🔱 Mahakaal Ka Ashirwad

Vedic Astrology Analysis · Poori Kundali

Virendra की कुण्डली

गुरु महादशा · गुरु अन्तर्दशा

चल रहा दौर: गुरु/गुरु · Nov 2024 – Dec 2026

21 Mar 1991 · 14:30 · Amravati

कर्क लग्न · रोहिणी नक्षत्र · यह विवरण ग़लत हो तो रीडिंग दोबारा बनाएँ

⚡ Swiss Ephemeris📖 BPHS Classical🔮 Bhrigu Nandi⚖️ Shadbala
3 बातें जो आपके लिए सबसे ज़रूरी हैं
✅
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
Dec 2027 – Feb 2028 · Apr 2030 – May 2030
⚠️
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Jun 2027 – Oct 2027 · Feb 2028 – Jan 2029
⭐
सबसे पास का शुभ समय: Jun 2027 – Jul 2027
विवाह और जीवनसाथी
🔱 ग्रन्थ से आपका सार

आपके 5 मुख्य भावों में से 1 सहारा देने वाले, 0 कठिन, और 4 मिला-जुला हैं।

कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
मिला-जुला · 23
नौकरी लगेगी, पदोन्नति या नया काम मिलेगा
⭐ Jul 2027 – Oct 2027 · ⭐ Mar 2028 – Jul 2028
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 23 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)।
गोचर: गुरु 10वें भाव पर दृष्टि, शनि 10वें भाव में
· 10ve ghar mein Shukra baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (23) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal achhe ghar mein (11ve)
Jo bhi kaam shuru karo usme safalta milti hai, aaram se rehna, naam aur pratishtha, kushal kaam, aur samman badhta hai. (Ph 20.11)
ग्रन्थ के श्लोक(12)
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है। (BJ 20.11) यज्ञ करने पर भी उसका फल हाथ से निकल जाता है; फिर भी जातक दानशील और आचारवान रहता है। (JP 15.6)
⭐ AAPKE CHART SE5
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
यज्ञ करने पर भी उसका फल हाथ से निकल जाता है; फिर भी जातक दानशील और आचारवान रहता है।JP 15.6
राजद्वार अर्थात् सरकारी काम में और व्यापार में सदा लाभ होता है।BPHS 21.4◆
जातक धन और सन्तान से युक्त, प्रसन्न, गुणवान, सत्य बोलने वाला और सदा सुखी होता है।BPHS 24.119◆
जीवन सुख से बीतता है।BPHS 21.9
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA4
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय दशम भाव का फल सिद्ध होता है; दोनों की युति या दृष्टि हो तब भी।Phaladipika 16.31◆
उसी दशा में सत्कर्म, यज्ञ-फल, आगम-ज्ञान और विद्या मिलती है।JP 15.13◆
वही समय दशम भाव का फल सिद्ध होने का है; दशमेश बली हो तो शुभ, अन्यथा उल्टा।Phaladipika 16.35
उसी समय दशम भाव का फल मिलता है।Phaladipika 16.32
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
जीविका तराजू से सोना तौलने, विद्वत्-कार्य, जन-समारोह अथवा विवाद से चलती है।Chamatkar Chintamani 7.10◆
अनेक यज्ञ-कर्म सिद्ध होते हैं।Bhrigu 6.60◆
फल गुरु के समान — जातक धनवान होता है।BJ 20.8◆
आय और लाभ11वाँ भाव
मज़बूत · 35★
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
⭐ Dec 2027 – Feb 2028 · ⭐ Apr 2030 – May 2030
हमारा फ़ैसला:हाँ
क्यों?
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 35 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 11वें भाव पर दृष्टि, शनि 11वें भाव पर दृष्टि, शनि 11वें भाव में
· 11ve ghar mein Chandra baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu theek hain (35)
· 11ve ghar mein Mangal baitha hai — dabaav banata hai
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra achhe ghar mein (10ve)
Adhikaar bina toote chalta hai, manchaahe rishtedaar milte hain, sahayak aur saath dene wale, aur badi duniyavi tarakki. (Ph 20.12)
ग्रन्थ के श्लोक(14)
बहुत लाभ होता है। (BPHS 22.2) जातक सत्ता से वन्दित, गुणवान, अपने धर्म में रत, बुद्धिमान, सत्यवादी और जितेन्द्रिय होता है। (BPHS 24.130)
⭐ AAPKE CHART SE5
बहुत लाभ होता है।BPHS 22.2◆
जातक सत्ता से वन्दित, गुणवान, अपने धर्म में रत, बुद्धिमान, सत्यवादी और जितेन्द्रिय होता है।BPHS 24.130◆
धन माता-वर्ग से बहुत अधिक आता है।JP 15.66◆
धन शुभ मार्ग से आता है; पाप ग्रह हो तो पाप के मार्ग से, और मिश्र हों तो मिला-जुला।JP 15.68◆
बहुत धन खर्च हो जाता है।Bhrigu 2.68◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA6
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
तैंतीसवें वर्ष में एक हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.8◆
छत्तीसवें वर्ष में दो हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.4
विवाह के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 22.9◆
चालीसवें वर्ष में पाँच सौ निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.5
पन्द्रहवें वर्ष में सन्तान के कारण प्रबलता बढ़ती है।Bhrigu 2.66◆
उन्हीं ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा में धन आता है, और वह उसी ग्रह की दिशा से आता है।JP 15.71◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
बहुत विद्याएँ मिलती हैं।Bhrigu 2.72◆
भाई से धन मिलता है।Bhrigu 3.89◆
जातक गुणों से भरपूर होता है।Bhrigu 2.67◆
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
कमज़ोर · 28
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Jun 2027 – Oct 2027 · Feb 2028 – Jan 2029
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 28 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 4थे भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu kam hain (28)
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra achhe ghar mein (10ve)
Rishton se madad, kheti mein safalta, gaadi, khet aur GHAR ka sukh, naya dhan, aur achhi jagah. (Ph 20.5)
ग्रन्थ के श्लोक(13)
घर के सुख में कष्ट रहता है। (JP 12.139) जातक सत्ता से मान्य, रसायन का जानकार, अत्यन्त प्रसन्न, सुख-भोगी और जितेन्द्रिय होता है। (BPHS 24.46)
⭐ AAPKE CHART SE5
घर के सुख में कष्ट रहता है।JP 12.139◆
जातक सत्ता से मान्य, रसायन का जानकार, अत्यन्त प्रसन्न, सुख-भोगी और जितेन्द्रिय होता है।BPHS 24.46◆
अनेक वाहन मिलते हैं और जातक मण्डल का अधिपति होता है।JP 12.128◆
राज्य अर्थात् अधिकार-पद की प्राप्ति निश्चित कही गयी है।JP 12.105◆
आभूषण और वाहन दोनों मिलते हैं।JP 12.104
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA8
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
बारहवें वर्ष में वाहन का सुख मिलता है।BPHS 15.10-11
बारहवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.13-14
बयालीसवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.12-13
उसी समय जातक सिंहासन का स्वामी होता है।JP 12.130◆
बत्तीसवें वर्ष में वाहन मिलता है।BPHS 15.11-12
उनकी दशा में क्रम से राज्य, फिर भाग्य, फिर लाभ और फिर धन मिलता है।JP 12.111
उसी की दशा में वाहन मिलता है।JP 12.110◆
उसकी दशा-भुक्ति में घर और भूमि की हानि होती है; वाहनेश की भुक्ति में बन्धु-हानि, और शनि-मंगल-माँदी की भुक्ति में अनर्थ।JP 12.136◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 28★
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
⭐ Feb 2030 – May 2030
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 28 हैं।
गोचर: गुरु (5वें भाव का मुख्य ग्रह) वहीं बैठा है, गुरु 5वें भाव में, शनि 5वें भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu kam hain (28)
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal achhe ghar mein (11ve)
Santan ka sukh, rishton mein khushi, bade logon ke saath kaam, samman, achha bhojan aur daan-dharm. (Ph 20.6)
ग्रन्थ के श्लोक(18)
सन्तान में कठिनाई रहती है। (JP 13.30) सन्तान का क्षय देव-शाप से कहा गया है। (JP 13.32)
⭐ AAPKE CHART SE5
सन्तान में कठिनाई रहती है।JP 13.30◆
सन्तान का क्षय देव-शाप से कहा गया है।JP 13.32◆
शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (जातकपारिजात अ.13 सल.28) — उपाय अवश्य करें।JP 13.28◆
अनेक विवाह होने पर भी सन्तान में कठिनाई रहती है।JP 13.15
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA13
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.26◆
उसी दशा में सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.27◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.29◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.28◆
सन्तान प्रायः बत्तीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.18◆
सन्तान प्रायः चालीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.20◆
उसी दशा में सन्तान होती है। गुरु जब पंचमेश की राशि, यमकण्टक की राशि या उनके नवांश में आये तब भी।Phaladipika 12.25◆
उनकी दशा-अन्तर्दशा में सन्तान की प्राप्ति, सन्तान से समृद्धि और बड़े लोगों की कृपा मिलती है।JP 13.50◆
सन्तान प्रायः तीसवें या छत्तीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.19◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.30◆
उसी समय जन्म होता है — यह आधान-कुण्डली का नियम है।Phaladipika 12.31◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
कमज़ोर · 29
विवाह में देरी के संकेत — रिश्ता बनेगा पर मेहनत से
⭐ Jun 2027 – Jul 2027 · ⭐ Feb 2028 – Mar 2028
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 29 हैं। इस भाव का स्वामी शनि 7वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 7वें भाव पर दृष्टि, शनि 7वें भाव पर दृष्टि
· 7ve ghar ka malik Shani apni mazboot jagah par hai
· 7ve ghar ka malik apne hi ghar mein hai
· 7ve ghar mein Shani baitha hai — dabaav banata hai
· 7ve ghar mein Rahu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu kam hain (29)
इस भाव के स्वामी (Shani) पर — mazboot — Shani SWA/MITRA raashi mein; Shani achhe ghar mein (7ve)
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
ग्रन्थ के श्लोक(31)
विवाह में देर होती है और कन्या बड़ी होती चली जाती है। (BPHS 80.18) दो विवाह का योग कहा गया है। (Phaladipika 10.5)
⭐ AAPKE CHART SE5
विवाह में देर होती है और कन्या बड़ी होती चली जाती है।BPHS 80.18◆
दो विवाह का योग कहा गया है।Phaladipika 10.5◆
एक से अधिक विवाह का योग कहा गया है।JP 14.21◆
दाम्पत्य का फल मध्यम रहता है; ऐसा न हो तो सब शुभ रहता है।JP 14.2
जातिका संन्यास की ओर जाती है, और वह उसी पाप ग्रह से उत्पन्न होता है।BPHS 80.53◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA24
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
विवाह प्रायः तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.34◆
इन दशाओं में क्रम से विवाह होता है।JP 14.29◆
विवाह प्रायः पच्चीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.32◆
उसी समय विवाह होता है।Phaladipika 10.12◆
विवाह प्रायः तेरहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.29◆
विवाह प्रायः बाईसवें या सत्ताईसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.30◆
विवाह प्रायः तेईसवें या छब्बीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.31◆
विवाह प्रायः इकतीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.33◆
दशा के किस हिस्से में विवाह होगा यह इसी से जाना जाता है — शुभ राशि में शुरू में, पाप राशि में बीच में, क्रूर पाप राशि में अन्त में।JP 14.30◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.31◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.46◆
विवाह प्रायः अठारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.27◆
उसी समय विवाह होता है।Phaladipika 10.14◆
उसी दशा या गोचर में विवाह होता है।Phaladipika 10.13◆
विवाह प्रायः सातवें या ग्यारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.23◆
विवाह प्रायः पन्द्रहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.28◆
विवाह प्रायः पाँचवें या नवें वर्ष में होता है।BPHS 18.22◆
विवाह प्रायः दसवें या सोलहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.24◆
विवाह प्रायः ग्यारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.25◆
विवाह प्रायः बारहवें या उन्नीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.26◆
पहला विवाह दसवें वर्ष में, दूसरा बाईसवें वर्ष में और तीसरा तैंतीसवें वर्ष में होता है; इसमें कोई सन्देह नहीं।BPHS 18.40-41◆
उसी समय विवाह होता है; अथवा चन्द्र जिस नक्षत्र में है, वर-वधू के एक ही अंश मिलने पर भी।JP 14.105◆
विवाह प्रायः उसी संख्या के वर्ष में, अथवा उसमें आठ जोड़ने पर आये वर्ष में होता है।JP 14.32◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.28◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN2
नियम से दो विवाह होते हैं।Bhrigu 8.20◆
फल सूर्य के समान कहा गया है; उच्च या अपनी राशि में हो तो राजा जैसा योग बनता है।BJ 20.9◆
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
मज़बूत · 31★
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· 6ve ghar ka malik Guru apni mazboot jagah par hai
· is ghar par bindu theek hain (31)
इस भाव के स्वामी (Guru) पर — mazboot — Guru VAKRI hai; Guru UCHCHA raashi mein; Guru achhe ghar mein (1ve)
Virodhiyon par jeet apni himmat se, achhi sehat, udaarta, koi dabaa nahi sakta, aur badi samriddhi. (Ph 20.7)
ग्रन्थ के श्लोक(8)
⭐ AAPKE CHART SE5
छोटे-मोटे कष्ट दूर हो जाते हैं।JP 13.76◆
ज्ञाति-बन्धु बहुत होते हैं, और शत्रु तथा व्रण दोनों का अभाव रहता है।JP 13.73◆
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
शत्रु से पीड़ा होती है।JP 13.80◆
शत्रुओं से पीड़ा शीघ्र और बहुत होती है, और वह टाली नहीं जा सकती।Phaladipika 16.16◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
षष्ठ भाव से शरीर के रोग और व्रण अर्थात् घाव-चोट का विचार किया जाता है।BPHS 17.1◆
रोग, शत्रु, व्यसन और घाव — इन चारों का विचार मंगल और षष्ठेश से किया जाता है।JP 13.71◆
सूर्य से सिर, चन्द्र से मुख, मंगल से कण्ठ, गुरु से रोग का अभाव, शुक्र से नेत्र-भय, शनि से वात, तथा राहु-केतु से उदर-रोग कहा गया है।JP 13.78◆
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
मिला-जुला · 29★
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· 1ve ghar ka malik Chandra apni mazboot jagah par hai
· 1ve ghar mein Guru baitha hai — sahara deta hai
· 1ve ghar mein Ketu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu kam hain (29)
इस भाव के स्वामी (Chandra) पर — mazboot — Chandra UCHCHA raashi mein; Chandra achhe ghar mein (11ve)
Duniya mein apni jagah banti hai, sukh se rehna, sharir mein bal, chehre par tej. Bhagya badhte chaand ki tarah badhta hai. (Ph 20.2)
ग्रन्थ के श्लोक(11)
⭐ AAPKE CHART SE5
जातक मित्रों वाला, अनेक घरों वाला, धनी, तेज़ चाल वाला, मेधावी और जल-प्रेमी होता है; सन्तान कम कही गयी है।Phaladipika 9.4◆
शरीर का सुख मिलता है।BPHS 12.4◆
सब रोग दूर हो जाते हैं — ऐसा कहा गया है।BPHS 12.2◆
जातक दीर्घायु, धनवान, बुद्धिमान और सत्ता का प्रिय होता है।BPHS 12.5◆
पिता यशस्वी होते हैं।JP 11.19◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA3
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
सोलहवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.41◆
सोलहवें वर्ष में महाराज-योग बनता है।Bhrigu 5.4◆
तीसवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.42◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
जातक विद्वान होता है।BJ 20.7◆
जातक त्रिवेदी, बहुसन्तान वाला, सुखी, दीर्घायु और ज्ञानवान होता है।Bhrigu 5.2◆
जातक शोभावान, सुकृती, दीर्घायु, निर्भय, सन्तान वाला, वाक्-पटु और प्रसन्नमुख होता है, तथा भोजन अच्छा मिलता है।Phaladipika 8.14◆
व्यय, दूर देश और एकान्त12वाँ भाव
कमज़ोर · 23
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· 12ve ghar ka malik Budh kamzor jagah par hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (23) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(6)
⭐ AAPKE CHART SE3
जीवनसाथी का सुख नहीं मिलता।BPHS 23.5◆
अधिक खर्च से जातक थका रहता है और अच्छे भोग से वंचित रहता है।BPHS 23.6◆
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA3
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय व्यय भाव का फल मिलता है।Phaladipika 16.32
वही समय व्यय भाव का फल सिद्ध होने का है; व्ययेश बली हो तो शुभ, अन्यथा उल्टा।Phaladipika 16.35
उसी समय व्यय भाव का फल सिद्ध होता है; दोनों की युति या दृष्टि हो तब भी।Phaladipika 16.31

अब समय की बात — इस समय गुरु/गुरु का दौर चल रहा है (Nov 2024 – Dec 2026), और इसमें 10वें, 11वें, 4थे भाव खुलता है।

जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।

आगे का दौर
14 साल आगे
गुरु / गुरु← अभी
Oct 2026 – Dec 2026
सूक्ष्म दशा: राहु
अनेक बड़े लोगों का स्वामी — सम्पन्न और राजपूजित। गाय, वस्त्र, वाहन। नया घर या नया निर्माण। हाथी जैसा ऐश्वर्य, विद्वानों और बड़ों से सम्मान। (BPHS 56.1-3)
ऊपर वालों की प्रीति और उत्साह। सब काम और सब अर्थ सधते हैं। विद्या और विज्ञान की प्राप्ति। (JP 18.110)
गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी · इस लग्न के लिए शुभ ग्रह (BPHS Ch.34)
Oct 2026 – Nov 2026Oct 2026 – Nov 2026Nov 2026 – Jan 2027
गुरु / शनि
Dec 2026 – Jul 2029
सूक्ष्म दशा: शनि
पद का लाभ और बड़ा सुख। नीले वस्त्र, नीला घोड़ा/वाहन। पश्चिम दिशा की यात्रा, बड़े लोगों से भेंट। नौकर-चाकर और धन। (BPHS 56.8-11)
धन-अनाज का नाश। बन्धु-मित्रों से विरोध, काम/उद्योग का टूटना, शरीर को पीड़ा, अपनों के लिए बड़ा भय। (BPHS 56.16-17)
शनि — 7वें भाव में, 7+8 का स्वामी · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
Jan 2027 – Jun 2027Jun 2027 – Oct 2027Nov 2027 – Feb 2028Dec 2026 – Jan 2027Jun 2027 – Nov 2027Mar 2028 – Jul 2028
गुरु / बुध
Jul 2029 – Oct 2031
सूक्ष्म दशा: बुध
धन-अनाज का घटना। विदेश/दूर जाना, रास्ते में चोर का डर। घाव, जलन, और आँख का रोग। कई जगहों का भटकाव। (BPHS 56.25-26)
अपने देश/जगह में धन का लाभ। माता-पिता का सुख। (BPHS 56.23-24)
बुध — 9वें भाव में, 12+3 का स्वामी · इस लग्न के लिए पाप ग्रह (BPHS Ch.34)
Jul 2029 – Sep 2029Jul 2029 – Sep 2029Feb 2030 – May 2030Oct 2030 – Mar 2031
गुरु / केतु
Oct 2031 – Sep 2032
सूक्ष्म दशा: केतु
थोड़ा ही सुख और धन का आना — और खाना साधारण या ख़राब मिलना। (BPHS 56.32)
मोती-मूँगे जैसे आभूषण, तीर्थ-यात्रा और धन की बढ़ोतरी। बड़ों और ऊपर वालों से प्राप्ति। (JP 18.113)
केतु — 1ले भाव में · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
Oct 2031 – Mar 2032Mar 2032 – Jun 2032Jun 2032 – Aug 2032
गुरु / शुक्र
Sep 2032 – May 2035
सूक्ष्म दशा: शुक्र
धन-अनाज, स्त्री/जीवनसाथी का लाभ, बड़े लोगों से भेंट, वाहन, संतान लाभ, पशु की वृद्धि, बड़ा सुख। संगीत, विद्वानों से भेंट, दिव्य भोजन। (BPHS 56.45-47)
वाहन और धन की प्राप्ति, छत्र-चामर का वैभव। जीवनसाथी की सेहत और लोगों से खिंचाव का ध्यान रखें। (JP 18.114)
शुक्र — 10वें भाव में, 11+4 का स्वामी · इस लग्न के लिए पाप ग्रह (BPHS Ch.34)
Mar 2033 – Apr 2034Apr 2035 – Jun 2035Sep 2032 – Nov 2032Jul 2034 – Apr 2035Apr 2035 – Jun 2035
गुरु / सूर्य
May 2035 – Mar 2036
सूक्ष्म दशा: सूर्य
धन का लाभ और राजसम्मान। वाहन और संतान का लाभ। शत्रु का नाश, यश। (BPHS 56.51-55)
शरीर को बाधा। (BPHS 56.56-57)
सूर्य — 9वें भाव में, 2 का स्वामी · इस लग्न के लिए सम ग्रह (BPHS Ch.34)
May 2035 – Mar 2036
गुरु / चन्द्र
Mar 2036 – Jul 2037
सूक्ष्म दशा: चन्द्र
राजसम्मान और वैभव। पत्नी-संतान का सुख, दूध-भात जैसा उत्तम भोजन। अच्छे कर्म और कीर्ति, संतान-पौत्र की वृद्धि। बड़े की कृपा से सब तरह का सुख और धन का आना। अनेक लोगों से सुख, दान-धर्म में प्रवृत्ति। (BPHS 56.58-60)
मान, धन और बन्धुओं की हानि। विदेश/दूर भटकना, सत्ता और चोर से कष्ट, दायाद/हिस्सेदारों से झगड़ा। मामा (मातुल) से बिछोह, और माता को कष्ट। (BPHS 56.61-63)
चन्द्र — 11वें भाव में, 1 का स्वामी · इस लग्न के लिए शुभ ग्रह (BPHS Ch.34)
Mar 2036 – Sep 2036May 2036 – Sep 2036Sep 2036 – Dec 2036Dec 2036 – May 2037
गुरु / मंगल
Jul 2037 – Jun 2038
सूक्ष्म दशा: मंगल
धन-अनाज, पद और सम्मान, भाइयों से सुख। (BPHS 56.67-68)
पहले आधे में बहुत कष्ट, दूसरे आधे में बड़ा सुख। (BPHS 56.70)
मंगल — 11वें भाव में, 10+5 का स्वामी · इस लग्न का योगकारक ग्रह (BPHS Ch.34)
Oct 2037 – Feb 2038May 2038 – Jul 2038
गुरु / राहु
Jun 2038 – Nov 2040
सूक्ष्म दशा: राहु
धन की हानि, मन में बेचैनी। चोर और सत्ता का भय, अपनों से विरोध। (BPHS 56.76-78)
धन-अनाज और वाहन। बड़े लोगों से लाभ, विदेश/दूर से लाभ। (BPHS 56.72-75)
राहु — 7वें भाव में · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
Jun 2038 – Oct 2038Mar 2039 – Jun 2039Nov 2039 – Apr 2040
शनि का चक्कर — आगे
साढ़े साती Jun 2027 – Jul 2034
ढैया Sep 2036 – Oct 2038
राजयोग — BPHS अ.39
आधा राजयोग — पद और सम्मान में सहारा मिलेगा, पूरा नहीं
LAGNESH + PANCHAMESH — Chandra aur Mangal ka jod bana hai (EK SAATH baithe hain) — aur wo aadha bal ka hai (BPHS 39.4-5)
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।4 MD
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौरकालग्रह की जगहग्रन्थ क्या कहता हैस्रोत
चन्द्र महादशाMar 1991 – Nov 1999चन्द्र — 11वें भाव में, 1 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · घर, भूमि और माता · आय और लाभ
(चन्द्र 1ले भाव का स्वामी है)
अ.34: शुभ
└ चन्द्र/चन्द्रMar 1991 – Dec 1991चन्द्र — 11वें भाव में, 1 का स्वामी
हाथी-घोड़े-वस्त्र मिलते हैं। देवता और गुरु में भक्ति, पुण्य का कीर्तन। पद मिलना, बड़ा सुख, यश की बढ़ोतरी। पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा बल — बड़ा पद और बड़ा सुख।
बेवक़्त धन का नाश, या अपनी जगह से हटना। शरीर में आलस, मन में ताप, ऊपर वालों और सलाहकारों से विरोध। माता को कष्ट, मन में दुख, बन्धन जैसी स्थिति, बन्धुओं का नुकसान।
BPHS 53.1-3
└ चन्द्र/मंगलDec 1991 – Jun 1992मंगल — 11वें भाव में, 10+5 का स्वामी
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
JP 18.74
└ चन्द्र/राहुJun 1992 – Sep 1993राहु — 7वें भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
पुण्य-तीर्थ का फल, देवता का दर्शन। दूसरों का उपकार और पुण्य कर्म का संग्रह।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरुSep 1993 – Nov 1994गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी
काम में रुकावट, धन का व्यय। मन में ताप और अपनों से मतभेद। शरीर में शिथिलता।
गर्भाधान और उससे जुड़ा फल। धन-अनाज की समृद्धि, विवाह और मंगल कार्य। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ, दान-धर्म। बड़े की कृपा से पद और सम्मान।
BPHS 53.26-30
└ चन्द्र/शनिNov 1994 – Apr 1996शनि — 7वें भाव में, 7+8 का स्वामी
शस्त्र से चोट का ख़तरा। धन की हानि, काम में रुकावट, अपनों से विरोध, शरीर में रोग।
पद और सम्मान। धन-अनाज का लाभ, नौकर-चाकर और पशु। भुक्ति के शुरू में पवित्र तीर्थ में स्नान और दर्शन।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.36-37
└ चन्द्र/बुधApr 1996 – Jun 1997बुध — 9वें भाव में, 12+3 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतुJun 1997 – Dec 1997केतु — 1ले भाव में
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं।
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
BPHS 53.47-49
└ चन्द्र/शुक्रDec 1997 – Jun 1999शुक्र — 10वें भाव में, 11+4 का स्वामी
पत्नी को कष्ट, घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि।
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
BPHS 53.60-62
└ चन्द्र/सूर्यJun 1999 – Nov 1999सूर्य — 9वें भाव में, 2 का स्वामी
गर्भाधान और संतान से जुड़ा फल। पद और राजसम्मान, धन-अनाज, शत्रु का नाश। पिता की ओर से सुख।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.65-69
मंगल महादशाNov 1999 – Nov 2006मंगल — 11वें भाव में, 10+5 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · सन्तान, विद्या और बुद्धि · परिश्रम, विरोध और रोग · कर्म, पद और प्रतिष्ठा · आय और लाभ
(मंगल "भाई-बहन और पराक्रम" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: योगकारक
└ मंगल/मंगलNov 1999 – Apr 2000मंगल — 11वें भाव में, 10+5 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
ज़मीन और घर का लाभ, धन-अनाज। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई। शत्रु पर जीत, राजसम्मान, लाल वस्त्र और आभूषण।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहुApr 2000 – Apr 2001राहु — 7वें भाव में
गंगा-स्नान और तीर्थ का फल। धन-अनाज, वाहन। ऊपर वालों से मेल, विदेश या दूर की यात्रा का लाभ।
ऊपर वालों और चोरी का भय, धन-अनाज का नुक़सान। और रास्ता ग़लत तरफ़ मुड़ने का ख़तरा।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 54.9-11
└ मंगल/गुरुApr 2001 – Apr 2002गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी
पद और सम्मान। विवाह और मंगल कार्य, संतान का लाभ। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ। धन-अनाज, वाहन और वस्त्र। विद्या और यश की बढ़ोतरी।
प्रेत-बाधा जैसा अनुभव, मन में भय। काम में रुकावट, धन का व्यय।
BPHS 54.15-21
└ मंगल/शनिApr 2002 – May 2003शनि — 7वें भाव में, 7+8 का स्वामी
धन का नाश, ऊपर वालों से मनमुटाव, मन में व्यथा। चोर-अग्नि-सत्ता से पीड़ा, भाई-बहन का नुकसान, बन्धुओं से मतभेद।
पद का सुख और यश की बढ़ोतरी। अपने गाँव/जगह में अनाज की बढ़ोतरी। संतान-पौत्र का साथ, घर में गोधन। अपने वार के दिन राजसम्मान, अपने महीने में संतान की वृद्धि।
BPHS 54.27-30
└ मंगल/बुधMay 2003 – May 2004बुध — 9वें भाव में, 12+3 का स्वामी
हृदय का रोग, मान की हानि, बन्दिश, बन्धुओं का नुकसान। पत्नी-संतान और धन का नुकसान, चौपायों की हानि। दशा-स्वामी के साथ हो तो शत्रु बढ़ते हैं और बड़ा भय, विदेश जाना, कई रोग।
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख। खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
BPHS 54.38-40
└ मंगल/केतुMay 2004 – Oct 2004केतु — 1ले भाव में
ऊपर वालों की कृपा और शान्ति, बहुत सुख, धन का आना। दशा के शुरू में थोड़ा फल — फिर भूमि लाभ और संतान लाभ। चौपाये मिलना। संतान का लाभ, यश की बढ़ोतरी, घर में लक्ष्मी की कृपा, नौकर-चाकर और धन, बड़ा पद।
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
BPHS 54.48-51
└ मंगल/शुक्रOct 2004 – Dec 2005शुक्र — 10वें भाव में, 11+4 का स्वामी
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्यDec 2005 – Apr 2006सूर्य — 9वें भाव में, 2 का स्वामी
अपवाद, बड़ों से मनमुटाव, झगड़ा और सेहत पर दबाव। अपने ही वर्ग से मन को कष्ट।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.91
└ मंगल/चन्द्रApr 2006 – Nov 2006चन्द्र — 11वें भाव में, 1 का स्वामी
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
JP 18.92
राहु महादशाNov 2006 – Nov 2024राहु — 7वें भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: विवाह और जीवनसाथी
(राहु स्वयं 7वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहुNov 2006 – Jul 2009राहु — 7वें भाव में
लगातार रोग और बड़ा कष्ट।
जीवनसाथी की सेहत, विवाद, सोच में उलझन और धन का क्षय। दूर की जगहों में भटकाव।
BPHS 55.7
└ राहु/गुरुJul 2009 – Dec 2011गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी
धन की हानि और शरीर को कष्ट।
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट।
BPHS 55.18
└ राहु/शनिDec 2011 – Oct 2014शनि — 7वें भाव में, 7+8 का स्वामी
ऊपर वालों की सेवा और उनकी प्रीति — शुभ। विवाह और उत्सव के कार्य, बहुत पुण्य। बाग़ लगवाना, तालाब बनवाना। शूद्र/श्रमिक वर्ग के माध्यम से इष्ट लाभ, गोधन का संग्रह।
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.21-23
└ राहु/बुधOct 2014 – May 2017बुध — 9वें भाव में, 12+3 का स्वामी
मन में उलझन और बहस। काम में अड़चन, धन का व्यय, अपनों से मतभेद।
मित्र, बन्धु और जीवनसाथी का मेल, और धन का आगम। ऊपर वालों की प्रीति।
BPHS 55.36-38
└ राहु/केतुMay 2017 – May 2018केतु — 1ले भाव में
थोड़ा सुख और धन का आना। तीर्थ और पुण्य कर्म। पर फल छोटा ही रहता है।
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें।
BPHS 55.40-44
└ राहु/शुक्रMay 2018 – May 2021शुक्र — 10वें भाव में, 11+4 का स्वामी
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें।
JP 18.101
└ राहु/सूर्यMay 2021 – Apr 2022सूर्य — 9वें भाव में, 2 का स्वामी
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.102
└ राहु/चन्द्रApr 2022 – Oct 2023चन्द्र — 11वें भाव में, 1 का स्वामी
माता को कष्ट, मन में दुख। धन की हानि, शरीर में शिथिलता।
माता का सुख, घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। मन प्रसन्न, यश की बढ़ोतरी।
BPHS 55.75
└ राहु/मंगलOct 2023 – Nov 2024मंगल — 11वें भाव में, 10+5 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह।
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।
BPHS 55.76-82
गुरु महादशाNov 2024 – Nov 2040गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी · वक्री
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · paisa aur parivaar · सन्तान, विद्या और बुद्धि · परिश्रम, विरोध और रोग · भाग्य, पिता और धर्म · आय और लाभ
(गुरु स्वयं 1ले भाव में बैठा है)
अ.34: शुभ
└ गुरु/गुरु ← अभीNov 2024 – Dec 2026(अब तक Oct 2026)गुरु — 1ले भाव में, 6+9 का स्वामी
अनेक बड़े लोगों का स्वामी — सम्पन्न और राजपूजित। गाय, वस्त्र, वाहन। नया घर या नया निर्माण। हाथी जैसा ऐश्वर्य, विद्वानों और बड़ों से सम्मान।
ऊपर वालों की प्रीति और उत्साह। सब काम और सब अर्थ सधते हैं। विद्या और विज्ञान की प्राप्ति।
BPHS 56.1-3
⚠️ साढ़े सातीApr 1998 – Jun 2005पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)शनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाNov 2006 – Sep 2009चन्द्र से 4थाशनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाFeb 2017 – Feb 2020चन्द्र से 8वाँशनि का बड़ा चक्कर—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
तीन तारीखें भेजिए
उपायपहले ग्रन्थ के, फिर परम्परा के। खोलने के लिए टैप करें।
उपाय
सिर्फ़ वहाँ जहाँ ग्रन्थ देता है
किस दौर के लिएकिस लिएउपायस्रोत
Guru/Shani
Dec 2026 – Jul 2029
शनि दूसरे/सातवें का स्वामी हो
ग्रन्थ इस दौर को कठिन कहता है
**विष्णुसहस्रनाम जप, और काली गाय तथा भैंस का दान**BPHS 56.18-19
उपाय BPHS के दशा-अध्याय (52-60) से आते हैं, और वहाँ वे मारक वाली शर्त के साथ ही मिलते हैं। भृगु सूत्रम फल का ग्रन्थ है, उपाय का नहीं (568 में से सिर्फ़ 9 श्लोक)। और षड्बल एक माप है — वह बताता है कौन-सा ग्रह कमज़ोर है, पर उपाय नहीं देता।
पारम्परिक उपाय
⚠️ ये परम्परा से आते हैं — ग्रन्थ का श्लोक नहीं हैं। ग्रन्थ के अपने उपाय ऊपर हैं, हर एक अपने श्लोक-संख्या के साथ।

🙏 पारम्परिक उपाय — ५ (ग्रन्थ का श्लोक नहीं)

🕉️

उपाय 1 — मन्त्र साधना

ग्रह: गुरु

ॐ गुरवे नमः

🔢 108 बार⏰ गुरुवार सुबह📅 गुरुवार

🎯 उद्देश्य: ज्ञान और समृद्धि

✨ गुरुवार को गुरु (बृहस्पति) को पीले फूल अर्पित करें

💎

उपाय 2 — रत्न

💍 कर्क लग्न — जीवन भर के लिए

मोती (Pearl)

चाँदी · कनिष्ठा (छोटी उँगली) · सोमवार

जन्म नक्षत्र वाले दिन, कच्चे दूध में शुद्ध करके पहनें

⚡ गुरु महादशा — चल रहे दौर के लिए

पुखराज (Yellow Sapphire)

सोना · तर्जनी · गुरुवार

विकल्प (उपरत्न): सुनैला (Citrine)

कम से कम 7 रत्ती

🪔

उपाय 3 — व्रत और उपासना

गुरुवार व्रत📅 गुरुवार🙏 भगवान विष्णु

🌸 प्रसाद: पीले चने, हल्दी, केला

🔯 यन्त्र: गुरु यन्त्र — ईशान (उत्तर-पूर्व) कोना

✨ गुरुवार को गुरु (बृहस्पति) को पीले फूल अर्पित करें

🌾

उपाय 4 — दान और सेवा

🌾 पीले चने, हल्दी, पीला कपड़ा, सोना, किताबें, केला

📅 गुरुवार👤 ब्राह्मण, शिक्षक या ज़रूरतमंद

दान पूरी श्रद्धा से दें। माँ शक्ति हर दान की साक्षी हैं।

🔱

उपाय 5 — विशेष उपाय

ग्रह: गुरु

गुरुवार को गुरु (बृहस्पति) को पीले फूल अर्पित करें

🎯 उद्देश्य: ज्ञान और समृद्धि

⏰ गुरुवार सुबह सबसे प्रभावी

Jai Maa Shakti - Trikal Vaani ke anusar yeh upay aapke liye specifically chune gaye hain

ये उपाय ज्योतिष परम्परा से हैं · ग्रन्थ के अपने उपाय ऊपर, श्लोक-संख्या के साथ · रोहित गुप्ता, Chief Vedic Architect

जन्म कुण्डली + ९ ग्रहउत्तर भारतीय चक्र, लाहिरी अयनांश, षड्बल। खोलने के लिए टैप करें।

🪐 जन्म कुंडली — उत्तर भारतीय चक्र

12Mith1KarkLगुरकेत2Simh11Vrshचंदमंग3Kany10Meshशुक9Meenसूरबुध8Kumb4Tula5Vrsc6Dhan7MakrशनिराहKarka Lagna

Lahiri Ayanamsha · Swiss Ephemeris · BPHS classical

⚡ ग्रह विश्लेषण — सभी ९ ग्रह

GrahaRashiHouseNakshatraDignityStrength
☉सूर्यMeena9thUttara BhadrapadaNeutral Sign● Strong (1.07)
☽चंद्रVrishabha11thRohiniExalted◐ Moderate (0.99)
♂मंगलVrishabha11thMrigashiraFriendly Sign● Strong (1.39)
☿बुधMeena9thRevatiDebilitated◐ Moderate (0.87)
♃गुरु® VakriKarka1stPushyaExalted●● Very Strong (1.56)
♀शुक्रMesha10thAshwiniFriendly Sign● Strong (1.10)
♄शनिMakara7thShravanaOwn Sign●● Very Strong (1.65)
☊राहु® VakriMakara7thUttara AshadhaNeutral Sign—
☋केतुKarka1stPunarvasuNeutral Sign—

⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris

गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।

🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग

BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।

केतु सोलह में से 6 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।

केतु6/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Karkaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Karkaघर, ज़मीन और भाग्य — Karkaसंतान — Makaraजीवनसाथी और आंतरिक बल — Karkaकर्म और पहचान — Meenaमाता-पिता — Karkaवाहन और सुख — Meshaसाधना और भक्ति — Meshaशिक्षा और विद्या — Karkaबल और कमज़ोरी — Kumbhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishabhaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Vrishabhaपिछले कर्मों का जोड़ — Kanya
राहु4/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Makaraधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Makaraघर, ज़मीन और भाग्य — Makaraसंतान — Karkaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Makaraकर्म और पहचान — Kanyaमाता-पिता — Makaraवाहन और सुख — Meshaसाधना और भक्ति — Meshaशिक्षा और विद्या — Karkaबल और कमज़ोरी — Simhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishabhaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Vrishabhaपिछले कर्मों का जोड़ — Meena
सूर्य3/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Meenaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Meenaघर, ज़मीन और भाग्य — Meenaसंतान — Tulaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Simhaकर्म और पहचान — Makaraमाता-पिता — Vrishabhaवाहन और सुख — Meenaसाधना और भक्ति — Dhanuशिक्षा और विद्या — Dhanuबल और कमज़ोरी — Mithunaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Mithunaआचरण और चरित्र — Kanyaपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
गुरु2/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Karkaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Karkaघर, ज़मीन और भाग्य — Tulaसंतान — Meenaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kanyaकर्म और पहचान — Mithunaमाता-पिता — Tulaवाहन और सुख — Kanyaसाधना और भक्ति — Tulaशिक्षा और विद्या — Kumbhaबल और कमज़ोरी — Kanyaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Mithunaपिछले कर्मों का जोड़ — Kumbha
शुक्र2/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Meshaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Meshaघर, ज़मीन और भाग्य — Karkaसंतान — Mithunaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Mithunaकर्म और पहचान — Karkaमाता-पिता — Karkaवाहन और सुख — Simhaसाधना और भक्ति — Tulaशिक्षा और विद्या — Meenaबल और कमज़ोरी — Dhanuकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kumbhaमाँ और पिता की विरासत — Meshaआचरण और चरित्र — Vrishabhaपिछले कर्मों का जोड़ — Tula
चंद्र1/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishabhaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Kanyaघर, ज़मीन और भाग्य — Simhaसंतान — Makaraजीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Meshaमाता-पिता — Kanyaवाहन और सुख — Kumbhaसाधना और भक्ति — Karkaशिक्षा और विद्या — Meshaबल और कमज़ोरी — Vrishabhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Makaraआचरण और चरित्र — Makaraपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
मंगल1/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishabhaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Makaraघर, ज़मीन और भाग्य — Kumbhaसंतान — Vrishabhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kanyaकर्म और पहचान — Tulaमाता-पिता — Meshaवाहन और सुख — Vrishchikaसाधना और भक्ति — Karkaशिक्षा और विद्या — Mithunaबल और कमज़ोरी — Kanyaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Makaraआचरण और चरित्र — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
बुध0/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Meenaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Vrishchikaघर, ज़मीन और भाग्य — Dhanuसंतान — Kumbhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Makaraकर्म और पहचान — Mithunaमाता-पिता — Dhanuवाहन और सुख — Dhanuसाधना और भक्ति — Vrishchikaशिक्षा और विद्या — Makaraबल और कमज़ोरी — Kanyaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Makaraमाँ और पिता की विरासत — Vrishabhaआचरण और चरित्र — Tulaपिछले कर्मों का जोड़ — Makara
शनि0/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Makaraधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Vrishabhaघर, ज़मीन और भाग्य — Meshaसंतान — Kanyaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Dhanuमाता-पिता — Vrishabhaवाहन और सुख — Kanyaसाधना और भक्ति — Vrishchikaशिक्षा और विद्या — Meenaबल और कमज़ोरी — Meshaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Dhanuआचरण और चरित्र — Karkaपिछले कर्मों का जोड़ — Tula

ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।

⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय

ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।

विंशोत्तरीगुरु / गुरु

नव॰ 2024 – नव॰ 2040

१२० साल का चक्र, जन्म नक्षत्र से

योगिनीSiddha (शुक्र)

अप्रैल 2026 – अप्रैल 2033

३६ साल का चक्र — BPHS अध्याय १९५-१९९

चरMakara (शनि)

मार्च 2024 – मार्च 2036

राशि पर चलती है, ग्रह पर नहीं — जैमिनि

ये तीनों अलग ग्रंथों से आती हैं और अलग गणित से चलती हैं — इसीलिए अलग जवाब देना इनका दोष नहीं, इनका स्वभाव है। कोई एक पद्धति अकेली सच नहीं होती।

📅 आपका वर्ष — वर्षफल

हर साल सूर्य ठीक उस जगह लौटता है जहाँ वह आपके जन्म के समय था। उस क्षण से आपका नया वर्ष शुरू होता है — जन्मदिन से नहीं, उस खगोलीय लौटने से।

यह वर्ष शुरू हुआ: 21 मार्च 2026, 13:58

अगला वर्ष शुरू होगा: 21 मार्च 2027, 20:00

ख़र्च, एकांत और विदेश

मुन्था इस साल यहाँ है। शास्त्र कहता है साल का विषय इसी हिस्से के आस-पास घूमता है।

वर्ष के आरंभ का लग्न Karka था (Pushya नक्षत्र, स्वामी Moon)।

यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।

🕉️ नवांश (D9) — वर्ग कुंडली

नवांश लग्न: Tula

GrahaD1D9HouseDignity
☉सूर्यMeenaSimha11thOwn Sign
☽चंद्रVrishabhaMesha7thNeutral Sign
♂मंगलVrishabhaKanya12thEnemy Sign
☿बुधMeenaMakara4thNeutral Sign
♃गुरुKarkaKanya12thEnemy Sign
♀शुक्रMeshaMithuna9thFriendly Sign
♄शनिMakaraMesha7thDebilitated
☊राहु★MakaraMakara4thNeutral Sign
☋केतु★KarkaKarka10thNeutral Sign

★ वर्गोत्तम (D1 और D9 में एक ही राशि — विशेष बल): Rahu, Ketu

D9 (Navamsa) — BPHS divisional chart used to judge the inner strength of each graha and matters of marriage and dharma.

💼 दशांश (D10) — कर्म कुंडली

दशांश लग्न: Karka

दशांश का दशम भाव: Mesha

GrahaD1D10HouseDignity
☉सूर्यMeenaMakara7thEnemy Sign
☽चंद्रVrishabhaMesha10thNeutral Sign
♂मंगलVrishabhaTula4thNeutral Sign
☿बुधMeenaMithuna12thOwn Sign
♃गुरुKarkaMithuna12thEnemy Sign
♀शुक्रMeshaKarka1stEnemy Sign
♄शनिMakaraDhanu6thNeutral Sign
☊राहुMakaraKanya3rdNeutral Sign
☋केतुKarkaMeena9thNeutral Sign

D10 (Dasamsa) — BPHS divisional chart read for profession, status and the working life. The rasi chart shows the promise; the Dasamsa shows whether it is confirmed in career.

📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर

🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): October 2026🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): February 2027

Mercury (4th) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — December 2026 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।

पिछले ३ महीने

🟢 July 2026Jupiter / Moon (अंतर / प्रत्यंतर)

Jupiter → 1st · Venus → 2nd · Ketu → 2nd

🟢 August 2026Jupiter / Mars (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 1st · Mercury → 1st · Jupiter → 1st · Ketu → 2nd

🟢 September 2026Jupiter / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 2nd · Jupiter → 1st · Venus → 4th · Ketu → 2nd

अभी

🟢 October 2026Jupiter / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 1st · Mercury → 4th · Jupiter → 1st · Venus → 4th · Ketu → 2nd

अगले ६ महीने

🟡 November 2026Jupiter / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 4th · Mars → 2nd · Mercury → 4th · Jupiter → 2nd · Ketu → 2nd

🟡 December 2026Jupiter / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 2nd · Jupiter → 2nd · Venus → 4th · Rahu → 7th · Ketu → 1st

🔴 January 2027Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 7th · Mars → 2nd · Mercury → 7th · Jupiter → 2nd · Rahu → 7th · Ketu → 1st

🔴 February 2027Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 2nd · Jupiter → 1st · Rahu → 7th · Ketu → 1st

🟡 March 2027Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 1st · Jupiter → 1st · Venus → 7th · Rahu → 7th · Ketu → 1st

🔴 April 2027Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 10th · Mars → 1st · Jupiter → 1st · Rahu → 7th · Ketu → 1st

Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.

🔯 योग और भृगु संकेत

Anapha YogaVesi YogaAmala YogaPaasa Yoga
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
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रोहित गुप्ता · Chief Vedic Architect · 16+ साल पराशर BPHS
Rohiit Gupta — Chief Vedic Architect

Rohiit Gupta

Chief Vedic Architect · Trikaal Vaani

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🔱 Trikaal Vaani — Kaal bada balwan hai, sabko nach nachaye
trikalvaani.com · Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect