बुध वक्री अक्टूबर 2026: कब से कब तक?
Trikaal Sandesh — Direct Answer
बुध ग्रह 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:43 बजे (IST) तुला राशि में वक्री होगा और 13 नवंबर को रात 9:24 बजे मार्गी होगा, यानी लगभग 20 दिन। फिर यह 2 दिसंबर को वृश्चिक में जाएगा। धनतेरस और दीवाली इसी अवधि में हैं, इसलिए कागज़, बिल और वारंटी एक बार दोबारा जाँचें।
Deep Dive Analysis
बुध वक्री अक्टूबर 2026 एक मिनट में
बुध ग्रह 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:43 बजे (IST) तुला राशि में वक्री होगा और 13 नवंबर 2026 को रात 9:24 बजे मार्गी होगा। यानी लगभग 20 दिन। इस अवधि में करवा चौथ, धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज सब आ जाते हैं। सीधी सलाह इतनी है कि कुछ भी खरीदने, साइन करने या यात्रा तय करने से पहले एक बार दोबारा जाँच लें, और बिल व वारंटी संभालकर रखें। असर कितना होगा, यह आपकी चंद्र राशि से बुध के भाव पर टिका है, इसलिए पहले निःशुल्क राशि कैलकुलेटर से अपनी राशि पक्की कर लें।
बुध वक्री की पूरी समय-सारणी
वक्री होने की घड़ी 24 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:43 बजे है। उस समय बुध तुला राशि में लगभग 26.75 अंश पर होगा। इसके बाद वह पीछे की ओर चलते हुए लगभग 10.8 अंश तक आएगा और 13 नवंबर की रात 9:24 बजे मार्गी हो जाएगा। मार्गी होने के बाद उसे फिर उसी 26.75 अंश तक लौटना है, इसलिए पूरी राहत 2 दिसंबर 2026 को शाम 5:28 बजे वृश्चिक में प्रवेश के साथ मानी जाती है। ये समय हमारे गोचर इंजन (Swiss Ephemeris, लाहिड़ी अयनांश) से निकले हैं। दैनिक स्थिति के लिए पंचांग भी देखें।
24 अक्टूबर 2026: तुला में वक्री की शुरुआत
तुला राशि बुध के लिए मित्र घर मानी जाती है, पर वक्री चाल में ग्रह की गति धीमी होकर रुकती है और फिर उलटी दिखने लगती है। 24 अक्टूबर को यही मोड़ आएगा। इन दिनों बातचीत में गलतफहमी, तारीख़ों में फेरबदल और पुराने अधूरे काम लौटकर आने की संभावना रहती है। इसकी सीमा यह है कि यह केवल मौसम जैसा संकेत है, आपकी पूरी कुंडली का फैसला नहीं। तैयारी सरल है: जो काम 24 तारीख़ से पहले निपट सकते हैं, निपटा लें और बाकी की सूची बना लें।
वक्री का सरल अर्थ
वक्री का मतलब यह नहीं कि ग्रह सचमुच उलटा चल रहा है। पृथ्वी की अपनी चाल के कारण हमें वह कुछ दिन पीछे जाता दिखता है, जैसे तेज़ चलती रेल से बगल की रेल पीछे खिसकती लगे। ज्योतिष में इस समय ग्रह की ऊर्जा भीतर की ओर मुड़ी मानी जाती है। बुध वाणी, बुद्धि, व्यापार और संवाद का कारक है, इसलिए इन्हीं क्षेत्रों में दोबारा जाँचने की आदत काम आती है। यह डरने की बात नहीं है, बस सावधानी का समय है। ग्रहों की भूमिका समझने के लिए ज्योतिष में ग्रह पन्ना पढ़ें।
13 नवंबर 2026: बुध मार्गी
13 नवंबर की रात 9:24 बजे बुध तुला में लगभग 10.8 अंश पर मार्गी होगा। यह दीवाली (8 नवंबर) और भाई दूज (11 नवंबर) के बाद आता है, यानी बड़े त्योहार वक्री काल में ही निपट जाएंगे। मार्गी का मतलब यह नहीं कि रातों-रात सब सुलझ जाए। ग्रह पहले रुकता है, फिर धीरे-धीरे गति पकड़ता है। इसलिए जो फैसले टाले जा सकते हैं, उन्हें 13 नवंबर के कुछ दिन बाद लेना अधिक आराम देता है, पर जरूरी काम रुकवाने की कोई शास्त्रीय शर्त हम नहीं बताते।
13 नवंबर के बाद 2 दिसंबर तक का धीमा सफर
मार्गी होने के बाद बुध को अपनी पुरानी जगह तक लौटना है, इसलिए 13 नवंबर से 2 दिसंबर तक की अवधि को अक्सर छाया-काल कहा जाता है। यह शब्द आधुनिक व्यवहार का है, किसी श्लोक का नहीं, इसलिए इसे नियम न मानें। व्यावहारिक रूप से इस दौरान वही काम करें जो वक्री काल में अधूरे रह गए थे: पुराने बिल मिलाना, रुकी हुई ईमेल का जवाब देना और टले हुए दस्तावेज़ पूरे करना। 2 दिसंबर की शाम 5:28 बजे बुध वृश्चिक में चला जाएगा और यह चक्र बंद हो जाएगा।
करवा चौथ से भाई दूज तक: त्योहार इसी खिड़की में
हमारे पंचांग डेटा के अनुसार करवा चौथ 29 अक्टूबर, धनतेरस 6 नवंबर, दीवाली 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर 2026 को हैं। ये सभी बुध वक्री काल में आते हैं। इसका अर्थ त्योहार रोकना नहीं है। इसका अर्थ इतना है कि खरीदारी में मोलभाव, गुणवत्ता की जाँच और बिल की सुरक्षा पर थोड़ा अधिक ध्यान दें। तिथियों का विस्तार करवा चौथ 2026, धनतेरस 2026 और दीवाली 2026 के पन्नों पर है, और ज्योतिषीय पक्ष दीवाली एस्ट्रोलॉजी 2026 में।
क्या इस अवधि में सोना, गैजेट और गाड़ी खरीद सकते हैं
हमने जिन श्लोकों को पढ़ा है, उनमें बुध वक्री के दौरान खरीदारी की कोई मनाही नहीं मिलती, इसलिए हम इसे वर्जित नहीं कहते। व्यावहारिक सुझाव यह है कि सोना खरीदते समय हॉलमार्क और बिल लें, गैजेट दुकान पर चलाकर देखें और वारंटी कार्ड संभालें, और गाड़ी में कागज़ात की जाँच दो बार करें। जिनके यहाँ परंपरा में कठोर नियम है, वे उसी का पालन करें। गाड़ी के शुभ समय के लिए वाहन खरीद मुहूर्त पन्ना उपयोगी रहेगा।
चंद्र राशि से बुध कैसे देखें
गोचर का फल जन्म लग्न से नहीं, चंद्र राशि से गिना जाता है। फलदीपिका के अनुसार सभी लग्न होने पर भी गोचर में चंद्र लग्न प्रधान है [1]। इसलिए पहले अपनी चंद्र राशि जानें, फिर गिनें कि तुला उससे कितनी दूर है। अगर राशि मालूम नहीं तो राशि कैलकुलेटर और जन्म कुंडली कैलकुलेटर से निकाल लें। भावों की बुनियाद समझनी हो तो ज्योतिष में भाव पढ़ें। याद रखें कि यह एक ग्रह का एक संकेत है, पूरी कुंडली का सार नहीं।
बुध के शुभ भाव: 2, 4, 6, 8, 10 और 11
फलदीपिका का श्लोक बुध के गोचर को चंद्र राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें और दसवें भाव में शुभ बताता है [2], और विस्तार वाला श्लोक ग्यारहवें भाव में पुष्टि भी बताता है [3]। उसी श्लोक के अनुसार दूसरे में श्री, चौथे में धन-प्राप्ति, छठे में विजय, आठवें में पुत्र और धन का लाभ तथा दसवें में पूर्ण सुख कहा गया है। इसकी सीमा यह है कि ये फल गोचर के सामान्य संकेत हैं और आपकी महादशा तथा जन्म के बुध की स्थिति इन्हें घटा-बढ़ा सकती है।
सावधानी वाले भाव और उनकी सीमा
उसी श्लोक में पहले भाव में वित्तक्षय, तीसरे में शत्रु का भय, पाँचवें में जीवनसाथी या संतान से कलह, सातवें में विरोध, नवें में विघ्न और बारहवें में पराभव का भय बताया गया है [3]। इसे पढ़कर घबराइए नहीं। यह एक ग्रह का गोचर है, जो लगभग 20 दिन वक्री रहेगा, और इन दिनों का उपाय सरल है: खर्च का हिसाब लिखकर रखें, बहस टालें और बड़े फैसले एक दिन सोचकर लें। निजी जाँच के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक चलाकर देखें कि आपकी कुंडली में बुध कैसा है।
हर राशि से बुध का भाव (तुला चरण)
जब तक बुध तुला में है, चंद्र राशि से उसका भाव यह रहेगा: मेष 7वाँ, वृषभ 6ठा, मिथुन 5वाँ, कर्क 4था, सिंह 3रा, कन्या 2रा, तुला 1ला, वृश्चिक 12वाँ, धनु 11वाँ, मकर 10वाँ, कुंभ 9वाँ और मीन 8वाँ। इनमें वृषभ, कर्क, कन्या, धनु, मकर और मीन को शुभ भाव मिलते हैं, जबकि मेष, मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक और कुंभ को थोड़ी सावधानी रखनी है।
जो नहीं बदलता: जन्म का बुध और दशा
गोचर केवल ऊपरी लहर है। आपकी जन्म कुंडली में बुध किस राशि और भाव में है और आपकी वर्तमान दशा किसकी चल रही है, यह इस लहर से कहीं अधिक गहरा असर रखता है। जिसकी बुध महादशा या अंतर्दशा चल रही है, उसे वक्री काल में बातचीत और हिसाब पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है, जबकि बुध के कमज़ोर या मज़बूत होने का निर्णय केवल चार्ट से होता है। अपनी दशा दशा कैलकुलेटर से देखें और बुध दशा का करियर पक्ष बुध महादशा करियर में पढ़ें।
बुध वक्री और अनुबंध, कागज़ी काम
अनुबंध, किराया-समझौता या ऋण-पत्र पर हस्ताक्षर से पहले हर शर्त दो बार पढ़ें, तारीख़ें लिखित में लें और अपनी प्रति सुरक्षित रखें। अगर सौदा 13 नवंबर के बाद तक बिना नुकसान के टल सकता है तो कुछ लोग तब तक रुकना पसंद करते हैं, पर कोई श्लोक इसे अनिवार्य नहीं बताता, इसलिए जरूरी काम न रोकें। जिन दस्तावेज़ों में गलती की गुंजाइश अधिक है, जैसे संपत्ति या कर के कागज़, उनकी जाँच किसी दूसरे भरोसेमंद व्यक्ति से भी करा लें।
बुध वक्री और यात्रा
यात्रा की टिकटें पहले से बुक करें और बदलाव की गुंजाइश वाली दरें चुनें। दीवाली के आसपास वैसे भी भीड़ रहती है, और वक्री बुध के कारण समय-सारणी में बदलाव की संभावना की बात की जाती है। इसकी सीमा यह है कि कोई शास्त्र वक्री बुध में यात्रा रोकने को नहीं कहता। व्यावहारिक रूप से टिकट, पहचान-पत्र और होटल की पुष्टि की प्रतियाँ फोन और कागज़ दोनों में रखें, और ट्रेन या उड़ान का समय निकलने से एक दिन पहले फिर देख लें।
बुध वक्री और फोन, लैपटॉप, डिवाइस
बुध का संबंध संवाद और तकनीक से माना जाता है, इसलिए इन दिनों डेटा का बैकअप, पासवर्ड की सुरक्षा और जरूरी फ़ाइलों की दूसरी प्रति पहले से बना लें। नया फोन या लैपटॉप खरीदना हो तो दुकान पर ही चलाकर जाँचें, बिल और वारंटी कार्ड संभालें और पैकिंग खोलने का वीडियो रख लें। कोई शास्त्रीय रोक नहीं है, इसलिए त्योहार की जरूरत में खरीदारी ठीक है। जिनका काम इंटरनेट पर निर्भर है, वे इन तीन हफ़्तों में पुराने सिस्टम को तुरंत बदलने के बजाय पहले नए का परीक्षण करें।
बुध वक्री और पैसों के फैसले
बुध व्यापार और हिसाब का कारक है, इसलिए निवेश, उधार या बड़ी खरीद से पहले आँकड़े दोबारा मिलाएँ। जिन भावों में बुध शुभ है, वहाँ भी जल्दबाज़ी में बड़ा जोखिम न लें, और जिन भावों में सावधानी है, वहाँ खर्च की सीमा पहले तय कर लें। यह निवेश की सलाह नहीं है, केवल सावधानी का सुझाव है। संपत्ति या शेयर जैसे बड़े फैसले के लिए अपनी कुंडली का धन पक्ष समझना बेहतर है, जिसके लिए धन योग का पन्ना देखें।
बुध वक्री और नौकरी, करियर
इन दिनों इंटरव्यू, प्रमोशन की बातचीत और प्रस्तुतियों में शब्दों की स्पष्टता सबसे बड़ी पूँजी है। लिखित सारांश भेजें, मीटिंग के बाद ईमेल से बातें दोहराएँ और वादों को लिखित रखें। दसवें भाव वाले यानी मकर राशि के लोगों को बुध का शुभ फल बताया गया है, फिर भी हर राशि के लिए असर कुंडली की दशा पर निर्भर रहता है। करियर की गहरी दिशा के लिए करियर भविष्यवाणी गाइड और सबसे अच्छा करियर पढ़ें।
बुध वक्री और पढ़ाई, परीक्षा
बुध बुद्धि और स्मरण का कारक है, इसलिए विद्यार्थियों के लिए सुझाव है कि नए विषय शुरू करने के बजाय पुराने को दोहराएँ। परीक्षा-फॉर्म भरते समय नाम, रोल नंबर और तारीख़ दो बार जाँचें, और फीस की रसीद सुरक्षित रखें। यह कोई शास्त्रीय निषेध नहीं है, केवल सावधानी है। फॉर्म भरने का शुभ समय जानने के लिए परीक्षा फॉर्म भरने का शुभ मुहूर्त देखें।
बुध वक्री और रिश्ते, बातचीत
वक्री बुध में सबसे आम परेशानी बातों का गलत समझा जाना है। इसलिए कठिन बातचीत फोन के बजाय आमने-सामने करें, गुस्से में संदेश न भेजें और त्योहार की भीड़ में पुरानी बातें न छेड़ें। पाँचवें और सातवें भाव वाले लोग, यानी मिथुन और मेष राशि, इन दिनों संयम का अभ्यास कर सकते हैं। यह सीमा याद रखें कि गोचर अस्थायी है और 13 नवंबर के बाद वातावरण बदलने लगता है। रिश्तों की गहरी जाँच के लिए जन्म कुंडली का मिलान अधिक भरोसेमंद है।
शादी और गृह प्रवेश इस अवधि में
सगाई, शादी या गृह प्रवेश का मुहूर्त पंचांग की तिथि, नक्षत्र, लग्न और भद्रा से तय होता है, केवल बुध की चाल से नहीं। हमने नवंबर 2026 की तिथियों का पन्ना अलग से तैयार किया है। उसमें देखें कि आपकी तारीख़ भद्रा से मुक्त है या नहीं, इसके लिए नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त पढ़ें। गृह प्रवेश के नियम गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त में हैं, और अपनी तारीख़ जाँचने के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाएँ।
बुध वक्री और सेहत की दिनचर्या
बुध का संबंध तंत्रिका तंत्र और पाचन-दिनचर्या से जोड़ा जाता है, पर यह कोई चिकित्सा सलाह नहीं है। त्योहारों में भारी भोजन, देर रात तक जागना और यात्रा की थकान बढ़ती है, इसलिए नींद और पानी का नियम बनाए रखें। कोई तकलीफ हो तो चिकित्सक से मिलें, ज्योतिष उसका विकल्प नहीं है। ज्योतिषीय दृष्टि से इतना कहा जा सकता है कि इन दिनों दिनचर्या में सरलता रखने से मन शांत रहता है। इन तीन हफ़्तों में सुबह की सैर, समय पर भोजन और रात की नींद को प्राथमिकता देना सबसे आसान और सबसे भरोसेमंद नियम है।
बुध के सरल उपाय पाँच पंक्तियों में
उपाय एक, हरी मूंग का दान। क्या: मुट्ठी भर साबुत हरी मूंग किसी जरूरतमंद को दें। कब: बुधवार की सुबह। कितना खर्च: 100 रुपये से कम। कितने दिन: सात बुधवार। आपके लिए क्यों: बुध का रंग हरा माना गया है और सरल दान सावधानी वाले महीने का सबसे हल्का उपाय है। उपाय दो, मंत्र। क्या: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः का 11 बार जाप। कब: बुधवार को स्नान के बाद। कितना खर्च: कुछ नहीं। कितने दिन: ग्यारह बुधवार। आपके लिए क्यों: कुछ मिनट की शांत दिनचर्या बनती है। अपनी कुंडली के अनुसार चुनाव के लिए उपाय कैलकुलेटर चलाएँ।
बुध वक्री के आम भ्रम
पहला भ्रम है कि वक्री बुध में सब कुछ बिगड़ जाता है। सच यह है कि कई भाव शुभ फल वाले हैं। दूसरा भ्रम है कि इस समय कुछ खरीदना या साइन करना वर्जित है, जबकि हमारे पढ़े श्लोकों में ऐसी कोई मनाही नहीं मिलती। तीसरा भ्रम है कि पन्ना रत्न तुरंत पहनना चाहिए। रत्न केवल कुंडली देखकर तय होता है, इसलिए पहले क्या मुझे पन्ना पहनना चाहिए जाँचें और पन्ना किसे पहनना चाहिए पढ़ें। चौथा भ्रम है कि वक्री बुध का असर सभी पर एक जैसा पड़ता है। असल में बारह राशियों के लिए भाव अलग हैं, दशा अलग है और जन्म का बुध अलग है, इसलिए एक ही खबर दो लोगों पर दो तरह से बैठ सकती है। पाँचवाँ भ्रम है कि उपाय न करने से नुकसान तय है। ऐसा कोई श्लोकीय नियम हमें नहीं मिला, इसलिए उपाय को मन की शांति और अनुशासन का साधन समझें, डर का नहीं।
बुध वक्री और नक्षत्र: विशाखा से स्वाति तक
वक्री शुरू होते समय बुध तुला के लगभग 26.75 अंश पर होगा, जो विशाखा नक्षत्र का हिस्सा है। पीछे चलते हुए वह लगभग 10.8 अंश पर मार्गी होगा, जो स्वाति नक्षत्र में आता है। यानी पूरी वक्री यात्रा विशाखा से स्वाति की ओर होगी। जिनका जन्म नक्षत्र इन दोनों में से है, वे अपनी कुंडली के साथ इसे मिलाकर देख सकते हैं, पर इसका कोई निश्चित फल हम घोषित नहीं करते। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर उपयोगी है।
2027 की अगली बुध वक्री अवधियाँ
हमारे गोचर इंजन के अनुसार 2027 की अगली अवधियाँ ये हैं: 9 फरवरी 2027 को रात 11:06 बजे वक्री होकर 3 मार्च को शाम 6:03 बजे मार्गी, फिर 10 जून को रात 11:45 बजे से 5 जुलाई को रात 1:11 बजे तक, और उसके बाद 7 अक्टूबर 2027 को रात 8:07 बजे से। सभी समय IST में हैं। पूरे साल की झलक के लिए 2027 के वक्री ग्रह और गुरु की चाल के लिए गुरु गोचर 2027 पढ़ें।
जून 2026 के पन्नों से यह पन्ना कैसे अलग है
जून-जुलाई 2026 की बुध वक्री अवधि पर हमारे पन्ने पहले से हैं, जिनमें जून 2026 बुध वक्री और बुध वक्री 2026: सभी राशि उपाय शामिल हैं। यह पन्ना दूसरी अवधि के बारे में है, यानी 24 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026, जो दीवाली से जुड़ी है। अंग्रेज़ी में यही जानकारी Mercury Retrograde October 2026 और सामान्य समझ के लिए Mercury Retrograde 2026 पर है। मंगल की बदलती चाल भी देखनी हो तो मंगल गोचर 2026-27 पढ़ें।
ये तारीख़ें हम कैसे निकालते हैं
हमारे गोचर इंजन में Swiss Ephemeris का उपयोग होता है और अयनांश लाहिड़ी है। वक्री और मार्गी की घड़ी वह क्षण है जब ग्रह की गति शून्य से बदलती है, और राशि-प्रवेश वह क्षण जब ग्रह का भोगांश राशि की सीमा पार करता है। सारे समय भारतीय मानक समय में दिए हैं। अलग पंचांग-पद्धतियों में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अनुष्ठान जैसे सटीक काम के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलाएँ। सभी तारीख़ें गणित से निकली हैं, अनुमान से नहीं।
योजना बनाने से पहले अपनी कुंडली जाँचें
गोचर पढ़ने का सबसे सही क्रम यह है: पहले चंद्र राशि, फिर बुध का भाव, फिर चल रही दशा और अंत में जन्म का बुध। चारों में से किसी एक से तस्वीर पूरी नहीं होती। अपनी कुंडली बनाने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर और ग्रहों की ताकत के लिए ग्रह बल कैलकुलेटर चलाएँ। कुंडली पढ़ना सीखना चाहें तो कुंडली कैसे देखें और दशा गणना के लिए विंशोत्तरी दशा पढ़ें।
अपने बुध पर निजी मार्गदर्शन बुक करें
यह पन्ना सामान्य है, जबकि आपकी कुंडली में बुध का हाल, दशा और भाव अलग होगा। अगर आप दीवाली से पहले कोई बड़ा फैसला ले रहे हैं, जैसे सौदा, यात्रा या निवेश, तो हमारे मार्गदर्शक रोहित गुप्ता आपकी कुंडली देखकर स्पष्ट बता सकते हैं कि किस दिन क्या करना ठीक रहेगा। स्लॉट की उपलब्धता सेवाएँ पन्ने पर देखें। विकल्प देखने के लिए हमारी सेवाएँ पन्ना खोलें, या पहले निःशुल्क राशि कैलकुलेटर से शुरुआत करें।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- बुध
- वाणी, बुद्धि, व्यापार और संवाद का कारक ग्रह।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह की पीछे जाती प्रतीत होने वाली चाल।
- मार्गी
- वक्री काल के बाद ग्रह की सामान्य आगे की चाल।
- गोचर
- ग्रह की वर्तमान राशि-यात्रा, जिसका फल चंद्र राशि से देखा जाता है।
- चंद्र लग्न
- चंद्र राशि को पहला भाव मानकर बनाई गई कुंडली, गोचर का मुख्य आधार।
- विशाखा
- 16वाँ नक्षत्र, तुला के 20 अंश से वृश्चिक के 3 अंश 20 कला तक फैला।
- स्वाति
- 15वाँ नक्षत्र, तुला के लगभग 6 अंश 40 कला से 20 अंश तक।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु । तस्मात्तदृक्षादपि वर्तमानग्रहेन्द्रचारैः कथयेत्फलानि ॥१॥
— फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 1 · sastri-1950फलदीपिका 26.1 के अनुसार सभी लग्नों के रहते भी गोचर में चंद्र लग्न प्रधान है, और फल चंद्र राशि से ग्रहों की चाल देखकर कहे जाते हैं।
Phaladeepika 26.1 says that among all lagnas, the Moon sign (chandra lagna) is the primary reference for transits, and results should be told from the planets transiting from it.
सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः जीवस्त्वस्ततपोद्विपञ्चमगतो वक्रार्कजौ षट्त्रिगौ । सौम्यः षट्स्वचतुर्दशाष्टमगतः सर्वेऽप्युपान्त्यस्थिताः शुक्रः खास्तरिपून्विहाय शुभदस्तिग्मांशुवद्भोगिनौ ॥२॥
— फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 2 · sastri-1950फलदीपिका 26.2 में चंद्र राशि से वे भाव गिनाए गए हैं जिनमें ग्रह का गोचर शुभ है, और मंगल तथा शनि के लिए इनमें छठा और तीसरा भाव शामिल हैं।
Phaladeepika 26.2 lists the houses from the Moon in which each graha transit is favourable, and for Mars and Saturn these include the 6th and 3rd.
वित्तक्षयं श्रियमरातिभयं धनाप्तिं भार्यातनूजकलहं विजयं विरोधम् । पुत्रार्थलाभमथ विघ्नमशेषसौख्यं पुष्टिं पराभवभयं प्रकरोति चान्द्रिः ॥१७॥
— फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 17 · sastri-1950फलदीपिका 26.17 में बुध गोचर के भाव-वार फल हैं: पहले में वित्तक्षय, दूसरे में श्री, तीसरे में शत्रु-भय, चौथे में धन-प्राप्ति, पाँचवें में पत्नी-संतान से कलह, छठे में विजय, सातवें में विरोध, आठवें में पुत्र-धन लाभ, नवें में विघ्न, दसवें में पूर्ण सुख, ग्यारहवें में पुष्टि और बारहवें में पराभव-भय।
Phaladeepika 26.17 gives Mercury transit results by house: loss of wealth in the 1st, prosperity in the 2nd, fear of rivals in the 3rd, gain of wealth in the 4th, quarrels with spouse and children in the 5th, victory in the 6th, opposition in the 7th, gain of children and wealth in the 8th, obstacles in the 9th, complete happiness in the 10th, nourishment in the 11th and fear of defeat in the 12th.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
अक्टूबर 2026 में बुध वक्री कब है?
बुध 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:43 बजे (IST) तुला में वक्री होगा और 13 नवंबर 2026 को रात 9:24 बजे मार्गी होगा, यानी लगभग 20 दिन।
क्या बुध वक्री दीवाली 2026 से टकराता है?
हाँ। करवा चौथ 29 अक्टूबर, धनतेरस 6 नवंबर, दीवाली 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर सब वक्री अवधि के भीतर हैं।
क्या बुध वक्री में धनतेरस पर सोना खरीद सकते हैं?
हमारे पढ़े श्लोक खरीदारी की मनाही नहीं बताते। हॉलमार्क देखें, बिल लें और भाव की तुलना करें। जिनकी परंपरा में कठोर नियम है, वे उसका पालन करें।
क्या इस समय गैजेट खरीदना टाल दें?
कोई शास्त्रीय रोक हम नहीं बता सकते। दुकान पर डिवाइस चलाकर देखें, बिल व वारंटी रखें और यदि जल्दी नहीं है तो 13 नवंबर के बाद भी खरीद सकते हैं।
बुध वृश्चिक में कब जाएगा?
बुध 2 दिसंबर 2026 को शाम 5:28 बजे (IST) वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा।
अपनी राशि से बुध का भाव कैसे पता करें?
अपनी चंद्र राशि से तुला तक गिनें। मेष 7वाँ, वृषभ 6ठा, मिथुन 5वाँ, कर्क 4था, सिंह 3रा, कन्या 2रा, तुला 1ला, वृश्चिक 12वाँ, धनु 11वाँ, मकर 10वाँ, कुंभ 9वाँ और मीन 8वाँ।
बुध के शुभ भाव कौन से हैं?
फलदीपिका के अनुसार चंद्र राशि से 2, 4, 6, 8 और 10 शुभ हैं, और विस्तार वाले श्लोक में 11वें भाव में पुष्टि का फल भी कहा गया है।
क्या बुध वक्री में अनुबंध पर हस्ताक्षर सुरक्षित हैं?
सावधानी के साथ हाँ। शर्तें दो बार पढ़ें, तारीख़ें लिखित में लें और प्रतियाँ रखें। यदि सौदा 13 नवंबर के बाद बिना नुकसान टल सकता है, तो कुछ लोग तब तक रुकते हैं।
बुध वक्री का सबसे सरल उपाय क्या है?
बुधवार को मुट्ठी भर साबुत हरी मूंग का दान और बुध बीज मंत्र का 11 बार जाप। दोनों में खर्च लगभग नहीं है और रत्न की जरूरत नहीं।
इसके बाद बुध वक्री कब होगा?
अगली अवधियाँ 9 फरवरी से 3 मार्च 2027, 10 जून से 5 जुलाई 2027 और 7 अक्टूबर 2027 से हैं।
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