मोक्षदा एकादशी 2026: 20 दिसंबर व्रत, पारण
Trikaal Sandesh — Direct Answer
मोक्षदा एकादशी 2026 रविवार, 20 दिसंबर को है, और इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। दिल्ली के पंचांग में एकादशी तिथि 19 दिसंबर को 22:09 पर शुरू होकर 20 दिसंबर को 20:15 तक रहती है। पारण सोमवार, 21 दिसंबर को सूर्योदय 07:13 के बाद द्वादशी में करें। अपने शहर का समय पंचांग से मिलाएं।
Deep Dive Analysis
मोक्षदा एकादशी 2026 की तारीख और तिथि का समय
मोक्षदा एकादशी 2026 रविवार, 20 दिसंबर को है। त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन के अनुसार दिल्ली NCR में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी 19 दिसंबर को 22:09 पर शुरू होती है, यानी दशमी उसी समय समाप्त होती है, और 20 दिसंबर को 20:15 तक चलती है। एकादशी का निर्णय सूर्योदय की तिथि से होता है, इसलिए व्रत 20 दिसंबर को रखा जाएगा। वर्ष भर की एकादशियों की सूची एकादशी व्रत कब है 2026 में है और रोज़ का समय 20 दिसंबर का पंचांग में मिलेगा।
मोक्षदा नाम का अर्थ और इस एकादशी का स्थान
मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली, यानी बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली। यह मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है और वर्ष के अंत की सबसे चर्चित एकादशियों में गिनी जाती है। यहां मोक्ष को केवल मृत्यु के बाद की बात न समझें। जीवन के बोझ, पुरानी आदतों, अपराध-बोध और अनावश्यक भय से हल्का होना भी इसी भाव में आता है। देवउठनी के बाद की यह एकादशी शुभ कार्यों के मौसम में संयम और आत्मचिंतन की याद दिलाती है। उससे पहले की एकादशी का ब्योरा देवउठनी एकादशी 2026 में पढ़ा जा सकता है।
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का संयोग
परंपरा के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इसलिए इस दिन गीता जयंती मनाई जाती है। 2026 में दोनों 20 दिसंबर को एक साथ पड़ रही हैं। इसका सरल अर्थ यह है कि इस दिन व्रत के साथ गीता के कुछ श्लोकों का पाठ करना या सुनना विशेष रूप से अर्थपूर्ण माना जाता है। गीता जयंती का अलग पृष्ठ गीता जयंती 2026 पर उपलब्ध है, जहां पूजा और पाठ की जानकारी दी गई है।
20 दिसंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग
20 दिसंबर 2026 को दिल्ली NCR में वार रविवार है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी (20:15 तक), नक्षत्र अश्विनी (14:55 तक) और उसके बाद भरणी, योग परिघ (08:10 तक) और करण वणिज (09:18 तक) है। सूर्योदय 07:13 और सूर्यास्त 17:24 है। सर्दियों के कारण दिन छोटा है, इसलिए पूजा और जप का समय योजना से बांटना अच्छा रहता है। शहर के अनुसार सूर्योदय बदलेगा, इसलिए पंचांग पृष्ठ पर अपना स्थान चुनकर समय मिलाएं।
19 दिसंबर की तैयारी: दशमी की शाम
19 दिसंबर 2026 को सूर्योदय 07:12 पर दशमी तिथि चल रही है, जो 22:09 पर समाप्त होती है। इस शाम हल्का और सात्विक भोजन करें और चावल, लहसुन तथा प्याज़ से दूर रहें। पूजा स्थान साफ़ करें और तुलसी का पौधा देख लें। दिसंबर की ठंड में पूजा के लिए गर्म पानी, ऊनी आसन और गर्म कपड़ों की तैयारी भी पहले से कर लें। रात को जल्दी सोने से सुबह का स्नान और पूजा सरल रहती है। उस दिन का पंचांग 19 दिसंबर के पंचांग में देखा जा सकता है।
पारण का समय: 21 दिसंबर की सुबह
पारण एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को दिल्ली NCR में सूर्योदय 07:13 पर है और द्वादशी तिथि 17:36 तक रहती है। उस दिन राहु काल 08:29 से 09:45 तक है, इसलिए सबसे सरल तरीक़ा है कि पारण 07:13 के बाद और 08:29 से पहले, या 09:45 के बाद कर लें। इस वर्ष एकादशी 20 दिसंबर को 20:15 पर पूरी हो जाती है, इसलिए अगली सुबह किसी भ्रम के बिना पारण हो सकता है। लोकेशन के अनुसार समय 21 दिसंबर का पंचांग में देखें।
हरि वासर और पारण की सावधानी
हरि वासर एकादशी के अंतिम चौथाई और द्वादशी के पहले चौथाई का समय है, जिसमें परंपरा के अनुसार पारण नहीं किया जाता। इस वर्ष एकादशी 20 दिसंबर को 20:15 पर समाप्त होती है, इसलिए द्वादशी का पहला चौथाई उसी रात निकल जाता है और 21 दिसंबर की सुबह इससे मुक्त है। यह गणना दिल्ली के समय के लिए है। जो परिवार किसी अन्य शहर में हैं, वे स्थानीय सूर्योदय और तिथि-समाप्ति के अनुसार जांचें। शुभ और अशुभ समय को एक साथ देखने का तरीक़ा शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर में उपलब्ध है।
पारण की विधि: पहला भोजन और दान
पारण के दिन सुबह स्नान के बाद पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें और तुलसी को जल दें। फिर पूजा में चढ़ाया हुआ प्रसाद लेकर व्रत खोलें। पहला भोजन हल्का रखें, जैसे खिचड़ी या मूंग की दाल, ताकि पेट को धीरे-धीरे अन्न की आदत लौटे। ठंड के मौसम में गर्म पेय के साथ व्रत खोलना आराम देता है। इस दिन ज़रूरतमंद को अन्न, गर्म कपड़ा या कंबल का दान करना परंपरा में शुभ माना जाता है। दान की सरल योजना के लिए उपाय कैलकुलेटर देखा जा सकता है।
व्रत और पूजा की सुबह की विधि
20 दिसंबर को सूर्योदय 07:13 से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पीला या सफ़ेद रंग शुभ माना जाता है। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का चित्र रखें, दीपक जलाएं और हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि आज एकादशी का व्रत श्रद्धा से रखेंगे। संकल्प छोटा रखें, जैसे आज फलाहार करूंगा और शांत रहूंगा। इसके बाद पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें। तुलसी दल एक दिन पहले तोड़कर रखें, क्योंकि एकादशी पर तुलसी तोड़ना परंपरा में वर्जित है।
पूजा की सामग्री: सादगी में पूर्णता
मोक्षदा एकादशी की पूजा में ज़्यादा सामान की ज़रूरत नहीं है। चौकी, पीला कपड़ा, विष्णु या कृष्ण का चित्र, घी का दीपक, धूप, चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, फल, मिश्री और जल का कलश पर्याप्त हैं। जिनके घर में गीता है, वे उसे चौकी पर साफ़ कपड़े में रखकर पूजा कर सकते हैं। सामग्री पर खर्च बढ़ाने से भक्ति नहीं बढ़ती। जो चीज़ें घर में उपलब्ध हों, उन्हीं से श्रद्धा के साथ पूजा करें। इसी तरह की पूजा-तैयारी का क्रम मुहूर्त हब पर भी संकलित है।
विष्णु-कृष्ण पूजा और सरल मंत्र
मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों की पूजा की जाती है, क्योंकि गीता का उपदेश कृष्ण से जुड़ा है और एकादशी विष्णु की तिथि है। सबसे सरल मंत्र है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। इसे एक माला, यानी 108 बार, जपने में लगभग पंद्रह मिनट लगते हैं। जप के लिए सुबह का शांत समय, दोपहर का अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:38 तक या शाम का प्रदोष काल 17:24 से 20:09 तक चुना जा सकता है। मंत्र की संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है ध्यान की स्थिरता। जप के बाद दीपक की आरती करें और प्रसाद परिवार में बांटें।
गीता पाठ कैसे करें: पंद्रह मिनट की सरल योजना
गीता जयंती पर पूरी गीता पढ़ना हर किसी के लिए संभव नहीं है। एक सरल योजना यह है कि सुबह पंद्रह मिनट शांत बैठकर किसी एक अध्याय, जैसे दूसरे अध्याय के कुछ श्लोक, पढ़ें या सुनें। फिर उनका अर्थ एक वाक्य में अपने शब्दों में लिख लें। बच्चों को छोटे श्लोक का भाव कहानी की तरह समझाया जा सकता है। गीता का सार कर्म, संतुलन और आसक्ति से मुक्ति का है, जो मोक्षदा के भाव से मेल खाता है। यह पृष्ठ किसी श्लोक का उद्धरण नहीं देता, पर गीता जयंती की जानकारी गीता जयंती 2026 में मिलेगी।
मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा
प्रचलित कथा के अनुसार चंपक नगर के राजा वैखानस को एक रात स्वप्न आया कि उनके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं। राजा ने ब्राह्मणों और ऋषियों से उपाय पूछा तो पर्वत मुनि ने उन्हें मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने परिवार सहित श्रद्धा से व्रत रखा और उसका पुण्य पिता के निमित्त अर्पित किया। कथा कहती है कि इसके बाद उनके पिता को सद्गति मिली। लोककथाएं क्षेत्र के अनुसार थोड़ी बदलती हैं, इसलिए कथा के भाव को पकड़ें, शब्दों को नहीं।
कथा का संदेश: पितरों के प्रति कृतज्ञता
वैखानस की कथा का केंद्र दंड नहीं, कृतज्ञता है। राजा अपने पिता के कष्ट की चिंता करता है और उनके लिए सेवा और संयम का मार्ग चुनता है। इसका आधुनिक अर्थ यह है कि पूर्वजों को याद करना, उनकी सीख को अपनाना और ज़रूरतमंदों की सेवा करना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है। इसे डर से जोड़कर किसी को पितृ दोष का भय न दिखाएं। कुंडली में पितृ दोष की सही समझ के लिए पितृ दोष का परिचय और पितृ दोष हिंदी गाइड पढ़ें।
एकादशी में क्या खाएं और क्या छोड़ें
फलाहार में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा, आलू और शकरकंद सेंधा नमक के साथ चलते हैं। चावल और सभी अनाज इस दिन छोड़े जाते हैं। सर्दियों में गर्म दूध, मूंगफली और गुड़ के लड्डू भी फलाहार में गिने जाते हैं। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज़ से दूर रहें और चाय-कॉफ़ी कम पिएं। जिन्हें मधुमेह या एसिडिटी है, वे लंबा खाली पेट न रहें और बीच-बीच में कुछ हल्का लें। रोज़ की सेहत के सुझाव स्वास्थ्य कैलकुलेटर पर देखे जा सकते हैं।
एकादशी पर क्या नहीं करें
परंपरा में एकादशी पर क्रोध, निंदा, झूठ, दिन में सोना और झगड़ा वर्जित माना गया है। बाल कटवाना और तेल मालिश भी कई घरों में टाली जाती है। इन नियमों को डर नहीं, अनुशासन समझें। जो सब नहीं निभ सकते, वे दो-तीन नियम चुनकर पूरे मन से निभा सकते हैं। यह आधे-अधूरे लंबे नियमों से बेहतर रहता है। आत्म-संयम का यह अभ्यास मन को स्थिर करता है। मन को संभालने के और तरीक़े चंद्र महादशा और मन में बताए गए हैं।
अश्विनी से भरणी: चंद्रमा मेष राशि में
20 दिसंबर को चंद्रमा मेष राशि में लगभग 11.6 अंश पर है। अश्विनी नक्षत्र 14:55 तक रहता है, जिसके स्वामी केतु हैं, और उसके बाद भरणी आता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। अश्विनी नई शुरुआत और उपचार से जुड़ा नक्षत्र है, इसलिए सुबह का समय संकल्प लेने और नए अभ्यास शुरू करने के लिए अनुकूल बैठता है। मेष मंगल की राशि है और ऊर्जा देती है, इसलिए व्रत के साथ हल्की सैर या प्राणायाम भी उपयोगी रहेगा। अपना जन्म नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें।
सूर्य धनु में: खरमास का समय और एकादशी
दिसंबर के मध्य में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, और 20 दिसंबर को वह लगभग 4 अंश पर है। धनु में सूर्य का यह समय परंपरा में खरमास कहलाता है, जिसमें विवाह जैसे शुभ संस्कार टाले जाते हैं, पर पूजा, व्रत और दान में कोई रुकावट नहीं मानी जाती। इसलिए एकादशी का व्रत खरमास में भी पूरी तरह किया जा सकता है। विवाह मुहूर्त देखने वाले परिवार दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त और जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त में आगे की तारीख़ें देखें।
शनि मीन में और गुरु सिंह में: आकाश की गहरी चाल
पंचांग इंजन के अनुसार 20 दिसंबर को शनि मीन राशि में लगभग 13.8 अंश पर है और हाल ही में मार्गी होकर लगभग स्थिर गति में है। गुरु सिंह राशि में लगभग 2.7 अंश पर है और उसकी गति भी पीछे की ओर मुड़ती दिख रही है। शनि मीन में आत्मचिंतन, त्याग और गहराई की ओर ले जाता है, जो मोक्ष की चर्चा से मेल खाता है। यह किसी एक व्यक्ति की भविष्यवाणी नहीं, आकाश की सामान्य स्थिति है। शनि के आगे के बदलाव शनि गोचर 2027 में समझाए गए हैं।
राहु मकर में और केतु कर्क में: नई धुरी की शुरुआत
20 दिसंबर को राहु मकर राशि में लगभग 29.2 अंश पर और केतु कर्क राशि में लगभग 29.2 अंश पर है। यानी दोनों छाया ग्रह हाल ही में, दिसंबर 2026 की शुरुआत में, इस नई राशि में आए हैं और पूरे 2027 इसी धुरी पर रहेंगे। राहु-केतु का सीधा संबंध इच्छाओं, भ्रम और मुक्ति से है, इसलिए मोक्ष की चर्चा के समय इनकी स्थिति को जानना रोचक है। इसे डर का कारण न बनाएं, यह सिर्फ़ गणित है। राहु-केतु के पिछले परिवर्तन की जानकारी राहु-केतु गोचर 2026 में है और केतु का स्वभाव केतु क्या है में है।
20 दिसंबर के अशुभ काल: राहु काल, यमगंड और गुलिक
दिल्ली NCR में 20 दिसंबर को राहु काल 16:07 से 17:24, यमगंड 12:18 से 13:34 और गुलिक काल 14:51 से 16:07 तक है। अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:38 तक है, जो दोपहर की पूजा और जप के लिए सुविधाजनक है। परंपरा में नई शुरुआत और लेन-देन इन अशुभ खंडों में टाली जाती है, पर पूजा और पाठ के लिए इन्हें रोकने की ज़रूरत नहीं मानी जाती। फिर भी मुख्य पूजा को इन तीनों खंडों से बाहर रखें तो मन निश्चिंत रहता है। राहु काल निकालने का तरीक़ा राहु काल कैसे निकालें में है।
कुंडली में मोक्ष का अर्थ: चौथा, आठवां और बारहवां भाव
वैदिक ज्योतिष में चौथा, आठवां और बारहवां भाव मोक्ष त्रिकोण कहलाते हैं, और इन्हें मन की शांति, गहरे परिवर्तन और त्याग से जोड़ा जाता है। केतु को मुक्ति और वैराग्य का कारक माना जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि इन भावों में ग्रह होने से जीवन कठिन होगा। यह केवल बताता है कि व्यक्ति के जीवन में किन क्षेत्रों में आध्यात्मिक खोज या अलगाव का विषय उठ सकता है। हर कठिनाई के साथ उसका संतुलन और उपाय भी होता है। भावों की मूल समझ के लिए भाव का परिचय देखें, और केतु की दशा के लिए केतु महादशा और वैराग्य।
उपाय 1: गीता के एक श्लोक का अर्थ-लेखन, पांच पंक्तियों में
क्या करना है: गीता का एक श्लोक पढ़ें, उसका अर्थ एक वाक्य में अपने शब्दों में लिखें और दिन में एक बार उसे मन में दोहराएं। कब: रविवार, 20 दिसंबर, सुबह सूर्योदय 07:13 के बाद या अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:38 में। कितने का: बिल्कुल मुफ़्त, केवल एक कॉपी और पेन। कितने दिन: लगातार 11 दिन, यानी 30 दिसंबर तक। आपके लिए क्यों: यह आदत मन को एक विचार पर टिकाती है, जो चंद्र या केतु के कमज़ोर होने पर अनमनेपन को कम करती है। सावधानी: रटने के बजाय अर्थ पर ध्यान दें और थकान हो तो संख्या कम कर दें।
उपाय 2: गर्म कपड़े या कंबल का दान, पांच पंक्तियों में
क्या करना है: किसी ज़रूरतमंद को एक गर्म कपड़ा, कंबल या ऊनी मोज़े दें। कब: सोमवार, 21 दिसंबर, पारण के बाद सुबह 07:13 के बाद, या 20 दिसंबर की शाम। कितने का: सौ से तीन सौ रुपये का कपड़ा या घर का पुराना, अच्छी स्थिति वाला कंबल। कितने दिन: एक बार इस एकादशी पर, और चाहें तो इस सर्दी में दो-तीन बार। आपके लिए क्यों: दिसंबर की ठंड में यह दान सबसे व्यावहारिक सेवा है और दान का भाव मोक्षदा के मुक्ति-भाव से मेल खाता है। सावधानी: दान अपनी सामर्थ्य से करें, कर्ज़ लेकर नहीं, और किसी को दिखाने के लिए नहीं।
उपाय 3: पितरों का स्मरण, दीप और जल, पांच पंक्तियों में
क्या करना है: शाम को एक दीपक जलाएं, एक लोटा जल रखें और पूर्वजों का नाम लेकर कृतज्ञता से प्रणाम करें। कब: रविवार, 20 दिसंबर, प्रदोष काल 17:24 से 20:09 के भीतर। कितने का: कुछ रुपये का तेल या घी और जल। कितने दिन: इस एक शाम से शुरू करें और चाहें तो अमावस्या पर दोहराएं। आपके लिए क्यों: मोक्षदा की कथा पितरों के स्मरण से जुड़ी है, और कृतज्ञता मन का बोझ हल्का करती है। सावधानी: इसे भय या अपराध-बोध की तरह न करें। पितृ दोष की कुंडली-आधारित जांच के लिए पितृ दोष कैलकुलेटर देखा जा सकता है।
सर्दियों में व्रत: किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
दिसंबर की ठंड में लंबा उपवास शरीर को थका सकता है। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, वृद्धजन और मधुमेह, रक्तचाप या हृदय रोग के रोगी अपने चिकित्सक की सलाह के बिना कठोर व्रत न रखें। ऐसे लोग गर्म दूध, फल और हल्के फलाहार के साथ आंशिक व्रत रख सकते हैं और पूजा, जप तथा दान से व्रत का भाव निभा सकते हैं। ठंड में ज़्यादा देर खुले में बैठकर पूजा न करें। परंपरा रोगी के लिए नियम शिथिल करती है, इसलिए नियम को सुविधा और सुरक्षा के अनुसार ढालना उचित है।
परिवार और नौकरीपेशा लोग कैसे निभाएं
रविवार होने के कारण 20 दिसंबर को अधिकतर लोगों की छुट्टी है, जो पूजा, गीता पाठ और परिवार के साथ बैठने के लिए सुविधाजनक है। कामकाजी लोग सोमवार की सुबह पारण करते समय दफ़्तर का समय भी ध्यान में रखें। राहु काल 08:29 से 09:45 से बाहर 07:13 से 08:29 के बीच पारण करना सरल रहता है। घर में सब मिलकर गीता का एक श्लोक पढ़ें और बच्चों को उसका अर्थ बताएं। जो परिवार दूर रहते हैं, वे वीडियो कॉल पर साथ में आरती कर सकते हैं। अपने शहर का सही समय लकी डे कैलकुलेटर और पंचांग से मिलाएं।
आम ग़लतफ़हमियां: मोक्ष का मतलब मृत्यु नहीं
सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यह है कि मोक्षदा एकादशी केवल मृत्यु के बाद के लिए है। शास्त्र की भाषा में मोक्ष का अर्थ बंधन से मुक्ति है, और जीवन में भी इसका अभ्यास किया जा सकता है। दूसरी ग़लतफ़हमी यह है कि व्रत छूटा तो अनर्थ होगा, जबकि परंपरा हर कठोर बात के साथ छूट और उपाय बताती है। इसलिए व्रत छूट जाए तो अगली एकादशी पर सरल संकल्प से फिर शुरुआत करें। एकादशी के अन्य व्रतों की सरल सलाह इस महीने की एकादशी में है।
मोक्षदा एकादशी के बाद: मकर संक्रांति और नए वर्ष का क्रम
मोक्षदा एकादशी के बाद सूर्य अभी धनु में रहता है और खरमास चलता है। फिर जनवरी में मकर संक्रांति 2027 पर सूर्य मकर में प्रवेश करता है, जिसके साथ शुभ मुहूर्तों का नया मौसम खुलता है। मकर संक्रांति की जानकारी मकर संक्रांति 2027 में है। नए वर्ष की योजना बनाने वाले लोग गोचर की बड़ी तस्वीर राहु-केतु और शनि के गोचर से समझ सकते हैं। एकादशी की आगे की तारीख़ें एकादशी कब है 2026 में देखें।
हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता
इस पृष्ठ के सभी समय और ग्रह-स्थितियां त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से ली गई हैं, जो Swiss Ephemeris, लाहिड़ी अयनांश और सूर्योदय-आधारित तिथि निर्णय पर चलता है। इस पद्धति की देखरेख 16 वर्ष से अधिक की पाराशरी साधना वाले मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट रोहित गुप्ता करते हैं। दिए गए समय दिल्ली NCR के हैं और अन्य शहरों में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। तिथियां और समय आगे बदल सकते हैं यदि गणना में सुधार हो, इसलिए व्रत से पहले पंचांग एक बार फिर देखें। ग्रहों की मूल समझ के लिए ग्रहों का परिचय पढ़ें।
अपनी कुंडली के अनुसार मुहूर्त और उपाय जांचें
पंचांग सबके लिए एक जैसा दिन बताता है, पर आपकी कुंडली में चल रही दशा और गोचर का असर अलग होता है। इसलिए एकादशी के संकल्प से पहले अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाएं और जन्म कुंडली कैलकुलेटर से चंद्र और केतु की स्थिति देखें। दशा जानने के लिए दशा कैलकुलेटर और कमज़ोर ग्रह के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक उपलब्ध हैं। शुरुआत की सभी जांचें मुफ़्त हैं।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- मोक्ष
- जन्म-मृत्यु और जीवन के बंधनों से मुक्ति, जिसे जीवन में भी आंतरिक मुक्ति के रूप में समझा जाता है।
- गीता जयंती
- मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का वह पर्व जिस दिन गीता के उपदेश की स्मृति मनाई जाती है।
- खरमास
- सूर्य के धनु या मीन राशि में रहने का समय, जिसमें विवाह जैसे शुभ संस्कार टाले जाते हैं।
- हरि वासर
- एकादशी के अंतिम चौथाई और द्वादशी के पहले चौथाई का समय, जिसमें पारण नहीं किया जाता।
- पारण
- एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि से खोलने की क्रिया।
Frequently Asked Questions
मोक्षदा एकादशी 2026 कब है?
मोक्षदा एकादशी 2026 रविवार, 20 दिसंबर को है। दिल्ली NCR में एकादशी तिथि 19 दिसंबर को 22:09 पर शुरू होकर 20 दिसंबर को 20:15 तक रहती है।
मोक्षदा एकादशी का पारण कब करें?
पारण सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को सूर्योदय 07:13 के बाद द्वादशी तिथि में करें। द्वादशी उस दिन 17:36 तक रहती है और राहु काल 08:29 से 09:45 तक है।
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी एक ही दिन क्यों आती हैं?
परंपरा के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी कारण मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही तिथि पर मनाई जाती हैं।
मोक्षदा एकादशी में किसकी पूजा होती है?
इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा होती है। पीले फूल, तुलसी दल, फल और घी का दीपक रखा जाता है और गीता का पाठ या श्रवण किया जाता है।
मोक्षदा एकादशी की कथा क्या है?
प्रचलित कथा में चंपक नगर के राजा वैखानस ने स्वप्न में पिता को कष्ट में देखा और पर्वत मुनि की सलाह पर यह व्रत रखा। कथा के अनुसार इससे पिता को सद्गति मिली।
क्या खरमास में एकादशी का व्रत रख सकते हैं?
हां, खरमास में विवाह जैसे शुभ संस्कार टाले जाते हैं, पर पूजा, व्रत और दान में कोई रुकावट नहीं मानी जाती। इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत पूरी तरह रखा जा सकता है।
एकादशी पर क्या खाना चाहिए?
फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा और आलू सेंधा नमक के साथ चलते हैं। चावल और सभी अनाज इस दिन छोड़े जाते हैं।
20 दिसंबर 2026 को राहु काल कब है?
दिल्ली NCR में 20 दिसंबर को राहु काल 16:07 से 17:24 तक है। यमगंड 12:18 से 13:34 और गुलिक काल 14:51 से 16:07 तक है।
क्या मधुमेह वाले लोग व्रत रख सकते हैं?
मधुमेह, रक्तचाप या हृदय रोग वाले लोग चिकित्सक से पूछे बिना लंबा उपवास न रखें। वे फलाहार और गर्म दूध के साथ आंशिक व्रत रखकर जप और दान से भाव निभा सकते हैं।
मोक्षदा एकादशी के लिए कौन-सा मंत्र जपें?
सबसे सरल मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय है। इसे एक माला, यानी 108 बार, शांत बैठकर जपें और संख्या से ज़्यादा ध्यान की स्थिरता पर ज़ोर दें।
यह भी देखें · See also
इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayenसमूह: अन्य समूह — अनुष्ठानिक, चिकित्सा और कानूनी घटनाएं
देवउठनी एकादशी 2026: 20 नवंबर, पारण समय
muhuratEkadashi Vrat Kab Hai 2026: Dates & Parana
muhuratपुत्रदा एकादशी कब है? 19 जनवरी 2027
श्रेणी: muhurat