पुत्रदा एकादशी कब है? 19 जनवरी 2027
Trikaal Sandesh — Direct Answer
पुत्रदा एकादशी 2027 में दो बार आएगी। पौष शुक्ल की पुत्रदा एकादशी मंगलवार 19 जनवरी 2027 को है और श्रावण शुक्ल की गुरुवार 12 अगस्त 2027 को। दोनों तारीख़ें दिल्ली के सूर्योदय-नियम से हैं। जनवरी में द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त होने से पारण का समय परंपरा के अनुसार पक्का करें।
Deep Dive Analysis
पुत्रदा एकादशी कब है: सीधा जवाब
पुत्रदा एकादशी 2027 में दो बार आती है। पहली पौष शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी मंगलवार 19 जनवरी 2027 को है, और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी गुरुवार 12 अगस्त 2027 को। दोनों तारीख़ें दिल्ली के सूर्योदय-नियम से निकाली गई हैं और यह पन्ना इस महीने की एकादशी कब है की पूरी सूची से जुड़ा है। साल भर की बाक़ी एकादशियों के लिए एकादशी व्रत 2026 की तारीख़ें देखें, और रोज़ की तिथि के लिए आज का पंचांग खोलें।
पुत्रदा एकादशी साल में दो बार क्यों आती है
एकादशी हर चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए एक महीने में दो और साल में चौबीस के आसपास आती हैं, और हर एकादशी का अपना नाम होता है। पुत्रदा नाम दो एकादशियों को मिला है: पौष शुक्ल पक्ष की और श्रावण शुक्ल पक्ष की। लोग इन्हें पौष पुत्रदा और श्रावण पुत्रदा कहकर अलग करते हैं। इसलिए जब कोई पूछता है कि पुत्रदा एकादशी कब है, तो पहले यह तय करना होता है कि बात किस महीने की है। साल की शुभ तिथियों का दायरा 2027 के शुभ तिथि और योग में मिलता है।
पौष पुत्रदा एकादशी: मंगलवार 19 जनवरी 2027
दिल्ली के लिए पौष शुक्ल की एकादशी मंगलवार 19 जनवरी 2027 के सूर्योदय पर मिलती है, इसलिए व्रत इसी दिन माना जाता है। यह सूर्य के मकर में जाने (14 जनवरी की रात) के कुछ दिन बाद पड़ती है। इसी श्रृंखला में सफला एकादशी 3 जनवरी को और षट्तिला 2 फ़रवरी को आती है, जैसा एकादशी की तारीख़ों वाले पन्ने में दिया है। विवाह या शुभ कार्य के लिए इस हफ़्ते की तारीख़ें देखनी हों तो 2027 के विवाह मुहूर्त का पन्ना काम आता है।
19 जनवरी 2027 की तिथि-अवधि (दिल्ली)
दिल्ली के लिए दशमी 18 जनवरी को सुबह 10:28 तक है, उसके बाद एकादशी शुरू होकर 19 जनवरी को सुबह 07:50 तक रहती है। 19 जनवरी का सूर्योदय लगभग 07:18 पर है, यानी एकादशी सूर्योदय को छूती है, बस 32 मिनट के लिए। इसी वजह से सूर्योदय-नियम से व्रत 19 जनवरी को माना जाता है। द्वादशी 19 जनवरी को 07:50 पर लगकर 20 जनवरी को 04:42 पर समाप्त होती है। ये समय हमारे गोचर इंजन से लिए गए हैं और फ्री शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर में अपने शहर के लिए जाँचे जा सकते हैं।
जनवरी में पारण की उलझन: द्वादशी सूर्योदय से पहले ख़त्म
इस बार एक बारीकी है: द्वादशी 20 जनवरी को सूर्योदय से पहले, 04:42 पर, समाप्त हो जाती है, यानी अगली सुबह के सूर्योदय पर द्वादशी बचती ही नहीं। द्वादशी के पहले चौथाई हिस्से को हरि वासर कहते हैं, जो 19 जनवरी को लगभग 13:03 तक चलता है, और पारण हरि वासर में नहीं किया जाता। ऐसे मौक़े पर परंपराएँ अलग-अलग निर्णय देती हैं, इसलिए हम एक पक्की घड़ी नहीं थोपते। अपने कुल की परंपरा या स्थानीय वैष्णव अथवा स्मार्त पंचांग से पारण का समय पक्का कीजिए। इस भेद की जड़ स्मार्त और वैष्णव एकादशी वाले हिस्से में समझाई गई है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी: गुरुवार 12 अगस्त 2027
श्रावण शुक्ल की पुत्रदा एकादशी गुरुवार 12 अगस्त 2027 को है। यह देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास के दौरान आती है, इसलिए इस समय व्रत रखने वाले आम तौर पर सात्त्विक दिनचर्या का भी पालन करते हैं। जनवरी वाली के उलट इस बार तारीख़ और पारण दोनों सीधे हैं, जैसा अगले हिस्से में दिखेगा। बीते साल की श्रावण पुत्रदा 23 अगस्त 2026 को पड़ी थी, जिसका ज़िक्र एकादशी व्रत 2026 की तारीख़ें में है।
12 अगस्त 2027 की तिथि-अवधि और पारण (दिल्ली)
दिल्ली के लिए दशमी 12 अगस्त को 00:59 पर समाप्त होती है और एकादशी उसी क्षण से 13 अगस्त को 03:00 तक रहती है। 12 अगस्त का सूर्योदय एकादशी में पड़ता है, इसलिए व्रत 12 अगस्त, गुरुवार को है। द्वादशी 13 अगस्त को 03:00 से 14 अगस्त को लगभग 05:21 तक रहती है और 13 अगस्त का सूर्योदय लगभग 05:53 पर द्वादशी में है। हरि वासर द्वादशी की शुरुआत से लगभग साढ़े छह घंटे तक, यानी करीब 09:35 तक, चलता है। इसलिए पारण 13 अगस्त की सुबह हरि वासर बीतने के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले करना सीधा रहता है। अपने शहर के लिए समय फ्री शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से जाँचिए।
तिथि की गणना कैसे होती है: सूर्य सिद्धांत का आधार
तिथि का मतलब चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश का फ़ासला है। सूर्य सिद्धांत का मानाध्याय कहता है कि सूर्य से अलग होकर चंद्रमा रोज़ पूर्व की ओर जितना चलता है, उसे 12 अंशों के हिसाब से तिथि जानना चाहिए।[1] इस हिसाब से एकादशी वह तिथि है जब चंद्रमा सूर्य से 120 से 132 अंश आगे होता है। इसीलिए एकादशी की शुरुआत और अंत हर बार अलग घड़ी पर आते हैं और तारीख़ों की सूची साल-दर-साल बदलती है। तिथि के साथ नक्षत्र जैसे दूसरे अंगों की समझ नक्षत्र गाइड में मिलती है।
व्रत चंद्र-मान से क्यों गिना जाता है
उसी मानाध्याय का अगला श्लोक कहता है कि तिथि, करण, विवाह, क्षौर, सब क्रियाएँ तथा व्रत, उपवास और यात्रा की क्रिया चांद्र मान से ग्रहण की जाती है।[2] यानी एकादशी का व्रत तिथि पर टिका है, तारीख़ पर नहीं, और तिथि चंद्रमा की चाल से बनती है। इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर की एक तय तारीख़ याद रखने के बजाय हर साल की तिथि दोबारा निकालनी पड़ती है। चंद्रमा के असर को ज्योतिष में कैसे पढ़ा जाता है, यह चंद्रमा की महादशा और मन में देखा जा सकता है, और चंद्र राशि का आधार भी पढ़ने लायक़ है।
सूर्योदय-नियम: उदया तिथि क्यों मानी जाती है
व्यवहार में जिस तिथि पर सूर्योदय होता है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। हमारा गोचर इंजन पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ता है, जिसका आधार निर्णयसिंधु का वह नियम है कि जिस तिथि को पाकर सूर्य उदय होता है, वही तिथि मानी जाती है। इसी नियम से 19 जनवरी 2027 का दिन एकादशी का दिन बनता है, भले एकादशी सुबह 07:50 तक ही हो। एकादशी से पहले की दशमी अगर सूर्योदय को छू ले तो उसका विचार अलग है, जिसे एकादशी के नियमों वाले पन्ने में पढ़ें।
विदेश में रहने वालों के लिए तारीख़ कैसे बदलती है
तिथि का समय पूरी दुनिया में एक ही क्षण पर बदलता है, पर सूर्योदय हर शहर का अपना होता है, इसलिए व्रत का दिन शहर के हिसाब से बदल सकता है। जनवरी 2027 में एकादशी भारतीय समय 18 जनवरी 10:28 से 19 जनवरी 07:50 तक है। लंदन और ह्यूस्टन जैसे पश्चिमी शहरों में सूर्योदय 18 जनवरी को इसी अवधि के भीतर पड़ता है, जबकि 19 जनवरी तक तिथि निकल चुकी होती है, इसलिए वहाँ व्रत सोमवार 18 जनवरी को बनता है। अगस्त में 12 अगस्त दिल्ली और ह्यूस्टन दोनों के लिए ठीक बैठता है। खाड़ी देशों जैसी जगहों पर जनवरी में सूर्योदय एकादशी की सीमा के बाहर रह सकता है, तब स्थानीय पंचांग से निर्णय लें। जैसे कुंडली स्थान पर टिकी है, वैसे तिथि भी, जैसा कुंडली कैसे काम करती है में बताया गया है।
स्मार्त और वैष्णव: एक दिन या दो
कई वर्षों में एकादशी की तारीख़ दो दिन दिखती है, क्योंकि स्मार्त परंपरा एक नियम से और वैष्णव परंपरा दूसरे नियम से दिन चुनती है। हमारे सूर्योदय-नियम से इन दोनों पुत्रदा एकादशियों का दिन एक ही बनता है, दिल्ली के लिए 19 जनवरी और 12 अगस्त, पर किसी ख़ास संप्रदाय का अपना नियम हो सकता है और जनवरी में पारण की घड़ी पर मतभेद संभव है, जैसा ऊपर लिखा। अगर आपके परिवार में कोई तय परंपरा है, तो उसी के पंचांग को प्राथमिकता दीजिए और दो-दो तारीख़ों के भ्रम में न पड़िए। यह फ़र्क़ एकादशी व्रत की तारीख़ों में विस्तार से मिलता है।
2027 की बाक़ी एकादशियाँ एक नज़र में
पौष पुत्रदा के बाद दिल्ली के लिए अगली एकादशियाँ षट्तिला 2 फ़रवरी, जया 17 फ़रवरी, विजया 3 मार्च (तिथि 3 और 4 मार्च, दोनों सूर्योदय छूती है), आमलकी 18 मार्च और पापमोचनी 2 अप्रैल 2027 हैं। इनकी पूरी जाँच और पारण के समय इस महीने की एकादशी कब है में दिए हैं। साल की शुभ तिथियों के साथ मिलाकर योजना बनानी हो तो 2027 की लकी तारीख़ें और पंचांग योग काम का पन्ना है।
पुत्रदा एकादशी की कथा: संक्षेप में
लोक-परंपरा की कथा में भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या का नाम आता है, जिनके कोई संतान नहीं थी और जो इसी चिंता में रहते थे। कथा के अनुसार मुनियों की सलाह पर राजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा और बाद में उन्हें संतान की प्राप्ति हुई। कथा का भाव विश्वास, संयम और सेवा है, और इसे आस्था की कथा की तरह ही पढ़ना ठीक है, गारंटी की तरह नहीं। कथाओं और ग्रंथ-आधारित गणित का फ़र्क़ वैदिक ज्योतिष क्या है में खुलकर समझा जा सकता है।
पूजा विधि: आठ चरणों में
सामान्य परंपरा में आठ कदम चलते हैं। एक, दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन। दो, एकादशी की सुबह स्नान और संकल्प। तीन, भगवान विष्णु या बाल-रूप कृष्ण की प्रतिमा के आगे दीपक। चार, पीले फूल, फल और तुलसी दल का भोग, जिसमें तुलसी दल एक दिन पहले तोड़कर रखें, क्योंकि एकादशी को तुलसी तोड़ने की मनाही परंपरा में मानी जाती है। पाँच, विष्णु सहस्रनाम या संतान गोपाल मंत्र का पाठ। छह, दिन भर संयम और सत्य वचन। सात, शाम को दीप और कथा-श्रवण। आठ, द्वादशी पर पारण और ज़रूरतमंद को भोजन। परिवार की परंपरा अलग हो तो उसी का पालन करें। नियमों का सार एकादशी व्रत की तारीख़ें में भी मिलता है।
व्रत का स्तर: निर्जला, फलाहारी या सात्त्विक
व्रत का स्तर अपनी सेहत और परंपरा के हिसाब से चुनिए: निर्जला, फलाहारी या केवल अन्न-रहित सात्त्विक भोजन। आम गृहस्थ फलाहारी या सात्त्विक रूप चुनते हैं, क्योंकि निर्जला कठिन है और हर किसी के लिए उचित नहीं। मधुमेह, गर्भावस्था या दवा पर निर्भर लोग डॉक्टर की सलाह के बिना कड़ा उपवास न करें। व्रत का मक़सद संयम है, शरीर को कष्ट देना नहीं। अपनी सेहत की ज्योतिषीय तस्वीर फ्री हेल्थ प्रेडिक्शन कैलकुलेटर से देख सकते हैं, पर चिकित्सा सलाह उससे नहीं बदलती।
एकादशी पर क्या खाएँ और क्या नहीं
फलाहारी एकादशी में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा और सेंधा नमक आम तौर पर चलते हैं, जबकि अनाज, दालें और सामान्य नमक छोड़े जाते हैं। लहसुन, प्याज़ और तामसिक भोजन नहीं लिया जाता। कुट्टू और सिंघाड़ा ताज़ा और भरोसेमंद दुकान से लें, क्योंकि बासी आटे से पेट ख़राब होने के मामले होते हैं। पारण के दिन पहले हल्का भोजन लें। आहार और प्रकृति के संबंध को आयुर्वेदिक दोष और लग्न का सेतु में पढ़ा जा सकता है।
उपाय 1: संतान गोपाल मंत्र का जप
क्या करना है: एकादशी की सुबह ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः का 11 बार जप। कब: सुबह स्नान के बाद, शांत जगह पर। ख़र्च कितना: कुछ नहीं। कितने दिन तक: एकादशी के दिन, और चाहें तो हर एकादशी पर कुछ महीने। आपके लिए क्यों: यह संतान की कामना का परंपरागत प्रार्थना-मंत्र है, और ग्यारह बार का नियम निभाना आसान है। माला या घंटों का पाठ ज़रूरी नहीं। संतान से जुड़ी अपनी कुंडली की तस्वीर फ्री संतान योग कैलकुलेटर बताता है।
उपाय 2: एकादशी पर सादा अन्न-दान
क्या करना है: एकादशी या पारण के दिन किसी ज़रूरतमंद परिवार या बच्चों को भोजन, दूध या फल देना। कब: पारण के बाद दिन में। ख़र्च कितना: 100 से 300 रुपये काफ़ी हैं। कितने दिन तक: उसी दिन से शुरू करके महीने में एक बार। आपके लिए क्यों: संतान की कामना में बच्चों की सेवा का भाव सीधा जुड़ता है, और फलदीपिका का गोचर अध्याय जप, व्रत और दान को शांति के साधनों में गिनता है।[3] पारिवारिक कर्तव्य की दिशा के लिए अमावस्या और तर्पण के उपाय भी देखे जा सकते हैं।
संतान की चाह: ज्योतिष और चिकित्सा साथ-साथ
संतान में देरी के कारण अक्सर चिकित्सकीय होते हैं, इसलिए सबसे पहला क़दम दोनों पति-पत्नी की डॉक्टरी जाँच है, और व्रत या ज्योतिष उसका विकल्प नहीं हैं। ज्योतिष केवल समय और दिशा के संकेत देता है, जैसे पाँचवें भाव की स्थिति, गुरु का बल और चल रही दशा। इसलिए पुत्रदा एकादशी को आस्था और संयम के अभ्यास की तरह रखिए, और जाँच-इलाज साथ चलाइए। समय का अंदाज़ा फ्री संतान योग कैलकुलेटर और संतान के जन्म की भविष्यवाणी से मिलता है।
कुंडली में संतान का भाव: पाँचवाँ भाव और गुरु
कुंडली में संतान का विचार मुख्यतः पाँचवें भाव, उसके स्वामी, गुरु और नवांश से होता है। पाँचवाँ भाव पुत्र-भाव कहलाता है, और उसका स्वामी बलवान हो तो संतान-पक्ष मज़बूत माना जाता है। गुरु को संतान का नैसर्गिक कारक माना जाता है, इसलिए गुरु की स्थिति और बल भी देखे जाते हैं। यह किसी एक योग का नहीं, पूरे चित्र का मामला है। विस्तार के लिए गुरु पुत्रकारक और संतान भाग्य और भाव क्या दर्शाते हैं पढ़ें, और अपनी स्थिति फ्री संतान योग कैलकुलेटर में जाँचें।
दशा और गोचर: संतान का समय कैसे देखें
संतान का समय अक्सर पाँचवें भाव या उसके स्वामी की दशा-अंतर्दशा में और गुरु के गोचर के शुभ भावों से जुड़ने पर देखा जाता है। फलदीपिका की सूची में गुरु चंद्र राशि से पाँचवें और नौवें भाव में शुभ गिना गया है।[4] गुरु 31 अक्टूबर 2026 से 24 जनवरी 2027 तक और फिर 26 जून 2027 से सिंह में रहेगा, जो मेष चंद्र राशि वालों के लिए पाँचवाँ और धनु वालों के लिए नौवाँ भाव है, इसलिए इन दोनों के लिए यह अपेक्षाकृत अनुकूल खिड़की मानी जाती है, पर दशा से मिलान ज़रूरी है। अपनी दशा फ्री दशा कैलकुलेटर में देखिए और समय की गहराई संतान विकास के लिए दशा-समय और गुरु गोचर 2026 में पाइए।
पितृ दोष और संतान: एक सावधान बात
कुछ परिवारों में संतान में देरी के साथ पितृ दोष की चर्चा होती है। यह चर्चा तभी सार्थक है जब कुंडली में सूर्य, नवम भाव और गुरु की स्थिति पहले जाँची गई हो, डर या अनुमान के आधार पर नहीं। पितृ दोष की जाँच फ्री पितृ दोष कैलकुलेटर से हो सकती है, और संबंध का विवरण पितृ दोष और संतान में है। कोई भी उपाय जाँच के बाद ही करें।
क्या पुत्रदा एकादशी केवल पुत्र के लिए है
नाम में पुत्र शब्द होने से कई लोग मानते हैं कि व्रत केवल बेटे के लिए है। परंपरा में पुत्र शब्द अक्सर संतान के अर्थ में लिया जाता है, और कई परिवार संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी यह व्रत रखते हैं। यह पन्ना किसी लिंग को श्रेष्ठ नहीं बताता और न संतान के जन्म की गारंटी देता है। संतान से जुड़े सवालों पर परिवार जीवन की भविष्यवाणी में भी विचार किया गया है।
व्रत में सावधानियाँ: किसे कठिन उपवास नहीं रखना चाहिए
गर्भवती स्त्रियों, स्तनपान कराने वालों, बुज़ुर्गों, बच्चों और गंभीर रोग वालों को कठिन उपवास की जगह फलाहार या एक वक़्त के हल्के भोजन से व्रत का भाव निभाना चाहिए। दवा समय पर लें। चक्कर, कमज़ोरी या शुगर गिरने जैसी स्थिति में व्रत तोड़ना सही है, और परंपरा में भी स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है। जिनकी मनःस्थिति कमज़ोर है उन्हें मानसिक स्वास्थ्य और चंद्र-शनि की गाइड पढ़कर भी अपना ध्यान रखना चाहिए।
पुत्रदा एकादशी की पाँच आम ग़लतियाँ
पहली, पिछले साल की तारीख़ दोहरा देना, जबकि 2026 में श्रावण पुत्रदा 23 अगस्त थी और 2027 में 12 अगस्त है। दूसरी, केवल अंग्रेज़ी तारीख़ देखकर पारण करना, जबकि द्वादशी की सीमा और हरि वासर देखना ज़रूरी है। तीसरी, अपने शहर की जगह दिल्ली की तिथि अपना लेना, ख़ासकर विदेश में। चौथी, व्रत को संतान की गारंटी मान लेना। पाँचवीं, कठिन उपवास से स्वास्थ्य बिगाड़ लेना। तिथियों का साल का हिसाब अमावस्या कब है 2026 में भी देख सकते हैं।
अपने शहर की तिथि कैसे जाँचें
पाँच कदम चलाइए: अपने शहर का सूर्योदय देखिए, उस समय की तिथि देखिए, एकादशी की शुरुआत और अंत लिखिए, द्वादशी का अंत देखिए और हरि वासर निकालिए। यह हिसाब हाथ से करना कठिन है, इसलिए फ्री शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर और आज का पंचांग का इस्तेमाल कीजिए। नतीजा आपके शहर की तारीख़ से मिले तो उसे मानिए, और दिल्ली की तारीख़ को सिर्फ़ संदर्भ रखिए।
कब व्यक्तिगत परामर्श लेना ठीक रहता है
अगर संतान को लेकर कई साल से चिंता है, चिकित्सकीय इलाज पहले से चल रहा है और आप ज्योतिष से समय की दिशा जानना चाहते हैं, तो कुंडली देखकर पाँचवें भाव, गुरु और दशा का मेल बनाना पड़ता है। Trikaal Vaani में यह देखरेख रोहित गुप्ता की रहती है और रीडिंग मानव-आधारित है। विकल्प सेवाएँ पन्ने पर हैं, और पहले चरण के तौर पर फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर से कुंडली बनवाना काम आता है।
निष्कर्ष: तारीख़ पक्की कीजिए, उम्मीद संयम से रखिए
पुत्रदा एकादशी 2027 में दो बार है: मंगलवार 19 जनवरी और गुरुवार 12 अगस्त, दिल्ली के सूर्योदय के हिसाब से। जनवरी में पारण की घड़ी परंपरा से पक्की कीजिए और विदेश में रहते हों तो अपने शहर का सूर्योदय देखिए। व्रत को आस्था और संयम का अभ्यास मानिए, चिकित्सा साथ रखिए और ज्योतिष से समय की दिशा लीजिए। आज ही फ्री संतान योग कैलकुलेटर से अपनी कुंडली की तस्वीर देखिए।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- पुत्रदा एकादशी
- पौष और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम, जिसे परंपरा में संतान की कामना से जोड़कर रखा जाता है।
- एकादशी
- चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि। तब चंद्रमा सूर्य से 120 से 132 अंश आगे होता है।
- पारण
- एकादशी व्रत को द्वादशी तिथि में तोड़ने की क्रिया।
- हरि वासर
- द्वादशी तिथि का पहला चौथाई हिस्सा, जिसमें पारण नहीं किया जाता।
- उदया तिथि
- वह तिथि जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो और जिससे उस दिन का व्रत तय होता है।
- द्वादशी
- एकादशी के बाद आने वाली बारहवीं तिथि, जिसमें पारण किया जाता है।
- पंचम भाव
- कुंडली का पाँचवाँ भाव, जिससे संतान, बुद्धि और पूर्व-पुण्य का विचार होता है।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
अर्काद् विनिःसृतः प्राचीं यद् यात्य् अहरहः शशी। तच् चान्द्रमानम् अंशैस् तु ज्ञेया द्वादशभिस् तिथिः॥
— Surya Siddhanta, अध्याय 14 — Manadhyaya (measures of time) · श्लोक 12 · trikaal-pothi-2026सूर्य से अलग होकर चंद्रमा रोज़ पूर्व की ओर जितना चलता है, वह चांद्र मान है। उसके 12 अंशों से एक तिथि जानी जाती है।
The Moon, departing from the Sun, moves eastward each day. That is the lunar measure, and a tithi is to be known by twelve degrees of it.
तिथिः करणम् उद्वाहः क्षौरं सर्वक्रियास् तथा। व्रतोपवासयात्राणां क्रिया चान्द्रेण गृह्यते॥
— Surya Siddhanta, अध्याय 14 — Manadhyaya (measures of time) · श्लोक 13 · trikaal-pothi-2026तिथि, करण, विवाह, क्षौर, सब क्रियाएँ तथा व्रत, उपवास और यात्रा की क्रिया चांद्र मान से ग्रहण की जाती है।
Tithi, karana, marriage, tonsure, all rites, and the rites of vows, fasting and journeys are taken by the lunar measure.
दशापहाराष्टकवर्गगोचरे ग्रहेषु नृणां विषमस्थितेष्वपि । जपेच्च तत्प्रीतिकरैः सुकर्मभिः करोति शान्तिं व्रतदानवन्दनैः ॥४९॥
— फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 49 · sastri-1950दशा, अपहार, अष्टकवर्ग और गोचर में ग्रह विषम स्थिति में हों तब भी उस ग्रह को प्रिय जप, सुकर्म, व्रत, दान और वंदन से शांति होती है।
Even when planets stand in unfavourable positions in dasha, apahara, ashtakavarga and transit, peace is brought by japa, good deeds that please the planet, vows, charity and worship.
सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः जीवस्त्वस्ततपोद्विपञ्चमगतो वक्रार्कजौ षट्त्रिगौ । सौम्यः षट्स्वचतुर्दशाष्टमगतः सर्वेऽप्युपान्त्यस्थिताः शुक्रः खास्तरिपून्विहाय शुभदस्तिग्मांशुवद्भोगिनौ ॥२॥
— फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्यायः · श्लोक 2 · sastri-1950चंद्र राशि से किन भावों में कौन सा ग्रह गोचर में शुभ है, यह बताया गया है। गुरु के लिए दूसरा, पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ और ग्यारहवाँ भाव शुभ हैं।
States the houses from the Moon in which each planet transit is favourable, and for Jupiter these are the 2nd, 5th, 7th, 9th and 11th.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
पुत्रदा एकादशी कब है?
2027 में पुत्रदा एकादशी दो बार है। पौष शुक्ल की मंगलवार 19 जनवरी 2027 को और श्रावण शुक्ल की गुरुवार 12 अगस्त 2027 को। दोनों तारीख़ें दिल्ली के सूर्योदय-नियम से हैं, अपने शहर के सूर्योदय से तिथि मिलाना बेहतर है।
19 जनवरी 2027 को एकादशी कितने बजे तक है?
दिल्ली के लिए एकादशी 18 जनवरी को सुबह 10:28 पर लगती है और 19 जनवरी को सुबह 07:50 तक रहती है। 19 जनवरी का सूर्योदय लगभग 07:18 पर है, इसलिए एकादशी सूर्योदय को छूती है और व्रत इसी दिन माना जाता है।
पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें?
12 अगस्त 2027 का पारण 13 अगस्त की सुबह हरि वासर (लगभग 09:35) बीतने के बाद और द्वादशी के अंत (14 अगस्त लगभग 05:21) से पहले करना सीधा रहता है। जनवरी में द्वादशी 20 जनवरी को 04:42 पर समाप्त होती है, इसलिए पारण का समय परंपरा से पक्का करें।
पुत्रदा एकादशी साल में दो बार क्यों आती है?
क्योंकि यह नाम दो अलग एकादशियों को मिला है: पौष शुक्ल पक्ष की और श्रावण शुक्ल पक्ष की। दोनों की तिथि, पूजा विधि और भाव एक जैसे हैं, बस महीना अलग है। इसलिए तारीख़ पूछते समय पहले महीना तय कीजिए।
विदेश में पुत्रदा एकादशी कब मनाएँ?
व्रत का दिन आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है। जनवरी 2027 में लंदन और ह्यूस्टन जैसे पश्चिमी शहरों में एकादशी सोमवार 18 जनवरी के सूर्योदय को मिलती है, जबकि दिल्ली में 19 जनवरी को। 12 अगस्त 2027 दिल्ली और ह्यूस्टन दोनों के लिए बैठता है।
हरि वासर क्या है?
द्वादशी तिथि के पहले चौथाई हिस्से को हरि वासर कहते हैं। इसमें पारण नहीं किया जाता। इसलिए पारण द्वादशी में तो होता है, पर हरि वासर बीतने के बाद। 13 अगस्त 2027 को यह लगभग 09:35 तक है।
क्या पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की गारंटी देता है?
नहीं। यह आस्था, संयम और सेवा का अभ्यास है और कथा-परंपरा का हिस्सा है, परिणाम की गारंटी नहीं। संतान में देरी के चिकित्सकीय कारण भी होते हैं, इसलिए डॉक्टरी जाँच साथ रखिए और ज्योतिष से केवल समय की दिशा लीजिए।
क्या यह व्रत केवल पुत्र के लिए है?
नाम में पुत्र शब्द है, पर परंपरा में इसे अक्सर संतान के अर्थ में लिया जाता है। कई परिवार संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी यह व्रत रखते हैं। किसी लिंग को श्रेष्ठ बताना इस व्रत का भाव नहीं है।
पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहारी व्रत में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक आम तौर पर चलते हैं। अनाज, दालें, सामान्य नमक, लहसुन और प्याज़ छोड़े जाते हैं। मधुमेह या दवा वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही उपवास करें।
संतान के लिए कुंडली में क्या देखा जाता है?
मुख्यतः पाँचवाँ भाव, उसका स्वामी, गुरु की स्थिति और बल, नवांश और चल रही दशा-अंतर्दशा। गुरु का गोचर चंद्र राशि से पाँचवें या नौवें भाव में हो तो उसे अनुकूल माना जाता है। पूरी तस्वीर कुंडली से ही बनती है, एक योग से नहीं।
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