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तुलसी विवाह 2026 Kab Hai? मुहूर्त, विधि

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

तुलसी विवाह 2026 शनिवार, 21 नवंबर को है। उस दिन सूर्योदय पर कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि रहती है और पूजा शाम को, दिल्ली में सूर्यास्त (लगभग 17:21) के बाद प्रदोष-काल में की जाती है। देवउठनी एकादशी की तिथि 20 नवंबर की सुबह से 21 नवंबर की सुबह तक चलती है। अपने शहर का सूर्यास्त पंचांग से मिलाएँ।

Deep Dive Analysis

तुलसी विवाह 2026 कब है: तारीख, वार और तिथि

तुलसी विवाह 2026 की तारीख शनिवार, 21 नवंबर है। हमने दिल्ली (28.6139° उत्तर, 77.209° पूर्व) के लिए JPL DE440 एफेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से सूर्य-चंद्र की दूरी निकाली: कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 21 नवंबर की सुबह लगभग 06:32 पर शुरू होती है और 22 नवंबर की सुबह लगभग 04:57 तक रहती है। दिल्ली का सूर्योदय 06:52 है, यानी उस दिन उदय-तिथि द्वादशी है। तुलसी विवाह शाम की रस्म है, इसलिए शनिवार की शाम ही सही दिन बनती है। पूरे साल के शुभ दिन एक जगह देखने हों तो शुभ मुहूर्त हब और रोज़ का पंचांग खोलिए।

तुलसी विवाह का सही समय: शाम का प्रदोष-काल

दिल्ली में 21 नवंबर को सूर्यास्त लगभग 17:21 पर होता है। प्रदोष-काल का मतलब है सूर्यास्त के बाद का वह समय जब दिन और रात मिलते हैं, परंपरा में तुलसी विवाह इसी बेला में होता है, इसलिए पूजा की तैयारी सूर्यास्त से पहले पूरी रखें और विवाह-विधि सूर्यास्त के बाद शुरू करें। उस दिन का राहु काल सुबह 09:28 से 10:46 तक है, यानी शाम की पूजा उससे दूर है और इस बारे में अलग से चिंता की कोई ज़रूरत नहीं। अपने शहर का सटीक सूर्यास्त आज के पंचांग में देखें और अगर विवाह-मुहूर्त की पूरी सूची चाहिए तो विवाह मुहूर्त 2026 पेज काम आएगा।

देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह में अंतर

दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं पर एक नहीं हैं। देवउठनी एकादशी वह तिथि है जब चातुर्मास की योग-निद्रा के बाद भगवान विष्णु का जागना माना जाता है, तुलसी विवाह उसके बाद की शाम का उत्सव है जिसमें तुलसी का विवाह शालिग्राम से कराया जाता है। हमारी गणना में एकादशी तिथि 20 नवंबर को लगभग 07:16 पर शुरू होकर 21 नवंबर को लगभग 06:32 पर खत्म होती है। इसका मतलब इस बार एकादशी किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती, इसलिए व्रत किस दिन रखें, इस पर घर-घर की परंपरा अलग हो सकती है। अपने कुल-पुरोहित की बात मानें और विस्तृत जानकारी के लिए देवउठनी एकादशी 2026 या हिंदी पेज देखें।

तुलसी विवाह क्या है और किसका विवाह होता है

तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु के प्रतीक शालिग्राम (या बालगोपाल की मूर्ति) से कराया जाता है। घर का आँगन या छत पर रखा गमला ही मंडप बन जाता है। तुलसी को लक्ष्मी-स्वरूपा माना जाता है, इसलिए यह विवाह घर में सुख-समृद्धि के स्वागत का प्रतीक है। इसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा के बीच किसी शुभ शाम को किया जा सकता है, अधिकतर घर द्वादशी की शाम चुनते हैं। इस साल कार्तिक पूर्णिमा के बारे में कार्तिक पूर्णिमा 2026 पेज में अलग से विवरण है।

वृंदा और शालिग्राम की कथा — संक्षेप में

लोक-परंपरा की कथा के अनुसार वृंदा असुर जालंधर की पतिव्रता पत्नी थीं और उनके तप के कारण जालंधर अजेय था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने उनके व्रत को भंग किया, जिससे वृंदा ने शाप दिया और विष्णु शिला-रूप में शालिग्राम बने। वृंदा ने बाद में देह त्यागी और उनकी राख से तुलसी का पौधा उगा, विष्णु ने वचन दिया कि वे शालिग्राम रूप में तुलसी को सदा पत्नी के रूप में स्वीकारेंगे। यह कथा पुराण-परंपरा से जनश्रुति में आई है। हमारे ग्रंथालय में इन पुराणों की पुस्तक सत्यापित नहीं है, इसलिए हम यहाँ किसी श्लोक-संख्या का दावा नहीं करते।

तुलसी विवाह के लिए पूजा सामग्री की सूची

सामग्री सरल रखें, महँगी चीज़ों की ज़रूरत नहीं। तुलसी का गमला, शालिग्राम या विष्णु-बालगोपाल की मूर्ति, एक चौकी, पीला या लाल वस्त्र, तुलसी के लिए लाल चुनरी, सुहाग का सामान (बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी), मंडप के लिए चार गन्ने, हल्दी, रोली, अक्षत, घी का दीपक, धूप, पंचामृत, मौसमी फल जैसे आँवला, बेर, सिंघाड़ा, शकरकंद और अमरूद। साथ में फूल-माला और एक छोटा धागा या मौली रखें। अगर आप नई शुरुआत की पूजा-हवन की तैयारी भी साथ कर रहे हैं तो पूजा-हवन का शुभ मुहूर्त भी देख लें।

तुलसी विवाह की विधि: क़दम-दर-क़दम

सुबह तुलसी चौरा साफ़ करें और गमले को गेरू या रंगोली से सजाएँ। शाम को सूर्यास्त से पहले चौकी पर शालिग्राम को गंगाजल या साफ़ जल से स्नान कराकर पीला वस्त्र पहनाएँ। तुलसी को चुनरी ओढ़ाएँ और सुहाग का सामान चढ़ाएँ। विवाह के क्रम में पहले गणेश-स्मरण और संकल्प लें, फिर हल्दी लगाएँ, तुलसी के सामने शालिग्राम को रखकर मौली से दोनों को जोड़ें और घर का कोई बुज़ुर्ग या दंपति कन्यादान का संकल्प करे। सात फेरे लगाएँ, फिर आरती करें और प्रसाद बाँटें। पूरी रस्म घर पर पंद्रह से बीस मिनट में बन जाती है, ज़्यादा कठिन बनाने की ज़रूरत नहीं।

घर में गन्ने का मंडप और श्रृंगार कैसे सजाएँ

गमले के चारों कोनों पर एक-एक गन्ना खड़ा करके ऊपर से आम के पत्तों और फूलों की माला से जोड़ दें, यही सरल मंडप है। गन्ने न मिलें तो चार बाँस की पतली डंडियाँ या हल्की लकड़ी भी चल जाती है। तुलसी का श्रृंगार दुल्हन की तरह होता है: चुनरी, बिंदी, चूड़ियाँ और माला। शालिग्राम के लिए पीला वस्त्र और चंदन का तिलक काफ़ी है। घर की दिशा-संबंधी कोई कठोर शर्त नहीं है, बस गमला साफ़ जगह पर हो और आसपास दीपक सुरक्षित रखा जाए। अगर घर के बच्चे सजावट में लगें तो पूरा परिवार जुड़ जाता है।

तुलसी विवाह के मंत्र, आरती और प्रसाद

मंत्रों के नाम पर लंबे पाठ की ज़रूरत नहीं। तुलसी के लिए "ॐ श्री तुलस्यै नमः" और विष्णु के लिए "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" पर्याप्त हैं, दोनों को ग्यारह-ग्यारह बार जपा जा सकता है। उसके बाद तुलसी माता की आरती और विष्णु की आरती गाएँ। प्रसाद में पंचामृत, मौसमी फल और गुड़ या बताशे बाँटें। प्रसाद में तुलसी-दल ज़रूर डालें, पर दल पहले ही सुबह के समय तोड़कर रख लें, क्योंकि शाम को और एकादशी-जैसे दिनों में पत्ते तोड़ने की परंपरागत मनाही है। पूरी सावधानियों की सूची आगे ‘क्या न करें’ वाले खंड में दी गई है।

तुलसी विवाह का व्रत: क्या खाएँ और किन बातों का ध्यान रखें

जो लोग देवउठनी एकादशी का व्रत रखते हैं वे आमतौर पर अन्न नहीं खाते, फल, दूध, मखाने, साबूदाना और सेंधा नमक वाला भोजन चलता है। तुलसी विवाह की शाम व्रत खोलने का भी अच्छा समय माना जाता है, पर व्रत का दिन आपकी अपनी परंपरा के अनुसार तय होगा। मधुमेह, गर्भावस्था या किसी दवा पर चल रहे लोगों को पूर्ण उपवास की जगह हल्का फलाहार लेना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर चलना चाहिए, श्रद्धा का मतलब शरीर को कष्ट देना नहीं है। विधि-निषेध की पूरी तिथि-जानकारी के लिए एकादशी का हिंदी पेज खुला रखें।

चातुर्मास के बाद शादियों का मौसम कब खुलता है

परंपरा में देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक चार महीने का चातुर्मास माना जाता है, और इसमें विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्य नहीं होते। इस साल देवशयनी का विवरण देवशयनी एकादशी 2026 पर है। देवउठनी के बाद शादियों के दिन खुलते हैं, पर हर दिन शादी लायक नहीं होता: गुरु या शुक्र अस्त हों, या खरमास चल रहा हो, तो परंपरा उसी अवधि में विवाह टालने को कहती है। ये परंपरा के नियम हैं, किसी श्लोक-संख्या से जुड़े नहीं। वर्ष-वार पूरी तारीख़ें विवाह मुहूर्त 2026 और विवाह मुहूर्त 2027 में देखें।

शादी के मुहूर्त पर बृहत्संहिता क्या कहती है

वराहमिहिर की बृहत्संहिता का अध्याय 99 विवाह के लिए नक्षत्र और लग्न बताता है। श्लोक के अनुसार विवाह (पाणिग्रहण) में चंद्रमा रोहिणी, तीनों उत्तरा, रेवती, मृगशिरा, मूल, अनुराधा, मघा, हस्त या स्वाति नक्षत्र में हो, और उदित लग्न कन्या, तुला या मिथुन हो।[1] सरल भाषा में: यह सूची बताती है कि कौन से चंद्र-नक्षत्र वैवाहिक कामों के लिए अच्छे माने गए हैं। हमारे ephemeris के अनुसार 21 नवंबर की शाम चंद्रमा रेवती नक्षत्र में है, जो इस सूची में है। अपना जन्म-नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर चलाइए। अगर किसी दिन नक्षत्र इस सूची में नहीं बैठता तो घबराएँ नहीं, मुहूर्त बदला जा सकता है, इसी सूची के भीतर दूसरा दिन चुन लिया जाता है।

वर-वधू की राशि का नियम: 2, 9, 8 की गिनती

उसी बृहत्संहिता श्लोक में एक और शर्त है: पति-पत्नी की राशियाँ एक-दूसरे से दूसरी, नौवीं या आठवीं न पड़ें, और विवाह का दिन व्यतिपात-वैधृति योग, विष्टि करण और रिक्ता तिथि से मुक्त हो।[2] राशि गिनने का तरीका सरल है: वर की राशि से वधू की राशि तक गिनिए, फिर उलटी दिशा में भी। यह एक मुहूर्त-नियम है, विवाह की सफलता या असफलता की भविष्यवाणी नहीं। अगर गिनती इन अंकों में आ जाए तो पूरा मिलान बिगड़ा हुआ नहीं माना जाता, बाकी ग्रह-मेल और दशा से संतुलन देखा जाता है। इसके लिए कुंडली मिलान और मिलान का विश्लेषण साथ में पढ़ें।

तिथि की पाँच श्रेणियाँ: नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा

बृहत्संहिता के अध्याय 98 में तिथियों को नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा श्रेणियों में बाँटा गया है।[3] हमारी सत्यापित तालिका के अनुसार 1, 6, 11 नंदा, 2, 7, 12 भद्रा, 3, 8, 13 जया, 4, 9, 14 रिक्ता और 5, 10, 15 पूर्णा तिथियाँ हैं। इस हिसाब से एकादशी नंदा है और द्वादशी भद्रा श्रेणी में आती है, जबकि रिक्ता श्रेणी (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) से विवाह में बचने की बात ऊपर वाले विवाह-श्लोक में भी है।[2] ध्यान रहे कि यह भद्रा तिथि-श्रेणी है, पंचांग वाली विष्टि करण (जिसे लोग भद्रा-काल कहते हैं) से अलग चीज़ है। दोनों का फ़र्क़ पंचांग की तालिका में अलग-अलग पंक्ति में दिखता है।

21 नवंबर 2026 की शाम का आसमान: चंद्र, गुरु और शुक्र

ephemeris (JPL DE440, लाहिड़ी) के अनुसार 21 नवंबर की सुबह सूर्य वृश्चिक में लगभग 4°30′ पर है, गुरु सिंह में लगभग 2° पर और शुक्र कन्या के आख़िरी अंश, लगभग 29°35′, पर है। सूर्य से शुक्र लगभग 35° और गुरु लगभग 92° दूर है, यानी दोनों में से कोई ग्रह अस्त नहीं है। अस्त का मतलब है ग्रह का सूर्य के इतने पास आ जाना कि उसकी किरणें धुँधली मानी जाएँ, विवाह-परंपरा में गुरु-शुक्र के अस्त काल से बचा जाता है। अस्त ग्रह की पूरी व्याख्या अस्त ग्रह में है, और आगे की चाल के लिए गुरु गोचर 2026 और शुक्र गोचर 2026 पढ़ें।

शादी में देरी है तो तुलसी विवाह पर क्या करें

शादी में देरी का मतलब इनकार नहीं है, कुंडली में यह अक्सर समय की बात होती है। ज्योतिष में सातवाँ भाव (जीवनसाथी और साझेदारी का घर), उसका स्वामी, शुक्र और स्त्री-कुंडली में गुरु को तीन अलग प्रमाणों की तरह देखा जाता है, और उनमें से कोई एक कमज़ोर होने पर भी विवाह बनता है, बस देर या रास्ता बदल सकता है। दशा, गोचर और पितृ-पक्ष की बाधाएँ अलग से देखी जाती हैं, इसके लिए शादी में देरी के कारण, पितृ दोष और विवाह विलंब और शादी कब होगी पढ़ने लायक़ हैं। उम्र को लेकर चिंता हो तो उम्र के हिसाब से शादी देखिए।

तुलसी पूजा का सरल उपाय: पाँच बातें

  1. क्या करें: तुलसी के आगे घी का एक दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" ग्यारह बार जपें। 2. कब: तुलसी विवाह की शाम से शुरू करें, फिर हर गुरुवार सूर्यास्त के बाद। 3. कितने का: ख़र्च लगभग शून्य, बस घी और बाती (दस-बीस रुपये)। 4. कितने दिन: लगातार ग्यारह गुरुवार। 5. आपके लिए क्यों: विवाह का कारक गुरु है और विष्णु-उपासना को गुरु की शांति से जोड़ा जाता है, इसलिए यह नियमित और सरल उपाय आपकी कुंडली के गुरु-पक्ष को आधार देता है। शुरू करने से पहले अपने ग्रह बल में गुरु की स्थिति देख लें। इस उपाय में रत्न नहीं है, और रत्न पर तभी सोचिए जब पूरी कुंडली देख ली जाए।

मांगलिक या दोष वाली कुंडली में तुलसी विवाह की भूमिका

तुलसी विवाह कोई दोष-निवारण अनुष्ठान नहीं है, और मांगलिक होना शादी पर रोक भी नहीं है। मंगल दोष कुंडली के कुछ घरों में मंगल की स्थिति से बनता है, पर अनेक स्थितियों में उसका भंग हो जाता है और दो मांगलिकों का विवाह भी संतुलन देता है। अपनी स्थिति जाँचने के लिए मांगलिक दोष कैलकुलेटर चलाइए और भाव-वार असर के लिए सातवें भाव में मंगल पढ़िए। उपाय तथा भंग की सरल सूची मंगल दोष के उपाय में है, और शादी की समस्या वाले सवालों के लिए मांगलिक दोष: शादी की समस्या काम आएगा।

कुंडली मिलान पहले, मुहूर्त बाद में: सही क्रम क्यों

तुलसी विवाह के उत्साह में कई परिवार पहले तारीख़ तय कर लेते हैं और मिलान बाद में करवाते हैं, क्रम उल्टा है। पहले यह तय हो कि दोनों कुंडलियाँ आपस में चल सकती हैं, फिर उसी जोड़ी के अनुकूल दिन चुना जाए। गुण-मिलान का कुल अंक अकेले निर्णायक नहीं होता, कम अंक आने पर भी ग्रह-मेल और दशा से रास्ता निकलता है। नाम से कुंडली मिलाने का तरीका नाम से कुंडली मिलान में है, ऑनलाइन तरीक़ा कुंडली मिलान ऑनलाइन में, और प्रेम-विवाह के मिलान की उलझनें लव मैरिज और मिलान में समझाई गई हैं।

अपनी जन्म-कुंडली से शादी का मुहूर्त कैसे निकलता है

सबके लिए एक ही शुभ दिन नहीं होता, पंचांग का दिन सामान्य है, और व्यक्तिगत मुहूर्त आपके जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से बनता है। इसमें ताराबल (आपके जन्म-नक्षत्र से दिन का नक्षत्र कितना अनुकूल है) और चंद्रबल (गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से कौन से घर में है) देखे जाते हैं, ये दोनों पारंपरिक नियम हैं और किसी एक श्लोक-संख्या से नहीं जुड़ते। इस गणना के लिए मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर, जन्म-तिथि से विवाह मुहूर्त और कुंडली बनाने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर उपयोगी हैं।

तुलसी विवाह के दिन क्या न करें

परंपरा में कुछ सावधानियाँ बताई जाती हैं: तुलसी के पत्ते एकादशी, रविवार और सूर्यास्त के बाद न तोड़े जाएँ, पूजा के समय तामसिक भोजन और कठोर भाषा से बचा जाए, और तुलसी के पास जूते-चप्पल न रखे जाएँ। पूजा से पहले पत्ते सुबह या एक दिन पहले तोड़कर रख लें। अगर कोई नियम छूट जाए तो डर की कोई बात नहीं, शाम को दीपक जलाकर क्षमा-प्रार्थना कर लेने से पूजा पूरी मानी जाती है। इसी तरह बड़े-छोटे मांगलिक आयोजनों के नियम भी शुभ मुहूर्त हब में एक जगह मिलते हैं।

अपने शहर के हिसाब से समय कैसे बदलता है

तिथि पूरे देश के लिए एक ही क्षण पर बदलती है, पर घड़ी का समय सूर्योदय-सूर्यास्त के हिसाब से शहर-दर-शहर थोड़ा खिसकता है। पूर्वी राज्यों में सूर्यास्त पहले और पश्चिमी राज्यों में बाद में होता है, इसलिए प्रदोष की शुरुआत भी उसी क्रम में आगे-पीछे होती है। हमारी गणनाएँ दिल्ली के लिए हैं, नोएडा, गुरुग्राम और ग़ाज़ियाबाद के लिए अंतर बहुत थोड़ा रहता है, और बाकी शहरों के लिए पंचांग में अपना शहर चुनिए। दिल्ली-एनसीआर में अगर आप सीधे पुरोहित या ज्योतिषी से पूछना चाहें तो दिल्ली में ज्योतिषी पेज देखें।

बच्चों और परिवार के साथ तुलसी विवाह कैसे मनाएँ

तुलसी विवाह सबसे सुंदर तब लगता है जब पूरा परिवार जुड़े। बच्चों को तुलसी की दुल्हन बनाने और सजाने की ज़िम्मेदारी दीजिए, बुज़ुर्गों से कन्यादान और कथा सुनाने को कहिए, और पड़ोसियों को प्रसाद के लिए बुला लीजिए। अविवाहित युवा भी श्रद्धा से इसमें भाग ले सकते हैं, कोई शर्त नहीं कि सिर्फ़ विवाहित दंपति ही पूजा कर सकते हैं। पहली बार घर में तुलसी स्थापित कर रहे हों तो नई जगह की रस्म के लिए गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त भी देख लें।

तुलसी का पौधा: देखभाल और घर में स्थान

तुलसी को खुली हवा और सुबह की धूप चाहिए, इसलिए पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर रखा गमला आम पसंद है, पर यह परंपरा है, कठोर नियम नहीं। मिट्टी हल्की और जल-निकासी वाली रखें, सर्दी में पाले से बचाएँ और मंजरी (फूल के गुच्छे) नियमित तोड़ते रहें ताकि पौधा घना रहे। सर्दियों में पानी कम और धूप ज़्यादा काम आती है। अगर पौधा सूख जाए तो इसे अपशगुन न मानें, उसे जल में प्रवाहित करके नया पौधा लगाया जा सकता है। रोज़ के दीपक और जल-अर्पण की आदत वैसे भी मन को स्थिर रखती है।

नवंबर-दिसंबर 2026 के अन्य पर्व और शादी का मौसम

तुलसी विवाह कार्तिक की शृंखला का हिस्सा है। हमारी पंचांग तालिका के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर को पड़ती है, जिसका पूरा ब्योरा कार्तिक पूर्णिमा 2026 और हिंदी पेज पर है। इसके बाद मार्गशीर्ष में विवाह पंचमी 2026 आती है। दिवाली के आसपास की रौनक का ज्योतिषीय पक्ष दिवाली 2026 ज्योतिष में और छठ का छठ पूजा 2026 में है। पूर्णिमा की ज्योतिष-दृष्टि के लिए पूर्णिमा का महत्व पढ़ें। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा-स्नान और दीपदान की जो परंपरा है, वह तुलसी विवाह के पूरे पक्ष को एक साथ बाँध देती है, इसलिए जिन परिवारों की पूजा 21 नवंबर को छूट जाए वे कार्तिक पूर्णिमा तक उसे सादगी से कर सकते हैं।

पहली बार तुलसी विवाह करने वालों की आम ग़लतियाँ

सबसे आम ग़लती एकादशी और द्वादशी को एक ही दिन मान लेना है, इस साल दोनों तिथियाँ दो अलग तारीख़ों में फैली हैं, इसलिए कैलेंडर की एक पंक्ति पर भरोसा करने की जगह तिथि का समय देखें। दूसरी ग़लती पूजा को इतना भारी बना देना है कि घर के लोग थक जाएँ और भाव खो जाए। तीसरी, सजावट में प्लास्टिक और सूखे कपड़े दीपक के बहुत पास रख देना, अग्नि-सुरक्षा का ध्यान रखें और दीपक चौकी के बीच, ऊँची जगह रखें। चौथी, अपने शहर का सूर्यास्त देखे बिना दिल्ली का समय अपना लेना। इन चारों से बचकर आप रस्म शांति से पूरी कर सकते हैं।

तुलसी विवाह और अपनी शादी की तारीख़ को लेकर भ्रम

कई लोग मान लेते हैं कि तुलसी विवाह के दिन ही अपनी शादी करना सबसे शुभ होता है। ऐसा कोई नियम हमारे सत्यापित ग्रंथों में नहीं मिलता। वर-वधू की शादी का दिन उनके अपने नक्षत्र, राशि, ताराबल और कुंडली-मिलान से तय होता है, और तुलसी विवाह का दिन सबके लिए अनुकूल हो यह ज़रूरी नहीं। इसी तरह यह धारणा भी सही नहीं कि तुलसी विवाह के बाद शादी में तुरंत सफलता मिलती है। यह उत्सव मौसम का प्रवेश-द्वार है, गारंटी नहीं। अपनी जोड़ी का दिन नाम से कुंडली मिलान और विवाह रजिस्ट्रेशन का मुहूर्त जैसे पेजों से जाँचें।

त्रिकाल वाणी में मुहूर्त कैसे निकाला जाता है

त्रिकाल वाणी की गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश पर चलती है, और इसे "AI Powered · Granth Based · Human Verified" ढाँचे में रखा जाता है। इस पेज की तिथि और नक्षत्र की गणना JPL DE440 आधारित ओपन-एफेमेरिस (लाहिड़ी) से निकाली गई है, जबकि शास्त्रीय नियम पुस्तकालय में सत्यापित बृहत्संहिता के श्लोकों से लिए गए हैं। लेखक रोहित गुप्ता, चीफ़ वैदिक आर्किटेक्ट, 16 वर्ष से अधिक पराशरी ज्योतिष-अभ्यास के साथ हर पेज की सामग्री कुंडली के तर्क पर टिकाते हैं, बिना डर दिखाए और बिना अधूरे दावों के। संस्थापक के बारे में संस्थापक पेज पर पढ़ें और अपनी कुंडली-आधारित परामर्श के बारे में कुंडली-मिलान सेवा देखें।

अपनी शादी का समय जानना हो तो यहाँ से शुरू करें

तुलसी विवाह पर तारीख़ जानना पहला क़दम है, आपकी अपनी शादी का समय आपकी कुंडली की दशा और गोचर से तय होता है। सबसे सरल रास्ता यह है: पहले जन्म कुंडली बनाइए, फिर शादी कब होगी कैलकुलेटर में दशा का संकेत देखिए, दशा कैलकुलेटर से चल रही दशा समझिए और अंत में मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से अपने लिए अनुकूल दिन निकालिए। प्रेम-विवाह या अरेंज्ड का झुकाव जानने के लिए लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर है। पूरे विषय का सार कुंडली में विवाह योग में है।

इस पेज की सीमाएँ: यह क्या नहीं बताता

यह पेज तारीख़ और मुहूर्त का मार्गदर्शन है, आपकी अपनी कुंडली का अंतिम निर्णय नहीं। हमारी तिथि-समय गणना में लगभग दस-पंद्रह मिनट का अंतर संभव है, इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या कुल-पुरोहित से मिलान कर लें। कथा और रस्में लोक-परंपरा के अनुसार दी गई हैं और हर क्षेत्र में थोड़ी अलग होती हैं। व्रत और स्वास्थ्य के बारे में कोई भी बदलाव अपने डॉक्टर की सलाह से करें। शादी-विवाह से जुड़े निजी निर्णय के लिए अपनी कुंडली पर आधारित विवाह ज्योतिषी से बात करना बेहतर है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

प्रदोष-काल
सूर्यास्त के बाद का वह समय जब दिन और रात मिलते हैं, तुलसी विवाह की पूजा इसी बेला में की जाती है।
द्वादशी
शुक्ल या कृष्ण पक्ष की बारहवीं तिथि, 2026 में तुलसी विवाह की उदय-तिथि कार्तिक शुक्ल द्वादशी है।
शालिग्राम
भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाने वाला पवित्र काला पत्थर, जिससे तुलसी का विवाह कराया जाता है।
चातुर्मास
देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीने, जिनमें परंपरा विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करती।
नक्षत्र
27 चंद्र-तारा-समूहों में से एक, जिनसे चंद्रमा हर महीने गुज़रता है, मुहूर्त का मुख्य आधार।
अस्त ग्रह
सूर्य के इतने पास आया ग्रह कि उसकी किरणें धुँधली मानी जाएँ, विवाह-परंपरा गुरु-शुक्र के अस्त काल से बचती है।
रिक्ता तिथि
चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी की श्रेणी, जो बृहत्संहिता के अनुसार शुभ आरंभ के लिए वर्जित है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    रोहिण्युत्तररेवतीमृगशिरोमूलानुराधामघा\- हस्तस्वातिषु षष्ठतौलिमिथुनेषूद्यत्सु पाणिग्रहः । सप्ताष्टान्त्यबहिःशुभैरुडुपतावेकादशद्वित्रिगे क्रूरैः त्र्यायषडष्टगैः न तु भृगौ षष्ठे कुजे चाष्टमे ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 99 — करणगुणाध्याय · श्लोक 7 · sanskritdocuments.org e-text

    विवाह (पाणिग्रहण) में चंद्रमा रोहिणी, तीनों उत्तरा, रेवती, मृगशिरा, मूल, अनुराधा, मघा, हस्त या स्वाति में हो और कन्या, तुला या मिथुन लग्न उदित हो।

    At a wedding (panigrahana) the Moon should be in Rohini, the three Uttaras, Revati, Mrigashira, Mula, Anuradha, Magha, Hasta or Swati, with Virgo, Libra or Gemini rising.

  2. [2]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    दंपत्योः द्विनवाष्टराशिरहिते चारानुकुले रवौ चन्द्रे चार्ककुजार्किशुक्रवियुते मध्येऽथवा पापयोः । त्यक्त्वा च व्यतिपातवैधृति (वैधृत) दिनं विष्टिं च रिक्तां तिथिं क्रूराहायनपौषचैत्र (चैत्रपौष) विरहे लग्नांशके मानुषे ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 99 — करणगुणाध्याय · श्लोक 8 · sanskritdocuments.org e-text

    दंपति की राशियाँ एक-दूसरे से दूसरी, नौवीं या आठवीं न हों, और व्यतिपात-वैधृति के दिन, विष्टि करण तथा रिक्ता तिथि छोड़ी जाएँ।

    The couple's moon-signs should not stand 2nd, 9th or 8th from each other, and the Vyatipata and Vaidhriti days, Vishti karana and Rikta tithi are to be avoided.

  3. [3]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    पितरो अमावस्यायां संज्ञासदृशाश्च तैः क्रियाः कार्याः। नन्दा भद्रा विजया रिक्ता पूर्णा च तास् त्रिविधाः॥
    — बृहत्संहिता, अध्याय 98 — तिथिकर्मगुणाध्याय · श्लोक 2 · Trikaal Pothi 2026

    तिथियाँ पाँच श्रेणियों में बँटी हैं — नंदा, भद्रा, जया (विजया), रिक्ता और पूर्णा, हर श्रेणी में तीन तिथियाँ, और अमावस्या पितरों की तिथि है।

    Tithis fall into five classes - Nanda, Bhadra, Jaya, Rikta and Purna - three tithis each, and Amavasya belongs to the ancestors.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

तुलसी विवाह 2026 कब है?

तुलसी विवाह 2026 शनिवार, 21 नवंबर को है। उस दिन सूर्योदय पर द्वादशी तिथि रहती है और पूजा शाम को प्रदोष-काल में की जाती है। दिल्ली में सूर्यास्त लगभग 17:21 है, अपने शहर का समय पंचांग से देखें।

तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन होता है या अगले दिन?

ज़्यादातर घरों में अगले दिन की द्वादशी की शाम चुनी जाती है। इस साल एकादशी तिथि 20 नवंबर की सुबह से 21 नवंबर की सुबह तक है, और द्वादशी 21 नवंबर की सुबह से शुरू होती है, इसलिए तुलसी विवाह 21 नवंबर की शाम को आता है।

तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त क्या है और शाम को ही क्यों?

मुहूर्त सूर्यास्त के बाद का प्रदोष-काल है, क्योंकि परंपरा में विवाह दिन और रात के मिलन की बेला में होता है। दिल्ली में यह लगभग 17:21 के बाद शुरू होता है। उस दिन राहु काल सुबह 09:28 से 10:46 तक है, शाम की पूजा उससे दूर है।

तुलसी विवाह घर पर कैसे करें?

गमले को गन्ने के मंडप से सजाइए, तुलसी को चुनरी पहनाइए, शालिग्राम को स्नान कराकर चौकी पर रखिए, संकल्प और हल्दी के बाद मौली से जोड़कर सात फेरे लगाइए और आरती करके प्रसाद बाँटिए। पूरी रस्म घर पर लगभग पंद्रह से बीस मिनट में हो जाती है।

तुलसी विवाह में कौन-सी सामग्री लगती है?

तुलसी का गमला, शालिग्राम या विष्णु की मूर्ति, चौकी, चुनरी, सुहाग का सामान, चार गन्ने, हल्दी, रोली, अक्षत, घी का दीपक, पंचामृत और मौसमी फल जैसे आँवला और बेर। कुल ख़र्च बहुत थोड़ा रहता है और महँगी सामग्री की कोई शर्त नहीं।

क्या तुलसी विवाह करने से शादी में देरी दूर हो जाती है?

तुलसी विवाह अपने आप में कोई गारंटी नहीं है और हम ऐसा दावा नहीं करते। देरी के पीछे कुंडली में सातवें भाव, शुक्र, गुरु, दशा और गोचर के संकेत होते हैं। तुलसी-दीपक का सरल उपाय मन और आदत को स्थिर रखता है, पर असली समय आपकी कुंडली से ही पता चलता है।

क्या तुलसी विवाह के बाद ही शादियाँ शुरू होती हैं?

परंपरा में चातुर्मास में विवाह नहीं होते और देवउठनी के बाद विवाह-काल खुलता है। फिर भी हर दिन शुभ नहीं होता, गुरु-शुक्र के अस्त काल और खरमास में परंपरा विवाह टालती है। विवाह की तारीख़ें हमारे विवाह मुहूर्त 2026 पेज पर देखी जा सकती हैं।

क्या मांगलिक व्यक्ति तुलसी विवाह के बाद शादी कर सकता है?

हाँ, मांगलिक होना विवाह पर रोक नहीं है और तुलसी विवाह दोष-निवारण का अनुष्ठान भी नहीं है। मंगल दोष की जाँच अलग से होती है, और अनेक कुंडलियों में उसका भंग हो जाता है। अपनी स्थिति मांगलिक दोष कैलकुलेटर से देखें।

तुलसी के पत्ते कब नहीं तोड़ने चाहिए?

परंपरागत मान्यता में एकादशी, रविवार और सूर्यास्त के बाद पत्ते तोड़ने से बचा जाता है। इसलिए पूजा के लिए पत्ते पहले ही सुबह या एक दिन पहले तोड़कर रख लें। अगर कभी चूक हो जाए तो चिंता न करें, क्षमा-प्रार्थना कर लेना पर्याप्त माना जाता है।

क्या अविवाहित व्यक्ति तुलसी विवाह में भाग ले सकते हैं?

हाँ, कोई भी श्रद्धा के साथ भाग ले सकता है। कन्यादान का संकल्प परिवार का बड़ा या कोई दंपति करता है, पर सजावट, कथा और आरती में अविवाहित युवा भी शामिल हो सकते हैं। इसके लिए कोई कठोर शर्त शास्त्र में नहीं मिलती।

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