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मुंबई में नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

2026 में नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर को है। इस दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है, जिनके मस्तक पर आधा चाँद है। यह दिन साहस पाने और नकारात्मकता दूर करने का है। आप दूध की मिठाई का भोग लगाएँ और रॉयल ब्लू कपड़े पहनें। पूजा का सटीक समय ऊपर टेबल में देखें।

🕐 मुंबई के लिए नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा का समय

तिथिTritiya (Shukla Paksha)23:28 तक
नक्षत्रVishakha, पाद 201:43 (14 Oct) तक
योग · करणPriti · Taitila
अभिजित मुहूर्त12:00-12:47
राहुकाल15:18-16:45
यमगंड · गुलिक09:29-10:56 · 12:24-13:51
सूर्योदय · सूर्यास्त06:35 · 18:13

मुंबई (19.076, 72.8777) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा पर क्या करें

  1. पूजा की जगह को साफ करके माँ चंद्रघंटा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  2. माता को जल, कुमकुम और सफेद या पीले फूल अर्पित करें।
  3. गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं।
  4. "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः" मंत्र का जाप करें।
  5. दूध से बनी मिठाई, खीर और चांदी का सिक्का माता को भेंट करें।
  6. कपूर जलाकर श्रद्धा भाव से माता की आरती उतारें।
  7. मन में शांति रखते हुए नकारात्मक विचारों और क्रोध से दूरी बनाएं।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Day 3 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
मुंबई06:3512:00-12:4715:18-16:45
दिल्ली एनसीआर06:2411:44-12:2914:58-16:24
नोएडा06:2311:43-12:2814:57-16:23
गुरुग्राम06:2511:44-12:3014:58-16:24
बेंगलुरु06:1311:42-12:2915:01-16:29
हैदराबाद06:1211:38-12:2514:57-16:24
पुणे06:3111:57-12:4315:15-16:42
कोलकाता05:3510:58-11:4514:15-15:42
चेन्नई06:0211:31-12:1814:50-16:18
अहमदाबाद06:3912:02-12:4815:18-16:45

नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा क्यों मनाया जाता है

नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा सुशोभित है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माँ का शरीर सोने के समान उज्ज्वल है, उनकी दस भुजाएं हैं जिनमें खड्ग, बाण, त्रिशूल जैसे अस्त्र-शस्त्र सुसज्जित हैं, और वे सिंह पर सवार हैं। यह स्वरूप बताता है कि माता शांत और सौम्य तो हैं, लेकिन अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा युद्ध के लिए तैयार भी रहती हैं। धार्मिक मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से मन को असीम शांति मिलती है। जो लोग जीवन में डर, घबराहट या नकारात्मक शक्तियों से परेशान रहते हैं, उन्हें इस दिन माता की उपासना जरूर करनी चाहिए। माता के घंटे की ध्वनि से आस-पास की सभी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। यह दिन हमें साहस और निर्भयता का पाठ पढ़ाता है। ज्योतिष के अनुसार, माँ चंद्रघंटा का संबंध शुक्र (Venus) ग्रह से माना गया है। शुक्र ग्रह हमारे जीवन में सुख, शांति, आकर्षण, कला और प्रेम का कारक है। जब आप नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की सच्चे मन से पूजा करते हैं, तो शुक्र ग्रह से जुड़े शुभ फल मिलने की मान्यता है। अगर कुंडली में शुक्र कमजोर हो, तो इस दिन माता को दूध की मिठाई, खीर और सफेद फूल चढ़ाने से शुक्र के दोषों में राहत मिलती है। रॉयल ब्लू (Royal Blue) रंग इस दिन का विशेष रंग है, जो शांति और गहराई का प्रतीक है। इस दिन का महत्व सिर्फ बाहरी पूजा तक सीमित नहीं है। यह आंतरिक अनुशासन और आत्म-नियंत्रण का भी दिन है। माता का यह रूप हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां क्यों न हों, हमें भीतर से शांत रहना चाहिए और बाहर से हर परिस्थिति का डटकर सामना करना चाहिए। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि इस दिन पीले या सफेद फूल अर्पित करने और ध्यान लगाने से मानसिक तनाव दूर होता है। माँ चंद्रघंटा की उपासना से जीवन में सकारात्मकता आती है। यह दिन उन लोगों के लिए बहुत खास है जो अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना चाहते हैं। माता की कृपा से भक्त के अंदर वीरता और निर्भयता के साथ-साथ सौम्यता और विनम्रता का भी विकास होता है। यही कारण है कि नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा को जीवन में संतुलन लाने वाला माना गया है।

🪔 नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा पूजा विधि

  1. स्थान की सफाईपूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  2. आचमनपूजा शुरू करने से पहले तीन बार जल पीकर आचमन करें और अपने शरीर व मन की शुद्धि का भाव रखें।
  3. मूर्ति स्थापनाएक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माँ चंद्रघंटा की तस्वीर या मूर्ति रखें।
  4. ध्यान और संकल्पहाथ में थोड़ा जल और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें और माता के स्वरूप का ध्यान करें।
  5. जल और स्नानमाता की मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराएं या जल के छींटे दें।
  6. वस्त्र और श्रृंगारमाता को वस्त्र अर्पित करें और कुमकुम, रोली या चंदन का तिलक लगाएं।
  7. पुष्प अर्पणमाता को विशेष रूप से सफेद और पीले फूल अर्पित करें, यह उन्हें अत्यंत प्रिय हैं।
  8. दीपक और धूपगाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती या धूप दिखाएं।
  9. मंत्र जाप"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  10. भोग लगानामाता को दूध से बनी मिठाई, खीर और फलों का भोग लगाएं। साथ में चांदी का सिक्का भी रखें।
  11. आरतीपूजा के अंत में कपूर जलाकर माँ चंद्रघंटा की आरती पूरे श्रद्धा भाव से करें।
  12. क्षमा प्रार्थनापूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माता से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह उठकर स्नान करें और पूजा की जगह पर माँ चंद्रघंटा के सामने घी का दीपक जलाएं।
  2. माता को कुमकुम का तिलक लगाकर सफेद या पीले फूल अर्पित करें।
  3. दूध की मिठाई या खीर का भोग लगाएं, जो माता को बहुत पसंद है।
  4. "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः" मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
  5. कपूर से आरती करें और दिन भर मन में सकारात्मक विचार बनाए रखें।

🛒 नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ चंद्रघंटा की तस्वीर या मूर्ति
  • गाय के घी का दीपक
  • कुमकुम और रोली
  • सफेद और पीले फूल
  • दूध की मिठाई या खीर
  • कपूर
  • धूप या अगरबत्ती

वैकल्पिक

  • चांदी का सिक्का
  • लाल चुनरी
  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • सूखे मेवे

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर सफेद फूल न मिलें, तो कोई भी ताजे फूल चढ़ाना पारंपरिक रूप से मान्य है।
  • अगर दूध की मिठाई न हो, तो बताशे या मिश्री का भोग लगा सकते हैं।
  • अगर चांदी का सिक्का न हो, तो सामान्य सिक्का धोकर रख सकते हैं।

🌙 नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।

क्या खा सकते हैं

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
  • साबूदाना
  • उबले आलू
  • ताजे फल
  • दूध और दही
  • सूखे मेवे
  • सेंधा नमक

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अनाज (गेहूं, चावल, दालें)
  • साधारण सफेद नमक
  • प्याज और लहसुन
  • मांसाहार
  • शराब

पारण: अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद, या कई लोग शाम की पूजा के बाद फलाहार करके व्रत खोलते हैं।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बहुत बुजुर्ग लोग, और जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें व्रत न रखने की सलाह दी जाती है।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी तरह की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं।

नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा: क्या करें और क्या न करें

क्या तीसरे दिन बाल धो सकते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान बाल धोने से मना किया जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह से पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करता है।

क्या व्रत में साधारण नमक खा सकते हैं?

नहीं, व्रत के दौरान साधारण सफेद नमक खाना वर्जित होता है। इसके स्थान पर केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाना चाहिए।

क्या इस दिन नए कपड़े खरीद सकते हैं?

हाँ, यह दिन शुक्र ग्रह से जुड़ा है जो सुख का कारक है। इसलिए इस दिन नए कपड़े या गहने खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

मुख्य पूजा सुबह के समय की जाती है, लेकिन शाम को सूर्यास्त के बाद भी आरती करना पारंपरिक रूप से मान्य है।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

नवरात्रि के नौ दिनों तक नाखून काटना या बाल कटवाना पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है। इसलिए इससे बचना चाहिए।

क्या व्रत के दौरान दिन में सो सकते हैं?

व्रत के दौरान दिन में सोना वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे व्रत का अनुशासन टूटता है।

क्या इस दिन यात्रा करना शुभ है?

हाँ, अगर कोई जरूरी काम हो तो आप यात्रा कर सकते हैं। बस यात्रा शुरू करने से पहले माता का ध्यान जरूर करें।

क्या पीरियड्स में पूजा कर सकते हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार पीरियड्स के दौरान मूर्ति को छूना या पूजा स्थल पर जाना मना होता है। आप दूर बैठकर मन में माता का ध्यान कर सकती हैं।

क्या घर में लहसुन-प्याज बन सकता है?

यदि घर में किसी ने व्रत रखा है या माता की स्थापना की है, तो घर में लहसुन-प्याज बनाना पूरी तरह वर्जित है।

क्या इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं?

माँ चंद्रघंटा साहस की देवी हैं। कोई भी नया और शुभ काम शुरू करने के लिए यह दिन बहुत ही उत्तम है।

क्या व्रत में चाय या कॉफी पी सकते हैं?

हाँ, फलाहारी व्रत में सीमित मात्रा में चाय या कॉफी पीने की अनुमति होती है। लेकिन इसे बहुत अधिक पीने से बचें।

क्या पूजा में काले कपड़े पहन सकते हैं?

नवरात्रि की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है। इस दिन रॉयल ब्लू या पीले कपड़े पहनना शुभ है।

क्या शाम को आरती के बाद खाना खा सकते हैं?

जो लोग एक समय का व्रत रखते हैं, वे शाम की आरती के बाद सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) ग्रहण कर सकते हैं।

क्या व्रत में बाहर का जूस पी सकते हैं?

व्रत में ताजे फलों का जूस घर पर निकालकर पीना सुरक्षित है। बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद जूस से बचना चाहिए क्योंकि उनमें नमक हो सकता है।

क्या करें

  • Meditate on inner peace.
  • Offer yellow flowers.
  • Chant Maa Chandraghanta mantras.
  • Maintain ritual purity.
  • Practice self-control.

क्या न करें

  • Avoid non-vegetarian food.
  • Do not consume alcohol.
  • Refrain from negativity.
  • Avoid unnecessary arguments.

⚠️ आम गलतियाँ

  • माता को बासी या सूखे फूल चढ़ाने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रत के दौरान मन में क्रोध या नकारात्मक विचार लाने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
  • बिना संकल्प लिए पूजा शुरू करने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • भोग में लहसुन या प्याज का स्पर्श भी पूजा की पवित्रता को कम कर देता है।
  • आरती के समय कपूर का उपयोग न करना एक सामान्य भूल है।
  • मंत्र का गलत उच्चारण करने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
  • दिन में सोने से व्रत का अनुशासन टूटता है और इसे अधूरा माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः

हे माँ चंद्रघंटा, जो ज्ञान, शक्ति और आकर्षण का स्वरूप हैं, मैं आपको नमन करता हूँ।

कम से कम 108 बार (एक माला)। सुबह की पूजा के समय या शाम को आरती से पहले, शांत मन से बैठकर जाप करें।

📖 नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब स्वर्ग पर असुरों का आतंक बहुत बढ़ गया था, तब महिषासुर नामक राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन छीन लिया। महिषासुर स्वर्ग पर राज करने लगा और सभी देवता परेशान होकर त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—के पास गए। देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया है और देवताओं को वहां से निकाल दिया है। यह सुनकर ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव को बहुत क्रोध आया। उनके क्रोध से एक तेज उत्पन्न हुआ। सभी देवताओं के शरीर से भी तेज निकला और यह सारा तेज एक जगह इकट्ठा होकर एक अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली देवी के रूप में प्रकट हुआ। भगवान शिव ने देवी को अपना त्रिशूल दिया, भगवान विष्णु ने अपना चक्र दिया। इसी तरह सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र देवी को सौंप दिए। देवराज इंद्र ने अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतारकर एक घंटा देवी को दिया। सूर्य ने अपना तेज और तलवार दी, और सवारी के लिए एक शेर दिया गया। देवी का यह स्वरूप, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा था, माँ चंद्रघंटा कहलाईं। जब माँ चंद्रघंटा पूरी तरह से शस्त्रों से सुसज्जित होकर युद्ध के मैदान में उतरीं, तो उनके घंटे की भयानक ध्वनि से ही असुर कांपने लगे। माँ का यह रूप बहुत ही विशाल और तेजोमय था। महिषासुर ने जब देवी को देखा तो उसने अपने असुरों की सेना को उन पर हमला करने का आदेश दिया। लेकिन माँ चंद्रघंटा ने अपने अस्त्रों और शस्त्रों से असुरों की सेना का विनाश करना शुरू कर दिया। उनके घंटे की टंकार से ही कई दानव मूर्छित हो गए। अंततः माता ने अपने पराक्रम से महिषासुर और उसके सेनापतियों का वध कर दिया और देवताओं को उनका स्वर्ग वापस दिलाया। यह कथा हमें बताती है कि माँ चंद्रघंटा अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। जो भी सच्चे मन से माता की उपासना करता है, माता उसके जीवन से हर प्रकार के भय, संकट और नकारात्मकता को दूर कर देती हैं।

🪔 आरती

माँ चंद्रघंटा की आरती सुबह की मुख्य पूजा के अंत में और शाम को सूर्यास्त के बाद की जाती है। आरती के समय एक साफ थाली में गाय के घी का दीपक और कपूर जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएं। आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले माता को आरती दिखाएं और फिर घर के सभी सदस्य आरती लें। यह घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का पारंपरिक तरीका है।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा के उपाय

धन और आर्थिक रुकावटें

धन से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए माँ चंद्रघंटा की पूजा विशेष मानी जाती है। चूँकि इस दिन के स्वामी शुक्र देव हैं, जो धन और ऐश्वर्य के कारक हैं, इसलिए माता को चांदी का सिक्का और दूध की खीर का भोग लगाएं। पूजा के बाद उस सिक्के को अपनी तिजोरी या पर्स में रख लें।

करियर और नौकरी में असफलता

अगर नौकरी या व्यापार में आत्मविश्वास की कमी महसूस हो रही है या बार-बार असफलता मिल रही है, तो यह उपाय करें। माता चंद्रघंटा साहस और निर्भयता की देवी हैं। पूजा के समय माता को पीले फूल अर्पित करें और प्रार्थना करें। इससे कार्यक्षेत्र में आने वाली नकारात्मकता दूर होती है।

विवाह में आ रही अड़चनें

विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए शुक्र ग्रह की शांति बहुत जरूरी होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माता को लाल चुनरी और सफेद फूल अर्पित करें। पारंपरिक मान्यता है कि शुक्र के शुभ प्रभाव से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और रिश्ते मजबूत होते हैं।

बच्चों की सुरक्षा और विकास

बच्चों के विकास और उन्हें बुरी नजर से बचाने के लिए माँ चंद्रघंटा की उपासना बहुत फलदायी है। माता के घंटे की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है। पूजा के समय बच्चों को पास बिठाएं और माता के चरणों में रखा हुआ थोड़ा सा कुमकुम उनके माथे पर लगाएं।

घर में क्लेश और अशांति

घर में अगर अक्सर क्लेश रहता है या भारीपन महसूस होता है, तो नवरात्रि के तीसरे दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। साथ ही घर के हर कोने में कपूर का धुआं दिखाएं। यह घर से हर तरह की नकारात्मकता को बाहर निकालने का पारंपरिक उपाय है।

मन में अज्ञात भय और नकारात्मकता

मन में अज्ञात भय या नकारात्मक विचार आते हों, तो माँ चंद्रघंटा का ध्यान सबसे अच्छा उपाय है। माता के "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें और माता से साहस देने की प्रार्थना करें। रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहनकर ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है।

क्या नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा आपके लिए विशेष है?

त्योहारों के उपाय और पूजा विधि हमें सकारात्मक दिशा देते हैं, लेकिन इंटरनेट पर दी गई जानकारी हमेशा सामान्य होती है। माँ चंद्रघंटा का दिन शुक्र ग्रह से जुड़ा है, यह सच है, लेकिन शुक्र आपकी जन्म कुंडली में किस घर में बैठा है, यह हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। एक सामान्य लेख आपके जीवन की सटीक स्थिति नहीं बता सकता। यहीं पर व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श काम आता है। त्रिकाल वाणी की Kundli सेवा आपके करियर, धन और जीवन की दशा का सटीक समय बताती है। विवाह से जुड़ी उलझनों के लिए Kundali Milan आपसी तालमेल की सही जानकारी देता है। जन्म का समय न होने पर Hastrekha आपके हाथों की लकीरों से भविष्य का रास्ता दिखाती है। वहीं, Swapna Shastra आपके सपनों में छिपे सवालों के जवाब देता है। जीवन की बड़ी समस्याओं के लिए अपनी व्यक्तिगत कुंडली का आकलन कराना हमेशा अधिक स्पष्टता देता है।

मुंबई में नवरात्रि दिवस 3 - माँ चंद्रघंटा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि का तीसरा दिन 2026 में कब है?

2026 में नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन अश्विन शुक्ल तृतीया तिथि के अंतर्गत आता है। इस दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और पंचांग पर निर्भर करता है। आप इस पेज के ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर के अनुसार आज का अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल देख सकते हैं। राहुकाल को छोड़कर आप दिन के किसी भी शुभ समय में माता की पूजा कर सकते हैं।

तीसरे दिन माता को क्या भोग लगाना चाहिए?

माँ चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजें बहुत प्रिय हैं। इसलिए इस दिन माता को मुख्य रूप से दूध की मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति आती है।

माँ चंद्रघंटा का प्रिय रंग कौन सा है?

इस दिन के लिए रॉयल ब्लू (Royal Blue) रंग को सबसे शुभ माना गया है। यह रंग शांति, गहराई और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। पूजा के समय इस रंग के कपड़े पहनना और माता को इसी रंग की चुनरी ओढ़ाना बहुत अच्छा माना जाता है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

पूजा के दौरान "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः" मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना पारंपरिक रूप से शुभ माना गया है। शांत मन से इस मंत्र का उच्चारण करने से मानसिक शांति और साहस मिलता है।

क्या नवरात्रि के तीसरे दिन व्रत रखना जरूरी है?

व्रत रखना पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कई लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहले और आखिरी दिन व्रत करते हैं। यदि आप व्रत नहीं रख सकते, तो केवल सात्विक भोजन करके और पूजा करके भी माता की कृपा पा सकते हैं।

व्रत में क्या खा सकते हैं और क्या नहीं?

व्रत के दौरान आप कुट्टू का आटा, साबूदाना, उबले आलू, फल और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं। इस दौरान साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। अनाज, गेहूं, लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है।

क्या व्रत के दौरान पानी पी सकते हैं?

हाँ, नवरात्रि के फलाहारी व्रत में पानी पीने की पूरी छूट होती है। इसे निर्जला व्रत नहीं माना जाता है, इसलिए आप दिन भर पर्याप्त पानी पी सकते हैं। नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन भी व्रत के दौरान ऊर्जा बनाए रखने के लिए किया जा सकता है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा में कौन से फूल चढ़ाने चाहिए?

माता को सफेद और पीले फूल विशेष रूप से प्रिय हैं। आप पूजा में सफेद गुलाब, चमेली या गेंदे के फूल अर्पित कर सकते हैं। ताजे फूलों का उपयोग करने से पूजा का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।

क्या इस दिन नया काम या व्यापार शुरू कर सकते हैं?

माँ चंद्रघंटा साहस और निर्भयता की देवी हैं, इसलिए यह दिन नई शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। अगर आप कोई नया व्यापार या काम शुरू करना चाहते हैं, तो माता का आशीर्वाद लेकर कर सकते हैं। ऊपर दिए गए शुभ मुहूर्त में काम शुरू करना और भी फलदायी होता है।

माँ चंद्रघंटा की कथा का मुख्य संदेश क्या है?

माता की कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, हमें साहस नहीं हारना चाहिए। माता का स्वरूप बताता है कि हमें भीतर से शांत रहना चाहिए, लेकिन अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

व्रत खोलने का समय आपके द्वारा लिए गए संकल्प पर निर्भर करता है। कुछ लोग शाम की आरती के बाद फलाहार करके अपना व्रत खोल लेते हैं। वहीं, जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं, वे नवमी या दशमी के दिन कन्या पूजन के बाद ही अन्न ग्रहण करते हैं।

क्या तीसरे दिन की पूजा रात में की जा सकती है?

मुख्य पूजा सुबह सूर्योदय के बाद करना सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि, शाम के समय सूर्यास्त के बाद भी माता की आरती और वंदना की जाती है। अगर आप दिन में काम के कारण समय नहीं निकाल पाते हैं, तो शाम को शांत मन से पूजा कर सकते हैं।

अगर पूजा के लिए चांदी का सिक्का न हो तो क्या करें?

चांदी का सिक्का अर्पित करना एक पारंपरिक उपाय है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। अगर आपके पास चांदी का सिक्का नहीं है, तो आप किसी भी सामान्य सिक्के को साफ पानी से धोकर माता के सामने रख सकते हैं। पूजा में सामग्री से ज्यादा आपकी सच्ची श्रद्धा मायने रखती है।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। लंबी अवधि तक भूखे रहने से आपके और बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

माँ चंद्रघंटा और माँ शैलपुत्री की पूजा में क्या अंतर है?

माँ शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन होती है और उनका संबंध चंद्रमा से है। जबकि माँ चंद्रघंटा की पूजा तीसरे दिन होती है और ज्योतिष में इनका संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है। दोनों के मंत्र, भोग और ध्यान का स्वरूप पूरी तरह अलग होता है।

क्या इस दिन कपड़े या गहने खरीदना शुभ होता है?

चूँकि माँ चंद्रघंटा का संबंध शुक्र ग्रह से है, जो सुख और ऐश्वर्य का कारक है, इसलिए इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है। आप कपड़े, आभूषण या घर का सामान खरीद सकते हैं। बस ध्यान रखें कि खरीदारी राहुकाल के समय न की जाए।

पूजा के दौरान किस दिशा में मुख करना चाहिए?

पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है। माता की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना भी इसी अनुसार करनी चाहिए। इस दिशा में मुख करके ध्यान लगाने से मन अधिक एकाग्र होता है।

क्या शहर के अनुसार पूजा के समय में बदलाव होता है?

हाँ, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए शुभ मुहूर्त भी बदल जाते हैं। किसी अन्य जगह का समय देखकर पूजा करने से मुहूर्त चूक सकता है। इसी वजह से हमारी वेबसाइट पर आपके शहर के अनुसार लाइव पंचांग का समय दिखाया जाता है।

अगर व्रत के नियमों में गलती हो जाए तो क्या करें?

इंसान होने के नाते भूल होना स्वाभाविक है। अगर अनजाने में आपसे व्रत का कोई नियम टूट जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बस माता के सामने हाथ जोड़कर सच्चे मन से क्षमा मांग लें और अपनी आगे की पूजा पूरे भाव से जारी रखें।

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