हैदराबाद · Telangana

हैदराबाद में गणेश चतुर्थी

सोमवार, 14 सितंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान गणेश के जन्म और नई शुरुआत का प्रतीक है। मुख्य रूप से इस दिन घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है, उन्हें दूर्वा और 21 मोदक का भोग लगाया जाता है, और विघ्नहर्ता से जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना की जाती है।

🕐 हैदराबाद के लिए गणेश चतुर्थी का समय

तिथिTritiya (Shukla Paksha)07:07 तक
नक्षत्रChitra, पाद 313:55 तक
योग · करणBrahma · Garaja
अभिजित मुहूर्त11:46-12:35
राहुकाल07:38-09:09
यमगंड · गुलिक10:40-12:11 · 13:42-15:13
सूर्योदय · सूर्यास्त06:07 · 18:15

हैदराबाद (17.385, 78.4867) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

🌊 Ganesh Nimajjanam (గణేష్ నిమజ్జనం)

Telangana में इसे कहते हैं Ganesh Nimajjanam (గణేష్ నిమజ్జనం).

विसर्जन का दिनशुक्रवार, 25 सितंबर 2026
विसर्जन मुहूर्त10:55-13:18(मध्याह्न)

Households immerse on the 1st, 3rd, 5th, 7th or 10th day according to family custom; the tenth day, Anant Chaturdashi, is when the public visarjan takes place.

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

गणेश चतुर्थी पर क्या करें

  1. पूजा की जगह को अच्छे से साफ करके वहां एक साफ चौकी रखें।
  2. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  3. गणपति बप्पा का आवाहन करें और उन्हें स्नान कराकर वस्त्र अर्पित करें।
  4. भगवान को लाल फूल और ताजी दूर्वा घास चढ़ाएं।
  5. 21 मोदक, लड्डू और नारियल का भोग लगाएं।
  6. 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करते हुए धूप और दीप जलाएं।
  7. सच्चे मन से आरती करें और अंत में क्षमा मांगते हुए प्रणाम करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Chaturthi pervades madhyahna kaal on one day only (100% of the window). Gauri-Vinayaka vrata is madhyahna-vyapini. When both days pervade midday, Dharma Sindhu directs the earlier day (पूर्वैव), whatever the relative vyapti.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में गणेश चतुर्थी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
हैदराबाद06:0711:46-12:3507:38-09:09
दिल्ली एनसीआर06:0911:51-12:4007:40-09:12
मुंबई06:2912:09-12:5708:00-09:31
नोएडा06:0811:51-12:4007:39-09:11
गुरुग्राम06:1011:52-12:4107:41-09:13
बेंगलुरु06:1211:50-12:3907:42-09:13
पुणे06:2512:05-12:5307:56-09:27
कोलकाता05:2611:07-11:5506:57-08:28
चेन्नई06:0111:39-12:2807:31-09:02
अहमदाबाद06:2912:10-12:5808:00-09:31

गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और प्रिय त्योहारों में से एक है। यह पावन दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जब मध्याह्न काल होता है, तब इस व्रत और पूजा का विशेष विधान है। पंचांग की गणना के अनुसार, जब चतुर्थी तिथि केवल एक दिन मध्याह्न काल में व्याप्त होती है, तो धर्म सिंधु के नियमों के अनुसार उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है। पूरे भारत में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे 'गणेशोत्सव' (Ganeshotsav) के रूप में बहुत धूमधाम से मनाते हैं। वहीं कर्नाटक में इसे 'गौरी गणेश हब्बा' (Gowri Ganesha Habba - ಗೌರಿ ಗಣೇಶ ಹಬ್ಬ), तमिलनाडु में 'विनायगर चतुर्थी' (Vinayagar Chaturthi - விநாயகர் சதுர்த்தி) और तेलंगाना में 'विनायक चविथि' (Vinayaka Chavithi - వినాయక చవితి) कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भगवान गणेश का सीधा संबंध बुध (Mercury) ग्रह से माना जाता है। बुध ग्रह बुद्धि, संचार, व्यापार और विवेक का कारक है। जब आप गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की सच्चे मन से पूजा करते हैं, तो कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति को बल मिलता है। इससे जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और नई शुरुआत के रास्ते खुलते हैं। जो लोग व्यापार में नुकसान झेल रहे हैं या जिनकी पढ़ाई में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग अपने घरों में गणपति की सुंदर मूर्ति लाते हैं। इसे सिर्फ एक मूर्ति स्थापना नहीं, बल्कि घर में एक मेहमान, एक रक्षक के आने के रूप में देखा जाता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में कोई भी नया काम शुरू करने से पहले हमें अपने भीतर की बुद्धि और विवेक को जागृत करना चाहिए। बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जिसका अर्थ है बाधाओं को हरने वाला। गणेश चतुर्थी का यह पर्व केवल एक दिन का नहीं होता। परिवार अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार 1, 3, 5, 7 या 10 दिनों तक बप्पा को घर में रखते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन, जो इस बार 25 सितंबर 2026 को है, गणपति विसर्जन (Ganpati Visarjan) या तेलंगाना में गणेश निमज्जनम (Ganesh Nimajjanam - గణేష్ నిమజ్జనం) किया जाता है। विसर्जन का अर्थ यह नहीं कि भगवान चले गए, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान अब हमारे भीतर स्थापित हो गए हैं और मूर्ति अपने मूल तत्व यानी जल में विलीन हो रही है। इस पूरी अवधि में घर का माहौल बहुत ही सकारात्मक और पवित्र रहता है। यह समय अपने मन से नकारात्मक विचारों को निकालने, घर की अच्छी तरह से सफाई करने और जीवन में नई ऊर्जा का स्वागत करने का है।

🪔 गणेश चतुर्थी पूजा विधि

  1. पूजा स्थल की सफाईसबसे पहले घर और पूजा के स्थान को अच्छी तरह से साफ करें और वहां गंगाजल छिड़कें।
  2. चौकी की स्थापनाएक लकड़ी की साफ चौकी लें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं, जो गणेश जी के प्रिय रंग हैं।
  3. मूर्ति स्थापनाचौकी पर भगवान गणेश की सुंदर मूर्ति को पूरे सम्मान के साथ स्थापित करें।
  4. आवाहन (Avahana)हाथ में फूल और अक्षत लेकर भगवान गणेश का आवाहन करें, ताकि वे आपके घर में पधारें और आपकी पूजा स्वीकार करें।
  5. स्नान और वस्त्रप्रतीकात्मक रूप से जल छिड़क कर भगवान को स्नान कराएं और उन्हें वस्त्र या कलावा अर्पित करें।
  6. तिलक और पुष्पबप्पा को कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएं और उनके चरणों में लाल फूल अर्पित करें।
  7. दूर्वा अर्पणभगवान गणेश को ताजी दूर्वा घास चढ़ाएं, यह उन्हें बहुत प्रिय है और इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
  8. भोग लगानाभगवान को 21 मोदक, लड्डू और एक नारियल का भोग लगाएं। आप ताजे फल भी रख सकते हैं।
  9. मंत्र जापधूप और दीप जलाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का सच्चे मन से जाप करें।
  10. आरतीपरिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर गणेश जी की आरती गाएं और कपूर जलाएं।
  11. प्रणाम और क्षमा प्रार्थनाअंत में भगवान को प्रणाम करें, उनका आशीर्वाद लें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।

5-मिनट विधि

  1. पूजा की जगह साफ करके एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और गणेश जी की मूर्ति रखें।
  2. भगवान को कुमकुम का तिलक लगाएं और ताजे लाल फूल चढ़ाएं।
  3. बप्पा को दूर्वा घास और 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  4. एक दीपक जलाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 11 बार जाप करें।
  5. खड़े होकर आरती करें और दिन की अच्छी शुरुआत के लिए विघ्नहर्ता का आशीर्वाद लें।

🛒 गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • गणेश जी की मूर्ति
  • लाल या पीला कपड़ा
  • ताजी दूर्वा घास
  • लाल फूल
  • 21 मोदक
  • लड्डू
  • नारियल
  • कुमकुम और चंदन
  • धूप और दीपक
  • अक्षत (बिना टूटे चावल)

वैकल्पिक

  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • लौंग और इलायची
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी)
  • केले या अन्य ताजे फल

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर मोदक न मिलें, तो आप बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग लगा सकते हैं।
  • अगर लाल फूल न हों, तो गेंदे के फूल या कोई भी ताजे फूल चढ़ाए जा सकते हैं।
  • अगर दूर्वा घास न मिले, तो आप पान के पत्ते पर सुपारी रखकर अर्पित कर सकते हैं।
  • अगर कुमकुम न हो, तो हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

🌙 गणेश चतुर्थी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर, स्नान करने के बाद भगवान गणेश के सामने संकल्प लेकर की जाती है।

क्या खा सकते हैं

  • साबूदाना
  • फल
  • दूध और दही
  • मेवे
  • कुट्टू या सिंघाड़े का आटा

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अनाज
  • नमक (सेंधा नमक खा सकते हैं)
  • प्याज और लहसुन
  • मांसाहारी भोजन

पारण: व्रत का पारण अगले दिन सुबह शुभ मुहूर्त देखकर या चंद्र दर्शन से बचते हुए किया जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। वे केवल सात्विक भोजन करके और पूजा में शामिल होकर भी पूरा फल प्राप्त कर सकते हैं।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

गणेश चतुर्थी: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं गणेश चतुर्थी के दिन बाल धो सकती हूँ?

पारंपरिक रूप से व्रत वाले दिन बाल धोने से मना किया जाता है। आप पूजा से एक दिन पहले बाल धो सकती हैं।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

नहीं, किसी भी शुभ व्रत या पूजा के दिन नाखून काटना या शेविंग करना अच्छा नहीं माना जाता है।

क्या हम गणेश जी की पूजा रात में कर सकते हैं?

गणेश जी की मुख्य पूजा मध्याह्न (दोपहर) के समय की जाती है। हालांकि आप सुबह और शाम दोनों समय आरती कर सकते हैं।

गणपति विसर्जन कब करना चाहिए?

विसर्जन परिवार की परंपरा के अनुसार 1, 3, 5, 7 या 10वें दिन किया जाता है। सार्वजनिक विसर्जन अनंत चतुर्दशी (25 सितंबर 2026) को होता है।

क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?

हां, अगर आप फलाहारी व्रत कर रहे हैं, तो एक समय सेंधा नमक का उपयोग करके भोजन कर सकते हैं।

क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?

अगर आपने घर में गणपति स्थापित किए हैं, तो उन्हें अकेला छोड़कर लंबी यात्रा पर नहीं जाना चाहिए।

क्या गणेश चतुर्थी पर नया काम शुरू कर सकते हैं?

बिल्कुल। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, इसलिए कोई भी नया व्यापार या काम शुरू करने के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है।

क्या पूजा के बाद हम सामान्य खाना खा सकते हैं?

अगर आपने व्रत नहीं रखा है, तो आप पूजा के बाद सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन का) खा सकते हैं।

क्या इस दिन नॉन-वेज खा सकते हैं?

नहीं, यह पूरी तरह से वर्जित है। इस दिन घर का माहौल शुद्ध रखना चाहिए और मांसाहारी भोजन से दूर रहना चाहिए।

क्या हम बाजार से नई चीजें खरीद सकते हैं?

हां, गणेश चतुर्थी के दिन नई चीजें, कपड़े, या गाड़ी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

अगर दूर्वा न मिले तो क्या करें?

दूर्वा गणेश जी को बहुत प्रिय है, लेकिन अगर न मिले तो आप सच्चे मन से ताजे फूल या अक्षत अर्पित कर सकते हैं।

क्या महिलाएं पीरियड्स में पूजा कर सकती हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मूर्ति स्पर्श करने या मुख्य पूजा करने से बचना चाहिए। आप दूर से भगवान का ध्यान कर सकती हैं।

क्या हम घर में पुरानी मूर्ति की पूजा कर सकते हैं?

हां, अगर आपके घर में धातु (सोना, चांदी, पीतल) की मूर्ति है, तो आप हर साल उसी की पूजा कर सकते हैं। मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

विसर्जन के दिन क्या ध्यान रखें?

विसर्जन के समय भगवान की आरती करें और उनसे अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना करें। मूर्ति को सम्मान के साथ जल में विसर्जित करें।

क्या करें

  • Cleanse your home thoroughly.
  • Decorate the Puja altar.
  • Offer fresh Modak daily.
  • Chant Ganesha Mantras.
  • Maintain a pure mind.

क्या न करें

  • Avoid consuming non-vegetarian food.
  • Do not neglect daily Puja.
  • Refrain from negative thoughts.
  • Do not disrespect the idol.

⚠️ आम गलतियाँ

  • घर में गणपति की स्थापना करने के बाद उन्हें अकेला छोड़ देना पूजा को अधूरा बनाता है।
  • भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते चढ़ाना पारंपरिक रूप से वर्जित है और इससे पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता है।
  • बिना दूर्वा और मोदक के भगवान गणेश की पूजा को पारंपरिक रूप से अपूर्ण माना जाता है।
  • घर में स्थापित मूर्ति का अनादर करना या उसके आस-पास गंदगी रखना सही नहीं है।
  • दैनिक पूजा और सुबह-शाम की आरती में नागा करना स्थापना के नियमों के खिलाफ माना जाता है।
  • मन में नकारात्मक विचार रखकर या किसी से झगड़ा करके पूजा करने से उसका पूरा फल नहीं मिलता।

📿 मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

मैं भगवान गणेश को प्रणाम करता हूँ, जो सभी बाधाओं को दूर करने वाले और ज्ञान के देवता हैं।

इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार (एक माला) करना चाहिए। यह मंत्र पूजा के दौरान, मूर्ति स्थापना के समय और भोग लगाते समय जपना चाहिए।

📖 गणेश चतुर्थी कथा

गणेश चतुर्थी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा माता पार्वती और भगवान शिव से संबंधित है। यह कथा हमें बताती है कि कैसे भगवान गणेश का जन्म हुआ और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। एक बार माता पार्वती स्नान करने के लिए जा रही थीं। उस समय नंदी या कोई अन्य गण वहां उपस्थित नहीं था जो द्वार पर पहरा दे सके। तब माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल (उबटन) से एक सुंदर बालक की मूर्ति बनाई और अपने तपोबल से उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने उस बालक को अपना पुत्र कहा और उसे आदेश दिया कि जब तक वे स्नान करके न लौटें, किसी को भी अंदर न आने दे। बालक ने अपनी माता की आज्ञा मानकर द्वार पर पहरा देना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद भगवान शिव वहां आए और अंदर जाने लगे। बालक ने उन्हें रोक दिया क्योंकि वह शिव जी को नहीं जानता था। शिव जी ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की कि वे पार्वती के पति हैं, लेकिन बालक अपने आदेश पर अडिग रहा। इससे शिव जी को बहुत क्रोध आ गया और उन्होंने अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती बाहर आईं और अपने पुत्र को मृत देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित और दुखी हो गईं। उन्होंने सृष्टि का विनाश करने की चेतावनी दी। तब सभी देवताओं ने माता पार्वती को शांत करने की कोशिश की। भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा में जाओ और जो भी प्राणी सबसे पहले मिले, उसका सिर ले आओ। गणों को सबसे पहले एक हाथी (गज) मिला। वे उस हाथी का सिर ले आए। भगवान शिव ने वह हाथी का सिर उस बालक के धड़ पर रख दिया और उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती अपने पुत्र को जीवित देखकर बहुत प्रसन्न हुईं। तब भगवान शिव और सभी देवताओं ने उस बालक को 'गजानन' और 'गणपति' नाम दिया। साथ ही यह वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य या पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाएगी। उनके बिना कोई भी अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाएगा। यही कारण है कि आज भी हर शुभ काम से पहले गणपति बप्पा को याद किया जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन उनके इसी प्राकट्य को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

🪔 आरती

गणेश चतुर्थी के दिन आरती का विशेष महत्व है। घर में गणपति बप्पा की स्थापना के बाद, सुबह और शाम दोनों समय पूरे परिवार को एक साथ मिलकर आरती करनी चाहिए। आरती करते समय एक थाली में घी का दीपक, कपूर और कुछ ताजे फूल रखें। सच्चे मन से भगवान की स्तुति करें और ताली बजाते हुए उत्साह के साथ आरती गाएं। आरती पूरी होने के बाद भगवान से अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगें और सभी को प्रसाद बांटें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार गणेश चतुर्थी के उपाय

Money and Wealth (धन की समस्या)

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठे अर्पित करें। चूंकि इस त्योहार के स्वामी ग्रह बुध हैं, जो व्यापार और धन के कारक हैं, इसलिए यह उपाय आपके काम में आ रही आर्थिक रुकावटों को दूर करने में मदद करता है।

Career and Job (करियर और नौकरी)

अगर नौकरी में प्रमोशन रुका हुआ है या नई नौकरी मिलने में बाधा आ रही है, तो गणेश जी को पीले रंग के वस्त्र और 21 मोदक का भोग लगाएं। बुध ग्रह के प्रभाव से आपके संचार कौशल में सुधार होगा और नई शुरुआत के रास्ते खुलेंगे।

Marriage (विवाह में देरी)

विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा को लाल फूल और नारियल अर्पित करें। विघ्नहर्ता से सच्चे मन से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन की इस रुकावट को दूर करें और एक सुखद शुरुआत का आशीर्वाद दें।

Children and Education (संतान और शिक्षा)

बुध ग्रह बुद्धि का प्रतीक है। बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन बच्चों के हाथ से बप्पा को लड्डू और लाल फूल चढ़वाएं। इससे उनकी बुद्धि तेज होती है और शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

Home and Property (घर और संपत्ति)

अगर आप नया घर खरीदना चाहते हैं या घर में कलह रहती है, तो गणेश जी की मूर्ति के सामने एक नारियल रखें और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के बाद उस नारियल को लाल कपड़े में बांधकर अपने घर की तिजोरी या मंदिर में रख दें।

Negativity and Obstacles (नकारात्मकता और बाधाएं)

जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। विघ्नहर्ता गणेश आपके घर में आने वाली हर बुरी ऊर्जा को रोकते हैं और घर का माहौल सकारात्मक और पवित्र बनाते हैं।

क्या गणेश चतुर्थी आपके लिए विशेष है?

इस पेज पर दी गई जानकारी, उपाय और मुहूर्त पारंपरिक मान्यताओं और वैदिक ज्योतिष के सामान्य नियमों पर आधारित हैं। भगवान गणेश और बुध ग्रह का यह प्रभाव सभी के लिए एक समान रूप से लिखा गया है। लेकिन हर इंसान का जीवन अलग है, और उसकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति भी अलग होती है। एक सामान्य लेख यह नहीं बता सकता कि आपकी अपनी कुंडली में बुध ग्रह किस घर में बैठा है और वह आपको क्या परिणाम देगा। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। त्रिकाल वाणी की Kundli रीडिंग आपके करियर, पैसे और सही समय (dasha) के बारे में सटीक जानकारी देती है। अगर आप शादी को लेकर चिंतित हैं, तो Kundali Milan आपके और आपके पार्टनर के बीच की अनुकूलता को स्पष्ट करता है। जीवन की दिशा समझने के लिए Hastrekha (हस्तरेखा) रीडिंग और मन की उलझनों या सपनों का अर्थ जानने के लिए Swapna Shastra आपके लिए सही विकल्प हैं। अपनी समस्या का वास्तविक कारण जानने के लिए एक व्यक्तिगत परामर्श हमेशा बेहतर होता है।

हैदराबाद में गणेश चतुर्थी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी 2026 में कब है और पूजा का मुहूर्त क्या है?

इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूजा का सबसे शुभ समय मध्याह्न (दोपहर) का होता है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त और राहु काल की जानकारी ऊपर टेबल में दी गई है, कृपया उसे देखकर ही पूजा शुरू करें।

क्या गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखना मना है?

हां, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद देखने से झूठा कलंक लग सकता है। अगर गलती से चांद दिख जाए, तो स्यमंतक मणि की कथा सुननी चाहिए।

क्या घर में गणपति स्थापित करना जरूरी है?

यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। अगर आप मूर्ति स्थापित नहीं कर सकते, तो आप मंदिर जाकर या घर में गणेश जी की तस्वीर के सामने भी पूजा कर सकते हैं। मुख्य बात सच्चे मन से विघ्नहर्ता को याद करना है।

गणपति विसर्जन किस दिन करना चाहिए?

विसर्जन का दिन हर परिवार की अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग होता है। कुछ लोग डेढ़ दिन, कुछ 3, 5 या 7 दिन बाद विसर्जन करते हैं। सार्वजनिक रूप से बड़ा विसर्जन 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को होता है, जो इस बार 25 सितंबर 2026 को है।

गणेश जी को भोग में क्या चढ़ाना चाहिए?

भगवान गणेश को मोदक सबसे ज्यादा प्रिय हैं, इसलिए उन्हें 21 मोदक का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप बेसन या बूंदी के लड्डू, ताजे फल और नारियल भी अर्पित कर सकते हैं। भोग हमेशा शुद्ध और सात्विक होना चाहिए।

क्या मैं गणेश चतुर्थी का व्रत रख सकती हूँ?

बिल्कुल, बहुत से लोग इस दिन भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं। आप अपनी क्षमता के अनुसार फलाहारी व्रत या बिना पानी का (निर्जला) व्रत कर सकते हैं। व्रत का पारण शुभ मुहूर्त देखकर ही करना चाहिए।

क्या पीरियड्स के दौरान गणेश पूजा कर सकते हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पूजा के बर्तन या भगवान की मूर्ति को छूने से बचना चाहिए। आप दूर बैठकर मानसिक रूप से भगवान का ध्यान कर सकती हैं और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप कर सकती हैं।

गणेश पूजा में कौन से फूल चढ़ाने चाहिए?

गणपति बप्पा को लाल रंग के फूल बहुत पसंद हैं, विशेषकर गुड़हल (Hibiscus) का फूल। इसके अलावा आप गेंदे के फूल या गुलाब भी चढ़ा सकते हैं। ध्यान रहे कि गणेश जी को तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाने चाहिए।

क्या गणेश चतुर्थी पर नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं?

हां, यह दिन किसी भी नई शुरुआत के लिए साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, इसलिए इस दिन नया काम, बिजनेस या दुकान शुरू करने से उसमें सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे क्या कहते हैं?

महाराष्ट्र में इसे बहुत बड़े स्तर पर 'गणेशोत्सव' के रूप में मनाया जाता है। वहीं कर्नाटक में इसे 'गौरी गणेश हब्बा', तमिलनाडु में 'विनायगर चतुर्थी' और तेलंगाना में 'विनायक चविथि' कहा जाता है। हर जगह इसे मनाने का उत्साह एक जैसा ही होता है।

क्या हम गणेश चतुर्थी के दिन शॉपिंग कर सकते हैं?

हां, इस दिन नई चीजें खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। आप नए कपड़े, गहने, गाड़ी या घर का कोई भी नया सामान खरीद सकते हैं। यह दिन जीवन में नई खुशियां और समृद्धि लाने का प्रतीक है।

अगर पूजा के लिए दूर्वा न मिले तो क्या करें?

दूर्वा गणेश जी की सबसे प्रिय चीज है, लेकिन अगर किसी कारणवश यह न मिले, तो परेशान न हों। आप भगवान को ताजे फूल, अक्षत (बिना टूटे चावल) और पान का पत्ता अर्पित कर सकते हैं। भगवान केवल आपकी सच्ची श्रद्धा देखते हैं।

गणेश चतुर्थी पूजा का मंत्र क्या है?

पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। यह बहुत ही सरल और शक्तिशाली मंत्र है। आप मूर्ति स्थापना, भोग लगाते समय और आरती से पहले इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।

अलग-अलग शहरों में मुहूर्त का समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, जिसके कारण तिथियों और मुहूर्त का समय भी बदल जाता है। इसीलिए पंचांग की गणना आपके शहर के अक्षांश और देशांतर के आधार पर की जाती है। आपके शहर का सही समय ऊपर टेबल में दिया गया है।

क्या इस दिन नॉन-वेज या शराब का सेवन कर सकते हैं?

नहीं, गणेश चतुर्थी के दिन और जब तक बप्पा आपके घर में स्थापित हैं, तब तक घर में पूरी तरह से सात्विक माहौल रखना चाहिए। इस दौरान मांसाहारी भोजन, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन पारंपरिक रूप से वर्जित है।

गणेश जी की मूर्ति कैसी होनी चाहिए?

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हमेशा मिट्टी (Eco-friendly) की मूर्ति लानी चाहिए। मूर्ति में गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी मूर्ति की पूजा घर में करना शुभ और सरल माना जाता है।

क्या गणेश चतुर्थी पर दान करना चाहिए?

हां, किसी भी शुभ अवसर पर दान करने से उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। आप इस दिन गरीबों को भोजन, फल, कपड़े या पढ़ाई का सामान दान कर सकते हैं। इससे बुध ग्रह भी मजबूत होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

गणेश चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?

गणेश चतुर्थी (विनायक चतुर्थी) साल में एक बार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आती है, जो गणेश जी का जन्मदिन है। जबकि संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष में आती है, जिसमें लोग अपनी बाधाएं दूर करने के लिए व्रत रखते हैं।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

पारंपरिक रूप से गर्भवती महिलाओं को कठिन व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। आप बिना व्रत रखे भी पूजा में शामिल हो सकती हैं। यदि आप व्रत रखना ही चाहती हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

मूर्ति विसर्जन के समय क्या नियम हैं?

विसर्जन से पहले भगवान की आरती करें, उन्हें भोग लगाएं और अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना करें। विसर्जन के लिए जाते समय पूरे सम्मान के साथ मूर्ति को ले जाएं और किसी साफ नदी, तालाब या घर के टब में विसर्जित करें।

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