🔱 Mahakaal Ka Ashirwad

Vedic Astrology Analysis · Poori Kundali

shalinee gawle की कुण्डली

राहु महादशा · राहु अन्तर्दशा

चल रहा दौर: राहु/राहु · Jul 2025 – Mar 2028

01 Dec 1989 · 13:00 · Dindori

कुम्भ लग्न · पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र · यह विवरण ग़लत हो तो रीडिंग दोबारा बनाएँ

⚡ Swiss Ephemeris📖 BPHS Classical🔮 Bhrigu Nandi⚖️ Shadbala
2 बातें जो आपके लिए सबसे ज़रूरी हैं
⚠️
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Jul 2027 · Nov 2027 – Feb 2028
⭐
सबसे पास का शुभ समय: Nov 2026 – Jan 2027
आय और लाभ
🔱 ग्रन्थ से आपका सार

आपके 5 मुख्य भावों में से 0 सहारा देने वाले, 2 कठिन, और 3 मिला-जुला हैं।

घर, भूमि और माता4वाँ भाव
कमज़ोर · 29
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Jul 2027 · ⭐ Nov 2027 – Feb 2028
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों?
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 29 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 12वें (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: शनि 4थे भाव पर दृष्टि, गुरु 4थे भाव पर दृष्टि
· 4ve ghar ka malik Shukra mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· is ghar par bindu kam hain (29)
ग्रन्थ के श्लोक(13)
वाहन घटिया मिलता है। (Bhrigu 1.48) वाहन का भाग्य नहीं मिलता। (JP 12.115)
⭐ AAPKE CHART SE5
वाहन घटिया मिलता है।Bhrigu 1.48◆
वाहन का भाग्य नहीं मिलता।JP 12.115◆
घर के सुख में कष्ट रहता है।JP 12.139◆
घर पुराना और जीर्ण मिलता है।JP 12.145◆
सुख थोड़े समय का ही रहता है।JP 12.86◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA8
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
बारहवें वर्ष में वाहन का सुख मिलता है।BPHS 15.10-11
बारहवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.13-14
बयालीसवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.12-13
उसी समय जातक सिंहासन का स्वामी होता है।JP 12.130◆
बत्तीसवें वर्ष में वाहन मिलता है।BPHS 15.11-12
उनकी दशा में क्रम से राज्य, फिर भाग्य, फिर लाभ और फिर धन मिलता है।JP 12.111
उसी की दशा में वाहन मिलता है।JP 12.110◆
उसकी दशा-भुक्ति में घर और भूमि की हानि होती है; वाहनेश की भुक्ति में बन्धु-हानि, और शनि-मंगल-माँदी की भुक्ति में अनर्थ।JP 12.136◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 23
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
Jul 2027 – Oct 2027 · Feb 2028 – Dec 2028
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों?
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 23 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी बुध 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 5वें भाव पर दृष्टि
· 5ve ghar mein Guru baitha hai — sahara deta hai
· 5ve ghar ka malik Budh soorya ki aag mein daba hua hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (23) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(21)
सन्तान गोद ली हुई होती है — शास्त्र में दत्तक सन्तान कहा गया है। (BPHS 16.9) सन्तान गोद ली हुई होती है। (Phaladipika 12.8)
⭐ AAPKE CHART SE5
सन्तान गोद ली हुई होती है — शास्त्र में दत्तक सन्तान कहा गया है।BPHS 16.9◆
सन्तान गोद ली हुई होती है।Phaladipika 12.8◆
सन्तान का क्षय देव-शाप से कहा गया है।JP 13.32◆
शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (जातकपारिजात अ.13 सल.28) — उपाय अवश्य करें।JP 13.28◆
शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (जातकपारिजात अ.13 सल.24) — उपाय अवश्य करें।JP 13.24◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA13
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.26◆
उसी दशा में सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.27◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.29◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.28◆
सन्तान प्रायः बत्तीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.18◆
सन्तान प्रायः चालीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.20◆
उसी दशा में सन्तान होती है। गुरु जब पंचमेश की राशि, यमकण्टक की राशि या उनके नवांश में आये तब भी।Phaladipika 12.25◆
उनकी दशा-अन्तर्दशा में सन्तान की प्राप्ति, सन्तान से समृद्धि और बड़े लोगों की कृपा मिलती है।JP 13.50◆
सन्तान प्रायः तीसवें या छत्तीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.19◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.30◆
उसी समय जन्म होता है — यह आधान-कुण्डली का नियम है।Phaladipika 12.31◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
एक ही सन्तान होती है।Bhrigu 5.27◆
राजद्वार अर्थात् सरकारी कारण से धन का व्यय होता है।Bhrigu 5.29
सन्तान से क्लेश रहता है, पर जातक बुद्धिमान होता है और राजा का मन्त्री जैसा पद पाता है।Phaladipika 8.15◆
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
कमज़ोर · 29
विवाह में देरी के संकेत — रिश्ता बनेगा पर मेहनत से
Nov 2026 – Jan 2027 · Jul 2027 – Nov 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 29 हैं। इस भाव का स्वामी सूर्य 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 7वें भाव में
· shaadi aur saathi ka mukhya grah Shukra bhi mushkil ghar mein hai
· is ghar par bindu kam hain (29)
इस भाव के स्वामी (Surya) पर — mazboot — Surya SWA/MITRA raashi mein; Surya achhe ghar mein (10ve)
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
ग्रन्थ के श्लोक(29)
एक से अधिक विवाह या एक से अधिक सम्बन्ध बनने का योग बनता है। (BPHS 18.5) पति अत्यन्त कठोर स्वभाव का, अथवा बहुत काम करने वाला होता है। (BPHS 80.24)
⭐ AAPKE CHART SE5
एक से अधिक विवाह या एक से अधिक सम्बन्ध बनने का योग बनता है।BPHS 18.5◆
पति अत्यन्त कठोर स्वभाव का, अथवा बहुत काम करने वाला होता है।BPHS 80.24◆
एक से अधिक विवाह का योग कहा गया है।JP 14.21◆
दाम्पत्य का फल मध्यम रहता है; ऐसा न हो तो सब शुभ रहता है।JP 14.2
जातक स्वयं धर्म में रत रहता है और धन तथा सन्तान से युक्त होता है; पर दाम्पत्य में मतभेद रहता है।BPHS 24.82◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA24
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
विवाह प्रायः तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.34◆
इन दशाओं में क्रम से विवाह होता है।JP 14.29◆
विवाह प्रायः पच्चीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.32◆
उसी समय विवाह होता है।Phaladipika 10.12◆
विवाह प्रायः तेरहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.29◆
विवाह प्रायः बाईसवें या सत्ताईसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.30◆
विवाह प्रायः तेईसवें या छब्बीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.31◆
विवाह प्रायः इकतीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.33◆
दशा के किस हिस्से में विवाह होगा यह इसी से जाना जाता है — शुभ राशि में शुरू में, पाप राशि में बीच में, क्रूर पाप राशि में अन्त में।JP 14.30◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.31◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.46◆
विवाह प्रायः अठारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.27◆
उसी समय विवाह होता है।Phaladipika 10.14◆
उसी दशा या गोचर में विवाह होता है।Phaladipika 10.13◆
विवाह प्रायः सातवें या ग्यारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.23◆
विवाह प्रायः पन्द्रहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.28◆
विवाह प्रायः पाँचवें या नवें वर्ष में होता है।BPHS 18.22◆
विवाह प्रायः दसवें या सोलहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.24◆
विवाह प्रायः ग्यारहवें वर्ष में होता है।BPHS 18.25◆
विवाह प्रायः बारहवें या उन्नीसवें वर्ष में होता है।BPHS 18.26◆
पहला विवाह दसवें वर्ष में, दूसरा बाईसवें वर्ष में और तीसरा तैंतीसवें वर्ष में होता है; इसमें कोई सन्देह नहीं।BPHS 18.40-41◆
उसी समय विवाह होता है; अथवा चन्द्र जिस नक्षत्र में है, वर-वधू के एक ही अंश मिलने पर भी।JP 14.105◆
विवाह प्रायः उसी संख्या के वर्ष में, अथवा उसमें आठ जोड़ने पर आये वर्ष में होता है।JP 14.32◆
उसी समय विवाह होता है।JP 14.28◆
कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
कमज़ोर · 29
नौकरी/पदोन्नति में रुकावट है — यह समय सबसे अच्छा मौका है, इसी में ज़ोर लगाएँ
Oct 2026 – Nov 2026 · Jan 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 29 हैं। इस भाव का स्वामी मंगल 9वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 10वें भाव पर दृष्टि
· 10ve ghar mein Budh baitha hai — sahara deta hai
· 10ve ghar mein Surya baitha hai — dabaav banata hai
· is ghar par bindu kam hain (29)
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal achhe ghar mein (9ve)
Jo bhi kaam shuru karo usme safalta milti hai, aaram se rehna, naam aur pratishtha, kushal kaam, aur samman badhta hai. (Ph 20.11)
ग्रन्थ के श्लोक(12)
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 21.3) ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — लाभ की जगह हानि रहती है। (BPHS 21.4)
⭐ AAPKE CHART SE5
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 21.3◆
ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — लाभ की जगह हानि रहती है।BPHS 21.4
काम-काज में विघ्न आता है।Bhrigu 1.93◆
विद्या, विनय, गुण और राज-सम्मान चारों में कमी रहती है।JP 13.4◆
काम-काज में विघ्न आता है और किये गये काम बिगड़ते हैं।Bhrigu 4.70◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA4
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय दशम भाव का फल सिद्ध होता है; दोनों की युति या दृष्टि हो तब भी।Phaladipika 16.31◆
उसी दशा में सत्कर्म, यज्ञ-फल, आगम-ज्ञान और विद्या मिलती है।JP 15.13◆
वही समय दशम भाव का फल सिद्ध होने का है; दशमेश बली हो तो शुभ, अन्यथा उल्टा।Phaladipika 16.35
उसी समय दशम भाव का फल मिलता है।Phaladipika 16.32
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
परिश्रम सिद्धि देता है और जातक राजा के समान होता है; पर थकान रहती है और प्रियजनों से वियोग कहा गया है।Chamatkar Chintamani 2.10◆
सुख और पराक्रम दोनों मिलते हैं।BJ 20.3◆
सत्ता का प्रिय, सत्कर्म में रत, पराक्रमी और ख्यातिवान होता है।Bhrigu 1.89◆
आय और लाभ11वाँ भाव
कमज़ोर · 24
लाभ रुक-रुक कर आएगा — इस समय कमाई का मौका है
⭐ Nov 2026 – Jan 2027 · ⭐ Oct 2027 – Nov 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी गुरु 5वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 11वें भाव पर दृष्टि, शनि 11वें भाव पर दृष्टि
· 11ve ghar mein Chandra baitha hai — sahara deta hai
· 11ve ghar mein Shani baitha hai — dabaav banata hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Guru) पर — mazboot — Guru VAKRI hai; Guru achhe ghar mein (5ve)
Adhikaar bina toote chalta hai, manchaahe rishtedaar milte hain, sahayak aur saath dene wale, aur badi duniyavi tarakki. (Ph 20.12)
ग्रन्थ के श्लोक(13)
बहुत धन खर्च हो जाता है। (Bhrigu 2.68) धन शुभ मार्ग से आता है; पाप ग्रह हो तो पाप के मार्ग से, और मिश्र हों तो मिला-जुला। (JP 15.68)
⭐ AAPKE CHART SE4
बहुत धन खर्च हो जाता है।Bhrigu 2.68◆
धन शुभ मार्ग से आता है; पाप ग्रह हो तो पाप के मार्ग से, और मिश्र हों तो मिला-जुला।JP 15.68◆
बहुत लाभ होता है।BPHS 22.2◆
सन्तान सुखी, विद्यावान और सुशील होती है; जातक स्वयं धर्म में रत और सुखी रहता है।BPHS 24.125◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA6
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
तैंतीसवें वर्ष में एक हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.8◆
छत्तीसवें वर्ष में दो हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.4
विवाह के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 22.9◆
चालीसवें वर्ष में पाँच सौ निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.5
पन्द्रहवें वर्ष में सन्तान के कारण प्रबलता बढ़ती है।Bhrigu 2.66◆
उन्हीं ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा में धन आता है, और वह उसी ग्रह की दिशा से आता है।JP 15.71◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
जातक बहुत धनी होता है, भूमि का लाभ मिलता है और वह सत्ता का पूजक रहता है; पर कामों में विघ्न भी आते हैं।Bhrigu 7.46◆
बहुत विद्याएँ मिलती हैं।Bhrigu 2.72◆
जातक गुणों से भरपूर होता है।Bhrigu 2.67◆
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
मिला-जुला · 30
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· is ghar par bindu theek hain (30)
· 6ve ghar mein Ketu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
इस भाव के स्वामी (Chandra) पर — mazboot — Chandra achhe ghar mein (11ve)
Virodhiyon par jeet apni himmat se, achhi sehat, udaarta, koi dabaa nahi sakta, aur badi samriddhi. (Ph 20.7)
ग्रन्थ के श्लोक(8)
⭐ AAPKE CHART SE5
शत्रु से ही धन प्राप्त होता है; जातक गुणवान, साहसी और मानी होता है, पर सन्तान का सुख कम रहता है।BPHS 24.71◆
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
शत्रु से पीड़ा होती है।JP 13.80◆
शत्रुओं से पीड़ा शीघ्र और बहुत होती है, और वह टाली नहीं जा सकती।Phaladipika 16.16◆
शास्त्र में यहाँ पैरों पर ध्यान और विरोधियों से सावधानी को कहा गया है।Phaladipika 14.9◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
षष्ठ भाव से शरीर के रोग और व्रण अर्थात् घाव-चोट का विचार किया जाता है।BPHS 17.1◆
रोग, शत्रु, व्यसन और घाव — इन चारों का विचार मंगल और षष्ठेश से किया जाता है।JP 13.71◆
सूर्य से सिर, चन्द्र से मुख, मंगल से कण्ठ, गुरु से रोग का अभाव, शुक्र से नेत्र-भय, शनि से वात, तथा राहु-केतु से उदर-रोग कहा गया है।JP 13.78◆
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
कमज़ोर · 26
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· is ghar par bindu kam hain (26)
इस भाव के स्वामी (Shani) पर — mazboot — Shani achhe ghar mein (11ve)
Duniya mein apni jagah banti hai, sukh se rehna, sharir mein bal, chehre par tej. Bhagya badhte chaand ki tarah badhta hai. (Ph 20.2)
ग्रन्थ के श्लोक(7)
⭐ AAPKE CHART SE5
स्वभाव में क्रोध रहता है।JP 11.34◆
सब रोग दूर हो जाते हैं — ऐसा कहा गया है।BPHS 12.2◆
जातक दीर्घायु, धनवान, बुद्धिमान और सत्ता का प्रिय होता है।BPHS 12.5◆
जातक राजा जैसा, पिता का प्रिय, धनवान और सुखी होता है।JP 11.46◆
जातक सुखी रहता है; सब ग्रहों की दृष्टि हो तो राजा जैसा।JP 11.47◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA2
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
सोलहवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.41◆
तीसवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.42◆
भाग्य, पिता और धर्म9वाँ भाव
कमज़ोर · 30
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· is ghar par bindu theek hain (30)
· 9ve ghar ka malik Shukra mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· 9ve ghar mein Mangal baitha hai — dabaav banata hai
ग्रन्थ के श्लोक(8)
⭐ AAPKE CHART SE3
भाग्य की हानि होती है; खर्च शुभ कामों में तो होता है पर अतिथि-सत्कार से धन घटता रहता है।BPHS 24.108◆
धर्म की ओर झुकाव कम रहता है।JP 14.96◆
वह भी सदा भाग्य देने वाला हो जाता है।JP 14.66◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA3
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
बत्तीसवें वर्ष के बाद भाग्य, वाहन और कीर्ति तीनों मिलते हैं।BPHS 20.10
बीसवें वर्ष के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 20.27
छत्तीसवें वर्ष के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 20.28
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN2
भाग्य का अभाव रहता है।Bhrigu 3.73◆
बुद्धि और भाग्य-धन दोनों उग्र रहते हैं; पर भाई-बहन और साले से पराक्रम का सहारा नहीं मिलता।Chamatkar Chintamani 4.9◆

जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।

आगे का दौर
16.7 साल आगे
राहु / राहु← अभी
Oct 2026 – Mar 2028
सूक्ष्म दशा: बुध
पद का लाभ और बड़ा उत्साह। ऊपर वालों की प्रीति और शुभ फल। सुख-सम्पत्ति, पत्नी-संतान की बढ़ोतरी। (BPHS 55.3-4)
चोर का डर और घाव की पीड़ा। ऊपर वालों के दरवाज़े पर लोगों से मनमुटाव, अपने चाहने वालों का नुकसान, पत्नी-संतान को कष्ट — इसमें कोई संदेह नहीं। (BPHS 55.5-6)
राहु — 12वें भाव में · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
Oct 2026 – Nov 2026Jan 2027 – Jul 2027Jul 2027 – Oct 2027
राहु / गुरु
Mar 2028 – Aug 2030
सूक्ष्म दशा: गुरु
धन की हानि और शरीर को कष्ट। (BPHS 55.18)
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट। (BPHS 55.17)
गुरु — 5वें भाव में, 11+2 का स्वामी · इस लग्न के लिए पाप ग्रह (BPHS Ch.34)
Jul 2028 – Dec 2028Mar 2029 – Aug 2029Jan 2030 – May 2030Mar 2028 – Dec 2028Dec 2028 – Mar 2029Mar 2029 – Aug 2029
राहु / शनि
Aug 2030 – Jun 2033
सूक्ष्म दशा: शनि
ऊपर वालों की सेवा और उनकी प्रीति — शुभ। विवाह और उत्सव के कार्य, बहुत पुण्य। बाग़ लगवाना, तालाब बनवाना। शूद्र/श्रमिक वर्ग के माध्यम से इष्ट लाभ, गोधन का संग्रह। (BPHS 55.21-23)
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना। (BPHS 55.24)
शनि — 11वें भाव में, 12+1 का स्वामी · इस लग्न के लिए शुभ ग्रह (BPHS Ch.34)
Aug 2030 – Sep 2030Sep 2030 – Jun 2032Mar 2033 – Jul 2033Feb 2031 – Jun 2031Oct 2031 – Mar 2032Jun 2032 – Aug 2032
राहु / बुध
Jun 2033 – Jan 2036
सूक्ष्म दशा: बुध
मन में उलझन और बहस। काम में अड़चन, धन का व्यय, अपनों से मतभेद। (BPHS 55.36-38)
बुध के महीने में बड़ा सुख, और अपने वार के दिन बड़े से भेंट। विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी। धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ। (BPHS 55.30-35)
बुध — 10वें भाव में, 5+8 का स्वामी · इस लग्न के लिए सम ग्रह (BPHS Ch.34)
Jun 2033 – Mar 2034Mar 2034 – Jul 2034Mar 2034 – Jul 2034Jul 2034 – Apr 2035Apr 2035 – Jan 2036
राहु / केतु
Jan 2036 – Feb 2037
सूक्ष्म दशा: केतु
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें। (JP 18.100)
केतु — 6ठे भाव में · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
Jan 2036 – Sep 2036
राहु / शुक्र
Feb 2037 – Feb 2040
सूक्ष्म दशा: शुक्र
पत्नी को कष्ट और घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि। प्रमेह/मूत्र और रक्त से जुड़ा रोग। (BPHS 55.53-58)
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें। (JP 18.101)
शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी · इस लग्न का योगकारक ग्रह (BPHS Ch.34)
Feb 2037 – May 2037May 2037 – Nov 2038Apr 2039 – Aug 2039Feb 2037 – May 2037May 2037 – Oct 2037Oct 2037 – Feb 2038
राहु / सूर्य
Feb 2040 – Dec 2040
सूक्ष्म दशा: सूर्य
पद और राजसम्मान। पिता की ओर से सुख, शत्रु का नाश। धन-अनाज, यश। तीर्थ और गंगा-स्नान का फल। (BPHS 55.60-66)
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश। (JP 18.102)
सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
May 2040 – Jul 2040Feb 2040 – Jan 2041
राहु / चन्द्र
Dec 2040 – Jun 2042
सूक्ष्म दशा: चन्द्र
माता को कष्ट, मन में दुख। धन की हानि, शरीर में शिथिलता। (BPHS 55.75)
भोग की सम्पदा हमेशा बनी रहती है, फ़सल-वृद्धि और धन का आगम। और अपनों से मेल। (JP 18.103)
चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी · इस लग्न के लिए पाप ग्रह (BPHS Ch.34)
Jan 2041 – Feb 2041Sep 2041 – Jan 2042Jan 2042 – Jun 2042Jan 2041 – Feb 2041Sep 2041 – Jul 2042
राहु / मंगल
Jun 2042 – Jul 2043
सूक्ष्म दशा: मंगल
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह। (BPHS 55.76-82)
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख। (BPHS 55.82)
मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
Jun 2042 – Aug 2042Aug 2042 – Jan 2043Jan 2043 – Jul 2043Jun 2042 – Aug 2042Aug 2042 – Jul 2043
शनि का चक्कर — आगे
ढैया Apr 2025 – Feb 2028
ढैया Jul 2034 – Aug 2036
राजयोग — BPHS अ.39
चौथाई राजयोग — हल्का सहारा
AATMAKARAKA + PUTRAKARAKA — Budh aur Surya ka jod bana hai (EK SAATH baithe hain) — aur wo chauthai bal ka hai (BPHS 39.4-5)
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।5 MD
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौरकालग्रह की जगहग्रन्थ क्या कहता हैस्रोत
शुक्र महादशाNov 1989 – Jul 2002शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · विवाह और जीवनसाथी · भाग्य, पिता और धर्म · व्यय, दूर देश और एकान्त
(शुक्र 4थे भाव का स्वामी है)
अ.34: योगकारक
└ शुक्र/शुक्रNov 1989 – Jan 1992शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी
शय्या, जीवनसाथी, धन और वस्त्र की प्राप्ति; धर्म और सुख की सम्पदा। विरोधियों का नाश और यश का लाभ।
JP 18.158
└ शुक्र/सूर्यJan 1992 – Aug 1992सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी
किसी ग्रह-दोष जैसी बाधा।
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश और धन।
BPHS 60.19
└ शुक्र/चन्द्रAug 1992 – Sep 1993चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी
सिर और गर्मी की तकलीफ़, और इच्छाओं से उपजा दबाव। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
माता को कष्ट, मन में दुख, धन की हानि।
JP 18.160
└ शुक्र/मंगलSep 1993 – Jun 1994मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ, भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत।
मन में उत्साह और धन का आगम। जीवनसाथी के पक्ष से लाभ। आँख और पित्त की तरफ़ ध्यान।
BPHS 60.30-35
└ शुक्र/राहुJun 1994 – May 1996राहु — 12वें भाव में
नीली चीज़ों या उस तरह के काम से धन — पर बन्धुओं से खिंचाव और मित्रों से भय। अग्नि की सावधानी।
भुक्ति के शुरू के पाँच महीने भारी रहते हैं।
JP 18.162
└ शुक्र/गुरुMay 1996 – Jan 1998गुरु — 5वें भाव में, 11+2 का स्वामी
धन, वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति, धर्म का आचरण और सुख। जीवनसाथी-संतान के पक्ष में थोड़ी असमानता।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.163
└ शुक्र/शनिJan 1998 – Jan 2000शनि — 11वें भाव में, 12+1 का स्वामी
सन्तान (बेटी) के जन्म की सम्भावना।
BPHS 60.53
└ शुक्र/बुधJan 2000 – Oct 2001बुध — 10वें भाव में, 5+8 का स्वामी
विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी, धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ।
संतान और मित्रों का सुख तथा अर्थ की प्राप्ति, ऊपर वालों की प्रीति और बड़ा सुख। शुभ और पूजनीय कार्य।
BPHS 60.60-66
└ शुक्र/केतुOct 2001 – Jul 2002केतु — 6ठे भाव में
झगड़ा, बन्धुओं का साथ कम, विरोध से दबाव और मन में भय। धन में कटौती।
JP 18.166
सूर्य महादशाJul 2002 – Jul 2008सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · विवाह और जीवनसाथी · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: मारक
└ सूर्य/सूर्यJul 2002 – Nov 2002सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.61
└ सूर्य/चन्द्रNov 2002 – May 2003चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी
पत्नी-संतान को कष्ट। लोगों से मनमुटाव और बहस। नौकर-चाकर का साथ छूटना। विरोध, ऊपर वालों से झगड़ा, धन-अनाज-पशु की हानि।
बेवक़्त खाना, और एक जगह से दूसरी जगह भटकना।
BPHS 52.7-8
└ सूर्य/मंगलMay 2003 – Sep 2003मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी
शुभ कार्य होते हैं। ज़मीन का लाभ, खेती से लाभ, धन-अनाज की बढ़ोतरी, घर-ज़मीन मिलना, लाल वस्त्र। लग्नेश के साथ हो तो सुख और ऊपर वालों की प्रीति। भाग्येश/लाभेश के साथ हो तो लाभ, बड़ा पद, शत्रु का नाश, मन की दृढ़ता, भाई-बन्धुओं का सुख।
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
BPHS 52.15-18
└ सूर्य/राहुSep 2003 – Aug 2004राहु — 12वें भाव में
बंधन, जगह का नुकसान, क़ानूनी उलझन। चोर का डर, घाव। पत्नी-संतान का कष्ट, चौपायों का नुकसान, घर-ज़मीन की हानि। पेट के रोग और अतिसार।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.27-29
└ सूर्य/गुरुAug 2004 – May 2005गुरु — 5वें भाव में, 11+2 का स्वामी
विवाह, बड़े लोगों से भेंट, धन-अनाज का लाभ, संतान लाभ, बड़ा सुख। बड़े की कृपा से मनचाहा काम और धन। ब्राह्मणों का प्रेम और सम्मान, अच्छे वस्त्र। भाग्येश/कर्मेश के वश से पद मिलना, नरवाहन योग (पालकी/सवारी), जगह की बढ़ोतरी। दान-धर्म का काम, देवता की आराधना, गुरु में भक्ति, मन की सिद्धि, पुण्य कर्म।
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
BPHS 52.32-36
└ सूर्य/शनिMay 2005 – May 2006शनि — 11वें भाव में, 12+1 का स्वामी
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
चारों तरफ़ विरोध, आलस, और जीविका का दर्जा गिरना। ऊपर वालों तथा चोरी का भय।
BPHS 52.45-46
└ सूर्य/बुधMay 2006 – Mar 2007बुध — 10वें भाव में, 5+8 का स्वामी
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
बन्धुओं के पक्ष में चिन्ता, मन पर बोझ, उत्साह कम और धन का क्षय। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
BPHS 52.55-56
└ सूर्य/केतुMar 2007 – Jul 2007केतु — 6ठे भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्रJul 2007 – Jul 2008शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
ऊपर वालों की नाराज़गी, मन में उलझन, और संतान-पत्नी तथा धन का नुकसान।
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशाJul 2008 – Jul 2018चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · परिश्रम, विरोध और रोग · आय और लाभ
(चन्द्र "घर, भूमि और माता" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: पाप
└ चन्द्र/चन्द्रJul 2008 – May 2009चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी
हाथी-घोड़े-वस्त्र मिलते हैं। देवता और गुरु में भक्ति, पुण्य का कीर्तन। पद मिलना, बड़ा सुख, यश की बढ़ोतरी। पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा बल — बड़ा पद और बड़ा सुख।
बेवक़्त धन का नाश, या अपनी जगह से हटना। शरीर में आलस, मन में ताप, ऊपर वालों और सलाहकारों से विरोध। माता को कष्ट, मन में दुख, बन्धन जैसी स्थिति, बन्धुओं का नुकसान।
BPHS 53.1-3
└ चन्द्र/मंगलMay 2009 – Dec 2009मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी
सौभाग्य, राजसम्मान, वस्त्र और आभूषण। मेहनत से काम बनता है — इसमें कोई संदेह नहीं। घर-ज़मीन की बढ़ोतरी, व्यापार में लाभ, काम का लाभ और बड़ा सुख।
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
BPHS 53.7-9
└ चन्द्र/राहुDec 2009 – Jun 2011राहु — 12वें भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
सारे काम सिद्ध होते हैं। नैऋत्य या पश्चिम दिशा में कहीं बड़े व्यक्ति से भेंट। वाहन और वस्त्र का लाभ, और अपना इष्ट कार्य पूरा।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरुJun 2011 – Oct 2012गुरु — 5वें भाव में, 11+2 का स्वामी
गर्भाधान और उससे जुड़ा फल। धन-अनाज की समृद्धि, विवाह और मंगल कार्य। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ, दान-धर्म। बड़े की कृपा से पद और सम्मान।
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा। और मेहनत से काम बनता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.22-25
└ चन्द्र/शनिOct 2012 – May 2014शनि — 11वें भाव में, 12+1 का स्वामी
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
JP 18.77
└ चन्द्र/बुधMay 2014 – Oct 2015बुध — 10वें भाव में, 5+8 का स्वामी
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
माता के पक्ष से धन, विद्वानों का साथ, और वस्त्र-आभूषण की प्राप्ति।
BPHS 53.45
└ चन्द्र/केतुOct 2015 – May 2016केतु — 6ठे भाव में
शरीर को कष्ट, मन में बेचैनी। अपनों से दूरी और खर्च का बढ़ना।
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
BPHS 53.50-51
└ चन्द्र/शुक्रMay 2016 – Jan 2018शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी
पत्नी को कष्ट, घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि।
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
BPHS 53.60-62
└ चन्द्र/सूर्यJan 2018 – Jul 2018सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी
शरीर में ताप, ऊपर वालों से मतभेद, धन की हानि।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.70
मंगल महादशाJul 2018 – Jul 2025मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · परिश्रम, विरोध और रोग · भाग्य, पिता और धर्म · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(मंगल 3रे भाव का स्वामी है)
अ.34: मारक
└ मंगल/मंगलJul 2018 – Dec 2018मंगल — 9वें भाव में, 3+10 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
ज़मीन और घर का लाभ, धन-अनाज। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई। शत्रु पर जीत, राजसम्मान, लाल वस्त्र और आभूषण।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहुDec 2018 – Jan 2020राहु — 12वें भाव में
वात-पित्त का रोग। धन का नाश, चोर और सत्ता का भय। अपनों से विरोध, मन में बेचैनी।
गंगा-स्नान और तीर्थ का फल। धन-अनाज, वाहन। ऊपर वालों से मेल, विदेश या दूर की यात्रा का लाभ।
BPHS 54.12-13
└ मंगल/गुरुJan 2020 – Dec 2020गुरु — 5वें भाव में, 11+2 का स्वामी
पद और सम्मान। विवाह और मंगल कार्य, संतान का लाभ। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ। धन-अनाज, वाहन और वस्त्र। विद्या और यश की बढ़ोतरी।
विद्वानों के रास्ते से धन, भूमि का लाभ, और निरोगता। सम्मान, जय और सुख।
BPHS 54.15-21
└ मंगल/शनिDec 2020 – Jan 2022शनि — 11वें भाव में, 12+1 का स्वामी
पद का सुख और यश की बढ़ोतरी। अपने गाँव/जगह में अनाज की बढ़ोतरी। संतान-पौत्र का साथ, घर में गोधन। अपने वार के दिन राजसम्मान, अपने महीने में संतान की वृद्धि।
सेहत पर दबाव, और विरोधी, चोरी तथा ऊपर वालों से भय। धन का क्षय।
BPHS 54.23-25
└ मंगल/बुधJan 2022 – Jan 2023बुध — 10वें भाव में, 5+8 का स्वामी
हृदय का रोग, मान की हानि, बन्दिश, बन्धुओं का नुकसान। पत्नी-संतान और धन का नुकसान, चौपायों की हानि। दशा-स्वामी के साथ हो तो शत्रु बढ़ते हैं और बड़ा भय, विदेश जाना, कई रोग।
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख। खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
BPHS 54.38-40
└ मंगल/केतुJan 2023 – Jun 2023केतु — 6ठे भाव में
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
JP 18.89
└ मंगल/शुक्रJun 2023 – Aug 2024शुक्र — 12वें भाव में, 4+9 का स्वामी
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्यAug 2024 – Dec 2024सूर्य — 10वें भाव में, 7 का स्वामी
अपवाद, बड़ों से मनमुटाव, झगड़ा और सेहत पर दबाव। अपने ही वर्ग से मन को कष्ट।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.91
└ मंगल/चन्द्रDec 2024 – Jul 2025चन्द्र — 11वें भाव में, 6 का स्वामी
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
JP 18.92
राहु महादशाJul 2025 – Jul 2043राहु — 12वें भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: व्यय, दूर देश और एकान्त
(राहु स्वयं 12वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहु ← अभीJul 2025 – Mar 2028(अब तक Oct 2026)राहु — 12वें भाव में
पद का लाभ और बड़ा उत्साह। ऊपर वालों की प्रीति और शुभ फल। सुख-सम्पत्ति, पत्नी-संतान की बढ़ोतरी।
चोर का डर और घाव की पीड़ा। ऊपर वालों के दरवाज़े पर लोगों से मनमुटाव, अपने चाहने वालों का नुकसान, पत्नी-संतान को कष्ट — इसमें कोई संदेह नहीं।
BPHS 55.3-4
⚠️ साढ़े सातीNov 1989 – Nov 1993दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)शनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाJul 1995 – May 1998चन्द्र से 4थाशनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाSep 2004 – Jul 2007चन्द्र से 8वाँशनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ साढ़े सातीNov 2014 – Jan 2023पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)शनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैया ← अभी चल रही हैApr 2025 – Feb 2028चन्द्र से 4थाशनि का बड़ा चक्कर—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
तीन तारीखें भेजिए
उपायपहले ग्रन्थ के, फिर परम्परा के। खोलने के लिए टैप करें।
उपाय
सिर्फ़ वहाँ जहाँ ग्रन्थ देता है
किस दौर के लिएकिस लिएउपायस्रोत
Rahu/Guru
Mar 2028 – Aug 2030
गुरु दूसरे/सातवें का स्वामी हो
ग्रन्थ इस दौर को कठिन कहता है
**सोने की प्रतिमा का दान और शिव पूजा** — शम्भु की कृपा से ग्रह प्रसन्न होकर शरीर स्वस्थ करते हैंBPHS 55.19-20
उपाय BPHS के दशा-अध्याय (52-60) से आते हैं, और वहाँ वे मारक वाली शर्त के साथ ही मिलते हैं। भृगु सूत्रम फल का ग्रन्थ है, उपाय का नहीं (568 में से सिर्फ़ 9 श्लोक)। और षड्बल एक माप है — वह बताता है कौन-सा ग्रह कमज़ोर है, पर उपाय नहीं देता।
पारम्परिक उपाय
⚠️ ये परम्परा से आते हैं — ग्रन्थ का श्लोक नहीं हैं। ग्रन्थ के अपने उपाय ऊपर हैं, हर एक अपने श्लोक-संख्या के साथ।

🙏 पारम्परिक उपाय — ५ (ग्रन्थ का श्लोक नहीं)

🕉️

उपाय 1 — मन्त्र साधना

ग्रह: राहु

ॐ राहवे नमः

🔢 108 बार⏰ शनिवार या बुधवार शाम📅 शनिवार

🎯 उद्देश्य: परिवर्तन और छिपे अवसर

✨ शनिवार को राहु काल में राहु को नारियल अर्पित करें

💎

उपाय 2 — रत्न

💍 कुम्भ लग्न — जीवन भर के लिए

नीलम (Blue Sapphire)

चाँदी · मध्यमा · शनिवार

जन्म नक्षत्र वाले दिन, कच्चे दूध में शुद्ध करके पहनें

⚡ राहु महादशा — चल रहे दौर के लिए

गोमेद (Hessonite)

चाँदी · मध्यमा · शनिवार

विकल्प (उपरत्न): स्पेसार्टिन गार्नेट

कम से कम 8 रत्ती

🪔

उपाय 3 — व्रत और उपासना

राहु शान्ति📅 शनिवार🙏 माँ दुर्गा

🌸 प्रसाद: नारियल, उड़द दाल

🔯 यन्त्र: राहु यन्त्र — नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) कोना

✨ शनिवार को राहु काल में राहु को नारियल अर्पित करें

🌾

उपाय 4 — दान और सेवा

🌾 नारियल, नीला कपड़ा, लोहा, उड़द दाल, सरसों का तेल, काले तिल

📅 शनिवार👤 ज़रूरतमंद या अनाथालय

दान पूरी श्रद्धा से दें। माँ शक्ति हर दान की साक्षी हैं।

🔱

उपाय 5 — विशेष उपाय

ग्रह: राहु

शनिवार को राहु काल में राहु को नारियल अर्पित करें

🎯 उद्देश्य: परिवर्तन और छिपे अवसर

⏰ शनिवार सुबह सबसे प्रभावी

Jai Maa Shakti - Trikal Vaani ke anusar yeh upay aapke liye specifically chune gaye hain

ये उपाय ज्योतिष परम्परा से हैं · ग्रन्थ के अपने उपाय ऊपर, श्लोक-संख्या के साथ · रोहित गुप्ता, Chief Vedic Architect

जन्म कुण्डली + ९ ग्रहउत्तर भारतीय चक्र, लाहिरी अयनांश, षड्बल। खोलने के लिए टैप करें।

🪐 जन्म कुंडली — उत्तर भारतीय चक्र

12Makrशुकराह1KumbL2Meen11Dhanचंदशनि3Mesh10Vrscसूरबुध9Tulaमंग8Kany4Vrsh5Mithगुर6Karkकेत7SimhKumbha Lagna

Lahiri Ayanamsha · Swiss Ephemeris · BPHS classical

⚡ ग्रह विश्लेषण — सभी ९ ग्रह

GrahaRashiHouseNakshatraDignityStrength
☉सूर्यVrishchika10thAnuradhaFriendly Sign● Strong (1.38)
☽चंद्रDhanu11thPurva AshadhaEnemy Sign● Strong (1.00)
♂मंगलTula9thVishakhaFriendly Sign● Strong (1.00)
☿बुधVrishchika10thJyeshthaFriendly Sign● Strong (1.09)
♃गुरु® VakriMithuna5thArdraEnemy Sign● Strong (1.25)
♀शुक्रMakara12thUttara AshadhaFriendly Sign● Strong (1.16)
♄शनिDhanu11thPurva AshadhaEnemy Sign● Strong (1.15)
☊राहु® VakriMakara12thDhanishthaNeutral Sign—
☋केतुKarka6thAshleshaNeutral Sign—

⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris

गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।

🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग

BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।

शुक्र सोलह में से 5 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।

शुक्र5/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Makaraधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Makaraघर, ज़मीन और भाग्य — Makaraसंतान — Karkaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Makaraकर्म और पहचान — Kanyaमाता-पिता — Makaraवाहन और सुख — Meshaसाधना और भक्ति — Meshaशिक्षा और विद्या — Karkaबल और कमज़ोरी — Karkaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishabhaमाँ और पिता की विरासत — Tulaआचरण और चरित्र — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Makara
बुध2/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishchikaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Karkaघर, ज़मीन और भाग्य — Simhaसंतान — Vrishchikaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Meenaकर्म और पहचान — Meenaमाता-पिता — Kanyaवाहन और सुख — Tulaसाधना और भक्ति — Vrishabhaशिक्षा और विद्या — Meshaबल और कमज़ोरी — Makaraकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Kanyaआचरण और चरित्र — Dhanuपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
केतु2/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Karkaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Meenaघर, ज़मीन और भाग्य — Meshaसंतान — Karkaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kumbhaकर्म और पहचान — Vrishchikaमाता-पिता — Vrishabhaवाहन और सुख — Mithunaसाधना और भक्ति — Kanyaशिक्षा और विद्या — Meshaबल और कमज़ोरी — Dhanuकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Kanyaआचरण और चरित्र — Karkaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishchika
सूर्य1/15 वर्गों में वही राशि
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चंद्र1/15 वर्गों में वही राशि
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गुरु1/15 वर्गों में वही राशि
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शनि1/15 वर्गों में वही राशि
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राहु1/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Makaraधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Kanyaघर, ज़मीन और भाग्य — Tulaसंतान — Makaraजीवनसाथी और आंतरिक बल — Simhaकर्म और पहचान — Vrishabhaमाता-पिता — Vrishchikaवाहन और सुख — Mithunaसाधना और भक्ति — Kanyaशिक्षा और विद्या — Meshaबल और कमज़ोरी — Mithunaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Kanyaआचरण और चरित्र — Karkaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishabha
मंगल0/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Tulaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Mithunaघर, ज़मीन और भाग्य — Karkaसंतान — Meenaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Vrishabhaकर्म और पहचान — Mithunaमाता-पिता — Karkaवाहन और सुख — Vrishabhaसाधना और भक्ति — Simhaशिक्षा और विद्या — Meenaबल और कमज़ोरी — Simhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Mithunaमाँ और पिता की विरासत — Dhanuआचरण और चरित्र — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishchika

ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।

⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय

ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।

विंशोत्तरीराहु / राहु

जुल॰ 2025 – जुल॰ 2043

१२० साल का चक्र, जन्म नक्षत्र से

योगिनीSiddha (शुक्र)

मई 2023 – अप्रैल 2030

३६ साल का चक्र — BPHS अध्याय १९५-१९९

चरKarka (चंद्र)

नव॰ 2019 – नव॰ 2026

राशि पर चलती है, ग्रह पर नहीं — जैमिनि

ये तीनों अलग ग्रंथों से आती हैं और अलग गणित से चलती हैं — इसीलिए अलग जवाब देना इनका दोष नहीं, इनका स्वभाव है। कोई एक पद्धति अकेली सच नहीं होती।

📅 आपका वर्ष — वर्षफल

हर साल सूर्य ठीक उस जगह लौटता है जहाँ वह आपके जन्म के समय था। उस क्षण से आपका नया वर्ष शुरू होता है — जन्मदिन से नहीं, उस खगोलीय लौटने से।

यह वर्ष शुरू हुआ: 1 दिस॰ 2025, 18:29

अगला वर्ष शुरू होगा: 2 दिस॰ 2026, 00:43

भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा

मुन्था इस साल यहाँ है। शास्त्र कहता है साल का विषय इसी हिस्से के आस-पास घूमता है।

वर्ष के आरंभ का लग्न Mithuna था (Mrigashira नक्षत्र, स्वामी Mercury)।

यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।

🕉️ नवांश (D9) — वर्ग कुंडली

नवांश लग्न: Mithuna

GrahaD1D9HouseDignity
☉सूर्य★VrishchikaVrishchika6thFriendly Sign
☽चंद्रDhanuKanya4thFriendly Sign
♂मंगलTulaVrishabha12thNeutral Sign
☿बुधVrishchikaMeena10thDebilitated
♃गुरुMithunaKumbha9thNeutral Sign
♀शुक्र★MakaraMakara8thFriendly Sign
♄शनिDhanuKanya4thFriendly Sign
☊राहुMakaraSimha3rdNeutral Sign
☋केतुKarkaKumbha9thNeutral Sign

★ वर्गोत्तम (D1 और D9 में एक ही राशि — विशेष बल): Sun, Venus

D9 (Navamsa) — BPHS divisional chart used to judge the inner strength of each graha and matters of marriage and dharma.

💼 दशांश (D10) — कर्म कुंडली

दशांश लग्न: Vrishchika

दशांश का दशम भाव: Simha

GrahaD1D10HouseDignity
☉सूर्यVrishchikaDhanu2ndFriendly Sign
☽चंद्रDhanuMithuna8thFriendly Sign
♂मंगलTulaMithuna8thEnemy Sign
☿बुधVrishchikaMeena5thDebilitated
♃गुरुMithunaVrishchika1stFriendly Sign
♀शुक्रMakaraKanya11thDebilitated
♄शनिDhanuMithuna8thFriendly Sign
☊राहुMakaraVrishabha7thNeutral Sign
☋केतुKarkaVrishchika1stNeutral Sign

D10 (Dasamsa) — BPHS divisional chart read for profession, status and the working life. The rasi chart shows the promise; the Dasamsa shows whether it is confirmed in career.

📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर

🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): January 2027🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): October 2026

पूरे दौर में स्थिर: Saturn → 2nd

Mars (7th), Jupiter (7th), Rahu (1st), Ketu (7th) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — March 2027 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।

पिछले ३ महीने

🔴 July 2026Rahu / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 4th · Venus → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th

🔴 August 2026Rahu / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Rahu → 1st · Ketu → 7th

🔴 September 2026Rahu / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th

अभी

🔴 October 2026Rahu / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)

Rahu → 1st · Ketu → 7th

अगले ६ महीने

🟡 November 2026Rahu / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 7th · Jupiter → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th

🟢 December 2026Rahu / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 10th · Mars → 7th · Mercury → 10th · Jupiter → 7th

🟢 January 2027Rahu / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 7th · Jupiter → 7th · Venus → 10th

🟡 February 2027Rahu / Ketu (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 1st · Mars → 7th · Mercury → 1st

🟢 March 2027Rahu / Ketu (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 2nd · Mercury → 1st

🟢 April 2027Rahu / Venus (अंतर / प्रत्यंतर)

Mercury → 2nd · Venus → 1st

Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.

🔯 योग और भृगु संकेत

Duradhara YogaUbhayachari YogaPaasa Yoga
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
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रोहित गुप्ता · Chief Vedic Architect · 16+ साल पराशर BPHS
Rohiit Gupta — Chief Vedic Architect

Rohiit Gupta

Chief Vedic Architect · Trikaal Vaani

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🔱 Trikaal Vaani — Kaal bada balwan hai, sabko nach nachaye
trikalvaani.com · Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect