हैदराबाद · Telangana

हैदराबाद में नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी

रविवार, 18 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस साल नवरात्रि का आठवाँ दिन यानी दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक हैं। मुख्य रूप से इस दिन नारियल, हलवा और पूरी का भोग लगाया जाता है। पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार ऊपर टेबल में दिया गया है।

🕐 हैदराबाद के लिए नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी का समय

सूर्योदय की तिथिSaptami (Shukla Paksha)08:28 तक
पर्व की तिथिAshtami 08:28 से
नक्षत्रPurva Ashadha, पाद 412:49 तक
योग · करणSukarma · Vanija
अभिजित मुहूर्त11:37-12:23
राहुकाल16:21-17:48
यमगंड · गुलिक12:00-13:27 · 14:54-16:21
सूर्योदय · सूर्यास्त06:13 · 17:48

हैदराबाद (17.385, 78.4867) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी पर क्या करें

  1. पूजा की जगह को साफ करके गंगाजल छिड़कें।
  2. माँ महागौरी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें।
  3. घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
  4. माता को सफेद फूल, खासकर चमेली के फूल अर्पित करें।
  5. प्रसाद में नारियल, हलवा और पूरी का भोग लगाएँ।
  6. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
  7. अंत में क्षमा प्रार्थना करते हुए आरती संपन्न करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Day 8 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
हैदराबाद06:1311:37-12:2316:21-17:48
दिल्ली एनसीआर06:2711:42-12:2816:19-17:44
मुंबई06:3712:00-12:4616:43-18:10
नोएडा06:2611:42-12:2716:19-17:44
गुरुग्राम06:2811:43-12:2916:20-17:45
बेंगलुरु06:1311:40-12:2716:27-17:55
पुणे06:3211:55-12:4216:39-18:06
कोलकाता05:3710:58-11:4315:39-17:05
चेन्नई06:0311:30-12:1616:16-17:44
अहमदाबाद06:4112:01-12:4716:42-18:08

नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी क्यों मनाया जाता है

नवरात्रि का आठवाँ दिन, जिसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, माँ महागौरी को समर्पित है। माँ का यह स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और पूर्ण रूप से श्वेत (सफेद) है। उनकी चार भुजाएँ हैं, जिनमें वे त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं, और उनका वाहन एक सफेद वृषभ (बैल) है। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का एक बहुत बड़ा अवसर माना जाता है। माँ महागौरी की उपासना करने से जीवन की सभी मलिनता, पाप और नकारात्मक विचार धुल जाते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, माँ महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। राहु, जो अक्सर जीवन में भ्रम, अचानक आने वाली परेशानियाँ, मानसिक तनाव और अज्ञात भय का कारण बनता है, माँ की कृपा से शांत होता है। जिन लोगों की कुंडली में राहु दोष है या राहु की महादशा चल रही है, उनके लिए अष्टमी के दिन माँ महागौरी की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। यह पूजा राहु के बुरे प्रभावों को कम करके जीवन में स्पष्टता और स्थिरता लाती है। इसके अलावा, माँ महागौरी का संबंध विवाह और वैवाहिक सुख से भी है। ऐसा माना जाता है कि जो कन्याएँ योग्य वर की तलाश में हैं या जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ आ रही हैं, उन्हें इस दिन सच्चे मन से माता की पूजा करनी चाहिए। माता ने स्वयं भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसलिए वे विवाह से जुड़ी हर मनोकामना को समझती हैं और उसे पूरा करने का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन का रंग पीकॉक ग्रीन (Peacock Green) है, लेकिन माता को सफेद रंग बहुत प्रिय है। इसलिए सफेद कपड़े पहनना और माता को सफेद फूल, नारियल और दूध से बनी चीजें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन हमें सिखाता है कि चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ या अंधकार क्यों न हो, सच्ची भक्ति और पवित्रता से हम उस अंधकार को मिटा सकते हैं। माँ महागौरी केवल बाहर की नहीं, बल्कि हमारे भीतर की अशुद्धियों को भी दूर करती हैं। जब हम हलवा, पूरी और नारियल का भोग लगाते हैं, तो यह सिर्फ एक कर्मकांड नहीं होता, बल्कि हम अपना अहंकार और अपने सारे कष्ट माता के चरणों में सौंप रहे होते हैं। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। छोटी कन्याओं को देवी का साक्षात रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है। यह परंपरा हमें स्त्री शक्ति का सम्मान करना सिखाती है। जब आप माता महागौरी की पूजा करते हैं, तो आपका मन एकदम शांत और निर्मल हो जाना चाहिए। किसी के प्रति ईर्ष्या या क्रोध न रखें। राहु का काम है भटकाना, लेकिन महागौरी का काम है सही रास्ता दिखाना। इसलिए, जो भी व्यक्ति इस दिन माता की शरण में आता है, उसे जीवन में सही दिशा और सच्चा सुख प्राप्त होता है।

🪔 नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी पूजा विधि

  1. स्नान और वस्त्रसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  2. स्थान की सफाईपूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  3. मूर्ति स्थापनाएक लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर माँ महागौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  4. दीपक और धूपमाता के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती दिखाएं।
  5. पुष्प अर्पणमाँ महागौरी को सफेद फूल, विशेष रूप से चमेली (Jasmine) के फूल अर्पित करें।
  6. तिलकमाता को रोली, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
  7. भोग और प्रसादप्रसाद के रूप में नारियल, हलवा, पूरी और दूध से बनी मिठाइयां चढ़ाएं।
  8. चांदी की वस्तुयदि संभव हो तो माता को चांदी की कोई छोटी वस्तु भी अर्पित करें।
  9. मंत्र जापरुद्राक्ष या स्फटिक की माला से 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः' मंत्र का सच्चे मन से जाप करें।
  10. आरतीमाता की आरती करें और कपूर जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाएं।
  11. क्षमा प्रार्थनापूजा के अंत में माता से अपनी गलतियों के लिए सच्चे मन से क्षमा मांगें।

5-मिनट विधि

  1. स्नान के बाद साफ सफेद कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं।
  2. माँ महागौरी को चमेली के सफेद फूल और एक साबुत नारियल अर्पित करें।
  3. माता को हलवा और पूरी का भोग लगाएं।
  4. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  5. माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

🛒 नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ महागौरी की तस्वीर या मूर्ति
  • घी का दीपक
  • धूप और अगरबत्ती
  • सफेद फूल (चमेली)
  • साबुत नारियल
  • हलवा और पूरी का प्रसाद
  • रोली और अक्षत

वैकल्पिक

  • चांदी की वस्तुएं
  • दूध से बनी मिठाइयां
  • पीकॉक ग्रीन रंग का वस्त्र माता को ओढ़ाने के लिए
  • कपूर
  • श्रृंगार का सामान

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if चमेली के फूल is unavailable, कोई भी सफेद फूल is traditionally accepted
  • if साबुत नारियल is unavailable, सूखा नारियल (गरी) is traditionally accepted
  • if घी is unavailable, तिल का तेल is traditionally accepted

🌙 नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: अष्टमी का व्रत सुबह सूर्योदय के साथ शुरू होता है और इसे पूरे दिन रखा जाता है।

क्या खा सकते हैं

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
  • उबले हुए आलू
  • साबूदाना
  • ताजे फल
  • दूध, दही, और मेवे

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अन्न (गेहूं, चावल)
  • साधारण नमक
  • प्याज, लहसुन
  • मांसाहार
  • शराब और तंबाकू

पारण: व्रत का पारण नवमी तिथि के दिन या अष्टमी की शाम को कन्या पूजन के बाद किया जा सकता है। सटीक समय के लिए ऊपर दिए गए मुहूर्त को देखें।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: बच्चों, बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को यह कठिन व्रत नहीं करना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज हैं या कोई दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं।

नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं अष्टमी के दिन बाल धो सकती हूँ?

आमतौर पर व्रत वाले दिन बाल धोने से मना किया जाता है। बेहतर होगा कि आप व्रत से एक दिन पहले ही बाल धो लें।

क्या इस दिन नाखून काटना सही है?

नहीं, नवरात्रि के दौरान और विशेषकर अष्टमी के दिन नाखून काटना या बाल काटना शुभ नहीं माना जाता है।

क्या व्रत में साधारण नमक खा सकते हैं?

व्रत के दौरान साधारण नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसकी जगह आप सेंधा नमक (Rock Salt) का इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या अष्टमी के दिन यात्रा कर सकते हैं?

यदि बहुत जरूरी हो तो यात्रा की जा सकती है, लेकिन कोशिश करें कि पूजा और कन्या जिमाने के बाद ही घर से निकलें।

क्या इस दिन नया काम शुरू किया जा सकता है?

हाँ, अष्टमी का दिन बहुत शुभ होता है। किसी भी नए काम की शुरुआत या नई खरीदारी के लिए यह दिन उत्तम माना जाता है।

क्या मैं पूजा के तुरंत बाद खाना खा सकती हूँ?

यदि आपने व्रत नहीं रखा है, तो आप पूजा के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं। व्रत रखने वालों को पारण के समय का पालन करना चाहिए।

क्या रात के समय पूजा की जा सकती है?

हाँ, आप शाम या रात के समय भी माता की आरती और मंत्र जाप कर सकते हैं। शाम की पूजा का अपना विशेष महत्व है।

क्या इस दिन काले कपड़े पहन सकते हैं?

नहीं, माता की पूजा में काले कपड़े पहनना वर्जित माना गया है। सफेद, पीकॉक ग्रीन या हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है।

क्या लहसुन-प्याज का सेवन कर सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। नवरात्रि के दौरान घर में लहसुन और प्याज का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित होता है, यह तामसिक भोजन की श्रेणी में आता है।

क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) में पूजा कर सकते हैं?

परंपरा के अनुसार, इस दौरान सीधे तौर पर पूजा का सामान छूने या मूर्ति स्पर्श करने से बचना चाहिए। आप मानसिक रूप से मंत्र जाप कर सकती हैं।

क्या इस दिन दिन में सो सकते हैं?

व्रत रखने वालों को दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। अपना समय माता के भजन और ध्यान में लगाना चाहिए।

क्या घर को अकेला छोड़ सकते हैं?

यदि घर में अखंड ज्योत जल रही है, तो घर को पूरी तरह से खाली या अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। कोई न कोई सदस्य घर पर रहना चाहिए।

क्या मैं चमड़े की बेल्ट या पर्स का इस्तेमाल कर सकता हूँ?

पूजा के समय चमड़े से बनी चीजों (बेल्ट, पर्स, जूते) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुद्ध माना जाता है।

क्या इस दिन शेविंग कर सकते हैं?

नहीं, नवरात्रि के नौ दिनों तक और खासकर अष्टमी के दिन पुरुषों को शेविंग करने या दाढ़ी बनवाने से बचना चाहिए।

क्या करें

  • Wear clean white clothes.
  • Offer coconut, halwa, puri.
  • Meditate on purity.
  • Chant Devi Mantras.
  • Seek forgiveness sincerely.

क्या न करें

  • Avoid black attire.
  • Do not consume non-vegetarian.
  • Do not engage in negativity.
  • Avoid alcohol and tobacco.

⚠️ आम गलतियाँ

  • पूजा में काले रंग के कपड़ों का प्रयोग करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • माता को भोग लगाते समय तुलसी दल डालना सही नहीं है, इससे अनुष्ठान पूर्ण नहीं होता।
  • कन्या पूजन के बिना अष्टमी की पूजा को अधूरा माना जाता है।
  • व्रत के दौरान किसी के प्रति मन में बुरे विचार लाने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
  • पूजा के स्थान पर साफ-सफाई का ध्यान न रखने से पूजा खंडित मानी जाती है।
  • माता को बासी या सूखे फूल चढ़ाने से पूजा की विधि अधूरी रह जाती है।
  • क्षमा प्रार्थना किए बिना पूजा समाप्त करने से अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता।

📿 मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः

ॐ, ऐं, ह्रीं और क्लीं बीज मंत्रों के साथ हम माँ महागौरी को नमन करते हैं, जो हमें पवित्रता, शांति और राहु के दोषों से मुक्ति प्रदान करती हैं।

108 बार (एक माला) सुबह की पूजा के समय या शाम को आरती से पहले शांत मन से जाप करें।

📖 नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी कथा

माँ महागौरी की कथा बहुत ही प्रेरणादायक और पवित्रता का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या के दौरान उन्होंने अन्न और जल का पूरी तरह से त्याग कर दिया था। सालों तक खुले आसमान के नीचे सर्दी, गर्मी और बरसात सहने के कारण माता का शरीर पूरी तरह से काला पड़ गया था और वे बहुत कमजोर हो गई थीं। उनकी इस कठोर तपस्या और अटूट भक्ति को देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या को स्वीकार किया और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। माता के शरीर पर जमी धूल, मिट्टी और कालेपन को दूर करने के लिए भगवान शिव ने स्वयं पवित्र गंगा जल से उन्हें स्नान कराया। जैसे ही गंगा का पवित्र जल माता के शरीर पर पड़ा, उनका शरीर कांतिवान, अत्यंत गोरा और दूध के समान सफेद हो गया। उनके इस अत्यंत श्वेत और उज्ज्वल रूप के कारण ही उनका नाम 'महागौरी' पड़ा। 'महा' का अर्थ है अत्यंत और 'गौरी' का अर्थ है गोरी या श्वेत। माँ महागौरी का यह स्वरूप हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, यदि मनुष्य सच्चे मन और दृढ़ निश्चय के साथ तपस्या या मेहनत करे, तो उसे ईश्वर की प्राप्ति अवश्य होती है। उनका सफेद रंग और सफेद वस्त्र शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक हैं। माता का वाहन सफेद वृषभ (बैल) है, जो धर्म का प्रतीक माना जाता है। माता के चार हाथ हैं, जिनमें वे त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं, जो भगवान शिव के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाते हैं। यह भी माना जाता है कि जो कोई भी भक्त अष्टमी के दिन सच्चे मन से माँ महागौरी की कथा पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन के सारे पाप और नकारात्मकता उसी तरह धुल जाते हैं, जैसे गंगा जल से माता का शरीर उज्ज्वल हो गया था। माता अपने भक्तों को राहु के बुरे प्रभावों से बचाती हैं और उनके जीवन में सुख, शांति और वैवाहिक आनंद भर देती हैं।

🪔 आरती

माँ महागौरी की आरती पूजा के अंत में की जाती है। आरती के लिए एक थाली में घी का दीपक, कपूर और कुछ फूल रखें। पूरे परिवार के साथ खड़े होकर श्रद्धापूर्वक माता की आरती गाएं। आरती करते समय घंटी और शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है। आरती के बाद कपूर की लौ को पूरे घर में दिखाएं, ताकि घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सके। अंत में माता से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी के उपाय

Money

यदि धन से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं और बेवजह खर्च बढ़ रहा है, तो अष्टमी के दिन माँ महागौरी को एक साबुत नारियल और चांदी का एक छोटा सिक्का अर्पित करें। यह राहु के कारण होने वाले अचानक धन नुकसान को रोकने में मदद करता है और आर्थिक स्थिरता लाता है।

Career

नौकरी या व्यापार में राहु के कारण भ्रम या बाधाएं आ रही हैं, तो माता को चमेली के फूल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। यह आपके करियर में स्पष्टता और सही दिशा प्रदान करता है।

Marriage

विवाह में देरी हो रही है या वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो माँ महागौरी की पूजा सबसे उत्तम है। माता को हलवा और पूरी का भोग लगाएं और सुहाग का सामान अर्पित करें। यह उपाय विवाह से जुड़ी हर बाधा को दूर करने के लिए पारंपरिक रूप से बहुत प्रभावी माना जाता है।

Children

संतान की उन्नति और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, तो अष्टमी के दिन छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें हलवा, पूरी और नारियल का प्रसाद खिलाएं। कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनका आशीर्वाद लेने से संतान के जीवन में आने वाली सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

Home

घर में कलह, अशांति या नकारात्मकता महसूस हो रही है, तो पूजा के समय माता के सामने घी का दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा सा कपूर डालें। आरती के बाद इस कपूर का धुआं पूरे घर में दिखाएं। यह राहु के दुष्प्रभाव को कम करके घर में शांति और पवित्रता लाता है।

Negativity

अज्ञात भय, मानसिक तनाव या बुरे विचार परेशान कर रहे हैं, तो अष्टमी के दिन सफेद कपड़े पहनकर माता का ध्यान करें। माता को दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं और सच्चे मन से क्षमा प्रार्थना करें। महागौरी की कृपा से मन की सारी मलिनता और नकारात्मकता नष्ट हो जाती है।

क्या नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी आपके लिए विशेष है?

नवरात्रि के इस पवित्र दिन पर माँ महागौरी और राहु ग्रह से जुड़े ये उपाय बहुत प्रभावशाली माने जाते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि एक सामान्य लेख में दी गई जानकारी हर व्यक्ति के लिए समान रूप से काम नहीं कर सकती। राहु आपकी कुंडली में किस भाव में बैठा है, किस ग्रह के साथ है और आपकी वर्तमान दशा क्या चल रही है, यह सिर्फ आपकी व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही बताया जा सकता है। यहीं पर त्रिकाल वाणी (Trikaal Vaani) आपकी मदद कर सकता है। यदि आप अपने करियर, पैसे या सही समय के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारी 'Kundli' सेवा आपके लिए है। विवाह में आ रही रुकावटों या जीवनसाथी के साथ तालमेल के लिए 'Kundali Milan' की मदद लें। आपके हाथों की लकीरें आपके भविष्य के बारे में क्या कहती हैं, यह 'Hastrekha' रीडिंग से जाना जा सकता है। और यदि आपको बार-बार अजीब सपने आते हैं, तो 'Swapna Shastra' आपके उन सवालों के जवाब दे सकता है। एक व्यक्तिगत रीडिंग आपको वह सटीक दिशा दे सकती है, जो कोई सामान्य लेख नहीं दे सकता।

हैदराबाद में नवरात्रि दिवस 8 - माँ महागौरी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि का आठवाँ दिन (अष्टमी) 2026 में कब है?

इस वर्ष नवरात्रि का आठवाँ दिन 18 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। पूजा का सटीक समय और मुहूर्त आपके शहर के अनुसार ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

माँ महागौरी की पूजा का सही समय क्या है?

माता की पूजा सुबह सूर्योदय के बाद या शाम के समय की जा सकती है। राहु काल के दौरान पूजा शुरू करने से बचना चाहिए। आपके शहर के लिए राहु काल और शुभ मुहूर्त का समय ऊपर पेज पर दिया गया है।

अष्टमी के दिन माता को क्या भोग लगाना चाहिए?

इस दिन माँ महागौरी को मुख्य रूप से हलवा, पूरी और साबुत नारियल का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा दूध से बनी मिठाइयां भी माता को बहुत प्रिय हैं। यह भोग माता को प्रसन्न करता है और राहु दोष को शांत करता है।

महागौरी की पूजा में कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए?

माता की पूजा करते समय सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन का विशेष रंग पीकॉक ग्रीन (Peacock Green) भी है। काले या बहुत गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

कन्या पूजन अष्टमी को करना चाहिए या नवमी को?

कन्या पूजन अष्टमी और नवमी दोनों दिन किया जा सकता है, यह आपके परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है। बहुत से लोग अष्टमी के दिन माँ महागौरी की पूजा के बाद कन्याओं को हलवा-पूरी खिलाकर व्रत का पारण करते हैं।

क्या अष्टमी का व्रत रखना जरूरी है?

व्रत रखना पूरी तरह से आपकी श्रद्धा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि आप शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, तो व्रत रख सकते हैं। यदि व्रत नहीं रख सकते, तो सात्विक भोजन करके सच्चे मन से माता की पूजा करना भी पर्याप्त है।

व्रत के दौरान क्या-क्या खाया जा सकता है?

व्रत में आप कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, उबले हुए आलू, फल, दूध और मेवे खा सकते हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। अन्न, प्याज और लहसुन का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

माँ महागौरी का मुख्य मंत्र कौन सा है?

माता को प्रसन्न करने के लिए 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः' मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। यह मंत्र मानसिक शांति देता है और राहु के बुरे प्रभावों को दूर करता है।

राहु दोष से मुक्ति के लिए अष्टमी पर क्या करें?

राहु दोष को कम करने के लिए माँ महागौरी को एक साबुत नारियल और सफेद फूल अर्पित करें। माता के सामने घी का दीपक जलाकर ध्यान करें। माता महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं, इसलिए उनकी पूजा से राहु शांत होता है।

क्या मैं इस दिन बाल और नाखून काट सकता हूँ?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान और विशेष रूप से अष्टमी के दिन बाल, नाखून काटना या शेविंग करना शुभ नहीं माना जाता है। ये सभी कार्य व्रत शुरू होने से पहले ही कर लेने चाहिए।

पूजा में सफेद फूलों का क्या महत्व है?

माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत श्वेत और पवित्र है, इसलिए उन्हें सफेद चीजें बहुत प्रिय हैं। चमेली या अन्य सफेद फूल चढ़ाने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं। यह सादगी और आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है।

क्या अष्टमी के दिन नया व्यापार शुरू कर सकते हैं?

हाँ, यह दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आप नया व्यापार शुरू कर सकते हैं या नई खरीदारी कर सकते हैं। शुभ मुहूर्त की जानकारी के लिए ऊपर दी गई टेबल देखें।

अगर चमेली के फूल न मिलें तो क्या करें?

यदि आपको चमेली के फूल नहीं मिल पा रहे हैं, तो परेशान न हों। आप माता को कोई भी सफेद फूल जैसे मोगरा या सफेद गुलाब अर्पित कर सकते हैं। परंपरा में श्रद्धा का महत्व सबसे अधिक होता है।

क्या गर्भवती महिलाएं अष्टमी का व्रत रख सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं को बिना पानी या कठिन व्रत रखने से बचना चाहिए। वे फलाहार कर सकती हैं। हालांकि, व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी है, क्योंकि स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए।

अष्टमी और नवमी की पूजा में क्या अंतर है?

अष्टमी के दिन माँ महागौरी की पूजा होती है, जो शांति और राहु ग्रह से जुड़ी हैं। जबकि नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं और सिद्धियां प्रदान करती हैं। दोनों का अपना अलग महत्व है।

क्या पूजा के समय घर का दरवाजा खुला रखना चाहिए?

हाँ, पूजा और आरती के समय घर का मुख्य द्वार खुला रखना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि माता घर में प्रवेश करती हैं और अपना आशीर्वाद देती हैं। हालांकि, सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

माता को नारियल चढ़ाने का क्या अर्थ है?

नारियल को श्रीफल कहा जाता है और यह पूर्णता का प्रतीक है। माता को नारियल चढ़ाने का अर्थ है अपना अहंकार और अपनी सारी चिंताएं माता के चरणों में सौंप देना। इससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

क्या मैं रात में माता की पूजा कर सकता हूँ?

बिल्कुल, नवरात्रि में माता की पूजा सुबह और शाम दोनों समय की जाती है। यदि आप दिन में काम पर हैं, तो रात के समय स्नान करके माता की आरती और मंत्र जाप कर सकते हैं। सच्ची श्रद्धा समय की मोहताज नहीं होती।

कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?

आमतौर पर नौ कन्याओं और एक बालक (जिसे बटुक भैरव माना जाता है) को भोजन कराने की परंपरा है। यदि नौ कन्याएं न मिलें, तो जितनी कन्याएं मिलें उन्हें ही श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर आशीर्वाद लेना चाहिए।

पूजा के बाद बची हुई सामग्री का क्या करें?

पूजा में इस्तेमाल हुए फूल, पत्ते और अन्य प्राकृतिक सामग्री को किसी साफ नदी, बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो उन्हें किसी पेड़ या पौधे की जड़ में साफ जगह पर रख दें।

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