हरतालिका तीज

रविवार, 13 सितंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस साल हरतालिका तीज 13 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया को होता है और इसे मुख्य रूप से महिलाएं निर्जला रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पेज पर दिए गए मुहूर्त के अनुसार पूजा करें और व्रत कथा जरूर सुनें।

🕐 भारत के लिए हरतालिका तीज का समय

तिथिDwitiya (Shukla Paksha)07:08 तक
नक्षत्रHasta, पाद 313:07 तक
योग · करणShukla · Kaulava
पूजा मुहूर्त06:08-08:35(प्रातः)
अभिजित मुहूर्त11:51-12:41
राहुकाल16:52-18:25
यमगंड · गुलिक12:16-13:48 · 15:20-16:52
सूर्योदय · सूर्यास्त06:08 · 18:25

भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

हरतालिका तीज पर क्या करें

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नए या साफ कपड़े पहनें।
  2. भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियां बनाएं।
  3. पूजा की थाली में फूल, फल, मिठाई और पवित्र धागे सजाएं।
  4. टेबल में दिए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा शुरू करें।
  5. पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करें।
  6. भगवान की आरती उतारें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
  7. पूरे दिन और रात बिना पानी पिए (निर्जला) व्रत का पालन करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Tritiya pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). The Calendar Reform Committee marks Haritalika vrata paraviddha, so when Bhadrapada Shukla Tritiya qualifies on two days the later is taken. The tithi test alone placed this on or after 2026-09-14; Hartalika Teej is the Tritiya immediately preceding Ganesh Chaturthi. Bound to 2026-09-13.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में हरतालिका तीज का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:0811:51-12:4116:52-18:25
मुंबई06:2912:09-12:5817:07-18:39
नोएडा06:0811:51-12:4016:52-18:24
गुरुग्राम06:0911:52-12:4116:53-18:25
बेंगलुरु06:1211:50-12:3916:47-18:18
हैदराबाद06:0711:47-12:3516:44-18:16
पुणे06:2512:05-12:5417:03-18:35
कोलकाता05:2611:07-11:5616:06-17:38
चेन्नई06:0111:40-12:2816:37-18:08
अहमदाबाद06:2912:10-12:5917:09-18:41

हरतालिका तीज क्यों मनाया जाता है

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए बहुत खास माना जाता है। महाराष्ट्र में इसे मुख्य रूप से 'हरतालिका' के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर दिया था। उनकी सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं ताकि उनके पिता उनका विवाह किसी और से न कर सकें। 'हरत' का अर्थ है हरण करना और 'आलिका' का अर्थ है सखी। सखियों द्वारा हरण करके ले जाए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा। अंततः भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए यह दिन शिव और पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इस त्योहार का शासक ग्रह चंद्रमा (Moon) है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, शांति और वैवाहिक सुख का कारक होता है। चंद्रमा की स्थिति हमारे मानसिक सुख और रिश्तों की मधुरता को दर्शाती है। जब महिलाएं यह व्रत रखती हैं, तो वे मानसिक शांति और परिवार में प्रेम की कामना करती हैं। चंद्रमा की शीतलता और शांति इस व्रत के कठोर नियमों को सहने की शक्ति देती है। त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन के अनुसार, यह व्रत उसी दिन रखा जाता है जब तृतीया तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो। इस वर्ष 13 सितंबर 2026 को यह स्थिति बन रही है। यह व्रत गणेश चतुर्थी से ठीक पहले आने वाली तृतीया को होता है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और रात भर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह समर्पण और अटूट प्रेम का उदाहरण है। यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और धैर्य से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किए जाने वाले इस व्रत में मन की एकाग्रता बहुत जरूरी है। चंद्रमा मन का स्वामी है, इसलिए इस दिन मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए। किसी से विवाद नहीं करना चाहिए और अपना पूरा ध्यान शिव-पार्वती की आराधना में लगाना चाहिए।

🪔 हरतालिका तीज पूजा विधि

  1. स्नान और वस्त्रसुबह जल्दी उठें, स्नान करें और नए या साफ कपड़े पहनें। यह व्रत की शुरुआत है।
  2. मूर्तियां बनानाभगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी या बालू से मूर्तियां तैयार करें।
  3. पूजा स्थल की सफाईघर के मंदिर या पूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ करें और वहां एक चौकी लगाएं।
  4. चौकी सजानाचौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर शिव, पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां स्थापित करें।
  5. सामग्री अर्पित करनाभगवान को फूल, ताजे फल, मिठाई और पवित्र धागे (जनेऊ और कलावा) अर्पित करें।
  6. सुहाग की सामग्रीमाता पार्वती को सुहाग का सामान जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और लाल चुनरी चढ़ाएं।
  7. मुहूर्त के अनुसार पूजापेज पर दिए गए शुभ मुहूर्त (muhurat) को देखकर मुख्य पूजा आरंभ करें।
  8. कथा का पाठहाथ में फूल या चावल लेकर हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  9. आरती करनाकथा पूरी होने के बाद शिव जी और माता पार्वती की आरती उतारें।
  10. रात्रि जागरणइस व्रत में रात भर जागने की परंपरा है। रात में भजन-कीर्तन करें और पूजा करें।
  11. निर्जला व्रत का पालनपूरे दिन और रात बिना कुछ खाए-पिए (निर्जला) व्रत का कड़ाई से पालन करें।
  12. आशीर्वाद लेनापूजा के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें और मन में व्रत का संकल्प लें।
  2. एक थाली में शिव-पार्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें और फूल-फल अर्पित करें।
  3. माता पार्वती को सिंदूर और सुहाग का सामान चढ़ाएं।
  4. समय कम हो तो केवल व्रत कथा का पाठ कर लें और आरती कर लें।
  5. दिन भर बिना पानी पिए व्रत रखें और शाम को भी भगवान का ध्यान करें।

🛒 हरतालिका तीज पूजा सामग्री

आवश्यक

  • शिव, पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति
  • फूल और माला
  • ताजे फल
  • मिठाई
  • पवित्र धागा (जनेऊ और कलावा)
  • सुहाग का सामान (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी)
  • दीपक और बाती
  • रोली और अक्षत (चावल)

वैकल्पिक

  • लाल चुनरी
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • पान के पत्ते और सुपारी
  • नारियल
  • कलश

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if मिट्टी की मूर्ति is unavailable, तस्वीर या कैलेंडर is traditionally accepted
  • if ताजे फूल is unavailable, सूखे फूल या केवल अक्षत is traditionally accepted
  • if मिठाई is unavailable, घर में बना कोई भी मीठा या बताशा is traditionally accepted
  • if लाल चुनरी is unavailable, कोई भी साफ लाल कपड़ा is traditionally accepted

🌙 हरतालिका तीज व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत 13 सितंबर 2026 की सुबह सूर्योदय से पहले सरगी या संकल्प के साथ होती है।

क्या खा सकते हैं

  • यह पूरी तरह से निर्जला व्रत है, इसलिए इसमें कुछ भी खाने या पीने की मनाही होती है।

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अन्न, जल, फल, दूध या किसी भी प्रकार का भोजन ग्रहण न करें।

पारण: व्रत का पारण अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद और पूजा संपन्न करने के बाद किया जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग महिलाएं, और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को यह निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए।

यह एक कठिन निर्जला व्रत है। यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो कृपया व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

हरतालिका तीज: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं हरतालिका तीज पर बाल धो सकती हूँ?

परंपरागत रूप से व्रत के दिन बाल धोने की मनाही होती है। बेहतर होगा कि आप व्रत से एक दिन पहले ही बाल धो लें।

क्या इस दिन पानी पी सकते हैं?

नहीं, यह एक निर्जला व्रत है। इसमें पूरे दिन और रात पानी पीने या कुछ भी खाने की सख्त मनाही होती है।

क्या मैं दिन में सो सकती हूँ?

परंपरा के अनुसार इस व्रत में दिन या रात में सोना नहीं चाहिए। रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है।

क्या व्रत के दौरान दवा ले सकते हैं?

धार्मिक दृष्टि से कुछ भी निगलना मना है, लेकिन स्वास्थ्य सबसे ऊपर है। यदि आप बीमार हैं, तो डॉक्टर की सलाह से दवा लें।

क्या मैं ऑफिस का काम कर सकती हूँ?

हां, आप अपना रोजमर्रा का काम कर सकती हैं। बस ध्यान रखें कि मन शांत रहे और किसी से विवाद न हो।

क्या इस दिन नमक खा सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। यह निर्जला व्रत है, इसलिए नमक या कोई भी अन्य खाद्य पदार्थ खाने की अनुमति नहीं होती है।

क्या पीरियड्स में हरतालिका तीज की पूजा कर सकते हैं?

मासिक धर्म के दौरान आप व्रत रख सकती हैं और मानसिक रूप से भगवान का ध्यान कर सकती हैं। लेकिन मूर्ति स्पर्श या पूजा सामग्री छूने से बचना चाहिए।

क्या इस दिन नए कपड़े खरीदना शुभ है?

हां, पूजा के लिए नए कपड़े और सुहाग का सामान खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

क्या मैं यात्रा कर सकती हूँ?

जरूरी होने पर यात्रा की जा सकती है, लेकिन निर्जला व्रत होने के कारण थकान हो सकती है। इसलिए लंबी यात्रा से बचना बेहतर है।

क्या पूजा रात में ही करनी चाहिए?

मुख्य पूजा प्रदोष काल (शाम) या पेज पर दिए गए मुहूर्त के अनुसार की जाती है। रात में जागरण और भजन करना चाहिए।

क्या मैं पूजा के बाद पानी पी सकती हूँ?

नहीं, पूजा के बाद भी पानी नहीं पिया जाता। व्रत का पारण अगले दिन सुबह ही किया जाता है।

क्या कुंवारी लड़कियां यह व्रत कर सकती हैं?

हां, अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

व्रत के दिन बाल काटना, नाखून काटना या शेविंग करना पारंपरिक रूप से वर्जित माना गया है।

क्या करें

  • Observe Nirjala Vrat strictly.
  • Worship Shiva and Parvati.
  • Recite Hartalika Teej Katha.
  • Seek blessings from elders.
  • Maintain purity and devotion.

क्या न करें

  • Consume food or water.
  • Engage in arguments.
  • Sleep during the Puja.
  • Use harsh language.

⚠️ आम गलतियाँ

  • व्रत के दौरान क्रोध करना या किसी से अपशब्द कहना व्रत को अपूर्ण बनाता है।
  • दिन में या पूजा के समय सो जाने से व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता।
  • बिना मुहूर्त देखे गलत समय पर पूजा शुरू करने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित न करना पूजा की एक बड़ी भूल मानी जाती है।
  • व्रत कथा को बीच में छोड़ देना या बिना ध्यान दिए सुनना व्रत को खंडित कर सकता है।
  • बड़ों का आशीर्वाद लिए बिना व्रत का पारण करना परंपरा के खिलाफ माना जाता है।
  • निर्जला व्रत का संकल्प लेकर बीच में पानी पी लेना व्रत को तोड़ देता है।

📖 हरतालिका तीज कथा

हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती के त्याग और भगवान शिव के प्रति उनके अटूट प्रेम की कहानी है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने बचपन में ही यह तय कर लिया था कि वे भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में स्वीकार करेंगी। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर्वत पर कठोर तपस्या शुरू कर दी। उन्होंने अन्न और जल का पूरी तरह से त्याग कर दिया और केवल सूखे पत्ते खाकर दिन बिताने लगीं। उनकी यह कठोर तपस्या देखकर उनके पिता हिमालय बहुत दुखी हुए। एक दिन देवर्षि नारद उनके पास आए और कहा कि भगवान विष्णु पार्वती जी से विवाह करना चाहते हैं। हिमालय यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। जब माता पार्वती को यह पता चला, तो वे बहुत निराश हुईं। उन्होंने अपनी एक सखी को अपनी परेशानी बताई। सखी ने उनकी मदद करने का फैसला किया और वह माता पार्वती को एक घने जंगल में ले गई, जहां उनके पिता उन्हें ढूंढ न सकें। 'हरत' का अर्थ है हरण करना और 'आलिका' का अर्थ है सखी। सखी द्वारा जंगल में ले जाए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा। जंगल में माता पार्वती ने एक गुफा के अंदर रेत से भगवान शिव का शिवलिंग बनाया और पूरी रात जागकर उनकी पूजा की। वह दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया का था। माता पार्वती की इस कठोर तपस्या और सच्ची श्रद्धा से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने प्रकट होकर माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। बाद में जब हिमालय अपनी पुत्री को ढूंढते हुए वहां पहुंचे, तो पार्वती जी ने उन्हें शिव जी के वरदान के बारे में बताया। तब हिमालय ने भी अपनी सहमति दे दी और पूरे विधि-विधान से शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। तभी से यह मान्यता है कि जो भी महिला भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह कथा सिखाती है कि सच्ची लगन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त हो सकता है।

🪔 आरती

हरतालिका तीज की पूजा में आरती का बहुत महत्व है। जब आप व्रत कथा पूरी कर लें और सभी सामग्री भगवान को अर्पित कर दें, तब अंत में आरती की जाती है। आरती हमेशा खड़े होकर, पूरे मन और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। एक थाली में घी का दीपक जलाएं और सबसे पहले भगवान गणेश की, फिर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारें। आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार हरतालिका तीज के उपाय

धन की समस्या के लिए

चंद्रमा धन और तरलता का भी कारक है। हरतालिका तीज के दिन चंद्रमा को मजबूत करने के लिए माता पार्वती को सफेद बर्फी या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और आर्थिक निर्णय लेने में स्पष्टता आती है, जिससे धन लाभ के रास्ते खुलते हैं।

करियर और नौकरी के लिए

करियर में अस्थिरता अक्सर कमजोर चंद्रमा के कारण होती है, जो मन को भटकने देता है। इस दिन भगवान शिव को सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। चंद्रमा की शीतलता आपके कार्यक्षेत्र में तनाव को कम करती है और आपको अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है।

वैवाहिक जीवन में सुधार के लिए

चंद्रमा भावनाओं और रिश्तों की मधुरता का स्वामी है। पति-पत्नी के बीच अनबन दूर करने के लिए हरतालिका तीज की पूजा में माता पार्वती को पूरा सुहाग का सामान चढ़ाएं। यह उपाय चंद्रमा को शांत करता है और दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी समझ को बढ़ाता है।

संतान सुख और बच्चों की उन्नति के लिए

बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन चंद्रमा के कमजोर होने का संकेत हो सकता है। इस दिन निर्जला व्रत रखते हुए भगवान गणेश और शिव-पार्वती की पूजा करें। चंद्रमा की कृपा से बच्चों का मन शांत होता है और उनकी एकाग्रता बढ़ती है, जिससे वे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए

घर का वातावरण चंद्रमा की स्थिति से बहुत प्रभावित होता है। परिवार में शांति बनाए रखने के लिए हरतालिका तीज की रात जागरण करें और शिव-पार्वती के भजन गाएं। यह उपाय घर से नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है और चंद्रमा की सौम्यता घर में सकारात्मकता लाती है।

नकारात्मकता और मानसिक तनाव दूर करने के लिए

चंद्रमा सीधे तौर पर हमारे मन को नियंत्रित करता है। अगर आप बहुत अधिक तनाव या नकारात्मक विचारों से घिरे हैं, तो पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करें और उन्हें जल अर्पित करें। चंद्रमा के प्रभाव से मन का डर दूर होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

क्या हरतालिका तीज आपके लिए विशेष है?

हरतालिका तीज का यह लेख और चंद्रमा के उपाय सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है, यह सभी के लिए सच है, लेकिन आपकी कुंडली में चंद्रमा किस भाव में बैठा है, यह पूरी तरह अलग होता है। एक सामान्य लेख यह नहीं बता सकता कि आपकी समस्या का मूल कारण क्या है। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। यदि आप करियर, पैसे या जीवन की दशा का सटीक समय जानना चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग आपके लिए है। विवाह में रुकावटों या जीवनसाथी के स्वभाव को समझने के लिए Kundali Milan उपयोगी है। हाथों की लकीरों में छिपे भविष्य को जानने के लिए Hastrekha रीडिंग चुनें। यदि आपको बार-बार अजीब सपने आते हैं, तो Swapna Shastra रीडिंग उनके अर्थ बता सकती है। ये सेवाएं आपकी अपनी ग्रह स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन देती हैं।

भारत में हरतालिका तीज — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरतालिका तीज 2026 में कब है?

त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज 13 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि भाद्रपद शुक्ल तृतीया के आधार पर तय की गई है। इसी दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

पूजा का सही मुहूर्त (muhurat) क्या है?

पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है। आप इस पेज पर ऊपर दिए गए टेबल में अपने शहर का लाइव मुहूर्त देख सकते हैं। उसी समय के अनुसार अपनी पूजा आरंभ करना सबसे शुभ माना जाता है।

इस व्रत में मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

इस दिन सबसे महत्वपूर्ण कार्य निर्जला व्रत का कड़ाई से पालन करना है। महिलाओं को माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करनी चाहिए। साथ ही व्रत कथा सुनना और रात में जागरण करना भी आवश्यक माना गया है।

हरतालिका तीज के दिन किन चीजों से बचना चाहिए?

इस दिन किसी भी प्रकार का अन्न या जल ग्रहण करने से बचना चाहिए। इसके अलावा दिन में सोना, किसी से विवाद करना या अपशब्द कहना भी वर्जित है। व्रत के दौरान मन को पूरी तरह से शांत और भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए।

क्या इस व्रत में कुछ भी खा सकते हैं?

नहीं, हरतालिका तीज पूरी तरह से एक निर्जला व्रत है। इसमें पूरे दिन और रात भर पानी पीने या कुछ भी खाने की अनुमति नहीं होती है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद ही किया जाता है।

गर्भवती महिलाएं यह व्रत कैसे रखें?

गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वास्थ्य कारणों से वे फलाहार या जल ग्रहण करके भी यह व्रत कर सकती हैं। परंपरा से ज्यादा महत्व आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य का है।

पूजा के लिए कौन सी सामग्री सबसे जरूरी है?

पूजा के लिए शिव, पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियां सबसे जरूरी हैं। इसके अलावा सुहाग का सामान, ताजे फल, फूल, मिठाई और पवित्र धागा (कलावा) होना चाहिए। अगर कोई सामग्री न मिले तो आप उसकी जगह अक्षत (चावल) का उपयोग कर सकते हैं।

व्रत कथा सुनना क्यों जरूरी है?

मान्यता है कि व्रत कथा सुने बिना हरतालिका तीज का व्रत अधूरा रहता है। यह कथा माता पार्वती के कठोर तप और शिव जी के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। इसे सुनने से मन में श्रद्धा बढ़ती है और व्रत का पूरा फल मिलता है।

इस त्योहार का क्या महत्व है?

यह त्योहार पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं इसे अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए। यह व्रत परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

क्या हरतालिका तीज पर नया काम शुरू कर सकते हैं?

यह दिन मुख्य रूप से तपस्या और भगवान की आराधना के लिए होता है। हालांकि यह एक शुभ दिन है, लेकिन व्रत की कठोरता के कारण शारीरिक थकान हो सकती है। इसलिए किसी बड़े या नए काम की शुरुआत अगले दिन करना ज्यादा बेहतर रहता है।

क्या इस दिन खरीदारी (shopping) की जा सकती है?

हां, पूजा से संबंधित सामग्री और सुहाग का सामान खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। आप नए कपड़े, चूड़ियां और सिंदूर जैसी चीजें खरीद सकती हैं। हालांकि, कोशिश करें कि यह खरीदारी व्रत से एक दिन पहले ही पूरी कर लें ताकि व्रत वाले दिन थकान न हो।

पूजा के समय कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

इस व्रत के लिए कोई एक विशेष मंत्र अनिवार्य नहीं है। आप भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र 'नमः शिवाय' का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा माता पार्वती का ध्यान करते हुए मन में जो भी प्रार्थना आए, वह सच्चे मन से करें।

इस दिन दान करने का क्या महत्व है?

व्रत के पारण से पहले ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। आप अन्न, वस्त्र या सुहाग की सामग्री का दान कर सकते हैं। इससे व्रत पूर्ण होता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

चंद्रमा के उपाय इस दिन क्यों किए जाते हैं?

हरतालिका तीज का शासक ग्रह चंद्रमा है, जो मन और भावनाओं का कारक होता है। चंद्रमा को मजबूत करने वाले उपाय करने से मानसिक शांति मिलती है। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और घर का क्लेश दूर होता है।

अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?

पूजा का समय और मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त की स्थिति पर आधारित होता है। हर शहर का अक्षांश और देशांतर अलग होता है, जिससे सूर्योदय का समय बदल जाता है। इसीलिए हमारा पंचांग इंजन आपके शहर के अनुसार लाइव समय दिखाता है।

हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?

हरियाली तीज सावन महीने में आती है और इसमें झूला झूलने और उत्सव मनाने का महत्व अधिक है। जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद महीने में आती है और यह एक अत्यंत कठोर निर्जला व्रत है। दोनों ही त्योहार शिव-पार्वती को समर्पित हैं, लेकिन इनके नियम अलग हैं।

व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

व्रत का पारण अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण से पहले भगवान की संक्षिप्त पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। उसके बाद जल पीकर और सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत खोलें।

अगर गलती से पानी पी लें तो क्या करें?

अगर अनजाने में या भूलवश पानी पी लिया है, तो भगवान शिव और माता पार्वती से क्षमा मांग लें। अपनी पूजा और व्रत को उसी श्रद्धा के साथ जारी रखें। ईश्वर हमेशा भक्त की सच्ची भावना को देखते हैं।

क्या पुरुष भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकते हैं?

परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं और कन्याओं द्वारा ही रखा जाता है। हालांकि, पुरुष अपनी पत्नी के साथ पूजा में शामिल हो सकते हैं और व्यवस्था में उनकी मदद कर सकते हैं। भगवान शिव की आराधना कोई भी कर सकता है।

महाराष्ट्र में इस त्योहार को किस नाम से जाना जाता है?

महाराष्ट्र में इस त्योहार को मुख्य रूप से 'हरतालिका' के नाम से ही जाना जाता है। वहां भी महिलाएं इसे बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाती हैं। पूजा के नियम और व्रत की कठोरता पूरे देश में लगभग एक समान ही होती है।

भारत में आने वाले त्योहार

और देखें

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