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इस महीने की एकादशी कब है 2026: तिथि व पारण

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

अगली एकादशी इंदिरा एकादशी है, जो मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 को पड़ेगी और दिल्ली में पारण 7 अक्टूबर को सुबह 06:17 के बाद होगा। इसके बाद पापांकुशा 22 अक्टूबर, रमा 5 नवंबर, देवउठनी 20 या 21 नवंबर, उत्पन्ना 4 दिसंबर और मोक्षदा 20 दिसंबर को आएगी। तारीखें दिल्ली के सूर्योदय की तिथि पर हैं, अपने शहर का पंचांग मिलाएँ।

Deep Dive Analysis

इस महीने की एकादशी कब है: 2026 की बाकी तारीखें एक नज़र में

अगर आप जानना चाहते हैं कि अगला एकादशी व्रत कब है, तो दिल्ली के लिए उत्तर है मंगलवार 6 अक्टूबर 2026, यानी इंदिरा एकादशी, और व्रत का पारण 7 अक्टूबर को हरि वासर समाप्त होने के बाद होता है। साल ख़त्म होने से पहले छह और एकादशियाँ आती हैं: पापांकुशा 22 अक्टूबर, रमा 5 नवंबर, देवउठनी 20 या 21 नवंबर, उत्पन्ना 4 दिसंबर और मोक्षदा 20 दिसंबर। कैलेंडर वर्ष 2026 में कुल 24 एकादशियाँ हैं, जिनमें अधिक मास की जोड़ी पद्मिनी और परमा भी शामिल है। अपने शहर का सटीक समय आज का पंचांग में देखें और सबसे बड़ी एकादशी के लिए हमारा देवउठनी एकादशी 2026 पेज खोलें।

एकादशी क्या है और महीने में दो बार क्यों आती है

एकादशी चंद्र पखवाड़े की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए यह एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में आती है। तिथि का मतलब वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है। शुक्ल पक्ष में एकादशी तब शुरू होती है जब यह दूरी 120 अंश हो जाए और कृष्ण पक्ष में तब जब 300 अंश हो जाए। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और व्रत में हल्का अन्न-रहित भोजन, पूजा और अगली सुबह पारण किया जाता है। तिथि समझने के लिए पंचांग और चौघड़िया की गाइड पढ़ें।

दिल्ली के लिए एकादशी की तारीख हम कैसे निकालते हैं

हम तारीख़ें किसी दूसरे कैलेंडर से नहीं उतारते। हर एकादशी के लिए हम दिल्ली (28.61 उत्तर, 77.21 पूर्व) के हिसाब से वह क्षण निकालते हैं जब सूर्य-चंद्र की दूरी 120 या 300 अंश और फिर 132 या 312 अंश पार करती है, और उसके बाद स्थानीय सूर्योदय पर तिथि देखते हैं। मुख्य तारीख़ों को हमने ओपन एफेमेरिस (JPL DE440) से मिलाया: 6 अक्टूबर 2026 को 02:08 IST पर सूर्य-चंद्र दूरी 299.9998 अंश और 23 अगस्त 2026 को 02:01 IST पर 120.001 अंश मिली। अक्टूबर से दिसंबर की आगामी तारीख़ों के लिए छपे पंचांगों से हमारा तिथि समय लगभग दो मिनट के भीतर मिलता है। सूर्योदय में कुछ मिनट का फ़र्क़ सामान्य है।

2026 में बची एकादशियाँ: दिल्ली की तिथि-अवधि

साल की बाकी एकादशियों की तिथि-अवधि (IST) इस प्रकार है। इंदिरा: 6 अक्टूबर 02:08 से 7 अक्टूबर 00:35। पापांकुशा: 21 अक्टूबर 14:13 से 22 अक्टूबर 14:49। रमा: 4 नवंबर 11:04 से 5 नवंबर 10:36। देवउठनी: 20 नवंबर 07:16 से 21 नवंबर 06:32। उत्पन्ना: 3 दिसंबर 23:04 से 4 दिसंबर 23:45। मोक्षदा: 19 दिसंबर 22:10 से 20 दिसंबर 20:15। व्रत का दिन वही है जिसके सूर्योदय पर एकादशी हो, यानी 6 अक्टूबर, 22 अक्टूबर, 5 नवंबर, 4 दिसंबर और 20 दिसंबर। देवउठनी अलग मामला है, जिसे आगे समझाया है। किसी भी कार्य की तारीख़ तय करने से पहले शुभ मुहूर्त गाइड देखें।

इंदिरा एकादशी 2026: मंगलवार 6 अक्टूबर

इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी है और पितृ पक्ष के भीतर पड़ती है, इसीलिए परिवार इसे पूर्वजों की स्मृति से जोड़ते हैं। तिथि 6 अक्टूबर को 02:08 IST पर शुरू होकर 7 अक्टूबर को 00:35 IST पर समाप्त होती है, यानी दिल्ली में 6 अक्टूबर का पूरा दिन एकादशी रहता है (सूर्योदय 06:16)। पारण बुधवार 7 अक्टूबर को 06:17 के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर किया जाए और द्वादशी 23:17 पर समाप्त होने से बहुत पहले। पितृ पक्ष के श्राद्ध-क्रम के लिए हमारा पितृ पक्ष 2026 लेख और पितृ पक्ष पेज देखें।

पापांकुशा एकादशी 2026: गुरुवार 22 अक्टूबर

पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी है और दशहरे के ठीक बाद आती है। तिथि 21 अक्टूबर को 14:13 IST से 22 अक्टूबर को 14:49 IST तक रहती है। 22 अक्टूबर को दिल्ली का सूर्योदय 06:26 है, जो तिथि के भीतर है, इसलिए व्रत का दिन 22 अक्टूबर है। पारण शुक्रवार 23 अक्टूबर को 06:26 के बाद और द्वादशी समाप्त होने (14:37) से पहले कर लें। चूँकि तिथि 21 की दोपहर में शुरू होती है, 21 की शाम भारी भोजन से बचकर हल्का रखना दशमी-वेध से बचने का व्यावहारिक अर्थ है। पास के दिनों के लिए दशहरा 2026 पेज और शरद नवरात्रि पेज देखें।

रमा एकादशी 2026: गुरुवार 5 नवंबर

रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी है और दिवाली से ठीक पहले आती है। तिथि 4 नवंबर को 11:04 IST पर शुरू होकर 5 नवंबर को 10:36 IST पर समाप्त होती है। 5 नवंबर का सूर्योदय 06:35 है, इसलिए व्रत का दिन 5 नवंबर है, भले ही तिथि 4 की सुबह के बाद शुरू होती हो, इसीलिए कई पंचांग 5 नवंबर छापते हैं। पारण शुक्रवार 6 नवंबर को 06:36 के बाद करें और द्वादशी समाप्त होने (10:31) से पहले पूरा करें, यानी यह सुबह की छोटी अवधि है। दिवाली सप्ताह की रसोई की योजना इसी हिसाब से बनाएँ, और आगे की तारीख़ों के लिए दिवाली 2026 पेज खोलें।

देवउठनी एकादशी 2026: 20 और 21 नवंबर दोनों क्यों दिखते हैं

देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी चातुर्मास का अंत करती है और शादी के मौसम का द्वार खोलती है। तिथि 20 नवंबर को 07:16 IST से 21 नवंबर को 06:32 IST तक है। 20 नवंबर का सूर्योदय लगभग 06:47 है, जो तिथि शुरू होने से 29 मिनट पहले है, और 21 नवंबर का सूर्योदय लगभग 06:48 है, जो तिथि ख़त्म होने के 16 मिनट बाद है (कुछ छपे पंचांग 06:52 तक दिखाते हैं), यानी किसी भी सूर्योदय पर एकादशी नहीं है। इसी कारण कैलेंडर अलग-अलग तारीख़ देते हैं: कुछ 20 नवंबर, कुछ 21 नवंबर। हमारा त्योहार पेज स्मार्त पालन के लिए द्वादशी-दिन का पाठ लेता है। अपने कुल की परंपरा या पुरोहित की बात मानें, और शाम की रस्मों के लिए देवउठनी एकादशी पेज तथा तुलसी विवाह 2026 देखें।

उत्पन्ना एकादशी 2026: शुक्रवार 4 दिसंबर

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी है और परंपरा में उसी दिन से एकादशी व्रत का आरंभ माना जाता है। तिथि 3 दिसंबर को 23:04 IST से 4 दिसंबर को 23:45 IST तक है। 4 दिसंबर का सूर्योदय 06:58 है, जो तिथि के भीतर है, इसलिए व्रत का दिन 4 दिसंबर है। पारण शनिवार 5 दिसंबर को 06:59 के बाद, और द्वादशी 6 दिसंबर को 00:53 तक रहती है, इसलिए आपके पास पूरा दिन है। पहली बार व्रत शुरू करने वालों के लिए यह सर्दी की सबसे आसान एकादशी है, क्योंकि दिन छोटा और मौसम सुहावना होता है। हल्के उपवास का नमूना जन्माष्टमी व्रत नियम में देखें।

मोक्षदा एकादशी 2026: रविवार 20 दिसंबर

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है और लोक-परंपरा में गीता से जुड़ा दिन मानी जाती है। तिथि 19 दिसंबर को 22:10 IST से 20 दिसंबर को 20:15 IST तक है। 20 दिसंबर का सूर्योदय 07:08 है, जो तिथि के भीतर है, इसलिए व्रत का दिन 20 दिसंबर है। पारण सोमवार 21 दिसंबर को 07:09 के बाद करें, द्वादशी 17:37 तक रहती है इसलिए समय की चिंता नहीं। चूँकि यह दिन गीता जयंती के आसपास पड़ता है, अगर आपके घर में उस सप्ताह गीता पाठ होता है तो कार्तिक पूर्णिमा की तिथि का पेज और पंचांग साथ रखें। यह कैलेंडर वर्ष 2026 की आख़िरी एकादशी है।

2027 की एकादशी तारीखें: पहली तिमाही का पूर्वावलोकन

2027 के आरंभ में दिल्ली के सूर्योदय नियम से व्रत-दिन ये रहेंगे: सफला 3 जनवरी, पौष पुत्रदा 19 जनवरी, षट्तिला 2 फ़रवरी, जया 17 फ़रवरी, विजया 3 मार्च (तिथि दो सूर्योदय छूती है, 3 और 4 मार्च), आमलकी 18 मार्च, पापमोचनी 2 अप्रैल। इन्हें हर तारीख़ से लगभग दो सप्ताह पहले तक अस्थायी मानें, क्योंकि तब हम तिथि-अवधि और पारण समय फिर से निकालते हैं। इन्हीं महीनों की शादी की तारीख़ें विवाह मुहूर्त 2027 पेज पर हैं, जिसे इन व्रत-दिनों के साथ पढ़ना उपयोगी है।

2026 में बीत चुकी एकादशी तारीखें

संदर्भ के लिए, पहले की 2026 एकादशियाँ ये थीं: षट्तिला 14 जनवरी, जया 29 जनवरी, विजया 13 फ़रवरी, आमलकी 27 फ़रवरी, पापमोचनी 15 मार्च, कामदा 29 मार्च, वरूथिनी 13 अप्रैल, मोहिनी 27 अप्रैल, अपरा 13 मई, पद्मिनी 26 या 27 मई, परमा 11 जून, निर्जला 25 जून, योगिनी 10 जुलाई, देवशयनी 25 जुलाई, कामिका 9 अगस्त, पुत्रदा 23 अगस्त, अजा 7 सितंबर और परिवर्तिनी 22 सितंबर। पद्मिनी दो सूर्योदय छूती है और योगिनी किसी को नहीं, इसलिए इन पर भी देवउठनी जैसा दो-तारीख़ का नोट लागू है। बीच के चातुर्मास का ज़िक्र जन्माष्टमी पेज पर भी मिलता है।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी: दो तारीख़ें क्यों दिखती हैं

स्मार्त परिवार आमतौर पर वह दिन लेते हैं जिसके सूर्योदय पर एकादशी हो, जबकि वैष्णव परंपराएँ इस बात पर अधिक कड़ी हैं कि तिथि पर दशमी का कोई स्पर्श न हो, और जब दो दिन टकराएँ तो अक्सर बाद वाला दिन लेती हैं। इसीलिए जिस साल तिथि दो सूर्योदय के बीच पड़ती है, एक कैलेंडर में 22 अक्टूबर और किसी वैष्णव संप्रदाय के लिए दूसरा दिन दिख सकता है। दोनों ग़लत नहीं, नियम अलग हैं। अगर आपके गुरु या मंदिर की परंपरा है तो उसे मानें। कोई परंपरा न हो तो यहाँ बताया स्मार्त सूर्योदय पाठ सबसे सरल आधार है। पूर्वजों से जुड़े व्रत के लिए पितृ दोष उपाय गाइड भी पढ़ें।

दशमी-विद्ध एकादशी का नियम: कब एकादशी छोड़ी जाती है

शास्त्रीय परंपरा कहती है कि जिस एकादशी पर आप व्रत रखें वह पिछली दशमी से मिली हुई न हो। उत्तरकालामृत में कहा गया है कि दशमी-विद्ध एकादशी को विष की तरह छोड़ दें, व्रत द्वादशी को करके उसके बाद पारण करें, और जब एकादशी दशमी के स्पर्श से मुक्त हो तो वही वैष्णव-सम्मत मत है [2]। त्रिकाल वाणी की व्याख्या: अगर एकादशी दशमी की अंतिम घड़ियों में शुरू होकर अगले सूर्योदय तक भी रहे तो सूर्योदय वाला दिन लें, और दशमी के अंतिम घंटों में पूरा भारी भोजन न करें। यह पिछली शाम के अनुशासन का नियम है, चिंता का कारण नहीं।

जब एकादशी किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती

कभी-कभी छोटी एकादशी एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाती है, तब कोई भी दिन उसे नहीं रखता। देवउठनी 2026 और योगिनी एकादशी 2026 इसके उदाहरण हैं। उत्तरकालामृत में दो दिनों में से चयन और बाद के दिन एकादशी न होने की स्थिति का विचार है, जहाँ द्वादशी के पालन की ओर संकेत मिलता है [1]। व्यवहार में इसका मतलब है कि दो ईमानदार उत्तर मौजूद हैं और छपे पंचांग बँट जाते हैं। हम तिथि-अवधि और सूर्योदय पाठ दोनों बताते हैं, स्मार्त दिन का नाम लेते हैं, और कहते हैं कि अपने कुल या पुरोहित की परंपरा मानें। अपने शहर के लिए दैनिक पंचांग देखें।

एकादशी पारण के नियम: द्वादशी, हरि वासर और समय

पारण का अर्थ है व्रत खोलना। सामान्य नियम है कि द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग) समाप्त होने पर, और द्वादशी ख़त्म होने से पहले भोजन करें। अगर द्वादशी बहुत जल्दी ख़त्म हो जाए, जैसे रमा में 6 नवंबर को, तो अवधि छोटी होती है और पहला भोजन सूर्योदय के तुरंत बाद लेना चाहिए। शुरुआत जल से करें, परंपरा हो तो तुलसी पत्र लें, फिर हल्का अनाज वाला भोजन। आधी रात में या हरि वासर के बीच पारण न करें। अपने सूर्योदय का समय पंचांग में और चौघड़िया की बुनियाद चौघड़िया गाइड में है।

एकादशी में क्या खाएँ और क्या नहीं

परंपरागत पद्धति में चावल, गेहूँ, दालें और अधिकांश अनाज, साथ ही प्याज, लहसुन और मांसाहार छोड़ा जाता है, और फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक और आलू आम तौर पर चलते हैं। घर की एक सरल योजना है: सुबह फल और दूध, दोपहर में कुट्टू की रोटी और आलू, दिन भर चाय या पानी। तेल कम रखें और भोजन छोटा। उद्देश्य शरीर और मन को शांत रखना है, कठिन परीक्षा नहीं, इसलिए इतना खाएँ कि स्थिर रहें। व्रत-भोजन की तुलना के लिए गणेश व्रत के नियम पढ़ें और उत्सव सप्ताह के भोजन के लिए धनतेरस 2026 पेज खोलें।

निर्जला, फलाहारी और सात्त्विक व्रत: अपना स्तर चुनें

व्रत के तीन आम स्तर हैं। निर्जला यानी अन्न और जल दोनों नहीं, और यह साल की एक निर्जला एकादशी पर स्वस्थ वयस्क के लिए है। फलाहारी यानी केवल फल, दूध और मेवे। सात्त्विक या अन्न-त्याग यानी बिना अनाज का सादा शाकाहारी भोजन। अधिकतर लोगों के लिए बीच का रास्ता सबसे ठीक रहता है। स्तर एक रात पहले तय करें, दिन के बीच भूख लगने पर नहीं, और घर में बता दें ताकि दोपहर का खाना बहस न बने। किसी और की नक़ल करने के बजाय अपनी दिनचर्या, दवा के समय और नींद को देखकर स्तर चुनें। मूड और भूख में लोगों का फ़र्क़ क्यों होता है, इसके लिए चंद्र राशि की समझ मदद करती है, जिसे राशि कैलकुलेटर से देखें।

एकादशी पर किन्हें उपवास नहीं रखना चाहिए

बच्चे, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, नियमित दवा लेने वाले, मधुमेह या अम्लता वाले लोग और बीमारी से उबर रहे लोग कठिन उपवास न रखें। परंपरा स्वयं हल्का पालन मानती है, जैसे एक समय फलाहार, अतिरिक्त पूजा या दान, और बहुत परिवार यही करते हैं। व्रत के लिए दवाएँ न छोड़ें। अगर डॉक्टर ने समय पर खाने को कहा है तो उसे निभाएँ और दिन का भाव जप, छोटे दान या एक घंटे के मौन से रखें। भक्ति थाली से बड़ी है, और सौम्य दिन भी पूरा व्रत है।

घर पर एकादशी पूजा विधि: आठ चरणों में

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। साफ़ दीपक और विष्णु या शालिग्राम का चित्र रखें। जल, पीले फूल, तुलसी पत्र और थोड़ा फल अर्पित करें। उस एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। जो विष्णु नाम या मंत्र आप जानते हों, उसका 11 या 108 जप करें। दिन भर विवाद और स्क्रीन से यथासंभव दूर रहें। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएँ। अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण करें और पहला भाग किसी और को दें। लंबे नमूने के लिए इसे जन्माष्टमी व्रत नियम से मिलाकर देखें।

एकादशी और चंद्रमा: ज्योतिष का तर्क

ज्योतिष में तिथि चंद्र-आधारित माप है और चंद्रमा मन, भूख और नींद का कारक है, इसलिए शरीर को हल्का करने वाला दिन मन को स्थिर करने वाला माना जाता है। ग्यारहवीं तिथि वह क्षण है जब चंद्रमा सूर्य से लगभग एक-तिहाई चक्र आगे होता है, इसलिए शुक्ल पक्ष में चमक अधिक और कृष्ण पक्ष में घटती हुई होती है। त्रिकाल वाणी की व्याख्या सरल है: एकादशी को हल्के भोजन और शांत सोच का निर्धारित दिन मानें, कुंडली सुधारने का साधन नहीं। अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति जन्म कुंडली कैलकुलेटर और नक्षत्र कैलकुलेटर से देखें।

चातुर्मास और अधिक मास 2026 में एकादशी

चातुर्मास देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) से देवउठनी एकादशी (20 या 21 नवंबर 2026) तक के चार महीने हैं, जिनमें विष्णु के शयन की मान्यता है और विवाह रुके रहते हैं। 2026 में ज्येष्ठ में अधिक मास भी था, जिसने अतिरिक्त जोड़ी पद्मिनी (26 या 27 मई) और परमा (11 जून) जोड़ दी, इसलिए चंद्र वर्ष में 26 एकादशियाँ हुईं जबकि कैलेंडर वर्ष में 24 आती हैं। इस ऋतु के व्रत-नियमों की सूची के लिए जन्माष्टमी पेज और अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा देखें, जो इसी मौसम में पड़ते हैं।

एकादशी और पितृ पक्ष: इंदिरा का संबंध

इंदिरा एकादशी अकेली ऐसी एकादशी है जो पितृ पक्ष के भीतर पड़ती है, और पुरानी सीख है कि पूर्वजों को ध्यान में रखकर रखा गया व्रत उन्हें अर्पित होता है। व्यवहार में इसका अर्थ है सरल व्रत, तुलसी के पास जल की कुछ बूँदें और माता-पिता या दादा-दादी के नाम से छोटा दान। यह उचित तिथि पर तर्पण या श्राद्ध का विकल्प नहीं है। घर पर तर्पण करना चाहें तो अमावस्या तर्पण की विधि और सर्व पितृ अमावस्या का महत्व पढ़ें, और चंद्रमा से जुड़े पितृ भाव के लिए चंद्र व पितृ दोष देखें।

एकादशी, देवउठनी और शादी का कैलेंडर

देवशयनी के बाद विवाह रुकते हैं और देवउठनी के बाद फिर शुरू होते हैं, इसलिए यह एक एकादशी पूरे मौसम का द्वार खोलती है। दिल्ली के लिए पहले मुहूर्त तुलसी विवाह की शाम के कुछ बाद आते हैं, और तारीख़ें हमारे विवाह मुहूर्त 2026 पेज पर हैं। अगर शादी मन में है तो अगले ठिकाने कुंडली मिलान और शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर हैं। केवल इसलिए तारीख़ तय न करें कि देवउठनी बीत गई, पंचक, भद्रा और वर-वधू की अपनी कुंडलियाँ भी जाँचें, और सूची के लिए विवाह मुहूर्त 2026-27 लेख पढ़ें।

आज से शुरू होने वाला एक सरल एकादशी उपाय

क्या करना है: फलाहारी दिन, एक दीपक और किसी विष्णु नाम का 11 बार जप। कब: अगली एकादशी, मंगलवार 6 अक्टूबर, सूर्योदय से बुधवार सुबह पारण तक। कितने का: मुफ़्त से बीस रुपये, फल और एक फूल के लिए। कितने दिन: पहले एक एकादशी, फिर अच्छा लगे तो एक महीने तक हर एकादशी, यानी लगभग दो व्रत। आपके लिए क्यों: यह चंद्रमा को स्थिर करता है, जो हर कुंडली में मन और नींद तय करता है, और व्यस्त पखवाड़े में एक तय ठहराव देता है। न रत्न चाहिए, न डर, न लंबा पाठ, और तबीयत ठीक न लगे तो रुककर खा लें।

एकादशी की तारीख़ को लेकर आम गलतियाँ

हर साल चार ग़लतियाँ दिखती हैं। लोग किसी दूसरे शहर की तारीख़ ले लेते हैं और भूल जाते हैं कि सूर्योदय से निर्णय बदलता है। हरि वासर के दौरान व्रत खोल देते हैं। तिथि के आरंभ समय को ही व्रत का आरंभ मान लेते हैं, जबकि दिन सूर्योदय से गिना जाता है। और जब दो सूर्योदय के बीच तिथि हो तब भी हर कैलेंडर को बराबर मान लेते हैं। बेहतर आदत है कि एक सप्ताह पहले तिथि-अवधि, अपना सूर्योदय और पारण समय नोटबुक में एक पंक्ति में लिख लें। अपने शहर के लिए दैनिक पंचांग और असमय व्रत खोलने से बचने को चौघड़िया गाइड देखें।

अपने शहर की एकादशी कैसे जाँचें

पंचांग पेज पर अपना शहर चुनें, सूर्योदय पर तिथि देखें और एकादशी का आरंभ-अंत पढ़ें। अगर सूर्योदय पर तिथि है तो वही आपका व्रत-दिन है। अगर वह सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो तो अपने कुल की परंपरा लागू करें। द्वादशी का अंत जोड़ लें ताकि अंतिम पारण-क्षण पता रहे। दिल्ली से बहुत पूर्व या पश्चिम के शहरों में सूर्योदय एक घंटे तक आगे-पीछे होता है, जो निर्णय बदल सकता है। हम डिफ़ॉल्ट रूप से दिल्ली के लिए निकालते हैं, आप अपने शहर के लिए पंचांग खोलें या जन्म-कुंडली के हिसाब से तारीख़ें शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से पूछें।

आपकी जन्म तिथि और एकादशी: एक व्यक्तिगत जाँच

अगर आपका जन्म एकादशी को हुआ है या कुंडली में चंद्रमा ग्यारहवीं तिथि में था, तो लोक-परंपरा में यह दिन आपके लिए ख़ास माना जाता है, हालाँकि कोई नियम सामान्य पालन से अधिक नहीं माँगता। जन्म-तिथि और नक्षत्र आप एक मिनट में जन्म कुंडली कैलकुलेटर से देख सकते हैं। जो मिले उसे कदम-दर-कदम पढ़ने के लिए दशा कैलकुलेटर और नक्षत्र कैलकुलेटर का सहारा लें, और सप्ताह भर की तारीख़ों को विवाह-मुंडन-नामकरण मुहूर्त 2026-27 से मिलाएँ।

एकादशी व्रत तारीखें 2026-27: त्वरित सूची

दिल्ली के लिए व्रत-दिन पहले: इंदिरा 6 अक्टूबर 2026, पापांकुशा 22 अक्टूबर, रमा 5 नवंबर, देवउठनी 20 या 21 नवंबर, उत्पन्ना 4 दिसंबर, मोक्षदा 20 दिसंबर, सफला 3 जनवरी 2027, पौष पुत्रदा 19 जनवरी, षट्तिला 2 फ़रवरी, जया 17 फ़रवरी, विजया 3 या 4 मार्च, आमलकी 18 मार्च, पापमोचनी 2 अप्रैल। इस सूची को फ़ोन में रखें और हर तारीख़ से दो सप्ताह पहले दोबारा जाँचें, क्योंकि तब हम पारण-अवधि अपडेट करते हैं। इन्हीं एकादशियों के बीच पड़ने वाली पूर्णिमा के लिए कार्तिक पूर्णिमा 2026 पेज रखें।

करवा चौथ, दिवाली और एकादशी: त्योहार का महीना कैसे सँभालें

अक्टूबर और नवंबर व्यस्त हैं: इंदिरा, करवा चौथ, पापांकुशा, धनतेरस, दिवाली, रमा और देवउठनी लगभग छह सप्ताह में आते हैं। अगर आप कई व्रत रखते हैं तो ताक़त बाँटकर चलें: इंदिरा पर फलाहार, घर की परंपरा हो तो करवा चौथ पर पूरा व्रत, और दिवाली की रसोई शुरू होने से पहले रमा पर हल्का दिन। करवा चौथ 2026 पेज और धनतेरस 2026 पेज इसके बग़ल में खोलकर रखें। इससे एक ही सप्ताह में दो कठिन व्रत जोड़ देने की आम ग़लती टल जाती है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

एकादशी
चंद्र पखवाड़े की ग्यारहवीं तिथि, जिस पर विष्णु पूजा और हल्का उपवास किया जाता है।
पारण
एकादशी का व्रत द्वादशी पर सूर्योदय और हरि वासर के बाद खोलना।
हरि वासर
द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग, जिसमें परंपरा से व्रत नहीं खोला जाता।
दशमी-विद्ध
पिछली दशमी तिथि से मिली हुई एकादशी, जिसे शास्त्रीय नियम व्रत के लिए टालने को कहते हैं।
स्मार्त और वैष्णव
एकादशी का दिन चुनने के दो नियम-समूह: स्मार्त में सूर्योदय की तिथि, वैष्णव में दशमी-मुक्त कड़ा पाठ।
तिथि
चंद्र दिन, यानी चंद्रमा को सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ने में लगा समय।
देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल की वह एकादशी जो चातुर्मास का अंत करती है, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं।
अधिक मास
चंद्र और सौर कैलेंडर मिलाने के लिए जोड़ा गया अतिरिक्त चंद्र मास, जो दो और एकादशियाँ जोड़ता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑उत्तरकालामृतउत्तरकालामृतम् · Kalidasa
    एकादश्युभयत्र चेन्न परतो यद् द्वादशी तां चरेत् पूर्वा स्याद्यदि तत्परां च यतिराट् कुर्वीत वैधन्यभाक् । युग्मं चापि परत्र नास्ति यदि साप्येकादशीद्वादशी पूर्वैव प्रभवेत्तदा यदि भवेत्सा द्वादशी सम्मता ॥४६॥
    — उत्तरकालामृत, अध्याय 9 — कर्मकाण्ड खण्ड · श्लोक 46 · github-sanskrittexts

    एकादशी दोनों दिन हो या किसी भी दिन न मिले, तब कौन-सा दिन लें — इसका निर्णय है; बाद के दिन एकादशी न हो तो द्वादशी का पालन बताया गया है।

    Addresses which day to keep when Ekadashi falls on both days or on neither, and points to Dwadashi when Ekadashi is absent on the later day.

  2. [2]↑उत्तरकालामृतउत्तरकालामृतम् · Kalidasa
    विद्धा चेद्विषवद्विमुच्य परतो नैकादशी यद्यपि द्वादश्यां समुपोष्य कर्तुमुचितं तस्मात्परं पारणाम् । एतद्वैष्णवसम्मतं यदि दशम्यावेधहीनां परं द्वादश्याः परतोऽपि सा यदि तदा सा साधनीया बुधैः ॥४७॥
    — उत्तरकालामृत, अध्याय 9 — कर्मकाण्ड खण्ड · श्लोक 47 · github-sanskrittexts

    दशमी-विद्ध एकादशी को विष की तरह छोड़ा जाए; द्वादशी को उपवास कर उसके बाद पारण — यह वैष्णव-सम्मत मत है।

    A Dashami-tainted Ekadashi is to be left aside like poison; the fast is kept on Dwadashi with parana after it, which is the Vaishnava-accepted view.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

अक्टूबर 2026 में एकादशी व्रत कब है?

दिल्ली के लिए अक्टूबर 2026 में दो एकादशियाँ हैं: मंगलवार 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी और गुरुवार 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी। इंदिरा का पारण 7 अक्टूबर को सुबह 06:17 के बाद और पापांकुशा का 23 अक्टूबर को 06:26 के बाद है।

नवंबर 2026 में एकादशी कब है?

रमा एकादशी गुरुवार 5 नवंबर 2026 को है और देवउठनी एकादशी परंपरा के अनुसार 20 या 21 नवंबर को। रमा का पारण दिल्ली में 6 नवंबर को सुबह 06:36 के बाद और 10:31 से पहले करें।

एकादशी 6 अक्टूबर को है या 7 अक्टूबर 2026 को?

दिल्ली में एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को 02:08 IST से 7 अक्टूबर को 00:35 IST तक है। 6 अक्टूबर का सूर्योदय तिथि के भीतर है, इसलिए व्रत का दिन 6 अक्टूबर और पारण 7 अक्टूबर है।

साल में कितनी एकादशियाँ होती हैं?

सामान्य वर्ष में 24, यानी हर चंद्र मास में दो। अधिक मास वाले वर्ष में चंद्र वर्ष में 26 होती हैं। कैलेंडर वर्ष 2026 में 24 दिखती हैं क्योंकि अधिक मास की जोड़ी पद्मिनी और परमा उसी में आ गई।

एकादशी का व्रत कब खोलना चाहिए?

द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद, हरि वासर यानी द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग समाप्त होने पर, और द्वादशी ख़त्म होने से पहले। शुरुआत जल और हल्के भोजन से करें, रात में पारण न करें।

क्या एकादशी में पानी पी सकते हैं?

हाँ, निर्जला को छोड़कर हर रूप में। फलाहारी और सात्त्विक व्रत में जल, दूध, छाछ और जूस चलते हैं। निर्जला एकादशी ही अकेली बिना जल वाली है और केवल स्वस्थ वयस्कों के लिए है।

अलग-अलग कैलेंडर में एकादशी की तारीख़ अलग क्यों होती है?

क्योंकि वे अलग शहर, सूर्योदय की परिभाषा और नियम (स्मार्त या वैष्णव) लेते हैं। जब एकादशी दो सूर्योदय छूती है या एक भी नहीं, तब दो तारीख़ें स्वीकार्य हैं। अपने कुल या पुरोहित की परंपरा मानें।

हरि वासर क्या है और क्यों ज़रूरी है?

हरि वासर द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग है। परंपरा में इस दौरान एकादशी का व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण उसके समाप्त होने तक रुकता है। समय उस दिन की द्वादशी की लंबाई पर निर्भर करता है।

किन्हें एकादशी का उपवास नहीं रखना चाहिए?

बच्चे, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, नियमित दवा या मधुमेह वाले और बीमार लोग कठिन उपवास की जगह हल्का पालन करें, जैसे एक फलाहार, प्रार्थना या दान।

देवउठनी एकादशी 2026 में 20 नवंबर को है या 21 को?

दिल्ली में एकादशी तिथि 20 नवंबर 07:16 से 21 नवंबर 06:32 तक है और किसी सूर्योदय को नहीं छूती। कुछ कैलेंडर 20 नवंबर देते हैं, हमारा स्मार्त पेज 21 नवंबर लेता है। अपनी परंपरा मानें।

2027 की अगली एकादशियाँ कौन-सी हैं?

2027 की पहली एकादशियाँ सफला 3 जनवरी, पौष पुत्रदा 19 जनवरी और षट्तिला 2 फ़रवरी हैं, जिन्हें हर तारीख़ से लगभग दो सप्ताह पहले दोबारा जाँचा जाएगा।

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