कोलकाता में नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
इस साल नवरात्रि का नौवां दिन 19 अक्टूबर 2026 को है। यह दिन माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है, जो सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। अश्विन शुक्ल नवमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें, गुलाबी वस्त्र पहनें और माँ को हलवा, पूरी-चना और नारियल का भोग लगाएं। पूजा का सटीक मुहूर्त आप ऊपर टेबल में देख सकते हैं।
🕐 कोलकाता के लिए नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री का समय
| सूर्योदय की तिथि | Ashtami (Shukla Paksha) — 10:52 तक |
| पर्व की तिथि | Navami 10:52 से |
| नक्षत्र | Uttara Ashadha, पाद 3 — 15:38 तक |
| योग · करण | Dhriti · Bava |
| अभिजित मुहूर्त | 10:58-11:43 |
| राहुकाल | 07:03-08:29 |
| यमगंड · गुलिक | 09:55-11:21 · 12:46-14:12 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 05:38 · 17:04 |
कोलकाता (22.5726, 88.3639) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री पर क्या करें
- स्नान करके साफ गुलाबी कपड़े पहनें।
- पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें।
- चौकी पर माँ सिद्धिदात्री की तस्वीर स्थापित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाएं।
- माँ को ताजे फूल, हलवा, पूरी-चना और नारियल अर्पित करें।
- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
- आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Day 9 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| कोलकाता | 05:38 | 10:58-11:43 | 07:03-08:29 |
| दिल्ली एनसीआर | 06:28 | 11:43-12:28 | 07:52-09:16 |
| मुंबई | 06:37 | 11:59-12:46 | 08:03-09:30 |
| नोएडा | 06:27 | 11:42-12:27 | 07:51-09:16 |
| गुरुग्राम | 06:28 | 11:43-12:28 | 07:52-09:17 |
| बेंगलुरु | 06:13 | 11:40-12:27 | 07:40-09:08 |
| हैदराबाद | 06:13 | 11:37-12:23 | 07:39-09:06 |
| पुणे | 06:33 | 11:55-12:42 | 07:59-09:26 |
| चेन्नई | 06:03 | 11:30-12:16 | 07:30-08:58 |
| अहमदाबाद | 06:41 | 12:01-12:46 | 08:06-09:32 |
नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री क्यों मनाया जाता है
🪔 नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री पूजा विधि
- स्नान और वस्त्र — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ गुलाबी रंग के कपड़े पहनें।
- पूजा स्थान की सफाई — अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह से साफ करें।
- चौकी की स्थापना — एक साफ चौकी पर लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाकर माँ सिद्धिदात्री की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक और धूप — माँ के सामने गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती लगाएं।
- पुष्प अर्पण — माँ को ताजे फूल अर्पित करें। गुलाबी या लाल रंग के फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
- भोग लगाना — माँ सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी-चना, तिल, नारियल और एक चांदी का सिक्का अर्पित करें।
- ध्यान और संकल्प — आंखें बंद करके माँ के चार भुजाओं वाले और कमल पर बैठे स्वरूप का ध्यान करें।
- मंत्र जाप — रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
- आरती — कपूर या घी के दीपक से माँ की आरती करें और सभी कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मांगें।
- प्रसाद वितरण — पूजा के बाद हलवा और पूरी-चना का प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।
⚡ 5-मिनट विधि
- सुबह जल्दी नहाकर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर बैठें।
- माँ सिद्धिदात्री की तस्वीर के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।
- ताजे फूल और थोड़ा सा हलवा-पूरी या तिल का प्रसाद चढ़ाएं।
- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
- खड़े होकर आरती करें और प्रसाद ग्रहण करके काम पर निकलें।
🛒 नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री पूजा सामग्री
आवश्यक
- माँ सिद्धिदात्री की तस्वीर या मूर्ति
- घी
- रुई की बत्ती
- धूप
- ताजे फूल
- हलवा
- पूरी-चना
- नारियल
- तिल
- गुलाबी कपड़ा
वैकल्पिक
- चांदी का सिक्का
- श्रृंगार का सामान
- कलश
- आम के पत्ते
- कुमकुम
- अक्षत
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- if चांदी का सिक्का is unavailable, साधारण सिक्का धोकर इस्तेमाल करना is traditionally accepted
- if ताजे फूल is unavailable, अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाना is traditionally accepted
- if हलवा पूरी is unavailable, बताशे या गुड़ का भोग लगाना is traditionally accepted
🌙 नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री व्रत विधि
व्रत कब शुरू करें: व्रत की शुरुआत सुबह स्नान के बाद संकल्प लेकर की जाती है।
क्या खा सकते हैं
- कुट्टू का आटा
- सिंघाड़े का आटा
- साबूदाना
- आलू
- फल
- दूध
- मेवे
क्या नहीं खाना चाहिए
- अन्न (गेहूं, चावल)
- प्याज
- लहसुन
- मांसाहार
- शराब
- बासी भोजन
पारण: व्रत का पारण नवमी तिथि के समापन या दशमी तिथि के आरंभ में, कन्या पूजन के बाद किया जाता है। पारण का सही समय ऊपर टेबल में देखें।
किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें निर्जला या कठोर व्रत नहीं करना चाहिए।
यदि आप गर्भवती हैं, बीमार हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक व्रत के नियम चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं।
❓ नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री: क्या करें और क्या न करें
क्या महानवमी के दिन बाल धो सकते हैं?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान बाल धोना वर्जित माना जाता है। कई लोग नवमी के दिन भी बाल नहीं धोते और दशमी को ही बाल धोते हैं।
क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?
नहीं, नवरात्रि के किसी भी दिन नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता है। इसे व्रत के नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
क्या नवमी की पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं?
हाँ, नवमी की पूजा और कन्या पूजन करने के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं। पारण का सही समय ऊपर दिए गए मुहूर्त में देखें।
क्या हम सेंधा नमक खा सकते हैं?
हाँ, फलाहारी व्रत में सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है। साधारण सफेद नमक खाने से बचना चाहिए।
क्या नवमी के दिन यात्रा कर सकते हैं?
सामान्य यात्रा की जा सकती है, लेकिन अगर आपने घर में कलश स्थापना की है, तो घर को सूना छोड़कर लंबी यात्रा पर जाने से बचना चाहिए।
क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?
हाँ, महानवमी का दिन बहुत शुभ होता है। माँ सिद्धिदात्री सिद्धियां देने वाली हैं, इसलिए नया काम शुरू करना अच्छा माना जाता है।
क्या नवमी के दिन खरीदारी कर सकते हैं?
बिल्कुल। इस दिन कपड़े, गहने या घर का सामान खरीदना शुभ माना जाता है।
क्या पूजा रात में की जा सकती है?
मुख्य पूजा सुबह के मुहूर्त में करनी चाहिए। हालांकि, शाम के समय भी माँ की आरती और दीपदान करना बहुत शुभ होता है।
क्या हम लहसुन-प्याज खा सकते हैं?
नहीं, नवरात्रि के दौरान और विशेषकर नवमी के दिन लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
क्या मासिक धर्म (Periods) में पूजा कर सकते हैं?
पारंपरिक तौर पर मासिक धर्म के दौरान मूर्ति को छूना या पूजा का सामान स्पर्श करना मना है। आप दूर बैठकर मानसिक रूप से माँ का ध्यान और मंत्र जाप कर सकती हैं।
क्या बासी फूल चढ़ा सकते हैं?
नहीं, माँ को हमेशा ताजे फूल ही अर्पित करने चाहिए। बासी या सूखे फूल चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता।
क्या दिन में सो सकते हैं?
व्रत रखने वालों को दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। खाली समय में माँ के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
क्या नवमी के दिन काले कपड़े पहन सकते हैं?
नवरात्रि की पूजा में काले कपड़े पहनना अच्छा नहीं माना जाता। इस दिन गुलाबी या लाल रंग के कपड़े पहनना सबसे उत्तम है।
✓ क्या करें
- Cleanse your puja space.
- Offer fresh flowers.
- Meditate on Maa's form.
- Chant Siddhidatri mantras.
- Distribute prasad to all.
✗ क्या न करें
- Avoid consuming non-vegetarian food.
- Do not use stale offerings.
- Refrain from negative thoughts.
- Do not disrespect any living being.
⚠️ आम गलतियाँ
- पूजा के दौरान मन में नकारात्मक विचार रखने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
- माँ को बासी या जूठा भोग लगाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
- किसी भी जीव या इंसान का अपमान करने से व्रत खंडित माना जाता है।
- बिना स्नान किए या गंदे कपड़े पहनकर पूजा करने से अनुष्ठान अपूर्ण रहता है।
- पूजा के समय दीपक का बीच में बुझ जाना एक त्रुटि मानी जाती है, इसलिए पर्याप्त घी रखें।
- माँ सिद्धिदात्री की पूजा में नारियल और तिल का भोग न लगाने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
- आरती के बाद परिवार और आस-पड़ोस में प्रसाद न बांटने से अनुष्ठान पूर्ण नहीं माना जाता।
📿 मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः
ॐ, ऐं, ह्रीं, क्लीं बीज मंत्रों के साथ हम सिद्धियां प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री को नमस्कार करते हैं।
108 बार (एक माला) सुबह स्नान के बाद, पूजा के समय जब दीपक जला लें, तब शांत मन से बैठकर जाप करें।
📖 नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री कथा
🪔 आरती
माँ सिद्धिदात्री की आरती पूजा के अंत में की जाती है। एक साफ थाली में कपूर या गाय के घी का दीपक जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएं। आरती करते समय थाली को माँ की तस्वीर के सामने गोलाकार घुमाएं। आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले माँ को आरती दें, फिर स्वयं और परिवार के अन्य सदस्यों को आरती दें। अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री के उपाय
धन और आर्थिक समस्याएं
यदि आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, तो महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री को चांदी का सिक्का और तिल अर्पित करें। केतु ग्रह के प्रभाव से अचानक होने वाले धन खर्च को रोकने के लिए यह उपाय बहुत कारगर माना जाता है। पूजा के बाद इस सिक्के को अपनी तिजोरी में रख लें।
नौकरी और करियर की बाधाएं
करियर में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री के सामने घी का दीपक जलाएं और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। केतु दोष के कारण नौकरी में आने वाली अस्थिरता इस उपाय से दूर होती है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
विवाह में देरी या परेशानियां
विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए माँ को गुलाबी रंग के वस्त्र और ताजे फूल अर्पित करें। केतु के कारण रिश्तों में आने वाली गलतफहमियां दूर करने के लिए माँ से प्रार्थना करें। यह उपाय विवाह के मार्ग में आ रही सभी बाधाओं को शांत करने में मदद करता है।
बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य
बच्चों के जीवन में एकाग्रता और स्वास्थ्य के लिए महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री को हलवा और पूरी-चना का भोग लगाएं। केतु ग्रह मानसिक भटकाव पैदा करता है, इसलिए माँ का ध्यान करने से बच्चों को आध्यात्मिक और मानसिक बल मिलता है। यह प्रसाद बच्चों को अपने हाथों से खिलाएं।
घर में क्लेश और अशांति
पारिवारिक जीवन में शांति बनाए रखने के लिए नवमी के दिन घर के सभी सदस्य मिलकर माँ की आरती करें और नारियल का भोग लगाएं। केतु दोष के कारण घर में होने वाले अकारण विवाद इस उपाय से शांत होते हैं और घर का वातावरण सकारात्मक और प्रेमपूर्ण बनता है।
नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञात भय
मन में अज्ञात भय या नकारात्मक विचार आते हों, तो माँ सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए तिल का दान करें। केतु ग्रह डर और मानसिक उलझन का कारक है। माँ की उपासना और तिल के दान से केतु का बुरा प्रभाव खत्म होता है और मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त होती है।
क्या नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री आपके लिए विशेष है?
कोलकाता में नवरात्रि दिवस 9 - माँ सिद्धिदात्री — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि का नौवां दिन (महानवमी) 2026 में कब है?
इस वर्ष नवरात्रि का नौवां दिन 19 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो नवरात्रि पर्व का समापन दिन भी है। यह तिथि अश्विन शुक्ल नवमी के अंतर्गत आती है।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त (puja time) क्या है?
पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और पंचांग पर निर्भर करता है। आप इस पेज के ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर के अनुसार राहुकाल, अभिजित मुहूर्त और पूजा का सही समय देख सकते हैं। हमेशा राहुकाल से बचकर शुभ मुहूर्त में ही पूजा करनी चाहिए।
नवमी के दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?
इस दिन सुबह स्नान करके गुलाबी वस्त्र पहनने चाहिए और माँ सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। माँ को हलवा, पूरी-चना और नारियल का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही कन्या पूजन करके अपना व्रत खोलना चाहिए।
महानवमी के व्रत में क्या खाना चाहिए?
व्रत के दौरान आप कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, ताजे फल और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं। सेंधा नमक का उपयोग फलाहारी भोजन में किया जा सकता है। दिन भर खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी और फलों का रस पीते रहें।
इस दिन पूजा में किन चीजों का परहेज करना चाहिए?
नवमी की पूजा में बासी फूल या जूठे प्रसाद का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति या जीव के प्रति मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री क्या है?
पूजा के लिए माँ की तस्वीर, गाय का शुद्ध घी, रुई की बत्ती, ताजे फूल, धूप और गुलाबी कपड़ा आवश्यक है। भोग के लिए हलवा, पूरी-चना, तिल और नारियल जरूर रखें। अगर संभव हो तो पूजा में एक चांदी का सिक्का भी रखें।
माँ सिद्धिदात्री की पौराणिक कथा क्या है?
कथा के अनुसार भगवान शिव ने माँ शक्ति की घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर माँ सिद्धिदात्री प्रकट हुईं। माँ की कृपा से ही शिव जी को सभी आठ सिद्धियां प्राप्त हुईं और उनका आधा शरीर देवी का हो गया। इसी कारण भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर कहा जाता है।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा का क्या महत्व (Significance) है?
माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों और निधियों की स्वामिनी हैं। जो भक्त नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा करता है, उसे सांसारिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी मिलता है। यह दिन नवरात्रि की तपस्या को पूर्णता प्रदान करने का दिन है।
क्या महानवमी के दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?
हाँ, महानवमी का दिन बहुत ही शुभ और ऊर्जावान माना जाता है। माँ सिद्धिदात्री सफलता और सिद्धियां देने वाली देवी हैं। इसलिए इस दिन कोई भी नया व्यापार, नौकरी या महत्वपूर्ण काम शुरू करना बहुत ही लाभकारी होता है।
क्या नवमी के दिन खरीदारी (Shopping) करना शुभ है?
बिल्कुल, नवमी के दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन आप नए कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण, वाहन या घर का सामान खरीद सकते हैं। यह घर में सुख और समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है।
माँ सिद्धिदात्री का मुख्य मंत्र कौन सा है?
माँ का मुख्य मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः' है। पूजा के समय रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। यह मंत्र मन को शांति देता है और सभी मनोकामनाएं पूरी करता है।
नवमी के दिन क्या दान करना चाहिए?
इस दिन तिल, अन्न, वस्त्र और फलों का दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। विशेष रूप से कन्याओं को हलवा, पूरी-चना खिलाकर उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए। इससे माँ सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं और घर में बरकत आती है।
केतु दोष के निवारण के लिए नवमी को क्या उपाय करें?
केतु दोष शांत करने के लिए माँ सिद्धिदात्री को तिल और चांदी का सिक्का अर्पित करें। माँ के मंत्रों का ध्यानपूर्वक जाप करें और गरीबों को भोजन कराएं। यह उपाय केतु से जुड़ी मानसिक उलझनों और बाधाओं को दूर करता है।
अलग-अलग शहरों में नवमी का समय क्यों बदल जाता है?
हिंदू पंचांग सूर्योदय और चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जो हर भौगोलिक स्थान के लिए अलग होता है। इसलिए दिल्ली में जो मुहूर्त है, वह मुंबई या कोलकाता में कुछ मिनटों का अंतर ले सकता है। सटीक समय के लिए हमेशा अपने शहर की टेबल देखें।
अष्टमी और नवमी की पूजा में क्या अंतर है?
अष्टमी के दिन माँ महागौरी की पूजा होती है, जबकि नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। अष्टमी राहु ग्रह से संबंधित है, वहीं नवमी केतु ग्रह से जुड़ी है। नवमी का दिन नवरात्रि के समापन और सिद्धियों की प्राप्ति का मुख्य दिन होता है।
क्या नवमी के दिन व्रत का पारण (Vrat Paran) किया जा सकता है?
हाँ, नवमी तिथि के समापन या कन्या पूजन के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं। पारण का सही समय नवमी और दशमी तिथि के योग पर निर्भर करता है। आप ऊपर दिए गए मुहूर्त सेक्शन में पारण का सटीक समय देख सकते हैं।
क्या गर्भवती महिलाएं नवमी का व्रत रख सकती हैं?
पारंपरिक तौर पर व्रत रखा जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य सबसे पहले है। गर्भवती महिलाओं को निर्जला या कठोर व्रत करने से बचना चाहिए और थोड़ी-थोड़ी देर में फलाहार लेते रहना चाहिए। व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
नवमी के दिन कन्या पूजन का क्या महत्व है?
कन्याओं को माँ दुर्गा का साक्षात रूप माना जाता है। नवमी के दिन नौ कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोना और उन्हें हलवा-पूरी का भोजन कराना बहुत शुभ होता है। इससे नवरात्रि का व्रत पूर्ण माना जाता है और माँ का आशीर्वाद मिलता है।
अगर चांदी का सिक्का न हो तो पूजा कैसे करें?
अगर आपके पास चांदी का सिक्का नहीं है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। आप किसी भी साधारण सिक्के को साफ पानी या गंगाजल से धोकर माँ को अर्पित कर सकते हैं। सच्ची श्रद्धा और भाव ही पूजा में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या नवमी की रात को भी पूजा की जा सकती है?
मुख्य पूजा और भोग सुबह के मुहूर्त में लगाना सबसे उत्तम होता है। हालांकि, शाम और रात के समय माँ की आरती करना और दीपक जलाना भी बहुत शुभ है। आप रात के समय शांत मन से माँ के मंत्रों का मानसिक जाप कर सकते हैं।
कोलकाता में आने वाले त्योहार
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Anant Chaturdashi 20262026-09-25
- Pitru Paksha 20262026-09-26
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
- Navratri Day 2 - Maa Brahmacharini 20262026-10-12
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