रक्षाबंधन

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह भाई-बहन के अटूट प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का दिन है। इस दिन बहनें अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। भद्रा काल से बचते हुए, राखी बांधने का शुभ समय ऊपर दी गई टेबल में आपके शहर के अनुसार दिया गया है।

🕐 भारत के लिए रक्षाबंधन का समय

तिथिPurnima (Shukla Paksha)09:48 तक
नक्षत्रShatabhisha, पाद 103:13 (29 Aug) तक
योग · करणAtiganda · Bava
पूजा मुहूर्त13:38-16:10(अपराह्न)
अभिजित मुहूर्त11:56-12:47
राहुकाल10:46-12:22
यमगंड · गुलिक15:32-17:07 · 07:36-09:11
सूर्योदय · सूर्यास्त06:01 · 18:43

भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

रक्षाबंधन पर क्या करें

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  2. पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें चांदी की राखी, रोली, चावल, काजू कतली और दीया हो।
  3. भगवान विष्णु का ध्यान करें और उन्हें प्रणाम करें।
  4. भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
  5. भाई के माथे पर चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत (चावल) लगाएं।
  6. भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें और मिठाई खिलाएं।
  7. एक-दूसरे की भलाई की प्रार्थना करें और उपहारों का आदान-प्रदान करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Purnima pervades aparahna kaal on one day only (100% of the window). The rakhi is tied in aparahna and Bhadra must be avoided, so Shravana Purnima is judged in the afternoon quarter. Bhadra (Vishti karana) covers aparahna kaal entirely on 27 Aug (09:09-21:33), so the rite cannot be performed then. It moves to the next Bhadra-free stretch while the tithi still runs — pratah kaal on 28 Aug, 05:58-08:32.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में रक्षाबंधन का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:0111:56-12:4710:46-12:22
मुंबई06:2612:14-13:0411:06-12:39
नोएडा06:0011:55-12:4610:45-12:21
गुरुग्राम06:0111:57-12:4710:47-12:22
बेंगलुरु06:1111:55-12:4410:47-12:20
हैदराबाद06:0511:52-12:4110:44-12:17
पुणे06:2212:10-12:5911:01-12:35
कोलकाता05:2111:11-12:0210:03-11:37
चेन्नई06:0111:45-12:3410:37-12:10
अहमदाबाद06:2412:15-13:0511:06-12:40

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है

रक्षाबंधन, जिसे श्रावण पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति के सबसे गहरे और भावुक पर्वों में से एक है। यह केवल एक धागा बांधने की रस्म नहीं है, बल्कि यह एक वचन है, जो भाई-बहन के बीच जीवन भर के लिए सुरक्षा, सम्मान और अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर भगवान विष्णु से उनके लंबे और सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में इसे नारळी पौर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ समुद्र देवता को नारियल अर्पित किया जाता है और जल की पूजा की जाती है। ज्योतिषीय दृष्टि से, रक्षाबंधन का यह विशेष दिन चंद्रमा (Moon) द्वारा शासित होता है। चंद्रमा हमारे मन, हमारी भावनाओं, हमारी मानसिक शांति और रिश्तों की गहराई का मुख्य कारक है। जब बहनें पूरे मन से अपने भाई के लिए प्रार्थना करती हैं, तो चंद्रमा की यह शुभ ऊर्जा उनके रिश्ते को मानसिक शांति और भावनात्मक मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही, यह पर्व बुध ग्रह (Mercury) की कमजोरी को दूर करने और भाई-बहनों के बीच के मनमुटाव (sibling discord) को शांत करने के लिए भी विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। बुध संवाद, बुद्धि और भाई-बहन के रिश्तों का नैसर्गिक कारक है। राखी बांधने की इस पवित्र प्रक्रिया से बुध की ऊर्जा संतुलित होती है, जिससे आपसी समझ बढ़ती है और पुराने विवाद सुलझ जाते हैं। इस वर्ष 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का यह पावन पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के कड़े नियमों के अनुसार, राखी हमेशा भद्रा काल को टालकर ही बांधनी चाहिए, क्योंकि भद्रा में किए गए शुभ कार्य फलित नहीं होते। हमारे ज्योतिषीय इंजन की सटीक गणना के अनुसार, 27 अगस्त को भद्रा (विष्टि करण) अपराह्न काल को पूरी तरह से कवर कर रही है। इसलिए, उस दिन राखी बांधने का विधान किसी भी स्थिति में नहीं है। इसके बजाय, यह शुभ कार्य 28 अगस्त को प्रातः काल के भद्रा-मुक्त समय में किया जाएगा, जब श्रावण पूर्णिमा की तिथि अभी भी चल रही होगी। पीले और लाल रंग इस पर्व के मुख्य रंग माने गए हैं। पीला रंग भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय रंग है, जो ज्ञान और सात्विकता को दर्शाता है, जबकि लाल रंग ऊर्जा, शक्ति और प्रेम का प्रतीक है। जब आप अपनी पूजा में इन रंगों का उपयोग करते हैं, तो यह आपके अनुष्ठान में एक नई सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। रक्षाबंधन का यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, परिवार का साथ और भाई-बहन का प्रेम हर मुश्किल को पार करने की ताकत रखता है। यह एक ऐसा दिन है जब पुरानी सभी कड़वी बातों को भूलकर, एक नई शुरुआत की जाती है। चंद्रमा की सौम्य रोशनी और भगवान विष्णु के आशीर्वाद से, यह पर्व हर घर में खुशियां, समृद्धि और शांति लेकर आता है।

🪔 रक्षाबंधन पूजा विधि

  1. स्नान और शुद्धिसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। मन को शांत रखें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  2. पूजा की थाली सजानाएक साफ थाली लें। उसमें चांदी की राखी, रोली, अक्षत (चावल), काजू कतली जैसी मिठाई, चंदन और आरती के लिए एक दीया रखें।
  3. भगवान की पूजासबसे पहले घर के मंदिर में भगवान विष्णु को प्रणाम करें। उन्हें तिलक लगाएं और पहली राखी भगवान को अर्पित करें।
  4. भाई को बैठानाभाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक साफ आसन पर बैठाएं। ध्यान रहे कि पूजा के समय सिर ढका हुआ हो।
  5. तिलक लगानाबहन अपने भाई के माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाए। तिलक के ऊपर थोड़े से साबुत चावल (अक्षत) लगाएं।
  6. राखी बांधनाभाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। इस समय मन में भाई की लंबी उम्र और सफलता की कामना करें।
  7. मिठाई खिलानाराखी बांधने के बाद भाई को काजू कतली या कोई भी शुद्ध मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा करें।
  8. आरती करनाथाली में रखे दीये को जलाएं और भाई की आरती उतारें, ताकि उसे हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से बचाया जा सके।
  9. उपहार देनाभाई अपनी बहन को स्नेह स्वरूप उपहार दे और जीवन भर उसकी रक्षा करने का संकल्प ले।
  10. आशीर्वाद लेनाअंत में, दोनों एक-दूसरे की भलाई की कामना करें। यदि भाई बड़ा है तो बहन उसके पैर छूकर आशीर्वाद ले।

5-मिनट विधि

  1. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए पूजा की थाली में राखी, रोली, चावल, मिठाई और दीया सजाएं।
  2. भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठाएं और उसके माथे पर चंदन का तिलक लगाएं।
  3. भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें और उसकी रक्षा की प्रार्थना करें।
  4. भाई को मिठाई खिलाएं और आरती उतारें।
  5. भाई बहन को उपहार दे और दोनों एक-दूसरे के सुखद भविष्य की कामना करें।

🛒 रक्षाबंधन पूजा सामग्री

आवश्यक

  • चांदी की राखी या रेशमी धागा
  • रोली (कुमकुम)
  • साबुत चावल (अक्षत)
  • चंदन
  • काजू कतली या अन्य शुद्ध मिठाई
  • दीया और बाती
  • घी या तेल

वैकल्पिक

  • फूल और माला
  • नारियल
  • गंगाजल
  • कलश
  • सुपारी

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if चांदी की राखी is unavailable, कोई भी सूती या रेशमी राखी is traditionally accepted
  • if काजू कतली is unavailable, घर की बनी खीर या गुड़ is traditionally accepted
  • if चंदन is unavailable, केवल हल्दी और रोली is traditionally accepted

रक्षाबंधन: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं रक्षाबंधन के दिन बाल धो सकती हूँ?

हां, आप बिल्कुल बाल धो सकती हैं। यह एक शुभ दिन है और शारीरिक शुद्धि के लिए बाल धोकर स्नान करना पूरी तरह से स्वीकार्य है।

क्या राखी बांधने से पहले कुछ खा सकते हैं?

पारंपरिक रूप से बहनें राखी बांधने तक व्रत रखती हैं या केवल फलाहार करती हैं। हालांकि, यदि आपका स्वास्थ्य ठीक न हो तो आप हल्का भोजन कर सकती हैं।

क्या इस दिन नाखून या बाल काट सकते हैं?

त्योहार के दिन नाखून या बाल काटना आमतौर पर वर्जित माना जाता है। इसे पूजा से एक दिन पहले ही कर लेना बेहतर होता है।

क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?

हां, आप यात्रा कर सकते हैं। कई भाई-बहन एक-दूसरे से मिलने के लिए इस दिन लंबी यात्राएं करते हैं, बस राहु काल का ध्यान रखें।

क्या रक्षाबंधन के दिन नया काम शुरू किया जा सकता है?

यह श्रावण पूर्णिमा का शुभ दिन है, इसलिए नया काम शुरू करना बहुत अच्छा माना जाता है। बस भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य न करें।

क्या राखी केवल दाहिनी कलाई पर ही बांधनी चाहिए?

हां, शास्त्रों के अनुसार राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई (right wrist) पर ही बांधनी चाहिए। इसे शुभ और ऊर्जावान माना जाता है।

क्या हम इस दिन खरीदारी (shopping) कर सकते हैं?

बिल्कुल, कपड़े, उपहार या पूजा का सामान खरीदने के लिए यह बहुत ही शुभ दिन है। इससे घर में सकारात्मकता आती है।

क्या राखी टूट जाने पर उसे दोबारा बांध सकते हैं?

नहीं, टूटी हुई राखी को दोबारा नहीं बांधना चाहिए। इसे एक पेड़ के नीचे या बहते पानी में विसर्जित कर दें और नई राखी बांधें।

क्या इस दिन मांसाहार (non-vegetarian) खा सकते हैं?

नहीं, रक्षाबंधन एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन घर में मांसाहार पकाना या खाना पूरी तरह से वर्जित है।

क्या राखी रात के समय बांधी जा सकती है?

राखी बांधने के लिए सबसे अच्छा समय दिन का होता है। यदि बहुत जरूरी हो तो शाम को बांध सकते हैं, लेकिन भद्रा काल में कभी नहीं।

क्या इस दिन नमक खा सकते हैं?

हां, रक्षाबंधन पर नमक खाने की कोई मनाही नहीं है। पूजा और राखी बांधने के बाद आप सामान्य भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

क्या हम काले रंग के कपड़े पहन सकते हैं?

इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। पीला और लाल रंग इस पर्व के लिए सबसे शुभ और फलदायी माने गए हैं।

क्या बहनें खुद को या अपनी बहनों को राखी बांध सकती हैं?

राखी मुख्य रूप से सुरक्षा का सूत्र है। यदि भाई न हो, तो बहनें भगवान विष्णु या अपनी बहन को भी राखी बांध सकती हैं।

क्या करें

  • Wake early, purify yourself.
  • Prepare a traditional thali.
  • Tie Rakhi on right wrist.
  • Exchange sweets and gifts.
  • Pray for sibling's welfare.

क्या न करें

  • Do not consume non-vegetarian.
  • Avoid negative thoughts.
  • Do not break Rakhi.
  • Avoid arguments today.

⚠️ आम गलतियाँ

  • भद्रा काल के दौरान राखी बांधने से अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
  • भाई का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखकर राखी बांधना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता।
  • बिना सिर ढके पूजा करने या राखी बांधने से पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।
  • राखी बांधते समय मन में क्रोध या नकारात्मक विचार रखने से पर्व का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
  • भगवान विष्णु को पहली राखी अर्पित किए बिना सीधे भाई को राखी बांधना एक सामान्य भूल है।
  • पूजा की थाली में अक्षत (चावल) न रखने से तिलक की रस्म अधूरी मानी जाती है।
  • टूटी हुई या पुरानी राखी का उपयोग करने से अनुष्ठान खंडित माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके नारायणि नमोऽस्तु ते

हे नारायणी, आप सभी प्रकार के मंगलों का मूल हैं, आप कल्याणकारी हैं और सभी मनोरथों को सिद्ध करने वाली हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ।

पूजा के समय कम से कम 11 बार भगवान विष्णु की पूजा करते समय और राखी बांधने से ठीक पहले।

📖 रक्षाबंधन कथा

रक्षाबंधन की कथाएं भारतीय इतिहास और पुराणों में बहुत गहराई से रची-बसी हैं। ये कथाएं हमें बताती हैं कि रक्षा सूत्र का महत्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी की भी रक्षा के लिए बांधा जा सकता है। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा देवराज इंद्र और उनकी पत्नी शची (जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है) से जुड़ी है। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच एक भयंकर युद्ध छिड़ गया था। असुरों का राजा बलि बहुत शक्तिशाली और पराक्रमी था। उसने अपने बल से देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवराज इंद्र अपना राज्य छिन जाने के कारण अत्यंत निराश और चिंतित हो गए। इंद्र की यह दयनीय दशा देखकर उनकी पत्नी शची मदद के लिए सीधे भगवान विष्णु के पास गईं। भगवान विष्णु ने शची को एक सूती धागा दिया और कहा कि इसे पवित्र मंत्रों से अभिमंत्रित करके इंद्र की दाहिनी कलाई पर बांध दें। शची ने श्रावण पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान से वह पवित्र धागा (रक्षा सूत्र) इंद्र की कलाई पर बांधा। इस रक्षा सूत्र के अद्भुत प्रभाव से इंद्र को एक नई ऊर्जा और असीम शक्ति प्राप्त हुई। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ युद्ध में असुरों को पराजित किया और अपना खोया हुआ स्वर्ग वापस पा लिया। तभी से यह माना जाने लगा कि रक्षा सूत्र में हर संकट से बचाने की अलौकिक शक्ति होती है。 एक अन्य अत्यंत लोकप्रिय पौराणिक कथा भगवान विष्णु और राजा बलि की है। जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी, तो बलि की दानवीरता और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। बलि ने भगवान विष्णु से वचन लिया कि वे हमेशा उनके साथ पाताल में ही रहेंगे। भगवान विष्णु अपने भक्त का वचन मानकर पाताल चले गए, जिससे माता लक्ष्मी बहुत चिंतित हो गईं। माता लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण किया और पाताल लोक जाकर राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी। जब बलि ने उनसे उपहार मांगने को कहा, तो माता लक्ष्मी ने अपने असली रूप में आकर भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वरदान मांग लिया। राजा बलि ने अपनी बहन की बात सहर्ष मान ली और भगवान विष्णु को मुक्त कर दिया। इस प्रकार, रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, वचनबद्धता और एक-दूसरे की रक्षा के अटूट संकल्प का प्रतीक बन गया।

🪔 आरती

राखी बांधने और मिठाई खिलाने के तुरंत बाद भाई की आरती की जाती है। पूजा की थाली में एक शुद्ध घी का दीया जलाएं। थाली को दोनों हाथों से पकड़कर भाई के चेहरे के सामने गोलाकार दिशा (clockwise) में घुमाएं। आरती करते समय भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि वे आपके भाई को हर बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाएं। यह आरती भाई के जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का प्रतीक है।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार रक्षाबंधन के उपाय

Money and Wealth

आर्थिक स्थिरता और धन वृद्धि के लिए रक्षाबंधन के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल और काजू कतली अर्पित करें। चूंकि इस दिन का स्वामी चंद्रमा है, इसलिए चांदी का एक छोटा सिक्का पूजा की थाली में रखें और पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी या पर्स में रख लें। इससे धन का प्रवाह सुधरता है और बरकत बनी रहती है।

Career and Business

करियर और व्यापार में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए, बुध ग्रह (Mercury) को मजबूत करना आवश्यक है। रक्षाबंधन के दिन अपने भाई या बहन को हरे रंग का कोई छोटा उपहार या रुमाल दें। भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाकर प्रार्थना करें। इससे कार्यक्षेत्र में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और सफलता मिलती है।

Marriage and Relationships

वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने के लिए, चंद्रमा की शांति आवश्यक है। रक्षाबंधन की शाम को पति-पत्नी मिलकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। पूजा में लाल और पीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग करें। भगवान विष्णु को रोली और चंदन का तिलक लगाने से रिश्तों में आ रही कड़वाहट दूर होती है और आपसी प्रेम बढ़ता है।

Children and Family

बच्चों की भलाई और परिवार में शांति के लिए यह दिन बहुत शुभ है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भगवान विष्णु की आरती करें। बच्चों की दाहिनी कलाई पर लाल और पीले रंग का रक्षा सूत्र (कलावा) बांधें। इससे उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है और हर प्रकार की बुरी नजर से उनका बचाव होता है।

Home and Property

घर में सुख-शांति और संपत्ति से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए, रक्षाबंधन के दिन घर के मुख्य द्वार पर रोली और चंदन से स्वस्तिक बनाएं। चूंकि यह पर्व भाई-बहनों के बीच के मनमुटाव (sibling discord) को दूर करता है, इसलिए पैतृक संपत्ति के विवादों को सुलझाने के लिए आज के दिन शांति से बातचीत शुरू करना बहुत शुभ रहता है।

Negativity and Stress

मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों से मुक्ति के लिए चंद्रमा की ऊर्जा का उपयोग करें। रक्षाबंधन की रात कुछ देर चंद्रमा की रोशनी में बैठें। 'ॐ सर्वमंगल मांगल्ये...' मंत्र का 11 बार स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें। चांदी के गिलास में पानी पीने से भी चंद्रमा मजबूत होता है और मन को गहरी शांति मिलती है।

क्या रक्षाबंधन आपके लिए विशेष है?

रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर चंद्रमा और बुध ग्रह से जुड़े ये उपाय बहुत प्रभावशाली हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि ये सामान्य ज्योतिषीय उपाय हैं जो गोचर और ग्रहों की सामान्य स्थिति पर आधारित हैं। एक लेख में बताई गई बातें सभी पर लागू हो सकती हैं, लेकिन आपकी अपनी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति बिल्कुल अलग होती है। यहीं पर एक व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श आपकी मदद करता है। यदि आप करियर, धन या अपनी दशा के सही समय को लेकर उलझन में हैं, तो Kundli रीडिंग आपको स्पष्ट दिशा दे सकती है। विवाह और रिश्तों में आ रही समस्याओं के लिए Kundali Milan गहराई से आपकी अनुकूलता का विश्लेषण करता है। आपके हाथों की रेखाएं आपके जीवन के अनकहे रहस्यों को Hastrekha रीडिंग के जरिए सामने लाती हैं। वहीं, यदि आपको बार-बार अजीब सपने आते हैं, तो Swapna Shastra उनके पीछे छिपे संदेशों को डिकोड कर सकता है। त्रिकाल वाणी का उद्देश्य आपको सही रास्ता दिखाना है।

भारत में रक्षाबंधन — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रक्षाबंधन 2026 में कब है?

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है, जब बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। यह श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि का बहुत ही पावन दिन है, जिसका इंतजार हर परिवार को रहता है।

राखी बांधने का सही मुहूर्त क्या है?

राखी हमेशा भद्रा काल को छोड़कर ही बांधी जाती है, क्योंकि भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है। 28 अगस्त को प्रातः काल का भद्रा-मुक्त समय राखी बांधने के लिए सबसे शुभ और फलदायी रहेगा।

क्या 27 अगस्त को राखी बांधी जा सकती है?

नहीं, ज्योतिषीय गणना के अनुसार 27 अगस्त को अपराह्न काल में पूरी तरह से भद्रा (विष्टि करण) व्याप्त है। शास्त्रों में भद्रा के दौरान राखी बांधना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। इसलिए यह पर्व 27 तारीख को न मनाकर 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन के दिन मुख्य रूप से क्या करना चाहिए?

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पवित्र मन से पूजा की थाली सजाएं। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाएं और एक-दूसरे की भलाई तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।

इस दिन किन चीजों से बचना चाहिए?

रक्षाबंधन के दिन मांस-मदिरा (non-vegetarian) का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह एक सात्विक पर्व है। भाई-बहन को आपस में झगड़ा, क्रोध या किसी भी तरह की बहस करने से बचना चाहिए। मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न लाएं और पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें।

क्या रक्षाबंधन पर व्रत रखना जरूरी है?

यह कोई कठोर व्रत वाला त्योहार नहीं है, लेकिन पारंपरिक रूप से बहनें तब तक कुछ नहीं खातीं जब तक वे राखी नहीं बांध देतीं। यदि आपका स्वास्थ्य ठीक न हो, तो आप हल्का आहार ले सकती हैं। गर्भवती महिलाओं या बीमार लोगों को अपनी दवाइयां समय पर लेनी चाहिए और भूखे रहने से बचना चाहिए। यदि आप अस्वस्थ हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

राखी बांधने से पहले क्या खा सकते हैं?

यदि आप व्रत कर रही हैं, तो आप ताजे फल, दूध या जूस का सेवन कर सकती हैं। जो लोग व्रत नहीं कर रहे हैं, वे सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या दवा ले रहे लोगों को भूखे नहीं रहना चाहिए। यदि आप अस्वस्थ हैं, तो कृपया व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

पूजा की थाली में क्या-क्या होना चाहिए?

पूजा की थाली में चांदी की राखी या रेशमी धागा, रोली, अक्षत (साबुत चावल) और चंदन होना चाहिए। इसके अलावा काजू कतली जैसी शुद्ध मिठाई और आरती के लिए घी का दीया रखना न भूलें। ये सभी चीजें शुभता का प्रतीक हैं और पूजा को पूर्ण बनाती हैं।

रक्षाबंधन की कथा क्या है?

इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा देवराज इंद्र और उनकी पत्नी शची की है, जिन्होंने इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर धागा बांधा था। इसके अलावा माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा भी इस पर्व का मुख्य आधार है। इन कथाओं से हमें यह शिक्षा मिलती है कि रक्षा सूत्र में हर संकट से बचाने की शक्ति होती है।

रक्षाबंधन का क्या महत्व है?

यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है। ज्योतिष की दृष्टि से, यह चंद्रमा और बुध ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करने का एक विशेष दिन है। इससे रिश्तों में मधुरता आती है और भाई-बहनों के बीच के पुराने विवाद सुलझ जाते हैं।

क्या इस दिन नया काम या व्यापार शुरू कर सकते हैं?

हां, श्रावण पूर्णिमा का दिन नए काम या व्यापार की शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। बस यह ध्यान रखें कि भद्रा काल या राहु काल के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शुरू न करें। शुभ मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य सफलता और समृद्धि लेकर आता है।

क्या रक्षाबंधन पर खरीदारी करना शुभ है?

बिल्कुल, इस दिन खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। आप नए कपड़े, आभूषण, उपहार या पूजा का सामान खरीद सकते हैं। त्योहार के दिन की गई खरीदारी घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और खुशियां लेकर आती है।

राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

राखी बांधते समय 'ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके नारायणि नमोऽस्तु ते' मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करना चाहिए। यह भगवान विष्णु और माता से मंगल की कामना करने का एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है। इस मंत्र के प्रभाव से भाई के जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा बनी रहती है।

क्या रक्षाबंधन पर दान करना चाहिए?

हां, पूर्णिमा के पवित्र दिन पर दान करने का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। आप अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या मिठाई का दान कर सकते हैं। निस्वार्थ भाव से किए गए दान से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

भाई-बहनों के बीच विवाद दूर करने के क्या उपाय हैं?

बुध ग्रह संवाद और भाई-बहन के रिश्तों का मुख्य कारक है। रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन एक-दूसरे को हरे रंग का कोई उपहार दें और साथ मिलकर भगवान विष्णु की आरती करें। इससे आपसी समझ बढ़ती है और मनमुटाव (sibling discord) हमेशा के लिए दूर हो जाता है।

अलग-अलग शहरों में राखी का समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है। इसी कारण से तिथियों और भद्रा काल की अवधि में कुछ मिनटों का अंतर आ जाता है। इसलिए हमेशा अपने शहर का पंचांग और ऊपर दी गई लाइव टेबल को ही देखना चाहिए।

रक्षाबंधन और भैया दूज में क्या अंतर है?

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जहाँ बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती है। वहीं, भैया दूज दिवाली के बाद कार्तिक मास में आता है, जहाँ मुख्य रूप से माथे पर तिलक लगाकर भाई की लंबी उम्र की कामना की जाती है। दोनों ही पर्व भाई-बहन के प्रेम को दर्शाते हैं, लेकिन इनकी विधियां अलग हैं।

क्या राखी टूट जाने पर अशुभ होता है?

इसे अशुभ मानने की बजाय एक सामान्य घटना के रूप में देखें। यदि राखी गलती से टूट जाए, तो उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें या किसी पवित्र पेड़ के पास रख दें। आप तुरंत दूसरी नई राखी बांध सकते हैं, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

महाराष्ट्र में रक्षाबंधन को क्या कहते हैं?

महाराष्ट्र और तटीय क्षेत्रों में इस दिन को 'नारळी पौर्णिमा' (Narali Purnima) के नाम से बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मछुआरे और समुद्र तटीय लोग समुद्र देवता वरुण को नारियल अर्पित करते हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि समुद्र देवता मछली पकड़ने के मौसम में उनकी रक्षा करें।

क्या महिलाएं अपने कान्हा जी (लड्डू गोपाल) को राखी बांध सकती हैं?

हां, यह बहुत ही सुंदर और भक्तिपूर्ण भाव है। कई महिलाएं सबसे पहली राखी अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल को ही बांधती हैं। वे भगवान से अपने परिवार की रक्षा और सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

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