने चाहिए?

इस पावन दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान श्री राम की विधिवत पूजा करें और उनके दिव्य मंत्रों का शांत भाव से जाप करें। परिवार के साथ बैठकर रामायण या रामचरितमानस के सुंदर अंशों का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। दिन के अंत में किसी जरूरतमंद या भूखे व्यक्ति को भोजन या दान देकर सेवा अवश्य करनी चाहिए।

इस पावन दिन पर किन बातों से पूरी तरह बचना चाहिए?

राम नवमी के दिन तामसिक भोजन जैसे मांसाहार, अंडा, लहसुन और प्याज से पूरी तरह परहेज करना आवश्यक है। इस दिन घर में किसी भी प्रकार का नशा या मदिरापान वर्जित माना जाता है। अपने मन में दूसरों के प्रति द्वेष, ईर्ष्या या कटु विचार न आने दें। घर-परिवार में किसी भी तरह के वाद-विवाद और क्रोध से बचना चाहिए ताकि व्रत की सात्विकता बनी रहे।

राम नवमी का उपवास कैसे रखा जाता है और क्या यह निर्जला होता है?

राम नवमी का व्रत सामान्यतः फलाहारी उपवास के रूप में रखा जाता है। श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार केवल जल पर, दूध-फल पर या एक समय फलाहार लेकर व्रत रखते हैं। इस व्रत में दिनभर अन्न और साधारण नमक का त्याग करना अनिवार्य होता है। यदि आपका शरीर अनुमति दे तभी निर्जला व्रत करें, अन्यथा सात्विक फलाहार लेना ही सबसे उत्तम मार्ग है।

राम नवमी के उपवास में क्या-क्या खाया जा सकता है?

उपवास के दौरान आप ताजे मौसमी फल जैसे सेब, केला, संतरा और अनार खा सकते हैं। इसके अलावा गाय का ताजा दूध, दही, छाछ, नारियल पानी और मखाने का सेवन किया जा सकता है। फलाहार के रूप में सिंघाड़े या कुट्टू के आटे से बने व्यंजन लिए जा सकते हैं। भोजन में केवल सेंधा नमक और काली मिर्च का ही सीमित उपयोग करना चाहिए।

राम नवमी व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

राम नवमी के व्रत का पारण नवमी तिथि समाप्त होने के बाद या अगले दिन सूर्योदय के पश्चात किया जाता है। कई स्थानों पर दोपहर की मुख्य पूजा और आरती के बाद भगवान को अर्पित फल व पंचामृत लेकर फलाहार शुरू कर दिया जाता है। पूर्ण पारण करते समय पहले भगवान को धन्यवाद दें और किसी जरूरतमंद को दान दें। इसके बाद ही घर में बना सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें।

पूजा के लिए सबसे आवश्यक सामग्री कौन सी है?

पूजा के लिए भगवान श्री राम का सुंदर चित्र या मूर्ति और एक साफ वेदी सबसे आवश्यक है। पूजन सामग्री में ताजे तुलसी दल, लाल फूल, पंचामृत, नारियल, पान और सुपारी अनिवार्य रूप से होने चाहिए। इसके साथ ही गाय के घी का दीपक, सुगंधित धूपबत्ती और मौसमी फल तैयार रखें। यदि इनमें से कोई वस्तु कम हो, तो सच्चे भाव से शुद्ध जल अर्पित करना भी शास्त्रसम्मत है।

राम नवमी का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व क्या है?

यह पर्व धर्म की स्थापना और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्री राम का जीवन मर्यादा, संयम, पितृभक्ति और प्रजा के प्रति निःस्वार्थ प्रेम की सर्वोत्तम मिसाल है। यह पावन दिन हमें याद दिलाता है कि विषम परिस्थितियों में भी अपने नैतिक मूल्यों का त्याग नहीं करना चाहिए। इस दिन की गई साधना से अंतःकरण पवित्र होता है और व्यक्ति के भीतर नैतिक बल का संचार होता है।

ज्योतिष में राम नवमी का संबंध किस ग्रह से माना गया है?

वैदिक ज्योतिष के ग्रंथ बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अनुसार भगवान श्री राम सूर्य देव के पूर्ण अवतार हैं। सूर्य हमारे आत्मबल, यश, मान-प्रतिष्ठा, पिता और नेतृत्व क्षमता के प्राकृतिक कारक ग्रह हैं। राम नवमी के दिन भगवान राम की निष्ठापूर्वक पूजा करने से कुंडली में सूर्य का शुभ प्रभाव बढ़ता है। जिन जातकों के जीवन में सम्मान या करियर में बाधाएं आ रही हों, उनके लिए यह साधना विशेष लाभकारी होती है।

क्या राम नवमी के पावन दिन कोई नया कार्य शुरू कर सकते हैं?

हाँ, राम नवमी को सनातन परंपरा में एक अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि माना गया है। इस दिन नया व्यवसाय शुरू करना, नया अनुबंध करना या विद्या आरंभ करना बहुत फलदायी माना जाता है। प्रभु श्री राम का स्मरण करके शुरू किया गया कोई भी सात्विक कार्य सफलता की ओर अग्रसर होता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि शुरू किया जाने वाला कार्य समाज और धर्म के अनुकूल हो।

क्या इस पावन तिथि पर सोना, वाहन या मकान की खरीदारी की जा सकती है?

राम नवमी के दिन नए वाहन, आभूषण, भूमि अथवा गृह-प्रवेश की खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किया गया निवेश परिवार में स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है। खरीदारी करने से पहले और बाद में भगवान राम के चरणों में कृतज्ञता अवश्य व्यक्त करें। किसी भी बड़ी खरीदारी के समय मन में सात्विकता और प्रभु के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए।

राम नवमी के दिन किस मंत्र का जाप करना सबसे कल्याणकारी है?

इस दिन 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम और सरल माना गया है। यह महामंत्र तारक मंत्र की तरह कार्य करता है और मन के सभी भयों को शांत करता है। इस मंत्र का जाप तुलसी की माला पर 108 बार शांत बैठकर करना चाहिए। यदि माला उपलब्ध न हो तो मन ही मन इस पावन नाम का स्मरण करते रहना भी पूर्ण फलदायी है।

भगवान राम के जन्म की पौराणिक कथा संक्षेप में क्या है?

त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी थे, तब उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था। यज्ञ के फलस्वरुप अग्निदेव ने दिव्य खीर प्रदान की, जिसे राजा ने अपनी रानियों में बांट दिया। इसके बाद चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को दोपहर के समय महारानी कौशल्या के गर्भ से भगवान राम का जन्म हुआ। प्रभु के प्राकट्य से समस्त अयोध्या में उत्सव छा गया और देवताओं ने फूलों की वर्षा की।

राम नवमी के दिन दान का क्या महत्व है और क्या दान करना चाहिए?

भगवान श्री राम का चरित्र त्याग और लोक-कल्याण का अनुपम उदाहरण है, इसलिए इस दिन दान का भारी महत्व है। आप किसी गरीब या भूखे व्यक्ति को अन्न, फल, शुद्ध जल या वस्त्र का दान कर सकते हैं। मंदिर में जाकर गाय के लिए चारा या सेवा कार्य करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और अपनी वास्तविक सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।

सूर्य को बली करने और मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस दिन क्या उपाय करें?

सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, रोली और अक्षत डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। इसके पश्चात भगवान राम के सामने घी का दीपक जलाकर 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र का जाप करें। यह सरल उपाय व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, तेज और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाने में मदद करता है। यह अनुष्ठान राम नवमी से आरंभ करके नियमित रूप से इक्कीस दिनों तक किया जा सकता है।

राम नवमी और नवरात्रि की नवमी (महानवमी) में क्या अंतर है?

कई लोग चैत्र नवरात्रि की नवमी और राम नवमी को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। वस्तुतः चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन ही शक्ति स्वरूपा मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जिसे महानवमी कहा जाता है। उसी नवमी तिथि के दोपहर मध्याह्न काल में भगवान श्री राम का जन्म होने के कारण इसे राम नवमी कहा जाता है। अतः सुबह देवी की आराधना और दोपहर में भगवान राम का जन्मोत्सव—दोनों एक ही पावन तिथि के दो दिव्य पहलू हैं।

क्या बीमार, वृद्ध या गर्भवती महिलाएं यह उपवास रख सकती हैं?

सनातन परंपरा में स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा को हमेशा किसी भी व्रत के नियमों से ऊपर रखा गया है। यदि आप गर्भवती हैं, वृद्ध हैं या किसी बीमारी की नियमित दवा ले रहे हैं, तो भूखे रहकर व्रत न रखें। ऐसे लोग केवल मानसिक रूप से भगवान राम का स्मरण करें और सात्विक आहार ग्रहण करें। किसी भी प्रकार का उपवास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।

गुरुग्राम में आने वाले त्योहार

और देखें

Free Vedic Calculators

Curious what this means for YOUR chart? Try these free tools — no signup: