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Job Kab Lagegi? Sirf DOB Se Nahi, Dasha Se

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect17 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

जन्म तारीख़ से नौकरी का समय कुंडली की दशा और दशम भाव से निकलता है, सिर्फ़ तारीख़ से नहीं। जब दशमेश या छठे-ग्यारहवें भाव के स्वामी की दशा-अंतर्दशा चलती है और गुरु-शनि का गोचर काम के घर को छूता है, तब नौकरी के रास्ते खुलते हैं। सही समय के लिए जन्म-समय और जन्मस्थान के साथ दशा जाँचें।

Deep Dive Analysis

नौकरी कब लगेगी: जन्म तारीख़ से सीधा जवाब

जन्म तारीख़ से नौकरी का समय अंदाज़े से नहीं, कुंडली की दशा और दशम भाव से निकलता है। जब दशमेश या छठे-ग्यारहवें भाव के स्वामी की दशा-अंतर्दशा चलती है और गुरु या शनि का गोचर काम के घर को छूता है, तब नौकरी के मौक़े खुलते हैं। यह पन्ना सरकारी नौकरी और UPSC ज्योतिष की पूरी गाइड का हिस्सा है और सरकारी व प्राइवेट, दोनों तरह की नौकरी के समय पर टिका है। अपनी दशा सीधे देखनी हो तो फ्री दशा कैलकुलेटर कुछ ही देर में तारीख़ों की सूची दे देता है, और पूरी कुंडली की तस्वीर के लिए कुंडली में करियर भविष्यवाणी की गाइड साथ में पढ़ी जा सकती है।

सिर्फ़ जन्म तारीख़ से कितना पता चलता है

अकेली तारीख़ से चंद्र राशि का मोटा अंदाज़ा मिलता है, पर नौकरी का समय लग्न, दशम भाव और दशा से तय होता है, और ये तीनों जन्म के समय और जगह पर टिके हैं। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए एक ही तारीख़ में जन्मे दो लोगों का दसवां भाव अलग राशि का हो सकता है। इसी वजह से सही जवाब के लिए तारीख़, समय और जन्मस्थान तीनों चाहिए। समय पक्का न हो तो जन्म-समय की शुद्धता वाला पन्ना देखें, और फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर से स्विस एफेमेरिस पर आधारित कुंडली बना लें।

दसवां भाव क्या दिखाता है: कर्म, आजीविका और मान

कुंडली का दसवां भाव आपके काम, आजीविका और समाज में पद का घर है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के भाव-विवेक अध्याय में राज्य, वृत्ति यानी रोज़ी-रोटी और मान का विचार इसी स्थान से करने को कहा गया है।[1] सरल शब्दों में, जब आप पूछते हैं कि नौकरी कब लगेगी, तो असल में दसवें भाव, उसके स्वामी (दशमेश) और उन पर चल रही दशा की जाँच हो रही होती है। भावों की बुनियाद कुंडली के 12 भाव में समझाई गई है, और यही बात दशमेश से करियर की दिशा में आगे खुलती है।

दशमेश बलवान हो तो नौकरी के संकेत

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के कर्मभावफल अध्याय के अनुसार दशम भाव का स्वामी बलवान होकर अपनी राशि, उच्च राशि या अपने नवांश में हो तो जातक यशस्वी होता है और शुभ कर्म करता है।[2] व्यवहार में इसका मतलब यह नहीं कि नौकरी बिना मेहनत मिल जाएगी, बल्कि यह कि काम का रास्ता अपेक्षाकृत सीधा खुलता है और मेहनत का फल टिकता है। बलवान दशमेश की पहचान के लिए ग्रह बल कैलकुलेटर और कुंडली में षड्बल का पन्ना काम आता है।

दशमेश कमज़ोर दिखे तो क्या समझें, और राहत कहाँ है

ग्रंथ में कहा गया है कि दशम भाव का स्वामी बलहीन हो तो कर्म में कमी या रुकावट का संकेत मिलता है।[3] यह ठहराव का इशारा है, फ़ैसला नहीं, क्योंकि उसी अध्याय में बताया गया है कि दशमेश केंद्र या त्रिकोण में हो, उच्च राशि में हो और गुरु के साथ या गुरु की दृष्टि में हो तो जातक कर्म से युक्त रहता है।[4] यानी कमज़ोरी के साथ राहत देने वाली स्थितियाँ भी साथ-साथ जाँची जाती हैं। उपाय के तौर पर रविवार को सूर्योदय के बाद किसी भी साफ़ लोटे से सूर्य को जल दें। समय सुबह 7 से 8 बजे के बीच रखें। ख़र्च सिर्फ़ पानी का है, यानी मुफ़्त। इसे लगातार 11 रविवार करें। कारण यह कि दशम भाव का स्वाभाविक कारक सूर्य माना गया है, इसलिए दशमेश कमज़ोर दिखे तो यह छोटा नियम आपके काम-भाव को सहारा देता है।

दशमेश और लाभेश का मेल: आमदनी वाली नौकरी

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार दशमेश शुभ ग्रह से युक्त होकर शुभ स्थान में हो तो राजद्वार यानी सरकारी दरबार और व्यापार में लाभ बताया गया है।[5] उसी अध्याय में यह भी आता है कि लाभेश दशम राशि में हो, या दशमेश लग्न से जुड़ा हो, या दोनों केंद्र में हों, तो सुखपूर्वक आजीविका मिलती है।[6] आज के अर्थ में कहें तो दसवें और ग्यारहवें भाव का मेल वही जगह है जहाँ काम का फल आमदनी में बदलता है। वेतन-वृद्धि और पद की बात अलग से प्रमोशन भविष्यवाणी के पन्ने पर देखी जा सकती है।

नौकरी का असली समय दशा से तय होता है

कुंडली में योग बन जाना और उसका फल मिलना दो अलग बातें हैं, फल की घड़ी दशा तय करती है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र कहता है कि दशमेश की दशा के समय राजसभा में सम्मान मिलता है।[7] इसी कारण नौकरी कब लगेगी का सबसे ठोस उत्तर यह है कि आपकी कौन-सी महादशा और अंतर्दशा दशम भाव या उसके स्वामी से जुड़ी है। गणना का तरीक़ा विंशोत्तरी दशा कैसे निकालें में है, और हर महादशा का करियर पर असर बुध महादशा, गुरु महादशा और सूर्य महादशा के पन्नों में अलग-अलग पढ़ा जा सकता है।

दशा किस हाल में शुरू हुई, यह क्यों मायने रखता है

ग्रंथ का एक सूत्र बताता है कि दशा के आरंभ में ग्रह शुभ स्थान में हो तो शुभ फल मिलता है, और अशुभ स्थान में हो तो शुभ ग्रह की दशा भी बहुत अच्छी नहीं रहती।[8] इसका व्यावहारिक पाठ यह है कि सिर्फ़ ग्रह का नाम देखकर फ़ैसला न करें, यह देखें कि वह आपकी कुंडली में किस भाव में बैठा है। इसमें राहत भी है: जिसकी महादशा कठिन स्थान से शुरू हुई हो, उसके लिए आगे की अंतर्दशाएँ अलग तस्वीर दिखा सकती हैं, इसलिए दशा के हिसाब से करियर की खिड़की एक बार ज़रूर देखें।

अंतर्दशा और प्रत्यंतर: महीने तक कैसे पहुँचें

महादशा बरसों की होती है, इसलिए नौकरी का महीना अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा से पकड़ा जाता है। तरीक़ा सीधा है: पहले उन अंतर्दशाओं की सूची बनाइए जो दशमेश, छठे, दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामियों की हैं, फिर उनमें से उस अंतर्दशा को चुनिए जिसमें गोचर भी साथ दे रहा हो। उसके बाद प्रत्यंतर से हफ़्तों तक का दायरा बनता है। हाथ से गणना के लिए प्रत्यंतर दशा कैसे निकालें, मशीन से जाँच के लिए प्रत्यंतर दशा कैलकुलेटर गाइड, और दशा-गोचर के मिलान के लिए दशा और प्रत्यंतर का समय पढ़ें।

गोचर: शनि और गुरु कब साथ देते हैं

दशा बताती है कि अवसर किस दौर में है, गोचर बताता है कि उस दौर में दरवाज़ा किस महीने खुलेगा। परंपरा में शनि को कर्म का और गुरु को अवसर और विस्तार का ग्रह माना जाता है, इसलिए इनका गोचर में दशम भाव, दशमेश या लग्न से जुड़ना नौकरी के समय में अहम रहता है। दशा अनुकूल हो पर गोचर साथ न दे तो बात थोड़ी टलती है, और गोचर अच्छा हो पर दशा न बनी हो तो अकेला गोचर कम देता है। चालू वर्ष की चाल के लिए शनि गोचर 2026 और राहु-केतु गोचर और नौकरी देखे जा सकते हैं।

फ्रेशर के लिए: पंचमेश की दशा और पढ़ाई से नौकरी तक

जिसने अभी पढ़ाई पूरी की है, उसके लिए पंचम भाव का स्वामी पहले आता है। ग्रंथ में कहा गया है कि पंचमेश की दशा में विद्या की प्राप्ति और संतान-सुख का फल मिलता है।[9] आज की भाषा में यह वह दौर है जब डिग्री, प्रशिक्षण और परीक्षा का फल पक्का होता है, और उसके बाद दशमेश या लाभेश की दशा नौकरी में बदलती है। इसलिए फ्रेशर पहले पंचमेश और दशमेश के क्रम को देखें। परीक्षा-आधारित नौकरी के लिए परीक्षा के बाद का सही दशा-वर्ष, असफलता के बाद दोबारा कोशिश के समय के लिए परीक्षा में असफलता और दोबारा समय और इंटरव्यू के लिए इंटरव्यू बनाम लिखित परीक्षा पढ़ें।

सरकारी नौकरी कब लगेगी: अलग क्या देखा जाता है

सरकारी नौकरी में दशम भाव के साथ सूर्य की स्थिति, छठे भाव का बल और शनि की भूमिका ज़्यादा बारीकी से परखी जाती है, क्योंकि यहाँ पद, परीक्षा और प्रक्रिया तीनों जुड़े होते हैं। समय के लिए सरकारी नौकरी का दशा-समय और दसवें भाव से सरकारी नौकरी अलग-अलग कोण देते हैं। सूर्य और राजयोग की भूमिका सूर्य और राजयोग: सरकारी नौकरी में, और परीक्षा में सफलता के योग परीक्षा और सरकारी नौकरी के योग में समझाई गई है।

बैंक, रेलवे, SSC और UPSC: समय के पैटर्न

हर परीक्षा का ढाँचा अलग है, इसलिए दशा का पैटर्न भी थोड़ा अलग पढ़ा जाता है। बैंकिंग की तैयारी करने वाले बैंकिंग नौकरी ज्योतिष देखें, रेलवे वाले रेलवे नौकरी ज्योतिष, और SSC वाले SSC परीक्षा भविष्यवाणी पढ़ें। सिविल सेवा के लिए UPSC पास होने की संभावना अलग तरह की कसौटी देता है, और रैंक के आकलन के लिए प्रतियोगी परीक्षा रैंक भविष्यवाणी उपयोगी है। न्यायिक, रक्षा और शिक्षण जैसे क्षेत्रों के लिए न्यायिक करियर, रक्षा करियर और शिक्षण करियर अलग से लिखे गए हैं।

प्राइवेट नौकरी का समय: छठा, दसवां और ग्यारहवां भाव

प्राइवेट नौकरी में छठा भाव रोज़ की सेवा और काम की लय दिखाता है, दसवां भाव पद और पहचान, और ग्यारहवां भाव आमदनी का फल। इन तीनों के स्वामियों की दशा-अंतर्दशा जब एक के बाद एक आती है, तब बदलाव का मौक़ा बनता है। अगर आप सोच रहे हैं कि नौकरी की जगह अपना काम बेहतर रहेगा, तो नौकरी या व्यापार: कुंडली क्या कहती है देखें, नौकरी बदलने की सोच हो तो जॉब बदलने का समय और तरक़्क़ी की गति के लिए करियर ग्रोथ का समय पढ़ें।

महादशा के हिसाब से काम का स्वभाव

परंपरागत कारकत्व के अनुसार हर महादशा काम का अलग रंग लाती है, पर अंतिम फ़ैसला हमेशा दशमेश की स्थिति से होता है, ग्रह के नाम से नहीं। सूर्य की दशा में प्रशासन और पद वाले काम की ओर रुझान रहता है, बुध की दशा में लेखा, संवाद और तकनीक की ओर, गुरु की दशा में शिक्षण, सलाह और बैंकिंग की ओर, और शुक्र की दशा में कला, आतिथ्य और सौंदर्य से जुड़े काम की ओर। शनि की दशा अनुशासन, श्रम और तकनीकी कौशल वाली नौकरी को बल देती है, और मंगल की दशा इंजीनियरिंग, रक्षा या फ़ील्ड वाले काम को। इन ग्रहों के विस्तृत असर के लिए शनि महादशा के प्रभाव और मंगल महादशा की ऊर्जा के पन्ने उपयोगी हैं।

नौकरी में देरी के आम कुंडली कारण, राहत के साथ

देरी के पीछे तीन चीज़ें सबसे आम निकलती हैं: दशमेश का कमज़ोर होना, दशम भाव या उसके स्वामी पर शनि-राहु जैसे ग्रहों का भारी असर, और दशा का अभी अनुकूल दौर में न पहुँचना। इनमें से हर एक की सीमा और राहत है। अकेला शनि या राहु रुकावट का फ़ैसला नहीं देता, दशा बदलने पर तस्वीर बदल सकती है, और गुरु-दृष्टि जैसी शुभ स्थितियाँ भार घटाती हैं। विस्तार से शनि महादशा में जॉब क्यों नहीं मिलती, काल सर्प दोष और करियर, पितृ दोष और करियर-धन और राहु महादशा के असर पढ़े जा सकते हैं।

साढ़ेसाती में नौकरी: क्या सच में रुकती है

साढ़ेसाती का मतलब हर बार नौकरी का रुकना नहीं है। इस दौर में काम की गति धीमी और अनुशासन ज़्यादा माँगने वाली हो सकती है, पर कुछ कुंडलियों में यही दौर ज़िम्मेदारी वाला पद भी लेकर आता है। असर इस पर टिका है कि शनि आपकी कुंडली में किस भाव का स्वामी है और किस स्थिति में है। इसे समझने के लिए क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है और साढ़ेसाती का करियर, धन, स्वास्थ्य पर असर पढ़ें, और अपनी स्थिति फ्री साढ़ेसाती कैलकुलेटर से जाँच लें।

अपनी कुंडली में पाँच कदम की जाँच

पहला कदम सही जन्म-समय से लग्न तय करना है, इसके लिए फ्री लग्न कैलकुलेटर काम आता है। दूसरा, दसवां भाव किस राशि का है और उसका स्वामी कौन है, यह नोट करना। तीसरा, दशमेश कितना बलवान है, यह कुंडली बल कैलकुलेटर से परखना। चौथा, चल रही महादशा-अंतर्दशा देखना और आगे की दशाओं की सूची बनाना। पाँचवाँ, गोचर में शनि-गुरु की स्थिति से उसका मिलान करना। कुंडली पढ़ने की पूरी विधि कुंडली कैसे देखें में और ग्रहों का परिचय कुंडली के 9 ग्रह में मिलेगा।

एक काल्पनिक उदाहरण: दशा और गोचर का मिलान

यह किसी असली व्यक्ति का मामला नहीं, केवल समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है। मान लीजिए कन्या लग्न की कुंडली है, इसमें दसवां भाव मिथुन राशि का बनता है और दशमेश बुध है। बुध यदि केंद्र में है और उस पर गुरु की दृष्टि है, तो दशमेश को ग्रंथ में बताई गई राहत मिल जाती है।[4] अब मान लीजिए बुध की महादशा में गुरु की अंतर्दशा चल रही है और गोचर में गुरु दसवें भाव को देख रहा है। ऐसे मेल में नौकरी की संभावना का समय निकट माना जाएगा। उसी कुंडली में बुध यदि कमज़ोर हो तो वही अंतर्दशा थोड़ी देर से परिणाम देगी। इसी तर्क से हर कुंडली अलग पढ़ी जाती है।

नौकरी के लिए सरल उपाय: दो छोटे नियम

पहला उपाय सूर्य को जल देने का ऊपर बताया जा चुका है। दूसरा गुरु की कृपा के लिए है। क्या करना है: गुरुवार को किसी गाय या ज़रूरतमंद को पका केला खिलाएँ। कब: गुरुवार की सुबह, इंटरव्यू या आवेदन वाले सप्ताह में। ख़र्च कितना: दस-पंद्रह रुपये के केले। कितने दिन तक: बिना नागा सात गुरुवार। आपके लिए क्यों: गुरु अवसर और विस्तार का कारक है, और कुंडली में दशमेश या लाभेश पर गुरु की दृष्टि राहत मानी गई है, इसलिए यह छोटा नियम उसी धारा को पुष्ट करता है। रोज़ घंटों के पाठ या महँगे अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं है। जो निभाया न जा सके, वह उपाय नहीं रहता।

रत्न पहला उपाय क्यों नहीं

नौकरी में देरी देखकर सबसे पहले रत्न की सलाह दी जाती है, पर यह सबसे महँगा और सबसे जोखिम भरा कदम है, क्योंकि ग़लत रत्न का नुक़सान असली होता है। रत्न तब सोचा जाए जब दशा, बल और बाक़ी सरल उपाय देख लिए गए हों और आप ख़ुद उसके बारे में पूछें। उससे पहले अपनी कुंडली के लिए रत्न उपयुक्त है या नहीं, यह रत्न उपयुक्तता कैलकुलेटर से जाँचा जा सकता है।

इंटरव्यू, आवेदन और जॉइनिंग का मुहूर्त

जब दशा नौकरी की ओर इशारा करे, तब छोटी चीज़ें भी साथ देती हैं: आवेदन किस दिन भेजें, इंटरव्यू कब हो और जॉइनिंग किस दिन करें। आवेदन के लिए आवेदन भेजने का शुभ मुहूर्त, इंटरव्यू के लिए इंटरव्यू मुहूर्त कैलकुलेटर, जॉइनिंग के लिए जॉब जॉइनिंग का शुभ मुहूर्त और नौकरी छोड़ने के लिए इस्तीफ़े का मुहूर्त देखे जा सकते हैं। सभी मुहूर्त एक जगह निकालने के लिए फ्री शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर है।

विदेश की नौकरी और करियर बदलाव

अगर आप देश के बाहर नौकरी देख रहे हैं, तो बारहवां और नौवां भाव दसवें के साथ पढ़े जाते हैं। इस दिशा में विदेश में करियर और शिक्षा का योग और फ्री विदेश बसने का कैलकुलेटर आपका रास्ता साफ़ करते हैं। करियर बदलने का मन हो तो करियर पिवट सर्विस में आपकी दशा के हिसाब से दिशा तय की जाती है।

दफ़्तर का माहौल और बॉस की खींचतान

कई बार नौकरी मिलती है पर टिकती नहीं, क्योंकि दफ़्तर के माहौल या बॉस से खींचतान रहती है। इसकी जड़ अक्सर दशम और छठे भाव पर सूर्य-शनि जैसे ग्रहों के आपसी तनाव में देखी जाती है। इसकी जाँच के लिए सूर्य-शनि विरोध और बॉस से टकराव और टॉक्सिक बॉस के उपाय पढ़ें, और ज़्यादा सटीक जाँच के लिए टॉक्सिक बॉस रडार सर्विस उपलब्ध है।

सपनों में नौकरी या परीक्षा दिखे तो

कई लोगों को परीक्षा या नौकरी के सपने आते हैं और वे उन्हें भविष्यवाणी मान लेते हैं। परंपरा में सपना संकेत होता है, कुंडली की जगह नहीं लेता, इसलिए ऐसे सपनों को तनाव का आईना समझकर पहले दशा जाँचें। इस विषय पर परीक्षा या नौकरी के सपने का मतलब अलग से लिखा है।

क्या ज्योतिष तारीख़ पक्की बता सकता है: ईमानदार सीमाएँ

ईमानदार जवाब यह है कि कोई भी कुंडली-पाठ आपकी नौकरी की एक ठोस तारीख़ की गारंटी नहीं दे सकता। जो बताया जा सकता है वह है अनुकूल दौर, प्रतिकूल दौर और उस दौर में सबसे बेहतर महीनों की खिड़की। इस खिड़की के भीतर भी कंपनी में खाली जगह, आपकी तैयारी और बाज़ार जैसे असली कारक काम करते हैं। इसलिए ज्योतिष को प्रयास की जगह नहीं, प्रयास की दिशा मानना सही है। जिन्हें चार्ट की गहरी सलाह चाहिए, वे करियर ज्योतिषी से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं।

आम गलतफ़हमियाँ: नौकरी और कुंडली

पहली गलतफ़हमी यह कि सिर्फ़ राशि देखकर नौकरी का समय निकल आता है, असल में लग्न और दशा के बिना नतीजा अधूरा रहता है। दूसरी यह कि एक बुरी दशा का मतलब पूरा दौर रुकना है, जबकि अंतर्दशाएँ बीच-बीच में अवसर देती हैं। तीसरी यह कि शनि या राहु हमेशा नौकरी रोकते हैं, इनके फल भाव, स्वामी और दृष्टि पर टिके हैं। चौथी यह कि महँगा रत्न ही हल है, जबकि सरल नियम अक्सर पहली पसंद होने चाहिए। इन चारों के सही रूप जानने के लिए कुंडली में दोष कैसे देखें पढ़ें।

अपनी नौकरी का समय निकलवाने का अगला कदम

सबसे सरल रास्ता यह है कि फ्री दशा कैलकुलेटर से अपनी महादशा-अंतर्दशा की तारीख़ें निकालें, फिर इस पन्ने के पाँच कदमों से दशमेश की स्थिति परखें। उसके बाद अपने क्षेत्र का पन्ना खोलें, जैसे सरकारी नौकरी के लिए सरकारी नौकरी और UPSC की गाइड और सामान्य करियर के लिए करियर पेज। अगर चाहें कि कोई विशेषज्ञ आपकी कुंडली पर सीधे बात करे, तो दिल्ली में ज्योतिषी या नोएडा में ज्योतिषी पन्ने से समय ले सकते हैं।

निष्कर्ष: समय को समझिए, प्रयास को मत छोड़िए

नौकरी कब लगेगी, इसका जवाब जन्म तारीख़ में नहीं, उस तारीख़ से बनी कुंडली की दशा, दशम भाव और गोचर के मेल में मिलता है। दशमेश की स्थिति, चल रही दशा और गुरु-शनि का गोचर देखकर आप अपने लिए सबसे अच्छी खिड़की पहचान सकते हैं। डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि हर कमज़ोरी के साथ ग्रंथ में राहत की स्थिति भी बताई गई है। पहला कदम आज ही ले सकते हैं: अपनी दशा निकालिए और दशमेश को पहचानिए।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

दशमेश
कुंडली के दसवें भाव का स्वामी ग्रह; नौकरी और पद के विचार में इसकी स्थिति और दशा सबसे पहले देखी जाती है।
महादशा
विंशोत्तरी पद्धति में किसी ग्रह का वह लंबा कालखंड (कई वर्ष) जिसमें उस ग्रह के फल प्रमुख रहते हैं।
अंतर्दशा
महादशा के भीतर का छोटा उप-कालखंड, जिससे घटनाओं का समय महीनों तक संकरा किया जाता है।
गोचर
ग्रहों की आकाश में वर्तमान चाल, जिसे जन्म कुंडली के भावों पर रखकर देखा जाता है।
केंद्र-त्रिकोण
कुंडली के 1, 4, 7, 10 (केंद्र) और 1, 5, 9 (त्रिकोण) भाव, जिनमें ग्रह की स्थिति बल देने वाली मानी जाती है।
वृत्ति
आजीविका या रोज़ी-रोटी का साधन; ग्रंथ में इसका विचार दसवें भाव से करने को कहा गया है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    राज्यं चाकाशंवृत्तिं च मानं चैव पितुस्तथा । प्रवासस्य ऋणस्यापि व्योमस्थानान्निरीक्षणम्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 11 — भाव-विवेक अध्याय · श्लोक 11

    राज्य, वृत्ति (आजीविका), मान और पिता जैसे विषयों का विचार दशम भाव से किया जाता है।

    The 10th house is the place from which rule or authority, livelihood (vritti), honour and the like are examined.

  2. [2]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    सबले कर्मभावेशे स्वोच्चे स्वांशे स्वराशिगे । जातस्तातसुखेनाढ्।ह्यो यशस्वी शुभकर्मकृत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 21 — कर्मभावफलाध्याय · श्लोक 2

    बलवान दशमेश अपनी राशि, उच्च राशि या अपने नवांश में हो तो जातक यशस्वी और शुभ कर्म करने वाला होता है।

    A strong 10th lord in its own or exalted sign or its own navamsha gives a renowned person who performs good deeds.

  3. [3]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    कर्माधिपो बलोनश्चेत्।ह् कर्मवैकल्यमादिशेत्।ह् । सैहिः केन्द्रत्रिकोणस्थो ज्योतिष्टोमादियागकृत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 21 — कर्मभावफलाध्याय · श्लोक 3

    दशमेश बलहीन हो तो कर्म में कमी या रुकावट का संकेत माना गया है।

    If the 10th lord is weak, deficiency or obstruction in one's work is indicated.

  4. [4]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    केन्द्रत्रिकोणगे कर्मनाथे स्वोच्चसमाश्रिते । गुरुणा सहिते दृष्टे स कर्मसहितो भवेत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 21 — कर्मभावफलाध्याय · श्लोक 14

    दशमेश केंद्र या त्रिकोण में, उच्च राशि में और गुरु से युक्त या दृष्ट हो तो जातक कर्म से युक्त रहता है।

    A 10th lord in a kendra or trikona, exalted, and joined or aspected by Jupiter keeps the native endowed with work.

  5. [5]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    कर्मेशे शुभसंयुक्ते शुभस्थानगते तथा । राजद्वारे च वाणिज्ये सदा लाभोऽन्यथान्यथा
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 21 — कर्मभावफलाध्याय · श्लोक 4

    दशमेश शुभ ग्रह से युक्त होकर शुभ स्थान में हो तो राजद्वार (सरकारी दरबार) और व्यापार में लाभ बताया गया है।

    A 10th lord with benefics in a good place brings gain at the royal door (government) and in trade.

  6. [6]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    लाभेशे कर्मराशिस्थे कर्मेशे लग्नसंयुते । तावुभौ केन्द्रगौ वापि सुखजीवनभाग्।ह् भवेत्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 21 — कर्मभावफलाध्याय · श्लोक 9

    लाभेश दशम राशि में हो, या दशमेश लग्न से जुड़ा हो, या दोनों केंद्र में हों तो सुखपूर्वक आजीविका मिलती है।

    When the 11th lord sits in the 10th sign, or the 10th lord joins the lagna, or both are in kendras, a comfortable livelihood results.

  7. [7]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    धर्मशस्य दशायां च भूरिल्लाभो यशःसुखम्।ह् । दशमेशदशाकाले सम्मानं नृपसंसदि
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 48 — विशेष नक्षत्र दशाफलाध्याय · श्लोक 6

    दशमेश की दशा के समय राजसभा में सम्मान का फल बताया गया है।

    During the dasha of the 10th lord, honour in the royal assembly is indicated.

  8. [8]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    दशारम्भे शुभस्थाने स्थितस्यापि शुभं फलम्।ह् । अशुभस्थानगस्यैवं शुभस्यापि न शोभनम्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 48 — विशेष नक्षत्र दशाफलाध्याय · श्लोक 8

    दशा के आरंभ में ग्रह शुभ स्थान में हो तो शुभ फल मिलता है; अशुभ स्थान में हो तो शुभ ग्रह का फल भी शोभन नहीं रहता।

    A planet well placed at the start of its dasha gives good results; if ill placed, even a benefic does not give a fine result.

  9. [9]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    पञ्चमेशस्य पाके च विद्याप्तिः पुत्रजं सुखम्।ह् । रोगेशस्य दशाकाले देहपीडा रिपोर्भयम्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 48 — विशेष नक्षत्र दशाफलाध्याय · श्लोक 4

    पंचमेश की दशा में विद्या की प्राप्ति और संतान-सुख का फल बताया गया है।

    In the dasha of the 5th lord, the attainment of learning and happiness from children are indicated.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

जन्म तारीख़ से नौकरी कब लगेगी, यह कैसे पता करें?

केवल तारीख़ से पक्का समय नहीं निकलता। जन्म-समय और स्थान से कुंडली बनाइए, दशम भाव और उसके स्वामी की स्थिति देखिए, फिर चल रही महादशा-अंतर्दशा और गुरु-शनि का गोचर मिलाइए। इस पन्ने के पाँच कदम और फ्री दशा कैलकुलेटर इसमें सीधी मदद करते हैं।

क्या सिर्फ़ जन्म तारीख़ डालने से जॉब का समय निकल जाता है?

सिर्फ़ तारीख़ से लग्न तय नहीं होता, और लग्न के बिना दसवां भाव और दशमेश गलत निकल सकते हैं। जन्म-समय और जन्मस्थान ज़रूर डालिए। समय पक्का न हो तो ऐसे नतीजे को मोटा अंदाज़ा मानिए और बाद में सही समय से दोबारा जाँचिए।

नौकरी लगने के लिए कौन-सा भाव सबसे ज़रूरी है?

दसवां भाव सबसे अहम है, क्योंकि ग्रंथ में रोज़ी-रोटी, पद और मान का विचार इसी से करने को कहा गया है। इसके साथ छठा भाव सेवा के लिए और ग्यारहवां भाव आमदनी के लिए देखा जाता है। तीनों के स्वामियों की दशा नौकरी का समय बनाती है।

मेरी सरकारी नौकरी कब लगेगी?

सरकारी नौकरी में दशम भाव के साथ सूर्य, छठा भाव और शनि की भूमिका ज़्यादा बारीकी से परखी जाती है। दशमेश या छठे भाव के स्वामी की दशा और गोचर में गुरु-शनि का साथ देना अनुकूल समय बनाता है। विस्तार के लिए सरकारी नौकरी की मुख्य गाइड देखें।

शनि या राहु की दशा में क्या नौकरी नहीं लगती?

ऐसा नहीं है। शनि या राहु की दशा में भी नौकरी लग सकती है, यह इस पर टिका है कि ग्रह किस भाव का स्वामी है और कहाँ बैठा है। कई बार शनि की दशा ज़िम्मेदारी वाला पद देती है। रुकावट दिखे तो दशमेश के बल की जाँच कराना बेहतर है।

साढ़ेसाती में नौकरी क्यों रुकती लगती है?

साढ़ेसाती में काम की गति धीमी और अनुशासन ज़्यादा माँगने वाली लग सकती है, पर यह हर किसी के लिए रुकावट नहीं होती। असर कुंडली में शनि की स्थिति और भाव-स्वामित्व पर टिका है। फ्री साढ़ेसाती कैलकुलेटर से अपनी स्थिति जाँच सकते हैं।

फ्रेशर के लिए पहली नौकरी का समय कैसे देखें?

फ्रेशर के लिए पहले पंचमेश की दशा (पढ़ाई और परीक्षा का फल) देखी जाती है, फिर दशमेश और लाभेश की दशा, जो पढ़ाई को नौकरी में बदलती है। इस क्रम को गुरु-शनि के गोचर से मिलाने पर सबसे अनुकूल महीनों की खिड़की मिलती है।

नौकरी के लिए सबसे आसान उपाय क्या है?

सबसे आसान उपाय रविवार सुबह सूर्य को जल देना है: मुफ़्त, 11 रविवार, सुबह 7 से 8 बजे के बीच। दूसरा, सात गुरुवार पका केला गाय को खिलाना। रत्न पहला उपाय नहीं है और रोज़ घंटों के पाठ की ज़रूरत नहीं है।

क्या ज्योतिष नौकरी की सटीक तारीख़ बता सकता है?

ज्योतिष अनुकूल दौर और सबसे बेहतर महीनों की खिड़की बता सकता है, ठोस तारीख़ की गारंटी नहीं देता। उस खिड़की में कंपनी की रिक्तियाँ, आपकी तैयारी और बाज़ार भी काम करते हैं, इसलिए ज्योतिष को प्रयास की दिशा मानकर चलें।

इंटरव्यू का मुहूर्त कहाँ से निकालें?

इंटरव्यू, आवेदन और जॉइनिंग के लिए इस साइट पर अलग मुहूर्त कैलकुलेटर और गाइड हैं। शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर में अपनी तारीख़ों की सीमा डालकर सबसे अनुकूल दिन-समय निकाला जा सकता है, और यह पूरी तरह मुफ़्त है।

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