मुंबई में पितृ पक्ष
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है। यह भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से आरंभ होता है। इन दिनों में हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। आप ऊपर दिए गए मुहूर्त के अनुसार पूजा और दान कर सकते हैं।
🕐 मुंबई के लिए पितृ पक्ष का समय
| तिथि | Purnima (Shukla Paksha) — 22:19 तक |
| नक्षत्र | Purva Bhadrapada, पाद 4 — 11:32 तक |
| योग · करण | Ganda · Vishti |
| अभिजित मुहूर्त | 12:05-12:52 |
| राहुकाल | 09:30-10:59 |
| यमगंड · गुलिक | 13:58-15:28 · 06:31-08:00 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:31 · 18:27 |
मुंबई (19.076, 72.8777) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ पितृ पक्ष पर क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, धुले हुए कपड़े पहनें।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है।
- तांबे के लोटे में शुद्ध जल, काला तिल और सफेद फूल लें।
- अपने गोत्र और पूर्वजों का नाम लेते हुए जल अर्पित (तर्पण) करें।
- ब्राह्मणों या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराएं।
- गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन का एक हिस्सा अलग निकालें।
- शाम के समय दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Purnima pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). Suryodaya-vyapini: the tithi prevailing at sunrise governs the day, which is the general rule for vrats where no special kaal applies.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में पितृ पक्ष का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| मुंबई | 06:31 | 12:05-12:52 | 09:30-10:59 |
| दिल्ली एनसीआर | 06:15 | 11:48-12:35 | 09:13-10:42 |
| नोएडा | 06:14 | 11:47-12:34 | 09:12-10:41 |
| गुरुग्राम | 06:15 | 11:48-12:36 | 09:13-10:43 |
| बेंगलुरु | 06:12 | 11:46-12:34 | 09:11-10:40 |
| हैदराबाद | 06:09 | 11:43-12:30 | 09:08-10:37 |
| पुणे | 06:27 | 12:01-12:49 | 09:26-10:55 |
| कोलकाता | 05:30 | 11:03-11:51 | 08:28-09:58 |
| चेन्नई | 06:01 | 11:35-12:23 | 09:00-10:29 |
| अहमदाबाद | 06:33 | 12:06-12:54 | 09:31-11:01 |
पितृ पक्ष क्यों मनाया जाता है
🪔 पितृ पक्ष पूजा विधि
- स्नान और संकल्प — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, धुले हुए कपड़े पहनें। फिर श्राद्ध कर्म करने का संकल्प लें।
- दिशा का चुनाव — दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। शास्त्रों में यह दिशा पितरों की मानी गई है।
- कुशा का उपयोग — अपने हाथ की अनामिका उंगली (ring finger) में कुशा घास से बनी अंगूठी (पवित्री) पहनें।
- जल तैयार करना — एक तांबे के बर्तन में साफ जल, थोड़ा सा गंगाजल, काले तिल, जौ और सफेद फूल मिलाएं।
- तर्पण करना — दोनों हाथों से अंजलि बनाकर दक्षिण दिशा की ओर जल गिराएं। जल गिराते समय अपने पूर्वजों का ध्यान करें।
- पिंड दान — पके हुए चावल, गाय के दूध और काले तिल को मिलाकर पिंड बनाएं और उन्हें पूर्वजों के निमित्त अर्पित करें।
- पंचबली कर्म — भोजन बनने के बाद सबसे पहले पांच हिस्से अलग निकालें - गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और देवताओं के लिए।
- ब्राह्मण भोज — किसी योग्य ब्राह्मण को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं। भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए।
- दक्षिणा और विदाई — भोजन के बाद ब्राह्मण को अपनी क्षमता के अनुसार वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर सम्मान के साथ विदा करें।
- परिवार का भोजन — ब्राह्मणों और पंचबली का भोजन निकालने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन ग्रहण करें।
⚡ 5-मिनट विधि
- सुबह स्नान करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- तांबे के लोटे में जल और काले तिल लेकर अपने पूर्वजों का नाम लेते हुए तर्पण करें।
- घर में सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) बनाएं।
- गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन का एक हिस्सा जरूर निकालें।
- किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं या सीधा (कच्चा राशन) दान करें।
🛒 पितृ पक्ष पूजा सामग्री
आवश्यक
- काले तिल
- कुशा (एक प्रकार की घास)
- तांबे का लोटा
- सफेद फूल
- गंगाजल
- जौ
वैकल्पिक
- सफेद वस्त्र दान के लिए
- पिंड दान के लिए पके हुए चावल
- तुलसी के पत्ते
- गाय का कच्चा दूध
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- if कुशा is unavailable, साधारण साफ घास या केवल जल से तर्पण is traditionally accepted
- if तांबे का लोटा is unavailable, पीतल या चांदी का बर्तन is traditionally accepted
- if सफेद फूल is unavailable, बिना फूल के केवल काले तिल और जल से तर्पण is traditionally accepted
- if गंगाजल is unavailable, शुद्ध ताजे पानी का उपयोग is traditionally accepted
❓ पितृ पक्ष: क्या करें और क्या न करें
क्या पितृ पक्ष में बाल और नाखून काट सकते हैं?
नहीं, पारंपरिक रूप से इन दिनों में बाल, दाढ़ी और नाखून काटना वर्जित माना जाता है।
क्या हम नए कपड़े खरीद सकते हैं?
श्राद्ध के दिनों में अपने लिए नए कपड़े खरीदना या पहनना आमतौर पर टाला जाता है। यह सादगी और संयम का समय है।
क्या इस दौरान नया काम शुरू किया जा सकता है?
परंपरा के अनुसार, कोई भी नया व्यापार या शुभ कार्य इन 16 दिनों में शुरू नहीं किया जाता।
क्या पितृ पक्ष में यात्रा कर सकते हैं?
सामान्य यात्राएं की जा सकती हैं, लेकिन तीर्थ यात्राओं को छोड़कर किसी बड़े जश्न या छुट्टी के लिए यात्रा करना उचित नहीं माना जाता।
क्या हम घर में लहसुन और प्याज खा सकते हैं?
नहीं, इन दिनों में घर का भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा से दूर रहें।
क्या महिलाएं तर्पण कर सकती हैं?
परंपरागत रूप से तर्पण पुरुष करते हैं, लेकिन यदि घर में कोई पुरुष नहीं है, तो महिलाएं भी अपने पितरों को जल दे सकती हैं।
क्या पूजा शाम को की जा सकती है?
श्राद्ध और तर्पण का कार्य हमेशा दोपहर के समय (कुतप काल) में किया जाता है, शाम या रात में नहीं।
क्या हम रोजमर्रा की शॉपिंग कर सकते हैं?
जरूरत का सामान और राशन खरीदा जा सकता है, लेकिन लग्जरी आइटम, गाड़ी या गहने खरीदने से बचना चाहिए।
क्या हम दूसरों के घर का खाना खा सकते हैं?
श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिए कि वह केवल अपने घर का बना सात्विक भोजन ही करे।
क्या पितृ पक्ष में साबुन और शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं?
हां, साफ-सफाई जरूरी है। आप साबुन और शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं, बस सादगी बनाए रखें।
क्या हम घर में पूजा-पाठ और आरती कर सकते हैं?
हां, भगवान की नियमित पूजा की जा सकती है, लेकिन कोई विशेष अनुष्ठान या हवन आदि आमतौर पर नहीं किए जाते।
अगर पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद न हो तो क्या करें?
यदि तिथि याद नहीं है, तो आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं।
क्या हम इस दौरान दान कर सकते हैं?
दान करना इस समय बहुत शुभ माना जाता है। आप भोजन, वस्त्र और कच्चे राशन का दान कर सकते हैं।
⚠️ आम गलतियाँ
- तर्पण करते समय दक्षिण की बजाय किसी अन्य दिशा में मुख करना अनुष्ठान को अधूरा बनाता है।
- श्राद्ध के भोजन में लहसुन या प्याज का उपयोग करने से पितृ कर्म अपूर्ण माना जाता है।
- लोहे या प्लास्टिक के बर्तनों में जल और तिल रखकर तर्पण करना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता।
- ब्राह्मण को भोजन कराए बिना या गाय, कुत्ते, कौवे का हिस्सा निकाले बिना खुद भोजन कर लेना श्राद्ध को अधूरा छोड़ देता है।
- शाम ढलने के बाद या रात के समय तर्पण करना शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है।
- श्राद्ध के दिन घर में क्लेश या गुस्सा करने से पितरों तक आपकी श्रद्धा नहीं पहुंच पाती।
- काले तिल की जगह सफेद तिल का प्रयोग करने से तर्पण की विधि अधूरी मानी जाती है।
📖 पितृ पक्ष कथा
🪔 आरती
पितृ पक्ष में पितरों की कोई विशेष आरती गाने की परंपरा नहीं है। इस दौरान मुख्य रूप से तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है। हालांकि, आप अपने घर के मंदिर में नियमित रूप से देवी-देवताओं की जो आरती करते हैं, उसे जारी रख सकते हैं। शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त एक सरसों के तेल का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। यह दीपक उन्हें शांति और प्रकाश प्रदान करता है।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार पितृ पक्ष के उपाय
धन और आर्थिक समस्या
धन और आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए पितृ पक्ष के दौरान हर दिन तर्पण करें। मान्यता है कि जब पितृ तृप्त होते हैं, तो वे परिवार में बरकत का आशीर्वाद देते हैं। अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद को कच्चा राशन दान करने से भी आर्थिक रुकावटें दूर होती हैं।
करियर और नौकरी में बाधा
यदि नौकरी या व्यापार में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो पितृ पक्ष में कौवों और कुत्तों को नियमित रूप से भोजन कराएं। हमारे पूर्वज अक्सर इन रूपों में आकर हमारा अंश ग्रहण करते हैं। उन्हें संतुष्ट करने से करियर में आ रही अड़चनें शांत होती हैं और नए रास्ते खुलते हैं।
विवाह में देरी
विवाह में हो रही देरी को दूर करने के लिए पितृ पक्ष में सात्विक जीवन अपनाएं। पूर्णिमा या अमावस्या के दिन गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं। पितरों का आशीर्वाद घर में मांगलिक कार्यों की राह आसान बनाता है और विवाह में आ रही रुकावटों को कम करता है।
संतान सुख की प्राप्ति
संतान सुख या बच्चों की तरक्की के लिए पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को आदर सहित घर बुलाकर भोजन कराएं। भोजन में खीर अवश्य शामिल करें। माना जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है।
पारिवारिक क्लेश और अशांति
घर में होने वाले रोज-रोज के झगड़ों और क्लेश को शांत करने के लिए पितृ पक्ष में हर शाम दक्षिण दिशा में एक सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा पितरों की मानी जाती है। यह प्रकाश घर में शांति लाता है और पारिवारिक रिश्तों में मिठास घोलता है।
नकारात्मक ऊर्जा और भय
मन में अज्ञात भय या नकारात्मक ऊर्जा महसूस होने पर पितृ पक्ष के दौरान गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और इसका पुण्य अपने पितरों को समर्पित करें। इससे न केवल पितरों को शांति मिलती है, बल्कि आपके आस-पास की नकारात्मकता भी दूर होती है।
क्या पितृ पक्ष आपके लिए विशेष है?
मुंबई में पितृ पक्ष — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पितृ पक्ष 2026 में कब से शुरू हो रहा है?
इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से आरंभ हो रहा है। यह भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक चलता है। इस दिन से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करना शुरू करते हैं।
श्राद्ध और तर्पण का सही समय (muhurat) क्या होता है?
तर्पण और श्राद्ध हमेशा दोपहर के समय किए जाते हैं, जिसे कुतप काल कहा जाता है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त का समय ऊपर टेबल में दिया गया है। कृपया तर्पण के लिए उसी समय का पालन करें, क्योंकि सुबह या शाम को श्राद्ध करना उचित नहीं माना जाता।
पितृ पक्ष में मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?
इन सोलह दिनों में मुख्य रूप से अपने पूर्वजों को याद करते हुए उन्हें जल और काले तिल से तर्पण देना चाहिए। इसके अलावा ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना बहुत शुभ होता है। गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालना भी इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इन दिनों में किन चीजों से बचना चाहिए?
पितृ पक्ष के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से भी बचना चाहिए। इसके अलावा घर में किसी भी प्रकार का क्लेश या झगड़ा करने से पितृ नाराज हो सकते हैं।
क्या पितृ पक्ष में कोई व्रत (fasting) रखा जाता है?
आमतौर पर पितृ पक्ष में कोई पूरे दिन का उपवास नहीं रखा जाता है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को तब तक कुछ नहीं खाना चाहिए जब तक वह तर्पण और ब्राह्मण भोज पूरा न कर ले। अनुष्ठान पूरा होने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
श्राद्ध के भोजन में क्या बनाना चाहिए?
श्राद्ध के भोजन में खीर, पूरी, सब्जी और दाल बनाई जा सकती है। ध्यान रहे कि भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग बिल्कुल न हो। भोजन पूरी तरह से सात्विक और शुद्ध घी में बना होना चाहिए।
तर्पण के लिए कौन सी सामग्री (samagri) सबसे जरूरी है?
तर्पण के लिए काले तिल, कुशा (घास), तांबे का लोटा और शुद्ध जल सबसे आवश्यक सामग्री है। इसके अलावा सफेद फूल और जौ का उपयोग भी किया जाता है। यदि कुशा न मिले, तो आप केवल शुद्ध जल और काले तिल से भी तर्पण कर सकते हैं।
पितृ पक्ष की कथा क्या सिखाती है?
पितृ पक्ष की कथा महाभारत के कर्ण से जुड़ी है, जो हमें अन्न दान का महत्व बताती है। यह सिखाती है कि केवल धन का दान पर्याप्त नहीं है, पूर्वजों के निमित्त अन्न और जल का दान करना भी हमारा कर्तव्य है। ऐसा न करने पर हमारी सफलता और पुण्य अधूरे रह जाते हैं।
पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व (significance) क्या है?
यह समय हमारे उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है, जिनके कारण हमारा अस्तित्व है। मान्यता है कि इन दिनों पितृ सूक्ष्म रूप में पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। उनका तर्पण करने से परिवार में सुख, शांति और वंश की वृद्धि होती है।
क्या हम पितृ पक्ष में नया काम शुरू कर सकते हैं?
परंपरागत रूप से पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया व्यापार, नौकरी या शुभ कार्य शुरू नहीं किया जाता। यह समय उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का है। इसलिए नए कार्यों को नवरात्रि तक टाल देना बेहतर माना जाता है।
क्या इन दिनों में शॉपिंग करना मना है?
रोजमर्रा की जरूरत का सामान और राशन आप बेझिझक खरीद सकते हैं। लेकिन नए कपड़े, गहने, गाड़ी या घर खरीदने जैसे बड़े खर्चों से बचना चाहिए। यह सादगी और आत्म-संयम का समय होता है, इसलिए लग्जरी चीजों की खरीदारी नहीं की जाती।
क्या तर्पण के समय कोई विशेष मंत्र पढ़ना जरूरी है?
यदि आपको कोई विशेष संस्कृत मंत्र नहीं आता है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। आप अपनी मातृभाषा में सरल शब्दों में अपने पूर्वजों का नाम लेकर और गोत्र बोलकर जल अर्पित कर सकते हैं। सच्ची श्रद्धा और भावना किसी भी मंत्र से अधिक महत्वपूर्ण होती है।
पितृ पक्ष में दान का क्या महत्व है?
इस दौरान दान करने से पितरों को सीधे तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं। आप कच्चे राशन, वस्त्र, जूते-चप्पल या छाते का दान कर सकते हैं। किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना इस समय का सबसे बड़ा और पुण्यकारी दान माना जाता है।
पितृ दोष के उपाय (remedies) के लिए क्या करें?
यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो पितृ पक्ष में हर दिन दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। कौवों, कुत्तों और गाय को नियमित रूप से भोजन दें। अमावस्या के दिन किसी गरीब को भोजन और वस्त्र दान करने से पितृ दोष के प्रभाव में कमी आती है।
अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में अंतर क्यों होता है?
सूर्य के उदय और अस्त होने का समय हर शहर में अलग-अलग होता है, जिससे कुतप काल और अन्य मुहूर्तों का समय बदल जाता है। इसलिए दिल्ली और मुंबई में श्राद्ध का समय एक जैसा नहीं हो सकता। आप जिस शहर में हैं, उसी के अनुसार ऊपर दिए गए मुहूर्त का पालन करें।
पितृ पक्ष और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर है?
हर महीने आने वाली अमावस्या पर भी पितरों का ध्यान किया जाता है, लेकिन पितृ पक्ष साल में एक बार आने वाला 16 दिनों का विशेष काल है। इन 16 दिनों में पितृ पृथ्वी के सबसे करीब माने जाते हैं। इसलिए इस दौरान किया गया श्राद्ध और तर्पण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी होता है।
अगर पिता जीवित हैं, तो क्या बेटा तर्पण कर सकता है?
शास्त्रों के अनुसार, यदि पिता जीवित हैं तो बेटे को तर्पण या श्राद्ध करने का अधिकार नहीं होता। ऐसे में पिता ही अपने पूर्वजों (दादा, परदादा) का श्राद्ध करते हैं। बेटा केवल अपने दादा-दादी के प्रति श्रद्धा भाव रख सकता है, लेकिन मुख्य कर्म पिता द्वारा ही किया जाता है।
महिलाएं पितृ पक्ष में किस प्रकार योगदान दे सकती हैं?
महिलाएं श्राद्ध के लिए शुद्धता के साथ सात्विक भोजन तैयार करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे घर की साफ-सफाई और दान-पुण्य के कार्यों में भी हिस्सा ले सकती हैं। यदि घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है, तो महिलाएं स्वयं भी अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर सकती हैं।
क्या हम पितृ पक्ष में बाल धो सकते हैं?
महिलाओं के लिए बाल धोने पर कोई सख्त मनाही नहीं है, वे अपनी स्वच्छता के लिए बाल धो सकती हैं। हालांकि, जो पुरुष श्राद्ध कर्म कर रहे हैं, उन्हें इन 16 दिनों में साबुन या शैंपू का अत्यधिक उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। सादगी बनाए रखना इस व्रत का मुख्य उद्देश्य है।
श्राद्ध के दिन अगर ब्राह्मण न मिलें तो क्या करें?
आजकल शहरों में कई बार श्राद्ध के दिन ब्राह्मण नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में आप भोजन का हिस्सा निकालकर गाय, कुत्ते और कौवे को खिला सकते हैं। इसके अलावा, आप किसी मंदिर में या किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को कच्चा राशन (सीधा) दान कर सकते हैं।
मुंबई में आने वाले त्योहार
- Raksha Bandhan 20262026-08-28
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Anant Chaturdashi 20262026-09-25
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
- Navratri Day 2 - Maa Brahmacharini 20262026-10-12
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