मुंबई · Maharashtra

मुंबई में नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

इस वर्ष नवरात्रि का छठा दिन 16 अक्टूबर 2026 को है। यह दिन माँ कात्यायनी की पूजा और अश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि को समर्पित है। देवी को शहद, गेंदे के फूल और केसरिया चावल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इनकी उपासना से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में बृहस्पति ग्रह को बल मिलता है।

🕐 मुंबई के लिए नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी का समय

तिथिShashthi (Shukla Paksha)05:54 (17 Oct) तक
नक्षत्रJyeshtha, पाद 406:47 तक
योग · करणShobhana · Kaulava
अभिजित मुहूर्त12:00-12:46
राहुकाल10:56-12:23
यमगंड · गुलिक15:17-16:44 · 08:02-09:29
सूर्योदय · सूर्यास्त06:36 · 18:11

मुंबई (19.076, 72.8777) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी पर क्या करें

  1. पूजा से पहले स्नान करके साफ और संभव हो तो ग्रे (Grey) रंग के वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल पर माँ कात्यायनी का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  3. देवी के सामने सरसों के तेल का दीपक और धूप या अगरबत्ती जलाएं।
  4. माँ को गेंदे के फूल, केसरिया चावल और नारियल अर्पित करें।
  5. देवी को विशेष रूप से शहद का भोग लगाएं।
  6. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' मंत्र का स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें।
  7. अंत में आरती करें और क्षमा प्रार्थना करते हुए पूजा संपन्न करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Day 6 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
मुंबई06:3612:00-12:4610:56-12:23
दिल्ली एनसीआर06:2611:43-12:2810:41-12:06
नोएडा06:2511:42-12:2810:40-12:05
गुरुग्राम06:2611:43-12:2910:41-12:06
बेंगलुरु06:1311:41-12:2710:36-12:04
हैदराबाद06:1211:37-12:2410:33-12:01
पुणे06:3211:56-12:4210:52-12:19
कोलकाता05:3710:59-11:4509:55-11:22
चेन्नई06:0211:30-12:1710:26-11:54
अहमदाबाद06:4012:01-12:4710:58-12:24

नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी क्यों मनाया जाता है

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की आराधना का दिन है। यह देवी दुर्गा का अत्यंत उग्र और शक्तिशाली स्वरूप है। माँ कात्यायनी का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला है और उनकी चार भुजाएं हैं। वे सिंह पर सवार हैं और उनके हाथों में तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। यह स्वरूप एक योद्धा देवी का है, जिन्होंने दुष्टों के नाश और धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिया था। जब महिषासुर का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराने के लिए इसी स्वरूप ने उसका वध किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन ने ही सबसे पहले इनकी पूजा की थी, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है जो अपने जीवन में साहस, शक्ति और विजय की कामना करते हैं। देवी का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म की ही हमेशा जीत होती है। माँ कात्यायनी का सीधा संबंध बृहस्पति (Jupiter) ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, विवाह, सुख, संतान और सौभाग्य का कारक माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है या नीच स्थिति में होता है, उनके लिए नवरात्रि का यह छठा दिन बहुत लाभकारी माना जाता है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि माँ कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करने से बृहस्पति ग्रह को बल मिलता है और जीवन में स्थिरता आती है। विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए माँ कात्यायनी की पूजा को बहुत अचूक माना गया है। प्राचीन काल में ब्रज की गोपियों ने भी भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर माँ कात्यायनी की ही पूजा की थी। इसलिए, जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में देरी हो रही हो, वे इस दिन सच्चे मन से देवी की उपासना करते हैं। इस दिन ग्रे (Grey) रंग का विशेष महत्व बताया गया है। देवी को शहद और गेंदे के फूल अत्यंत प्रिय हैं। शहद का भोग लगाने से जीवन में मिठास और आकर्षण बढ़ता है। यह पूजा केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि अपने भीतर के भय को दूर कर आत्मविश्वास जगाने का एक माध्यम है। माँ कात्यायनी की कृपा से साधक के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है और वह जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना करने में सक्षम बनता है।

🪔 नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी पूजा विधि

  1. स्नान और स्वच्छतासुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की अच्छी तरह से सफाई करें, क्योंकि देवी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है।
  2. पूजा स्थान की तैयारीएक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माँ कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश देवता और गणेश जी का ध्यान करें।
  3. संकल्प लेनाहाथ में थोड़ा जल, फूल और केसरिया चावल लेकर सच्चे मन से पूजा का संकल्प लें। यह किसी भी पारंपरिक पूजा का पहला और अहम हिस्सा है।
  4. दीपक प्रज्वलित करनादेवी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही वातावरण को शुद्ध करने के लिए धूप या अगरबत्ती भी जलाएं।
  5. देवी का ध्यानमाँ कात्यायनी के चार भुजाओं वाले, सिंह पर सवार और स्वर्ण के समान चमकीले योद्धा स्वरूप का ध्यान करें।
  6. फूल और अक्षत अर्पणमाँ कात्यायनी को ताजे गेंदे के फूल और केसरिया चावल (अक्षत) अर्पित करें। प्रतिदिन ताजे फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  7. भोग लगानादेवी को शहद, नारियल, ताजे फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। शहद का भोग माँ कात्यायनी को विशेष रूप से प्रिय है।
  8. मंत्र जापरुद्राक्ष या स्फटिक की माला से 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' मंत्र का पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ जाप करें।
  9. आरती करनापूजा के अंत में खड़े होकर माँ कात्यायनी की आरती करें। आरती के माध्यम से देवी से आशीर्वाद और कृपा की कामना करें।
  10. क्षमा प्रार्थनापूजा में हुई किसी भी ज्ञात या अज्ञात भूल के लिए देवी से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें और पूजा को संपन्न करें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर माँ कात्यायनी का चित्र या मूर्ति रखें।
  2. देवी के सामने सरसों के तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा की शुरुआत करें।
  3. माँ कात्यायनी को गेंदे के फूल, केसरिया चावल और विशेष रूप से शहद का भोग अर्पित करें।
  4. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' मंत्र का कम से कम 11 या 21 बार स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें।
  5. अंत में देवी की आरती करें और अपने दिन की शुरुआत के लिए उनका आशीर्वाद ग्रहण करें।

🛒 नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ कात्यायनी की मूर्ति या चित्र
  • शहद
  • गेंदे के फूल
  • केसरिया चावल (अक्षत)
  • सरसों का तेल
  • रुई की बत्ती
  • धूप या अगरबत्ती
  • नारियल

वैकल्पिक

  • ग्रे (Grey) रंग का वस्त्र
  • ताजे फल
  • मिठाइयां
  • कुमकुम और रोली
  • गंगाजल
  • सुपारी और लौंग

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • If Marigold flowers are unavailable, any yellow or red fresh flowers are traditionally accepted.
  • If Saffron rice is unavailable, regular white rice mixed with a little turmeric is traditionally accepted.
  • If Mustard oil is unavailable, regular ghee is traditionally accepted for the diya.

🌙 नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लिया जाता है।

क्या खा सकते हैं

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
  • साबूदाना
  • उबले हुए आलू
  • ताजे फल
  • दूध, दही और पनीर
  • सूखे मेवे (Dry fruits)

क्या नहीं खाना चाहिए

  • सभी प्रकार के अनाज और दालें
  • मांसाहार (Non-vegetarian food)
  • प्याज और लहसुन
  • साधारण नमक (सेंधा नमक का प्रयोग करें)
  • कठोर शब्द और नकारात्मक विचार

पारण: व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद या पारंपरिक पारिवारिक नियमों के अनुसार नवमी/दशमी के दिन किया जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: छोटे बच्चे, बुजुर्ग, और वे लोग जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें निर्जला या कठिन व्रत रखने से बचना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा (medication) ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। पारंपरिक नियम चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं हैं।

नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी: क्या करें और क्या न करें

क्या नवरात्रि के छठे दिन बाल धो सकते हैं?

पारंपरिक रूप से नवरात्रि के दौरान बाल धोने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यदि स्वच्छता के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, तो कई परिवार सादे पानी से बाल धोने को स्वीकार्य मानते हैं। यह पूरी तरह से आपकी पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

क्या मैं आज नाखून काट सकता हूँ?

नवरात्रि के नौ दिनों तक नाखून काटना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है। माना जाता है कि व्रत और पूजा के दौरान शरीर के किसी भी हिस्से को काटने या छीलने से बचना चाहिए। इसलिए इसे नवरात्रि के बाद ही काटना बेहतर है।

क्या पूजा के बाद हम खाना खा सकते हैं?

यदि आपने व्रत नहीं रखा है, तो आप पूजा संपन्न होने के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं। यदि आपने व्रत रखा है, तो आप केवल फलाहार या व्रत का भोजन ही ग्रहण कर सकते हैं। भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग बिल्कुल न करें।

क्या इस दिन यात्रा करना शुभ है?

हाँ, माँ कात्यायनी की पूजा के दिन यात्रा करना शुभ माना जाता है, क्योंकि वे विजय और साहस की देवी हैं। यात्रा शुरू करने से पहले राहुकाल का समय अवश्य जांच लें, जो कि ऊपर दी गई टेबल में उपलब्ध है। राहुकाल में यात्रा शुरू करने से बचना चाहिए।

क्या मैं आज नया काम शुरू कर सकता हूँ?

माँ कात्यायनी का दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। देवी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है, जो सफलता और ज्ञान का प्रतीक है। नए काम की शुरुआत के लिए ऊपर दिए गए शुभ मुहूर्त (जैसे अभिजित मुहूर्त) का पालन करें।

क्या आज शॉपिंग की जा सकती है?

नवरात्रि के दौरान खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। आप कपड़े, गहने या घर का सामान खरीद सकते हैं। बस यह ध्यान रखें कि चमड़े की वस्तुएं या कोई भी अशुद्ध सामग्री खरीदने से बचें।

क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?

हाँ, व्रत के दौरान साधारण नमक की जगह सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग करना पूरी तरह से पारंपरिक और मान्य है। सेंधा नमक को शुद्ध माना जाता है और यह फलाहारी भोजन का मुख्य हिस्सा है। आप इसे आलू या साबूदाने की खिचड़ी में डाल सकते हैं।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

नवरात्रि की पूजा सुबह और शाम दोनों समय की जाती है। यदि आप सुबह समय नहीं निकाल पाते हैं, तो शाम को गोधूलि बेला या रात में भी देवी की पूजा कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि पूजा के समय एकाग्रता और स्वच्छता बनी रहे।

क्या मैं आज लहसुन-प्याज खा सकता हूँ?

नहीं, नवरात्रि के दौरान लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। इन्हें तामसिक भोजन माना जाता है जो मन में चंचलता और नकारात्मकता लाते हैं। व्रत न रखने वालों को भी इन नौ दिनों में सात्विक भोजन ही करना चाहिए।

क्या पीरियड (मासिक धर्म) के दौरान पूजा कर सकते हैं?

पारंपरिक नियमों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान मूर्ति को छूना या पूजा स्थल पर जाना वर्जित होता है। हालांकि, आप मन ही मन माँ कात्यायनी का ध्यान कर सकती हैं और मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकती हैं। मानसिक पूजा को हमेशा शुद्ध माना गया है।

क्या मैं व्रत में चाय या कॉफी पी सकता हूँ?

हाँ, अधिकांश पारंपरिक मान्यताओं में व्रत के दौरान चाय या कॉफी पीने की अनुमति होती है। हालांकि, कुछ लोग इसे पूरी तरह से फलाहार नहीं मानते। यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में इसे स्वीकार किया जाता है, तो आप इसका सेवन कर सकते हैं।

क्या आज के दिन काले कपड़े पहन सकते हैं?

नवरात्रि की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनना पारंपरिक रूप से शुभ नहीं माना जाता है। इस दिन माँ कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए ग्रे (Grey), पीला या लाल रंग पहनना सबसे अच्छा माना गया है। काले रंग को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

क्या मैं आज बाल कटवा सकता हूँ?

नवरात्रि के दौरान बाल कटवाना या शेविंग करना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि व्रत और अनुष्ठान के दौरान शरीर के बालों को काटना पूजा की शुद्धता को भंग करता है। इसलिए इसे दशमी तिथि के बाद ही करना चाहिए।

क्या करें

  • Maintain cleanliness and purity.
  • Offer fresh flowers daily.
  • Chant Mantras with devotion.
  • Observe fasting if possible.
  • Mediate on Maa Katyayani.

क्या न करें

  • Avoid consuming non-vegetarian food.
  • Do not use harsh words.
  • Do not neglect cleanliness.
  • Avoid negative thoughts.

⚠️ आम गलतियाँ

  • पूजा के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखना और अशुद्ध हाथों से पूजा सामग्री को छूना।
  • देवी को बासी या मुरझाए हुए फूल अर्पित करना, जिससे पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रत के दौरान मन में नकारात्मक विचार लाना या दूसरों के लिए कठोर शब्दों का प्रयोग करना।
  • मंत्र जाप करते समय उच्चारण में स्पष्टता न होना या जल्दबाजी में मंत्र पढ़ना।
  • देवी को भोग लगाते समय शहद को शामिल न करना, जो कि माँ कात्यायनी को अत्यंत प्रिय है।
  • पूजा के समय संकल्प न लेना, जिसके बिना किसी भी पारंपरिक पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता।
  • व्रत के नियमों का पालन करते हुए भी दिन भर सोते रहना और देवी के ध्यान से दूर रहना।

📿 मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः

यह मंत्र माँ कात्यायनी की शक्तियों का आह्वान करता है। इसमें 'ऐं' सरस्वती का, 'ह्रीं' लक्ष्मी का और 'क्लीं' महाकाली का बीज मंत्र है, जो देवी कात्यायनी को नमन करता है।

108 बार (एक माला) जाप करना पारंपरिक रूप से शुभ माना गया है। सुबह की पूजा के समय या शाम को गोधूलि बेला में दीपक जलाकर जाप करना सबसे उपयुक्त होता है।

📖 नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए और उन्हीं के गोत्र में महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया। महर्षि कात्यायन माँ भगवती के परम भक्त थे। उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने कई वर्षों तक देवी की घोर तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। महर्षि की सच्ची भक्ति और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय बाद, जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार पृथ्वी और स्वर्ग दोनों जगह बहुत बढ़ गया, तब सभी देवता परेशान होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास गए। महिषासुर को वरदान था कि कोई भी पुरुष या देवता उसे नहीं मार सकता, केवल एक स्त्री ही उसका वध कर सकती है। तब त्रिदेवों और सभी देवताओं ने अपने-अपने तेज का अंश देकर एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन के घर पुत्री रूप में प्रकट होने और सबसे पहले उनके द्वारा पूजे जाने के कारण इन देवी का नाम 'कात्यायनी' पड़ा। माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजोमय और स्वर्ण के समान चमकीला था। भगवान शिव ने उन्हें अपना त्रिशूल दिया, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, और अन्य देवताओं ने भी उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। देवी का वाहन सिंह था। अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर माँ कात्यायनी ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर बार-बार अपना रूप बदल कर देवी को छलने का प्रयास कर रहा था। अंततः, जब वह भैंसे के रूप में आया, तब माँ कात्यायनी ने अपनी तलवार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया। यह कथा हमें सिखाती है कि जब भी बुराई और अहंकार अपनी सीमा पार करते हैं, तब ईश्वरीय शक्ति किसी न किसी रूप में आकर धर्म की स्थापना करती है। माँ कात्यायनी का यह योद्धा स्वरूप हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने का साहस और प्रेरणा देता है।

🪔 आरती

पूजा के अंत में माँ कात्यायनी की आरती की जाती है। आरती हमेशा खड़े होकर, श्रद्धा और पूरे मन से करनी चाहिए। एक थाली में घी या कपूर का दीपक जलाएं और उसे देवी के सामने घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं। आरती करते समय घंटी और शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है। यह वह समय है जब आप देवी से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हैं और उनका आशीर्वाद ग्रहण करते हैं। आरती के बाद परिवार के सभी सदस्यों को आरती लेनी चाहिए।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी के उपाय

money

आर्थिक स्थिरता के लिए माँ कात्यायनी की पूजा करते समय उन्हें केसरिया चावल अर्पित करें। चूँकि यह दिन बृहस्पति (Jupiter) से जुड़ा है, इसलिए पीली या केसरिया चीजों का दान करने से धन से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि इससे आय के नए स्रोत खुलते हैं और आर्थिक संकट दूर होता है।

career

नौकरी या व्यापार में उन्नति के लिए देवी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' मंत्र का जाप करें। बृहस्पति ग्रह ज्ञान और करियर का कारक है, इसलिए इस दिन देवी से करियर में सही निर्णय लेने की शक्ति मांगने से सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

marriage

यह दिन विशेष रूप से विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए जाना जाता है। विवाह में हो रही देरी को दूर करने के लिए माँ कात्यायनी को शहद और गेंदे के फूल अर्पित करें। मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की पूजा करने और बृहस्पति को मजबूत करने से सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

children

संतान प्राप्ति या बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए माँ कात्यायनी को नारियल और मिठाइयों का भोग लगाएं। बृहस्पति ग्रह संतान का भी कारक माना गया है। देवी से प्रार्थना करें कि वे आपके बच्चों को साहस और विद्या प्रदान करें। इससे बच्चों के जीवन में सकारात्मकता और अनुशासन आता है।

home

घर में सुख-शांति और क्लेश को दूर करने के लिए पूजा के समय ग्रे (Grey) रंग के वस्त्र पहनें या देवी को अर्पित करें। घर के मंदिर में नियमित रूप से ताजे फूल चढ़ाएं। देवी का यह योद्धा स्वरूप घर से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर पारिवारिक रिश्तों में मिठास भरता है।

negativity

मन से भय और नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए माँ कात्यायनी के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप का ध्यान करें। देवी को लाल या पीले पुष्प अर्पित करते हुए प्रार्थना करें। यह उपाय आपके भीतर छिपे डर को समाप्त करता है और आपको मानसिक रूप से मजबूत व साहसी बनाता है।

क्या नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी आपके लिए विशेष है?

त्योहारों के पन्नों पर दी गई जानकारी सामान्य होती है। माँ कात्यायनी की पूजा और बृहस्पति ग्रह से जुड़े उपाय सभी के लिए लाभकारी बताए गए हैं। लेकिन, हर व्यक्ति का जीवन और उसकी कुंडली अलग होती है। एक सामान्य उपाय हर किसी की विशिष्ट समस्या का समाधान नहीं कर सकता, क्योंकि आपकी कुंडली में बृहस्पति किस भाव में बैठा है, यह केवल आपका व्यक्तिगत चार्ट ही बता सकता है। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। यदि आप करियर, धन, या अपनी वर्तमान दशा के बारे में सटीक जानकारी चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग आपके लिए है। विवाह में आ रही अड़चनों या सही जीवनसाथी के चुनाव के लिए Kundali Milan उपयोगी है। अगर आप अपने हाथों की लकीरों में छिपे भविष्य को समझना चाहते हैं, तो Hastrekha रीडिंग चुनें। वहीं, अगर आपको बार-बार अजीब सपने आते हैं और आप उनका अर्थ जानना चाहते हैं, तो Swapna Shastra रीडिंग आपके सवालों के जवाब दे सकती है।

मुंबई में नवरात्रि दिवस 6 - माँ कात्यायनी — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि का छठा दिन 2026 में कब है?

इस वर्ष नवरात्रि का छठा दिन 16 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन माँ कात्यायनी की आराधना और अश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि के लिए समर्पित है। आपके शहर के अनुसार तिथि के शुरू और समाप्त होने का सटीक समय ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

माँ कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

पूजा का सबसे शुभ समय अभिजित मुहूर्त माना जाता है। चूंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए मुहूर्त का समय भी बदलता रहता है। आप अपने शहर का सटीक शुभ मुहूर्त और राहुकाल ऊपर दिए गए लाइव पंचांग में देख सकते हैं।

माँ कात्यायनी को क्या भोग लगाना चाहिए?

माँ कात्यायनी को विशेष रूप से शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप उन्हें ताजे फल, नारियल और मिठाइयां भी अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि शहद का भोग लगाने से जीवन में मिठास आती है और देवी प्रसन्न होती हैं। भोग लगाते समय स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

छठे दिन की पूजा का क्या महत्व है?

यह दिन शक्ति, साहस और विजय प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। माँ कात्यायनी की पूजा से कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। विशेष रूप से यह पूजा विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक मानी जाती है।

विवाह में देरी के लिए माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करें?

विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए देवी को ताजे गेंदे के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' मंत्र का 108 बार सच्चे मन से जाप करें। प्राचीन काल में गोपियों ने भी इसी प्रकार देवी की पूजा की थी।

क्या मैं इस दिन नया व्यापार शुरू कर सकता हूँ?

हाँ, माँ कात्यायनी का दिन किसी भी नए कार्य या व्यापार की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। देवी का संबंध बृहस्पति से है जो सफलता और वृद्धि का कारक है। बस नया काम शुरू करने से पहले राहुकाल का समय अवश्य टाल दें।

व्रत के दौरान मुझे क्या खाना चाहिए?

व्रत के दौरान आप ताजे फल, दूध, दही, साबूदाना और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं। उबले हुए आलू और सूखे मेवे भी व्रत के भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भोजन पूरी तरह से सात्विक हो।

क्या व्रत में सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं?

हाँ, नवरात्रि के व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करना पूरी तरह से मान्य है। सेंधा नमक को शुद्ध माना जाता है और यह फलाहार का एक हिस्सा है। आप इसे अपने व्रत के आलू या साबूदाने में स्वाद के लिए मिला सकते हैं।

माँ कात्यायनी का मंत्र क्या है और उसे कैसे जपें?

माँ कात्यायनी का मुख्य मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः' है। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से 108 बार करना चाहिए। जाप करते समय मन को शांत रखें और देवी के योद्धा स्वरूप का ध्यान करें।

क्या मैं पूजा के बाद पानी पी सकता हूँ?

यदि आपने निर्जला व्रत नहीं रखा है, तो आप पूजा के बाद पानी पी सकते हैं। अधिकांश लोग नवरात्रि में फलाहारी व्रत रखते हैं जिसमें जल ग्रहण करने की अनुमति होती है। यह पूरी तरह से आपके संकल्प और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है।

क्या इस दिन यात्रा करना शुभ माना जाता है?

माँ कात्यायनी विजय की देवी हैं, इसलिए इस दिन यात्रा करना आमतौर पर शुभ माना जाता है। हालांकि, यात्रा शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उस समय राहुकाल न चल रहा हो। राहुकाल का समय आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।

माँ कात्यायनी का स्वरूप कैसा है?

माँ कात्यायनी का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला और अत्यंत तेजोमय है। उनकी चार भुजाएं हैं और वे सिंह पर सवारी करती हैं। उनके हाथों में तलवार और कमल का फूल होता है, जो उन्हें एक उग्र योद्धा देवी का रूप देता है।

पूजा में कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए?

नवरात्रि के छठे दिन ग्रे (Grey) रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है। यह रंग माँ कात्यायनी को समर्पित है। यदि आपके पास इस रंग के कपड़े नहीं हैं, तो आप लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र भी पहन सकते हैं।

अगर गेंदे के फूल न मिलें तो क्या करें?

यदि आपको ताजे गेंदे के फूल नहीं मिल पा रहे हैं, तो चिंता न करें। आप देवी को कोई भी ताजे पीले या लाल फूल अर्पित कर सकते हैं। पूजा में सामग्री से ज्यादा आपकी श्रद्धा और भावना का महत्व होता है।

क्या पीरियड के दौरान माँ कात्यायनी की पूजा कर सकते हैं?

मासिक धर्म के दौरान पूजा स्थल पर जाना या मूर्ति को छूना पारंपरिक रूप से वर्जित है। लेकिन आप मानसिक रूप से माँ कात्यायनी का ध्यान कर सकती हैं। दूर बैठकर मंत्रों का मानसिक जाप करना पूरी तरह से मान्य और फलदायी माना गया है।

क्या इस दिन बाल और नाखून काट सकते हैं?

नवरात्रि के नौ दिनों तक बाल और नाखून काटना पारंपरिक रूप से वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि अनुष्ठान के दौरान शरीर के किसी भी हिस्से को काटने से पूजा की शुद्धता प्रभावित होती है। इसलिए इसे दशमी तिथि के बाद ही करना उचित है।

बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए क्या करें?

बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए माँ कात्यायनी को केसरिया चावल और शहद अर्पित करें। पीले रंग की वस्तुओं का दान करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। सच्चे मन से देवी की पूजा करने से बृहस्पति के शुभ फल प्राप्त होते हैं।

क्या मैं पूजा में सरसों के तेल का दीपक जला सकता हूँ?

हाँ, माँ कात्यायनी की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि सरसों का तेल उपलब्ध न हो, तो आप शुद्ध घी का दीपक भी जला सकते हैं। दीपक को देवी के सामने सुरक्षित स्थान पर रखें।

व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। कई परिवारों में नवमी या दशमी के दिन कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोला जाता है। पारण हमेशा सात्विक भोजन से और माता का आशीर्वाद लेकर करना चाहिए।

अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?

पूजा के मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करते हैं, जो हर शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग होते हैं। इसलिए दिल्ली और मुंबई में पूजा का समय एक जैसा नहीं हो सकता। आप अपने शहर का सटीक समय ऊपर दिए गए पंचांग में देख सकते हैं।

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