राशि अनुकूलता
सिंह और वृश्चिक राशि की अष्टकूट मिलान में 15/36 अंक प्राप्त होते हैं। यह संयोग उपाय की मांग करता है। दोनों तीव्र और शक्तिशाली राशियाँ हैं। सूर्य और मंगल का यह संयोग शक्ति संघर्ष उत्पन्न करता है। भकूट दोष और गण अनमेल इस जोड़ी को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
दोनों राशियाँ भावनात्मक रूप से बहुत तीव्र हैं। वृश्चिक की गहरी और रहस्यमयी भावनाएं और सिंह का नाटकीय प्रेम मिलकर एक तूफानी रिश्ता बनाते हैं। वृश्चिक को सिंह बहुत उथला लगता है। सिंह को वृश्चिक की नियंत्रण की आदत असहनीय लगती है। विश्वास बनाना इस जोड़ी की सबसे बड़ी जरूरत है।
सिंह खुलकर बोलता है, वृश्चिक रहस्यमय रहता है। वृश्चिक की तीखी बातें सिंह के अहंकार को घायल करती हैं। सिंह का नाटकीयपन वृश्चिक को झूठ लगता है। संचार में बहुत असंतुलन है। यदि दोनों पारदर्शिता अपनाएं और एक-दूसरे पर विश्वास करें तभी रिश्ता आगे बढ़ सकता है।
दोनों बेहद शक्तिशाली और दृढ़निश्चयी हैं। यदि एक लक्ष्य हो तो यह जोड़ी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कर सकती है। वृश्चिक की गहराई और सिंह की दृष्टि मिलकर एक मजबूत टीम बन सकती है। दोनों की वफादारी अटूट होती है यदि विश्वास स्थापित हो जाए।
भकूट दोष इस जोड़ी की सबसे बड़ी बाधा है। शक्ति संघर्ष, ईर्ष्या और नियंत्रण की प्रवृत्ति रिश्ते को जहरीला बना सकती है। वृश्चिक का बदला लेने का स्वभाव और सिंह का अहंकार मिलकर विनाशकारी हो सकता है। दोनों को बहुत अधिक मेहनत करनी होगी। विवाह से पहले जन्मपत्री मिलान जरूरी है।
मंगलवार को भगवान हनुमान की पूजा करें। रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें। भकूट दोष निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। लाल मूंगा पंडित की सलाह से धारण करें। विस्तृत जन्मपत्री मिलान अवश्य कराएं।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →सिंह और वृश्चिक का गुण मिलान 15/36 है — उपाय आवश्यक। शक्ति संघर्ष और भकूट दोष मुख्य चुनौती है।
सिंह और वृश्चिक का अष्टकूट मिलान 15/36 यानी 42% है।
भकूट दोष, गण अनमेल और शक्ति संघर्ष इस जोड़ी की प्रमुख समस्याएं हैं।
हनुमान पूजा, महामृत्युंजय मंत्र और भकूट दोष निवारण पूजा इस जोड़ी के लिए जरूरी है।
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।