गुरु सिंह राशि में कब जा रहा है — 31 अक्टूबर 2026 की सही तारीख
सीधा जवाब: देवगुरु बृहस्पति शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे (भारतीय समय) कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करता है। वह 13 दिसंबर 2026 को वक्री होता है, 25 जनवरी 2027 को वापस कर्क में लौटता है और 26 जून 2027 को दोबारा सिंह में आता है। गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश पर टिकी है।
यह पृष्ठ हर चंद्र राशि के लिए बताता है कि सिंह का गुरु आपकी राशि से किस भाव में बैठेगा, फलदीपिका का गोचर नियम उस भाव के बारे में क्या कहता है, और कौन-सा छोटा उपाय आज से शुरू किया जा सकता है। एक बात शुरू में ही साफ़ कर दें: गोचर केवल एक परत है, उसके ऊपर आपकी जन्मकुंडली और चल रही महादशा आती है, इसलिए नीचे की हर बात दिशा है, फ़ैसला नहीं।
गुरु की पूरी चाल — अक्टूबर 2026 से नवंबर 2027 तक की तारीखें
31 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:02 — कर्क से सिंह में प्रवेश।
13 दिसंबर 2026, सुबह 6:01 — सिंह में लगभग 2.8 अंश पर वक्री होना शुरू।
25 जनवरी 2027, रात 1:32 — वक्री चाल से वापस कर्क राशि में।
13 अप्रैल 2027, सुबह 8:13 — कर्क में लगभग 22.8 अंश पर मार्गी।
26 जून 2027, सुबह 5:19 — दोबारा सिंह राशि में।
26 नवंबर 2027, शाम 6:45 — सिंह से कन्या राशि में।
ये तारीखें 27 अक्टूबर 2026 को Trikaal Vaani Jyotish की गोचर गणना से जाँची गई हैं (स्विस एफेमेरिस, लाहिरी अयनांश, नई दिल्ली, भारतीय समय)। ध्यान दें कि सिंह का यह पहला पड़ाव केवल 31 अक्टूबर से 25 जनवरी तक, यानी लगभग तीन महीने का है। दूसरा और लंबा पड़ाव 26 जून से 26 नवंबर 2027 तक चलेगा।
पुरानी गलत तारीखों से कैसे बचें
कुछ जगह गुरु के सिंह प्रवेश की ऐसी तारीखें लिखी गईं जो इंजन की गणना से मेल नहीं खातीं। इनमें सबसे आम यह दावा था कि गुरु जुलाई 2026 में ही सिंह में चला जाएगा। वास्तविक गणना में गुरु 2 जून 2026 को रात 1:50 बजे मिथुन से कर्क में आया और 31 अक्टूबर तक वहीं रहा। जिसने जुलाई वाली तारीख मानकर सलाह ली, उसके लिए हर भाव एक घर खिसक गया। इसलिए अपने भाव गिनने से पहले इस पृष्ठ की तारीखें मिला लीजिए।
बृहस्पति क्या देता है — ज्ञान, सुख और विस्तार
पराशर ऋषि ने ग्रहों के गुण बताते हुए देवगुरु को ज्ञान और सुख देने वाला कहा है।[1] इसी कारण कुंडली में गुरु विद्या, संतान, धन-संचय, गुरुजन और धर्म-कर्म का कारक माना जाता है। गोचर में जब वह किसी भाव को छूता है, तो उस भाव से जुड़ी बातों को फैलाता है। फैलाव हमेशा अच्छा ही हो, ऐसा नहीं है, इसीलिए आगे हर भाव का अलग नियम दिया गया है। गुरु के और विस्तृत स्वभाव के लिए गुरु महादशा की जानकारी और गुरु का संतान कारकत्व भी पढ़ सकते हैं।
कर्क का उच्च गुरु अब सूर्य के घर में
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में उच्च राशियाँ क्रम से मेष, वृषभ, मकर, कन्या, कर्क, मीन और तुला बताई गई हैं।[2] गुरु का स्थान इसमें कर्क है, और परम उच्च अंश पाँच हैं।[3] यानी 31 अक्टूबर तक गुरु अपनी सबसे बलवान राशि में बैठा था, और 31 अक्टूबर को वह सूर्य की राशि सिंह में आता है। सूर्य गुरु का मित्र ग्रह माना जाता है, इसलिए सिंह में गुरु बुरा नहीं होता, बस उसका बल कर्क जितना पूर्ण नहीं रहता। उच्च-नीच की विस्तृत समझ के लिए ग्रहों की उच्च और नीच राशि देखें।
सिंह में गुरु का बल कितना होता है
पराशर का नियम है कि ग्रह उच्च में पूरा शुभ फल देता है, मूलत्रिकोण में तीन चौथाई, स्वराशि में आधा और मित्र के घर में एक चौथाई।[4] गुरु की मूलत्रिकोण राशि धनु है, जिसके पहले दस अंश उसके मूलत्रिकोण हैं, और उसके बाद का धनु भी उसकी स्वराशि है।[5] मीन गुरु की दूसरी स्वराशि है। सिंह मित्र का घर है, इसलिए जन्मकुंडली में सिंह का गुरु मध्यम बल का माना जाता है। पर यह नियम जन्म के ग्रह के लिए है। गोचर में गुरु का फल मुख्य रूप से इस पर टिकता है कि वह आपकी चंद्र राशि से किस भाव में है, और आगे यही बताया गया है।
सिंह के पहले पड़ाव में मघा नक्षत्र
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में नक्षत्रों के अधिष्ठाता देवता क्रम से गिनाए गए हैं, जिनमें आश्लेषा के अहि, मघा के पितर और पूर्वा फाल्गुनी के भग हैं।[6] वक्री होने से पहले गुरु सिंह में केवल लगभग 2.8 अंश तक जाता है, यानी इस पहले पड़ाव में वह सिंह के पहले हिस्से, मघा नक्षत्र के पहले चरण तक ही पहुँचता है। मघा पितरों का नक्षत्र है, इसलिए इन तीन महीनों में पितृ-स्मरण, तर्पण और बुज़ुर्गों की सेवा जैसे उपाय स्वाभाविक रूप से जुड़ते हैं। पितरों से जुड़े विषय के लिए पितृ दोष का पृष्ठ काम का है।
दूसरे पड़ाव में पूर्वा और उत्तरा फाल्गुनी
26 जून 2027 से गुरु जब दोबारा सिंह में आएगा, तब उसके पास आगे बढ़ने का लंबा समय होगा, इसलिए वह मघा से आगे पूर्वा फाल्गुनी और बाद में उत्तरा फाल्गुनी की ओर बढ़ सकता है। पूर्वा फाल्गुनी के देवता भग और उत्तरा फाल्गुनी के देवता अर्यमा हैं।[7] इस दौर में नक्षत्र का सटीक पड़ाव उस समय की गणना से तय किया जाएगा, और यह पृष्ठ तब उसी हिसाब से अद्यतन होगा। सभी सत्ताईस नक्षत्रों की समझ के लिए नक्षत्र गाइड उपयोगी है।
गोचर हमेशा चंद्र राशि से गिना जाता है
फलदीपिका का पहला गोचर श्लोक कहता है कि सब लग्नों के रहते भी गोचर में चंद्र लग्न प्रधान है, इसलिए गोचर के फल चंद्र राशि से देखे जाने चाहिए।[8] यही कारण है कि अख़बार की सूर्य राशि वाली भविष्यवाणी अक्सर ग़लत बैठती है। अगर आपको अपनी चंद्र राशि पक्की नहीं पता, तो फ्री राशि कैलकुलेटर से एक मिनट में निकल आएगी, और जन्म कुंडली कैलकुलेटर से पूरी कुंडली। चंद्र राशि की समझ के लिए चंद्र राशि का पृष्ठ भी देखें।
गुरु 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में शुभ क्यों माना गया
फलदीपिका कहती है कि देवगुरु चंद्र राशि से दूसरे, ग्यारहवें, नौवें, पाँचवें और सातवें भाव में शुभ फल देता है, बशर्ते उसे बारहवें, आठवें, दसवें, चौथे और तीसरे भाव के ग्रहों से वेध न मिले।[9] जोड़ी इस प्रकार बनती है: दूसरे का वेध बारहवें से, ग्यारहवें का आठवें से, नौवें का दसवें से, पाँचवें का चौथे से और सातवें का तीसरे से होता है। इसलिए सिर्फ़ भाव गिन लेना काफ़ी नहीं, उस जोड़ीदार भाव में कोई ग्रह है या नहीं, यह भी देखना पड़ता है, जो आपकी असली कुंडली से ही पता चलता है।
सिंह से गुरु की दृष्टि किन राशियों पर पड़ेगी
पराशर के अनुसार हर ग्रह सातवें भाव को पूरा देखता है, और शनि, गुरु तथा मंगल की विशेष दृष्टियाँ भी हैं, जिनमें गुरु त्रिकोण यानी पाँचवें और नौवें भाव को देखता है।[10] सिंह में बैठा गुरु इसलिए पाँचवीं दृष्टि से धनु को, सातवीं से कुंभ को और नौवीं से मेष को देखता है। जिन तीन राशियों पर गुरु की यह सीधी नज़र पड़ती है, उनकी चंद्र राशि को गोचर में एक अतिरिक्त सहारा मिलता है, और यह बात नीचे हर राशि में जोड़ी गई है। दृष्टि का सहारा इस बात को बदलता नहीं कि फल कुंडली की दशा के साथ पढ़ा जाता है।
मेष राशि — सिंह का गुरु पाँचवें भाव में
पाँचवाँ भाव संतान, पढ़ाई, प्रेम और बुद्धि का घर है। फलदीपिका के अनुसार चंद्र राशि से पाँचवें भाव का गुरु संतान-सुख, सज्जनों का साथ और शासन या अधिकारियों की अनुकूलता देता है।[12] साथ ही सिंह से गुरु की नौवीं दृष्टि सीधे आपकी चंद्र राशि पर पड़ रही है, जो मन को स्थिरता देती है। पढ़ाई शुरू करने, परीक्षा की तैयारी और संतान की योजना के लिए यह दौर अच्छा है। सावधानी इतनी कि 13 दिसंबर के बाद वक्री चाल में फ़ैसले दोबारा जाँचने पड़ सकते हैं, इसलिए बड़ा निर्णय जनवरी से पहले कागज़ पर रखकर परखिए। उपाय: गुरुवार सुबह चने की दाल और गुड़ किसी ज़रूरतमंद विद्यार्थी को दें, ख़र्च बीस-तीस रुपये, लगातार 11 गुरुवार, क्योंकि पाँचवें भाव का गुरु विद्या के सम्मान से ही फल देता है। आपकी साढ़ेसाती का पहला चरण भी चल रहा है, इसके लिए मेष राशि की साढ़ेसाती पढ़ें। पूरे साल की तस्वीर मेष राशि 2027 की भविष्यवाणी में है और पिछली समीक्षा मेष राशि का गुरु गोचर पृष्ठ पर।
वृषभ राशि — सिंह का गुरु चौथे भाव में
चौथा भाव घर, माता, ज़मीन और मन की शांति का है। फलदीपिका के अनुसार चौथे भाव का गुरु बंधुजनों से जुड़े कष्ट, मन में उदासी और चौपायों से जुड़ी सावधानी की ओर संकेत करता है।[11] यह सामान्य गोचर संकेत है, कोई तय घटना नहीं, और इसे आपकी दशा तथा गुरु की दृष्टि के साथ पढ़ना चाहिए। सिंह से गुरु आपके आठवें, दसवें और बारहवें भाव को देखता है, जिससे शोध, करियर की गंभीरता और खर्च का सही दिशा में जाना संभव है। व्यवहार में घर या वाहन का बड़ा सौदा जल्दबाज़ी में न करें और काग़ज़ दो बार जाँचें। उपाय: गुरुवार शाम को घर के बड़ों के साथ दस मिनट बैठकर बात करें, ख़र्च कुछ नहीं, लगातार 21 गुरुवार, क्योंकि चौथे भाव का गुरु घर के संवाद से हल्का होता है। विस्तार के लिए वृषभ राशि 2027 की भविष्यवाणी और वृषभ राशि का गुरु गोचर पृष्ठ देखें।
मिथुन राशि — सिंह का गुरु तीसरे भाव में
तीसरा भाव पराक्रम, भाई-बहन, छोटी यात्रा और संवाद का है। फलदीपिका तीसरे भाव के गुरु को कामकाज में रुकावट, स्थिति की अस्थिरता और प्रियजन से दूरी वाला बताती है।[11] इसका सीधा अर्थ यह नहीं कि बुरा होगा, बल्कि यह कि इन महीनों में नतीजे मेहनत के बाद और थोड़ी देर से आएँगे। राहत की बात यह है कि गुरु की दृष्टि आपके सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव पर पड़ती है, यानी साझेदारी, भाग्य और आय तीनों को सहारा मिलता है। नौकरी बदलने या नया काम शुरू करने से पहले काम की योजना लिखित रखिए। उपाय: गुरुवार सुबह भाई-बहन या सहकर्मी की किसी एक छोटी मदद का संकल्प लें, ख़र्च शून्य, 11 गुरुवार, क्योंकि तीसरे भाव का गुरु मदद देने से ही फल बदलता है। आगे पढ़ें मिथुन राशि 2027 की भविष्यवाणी और मिथुन राशि का गुरु गोचर पृष्ठ।
कर्क राशि — सिंह का गुरु दूसरे भाव में
दूसरा भाव धन, परिवार और वाणी का है, और यह उन पाँच भावों में है जिनमें गुरु को शुभ माना गया है।[9] फलदीपिका के अनुसार दूसरे भाव का गुरु धन की प्राप्ति, परिवार का सुख और वाणी का असर देता है।[11] आपके लिए बदलाव यह है कि 31 अक्टूबर तक गुरु आपकी अपनी राशि में उच्च होकर बैठा था और अब एक घर आगे धन भाव में आता है। सिंह से गुरु आपके छठे, आठवें और दसवें भाव को देखता है, जो कर्ज़ निपटाने, शोध और करियर की साख के लिए सहायक है। बचत की योजना बनाने और परिवार में सुलझे हुए संवाद के लिए यह अच्छा समय है। उपाय: गुरुवार सुबह पीले फल या केले का दान करें, ख़र्च तीस-चालीस रुपये, लगातार 11 गुरुवार, क्योंकि दूसरे भाव का गुरु अन्न और वाणी की शुद्धता से बढ़ता है। विस्तार के लिए कर्क राशि 2027 की भविष्यवाणी और कर्क राशि का गुरु गोचर पृष्ठ पढ़ें।
सिंह राशि — सिंह का गुरु पहले भाव में
अगर आपकी चंद्र राशि सिंह है तो गुरु आपके पहले भाव यानी जन्म राशि पर आएगा। फलदीपिका में जन्म राशि का गुरु देश से बाहर जाना, धन का खर्च और विरोध जैसे फल बताता है।[11] इसे डर की तरह मत पढ़िए। इसका सीधा मतलब यह है कि इस साल शरीर, छवि और फैसलों पर ज़्यादा ध्यान चाहिए। पहले भाव का गुरु खुद आपका विस्तार करता है, इसलिए वज़न, पाचन और आलस पर नज़र रखना काम आता है।
गुरु की दृष्टि पाँचवें, सातवें और नौवें घर पर पड़ती है। यानी संतान और पढ़ाई (धनु), जीवनसाथी और साझेदारी (कुंभ) तथा भाग्य और गुरुजन (मेष) को सहारा मिलता है। इसी वजह से यह समय पूरी तरह भारी नहीं होता, खासकर जिनकी दशा गुरु से जुड़ी है। व्यावहारिक सुझाव: बड़ा पैसा लगाने या यात्रा के फैसले जल्दबाज़ी में न लें, चार लोगों से सलाह लेकर लें।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को पीली दाल या चने की दाल का दान। कब: सुबह, सूर्योदय के बाद। खर्च: लगभग 50 से 100 रुपये। कितने दिन: लगातार 11 गुरुवार। क्यों आपके लिए: पहले भाव का गुरु आत्म-विस्तार बढ़ाता है, यह दान संयम और सेवा का भाव जोड़ता है। विस्तार से पढ़ें सिंह राशि पर गुरु गोचर और सिंह राशि 2027 भविष्यवाणी। अपनी चंद्र राशि पक्की करने के लिए फ्री राशि कैलकुलेटर चलाएँ।
कन्या राशि — सिंह का गुरु बारहवें भाव में
कन्या के लिए सिंह बारहवाँ भाव बनता है। फलदीपिका बारहवें गुरु के साथ दुख और धन के कारण भय की बात करती है।[13] आज की भाषा में इसे खर्च, नींद की कमी और अनावश्यक चिंता से जोड़कर समझिए। यह भाव विदेश, अस्पताल, दान और एकांत का भी है, इसलिए विदेश से जुड़े काम और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए यह समय बुरा नहीं है।
गुरु की दृष्टि चौथे (धनु), छठे (कुंभ) और आठवें (मेष) भाव पर पड़ती है। घर और माता का सुख, कर्ज़ और स्वास्थ्य की जाँच तथा अचानक आने वाले खर्च, तीनों पर नज़र रखनी होगी। व्यावहारिक सुझाव: हर महीने की शुरुआत में खर्च का बजट लिख लें और बीमा तथा स्वास्थ्य जाँच समय पर करा लें। यह फल केवल चंद्र राशि से देखा गया सामान्य गोचर है, आपकी कुंडली और चल रही दशा से फल बदल सकता है।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को केले के पेड़ के पास जल चढ़ाना और ज़रूरतमंद को पीला भोजन देना। कब: सुबह। खर्च: 100 रुपये के आसपास। कितने दिन: 9 गुरुवार। क्यों आपके लिए: बारहवें भाव का खर्च दान की दिशा में मोड़ने से मन हल्का रहता है। पढ़ें कन्या राशि पर गुरु गोचर और कन्या राशि 2027 भविष्यवाणी।
तुला राशि — सिंह का गुरु ग्यारहवें भाव में
तुला वालों के लिए सिंह ग्यारहवाँ भाव है, यानी लाभ, बड़े भाई-बहन, मित्र और इच्छा-पूर्ति का घर। फलदीपिका ग्यारहवें गुरु से पुत्र-स्थान, मान और धन आदि का लाभ बताती है।[13] मुख्य सुविधा यह है कि रुके हुए पैसे और पुराने संपर्क फिर सक्रिय हो सकते हैं। यह गोचर तुला के लिए इस पूरे चक्र के अच्छे भावों में गिना जाता है।
गुरु की दृष्टि तीसरे (धनु), पाँचवें (कुंभ) और सातवें (मेष) भाव पर पड़ती है। इससे हिम्मत और लेखन-संवाद, संतान और पढ़ाई तथा विवाह और साझेदारी, तीनों को बल मिलता है। सावधानी: लाभ के साथ दिखावे का खर्च भी बढ़ता है, इसलिए कमाई का एक हिस्सा पहले ही अलग निवेश में डाल दें। जब गुरु वक्री होगा तब फल थोड़े धीमे हो सकते हैं।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को किसी शिक्षक या बुज़ुर्ग को पीली मिठाई या किताब देना। कब: सुबह या शाम। खर्च: 50 से 150 रुपये। कितने दिन: 7 गुरुवार। क्यों आपके लिए: लाभ भाव का गुरु तब ज़्यादा टिकता है जब लाभ का कुछ अंश ज्ञान और सेवा में लगे। पढ़ें तुला राशि पर गुरु गोचर और तुला राशि 2027 भविष्यवाणी।
वृश्चिक राशि — सिंह का गुरु दसवें भाव में
वृश्चिक के लिए सिंह दसवाँ भाव है, यानी काम, पद और सार्वजनिक छवि। फलदीपिका के अनुसार कर्म स्थान का गुरु धन-स्थान और संतान से जुड़ी परेशानी देता है।[13] इसे ऐसे पढ़ें कि नौकरी या कारोबार में ज़िम्मेदारी बढ़ेगी, और उसी के साथ घर-परिवार और पैसे के फैसलों पर दबाव आ सकता है। बदलाव का जल्दबाज़ी में फैसला न लें।
गुरु की दृष्टि दूसरे (धनु), चौथे (कुंभ) और छठे (मेष) भाव पर पड़ती है। इसका फायदा यह है कि परिवार की जमा-पूँजी, घर का सुख और प्रतिस्पर्धा में जीत, तीनों को सहारा मिलता है। व्यावहारिक सुझाव: नई नौकरी का प्रस्ताव मिले तो लिखित शर्तें देखकर ही हाँ करें, और दस्तावेज़ों का काम गुरुवार को निपटाएँ। यह सामान्य गोचर फल है, इसे अपनी महादशा से मिलाकर देखें।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को गुरु मंत्र का जाप, 108 बार। कब: सूर्योदय के बाद। खर्च: कुछ नहीं। कितने दिन: 11 गुरुवार। क्यों आपके लिए: दसवें भाव में काम का दबाव रहता है, जाप से निर्णय शांत मन से होते हैं। पढ़ें वृश्चिक राशि पर गुरु गोचर और वृश्चिक राशि 2027 भविष्यवाणी। अपनी दशा देखने के लिए फ्री दशा कैलकुलेटर चलाएँ।
धनु राशि — सिंह का गुरु नौवें भाव में
धनु वालों के लिए सिंह नौवाँ भाव है, यानी भाग्य, पिता, गुरुजन और धर्म का घर। फलदीपिका साफ कहती है कि नौवें भाव में गुरु होने पर सब प्रकार के सौभाग्य की सिद्धि होती है।[13] धनु का स्वामी भी गुरु है, इसलिए यह गोचर आपके लिए इस चक्र के सबसे सहायक गोचरों में गिना जाता है। उच्च शिक्षा, तीर्थ, मार्गदर्शक से मुलाकात और रुके हुए भाग्य-कार्यों में गति दिख सकती है।
गुरु की दृष्टि आपकी अपनी राशि (धनु, पहला भाव), कुंभ (तीसरा) और मेष (पाँचवाँ) पर पड़ती है। यानी स्वास्थ्य और आत्मविश्वास, भाई-बहनों से संबंध और संतान या पढ़ाई तीनों को बल मिलता है। सीमा भी याद रखें: कुंडली में गुरु नीच या छठे-आठवें-बारहवें में बैठा हो तो फल मद्धम रहता है, इसलिए पूरी जन्म कुंडली से मिलान ज़रूर करें। व्यावहारिक सुझाव: जो कोर्स या यात्रा टाल रहे थे, उसकी योजना अब बनाएँ।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को पिता या किसी बुज़ुर्ग के पैर छूकर आशीर्वाद लेना और पीले फूल चढ़ाना। कब: सुबह। खर्च: 30 से 50 रुपये। कितने दिन: 9 गुरुवार। क्यों आपके लिए: भाग्य भाव का गुरु बड़ों के आशीर्वाद से और खुलकर फल देता है। पढ़ें धनु राशि पर गुरु गोचर, धनु राशि 2027 भविष्यवाणी और गुरु गोचर का धनु राशि पर असर।
मकर राशि — सिंह का गुरु आठवें भाव में
मकर के लिए सिंह आठवाँ भाव है, यानी अचानक बदलाव, गुप्त बातें, बीमा, विरासत और लंबी बीमारी का घर। फलदीपिका के अनुसार आठवें गुरु में रास्ते की परेशानी और धन की हानि जैसे फल आते हैं।[12] इसका व्यावहारिक अर्थ है कि उधार देना, ज़मानत लेना और बिना जाँचे निवेश करना इस दौर में सोच-समझकर करें। गुरु का स्वभाव बचाने वाला है, इसलिए नुकसान तभी बड़ा होता है जब जोखिम बिना तैयारी के लिया जाए।
गुरु की दृष्टि बारहवें (धनु), दूसरे (कुंभ) और चौथे (मेष) भाव पर पड़ती है। इससे विदेश या अस्पताल के खर्च में सहारा, परिवार का धन और घर का सुख, तीनों सँभलते हैं। सुझाव: स्वास्थ्य बीमा और वसीयत जैसे दस्तावेज़ इसी दौर में पूरे कर लें। यह सामान्य गोचर फल है और चल रही दशा के अनुसार हल्का या भारी हो सकता है।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को हल्दी का दान या किसी मंदिर में पीला कपड़ा देना। कब: सुबह। खर्च: 50 से 120 रुपये। कितने दिन: 11 गुरुवार। क्यों आपके लिए: आठवें भाव की अनिश्चितता में नियमित दान से मन स्थिर रहता है। पढ़ें मकर राशि पर गुरु गोचर और मकर राशि 2027 भविष्यवाणी।
कुंभ राशि — सिंह का गुरु सातवें भाव में
कुंभ वालों के लिए सिंह सातवाँ भाव है, यानी विवाह, साझेदारी और रोज़मर्रा के सौदे। फलदीपिका सातवें भाव के गुरु से यात्रा, स्त्री-सुख और संतान की प्राप्ति जैसे अच्छे फल बताती है।[12] गोचर में गुरु को सातवें भाव में शुभ भी गिना गया है।[9] यानी विवाह की बातचीत, नई साझेदारी और ग्राहक से जुड़े काम में आगे बढ़ना आसान रहता है।
गुरु की दृष्टि ग्यारहवें (धनु), पहले (कुंभ) और तीसरे (मेष) भाव पर पड़ती है। आपके लाभ, आपका स्वास्थ्य और आपकी हिम्मत तीनों को सहारा मिलता है। सावधानी: शुभ गोचर में भी अनुबंध बिना पढ़े साइन न करें, और रिश्ते की बात में ज्योतिष से ज़्यादा आपसी समझ को तरजीह दें। विवाह की तारीख देखनी हो तो 2027 के विवाह मुहूर्त जाँचें।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को जीवनसाथी या साझेदार के साथ मंदिर जाना और केसर का तिलक। कब: सुबह। खर्च: लगभग 50 रुपये। कितने दिन: 7 गुरुवार। क्यों आपके लिए: सातवें भाव का गुरु रिश्तों में विश्वास से ही टिकता है। पढ़ें कुंभ राशि पर गुरु गोचर और कुंभ राशि 2027 भविष्यवाणी।
मीन राशि — सिंह का गुरु छठे भाव में
मीन के लिए सिंह छठा भाव है, यानी कर्ज़, रोग, शत्रु और नौकरी की सेवा का घर। फलदीपिका के अनुसार छठे गुरु से शत्रु, रिश्तेदार और रोग परेशान करते हैं।[12] यह भाव प्रतिस्पर्धा का भी है, इसलिए परीक्षा, मुकदमे और नौकरी के मुकाबले में तैयारी का फल मिलता है, बशर्ते आप स्वास्थ्य और कर्ज़ की किस्तों पर नियमित नज़र रखें। मीन गुरु की अपनी राशि है, इसलिए गुरु आपका स्वामी होकर आपकी रक्षा भी करता है।
गुरु की दृष्टि दसवें (धनु), बारहवें (कुंभ) और दूसरे (मेष) भाव पर पड़ती है। करियर, खर्च और परिवार की जमा-पूँजी तीनों पर सहारा मिलता है। मीन राशि पर शनि भी इस समय चल रहा है, इसलिए साढ़ेसाती कैलकुलेटर से अपनी स्थिति देखकर गुरु के साथ मिलाकर पढ़ें। सुझाव: कर्ज़ की किस्त और स्वास्थ्य जाँच समय पर रखें, और किसी विवाद में सुलह का रास्ता खोलें।
छोटा उपाय: क्या: गुरुवार को गाय को चने की दाल और गुड़ खिलाना। कब: सुबह। खर्च: 30 से 60 रुपये। कितने दिन: 11 गुरुवार। क्यों आपके लिए: छठे भाव की चुनौतियों में सेवा का अभ्यास मन और सेहत दोनों को संभालता है। पढ़ें मीन राशि पर गुरु गोचर और मीन राशि 2027 भविष्यवाणी।
किन राशियों के लिए यह गोचर सबसे अनुकूल है
चंद्र राशि से गिनने पर गुरु दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ माना गया है।[9] सिंह का गुरु इस नियम पर कर्क (दूसरा), मेष (पाँचवाँ), कुंभ (सातवाँ), धनु (नौवाँ) और तुला (ग्यारहवाँ) राशि वालों को सबसे ज़्यादा सहारा देता है। इन पाँच राशियों में पढ़ाई, विवाह की बात, धन की बचत और बड़ों का मार्गदर्शन आगे बढ़ने की संभावना रखते हैं। यह संभावना है, गारंटी नहीं, क्योंकि अंतिम फल जन्म कुंडली के गुरु और चल रही दशा से तय होता है।
किन राशियों को सावधानी से चलना है
बाकी राशियों यानी सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन, वृषभ और मिथुन में गुरु उन भावों में आता है जहाँ फल मिला-जुला बताया गया है। मिला-जुला का मतलब बुरा नहीं है। इसका मतलब है कि अवसर के साथ खर्च, देरी या ज़िम्मेदारी भी आएगी। इन राशियों के लिए तीन आदतें काम आती हैं: बड़ा फैसला लेने से पहले एक हफ्ता रुकना, पैसे की बात लिखित में रखना और हर गुरुवार छोटा सा दान या सेवा करना। हर राशि का अलग विवरण ऊपर दिया है, उसे अपनी चंद्र राशि वाले हिस्से से पढ़ें।
शनि का साथ — मीन में मार्गी और मेष में प्रवेश
इसी दौर में शनि मीन राशि में चल रहा है, 11 दिसंबर 2026 को वह मार्गी होगा और 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेगा। शनि के मीन में रहते कुंभ, मीन और मेष राशि वालों की साढ़ेसाती चलती है। गुरु का सहारा इन तीनों के लिए राहत की बात है, क्योंकि कुंभ और मेष को गुरु सातवें और पाँचवें भाव से शुभ मिलता है। फिर भी साढ़ेसाती का असर आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर करता है। अपनी स्थिति देखने के लिए फ्री साढ़ेसाती कैलकुलेटर चलाएँ और शनि गोचर 2027 का पूरा मार्गदर्शन पढ़ें।
राहु-केतु का बदलाव — 5 दिसंबर 2026
5 दिसंबर 2026 को राहु मकर राशि में और केतु कर्क राशि में आ जाएँगे। इससे गुरु की चाल के बीच ही छाया ग्रहों का भी भावों का समीकरण बदलेगा। जिनकी चंद्र राशि मकर या कर्क है उन्हें इस तारीख के बाद अपने रोज़ के निर्णयों में अतिरिक्त धैर्य रखना अच्छा रहेगा। विस्तार से पढ़ें राहु-केतु गोचर 2027 और क्या राहु-केतु गोचर 2026 खतरनाक है।
मंगल का सिंह में आना — 12 नवंबर 2026
12 नवंबर 2026 को मंगल भी सिंह राशि में आएगा, यानी कुछ समय के लिए गुरु और मंगल एक ही राशि में रहेंगे। गुरु ज्ञान और संयम देता है, मंगल ऊर्जा और जल्दबाज़ी। जिन लोगों की राशि सिंह है या जिनके लिए सिंह दूसरा, पाँचवाँ या दसवाँ भाव है, उन्हें इस समय क्रोध पर काबू और सड़क पर सावधानी रखनी चाहिए। इसे डर की बात न समझें, यह सिर्फ़ याद दिलाता है कि ऊर्जा को सही काम में लगाना है।
गुरु वक्री — 13 दिसंबर 2026 से
13 दिसंबर 2026 से गुरु वक्री होगा। व्यवहार में इसका मतलब यह देखा जाता है कि नए बड़े काम की जगह पुराने अधूरे कामों को पूरा करने का समय आता है, पुराने संपर्क लौटते हैं और योजनाएँ दोबारा जाँचने की ज़रूरत पड़ती है। इस दौरान बड़ा निवेश, नया कारोबार शुरू करना या विवाह की तारीख पक्की करना हो तो अपनी कुंडली देखकर ही करें। वक्री होना अपने आप में अशुभ नहीं है, पर इसमें फल की गति बदलती है।
25 जनवरी 2027 — गुरु फिर कर्क में, फिर उच्च
25 जनवरी 2027 को वक्री गुरु वापस कर्क राशि में लौटेगा। कर्क गुरु की उच्च राशि है, इसलिए गुरु फिर बल पाएगा। फलदीपिका का सूत्र है कि अनिष्ट भाव में बैठा ग्रह भी अपनी उच्च या स्वराशि में हो तो दोष नहीं करता, और शुभ भाव में हो तो पूरा फल देता है।[14] इस वजह से जिन राशियों के लिए सिंह का गुरु भारी लग रहा था, उन्हें जनवरी 2027 के बाद राहत महसूस हो सकती है। उसी समय केतु भी कर्क में होगा, इसलिए कर्क में गुरु और केतु का साथ रहेगा और अध्यात्म, शोध और एकांत की ओर झुकाव बढ़ सकता है।
26 जून से 26 नवंबर 2027 — सिंह में दूसरा पड़ाव
गुरु 26 जून 2027 को फिर सिंह राशि में आएगा और 26 नवंबर 2027 को कन्या राशि में जाएगा। यानी जो फल अभी शुरू हो रहे हैं, उनका दूसरा चरण जून से नवंबर 2027 में आएगा। अगर कोई काम इस बार अधूरा रहे तो घबराइए नहीं, उसके पूरा होने का एक और मौका आएगा। अपनी राशि का अगला साल पढ़ने के लिए राशिफल 2027 जैसे पन्ने देखें।
विवाह और संतान पर गुरु का असर
गुरु विवाह और संतान का मुख्य कारक है। चंद्र राशि से पाँचवें और सातवें भाव में आने पर गुरु अच्छे फल देता है।[12] इसलिए मेष (पाँचवाँ) और कुंभ (सातवाँ) राशि वालों के लिए विवाह-बातचीत और संतान की योजना में अनुकूलता रहती है। बाकी राशियों के लिए भी गुरु की दृष्टि धनु, कुंभ और मेष पर पड़ती है, जिनसे रिश्तों को अप्रत्यक्ष सहारा मिलता है।[10] शादी की तारीख चुनते समय केवल गोचर नहीं, वर-वधू की कुंडली मिलान और विवाह मुहूर्त भी देखें।
करियर पर गुरु गोचर का असर
करियर के लिए दसवाँ, छठा और ग्यारहवाँ भाव देखा जाता है। तुला (ग्यारहवाँ भाव) को लाभ और पद-वृद्धि की अच्छी संभावना है, वृश्चिक (दसवाँ) को ज़िम्मेदारी और मुकाबला मिलेगा, और मीन (छठा) को नौकरी में सेवा और प्रतिस्पर्धा। गुरु की दृष्टि धनु, कुंभ और मेष पर रहती है, तो शिक्षण, सलाह, वित्त, कानून और विदेश से जुड़े काम में ज़्यादा लाभ की गुंजाइश बनती है। नौकरी बदलने से पहले अपनी महादशा देखना सबसे ज़रूरी है।
पैसे और निवेश पर गुरु गोचर का असर
धन के लिए दूसरा और ग्यारहवाँ भाव देखा जाता है। कर्क को दूसरे भाव का गुरु धन और परिवार का सुख देता है, और तुला को ग्यारहवें भाव का गुरु लाभ।[13] बारहवें भाव वाली कन्या और आठवें भाव वाली मकर राशि को इस दौर में खर्च और जोखिम पर विशेष नज़र रखनी चाहिए। नियम सरल है: कमाई का पहला हिस्सा बचत में जाए, दूसरा ज़रूरी खर्च में और तीसरा सोच-समझकर निवेश में। किसी भी निवेश सलाह के लिए वित्तीय विशेषज्ञ से बात करें, ज्योतिष फल केवल मार्गदर्शन है।
गोचर और दशा में कौन ज़्यादा ताकतवर है
गोचर यह बताता है कि आज आकाश में ग्रह कहाँ हैं, जबकि दशा यह बताती है कि आपके जन्म के ग्रहों में से किसका समय चल रहा है। शास्त्र गोचर फल को चंद्र लग्न यानी जन्म राशि से गिनने को प्रधान मानता है,[8] पर फल की मात्रा में दशा अक्सर रंग तय करती है। उदाहरण के लिए गुरु की महादशा या अंतर्दशा में गुरु का शुभ गोचर और अच्छा फल दे सकता है, जबकि कमज़ोर दशा में उसी गोचर का फल हल्का रह सकता है। अपनी दशा जानने के लिए फ्री दशा कैलकुलेटर चलाएँ।
गजकेसरी और गुरु-चांडाल का ध्यान
जब गुरु जन्म के चंद्रमा से केंद्र यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें स्थान पर आता है तो गजकेसरी जैसा सहायक संयोग बनता है, जो मान और समझ को बल देता है। दूसरी ओर राहु के साथ गुरु का संबंध गुरु-चांडाल कहलाता है और सोच में भ्रम पैदा कर सकता है। इस गोचर में सिंह में गुरु के साथ राहु नहीं है, इसलिए वह स्थिति नहीं बन रही, पर जन्म कुंडली में हो तो अलग से जाँच लें। इसकी पूरी समझ के लिए पढ़ें गुरु-चांडाल योग क्या है और उपाय।
सभी के लिए एक सरल उपाय योजना
किसी भी राशि के लिए पहला उपाय रत्न नहीं, बल्कि सेवा और अनुशासन होना चाहिए। क्या: हर गुरुवार सुबह किसी शिक्षक, बुज़ुर्ग या ज़रूरतमंद को पीली चीज़ (चने की दाल, केला या हल्दी) का दान और गुरु मंत्र का जाप। कब: सूर्योदय के बाद। खर्च: 50 से 100 रुपये प्रति गुरुवार। कितने दिन: लगातार 11 गुरुवार, फिर रुककर देखें। क्यों आपके लिए: गुरु ज्ञान, गुरुजन और सेवा का कारक है, इसलिए इनसे जुड़ा आचरण ही उसका सबसे सीधा उपाय है। यह उपाय सुरक्षित है और किसी की कुंडली को नुकसान नहीं पहुँचाता।
पुखराज पहनने से पहले यह ज़रूर पढ़ें
गुरु की बात आते ही लोग सीधे पुखराज की ओर दौड़ते हैं, पर रत्न हर किसी के लिए सही नहीं होता। अगर गुरु आपकी कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी है, या कमज़ोर और अशुभ है, तो पुखराज उल्टा असर भी कर सकता है। इसलिए रत्न बिना कुंडली देखे न पहनें। पहले फ्री पुखराज कैलकुलेटर से जाँचें और जहाँ तक हो सके पहले दान, सेवा और मंत्र जैसे उपाय आज़माएँ।
निष्कर्ष — सिंह का गुरु किसके लिए क्या लाया
गुरु 31 अक्टूबर 2026 को सिंह में आता है, 13 दिसंबर से वक्री होकर 25 जनवरी 2027 को फिर कर्क में लौटता है और 26 जून से 26 नवंबर 2027 तक दूसरी बार सिंह में रहता है। कर्क, मेष, कुंभ, धनु और तुला को सबसे अधिक सहारा है। बाकी राशियों के लिए यह सावधानी, तैयारी और सेवा का दौर है। अपनी पक्की स्थिति के लिए चंद्र राशि और दशा दोनों देखें, और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए फ्री राशि कैलकुलेटर से शुरुआत करें।
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✦ अपनी चंद्र राशि और गोचर का असर देखेंशब्दावली · Glossary
- गोचर
- आकाश में ग्रहों की वर्तमान चाल, जिसे जन्म राशि या लग्न से गिनकर फल देखा जाता है।
- वक्री
- वह स्थिति जब ग्रह पृथ्वी से देखने पर पीछे की ओर चलता दिखता है।
- उच्च राशि
- वह राशि जिसमें ग्रह को सबसे अधिक बल मिलता है, गुरु के लिए कर्क।
- चंद्र राशि
- जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, गोचर फल इसी से गिना जाता है।
- साढ़ेसाती
- शनि का जन्म राशि के बारहवें, पहले और दूसरे भाव से गुज़रने का साढ़े सात साल का दौर।
- दृष्टि
- ग्रह जिन भावों को देखता है, गुरु के लिए पाँचवाँ, सातवाँ और नौवाँ भाव।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
देवेज्यो ज्ञानसुखदो भृगुर्वीर्यप्रदयकः । ऋषिभिः प्राक्।ह्तनैः प्रोक्तश्छायासूनुश्च दुःखदः
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 3 — atha grahaguNasvarUpAdhyAyaHJupiter is the planet of knowledge, wisdom and happiness.
बृहस्पति ज्ञान, विवेक और सुख देने वाला ग्रह है।
मेषो वृषो मृगः कन्या कर्को मीनस्तथा तुला । सूर्यादीनां क्रमादेते कथिता उच्चराशयः
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 3 — atha grahaguNasvarUpAdhyAyaHEach planet has its own exaltation sign; Jupiter is exalted in Cancer.
हर ग्रह की अपनी उच्च राशि है, गुरु की उच्च राशि कर्क है।
भागा दश त्रयोऽष्टाश्व्यस्तिथ्योऽक्षा भमिता नखाः । उच्चात् सप्तमभं नीचं तैरेवांशैः प्रकीर्तितम्
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 3 — atha grahaguNasvarUpAdhyAyaHThe exaltation degrees of the planets are listed.
ग्रहों की उच्च के अंश यहाँ दिए गए हैं।
ततः पञ्चांशकाः प्रोक्तं त्रिकोणमपरे स्वभम् । चापे दशांशा जीवस्य त्रिकोणमपरे स्वभम्
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 3 — atha grahaguNasvarUpAdhyAyaHMoolatrikona sections for the planets are listed, with Sagittarius for Jupiter.
मूलत्रिकोण के भाग बताए गए हैं, गुरु के लिए धनु।
स्वोच्चे शुभं फलं पूर्ण त्रिकोणे पादवर्जितम् । स्वर्क्षेऽर्धं मित्रगेहे तु पादमात्रं प्रकीर्तितम्
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 3 — atha grahaguNasvarUpAdhyAyaHPlanet strength varies with dignity: full, three-quarter, half or one-quarter.
ग्रह का बल उसकी स्थिति के अनुसार पूरा, तीन चौथाई, आधा या चौथाई होता है।
भांशाधिपाः क्रमाद्दस्रयमवह्निपितामहाः । चन्द्रेशादितिजीवाहिपितरो भगसञ्ज्ञिताः
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 6 — atha ShoDashavargAdhyAyaHThe nakshatras and their presiding deities are listed.
नक्षत्रों और उनके देवताओं की सूची दी गई है।
अर्यमार्कत्वष्ट्।ह्टमरुच्छक्राग्निमित्रवासवाः । निरृत्युदकविश्वेऽजगोविन्दो वसवोऽम्बुपः
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 6 — atha ShoDashavargAdhyAyaHThe list of nakshatra deities continues.
नक्षत्र देवताओं की सूची आगे बढ़ती है।
सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु । तस्मात्तदृक्षादपि वर्तमानग्रहेन्द्रचारैः कथयेत्फलानि ॥१॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 1In transits the Moon sign is primary; results are read from it.
गोचर में चंद्र लग्न प्रधान है, फल उसी से देखे जाते हैं।
स्वायधर्मतनयास्तसंस्थितो नाकनायकपुरोहितः शुभः । रिःफरन्ध्रखजलत्रिगैर्यदा विध्यते गगनचारिभिर्न हि ॥७॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 7Jupiter in transit is auspicious in the 2nd, 5th, 7th, 9th and 11th from the Moon.
चंद्र से दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में गोचर का गुरु शुभ है।
पूर्णं च सप्तमं सर्वे शानिजीवकुजाः पुनः । विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान्।ह्
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र, Adhyaya 26 — athe grahasphuTadR^iShTikathanAdhyayAHAll planets aspect the 7th; Saturn, Jupiter and Mars have special aspects.
सभी ग्रह सातवें को देखते हैं, शनि, गुरु और मंगल की विशेष दृष्टियाँ हैं।
जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां प्राप्नोति द्रविणं कुटुम्बसुखमप्यर्थं स्ववाचां फलम् । दुश्चिक्ये स्थितिनाशमिष्टवियुतिं कार्यान्तरायं रुजं दुःखैर्बन्धुजनोद्भवैश्च हिबुके दैन्यं चतुष्पाद्भयम् ॥१८॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 18Results of Jupiter transit through the 1st to 4th houses from the Moon.
चंद्र से पहले से चौथे भाव में गोचर के गुरु के फल।
पुत्रोत्पत्तिमुपैति सज्जनयुतिं राजानुकूल्यं सुते षष्ठे मन्त्रिणि पीडयन्ति रिपवः स्वज्ञातयो व्याधयः । यात्रां शोभनहेतवे वनितया सौख्यं सुताप्तिं स्मरे मार्गक्लेशमरिष्टमष्टमगते नष्टं धनैः कष्टताम् ॥१९॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 19Results of Jupiter transit through the 5th to 8th houses from the Moon.
चंद्र से पाँचवें से आठवें भाव में गोचर के गुरु के फल।
भाग्ये जीवे सर्वसौभाग्यसिद्धिः कर्मण्यर्थस्थानपुत्रादिपीडा । लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः ॥२०॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 20Results of Jupiter transit through the 9th to 12th houses from the Moon.
चंद्र से नौवें से बारहवें भाव में गोचर के गुरु के फल।
अनिष्टभावस्थितखेचरेन्द्रः स्वोच्चस्वगेहोपगतो यदि स्यात् । न दोषकृच्चोत्तमभावगश्चेत् पूर्णं फलं यच्छति गोचरेषु ॥३१॥
— फलदीपिका, Adhyaya 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः षड्विंशोऽध्यायः · Shlok 31A planet in its exaltation or own sign gives no harm in a bad house and full result in a good one.
उच्च या स्वराशि का ग्रह बुरे भाव में दोष नहीं करता और शुभ भाव में पूरा फल देता है।