पुणे · Maharashtra

पुणे में करवा चौथ

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह सुहागिन महिलाओं का सबसे खास व्रत है, जिसमें वे पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन मुख्य रूप से शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा होती है। रात को छलनी से चांद देखकर और पति के हाथ से जल ग्रहण करके ही यह व्रत खोला जाता है।

🕐 पुणे के लिए करवा चौथ का समय

तिथिChaturthi (Krishna Paksha)22:10 तक
नक्षत्रRohini, पाद 411:11 तक
योग · करणParigha · Bava
अभिजित मुहूर्त11:54-12:40
राहुकाल13:42-15:08
यमगंड · गुलिक06:36-08:01 · 09:26-10:52
सूर्योदय · सूर्यास्त06:36 · 17:59

पुणे (18.5204, 73.8567) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

करवा चौथ पर क्या करें

  1. सूर्योदय से पहले उठकर सरगी (sargi) ग्रहण करें।
  2. दिन भर निर्जला व्रत का संकल्प लें और पानी न पिएं।
  3. लाल या मैरून रंग के कपड़े पहनें और पूरा सोलह श्रृंगार करें।
  4. शाम की पूजा के लिए करवा, छलनी और पूजा की थाली तैयार कर लें।
  5. ऊपर दिए गए मुहूर्त के अनुसार शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा करें।
  6. चांद निकलने पर छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखें।
  7. पति के हाथ से करवा का जल पीकर अपना व्रत खोलें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Chaturthi pervades moonrise kaal on one day only (100% of the window). The fast breaks at moonrise, so Chaturthi must be running when the Moon rises. Amanta (South and West India): The same day. Kartik Krishna Chaturthi in purnimanta reckoning is Ashwin Krishna Chaturthi in amanta.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में करवा चौथ का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
पुणे06:3611:54-12:4013:42-15:08
दिल्ली एनसीआर06:3411:42-12:2613:26-14:49
मुंबई06:4111:59-12:4413:47-15:12
नोएडा06:3311:41-12:2513:26-14:48
गुरुग्राम06:3511:43-12:2713:27-14:50
बेंगलुरु06:1511:39-12:2513:29-14:56
हैदराबाद06:1611:36-12:2113:24-14:50
कोलकाता05:4310:57-11:4212:44-14:08
चेन्नई06:0511:28-12:1513:18-14:45
अहमदाबाद06:4612:00-12:4413:46-15:10

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है

करवा चौथ भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत गहरा है। करवा चौथ के दिन मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और करवा माता की पूजा की जाती है। शिव और पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली हर बाधा दूर होती है और पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो इस व्रत का सीधा संबंध चंद्रमा (Moon) से है। चंद्रमा मन, भावनाओं, शीतलता और सुख का कारक ग्रह है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष विधान है। जब महिलाएं रात के समय छलनी से चंद्रमा को देखती हैं, तो वे असल में चंद्रमा से प्रार्थना कर रही होती हैं कि उनके वैवाहिक जीवन में भी चंद्रमा जैसी शीतलता, शांति और चमक बनी रहे। चंद्रमा की किरणें मानसिक शांति देती हैं और वैवाहिक जीवन के तनाव या क्लेश (marital issues) को दूर करने में मदद करती हैं। परंपरा के अनुसार, इस दिन लाल या मैरून रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है। लाल रंग प्रेम, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है। यही कारण है कि महिलाएं इस दिन अपनी शादी का जोड़ा या लाल रंग की साड़ी पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना, मांग में लाल सिंदूर भरना और चूड़ियां पहनना इस व्रत का अनिवार्य हिस्सा माना गया है। यह व्रत केवल पति की लंबी उम्र के लिए नहीं है, बल्कि यह दो लोगों के बीच के रिश्ते को एक नई ऊर्जा देने का दिन है। दिन भर बिना अन्न और जल के रहना आसान नहीं होता, लेकिन यह तपस्या उस प्रेम को दर्शाती है जो एक पत्नी अपने पति के लिए महसूस करती है। शाम के समय जब परिवार की सभी महिलाएं एक साथ बैठकर करवा माता की कथा सुनती हैं, तो यह आपसी प्रेम और सामंजस्य को भी बढ़ाता है। आधुनिक समय में करवा चौथ का रूप थोड़ा बदला जरूर है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी वही है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि रिश्ते समर्पण मांगते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद जब पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खोलता है, तो वह पल उनके रिश्ते में एक नया विश्वास और आदर जोड़ देता है।

🪔 करवा चौथ पूजा विधि

  1. सरगी का सेवनसूर्योदय से पहले उठकर सास द्वारा दी गई सरगी खाएं और व्रत का संकल्प लें।
  2. स्नान और श्रृंगारसुबह जल्दी स्नान करें, लाल या मैरून रंग के कपड़े पहनें और पूरा सोलह श्रृंगार करें।
  3. पूजा स्थल की सफाईघर के मंदिर या पूजा के स्थान को साफ करें और वहां एक छोटी चौकी लगाएं।
  4. कलश और करवा स्थापनाचौकी पर जल से भरा एक कलश और मिट्टी का करवा रखें। करवे में जल भरें।
  5. शिव-पार्वती की स्थापनाचौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  6. रोली और सिंदूर अर्पणसभी देवी-देवताओं को रोली, चंदन और लाल सिंदूर का तिलक लगाएं।
  7. श्रृंगार सामग्री चढ़ानामाता पार्वती और करवा माता को लाल सिंदूर, चूड़ियां और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  8. कथा का पाठशाम के समय ऊपर दिए गए मुहूर्त में परिवार की महिलाओं के साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनें।
  9. चंद्रमा की प्रतीक्षाकथा के बाद चंद्रमा के निकलने का इंतजार करें। पूजा की थाली में छलनी और जल का करवा तैयार रखें।
  10. चंद्र दर्शनचांद निकलने पर छलनी से पहले चंद्रमा को देखें और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें।
  11. चंद्रमा को अर्घ्यकरवे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और 'ॐ सोम सोमाय नमः चन्द्राय नमः' मंत्र का मन में जाप करें।
  12. व्रत का पारणपति के हाथ से करवे का जल पिएं और मिठाई खाकर अपना निर्जला व्रत पूरा करें।

5-मिनट विधि

  1. सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  2. शाम को लाल कपड़े पहनकर शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा करें।
  3. माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री और लाल सिंदूर अर्पित करें।
  4. करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  5. रात को चांद निकलने पर छलनी से चंद्रमा और पति को देखकर, पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

🛒 करवा चौथ पूजा सामग्री

आवश्यक

  • मिट्टी या तांबे का करवा (जल के लिए)
  • छलनी (chalni)
  • लाल सिंदूर
  • 16 श्रृंगार का सामान
  • मेहंदी (हाथों के लिए)
  • लाल या मैरून कपड़े
  • पूजा की थाली
  • रोली और अक्षत

वैकल्पिक

  • करवा माता की तस्वीर
  • शिव-पार्वती की मूर्ति
  • मिठाई (भोग के लिए)
  • दीपक और धूप
  • फूल और माला
  • सुहाग की पिटारी

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if मिट्टी का करवा is unavailable, तांबे या स्टील का लोटा is traditionally accepted
  • if 16 श्रृंगार items are unavailable, केवल लाल सिंदूर और चूड़ियां is traditionally accepted
  • if करवा माता की तस्वीर is unavailable, दीवार पर गेरू से करवा बनाकर पूजा करना is traditionally accepted

🌙 करवा चौथ व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद से व्रत शुरू होता है।

क्या खा सकते हैं

  • सरगी में फल, दूध, फेनियां और मेवे खाए जा सकते हैं
  • व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन का) कर सकते हैं

क्या नहीं खाना चाहिए

  • दिन भर पानी पीना मना है (निर्जला व्रत)
  • काले या सफेद रंग के कपड़े पहनना
  • पति या परिवार के किसी सदस्य पर क्रोध करना

पारण: रात को चंद्रोदय के बाद, छलनी से चांद देखने और अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: जो महिलाएं गंभीर रूप से बीमार हैं, जिन्हें बार-बार पानी पीने की आवश्यकता होती है, उन्हें निर्जला व्रत से बचना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो निर्जला उपवास रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

करवा चौथ: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं करवा चौथ के दिन अपने बाल धो सकती हूं?

परंपरागत रूप से सुहागिन महिलाओं को व्रत वाले दिन बाल धोने से मना किया जाता है। आप एक दिन पहले अपने बाल धो सकती हैं।

क्या करवा चौथ के दिन नाखून काटना सही है?

नहीं, व्रत के दिन नाखून काटना या बाल काटना शुभ नहीं माना जाता है। यह काम व्रत से पहले ही कर लेना चाहिए।

क्या सरगी में नमक वाला खाना खा सकते हैं?

हां, सरगी में हल्का नमक वाला भोजन किया जा सकता है, लेकिन बहुत अधिक तला-भुना या मसालेदार खाने से बचें ताकि दिन भर प्यास न लगे।

क्या मैं करवा चौथ पर काले कपड़े पहन सकती हूं?

करवा चौथ पर काले या सफेद रंग के कपड़े पहनना वर्जित माना गया है। लाल, मैरून, गुलाबी या पीला रंग पहनना सबसे शुभ होता है।

क्या मैं दिन में सो सकती हूं?

व्रत के दौरान दिन में सोने की सख्त मनाही नहीं है, लेकिन पारंपरिक रूप से महिलाएं भजन-कीर्तन या पूजा की तैयारियों में समय बिताती हैं। अस्वस्थ होने पर आराम किया जा सकता है।

क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) में करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?

हां, व्रत रखा जा सकता है। आप निर्जला उपवास रख सकती हैं और दूर से कथा सुन सकती हैं, लेकिन पूजा की सामग्री या देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने से बचना चाहिए।

क्या मैं करवा चौथ के दिन यात्रा कर सकती हूं?

बहुत जरूरी न हो तो यात्रा से बचना चाहिए, क्योंकि यह निर्जला व्रत है और यात्रा में थकान या स्वास्थ्य बिगड़ने का डर रहता है।

क्या मैं व्रत के दिन सिलाई या कढ़ाई का काम कर सकती हूं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन सुई-धागे का इस्तेमाल करना या कैंची चलाना वर्जित माना जाता है।

क्या चांद देखने के तुरंत बाद खाना खा सकते हैं?

चांद को अर्घ्य देने और पति के हाथ से जल ग्रहण करने के बाद आप अपना व्रत खोल सकती हैं और उसके बाद सात्विक भोजन कर सकती हैं।

अगर मेरे शहर में चांद न दिखे तो क्या करूं?

अगर मौसम खराब होने के कारण चांद नहीं दिखता है, तो आप ऊपर दी गई टेबल में लिखे चंद्रोदय के समय के अनुसार, या शिव जी के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करके व्रत खोल सकती हैं।

क्या मैं करवा चौथ पर नया काम शुरू कर सकती हूं?

यह दिन पूजा-पाठ और व्रत के लिए है। किसी भी नए व्यावसायिक काम की शुरुआत के लिए यह दिन विशेष रूप से नहीं चुना जाता।

क्या पति भी करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?

हां, आजकल कई पति अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान जताने के लिए यह व्रत रखते हैं। यह पूरी तरह से आपकी आपसी सहमति और श्रद्धा पर निर्भर है।

क्या करवा चौथ पर शॉपिंग की जा सकती है?

श्रृंगार का सामान या कपड़े खरीदने में कोई मनाही नहीं है, लेकिन धारदार चीजें (जैसे चाकू, कैंची) या काले रंग का सामान खरीदने से बचना चाहिए।

क्या करें

  • Wake before sunrise for sargi
  • Apply mehndi night before
  • Wear red bridal attire
  • See moon through sieve

क्या न करें

  • Do not drink water all day
  • Avoid anger at husband
  • Do not wear black or white

⚠️ आम गलतियाँ

  • सूर्योदय के बाद सरगी खाना व्रत के नियमों के अनुसार सही नहीं माना जाता, इससे व्रत अधूरा रह सकता है।
  • पूजा के समय लाल या मैरून रंग की जगह काले या सफेद कपड़े पहनना पारंपरिक रूप से उचित नहीं है।
  • दिन के समय पानी पी लेना या कुछ खा लेना निर्जला व्रत को खंडित कर देता है।
  • करवा चौथ की कथा सुनते समय बीच में उठकर चले जाना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना सीधे पानी पीकर व्रत खोलना पारंपरिक विधि के खिलाफ है।
  • माता पार्वती को सिंदूर और 16 श्रृंगार अर्पित न करना पूजा को अधूरा छोड़ देता है।
  • व्रत के दिन पति या घर के बड़े-बुजुर्गों से विवाद करना या उन पर क्रोध करना व्रत के फल को कम कर देता है।

📿 मंत्र

ॐ सोम सोमाय नमः चन्द्राय नमः

मैं चंद्रमा और सोम देवता को नमन करता/करती हूं। यह मंत्र चंद्रमा की शीतलता और शांति का आह्वान करता है।

108 बार (एक माला) या अर्घ्य देते समय 11 बार रात को जब आप चंद्रमा को छलनी से देखें और करवा से अर्घ्य दें, तब इस मंत्र का मन में जाप करें।

📖 करवा चौथ कथा

करवा चौथ की कथा वीरवती नाम की एक सुंदर और पतिव्रता स्त्री से जुड़ी है। वीरवती सात भाइयों की इकलौती और सबसे लाडली बहन थी। उसकी शादी एक योग्य ब्राह्मण युवक से हुई थी। शादी के बाद जब वीरवती का पहला करवा चौथ आया, तो वह अपने मायके में थी। उसने अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा। वीरवती ने दिन भर तो बिना अन्न-जल के समय निकाल लिया, लेकिन शाम होते-होते भूख और प्यास से उसकी हालत खराब होने लगी। वह कमजोरी के कारण बेहोश होने लगी। उसके सातों भाइयों से अपनी प्यारी बहन की यह हालत नहीं देखी गई। उन्होंने वीरवती से कहा कि वह कुछ खा ले, लेकिन वीरवती ने मना कर दिया और कहा कि वह चांद देखने के बाद ही अपना व्रत खोलेगी। भाइयों ने अपनी बहन का कष्ट दूर करने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने नगर के बाहर एक ऊंचे पेड़ पर आग जला दी और उसके आगे एक छलनी रख दी, जिससे वह आग चांद जैसी दिखने लगी। भाइयों ने घर आकर वीरवती से कहा कि देखो बहन, चांद निकल आया है, अब तुम अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लो। वीरवती ने भाइयों की बात मान ली। उसने उस नकली चांद को देखा, अर्घ्य दिया और खाना खा लिया। जैसे ही उसने भोजन का पहला निवाला लिया, उसे खबर मिली कि उसके पति की तबीयत बहुत खराब हो गई है और वह मृत्यु शय्या पर है। वीरवती रोती हुई अपनी ससुराल की ओर भागी। रास्ते में उसे शिव-पार्वती मिले। माता पार्वती ने उसे बताया कि उसके भाइयों ने झूठा चांद दिखाकर उसका व्रत खुलवा दिया था, जिसके कारण उसका व्रत खंडित हो गया और उसके पति पर यह संकट आ गया। वीरवती ने माता पार्वती से क्षमा मांगी और विनती की कि वे उसके पति के प्राण लौटा दें। माता पार्वती ने कहा कि यदि वह पूरे विधि-विधान से दोबारा करवा चौथ का व्रत रखेगी, तो उसका पति जीवित हो जाएगा। वीरवती ने पूरे विश्वास के साथ दोबारा निर्जला व्रत रखा और करवा माता की पूजा की। उसकी सच्ची श्रद्धा देखकर करवा माता प्रसन्न हुईं और उन्होंने वीरवती के पति को जीवनदान दे दिया। तभी से यह माना जाता है कि जो भी स्त्री पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखती है, उसके पति की आयु लंबी होती है।

🪔 आरती

करवा चौथ की पूजा में आरती का बहुत महत्व है। शाम के समय जब शिव-पार्वती, गणेश जी और करवा माता की पूजा संपन्न हो जाती है, तब परिवार की सभी महिलाएं एक साथ मिलकर आरती करती हैं। आरती हमेशा धूप, दीप और कपूर जलाकर करनी चाहिए। आरती करते समय मन में पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करनी चाहिए। आरती के बाद सभी बड़ों का आशीर्वाद लेना न भूलें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार करवा चौथ के उपाय

Marital Issues (वैवाहिक जीवन में क्लेश)

करवा चौथ का व्रत चंद्रमा और शिव-पार्वती से जुड़ा है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो रात को चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा सा कच्चा दूध और सफेद फूल मिला लें। चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है, यह उपाय आपके रिश्ते में शांति और आपसी समझ को बढ़ाएगा।

Husband's Health & Long Life (पति के स्वास्थ्य के लिए)

पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करवा चौथ के दिन माता पार्वती को लाल सिंदूर और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। पूजा के बाद वह सिंदूर अपनी मांग में भरें और श्रृंगार का कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को दान कर दें। इससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Financial Stability (आर्थिक समस्याओं के लिए)

चंद्रमा धन और मन दोनों का कारक है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए करवा चौथ की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद, एक सफेद कपड़े में थोड़े से अक्षत (चावल) और चांदी का एक सिक्का बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। यह उपाय घर में धन के प्रवाह को स्थिर करता है।

Career Problems (करियर में रुकावट)

करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए करवा चौथ के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा करें। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं। उन्हें 21 दूर्वा (घास) अर्पित करें और गुड़ का भोग लगाएं। चंद्रमा के दर्शन के बाद गणेश जी से अपने या अपने पति के कार्यक्षेत्र में सफलता की प्रार्थना करें।

Negativity in Home (घर में नकारात्मक ऊर्जा)

घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए करवा चौथ की शाम को पूजा स्थल पर एक बड़ा घी का दीपक जलाएं जिसमें थोड़ी सी लौंग डाल दें। चंद्रमा की रोशनी और दीपक की लौ घर के वातावरण को शुद्ध करती है और परिवार के सदस्यों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

Child-related Worries (संतान से जुड़ी चिंताएं)

संतान की उन्नति और सुख के लिए करवा चौथ की पूजा में भगवान कार्तिकेय और गणेश जी का ध्यान अवश्य करें। पूजा के समय एक मीठा पान भगवान शिव को अर्पित करें। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय प्रार्थना करें कि चंद्रमा की तरह आपके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल और शांत रहे।

क्या करवा चौथ आपके लिए विशेष है?

करवा चौथ का व्रत और चंद्रमा की पूजा हर सुहागिन महिला के लिए शुभ फलदायी होती है। ऊपर बताए गए उपाय सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। लेकिन सच यह है कि हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है। चंद्रमा गोचर में सभी के लिए एक जैसा हो सकता है, लेकिन आपकी अपनी कुंडली में वह किस भाव में बैठा है, यह केवल आपका चार्ट बता सकता है。 यहीं पर व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श आपकी मदद करता है। यदि आप करियर, धन या जीवन की दशा का सटीक समय जानना चाहते हैं, तो Kundli रीडिंग आपके लिए है। वैवाहिक जीवन की समस्याओं या अनुकूलता को समझने के लिए Kundali Milan सबसे सही रास्ता है। जन्म का समय न होने पर Hastrekha (हस्तरेखा) आपके जीवन के राज खोल सकती है। वहीं, अजीब सपनों का अर्थ जानने के लिए Swapna Shastra मदद करता है। त्रिकाल वाणी पर हम आपकी व्यक्तिगत कुंडली देखकर वास्तविक समस्याओं का समाधान करते हैं।

पुणे में करवा चौथ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

करवा चौथ 2026 में कब है?

इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं।

पूजा का सही मुहूर्त क्या है?

पूजा का सबसे शुभ समय शाम के समय होता है जब शिव-पार्वती की आराधना की जाती है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त और राहु काल की जानकारी ऊपर दी गई टेबल में उपलब्ध है। कृपया पूजा शुरू करने से पहले उस समय को अवश्य देख लें।

सरगी खाने का सही समय क्या है?

सरगी हमेशा सूर्योदय से पहले खाई जाती है। आपको अपने शहर के सूर्योदय के समय से कम से कम एक घंटा पहले उठकर सरगी ग्रहण कर लेनी चाहिए। सूर्योदय होने के बाद कुछ भी खाना या पीना व्रत के नियमों के खिलाफ माना जाता है।

क्या मैं करवा चौथ के दिन पानी पी सकती हूं?

नहीं, पारंपरिक रूप से यह एक निर्जला व्रत है, जिसका अर्थ है कि दिन भर पानी पीना मना होता है। व्रत की शुरुआत सरगी के बाद होती है और यह रात को चांद देखने के बाद ही खोला जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से बीमार महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर छूट ले सकती हैं।

करवा चौथ की पूजा में कौन सी सामग्री जरूरी है?

पूजा के लिए मिट्टी या तांबे का करवा, छलनी, पूजा की थाली और जल सबसे आवश्यक है। इसके अलावा माता पार्वती को चढ़ाने के लिए लाल सिंदूर और 16 श्रृंगार का सामान भी जरूरी होता है। यदि कोई सामग्री न मिले तो केवल श्रद्धा भाव से पूजा की जा सकती है।

क्या मैं काले कपड़े पहनकर पूजा कर सकती हूं?

करवा चौथ के दिन काले या सफेद रंग के कपड़े पहनना पारंपरिक रूप से शुभ नहीं माना जाता है। इस दिन सुहाग के रंग जैसे लाल, मैरून, गुलाबी या पीला पहनना सबसे अच्छा होता है। लाल रंग प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है, इसलिए इसे प्राथमिकता दी जाती है।

छलनी से चांद देखने का क्या महत्व है?

छलनी से चांद देखने के पीछे यह मान्यता है कि चंद्रमा की सीधी और तेज किरणें आंखों पर न पड़ें, बल्कि छनकर आएं। इससे चंद्रमा की शीतलता प्राप्त होती है और मन शांत रहता है। इसके बाद उसी छलनी से पति को देखने से रिश्ते में भी वही शीतलता और प्रेम बना रहता है।

अगर करवा चौथ के दिन चांद न दिखे तो क्या करें?

कई बार खराब मौसम या बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं देता है। ऐसे में आप ऊपर दी गई टेबल में लिखे चंद्रोदय के समय के अनुसार अपना व्रत खोल सकती हैं। आप भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करके भी अर्घ्य दे सकती हैं।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं को निर्जला उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। वे चाहें तो फलाहार या दूध पीकर यह व्रत रख सकती हैं, क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। परंपराओं में गर्भवती महिलाओं के लिए नियमों में ढील दी गई है।

करवा चौथ की कथा सुनना क्यों जरूरी है?

कथा सुने बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है। वीरवती की कथा हमें यह सिखाती है कि व्रत में श्रद्धा और नियमों का पालन कितना महत्वपूर्ण है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल मिलता है और मन में पति के प्रति समर्पण की भावना बढ़ती है।

क्या करवा चौथ पर नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं?

करवा चौथ मुख्य रूप से पति-पत्नी के रिश्ते, व्रत और शिव-पार्वती की पूजा का दिन है। यह दिन किसी नए व्यावसायिक काम या प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष नहीं माना जाता। नए काम के लिए आप कोई अन्य शुभ मुहूर्त देख सकते हैं।

क्या मैं करवा चौथ के दिन शॉपिंग कर सकती हूं?

हां, आप पूजा का सामान, कपड़े या श्रृंगार की चीजें खरीद सकती हैं। हालांकि, इस दिन कैंची, चाकू जैसी धारदार चीजें या काले रंग का कोई भी सामान खरीदने से बचना चाहिए। सुहाग से जुड़ी चीजें खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

करवा चौथ और अहोई अष्टमी में क्या अंतर है?

करवा चौथ पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है, जबकि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को होता है, और अहोई अष्टमी उसके चार दिन बाद अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कौन सा मंत्र पढ़ें?

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय 'ॐ सोम सोमाय नमः चन्द्राय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। यह मंत्र चंद्रमा की शीतलता और शांति को आपके जीवन में आमंत्रित करता है। आप अर्घ्य देते समय मन ही मन इस मंत्र को 11 बार पढ़ सकती हैं।

क्या पति भी अपनी पत्नी के लिए यह व्रत रख सकते हैं?

हां, बिल्कुल। आजकल कई पति अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए उनके साथ निर्जला व्रत रखते हैं। यह आपसी समझ और रिश्ते को और भी मजबूत बनाने का एक बहुत ही सुंदर तरीका है।

करवा चौथ के दिन दान में क्या देना चाहिए?

इस दिन सुहाग की सामग्री, जैसे लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और लाल कपड़े दान करना बहुत शुभ होता है। आप यह सामग्री अपनी सास, ननद या किसी भी जरूरतमंद सुहागिन महिला को दे सकती हैं। अन्न और मिठाई का दान भी बहुत पुण्यकारी माना गया है।

अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय अलग क्यों होता है?

पृथ्वी के घूमने और भौगोलिक स्थिति के कारण हर शहर का अक्षांश (latitude) और देशांतर (longitude) अलग होता है। इसी वजह से एक ही दिन में अलग-अलग शहरों में चांद दिखने का समय अलग-अलग होता है। आप अपने शहर का सटीक समय ऊपर दी गई टेबल में देख सकती हैं।

क्या व्रत के दिन नमक का सेवन किया जा सकता है?

निर्जला व्रत के दौरान दिन भर कुछ भी खाने या पीने की मनाही होती है, इसलिए नमक खाने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, सुबह सरगी में आप हल्का नमक वाला भोजन ले सकती हैं। व्रत खोलने के बाद रात के भोजन में भी नमक खाया जा सकता है।

क्या करवा चौथ पर बाल या नाखून काट सकते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत वाले दिन बाल धोना, बाल काटना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। ये सभी काम आपको व्रत से एक या दो दिन पहले ही कर लेने चाहिए। व्रत के दिन केवल श्रृंगार और पूजा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वैवाहिक जीवन की समस्याओं के लिए करवा चौथ पर क्या उपाय करें?

यदि पति-पत्नी के बीच तनाव है, तो चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिला लें। चंद्रमा मन का कारक है और यह उपाय आपके रिश्ते में शांति लाएगा। इसके अलावा शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से भी वैवाहिक क्लेश दूर होते हैं।

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