सन्तान का योग है, या बच्चे की पढ़ाई में बड़ी सफलता
Jun 2027 – Nov 2027 · Mar 2028 – Jan 2029
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नौकरी/पदोन्नति में रुकावट है — यह समय सबसे अच्छा मौका है, इसी में ज़ोर लगाएँ
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jul 2027
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सबसे पास का शुभ समय: Oct 2026 – Feb 2027 (Nov 2026 से)
आय और लाभ
🔱 ग्रन्थ से आपका सार
आपके 5 मुख्य भावों में से 0 सहारा देने वाले, 2 कठिन, और 3 मिला-जुला हैं।
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
मज़बूत · 31
सन्तान का योग है, या बच्चे की पढ़ाई में बड़ी सफलता
Jun 2027 – Nov 2027 · Mar 2028 – Jan 2029
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 31 हैं। इस भाव का स्वामी बुध 9वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 5वें भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu theek hain (31)
इस भाव के स्वामी (Budh) पर — mazboot — Budh SWA/MITRA raashi mein; Budh achhe ghar mein (9ve)
Santan ka sukh, rishton mein khushi, bade logon ke saath kaam, samman, achha bhojan aur daan-dharm. (Ph 20.6)
ग्रन्थ के श्लोक(18)▾
सन्तान राजा जैसी अथवा उसके समान होती है; अथवा जातक स्वयं ग्रन्थ-कर्ता, विख्यात और कुल का दीपक बनता है। (BPHS 24.57) सन्तान होती है। (Phaladipika 12.11)
⭐ AAPKE CHART SE5
सन्तान राजा जैसी अथवा उसके समान होती है; अथवा जातक स्वयं ग्रन्थ-कर्ता, विख्यात और कुल का दीपक बनता है।BPHS 24.57
सन्तान होती है।Phaladipika 12.11◆
सन्तान अधिक होती है।JP 13.9◆
उस देवता की कृपा अपार मिलती है।JP 13.3
जातक बुद्धिमान और छल-रहित होता है।Phaladipika 16.15
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA13
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.26◆
उसी दशा में सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.27◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.29◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।Phaladipika 12.28◆
सन्तान प्रायः बत्तीसवें या तैंतीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.18◆
सन्तान प्रायः चालीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.20◆
उसी दशा में सन्तान होती है। गुरु जब पंचमेश की राशि, यमकण्टक की राशि या उनके नवांश में आये तब भी।Phaladipika 12.25◆
उनकी दशा-अन्तर्दशा में सन्तान की प्राप्ति, सन्तान से समृद्धि और बड़े लोगों की कृपा मिलती है।JP 13.50◆
सन्तान प्रायः तीसवें या छत्तीसवें वर्ष में होती है।BPHS 16.19◆
उसी समय सन्तान की उत्पत्ति होती है।Phaladipika 12.30◆
उसी समय जन्म होता है — यह आधान-कुण्डली का नियम है।Phaladipika 12.31◆
उसी दशा में सन्तान की प्राप्ति होती है।JP 13.49◆
कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
कमज़ोर · 25★
नौकरी/पदोन्नति में रुकावट है — यह समय सबसे अच्छा मौका है, इसी में ज़ोर लगाएँ
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 25 हैं। इस भाव का स्वामी मंगल 4थे (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 10वें भाव पर दृष्टि
· kaam aur pehchaan ka mukhya grah Surya bhi mushkil ghar mein hai
· 10ve ghar mein Rahu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu kam hain (25)
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal achhe ghar mein (4ve)
Jo bhi kaam shuru karo usme safalta milti hai, aaram se rehna, naam aur pratishtha, kushal kaam, aur samman badhta hai. (Ph 20.11)
ग्रन्थ के श्लोक(11)▾
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 21.3) ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — लाभ की जगह हानि रहती है। (BPHS 21.4)
⭐ AAPKE CHART SE5
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 21.3◆
ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — लाभ की जगह हानि रहती है।BPHS 21.4
विद्या, विनय, गुण और राज-सम्मान चारों में कमी रहती है।JP 13.4◆
जातक निन्दा का पात्र बनता है, मान गिरता है, और अपने कर्म का तेज, बल तथा कीर्ति तीनों घटते हैं।JP 15.63◆
वे काम हीन साधनों से होते हैं।JP 15.5
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA4
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय दशम भाव का फल सिद्ध होता है; दोनों की युति या दृष्टि हो तब भी।Phaladipika 16.31◆
उसी दशा में सत्कर्म, यज्ञ-फल, आगम-ज्ञान और विद्या मिलती है।JP 15.13◆
वही समय दशम भाव का फल सिद्ध होने का है; दशमेश बली हो तो शुभ, अन्यथा उल्टा।Phaladipika 16.35
उसी समय दशम भाव का फल मिलता है।Phaladipika 16.32
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN2
काव्य का व्यसन रहता है।Bhrigu 8.28
जातक प्रसिद्ध और निर्भय होता है, पर सन्तान कम और दूसरों के कामों में लगा रहता है।Phaladipika 8.27
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
कमज़ोर · 27
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
⭐ Dec 2027 – Mar 2028 · ⭐ Aug 2029 – Sep 2029
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 27 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 7वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 4थे भाव पर दृष्टि, शनि 4थे भाव पर दृष्टि, शनि 4थे भाव में
· 4ve ghar mein Mangal baitha hai — dabaav banata hai
· 4ve ghar mein Ketu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu kam hain (27)
ग्रन्थ के श्लोक(16)▾
शरीर का सुख नष्ट होता है। (JP 12.84) घर के सुख में कष्ट रहता है। (JP 12.139)
⭐ AAPKE CHART SE5
शरीर का सुख नष्ट होता है।JP 12.84◆
घर के सुख में कष्ट रहता है।JP 12.139◆
जातक बन्धुओं से सदा द्वेष रखता है।JP 12.93◆
अधिकार, काम और भूमि तीनों का नाश कहा गया है।JP 12.147◆
जातक बहुत विद्याओं वाला होता है, पर पिता का कमाया धन छोड़ देता है और सभा में चुप रह जाता है।BPHS 24.43◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA8
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
बारहवें वर्ष में वाहन का सुख मिलता है।BPHS 15.10-11
बारहवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.13-14
बयालीसवें वर्ष में वाहन का योग बनता है।BPHS 15.12-13
उसी समय जातक सिंहासन का स्वामी होता है।JP 12.130◆
बत्तीसवें वर्ष में वाहन मिलता है।BPHS 15.11-12
उनकी दशा में क्रम से राज्य, फिर भाग्य, फिर लाभ और फिर धन मिलता है।JP 12.111
उसी की दशा में वाहन मिलता है।JP 12.110◆
उसकी दशा-भुक्ति में घर और भूमि की हानि होती है; वाहनेश की भुक्ति में बन्धु-हानि, और शनि-मंगल-माँदी की भुक्ति में अनर्थ।JP 12.136◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
शास्त्र में यहाँ घर सम्बन्धी बाधा कही गयी है।Bhrigu 3.26◆
मित्र, माता, भूमि, सुख, घर और वाहन — इन सबकी कमी रहती है।Phaladipika 8.8◆
भूमि, वाहन, माता का सुख और जन्मभूमि — सबका नाश होता है, और पराये घर में रहना पड़ता है।Phaladipika 8.29◆
आय और लाभ11वाँ भाव
मज़बूत · 33
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
Oct 2026 – Feb 2027 (⭐ Nov 2026 से)
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 33 हैं।
गोचर: शनि 11वें भाव पर दृष्टि, गुरु 11वें भाव पर दृष्टि
· 11ve ghar ka malik Guru apni mazboot jagah par hai
· is ghar par bindu theek hain (33)
इस भाव के स्वामी (Guru) पर — mazboot — Guru VAKRI hai; Guru SWA/MITRA raashi mein
सब प्रकार का धन मिलता है; जातक सब कामों में सिद्धि पाने वाला, दाता, धार्मिक और सदा सुखी होता है। (BPHS 24.122) लाभ होता है। (Bhrigu 2.69)
⭐ AAPKE CHART SE2
सब प्रकार का धन मिलता है; जातक सब कामों में सिद्धि पाने वाला, दाता, धार्मिक और सदा सुखी होता है।BPHS 24.122◆
लाभ होता है।Bhrigu 2.69◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA5
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
तैंतीसवें वर्ष में एक हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.8◆
छत्तीसवें वर्ष में दो हज़ार निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.4
विवाह के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 22.9◆
चालीसवें वर्ष में पाँच सौ निष्क का लाभ होता है।BPHS 22.5
उन्हीं ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा में धन आता है, और वह उसी ग्रह की दिशा से आता है।JP 15.71◆
भाग्य, पिता और धर्म9वाँ भाव
मिला-जुला · 24
भाग्य खुलेगा, लम्बी यात्रा, बड़े लोग साथ देंगे
⭐ Jan 2029 – Apr 2029 · ⭐ Sep 2029 – Oct 2029
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 9वाँ भाव — भाग्य, पिता और धर्म — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी शुक्र 7वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु (9वें भाव का मुख्य ग्रह) वहीं बैठा है, गुरु 9वें भाव में, शनि 9वें भाव पर दृष्टि
· 9ve ghar mein Budh baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(8)▾
जीवनसाथी के योग से सुख का उदय होता है; जातक गुणवान और कीर्तिमान होता है। (BPHS 24.103) भाग्य मिलता है; वह ग्रह उच्च या स्वराशि में हो तो भाग्य लम्बे समय तक चलता है। (JP 14.67)
⭐ AAPKE CHART SE2
जीवनसाथी के योग से सुख का उदय होता है; जातक गुणवान और कीर्तिमान होता है।BPHS 24.103◆
भाग्य मिलता है; वह ग्रह उच्च या स्वराशि में हो तो भाग्य लम्बे समय तक चलता है।JP 14.67◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA3
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
बत्तीसवें वर्ष के बाद भाग्य, वाहन और कीर्ति तीनों मिलते हैं।BPHS 20.10
बीसवें वर्ष के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 20.27
छत्तीसवें वर्ष के बाद बहुत भाग्य मिलता है।BPHS 20.28
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
जातक धर्म का ज्ञाता होता है।BJ 20.6◆
बहुत सन्तान की सिद्धि होती है।Bhrigu 4.64◆
विद्या, धन, आचार और धर्म चारों मिलते हैं।Phaladipika 8.13◆
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
कमज़ोर · 36
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· is ghar par bindu theek hain (36)
· 1ve ghar ka malik Shani mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· aap khud ka mukhya grah Surya bhi mushkil ghar mein hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
ग्रन्थ के श्लोक(7)▾
⭐ AAPKE CHART SE5
देह का सुख नहीं मिलता; पाप ग्रह से युक्त और शुभ दृष्टि से रहित हो तो शत्रु से पीड़ा होती है।BPHS 24.6◆
स्वभाव में क्रोध रहता है।JP 11.34◆
शरीर दुर्बल रहता है।JP 11.32-35◆
जातक गुमनाम रहता है और सेवा में लगा रहता है।JP 11.17◆
जातक दुःखी रहता है और हीन स्थान में निवास करता है।Phaladipika 16.4◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA2
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
सोलहवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.41◆
तीसवें वर्ष के बाद सुख मिलता है।JP 11.42◆
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
मिला-जुला · 32
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· is ghar par bindu theek hain (32)
· 6ve ghar mein Shani baitha hai — dabaav banata hai
ग्रन्थ के श्लोक(8)▾
⭐ AAPKE CHART SE5
छोटे-मोटे कष्ट दूर हो जाते हैं।JP 13.76◆
भाई ही शत्रु के समान हो जाता है, पर सेवक साथ देते हैं; पराक्रम कम रहता है और क्रोध अधिक।BPHS 24.63◆
शत्रु से पीड़ा होती है।JP 13.80◆
शास्त्र में यहाँ वात (जोड़, नसें) पर ध्यान रखने को कहा गया है।Phaladipika 14.11◆
शत्रुओं से पीड़ा शीघ्र और बहुत होती है, और वह टाली नहीं जा सकती।Phaladipika 16.16◆
📖 IS GHAR KE BAARE MEIN3
ज्ञाति-बन्धु कम रहते हैं, पर शत्रु का क्षय होता है।Bhrigu 7.27◆
षष्ठ भाव से शरीर के रोग और व्रण अर्थात् घाव-चोट का विचार किया जाता है।BPHS 17.1◆
रोग, शत्रु, व्यसन और घाव — इन चारों का विचार मंगल और षष्ठेश से किया जाता है।JP 13.71◆
व्यय, दूर देश और एकान्त12वाँ भाव
कमज़ोर · 25
अगले 5 वर्षों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· 12ve ghar ka malik Shani mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· kharch aur videsh ka mukhya grah Shani bhi mushkil ghar mein hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
· is ghar par bindu kam hain (25)
ग्रन्थ के श्लोक(5)▾
⭐ AAPKE CHART SE2
जीवनसाथी का सुख नहीं मिलता।BPHS 23.5◆
अधिक खर्च से जातक थका रहता है और अच्छे भोग से वंचित रहता है।BPHS 23.6◆
⏳ JAB YE HISSA KHULEGA3
Ye hamesha nahi lagte — granth kehta hai inka phal IS GHAR KE DAUR mein aata hai. (Phaladipika 20.25)
उसी समय व्यय भाव का फल मिलता है।Phaladipika 16.32
वही समय व्यय भाव का फल सिद्ध होने का है; व्ययेश बली हो तो शुभ, अन्यथा उल्टा।Phaladipika 16.35
उसी समय व्यय भाव का फल सिद्ध होता है; दोनों की युति या दृष्टि हो तब भी।Phaladipika 16.31
जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।
आगे का दौर
12.3 साल आगे
राहु / शनि← अभी
Oct 2026 – Jan 2029
सूक्ष्म दशा: बुध
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।(BPHS 55.24)
नीच/शत्रु और सत्ता का भय। पत्नी-संतान को कष्ट, अपने बन्धुओं से मन में ताप, दायाद/रिश्तेदारों से झगड़ा, कारोबार में कलह — और अचानक कोई आभूषण मिल जाना।(BPHS 55.25-26)
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik · इस लग्न के लिए शुभ ग्रह (BPHS Ch.34)
Nov 2026 – Feb 2027Jul 2027 – Dec 2027Mar 2028 – Aug 2028Oct 2026 – Nov 2026Feb 2027 – Jul 2027
राहु / बुध
Jan 2029 – Aug 2031
सूक्ष्म दशा: बुध
मन में उलझन और बहस। काम में अड़चन, धन का व्यय, अपनों से मतभेद।(BPHS 55.36-38)
मित्र, बन्धु और जीवनसाथी का मेल, और धन का आगम। ऊपर वालों की प्रीति।(JP 18.99)
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik · इस लग्न के लिए सम ग्रह (BPHS Ch.34)
Jan 2029 – Apr 2029Apr 2029 – Aug 2029Sep 2029 – Oct 2029Apr 2029 – Sep 2029
राहु / केतु
Aug 2031 – Aug 2032
सूक्ष्म दशा: केतु
शरीर को कष्ट, मन में बेचैनी, खर्च का बढ़ना, अपनों से दूरी।(BPHS 55.45)
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें।(JP 18.100)
Ketu — 4the ghar mein · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
Aug 2031 – Nov 2031Nov 2031 – Mar 2032Mar 2032 – Jun 2032
राहु / शुक्र
Aug 2032 – Aug 2035
सूक्ष्म दशा: शुक्र
पत्नी को कष्ट और घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि। प्रमेह/मूत्र और रक्त से जुड़ा रोग।(BPHS 55.53-58)
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें।(JP 18.101)
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik · इस लग्न का योगकारक ग्रह (BPHS Ch.34)
Oct 2032 – Mar 2033Aug 2032 – Oct 2032Oct 2032 – Mar 2033Mar 2033 – Apr 2034
राहु / सूर्य
Aug 2035 – Jul 2036
सूक्ष्म दशा: सूर्य
पद और राजसम्मान। पिता की ओर से सुख, शत्रु का नाश। धन-अनाज, यश। तीर्थ और गंगा-स्नान का फल।(BPHS 55.60-66)
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश।(JP 18.102)
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह।(BPHS 55.76-82)
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।(BPHS 55.82)
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
Oct 2038 – Feb 2039Jan 2038 – Nov 2038
शनि का चक्कर — आगे
साढ़े सातीOct 2025 – Jun 2032
ढैयाJul 2034 – Sep 2036
राजयोग — BPHS अ.39
आधा राजयोग — पद और सम्मान में सहारा मिलेगा, पूरा नहीं
AATMAKARAKA + PUTRAKARAKA — Guru aur Surya ka jod bana hai (AAPAS MEIN dekhte hain) — aur wo aadha bal ka hai (BPHS 39.4-5)
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।6 MD▾
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौर
काल
ग्रह की जगह
ग्रन्थ क्या कहता है
स्रोत
केतु महादशा
Sep 1975 – Feb 1978
Ketu — 4the ghar mein
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता
(केतु स्वयं 4थे भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ केतु/केतु
Sep 1975 – Nov 1975
Ketu — 4the ghar mein
सुख और धन में कमी, और विरोध का भय।
JP 18.145
└ केतु/शुक्र
Nov 1975 – Apr 1976
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
साथी और संतान के पक्ष में सेहत तथा झगड़ा, बन्धु-मित्रों का साथ कम, और पाचन की तरफ़ ध्यान।
विवाह और मंगल कार्य। वाहन, वस्त्र, आभूषण। पत्नी-संतान का सुख, घर में लक्ष्मी, संगीत और उत्सव।
JP 18.146
└ केतु/सूर्य
Apr 1976 – May 1976
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
मन टूटा-टूटा रहता है, शरीर पर दबाव, और विदेश जाने का योग तथा भय। कामों में विरोध।
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश।
JP 18.147
└ केतु/चन्द्र
May 1976 – Jul 1976
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
साथी और संतान के पक्ष में आलस और ढील, धन-अनाज का नुक़सान, और मन पर बोझ।
JP 18.148
└ केतु/मंगल
Jul 1976 – Sep 1976
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
संतान, साथी और सहोदरों से खिंचाव; सेहत, विरोध और सत्ता की तरफ़ से दबाव।
ताप और ज़हर जैसा ज्वर। चोट का ख़तरा, भाइयों से मनमुटाव, धन की हानि।
JP 18.149
└ केतु/राहु
Sep 1976 – Jan 1977
Rahu — 10ve ghar mein
ऊपर वालों और चोरी का भय, दुख, और कामों में रुकावट। बुरे लोगों से वास्ता।
JP 18.150
└ केतु/गुरु
Jan 1977 – May 1977
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
देव, विद्वान और बड़ों की प्रीति, ऊपर वालों का स्नेह और निरोगता। भूमि और संतान का लाभ।
JP 18.151
└ केतु/शनि
May 1977 – Oct 1977
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
मन में भय और बोझ, अपने बन्धुओं से खिंचाव। और अपना देश या जगह छोड़नी पड़ सकती है।
धन की हानि, काम में रुकावट, शरीर में शिथिलता, अपनों से विरोध।
JP 18.152
└ केतु/बुध
Oct 1977 – Feb 1978
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik
बन्धु-मित्रों का मेल, संतान-साथी और धन का आगम। विद्या और सुख।
JP 18.153
शुक्र महादशा
Feb 1978 – Feb 1998
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · विवाह और जीवनसाथी · भाग्य, पिता और धर्म
(शुक्र 4थे भाव का स्वामी है)
अ.34: योगकारक
└ शुक्र/शुक्र
Feb 1978 – Jun 1981
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
शय्या, जीवनसाथी, धन और वस्त्र की प्राप्ति; धर्म और सुख की सम्पदा। विरोधियों का नाश और यश का लाभ।
JP 18.158
└ शुक्र/सूर्य
Jun 1981 – Jun 1982
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
किसी ग्रह-दोष जैसी बाधा।
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश और धन।
BPHS 60.19
└ शुक्र/चन्द्र
Jun 1982 – Feb 1984
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
सिर और गर्मी की तकलीफ़, और इच्छाओं से उपजा दबाव। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
माता का सुख और घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण, मन प्रसन्न।
JP 18.160
└ शुक्र/मंगल
Feb 1984 – Apr 1985
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
भूमि और घर का लाभ, भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत।
मन में उत्साह और धन का आगम। जीवनसाथी के पक्ष से लाभ। आँख और पित्त की तरफ़ ध्यान।
BPHS 60.30-35
└ शुक्र/राहु
Apr 1985 – Apr 1988
Rahu — 10ve ghar mein
नीली चीज़ों या उस तरह के काम से धन — पर बन्धुओं से खिंचाव और मित्रों से भय। अग्नि की सावधानी।
भुक्ति के शुरू के पाँच महीने भारी रहते हैं।
JP 18.162
└ शुक्र/गुरु
Apr 1988 – Dec 1990
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
धन, वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति, धर्म का आचरण और सुख। जीवनसाथी-संतान के पक्ष में थोड़ी असमानता।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.163
└ शुक्र/शनि
Dec 1990 – Feb 1994
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
सन्तान (बेटी) के जन्म की सम्भावना।
BPHS 60.53
└ शुक्र/बुध
Feb 1994 – Dec 1996
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik
संतान और मित्रों का सुख तथा अर्थ की प्राप्ति, ऊपर वालों की प्रीति और बड़ा सुख। शुभ और पूजनीय कार्य।
JP 18.165
└ शुक्र/केतु
Dec 1996 – Feb 1998
Ketu — 4the ghar mein
झगड़ा, बन्धुओं का साथ कम, विरोध से दबाव और मन में भय। धन में कटौती।
JP 18.166
सूर्य महादशा
Feb 1998 – Feb 2004
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · विवाह और जीवनसाथी · आकस्मिक परिवर्तन और गुप्त बातें · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: मारक
└ सूर्य/सूर्य
Feb 1998 – May 1998
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.61
└ सूर्य/चन्द्र
May 1998 – Nov 1998
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
बेवक़्त खाना, और एक जगह से दूसरी जगह भटकना।
बन्धुओं और मित्रों के ज़रिए धन मिलता है। पर लापरवाही से नुक़सान हो सकता है, और सेहत का ध्यान रखना ज़रूरी।
BPHS 52.13-14
└ सूर्य/मंगल
Nov 1998 – Apr 1999
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
शुभ कार्य होते हैं। ज़मीन का लाभ, खेती से लाभ, धन-अनाज की बढ़ोतरी, घर-ज़मीन मिलना, लाल वस्त्र। लग्नेश के साथ हो तो सुख और ऊपर वालों की प्रीति। भाग्येश/लाभेश के साथ हो तो लाभ, बड़ा पद, शत्रु का नाश, मन की दृढ़ता, भाई-बन्धुओं का सुख।
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
BPHS 52.15-18
└ सूर्य/राहु
Apr 1999 – Feb 2000
Rahu — 10ve ghar mein
शुरू के दो महीने — धन की हानि और बड़ा भय, चोर का डर, घाव, पत्नी-संतान को कष्ट। उसके बाद सुख मिलता है। शुभ ग्रह के साथ/दृष्टि में हो तो शरीर स्वस्थ, मन संतुष्ट, और ऊपर वालों से प्रीति।
बंधन, जगह का नुकसान, क़ानूनी उलझन। चोर का डर, घाव। पत्नी-संतान का कष्ट, चौपायों का नुकसान, घर-ज़मीन की हानि। पेट के रोग और अतिसार।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.23-25
└ सूर्य/गुरु
Feb 2000 – Dec 2000
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
विवाह, बड़े लोगों से भेंट, धन-अनाज का लाभ, संतान लाभ, बड़ा सुख। बड़े की कृपा से मनचाहा काम और धन। ब्राह्मणों का प्रेम और सम्मान, अच्छे वस्त्र। भाग्येश/कर्मेश के वश से पद मिलना, नरवाहन योग (पालकी/सवारी), जगह की बढ़ोतरी। दान-धर्म का काम, देवता की आराधना, गुरु में भक्ति, मन की सिद्धि, पुण्य कर्म।
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
BPHS 52.32-36
└ सूर्य/शनि
Dec 2000 – Nov 2001
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
चारों तरफ़ विरोध, आलस, और जीविका का दर्जा गिरना। ऊपर वालों तथा चोरी का भय।
BPHS 52.45-46
└ सूर्य/बुध
Nov 2001 – Sep 2002
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
बन्धुओं के पक्ष में चिन्ता, मन पर बोझ, उत्साह कम और धन का क्षय। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
BPHS 52.55-56
└ सूर्य/केतु
Sep 2002 – Feb 2003
Ketu — 4the ghar mein
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
गाल और दाँत का रोग, पेशाब की तकलीफ़। अपनी जगह से हटना, धन और मित्र की हानि। विदेश/दूर जाना, शत्रु से पीड़ा, बड़ा भय।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्र
Feb 2003 – Feb 2004
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
मनचाही स्त्री/जीवनसाथी का सुख और सम्पदा। दूसरे गाँव/शहर की यात्रा, विद्वानों और बड़े लोगों से भेंट। पद का लाभ और बड़ा उत्साह — छत्र-चामर जैसा वैभव। घर में कल्याण और सम्पत्ति, रोज़ मिष्ठान्न। मूँगा जैसे रत्न, मोती और अच्छे वस्त्र का लाभ। चौपायों का लाभ, बहुत अनाज और धन। उत्साह, कीर्ति, और नर-वाहन (पालकी/सवारी) की सम्पदा।
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशा
Feb 2004 – Feb 2014
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · घर, भूमि और माता · परिश्रम, विरोध और रोग
(चन्द्र स्वयं 3रे भाव में बैठा है)
अ.34: पाप
└ चन्द्र/चन्द्र
Feb 2004 – Dec 2004
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
विद्या, संगीत और कला में मन लगता है। अच्छे वस्त्र, अच्छी संगति और शरीर का सुख। और बड़े लोगों तथा अधिकारियों से आदर मिलता है।
JP 18.73
└ चन्द्र/मंगल
Dec 2004 – Jul 2005
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
सौभाग्य, राजसम्मान, वस्त्र और आभूषण। मेहनत से काम बनता है — इसमें कोई संदेह नहीं। घर-ज़मीन की बढ़ोतरी, व्यापार में लाभ, काम का लाभ और बड़ा सुख।
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
BPHS 53.7-9
└ चन्द्र/राहु
Jul 2005 – Jan 2007
Rahu — 10ve ghar mein
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
शुरू में फल बहुत कम — शत्रु से पीड़ा और बड़ा भय। चोर, साँप और सत्ता का डर, चौपायों को कष्ट। बन्धु का नुकसान, मित्र की हानि, मान की हानि और मन की व्यथा।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरु
Jan 2007 – May 2008
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
काम में रुकावट, धन का व्यय। मन में ताप और अपनों से मतभेद। शरीर में शिथिलता।
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा।और मेहनत से काम बनता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.26-30
└ चन्द्र/शनि
May 2008 – Dec 2009
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
शस्त्र से चोट का ख़तरा। धन की हानि, काम में रुकावट, अपनों से विरोध, शरीर में रोग।
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
BPHS 53.36-37
└ चन्द्र/बुध
Dec 2009 – May 2011
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
माता के पक्ष से धन, विद्वानों का साथ, और वस्त्र-आभूषण की प्राप्ति।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतु
May 2011 – Dec 2011
Ketu — 4the ghar mein
शरीर को कष्ट, मन में बेचैनी। अपनों से दूरी और खर्च का बढ़ना।
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं।
BPHS 53.50-51
└ चन्द्र/शुक्र
Dec 2011 – Aug 2013
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
JP 18.80
└ चन्द्र/सूर्य
Aug 2013 – Feb 2014
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
शरीर में ताप, ऊपर वालों से मतभेद, धन की हानि।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.70
मंगल महादशा
Feb 2014 – Feb 2021
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · घर, भूमि और माता · परिश्रम, विरोध और रोग · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(मंगल 3रे भाव का स्वामी है)
अ.34: मारक
└ मंगल/मंगल
Feb 2014 – Jul 2014
Mangal — 4the ghar mein, 3+10 ka malik
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
ज़मीन और घर का लाभ, धन-अनाज। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई। शत्रु पर जीत, राजसम्मान, लाल वस्त्र और आभूषण।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहु
Jul 2014 – Jul 2015
Rahu — 10ve ghar mein
गंगा-स्नान और तीर्थ का फल। धन-अनाज, वाहन। ऊपर वालों से मेल, विदेश या दूर की यात्रा का लाभ।
ऊपर वालों और चोरी का भय, धन-अनाज का नुक़सान। और रास्ता ग़लत तरफ़ मुड़ने का ख़तरा।
BPHS 54.9-11
└ मंगल/गुरु
Jul 2015 – Jun 2016
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
पद और सम्मान। विवाह और मंगल कार्य, संतान का लाभ। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ। धन-अनाज, वाहन और वस्त्र। विद्या और यश की बढ़ोतरी।
विद्वानों के रास्ते से धन, भूमि का लाभ, और निरोगता। सम्मान, जय और सुख।
BPHS 54.15-21
└ मंगल/शनि
Jun 2016 – Aug 2017
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
बाहरी/ऊपरी सत्ता से भय। धन-अनाज का नाश। बन्धन जैसी स्थिति, बन्दिश, रोग — और अन्त में ज़मीन/जायदाद का नुकसान।
सेहत पर दबाव, और विरोधी, चोरी तथा ऊपर वालों से भय। धन का क्षय।
BPHS 54.26-27
└ मंगल/बुध
Aug 2017 – Aug 2018
Budh — 9ve ghar mein, 5+8 ka malik
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख।खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
व्यापारी वर्ग से धन, घर, गाय और अनाज की सम्पदा। पर विरोध की बाधा और मन में क्लेश।
BPHS 54.36-38
└ मंगल/केतु
Aug 2018 – Dec 2018
Ketu — 4the ghar mein
झगड़ा और दाँत का रोग। चोर और जंगली जानवर का डर। ज्वर, अतिसार, कुष्ठ जैसे रोग। पत्नी-संतान को कष्ट।
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
BPHS 54.52-53
└ मंगल/शुक्र
Dec 2018 – Feb 2020
Shukra — 7ve ghar mein, 4+9 ka malik
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्य
Feb 2020 – Jul 2020
Surya — 8ve ghar mein, 7 ka malik
अपवाद, बड़ों से मनमुटाव, झगड़ा और सेहत पर दबाव। अपने ही वर्ग से मन को कष्ट।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.91
└ मंगल/चन्द्र
Jul 2020 – Feb 2021
Chandra — 3re ghar mein, 6 ka malik
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
JP 18.92
राहु महादशा
Feb 2021
Rahu — 10ve ghar mein
★ इस पूरे दौर में खुला: कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(राहु स्वयं 10वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहु
Feb 2021 – Oct 2023
Rahu — 10ve ghar mein
जीवनसाथी की सेहत, विवाद, सोच में उलझन और धन का क्षय। दूर की जगहों में भटकाव।
JP 18.96
└ राहु/गुरु
Oct 2023 – Mar 2026
Guru — 2re ghar mein, 11+2 ka malik
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट।
घर-ज़मीन की बढ़ोतरी। भोजन, वस्त्र, पशु का दान-धर्म और जप।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.17
└ राहु/शनि ← अभी
Mar 2026 – Oct 2026
Shani — 6ve ghar mein, 12+1 ka malik
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।
नीच/शत्रु और सत्ता का भय। पत्नी-संतान को कष्ट, अपने बन्धुओं से मन में ताप, दायाद/रिश्तेदारों से झगड़ा, कारोबार में कलह — और अचानक कोई आभूषण मिल जाना।
BPHS 55.24
⚠️ ढैया
Sep 1975 – Sep 1977
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Dec 1984 – Dec 1987
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती
Jun 1995 – Apr 2003
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Sep 2004 – Jul 2007
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Nov 2014 – Nov 2017
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती ← अभी चल रही है
Apr 2025 – Jun 2032
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
क्या यह सही था?
Yahan tak jo likha hai — kya ye aapke saath hua? Agar aap teen tareekhein bata dein — naukri ya kaam ka bada mod, shaadi ya rishta, aur ghar ya sampatti — to aapki agli reading aur theek hogi.
उपायपहले ग्रन्थ के, फिर परम्परा के। खोलने के लिए टैप करें।▾
उपाय
सिर्फ़ वहाँ जहाँ ग्रन्थ देता है
BPHS is daur ke liye koi upay nahi deta. Granth upay sirf us haal mein deta hai jab daur ka swami DOOSRE ya SAATVE bhav ka malik ho — aapke is daur par wo shart nahi lagti.
Upay BPHS ke dasha-adhyaay (52-60) se aate hain, aur wahan wo maraka wali shart ke saath hi milte hain. Bhrigu Sutram phal ka granth hai, upay ka nahi (568 mein se sirf 9 shlok). Aur Shadbala ek maap hai — wo batata hai kaunsa grah kamzor hai, par upay nahi deta.
पारम्परिक उपाय
⚠️ ये परम्परा से आते हैं — ग्रन्थ का श्लोक नहीं हैं। ग्रन्थ के अपने उपाय ऊपर हैं, हर एक अपने श्लोक-संख्या के साथ।
🙏 पारम्परिक उपाय — ५ (ग्रन्थ का श्लोक नहीं)
🕉️
उपाय 1 — मन्त्र साधना
ग्रह: राहु
ॐ राहवे नमः
🔢 108 बार⏰ शनिवार या बुधवार शाम📅 शनिवार
🎯 उद्देश्य: परिवर्तन और छिपे अवसर
✨ शनिवार को राहु काल में राहु को नारियल अर्पित करें
💎
उपाय 2 — रत्न
💍 कुम्भ लग्न — जीवन भर के लिए
नीलम (Blue Sapphire)
चाँदी · मध्यमा · शनिवार
जन्म नक्षत्र वाले दिन, कच्चे दूध में शुद्ध करके पहनें
⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris
गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।▾
🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग
BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।
बुध सोलह में से 8 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।
बुध8/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Tulaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Tulaघर, ज़मीन और भाग्य — Tulaसंतान — Tulaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Tulaकर्म और पहचान — Tulaमाता-पिता — Tulaवाहन और सुख — Meshaसाधना और भक्ति — Meshaशिक्षा और विद्या — Simhaबल और कमज़ोरी — Tulaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Meshaमाँ और पिता की विरासत — Meshaआचरण और चरित्र — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Tula
शुक्र6/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Simhaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Simhaघर, ज़मीन और भाग्य — Simhaसंतान — Simhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Simhaमाता-पिता — Simhaवाहन और सुख — Kanyaसाधना और भक्ति — Makaraशिक्षा और विद्या — Kanyaबल और कमज़ोरी — Mithunaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Meshaमाँ और पिता की विरासत — Karkaआचरण और चरित्र — Vrishchikaपिछले कर्मों का जोड़ — Dhanu
शनि6/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Karkaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Karkaघर, ज़मीन और भाग्य — Karkaसंतान — Kumbhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kanyaकर्म और पहचान — Vrishabhaमाता-पिता — Kanyaवाहन और सुख — Karkaसाधना और भक्ति — Simhaशिक्षा और विद्या — Dhanuबल और कमज़ोरी — Karkaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Karkaआचरण और चरित्र — Kumbhaपिछले कर्मों का जोड़ — Kanya
सूर्य5/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Kanyaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Kanyaघर, ज़मीन और भाग्य — Kanyaसंतान — Meshaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kumbhaकर्म और पहचान — Karkaमाता-पिता — Vrishchikaवाहन और सुख — Meenaसाधना और भक्ति — Dhanuशिक्षा और विद्या — Dhanuबल और कमज़ोरी — Dhanuकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kanyaमाँ और पिता की विरासत — Mithunaआचरण और चरित्र — Kanyaपिछले कर्मों का जोड़ — Kanya
गुरु4/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Meenaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Vrishchikaघर, ज़मीन और भाग्य — Dhanuसंतान — Meenaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Meenaकर्म और पहचान — Simhaमाता-पिता — Kumbhaवाहन और सुख — Meenaसाधना और भक्ति — Meenaशिक्षा और विद्या — Vrishabhaबल और कमज़ोरी — Kumbhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Dhanuआचरण और चरित्र — Karkaपिछले कर्मों का जोड़ — Dhanu
राहु4/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishchikaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Vrishchikaघर, ज़मीन और भाग्य — Vrishchikaसंतान — Vrishabhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Karkaकर्म और पहचान — Karkaमाता-पिता — Vrishchikaवाहन और सुख — Simhaसाधना और भक्ति — Dhanuशिक्षा और विद्या — Karkaबल और कमज़ोरी — Makaraकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishabhaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Kanyaपिछले कर्मों का जोड़ — Makara
केतु4/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishabhaधन — Karkaभाई-बहन और हिम्मत — Vrishabhaघर, ज़मीन और भाग्य — Vrishabhaसंतान — Vrishchikaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Makaraकर्म और पहचान — Makaraमाता-पिता — Vrishabhaवाहन और सुख — Simhaसाधना और भक्ति — Dhanuशिक्षा और विद्या — Karkaबल और कमज़ोरी — Karkaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishabhaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Kanyaपिछले कर्मों का जोड़ — Karka
मंगल2/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Vrishabhaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Makaraघर, ज़मीन और भाग्य — Kumbhaसंतान — Vrishabhaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Kanyaकर्म और पहचान — Tulaमाता-पिता — Meshaवाहन और सुख — Tulaसाधना और भक्ति — Mithunaशिक्षा और विद्या — Vrishabhaबल और कमज़ोरी — Simhaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Vrishchikaमाँ और पिता की विरासत — Vrishchikaआचरण और चरित्र — Makaraपिछले कर्मों का जोड़ — Dhanu
चंद्र1/15 वर्गों में वही राशि
शरीर और पूरा जीवन — Meshaधन — Simhaभाई-बहन और हिम्मत — Meshaघर, ज़मीन और भाग्य — Karkaसंतान — Mithunaजीवनसाथी और आंतरिक बल — Mithunaकर्म और पहचान — Mithunaमाता-पिता — Karkaवाहन और सुख — Simhaसाधना और भक्ति — Kanyaशिक्षा और विद्या — Meenaबल और कमज़ोरी — Vrishchikaकठिनाइयाँ और उनका स्रोत — Kumbhaमाँ और पिता की विरासत — Meenaआचरण और चरित्र — Vrishabhaपिछले कर्मों का जोड़ — Kanya
ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।
⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय
ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।
विंशोत्तरीराहु / शनि
फ़र॰ 2021 – फ़र॰ 2039
१२० साल का चक्र, जन्म नक्षत्र से
योगिनीSiddha (शुक्र)
जन॰ 2024 – जन॰ 2031
३६ साल का चक्र — BPHS अध्याय १९५-१९९
चरKumbha (शनि)
सित॰ 2022 – सित॰ 2029
राशि पर चलती है, ग्रह पर नहीं — जैमिनि
ये तीनों अलग ग्रंथों से आती हैं और अलग गणित से चलती हैं — इसीलिए अलग जवाब देना इनका दोष नहीं, इनका स्वभाव है। कोई एक पद्धति अकेली सच नहीं होती।
📅 आपका वर्ष — वर्षफल
हर साल सूर्य ठीक उस जगह लौटता है जहाँ वह आपके जन्म के समय था। उस क्षण से आपका नया वर्ष शुरू होता है — जन्मदिन से नहीं, उस खगोलीय लौटने से।
यह वर्ष शुरू हुआ: 23 सित॰ 2026, 18:31
अगला वर्ष शुरू होगा: 24 सित॰ 2027, 00:49
हिम्मत, भाई-बहन और मेहनत
मुन्था इस साल यहाँ है। शास्त्र कहता है साल का विषय इसी हिस्से के आस-पास घूमता है।
वर्ष के आरंभ का लग्न Meena था (Uttara Bhadrapada नक्षत्र, स्वामी Jupiter)।
यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।
🕉️ नवांश (D9) — वर्ग कुंडली
नवांश लग्न: Dhanu
Graha
D1
D9
House
Dignity
☉सूर्य
Kanya
Kumbha
3rd
Enemy Sign
☽चंद्र
Mesha
Mithuna
7th
Friendly Sign
♂मंगल
Vrishabha
Kanya
10th
Enemy Sign
☿बुध★
Tula
Tula
11th
Friendly Sign
♃गुरु★
Meena
Meena
4th
Own Sign
♀शुक्र
Simha
Mesha
5th
Neutral Sign
♄शनि
Karka
Kanya
10th
Friendly Sign
☊राहु
Vrishchika
Karka
8th
Neutral Sign
☋केतु
Vrishabha
Makara
2nd
Neutral Sign
★ वर्गोत्तम (D1 और D9 में एक ही राशि — विशेष बल): Mercury, Jupiter
D9 (Navamsa) — BPHS divisional chart used to judge the inner strength of each graha and matters of marriage and dharma.
💼 दशांश (D10) — कर्म कुंडली
दशांश लग्न: Mesha
दशांश का दशम भाव: Makara
Graha
D1
D10
House
Dignity
☉सूर्य
Kanya
Karka
4th
Friendly Sign
☽चंद्र
Mesha
Mithuna
3rd
Friendly Sign
♂मंगल
Vrishabha
Tula
7th
Neutral Sign
☿बुध★
Tula
Tula
7th
Friendly Sign
♃गुरु
Meena
Simha
5th
Friendly Sign
♀शुक्र★
Simha
Simha
5th
Enemy Sign
♄शनि
Karka
Vrishabha
2nd
Friendly Sign
☊राहु
Vrishchika
Karka
4th
Neutral Sign
☋केतु
Vrishabha
Makara
10th
Neutral Sign
★ D1 और D10 दोनों में एक ही राशि — कर्म में पुष्टि: Mercury, Venus
D10 (Dasamsa) — BPHS divisional chart read for profession, status and the working life. The rasi chart shows the promise; the Dasamsa shows whether it is confirmed in career.
📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर
🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): January 2027🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): October 2026
पूरे दौर में स्थिर: Saturn → 2nd
Mars (7th), Jupiter (7th), Rahu (1st), Ketu (7th) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — March 2027 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।
पिछले ३ महीने
🔴 July 2026Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)
Mars → 4th · Venus → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th
🔴 August 2026Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)
Rahu → 1st · Ketu → 7th
🔴 September 2026Saturn / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th
अभी
🔴 October 2026Saturn / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
Rahu → 1st · Ketu → 7th
अगले ६ महीने
🟡 November 2026Saturn / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
Mars → 7th · Jupiter → 7th · Rahu → 1st · Ketu → 7th
🟢 December 2026Saturn / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 10th · Mars → 7th · Mercury → 10th · Jupiter → 7th
🟢 January 2027Saturn / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
Mars → 7th · Jupiter → 7th · Venus → 10th
🟡 February 2027Saturn / Ketu (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 1st · Mars → 7th · Mercury → 1st
🟢 March 2027Saturn / Ketu (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 2nd · Mercury → 1st
🟢 April 2027Saturn / Venus (अंतर / प्रत्यंतर)
Mercury → 2nd · Venus → 1st
Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.
🔯 योग और भृगु संकेत
Duradhara YogaUbhayachari YogaVeena Yoga
Ye reading granth ki shartein laga kar bani hai — BPHS, Phaladipika, Jataka Parijata aur Muhurta Chintamani. Jahan granth chup hai, wahan hum bhi chup hain. Ye aasaar hain, faisla nahi. Faisla aapka hai.
रोहित से सीधी बात
इस रिपोर्ट पर 15 मिनट की पर्सनल रीडिंग — आपके सवाल, आपका चार्ट, सीधा जवाब।
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