
राशि अनुकूलता
कर्क और मीन राशि की जोड़ी को राशि स्तर पर 36 में से 31 गुण (लगभग 86%) मिलते हैं, इसलिए यह उत्कृष्ट मिलान है। मीन राशि कर्क से नौवीं है, यानी नवपंचम भकूट, पर गुरु चंद्र को मित्र मानता है और चंद्र गुरु को सम। असली गुण जानने के लिए दोनों जन्म कुंडलियों का पूरा कुंडली मिलान कराएँ।
कर्क-मीन जोड़ी में भावनात्मक तालमेल असाधारण रूप से गहरा, कोमल और सहज होता है। दोनों जल तत्व की राशियाँ होने से भावनाओं, करुणा और अंतर्ज्ञान की साझी भाषा बोलते हैं। कर्क पोषण, सुरक्षा और कोमलता लाता है, मीन गहरी करुणा, कल्पना और आध्यात्मिक संवेदनशीलता — दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को बिना कहे समझ लेते हैं। चुनौती बस यह हो सकती है कि दोनों अत्यधिक भावुक और संवेदनशील हों, और जब दोनों एक साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव में हों, तो व्यावहारिकता कम पड़ सकती है। पर आपसी समझ और स्नेह इतना गहरा है कि यह जोड़ी भावनात्मक रूप से अत्यंत सुरक्षित, स्नेहिल और जुड़ी हुई रहती है।
संवाद इस जोड़ी में कोमल, सहानुभूतिपूर्ण और गहरा होता है। दोनों भावनाओं और अंतर्ज्ञान की भाषा सहजता से समझते हैं, इसलिए बिना शब्दों के भी गहरी समझ रहती है। कर्क कोमल और पोषक है, मीन करुणामय और कल्पनाशील — दोनों गहरी, भावुक और अर्थपूर्ण बातचीत का आनंद लेते हैं। सावधानी: दोनों संवेदनशील होने से कभी भावनाओं को मन में रख सकते हैं या आहत होकर पीछे हट सकते हैं, और व्यावहारिक मुद्दों को टाल सकते हैं। भावनाओं को खुलकर साझा करना और कठिन विषयों पर भी स्पष्ट रहना इस जोड़ी के कोमल संवाद को और मज़बूत करता है।
इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत है असाधारण भावनात्मक और आध्यात्मिक तालमेल। दोनों जल राशियाँ होने और गुरु के चंद्र को मित्र मानने से भावनाओं, करुणा, अंतर्ज्ञान और आदर्शों में गहराई से जुड़ते हैं। कर्क पोषण, सुरक्षा और कोमलता लाता है, मीन गहरी करुणा, कल्पना और आध्यात्मिकता। दोनों दयालु, सहानुभूतिपूर्ण और प्रियजनों के प्रति समर्पित होते हैं। यह जोड़ी एक-दूसरे को असाधारण रूप से समझा हुआ, सुरक्षित और स्नेहिल अनुभव कराती है — दोनों की भावनात्मक तरंगें सहज मेल खाती हैं। जब व्यावहारिकता का थोड़ा संतुलन जुड़ता है, तो यह जोड़ी एक गहरी, कोमल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध साझेदारी बन जाती है।
इस जोड़ी की चुनौतियाँ कम हैं, पर ध्यान देने योग्य हैं। दोनों अत्यधिक भावुक और संवेदनशील होते हैं, इसलिए जब दोनों एक साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव में हों, तो रिश्ता भावनात्मक रूप से अस्थिर या अव्यावहारिक हो सकता है — कोई व्यावहारिक आधार नहीं देता। दोनों कठिन मुद्दों और टकराव से बच सकते हैं, और भावनाओं में बहकर अनिर्णय या पलायन कर सकते हैं। वित्तीय व्यावहारिकता में भी दोनों कमज़ोर हो सकते हैं। समाधान: किसी एक को व्यावहारिक ज़िम्मेदारी संभालनी होगी, कठिन विषयों पर स्पष्ट रहें, और भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। इन छोटे संतुलनों से यह पहले से गहरी जोड़ी और भी मज़बूत बनती है।
कर्क-मीन का प्रेम गहरा, कोमल और स्वप्निल होता है। दोनों जल राशियाँ होने से भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर गहराई से जुड़ते हैं। कर्क पोषण, सुरक्षा और कोमलता लाता है, मीन गहरी करुणा, रोमांस और कल्पना। प्रेम सहज, स्नेहिल और भावुक रहता है। चुनौती बस यह कि अति-भावुकता व्यावहारिकता को न दबाए। आपसी कोमलता और समझ के साथ यह प्रेम असाधारण रूप से गहरा, स्नेहिल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनता है।
विवाह में यह जोड़ी एक गहराई से स्नेहिल, करुणामय और आध्यात्मिक घर बनाती है। कर्क पोषण और भावनात्मक सुरक्षा देता है, मीन करुणा, कल्पना और गहराई। गुरु की चंद्र से मैत्री इसे मज़बूत नींव देती है। दीर्घकालिकता की कुंजी है व्यावहारिक संतुलन और वित्तीय अनुशासन, क्योंकि दोनों इनमें कमज़ोर हो सकते हैं। जब किसी एक की व्यावहारिकता जुड़ती है, तो यह दाम्पत्य अत्यंत गहरा, स्नेहिल और सुरक्षित बनता है।
दो जल राशियों का मेल इस पक्ष को गहरा, कोमल और भावनात्मक रूप से समृद्ध बनाता है। कर्क समर्पण और सुरक्षा लाता है, मीन गहरी करुणा, कल्पना और आध्यात्मिक संवेदनशीलता। दोनों निकटता में गहरी भावना और सहज जुड़ाव चाहते हैं। यह इस जोड़ी का अत्यंत मज़बूत पक्ष है, जहाँ भावनात्मक और आध्यात्मिक एकता असाधारण होती है। आपसी कोमलता, भावनात्मक उपस्थिति और विश्वास इस घनिष्ठता को गहराई से संतोषजनक बनाते हैं।
विश्वास और निष्ठा इस जोड़ी की गहरी, स्नेहिल नींव है। दोनों स्वभाव से कोमल, समर्पित और भावनात्मक रूप से निष्ठावान होते हैं, इसलिए भरोसा सहज और गहरा बनता है। साझा करुणा और आध्यात्मिकता इसे और मज़बूत करती है। सावधानी बस यह कि दोनों की संवेदनशीलता आहत होकर पीछे हटने या भावनाओं को मन में रखने में न बदले। कोमल, खुला संवाद, निरंतर स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा इस जोड़ी की निष्ठा को अत्यंत गहरी और अटूट बनाए रखते हैं।
धन के मामले में कर्क बचतकर्ता और घर-केंद्रित होता है, जो सहायक है, पर मीन उदार, दानशील और कभी अव्यावहारिक हो सकता है — इसलिए वित्तीय अनुशासन में सावधानी ज़रूरी है। समाधान: कर्क को बजट की कमान दें, एक स्पष्ट बचत-योजना बनाएँ, और मीन की दानशीलता के लिए सीमित जगह रखें। जीवनशैली में दोनों को घर, करुणा, कला और आध्यात्मिकता पसंद है। वित्तीय अनुशासन के साथ यह जोड़ी एक सार्थक, स्नेहिल और शांत जीवनशैली बनाती है।
परिवार के प्रति दोनों अत्यंत स्नेही, करुणामय और समर्पित होते हैं — कर्क पोषण और सुरक्षा देता है, मीन करुणा, कल्पना और आध्यात्मिक मूल्य। घर में गहरा स्नेह, संवेदनशीलता और शांति का वातावरण रहता है। बच्चों के लिए यह एक अत्यंत स्नेहिल, पोषक वातावरण बनाता है। ध्यान रखने योग्य बात यह कि अति-भावुकता और अति-संरक्षण से बचें, और व्यावहारिक अनुशासन व दृढ़ता भी सिखाएँ। बड़ों, विशेषकर माता, के सम्मान के साथ यह जोड़ी एक गहराई से पोषक, आध्यात्मिक परिवार बनाती है।
कर्क और मीन दोनों जल तत्व की राशियाँ हैं — कर्क का स्वामी चंद्र और मीन का स्वामी गुरु है। नैसर्गिक मैत्री में चंद्र गुरु को सम मानता है और उसका कोई शत्रु नहीं,[2] जबकि गुरु चंद्र को अपना मित्र मानता है,[3] इसलिए किसी ओर से शत्रुता नहीं रहती। समान तत्व और स्वामियों में शत्रुता न होने से भावनाओं, करुणा, अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिकता में गहरी, सहज समानता रहती है — यही इस उच्च अनुकूलता का मज़बूत आधार है। जल तत्व गहराई, भावना और सहज जुड़ाव देता है, गुरु इसमें करुणा, विवेक और आदर्श जोड़ता है। कुंजी बस यह है कि साझी जल-गहराई को थोड़ी व्यावहारिकता और भावनात्मक संतुलन से थामा जाए — तब यह एक गहन, कोमल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बंधन बनता है।
मुहूर्त चिन्तामणि मीन, वृश्चिक और कर्क को ब्राह्मण (विप्र) वर्ण की राशियाँ बताता है, इसलिए इस जोड़ी का वर्ण कूट पूरा मिलता है।[1] उसी अध्याय में चंद्र के मित्र केवल सूर्य और बुध बताए गए हैं, कोई शत्रु नहीं और बाकी सम,[2] और गुरु के मित्र सूर्य, मंगल और चंद्र गिनाए गए हैं।[3] मीन कर्क से नौवीं राशि है, यानी नवपंचम भकूट, जिसे मुहूर्त चिन्तामणि संतान से जुड़ी परेशानी से जोड़ता है,[4] और विवाहपटल भी त्रिकोण स्थिति के लिए यही बात कहता है।[5] पर मुहूर्त चिन्तामणि यह भी कहता है कि राशि-स्वामियों में मैत्री हो और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों तो दुष्ट भकूट में भी विवाह शुभ है।[6] यहाँ मैत्री गुरु की ओर से है, चंद्र की ओर से सम भाव है, इसलिए छूट आंशिक है। असली फ़ैसला दोनों कुंडलियों की नाड़ी से होगा, और नीचे दिया गुरुवार का गुरु उपाय इस पक्ष को सहारा देता है।
लव मैरिज में कर्क और मीन कुछ ही मुलाक़ातों में ऐसा महसूस करते हैं जैसे बरसों से जानते हों, इसलिए रिश्ता तेज़ी से गहरा होता है। अरेंज्ड मैरिज में कर्क परिवार को मीन का कोमल, समर्पित स्वभाव भाता है और मीन परिवार को कर्क का घरेलू अपनापन। पहले साल में ही पता चलता है कि पैसे और कठिन बातचीत की ज़िम्मेदारी कौन लेगा। दोनों रास्तों में 36 में से 31 का अंक सिर्फ़ राशि की परत है। चुने हुए साथी गुण अंक कैसे पढ़ें, यह लव मैरिज कुंडली मिलान गाइड में है, मुफ़्त लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर तुरंत संकेत देता है, और कुंडली में विवाह योग लेख दोनों रास्तों के ग्रह योग समझाता है।
दूसरी शादी में यह कोमल जोड़ी पुराने घाव भरने में मदद करती है, बशर्ते दोनों पहली शादी के बच्चों और पैसे पर खुलकर बात करें। मुफ़्त दूसरी शादी कैलकुलेटर आपकी कुंडली के सातवें भाव (शादी और जीवनसाथी) को पढ़ता है। NRI रिश्ते में दूरी चंद्र-प्रधान कर्क साथी को बेचैन करती है, इसलिए तोहफ़ों से ज़्यादा हर हफ़्ते की तय वीडियो कॉल काम आती है। विदेशी जीवनसाथी और NRI विवाह गाइड बारहवें भाव (विदेश) के योग बताती है, और मुफ़्त विदेशी जीवनसाथी कैलकुलेटर तुरंत जाँच करता है। अंतरजातीय विवाह में राशि मिलान जाति पर निर्भर नहीं करता, परिवार की चिंता हो तो असली कुंडली मिलान का नतीजा सबसे साफ़ जवाब देता है।
शास्त्र नवपंचम भकूट को संतान पक्ष से जोड़ते हैं, इसलिए कर्क-मीन जोड़ी इस पक्ष को शादी से पहले शांति से जाँच ले, डर से नहीं। तीन बातें साफ़ तस्वीर देती हैं: दोनों कुंडलियों में पाँचवाँ भाव (संतान और बुद्धि) और उसका स्वामी, दोनों कुंडलियों में गुरु का बल, और दोनों जन्म नक्षत्रों से नाड़ी कूट। मुफ़्त संतान योग कैलकुलेटर एक मिनट में पाँचवाँ भाव पढ़ता है। अगर नाड़ी में भी दोष दिखे तो नाड़ी दोष के शास्त्रीय छूट और उपाय वाला लेख पढ़ें, और भकूट दोष की छूट वाला लेख 9-5, 6-8 और 2-12 तीनों स्थितियों के अपवाद समझाता है। शादी के बाद हर गुरुवार का गुरु उपाय दोनों मिलकर करें।
सबसे पहले दोनों की सही जन्म तारीख़, समय और जगह लिख लें। मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से दोनों का जन्म नक्षत्र निकालें, क्योंकि असली गुण नक्षत्र पर टिके होते हैं, सिर्फ़ राशि पर नहीं। फिर 51 रुपये में पूरा कुंडली मिलान चलाएँ, जो आठों कूटों के गुण देता है और नाड़ी, भकूट व मंगल दोष तीनों बताता है। मंगल की जल्दी जाँच के लिए मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर है, मंगल दोष और विवाह मिलान लेख दोनों साथियों के मांगलिक होने की स्थिति समझाता है, और 36 गुण मिलान की पूरी समझ हर कूट का अर्थ खोलती है।
हर दिशा का अलग पेज है, इसलिए उलटी दिशा के लिए मीन और कर्क राशि मिलान देखें। तीसरी जल राशि वृश्चिक त्रिकोण पूरा करती है, इसलिए कर्क और वृश्चिक और वृश्चिक और मीन सबसे नज़दीकी तुलना हैं। दोहरी जल राशि का असर कर्क और कर्क तथा मीन और मीन में साफ़ दिखता है। पृथ्वी तत्व का उल्टा खिंचाव कर्क और मकर और मीन और कन्या में दिखता है, जहाँ सातवीं राशि अंतर के ज़रिए आकर्षण बनाती है।
दोनों साथी अपनी चंद्र राशि के स्वामी को मज़बूत करें, इससे चंद्र और गुरु का वह सद्भाव भी बढ़ता है जो इस जोड़ी को जोड़ता है। उपाय 1, कर्क साथी के लिए (चंद्र) 1. क्या करें: शिवलिंग पर पानी मिला थोड़ा कच्चा दूध चढ़ाएँ और ॐ सोम सोमाय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर सोमवार सुबह, स्नान के बाद। 3. खर्च: 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 सोमवार। 5. आपके लिए क्यों: चंद्र कर्क का स्वामी है, शांत चंद्र मूड के उतार-चढ़ाव को स्थिर देखभाल में बदलता है। उपाय 2, मीन साथी के लिए (गुरु) 1. क्या करें: विष्णु मंदिर में चुटकी भर हल्दी और थोड़ी चने की दाल अर्पित करें और ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर गुरुवार सुबह, दोपहर से पहले। 3. खर्च: 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 गुरुवार। 5. आपके लिए क्यों: गुरु मीन का स्वामी है, स्थिर गुरु परिवार की योजनाओं में धैर्य और साफ़ निर्णय लाता है। एक साझा आदत दोनों के काम आती है: हर गुरुवार शाम दस मिनट साथ चुपचाप बैठें, फिर पैसे या परिवार का एक व्यावहारिक फ़ैसला लिखकर तय करें। मोती या पुखराज जैसे रत्न कभी पहला उपाय नहीं हैं, इन्हें पूरी कुंडली देखकर ही चुनें। अपनी कुंडली के हिसाब से उपाय जानने के लिए मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर देखें।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।
कार्मिक बैकग्राउंड रीडिंग ₹101 →राशि स्तर पर यह उत्कृष्ट जोड़ी है (इंडिकेटिव ~86%)। दोनों जल राशियाँ और गुरु की चंद्र से मैत्री गहरी भावनात्मक व आध्यात्मिक समझ देती है। सटीक निर्णय के लिए पूरी जन्म कुंडली का अष्टकूट मिलान आवश्यक है।
असाधारण भावनात्मक और आध्यात्मिक तालमेल। दोनों जल राशियाँ होने से करुणा, अंतर्ज्ञान और आदर्शों में गहराई से जुड़ते हैं; कर्क पोषण और मीन करुणा लाता है।
दोनों की अति-भावुकता से व्यावहारिकता व वित्तीय अनुशासन की कमी, और कठिन मुद्दों से बचाव। किसी एक को व्यावहारिक ज़िम्मेदारी और भावनात्मक संतुलन रखना ज़रूरी है।
नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित विश्लेषण है। असली 36-गुण अष्टकूट नक्षत्र, गण, नाड़ी, भकूट व मंगल दोष पर निर्भर है — इसके लिए त्रिकाल वाणी का कुंडली मिलान (₹51) उपयोग करें।
हाँ, गहरा भावनात्मक, आध्यात्मिक व सहज जुड़ाव इसे प्रेम विवाह के लिए अत्यंत अनुकूल बनाता है। व्यावहारिक संतुलन दीर्घकालिक कुंजी है।
कर्क बचतकर्ता व घर-केंद्रित (सहायक), पर मीन उदार व कभी अव्यावहारिक। कर्क को बजट की कमान देने और स्पष्ट बचत-योजना से जीवनशैली सार्थक व सुरक्षित बनती है।
सोमवार शिव पूजा व दूध-चावल दान, गुरुवार गुरु/विष्णु पूजा व पीली वस्तुओं का दान, चंद्र व गुरु मंत्र जप, ध्यान-सेवा। रत्न धारण से पूर्व कुंडली विश्लेषण कराएँ।
हाँ। राशि अनुकूलता मंगल दोष नहीं दर्शाती; यह कुंडली में मंगल की भाव-स्थिति से तय होता है, इसलिए विवाह से पहले अलग जाँच अवश्य कराएँ।
राशि स्तर पर कर्क और मीन को 36 में से 31 गुण मिलते हैं, लगभग 86 प्रतिशत, जो उत्कृष्ट श्रेणी है। असली गुण दोनों जन्म नक्षत्रों से तय होते हैं, इसलिए सटीक अंक के लिए पूरा कुंडली मिलान कराएँ।
मुहूर्त चिन्तामणि नवपंचम भकूट को संतान से जुड़ी चिंता से जोड़ता है,[4] पर उसी अध्याय में राशि-स्वामियों की मैत्री और शुद्ध नाड़ी-नक्षत्र होने पर विवाह शुभ कहा गया है।[6] गुरु चंद्र को मित्र मानता है, इसलिए पहले नाड़ी जाँचें और भकूट दोष गाइड पढ़ें।
आंशिक रूप से। मुहूर्त चिन्तामणि के अनुसार गुरु के मित्रों में चंद्र है,[3] जबकि चंद्र के मित्र केवल सूर्य और बुध हैं और वह गुरु को सम मानता है।[2] किसी ओर से शत्रुता नहीं है, इसलिए इस जोड़ी की ग्रह मैत्री मज़बूत रहती है।
हाँ। राशि मिलान देश या जाति पर निर्भर नहीं करता। दोनों कुंडलियों में सातवाँ भाव और शुक्र मुफ़्त विदेशी जीवनसाथी कैलकुलेटर से देखें, और पूरा कुंडली मिलान परिवार को साफ़ जवाब देता है।
द्विजा झषालिकर्कटास्ततो नृपा विशोऽङ्घ्रिजाः । वरस्य वर्णतोऽधिका वधूर्न शस्यते बुधैः ॥ २२ ॥मीन, वृश्चिक और कर्क ब्राह्मण (विप्र) वर्ण की राशियाँ हैं, फिर क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र राशियाँ आती हैं, और वर से ऊँचे वर्ण की वधू प्रशस्त नहीं मानी गई।
Pisces, Scorpio and Cancer are the Brahmin (Vipra) varna signs, then come the Kshatriya, Vaishya and Shudra signs, and a bride of higher varna than the groom is not recommended.
मित्राणि द्युमणेः कुजेज्यशशिनः शुक्रार्कजौ वैरिणौ सौम्यश्चास्य समो विधोर्बुधरवी मित्रे न चास्य द्विषत् । शेषाश्चास्य समाः कुजस्य सुहृदश्चन्द्रेज्यसूर्या बुधः शत्रुः शुक्रशनी समौ च शशभृत्सूनोः सिताहस्करौ ॥ २७ ॥सूर्य के मित्र मंगल, गुरु और चंद्र हैं, शत्रु शुक्र और शनि, और बुध सम। चंद्र के मित्र बुध और सूर्य हैं, उसका कोई शत्रु नहीं, बाकी सब सम।
The Sun has Mars, Jupiter and the Moon as friends, Venus and Saturn as enemies and Mercury as neutral. The Moon has Mercury and the Sun as friends, no enemy, and the rest as neutral.
मित्रे चास्य रिपुः शशी गुरुशनिक्ष्माजाः समा गीष्पतेर्मित्राण्यर्ककुजेन्दवो बुधसितौ शत्रू समः सूर्यजः । मित्रे सौम्यशनी कवेः शशिरवी शत्रू कुजेज्यौ समौ मित्रे शुक्रबुधौ शनेः शशिरविक्ष्माजा द्विषोऽन्यः समः ॥ २८ ॥गुरु के मित्र सूर्य, मंगल और चंद्र हैं, शत्रु बुध और शुक्र, और शनि सम।
Jupiter has the Sun, Mars and the Moon as friends, Mercury and Venus as enemies and Saturn as neutral.
मृत्युः षट्काष्टके ज्ञेयोऽपत्यहानिर्नवात्मजे । द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ॥ ३१ ॥षडष्टक भकूट मृत्यु-भय, नवपंचम संतान-हानि और द्विर्द्वादश निर्धनता से जोड़ा गया है, बाकी स्थितियाँ सुख देती हैं।
A 6-8 bhakoot is linked with danger to life, a 9-5 bhakoot with trouble about children and a 2-12 bhakoot with poverty, while the other positions bring happiness.
षट्काष्टके मरणवैरवियोगदोषा द्विर् द्वादशे निधनता ऽप्रजाता त्रिकोणे। प्रीतिः परा निगदिता समसप्तकेषु शेषेष्व् अनेकविधसौख्यसुतार्थसंपत्॥षडष्टक (6-8) में मृत्यु, वैर और वियोग के दोष, द्विर्द्वादश (2-12) में निर्धनता (गरीबी) और त्रिकोण (नवपंचम) में संतान की कमी कही गई है, जबकि समसप्तक, यानी एक ही राशि (1-1) और आपसी सप्तम (1-7), में परम प्रीति और बाकी स्थितियों में अनेक प्रकार का सुख, संतान और धन मिलता है।
Signs in a 6-8 placement bring the faults of death, enmity and separation, a 2-12 placement brings poverty and a trikona (5-9) placement brings lack of children, while samasaptaka, meaning the same sign (1-1) and the mutual 7th (1-7), gives the highest affection, and the remaining placements bring many kinds of happiness, children and wealth.
प्रोक्ते दुष्टभकूटके परिणयस्त्वेकाधिपत्ये शुभोऽथो राशीश्वरसौहृदेऽपि गदितो नाड्यृक्षशुद्धिर्यदि । अन्यर्क्षेंऽशपयोर्बलित्वसखिते नाड्यृक्षशुद्धौ तथा ताराशुद्धिवशेन राशिवशताभावे निरुक्तो बुधैः ॥ ३२ ॥दुष्ट भकूट होने पर भी विवाह शुभ है जब दोनों राशियों का स्वामी एक हो, और तब भी जब राशि-स्वामियों में मैत्री हो बशर्ते नाड़ी और नक्षत्र शुद्ध हों, साथ ही नवांश-स्वामियों की मैत्री या बल और तारा शुद्धि से भी छूट मिलती है।
With a bad bhakoot, marriage is still auspicious when both signs have the same lord, and also when the sign lords are friends provided the Nadi and nakshatra checks are clean, with further reliefs from friendly or strong navamsha lords and from Tara.
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।