Planetary Transit

गुरु गोचर 2027: सभी तारीख़ें, 12 राशियाँ

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

2027 में गुरु तीन बार राशि बदलता है: 25 जनवरी को वक्री होकर सिंह से कर्क (उच्च राशि) में लौटता है, 26 जून को कर्क से सिंह में जाता है और 26 नवंबर को कन्या में प्रवेश करता है। बीच में 13 अप्रैल 2027 को कर्क में मार्गी होता है। सभी समय भारतीय समय में हैं।

Deep Dive Analysis

गुरु गोचर 2027 एक नज़र में

गुरु 2027 में तीन बार राशि बदलता है। 25 जनवरी को वह वक्री अवस्था में सिंह से कर्क में लौटता है, 13 अप्रैल को कर्क में मार्गी होता है, 26 जून को कर्क से सिंह में जाता है और 26 नवंबर को कन्या में प्रवेश करता है। कर्क गुरु की उच्च राशि है, इसलिए जनवरी से जून का चरण सबसे खास माना जाता है। गुरु का असर आपकी चंद्र राशि से देखा जाता है, इसलिए पहले अपनी राशि जानें। मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से यह एक मिनट में पता चल जाती है।

2027 की पूरी समयरेखा: तारीख़ और समय

31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे गुरु कर्क से सिंह में जाएगा। 13 दिसंबर 2026 को सुबह 6:01 बजे वह सिंह में वक्री होगा। 25 जनवरी 2027 को रात 1:32 बजे वह वक्री गति में सिंह से कर्क में लौटेगा। 13 अप्रैल 2027 को सुबह 8:13 बजे कर्क में मार्गी होगा। 26 जून 2027 को सुबह 5:19 बजे वह कर्क से सिंह में जाएगा। 26 नवंबर 2027 को कन्या में प्रवेश होगा। सभी समय दिल्ली के भारतीय समय में हैं। शनि की तारीख़ें शनि गोचर 2027 गाइड में देखें।

25 जनवरी 2027: गुरु की कर्क में वापसी

25 जनवरी 2027 को रात 1:32 बजे गुरु सिंह से पीछे हटकर कर्क में लौटता है। यह वक्री गति का परिणाम है, क्योंकि गुरु 13 दिसंबर 2026 से ही उलटी चाल में है। वह अपनी उच्च राशि कर्क में 13 अप्रैल तक वक्री रहेगा। जिन राशियों के लिए कर्क शुभ भाव में पड़ता है, उन्हें इस चरण में गुरु का सहयोग मिलने की संभावना बढ़ती है। फिर भी परिणाम आपकी कुंडली और दशा पर भी निर्भर करते हैं। पिछले चरण की समझ के लिए गुरु गोचर 2026 का पेज देखें।

वक्री गुरु का मतलब क्या है

वक्री का अर्थ है कि पृथ्वी से देखने पर ग्रह उलटी दिशा में चलता दिखता है। यह एक खगोलीय दृश्य है और इसका मतलब यह नहीं कि गुरु अपनी राशि का फल छोड़ देता है। परंपरा में वक्री गुरु को अक्सर पुराने विषयों की दोबारा जाँच का समय माना जाता है, जैसे रुका हुआ शिक्षा, संतान या धन का निर्णय। इसलिए जनवरी से अप्रैल को जल्दबाज़ी की जगह पुनर्विचार का समय मानें। अपने ज्योतिषी से यह भी पूछें कि आपकी कुंडली में गुरु किस भाव का स्वामी है, क्योंकि भाव-स्वामित्व से वक्री गुरु का अर्थ बदल सकता है। कुंडली कैसे देखें गाइड से अपने चार्ट में गुरु की स्थिति पहले देख लें।

13 अप्रैल 2027: कर्क में मार्गी

13 अप्रैल 2027 को सुबह 8:13 बजे गुरु कर्क में मार्गी होता है, यानी सीधी चाल शुरू करता है। उस समय वह कर्क में लगभग 22 अंश 45 कला पर होता है। मार्गी होने के बाद लगभग ढाई महीने वह कर्क में आगे बढ़ता है और 26 जून को सिंह में चला जाता है। जो निर्णय वक्री काल में रुके थे, उन पर आगे बढ़ने के लिए यह खिड़की अक्सर उपयोगी मानी जाती है। शुभ कार्य की तारीख़ें मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से अपने शहर के लिए देखें।

26 जून 2027: सिंह में दोबारा प्रवेश

26 जून 2027 को सुबह 5:19 बजे गुरु कर्क से सिंह में प्रवेश करता है, और इस बार मार्गी गति में। वह 26 नवंबर 2027 तक सिंह में रहेगा। सिंह सूर्य की राशि है और सूर्य गुरु का मित्र है। इस चरण में हर राशि से गुरु का भाव एक स्थान आगे खिसक जाता है, जिसकी तालिका नीचे दी गई है। पूरे साल की राशि-वार समझ के लिए वार्षिक राशिफल 2027 पढ़ें।

26 नवंबर 2027: कन्या की ओर

26 नवंबर 2027 को गुरु सिंह से कन्या में प्रवेश करता है। यह 2027 का आख़िरी बड़ा बदलाव है और अगला वक्री चरण जनवरी 2028 में शुरू होगा। इसलिए कन्या का पूरा असर 2028 के गोचर में दिखेगा। साल के अंत में कन्या में जाने से पहले अपनी चंद्र राशि से गुरु का नया भाव ज़रूर देख लें। मुफ़्त जन्म कुंडली में आपकी चंद्र राशि भी दिखती है।

उच्च राशि कर्क में गुरु क्यों खास है

पराशरी परंपरा में गुरु कर्क राशि में उच्च माना जाता है, जहाँ वह अपने सबसे सहज रूप में रहता है। गोचर में उच्च राशि का गुरु ज्ञान, परिवार, संतान और धन जैसे कारक विषयों को सहारा देने वाला माना जाता है। फिर भी गोचर का फल हमेशा चंद्र राशि से भाव देखकर कहा जाता है, केवल उच्च राशि के आधार पर नहीं। इसी कारण कर्क और सिंह के बीच यह आवाजाही महत्त्वपूर्ण है। ग्रहों की भूमिका समझने के लिए ग्रहों की गाइड देखें।

चंद्र राशि से गोचर कैसे पढ़ें

फलदीपिका के गोचर अध्याय में पहली बात यही है कि सभी लग्नों के रहते भी गोचर के लिए चंद्र लग्न प्रधान है [1]। यानी देखा जाता है कि ग्रह आपकी चंद्र राशि से किस भाव में चल रहा है। इसलिए जन्म के समय की चंद्र राशि लें, नाम से बनी राशि केवल एक अनुमान है। अगर जन्म समय नहीं मालूम तो नाम से राशि शुरुआती अंदाज़ा देती है, पर पक्का नतीजा मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से लें।

गुरु के शुभ भाव: 2, 5, 7, 9 और 11

फलदीपिका के अनुसार गुरु चंद्र राशि से दूसरे, पाँचवें, सातवें और नौवें भाव में शुभ फल देता है [2]। पाँचवें भाव में संतान, सज्जनों का साथ और राजकृपा, तथा सातवें भाव में जीवनसाथी का सुख बताया गया है [3]। नौवें भाव में सर्वसौभाग्य और ग्यारहवें भाव में लाभ और मान कहा गया है [4]। ये सामान्य सूत्र हैं और आपकी दशा तथा कुंडली के बल से बदलते हैं। अपनी दशा मुफ़्त दशा कैलकुलेटर में जाँचें।

गुरु के कम अनुकूल भाव और उनकी सीमा

फलदीपिका गुरु के गोचर को पहले, तीसरे और चौथे भाव में कम अनुकूल बताती है [5]। पहले भाव में धन और स्थान में उतार-चढ़ाव, तीसरे में काम में रुकावट और चौथे में मन में उदासी के संकेत हैं। छठे और आठवें भाव के संकेत [3] तथा दसवें और बारहवें भाव के संकेत [4] भी इसी तरह सामान्य रूप में कहे गए हैं। हर संकेत की एक सीमा है, क्योंकि कुंडली में गुरु मज़बूत हो या दशा साथ दे तो असर काफ़ी हल्का रहता है। इसलिए डरें नहीं, योजना बनाएँ। सरल उपाय आगे दिए हैं।

कर्क चरण (25 जनवरी से 26 जून 2027): हर राशि के लिए भाव

कर्क में गुरु चंद्र राशि से इस प्रकार पड़ता है: मेष चौथा, वृषभ तीसरा, मिथुन दूसरा, कर्क पहला, सिंह बारहवाँ, कन्या ग्यारहवाँ, तुला दसवाँ, वृश्चिक नौवाँ, धनु आठवाँ, मकर सातवाँ, कुंभ छठा और मीन पाँचवाँ। इस चरण में शुभ भाव में मिथुन, मीन, मकर, वृश्चिक और कन्या आते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बाकी राशियों के लिए यह चरण खराब है। तीसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और बारहवें भाव वाले जातक सामान्य सावधानी, नियमित दिनचर्या और बड़े आर्थिक निर्णयों में दोबारा जाँच के साथ इस चरण को आराम से पार कर सकते हैं। यह तालिका केवल चंद्र राशि पर आधारित है, इसलिए लग्न, दशा और अष्टकवर्ग का अलग असर भी पढ़ा जाता है।

सिंह चरण (26 जून से 26 नवंबर 2027): हर राशि के लिए भाव

सिंह में गुरु चंद्र राशि से इस प्रकार पड़ता है: मेष पाँचवाँ, वृषभ चौथा, मिथुन तीसरा, कर्क दूसरा, सिंह पहला, कन्या बारहवाँ, तुला ग्यारहवाँ, वृश्चिक दसवाँ, धनु नौवाँ, मकर आठवाँ, कुंभ सातवाँ और मीन छठा। इस चरण में शुभ भाव में कर्क, मेष, कुंभ, धनु और तुला आते हैं। यही तालिका 1 से 25 जनवरी 2027 तक भी लागू रहेगी, क्योंकि गुरु तब तक सिंह में ही है। इस चरण में गुरु मार्गी है, इसलिए पिछले चरण की अनिश्चितता कम महसूस हो सकती है और रुके हुए काम आगे बढ़ाने की खिड़की मिलती है। फिर भी यह सामान्य संकेत है और हर कुंडली में अलग दिखता है। यदि आपका जन्म दो राशियों की सीमा के आसपास का है तो पहले अपनी चंद्र राशि पक्की करें। अपनी राशि का पूरा साल वार्षिक भविष्यवाणी 2027 में पढ़ें।

कन्या चरण (26 नवंबर 2027 से): हर राशि के लिए भाव

कन्या में गुरु चंद्र राशि से इस प्रकार पड़ता है: मेष छठा, वृषभ पाँचवाँ, मिथुन चौथा, कर्क तीसरा, सिंह दूसरा, कन्या पहला, तुला बारहवाँ, वृश्चिक ग्यारहवाँ, धनु दसवाँ, मकर नौवाँ, कुंभ आठवाँ और मीन सातवाँ। इस चरण में शुभ भाव में वृषभ, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन आते हैं। साल के अंत में वृषभ और सिंह के लिए राहत का संकेत इसी बदलाव से आता है, पर इसका पूरा असर 2028 में दिखेगा।

शनि और गुरु साथ-साथ: 2027 की जुगलबंदी

3 जून 2027 को सुबह 5:28 बजे शनि मीन से मेष में जाता है, यानी तब तक गुरु कर्क में और शनि मीन में रहते हैं। कर्क और मीन एक-दूसरे से नौवें और पाँचवें, यानी त्रिकोण पर हैं। 3 जून के बाद शनि मेष में होता है और कर्क से चौथे-दसवें की केंद्र स्थिति बनती है। दोनों ग्रहों की यह बदलती दूरी आपकी चंद्र राशि के अनुसार अलग असर देती है। शनि की तारीख़ें और वक्री-मार्गी का समय शनि गोचर 2027 की तिथि और समय पेज पर हैं।

साढ़ेसाती और ढैया के साथ गुरु को कैसे पढ़ें

गुरु का शुभ भाव साढ़ेसाती या ढैया की कठिन अवधि में सहारे के रूप में देखा जाता है, पर यह साढ़ेसाती को रद्द नहीं करता। पहले अपनी स्थिति जाँचें। मुफ़्त साढ़ेसाती कैलकुलेटर बताता है कि चरण चल रहा है या नहीं, और शनि की ढैया किस राशि पर है पेज ढैया की राशियाँ बताता है। लक्षण और सरल उपाय साढ़ेसाती के लक्षण और उपाय में हैं। साढ़ेसाती हमेशा बुरी नहीं होती, यह क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है में समझाया गया है।

विवाह और संतान पर गुरु गोचर

गुरु संतान और दाम्पत्य का मुख्य कारक माना जाता है, और फलदीपिका पाँचवें और सातवें भाव के गुरु को संतान और जीवनसाथी के सुख से जोड़ती है [3]। कर्क चरण में मीन और मकर राशि के लिए ये दोनों भाव बनते हैं। सिंह चरण में मेष और कुंभ राशि के लिए। फिर भी विवाह का समय दशा और सप्तम भाव से भी तय होता है। शादी कब होगी गाइड और मुफ़्त शादी कब होगी कैलकुलेटर देखें। जनवरी की तारीख़ें जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त में हैं, और संतान के लिए पुत्रदा एकादशी कब है पढ़ें।

संतान योग और गुरु की स्थिति

संतान के प्रश्न में गोचर का गुरु केवल एक परत है। असली आधार जन्म कुंडली का पाँचवाँ भाव, उसका स्वामी, गुरु का बल और चल रही दशा है। मुफ़्त संतान योग कैलकुलेटर इन्हें एक साथ जाँचता है। गुरु के पुत्रकारक होने की शास्त्रीय व्याख्या गुरु पुत्रकारक और संतान भाग्य में है, और देरी के सामान्य कारण संतान प्राप्ति में देरी में समझाए गए हैं।

करियर और धन पर गुरु का असर

गुरु का गोचर दसवें, दूसरे और ग्यारहवें भाव से करियर और धन की चर्चा में आता है। फलदीपिका ग्यारहवें भाव के गुरु में लाभ और मान कहती है [4], और दसवें भाव में धन, स्थान और संतान से जुड़ी चिंता का संकेत देती है [4]। इसलिए कर्क चरण में कन्या और तुला की स्थिति अलग-अलग पढ़ी जाती है। करियर की पूरी तस्वीर के लिए करियर की भविष्यवाणी कुंडली से और करियर के लिए सर्वश्रेष्ठ जन्म कुंडली पढ़ें। धन योग धन योग कैसे जाँचें में दिए हैं।

शिक्षा और ज्ञान के लिए गुरु गोचर

गुरु शिक्षा, गुरु-शिष्य संबंध और ज्ञान का कारक है। विद्यारंभ या परीक्षा-फ़ॉर्म जैसे कार्यों के लिए गोचर का गुरु अकेला निर्णायक नहीं होता, तिथि और नक्षत्र का मुहूर्त भी देखा जाता है। इसके लिए विद्यारंभ का शुभ मुहूर्त और परीक्षा फ़ॉर्म भरने का शुभ मुहूर्त पढ़ें। परीक्षा और सरकारी नौकरी के योग परीक्षा और सरकारी नौकरी के योग में समझाए गए हैं। वक्री काल में दोहराव और अभ्यास पर ज़ोर दें।

स्वास्थ्य और मन के लिए गुरु

गुरु शरीर में वसा, लिवर और पाचन जैसे विषयों का कारक माना जाता है, पर यह परंपरागत संकेत है, चिकित्सा सलाह नहीं। गोचर में गुरु के कठिन भाव में होने पर नियमित दिनचर्या और संतुलित भोजन पर ध्यान देना पर्याप्त सावधानी है। स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर की सलाह सर्वोपरि है। ज्योतिषीय संकेत समझने के लिए मुफ़्त स्वास्थ्य भविष्यवाणी कैलकुलेटर एक शुरुआती जाँच देता है। मन की स्थिरता के लिए सुबह की सरल दिनचर्या अपनाएँ।

गुरु के सरल उपाय: पाँच पंक्तियों में

उपाय एक, पीली दाल का दान। क्या: गुरुवार को एक मुट्ठी चना दाल और हल्दी किसी ज़रूरतमंद को दें। कब: गुरुवार सुबह। कितना खर्च: सौ रुपये से कम। कितने दिन: लगातार सात गुरुवार। आपके लिए क्यों: गुरु का दान सरलता और उदारता से जुड़ा है, और यह कठिन भाव में गुरु के लिए सबसे आसान कदम है। उपाय दो, मंत्र। क्या: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः का 11 बार जप। कब: गुरुवार सुबह स्नान के बाद। कितना खर्च: शून्य। कितने दिन: ग्यारह गुरुवार। आपके लिए क्यों: यह कम समय में दिनचर्या बनाता है। अपने लिए सही उपाय मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर से चुनें।

क्या वक्री गुरु में शुभ कार्य टाल देने चाहिए

वक्री और अस्त दो अलग बातें हैं। वक्री का मतलब है उलटी चाल, जबकि अस्त का मतलब है सूर्य के बहुत पास आकर गुरु का दिखना बंद होना। विवाह जैसे मुहूर्त में परंपरा अस्त गुरु और अस्त शुक्र पर अलग से विचार करती है। अस्त की तारीख़ें हमने यहाँ नहीं दी हैं, इसलिए शुभ कार्य के लिए अपने शहर की तारीख़ मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से जाँचें। जनवरी-फरवरी 2027 के विवाह मुहूर्त जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त पर हैं।

गुरु गोचर बनाम गुरु महादशा

गोचर और दशा दो अलग घड़ियाँ हैं। गोचर आकाश में गुरु की वर्तमान चाल है और दशा आपकी जन्म कुंडली से चलने वाला ग्रह-काल है। अगर आपकी गुरु की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो गोचर का गुरु उसे और बल या बाधा देता है। इसे दोहरी पुष्टि का नियम कहा जाता है, यानी दशा और गोचर दोनों एक ही संकेत दें तभी भरोसा बढ़ता है। दशा की गणना विंशोत्तरी दशा कैसे निकालें में है, और गुरु महादशा का सार गुरु महादशा में।

आम भ्रम: मिथक बनाम शास्त्रीय बात

पहला भ्रम है कि वक्री गुरु हमेशा बुरा होता है, जबकि वक्री केवल चाल की दिशा है। दूसरा भ्रम है कि सबको एक जैसा फल मिलता है, जबकि फल आपकी चंद्र राशि और कुंडली पर निर्भर है। तीसरा भ्रम है कि उपाय में महँगा रत्न ज़रूरी है, जबकि सरल दान और जप पर्याप्त हैं। रत्न पहनने से पहले मुफ़्त पुखराज जाँच जैसी निःशुल्क जाँच से देखें कि वह आपके लिए उचित है या नहीं।

गुरु गोचर 2027 बनाम 2026: क्या बदला

2026 में गुरु 2 जून को कर्क में उच्च हुआ और 31 अक्टूबर तक वहीं मार्गी रहेगा। 2027 में तस्वीर बदलती है: पहले सिंह में वक्री, फिर 25 जनवरी को कर्क में वक्री वापसी, फिर 13 अप्रैल को मार्गी, 26 जून को सिंह और 26 नवंबर को कन्या। यानी 2026 की तुलना में 2027 में गुरु की चाल ज़्यादा बार बदलती है। 2026 के विस्तृत पेज गुरु गोचर 2026 सभी 12 राशि और भाग्यशाली पाँच राशि में हैं।

Trikaal Vaani यह गणना कैसे करता है

हमारा गोचर इंजन स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिरी अयनांश से ग्रहों की स्थिति निकालता है, और राहु के लिए मध्यम राहु का उपयोग करता है। तारीख़ें और समय दिल्ली के भारतीय समय में दिए जाते हैं। किसी और शहर में कुछ मिनटों का अंतर संभव है, पर राशि बदलने का दिन आमतौर पर वही रहता है। अपने ग्रहों का बल देखने के लिए मुफ़्त ग्रह बल कैलकुलेटर और आज का पंचांग उपयोग करें।

अपनी कुंडली में गुरु का बल कैसे जाँचें

गोचर से पहले जन्म कुंडली में गुरु का बल देखें, क्योंकि मज़बूत गुरु गोचर के कठिन भाव को भी हल्का कर देता है। मुफ़्त ग्रह बल कैलकुलेटर हर ग्रह का बल बताता है, कमज़ोर ग्रह खोजक कमज़ोर ग्रह पहचानता है और कुंडली बल कैलकुलेटर पूरी कुंडली का सार देता है। भाव और ग्रहों की भूमिका समझने के लिए भावों की गाइड पढ़ें।

अपनी राशि के लिए गुरु का विस्तृत पेज

राशि-वार विस्तार के लिए हमारे 2026 के पेज देखें। ये कर्क में गुरु के चरण पर लिखे गए हैं, जो 2027 के जनवरी से जून वाले चरण से भाव के हिसाब से मेल खाता है। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन के पेज उपलब्ध हैं।

पर्सनल गुरु गोचर रीडिंग के लिए संपर्क करें

सामान्य तालिका सबके लिए एक जैसी होती है, पर आपकी कुंडली में गुरु का बल, दशा और अष्टकवर्ग अलग होता है। अपने लिए 2027 की व्यक्तिगत रीडिंग चाहें तो Trikaal Vaani की सेवाएँ देखें, जहाँ Rohiit Gupta कुंडली, दशा और गोचर को साथ मिलाकर पढ़ते हैं। पहला कदम निःशुल्क है: अपनी राशि जानें, ऊपर की तालिका में भाव देखें और जो प्रश्न सबसे ज़रूरी लगे उसे साथ लाएँ। जन्म तारीख़, समय और जन्म-स्थान तैयार रखें, ताकि चंद्र राशि और दशा पहली बातचीत में ही पक्की हो सके।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

गोचर
आकाश में ग्रह की वर्तमान चाल, जिसे चंद्र राशि से भाव गिनकर पढ़ा जाता है।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह का उलटी दिशा में चलता दिखना।
मार्गी
ग्रह की सीधी चाल, जो वक्री अवस्था के बाद शुरू होती है।
उच्च राशि
वह राशि जिसमें ग्रह को विशेष बल मिलता है। गुरु के लिए यह कर्क है।
चंद्र राशि
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। गोचर इसी से पढ़ा जाता है।
महादशा
जन्म कुंडली से चलने वाला ग्रह-काल, जो गोचर से अलग होता है।
अस्त
ग्रह का सूर्य के बहुत पास आकर दिखना बंद होना। यह वक्री से अलग है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु । तस्मात्तदृक्षादपि वर्तमानग्रहेन्द्रचारैः कथयेत्फलानि ॥१॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 1 · sastri-1950

    फलदीपिका 26.1 के अनुसार सभी लग्नों के रहते भी गोचर में चंद्र लग्न प्रधान है, और फल चंद्र राशि से ग्रहों की चाल देखकर कहे जाते हैं।

    Phaladeepika 26.1 says that among all lagnas, the Moon sign (chandra lagna) is the primary reference for transits, and results should be told from the planets transiting from it.

  2. [2]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः जीवस्त्वस्ततपोद्विपञ्चमगतो वक्रार्कजौ षट्त्रिगौ । सौम्यः षट्स्वचतुर्दशाष्टमगतः सर्वेऽप्युपान्त्यस्थिताः शुक्रः खास्तरिपून्विहाय शुभदस्तिग्मांशुवद्भोगिनौ ॥२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 2 · sastri-1950

    फलदीपिका 26.2 में चंद्र राशि से वे भाव गिनाए गए हैं जिनमें ग्रह का गोचर शुभ है, और गुरु के लिए ये सातवाँ, नौवाँ, दूसरा और पाँचवाँ भाव हैं।

    Phaladeepika 26.2 lists the houses from the Moon in which each graha transit is favourable, and for Jupiter these are the 7th, 9th, 2nd and 5th.

  3. [3]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    पुत्रोत्पत्तिमुपैति सज्जनयुतिं राजानुकूल्यं सुते षष्ठे मन्त्रिणि पीडयन्ति रिपवः स्वज्ञातयो व्याधयः । यात्रां शोभनहेतवे वनितया सौख्यं सुताप्तिं स्मरे मार्गक्लेशमरिष्टमष्टमगते नष्टं धनैः कष्टताम् ॥१९॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 19 · sastri-1950

    फलदीपिका 26.19 में गुरु गोचर के पाँचवें से आठवें भाव के फल हैं: पाँचवें में संतान, सज्जन-संग और राजकृपा, छठे में शत्रु और रोग की पीड़ा, सातवें में जीवनसाथी और संतान का सुख, और आठवें में कष्ट और धनहानि।

    Phaladeepika 26.19 gives Jupiter transit results for the 5th to 8th houses: birth of children, good company and royal favour in the 5th, trouble from rivals and illness in the 6th, comfort from the spouse and children in the 7th, and hardship and loss of wealth in the 8th.

  4. [4]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    भाग्ये जीवे सर्वसौभाग्यसिद्धिः कर्मण्यर्थस्थानपुत्रादिपीडा । लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः ॥२०॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 20 · sastri-1950

    फलदीपिका 26.20 में गुरु गोचर के नौवें से बारहवें भाव के फल हैं: नौवें में पूर्ण सौभाग्य, दसवें में धन, स्थान और संतान की पीड़ा, ग्यारहवें में संतान, स्थान और मान का लाभ, और बारहवें में धन के कारण दुःख।

    Phaladeepika 26.20 gives Jupiter transit results for the 9th to 12th houses: complete good fortune in the 9th, trouble to wealth, position and children in the 10th, gain of children, position and honour in the 11th, and sorrow over money matters in the 12th.

  5. [5]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां प्राप्नोति द्रविणं कुटुम्बसुखमप्यर्थं स्ववाचां फलम् । दुश्चिक्ये स्थितिनाशमिष्टवियुतिं कार्यान्तरायं रुजं दुःखैर्बन्धुजनोद्भवैश्च हिबुके दैन्यं चतुष्पाद्भयम् ॥१८॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 18 · sastri-1950

    फलदीपिका 26.18 में गुरु गोचर के पहले से चौथे भाव के फल हैं: पहले में स्थान-त्याग और धनहानि, दूसरे में धन और कुटुंब सुख, तीसरे में स्थान की हानि और काम में बाधा, और चौथे में दीनता।

    Phaladeepika 26.18 gives Jupiter transit results for the 1st to 4th houses: leaving home and loss of wealth in the 1st, wealth and family comfort in the 2nd, loss of position and obstacles in the 3rd, and dejection in the 4th.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

गुरु गोचर 2027 में गुरु कब राशि बदलेगा?

गुरु 25 जनवरी 2027 को सिंह से कर्क में लौटेगा, 26 जून 2027 को कर्क से सिंह में जाएगा और 26 नवंबर 2027 को कन्या में प्रवेश करेगा। 13 अप्रैल 2027 को वह कर्क में मार्गी होगा।

गुरु वक्री 2027 में कब होगा?

गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह में वक्री होता है और 13 अप्रैल 2027 को कर्क में मार्गी होता है। अगला वक्री चरण जनवरी 2028 में है।

क्या कर्क में गुरु 2027 में फिर उच्च होगा?

हाँ। 25 जनवरी से 26 जून 2027 तक गुरु कर्क में रहेगा, जो उसकी उच्च राशि है। इसमें 13 अप्रैल तक वह वक्री रहेगा।

गुरु का गोचर कैसे पढ़ा जाता है?

फलदीपिका के अनुसार गोचर के लिए चंद्र लग्न प्रधान है। यानी गुरु आपकी चंद्र राशि से किस भाव में है, यह देखा जाता है।

गुरु किन भावों में शुभ माना जाता है?

फलदीपिका गुरु को चंद्र राशि से दूसरे, पाँचवें, सातवें और नौवें भाव में शुभ बताती है और ग्यारहवें भाव में लाभ।

कर्क चरण में किन राशियों के लिए गुरु शुभ भाव में है?

25 जनवरी से 26 जून 2027 तक मिथुन, मीन, मकर, वृश्चिक और कन्या राशि के लिए गुरु शुभ भाव में पड़ता है।

सिंह चरण में किन राशियों के लिए गुरु शुभ भाव में है?

26 जून से 26 नवंबर 2027 तक, और 1 से 25 जनवरी तक, कर्क, मेष, कुंभ, धनु और तुला राशि के लिए गुरु शुभ भाव में पड़ता है।

क्या वक्री गुरु में विवाह नहीं हो सकता?

वक्री और अस्त अलग बातें हैं। विवाह मुहूर्त के लिए अपने शहर की तारीख़ें शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से देखें और अपने पंडित से पुष्टि करें।

गुरु के लिए सबसे आसान उपाय क्या है?

गुरुवार को चना दाल और हल्दी का दान और ग्यारह बार गुरु मंत्र का जप। दोनों में खर्च बहुत कम है और रत्न की ज़रूरत नहीं।

क्या यह राशिफल सबके लिए एक जैसा है?

नहीं। गोचर का फल आपकी चंद्र राशि, कुंडली में गुरु के बल और चल रही दशा पर निर्भर करता है। यह पेज सामान्य सूत्र बताता है।

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