राशि अनुकूलता
सिंह और कन्या राशि की अष्टकूट मिलान में 16/36 अंक प्राप्त होते हैं। यह संयोग उपाय की मांग करता है। सूर्य और बुध स्वामी होने पर भी इन दोनों का स्वभाव बहुत अलग है। सिंह भव्यता पसंद करता है, कन्या सरलता। भकूट दोष भी इस जोड़ी में बाधा डाल सकता है।
सिंह और कन्या की भावनात्मक दुनिया बहुत अलग है। सिंह गर्मजोशी और प्रशंसा चाहता है। कन्या व्यावहारिक है और भावनाओं को कम प्रकट करती है। सिंह को लगता है कन्या ठंडी है। कन्या को लगता है सिंह बहुत ज्यादा ध्यान मांगता है। भावनात्मक तालमेल के लिए दोनों को बहुत मेहनत करनी होगी।
कन्या की आलोचना और सिंह का अहंकार मिलकर संचार को कठिन बनाते हैं। कन्या हर बात में खामियाँ निकालती है जो सिंह को बहुत बुरा लगता है। सिंह के बड़े-बड़े दावे कन्या को अव्यावहारिक लगते हैं। दोनों को एक-दूसरे की खूबियों को पहचानना होगा। शांत और सम्मानजनक संवाद ही इस रिश्ते को बचा सकता है।
यदि दोनों अपनी भूमिकाएं समझें तो यह जोड़ी काम कर सकती है। सिंह दिशा देता है, कन्या विवरण संभालती है। कन्या की व्यावहारिकता और सिंह की दृष्टि मिलकर काम में सफलता दिला सकती है। दोनों मेहनती हैं और लक्ष्य प्राप्ति में जुटे रहते हैं। पेशेवर जीवन में यह जोड़ी बेहतर काम करती है।
भकूट दोष और गण अनमेल इस जोड़ी की सबसे बड़ी चुनौती है। कन्या की अत्यधिक आलोचना सिंह के अहंकार को ठेस पहुँचाती है। सिंह का नाटकीयपन कन्या को परेशान करता है। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी मतभेद हो सकते हैं। दीर्घकालिक संबंध के लिए उपाय जरूरी हैं।
शुक्रवार को देवी सरस्वती की पूजा करें। रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें। भकूट दोष निवारण के लिए पंडित से पूजा कराएं। हरे मूंग का दान करें। विवाह से पूर्व विस्तृत कुंडली मिलान अवश्य कराएं।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →सिंह और कन्या का गुण मिलान 16/36 है — उपाय आवश्यक। स्वभाव का बड़ा अंतर और भकूट दोष चुनौती है।
सिंह और कन्या का अष्टकूट मिलान 16/36 यानी 44% है।
भकूट दोष, गण अनमेल और स्वभाव का भारी अंतर इस जोड़ी की प्रमुख समस्याएं हैं।
सरस्वती पूजा, सूर्य को जल और भकूट दोष निवारण पूजा इस जोड़ी के लिए जरूरी है।
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।