दिल्ली एनसीआर · Delhi

दिल्ली एनसीआर में भाई दूज

बुधवार, 11 नवंबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

भाई दूज इस साल 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व है, जिसमें बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन द्वितीया तिथि मध्याह्न काल में पूरी तरह से व्याप्त रहेगी। तिलक का शुभ मुहूर्त आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।

🕐 दिल्ली एनसीआर के लिए भाई दूज का समय

तिथिDwitiya (Shukla Paksha)15:53 तक
नक्षत्रAnuradha, पाद 411:38 तक
योग · करणAtiganda · Kaulava
पूजा मुहूर्त11:00-13:08 (मध्याह्न)
अभिजित मुहूर्त11:43-12:25
राहुकाल12:04-13:24
यमगंड · गुलिक08:04-09:24 · 10:44-12:04
सूर्योदय · सूर्यास्त06:44 · 17:25

दिल्ली एनसीआर (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

भाई दूज पर क्या करें

  1. पूजा की थाली में रोली, अक्षत, मिठाई और दीया तैयार कर लें।
  2. भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
  3. भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
  4. तिलक के बाद भाई की आरती उतारें।
  5. भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें।
  6. भाई अपनी बहन को सम्मानपूर्वक उपहार दें।
  7. पूजा के बाद परिवार के साथ भोजन ग्रहण करें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Dwitiya pervades madhyahna kaal on one day only (100% of the window). The Committee prescribes Yamadvitiya as madhyahna-vyapini and purvaviddha: the tilak day is fixed by Dwitiya pervading midday, and when two days qualify the earlier is taken.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में भाई दूज का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर06:4411:43-12:2512:04-13:24
मुंबई06:4711:59-12:4412:22-13:45
नोएडा06:4311:42-12:2412:03-13:23
गुरुग्राम06:4411:43-12:2612:05-13:25
बेंगलुरु06:2011:40-12:2512:03-13:28
हैदराबाद06:2211:37-12:2211:59-13:23
पुणे06:4211:55-12:4012:18-13:42
कोलकाता05:5010:58-11:4211:20-12:42
चेन्नई06:0911:29-12:1511:52-13:18
अहमदाबाद06:5412:01-12:4412:23-13:45

भाई दूज क्यों मनाया जाता है

भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह पर्व दिवाली के दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य भाई और बहन के बीच के बंधन को और अधिक मजबूत करना है। रक्षाबंधन की तरह ही यह त्योहार भी भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित है, लेकिन इसका स्वरूप और भावना थोड़ी अलग है। रक्षाबंधन में भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और जीवन में सफलता की कामना करती है। इस त्योहार का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। भाई दूज के इस पावन पर्व का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, शांति और शीतलता का कारक माना गया है। भाई-बहन का रिश्ता पूरी तरह से भावनाओं, निस्वार्थ प्रेम और मानसिक जुड़ाव पर आधारित होता है। जब चंद्रमा इस दिन का स्वामी होता है, तो यह इस बात का संकेत है कि यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि दो दिलों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को गहरा करने का अवसर है। चंद्रमा की शीतलता रिश्तों में आने वाली कड़वाहट को दूर करती है और मन में शांति लाती है। ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से भी यह दिन बहुत खास है। माना जाता है कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथों से बना भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यह मान्यता यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा से जुड़ी है। इसी कारण से इसे यम द्वितीया कहा जाता है। परंपराओं के अनुसार, इस दिन बहनों को अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती करनी चाहिए। यह तिलक केवल एक धार्मिक चिह्न नहीं है, बल्कि बहन के प्यार और आशीर्वाद का प्रतीक है। आधुनिक समय में, जब लोग अपने कामों में बहुत व्यस्त रहते हैं, भाई दूज परिवार को एक साथ लाने का एक सुंदर बहाना बन जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि चाहे हम जीवन में कितने भी व्यस्त क्यों न हो जाएं, हमारे पारिवारिक रिश्ते और भावनाएं सबसे ऊपर होनी चाहिए। चंद्रमा के प्रभाव के कारण, इस दिन मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए की गई प्रार्थनाएं विशेष रूप से फलदायी मानी जाती हैं। इसलिए, इस दिन को पूरी श्रद्धा, खुशी और सकारात्मक मन से मनाना चाहिए।

🪔 भाई दूज पूजा विधि

  1. स्नान और तैयारीसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  2. पूजा स्थान की सफाईपूजा के स्थान को साफ करके वहां एक छोटी चौकी रखें।
  3. चौकी सजानाचौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उस पर अष्टदल कमल या स्वास्तिक बनाएं।
  4. थाली तैयार करनापूजा की थाली तैयार करें जिसमें रोली, अक्षत, कुमकुम, मिठाई और दीया हो।
  5. भाई को बैठानाऊपर दिए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार भाई को चौकी पर बैठाएं।
  6. दिशा का ध्यानध्यान रखें कि भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  7. तिलक लगानाबहनें सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
  8. आरती करनातिलक लगाने के बाद भाई की आरती उतारें।
  9. मुंह मीठा करनाआरती के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और पानी दें।
  10. उपहार देनाभाई अपनी बहन को अपनी क्षमता के अनुसार उपहार दें।
  11. आशीर्वाद लेनाअंत में घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।

5-मिनट विधि

  1. पूजा की थाली में रोली, चावल, दीया और मिठाई सजा लें।
  2. भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठाएं।
  3. माथे पर तिलक लगाकर चावल लगाएं और आरती उतारें।
  4. भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें।
  5. भाई अपनी बहन को उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें।

🛒 भाई दूज पूजा सामग्री

आवश्यक

  • रोली (कुमकुम)
  • साबुत चावल (अक्षत)
  • आरती के लिए दीया
  • रुई की बाती
  • घी या तेल
  • मिठाई
  • पूजा की चौकी

वैकल्पिक

  • फूल
  • पान का पत्ता
  • सुपारी
  • नारियल
  • सूखे मेवे

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • अगर रोली उपलब्ध न हो, तो हल्दी पाउडर का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • अगर मिठाई न हो, तो बताशे या चीनी का उपयोग किया जा सकता है।
  • अगर चौकी न हो, तो साफ आसन या कुशन का उपयोग किया जा सकता है।

भाई दूज: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं बाल धो सकती हूँ?

हाँ, आप त्योहार के दिन बाल धो सकती हैं, इसमें कोई मनाही नहीं है।

क्या मैं नाखून काट सकती हूँ?

त्योहार के दिन नाखून काटना आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता, इसे एक दिन पहले कर लेना बेहतर है।

क्या तिलक के समय भाई का सिर ढका होना चाहिए?

हाँ, पारंपरिक रूप से तिलक करवाते समय भाई को अपने सिर पर रुमाल या कोई साफ कपड़ा रखना चाहिए।

क्या बहन तिलक करने से पहले कुछ खा सकती है?

कई परिवारों में बहनें तिलक करने तक व्रत रखती हैं, लेकिन यह आपकी पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?

हाँ, भाई दूज के दिन बहन के घर जाने के लिए यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है।

क्या पूजा रात में की जा सकती है?

तिलक का मुख्य समय मध्याह्न काल होता है, जो ऊपर टेबल में दिया गया है। रात में पूजा करना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता।

क्या मैं नया काम शुरू कर सकता हूँ?

हाँ, यह दिन शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है, खासकर पारिवारिक व्यवसायों के लिए।

क्या इस दिन खरीदारी की जा सकती है?

बिल्कुल, इस दिन उपहार, कपड़े और मिठाइयां खरीदना बहुत आम और शुभ है।

क्या मैं काले कपड़े पहन सकता हूँ?

पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है; लाल, पीले या चमकीले रंग पहनना बेहतर है।

क्या भाई को बहन के घर ही भोजन करना चाहिए?

हाँ, परंपरा के अनुसार भाई को अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन करना चाहिए।

अगर बहन दूर रहती है तो क्या करें?

अगर मिलना संभव न हो, तो बहनें मानसिक रूप से भाई का ध्यान करके भगवान से उनकी प्रार्थना कर सकती हैं।

क्या इस दिन नमक खा सकते हैं?

हाँ, इस त्योहार में नमक खाने पर कोई रोक नहीं है, आप सामान्य भोजन कर सकते हैं।

क्या चचेरे भाइयों को भी तिलक लगा सकते हैं?

हाँ, सगे भाइयों के अलावा चचेरे और ममेरे भाइयों को भी तिलक लगाने की परंपरा है।

⚠️ आम गलतियाँ

  • तिलक करते समय भाई का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
  • बिना सिर ढके तिलक करवाना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता है।
  • पूजा की थाली में टूटे हुए चावल (अक्षत) का उपयोग करना अनुचित है।
  • ऊपर दिए गए राहुकाल के समय में तिलक करना आमतौर पर वर्जित माना जाता है।
  • बहन का भाई को तिलक करने से पहले ही भोजन कर लेना कई परिवारों में व्रत को खंडित मानता है।
  • आरती के दौरान दीये में तेल या घी कम रखना, जिससे वह बीच में बुझ जाए, सही नहीं माना जाता।
  • पूजा के बाद भाई द्वारा अपनी बहन का सम्मान न करना या उपहार न देना इस पर्व की भावना के खिलाफ है।

📖 भाई दूज कथा

भाई दूज से जुड़ी यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा बहुत ही प्रसिद्ध और प्रेरणादायक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी संज्ञा से दो संतानें हुईं—एक पुत्र यमराज और दूसरी पुत्री यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थीं। वह अक्सर यमराज से निवेदन करती थीं कि वह उनके घर आएं और उनके साथ भोजन करें। लेकिन यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि वे अपनी बहन के घर नहीं जा पाते थे। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई को फिर से बहुत प्रेम से भोजन पर आमंत्रित किया और वचन लिया कि वे जरूर आएंगे। अपनी बहन के इस निमंत्रण को यमराज टाल नहीं सके। जब यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे, तो यमुना उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने अपने भाई का स्वागत किया, उन्हें तिलक लगाया और अपने हाथों से स्वादिष्ट भोजन बनाकर खिलाया। यमुना के इस प्रेम और सत्कार से यमराज बहुत प्रसन्न हुए। भोजन के बाद यमराज ने यमुना से कहा कि वह कोई भी वरदान मांग सकती हैं। तब यमुना ने कहा, "हे भ्राता, आप हर साल इस दिन मेरे घर आएं। और जो भी भाई आज के दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथों से बना भोजन करेगा और बहन उसे तिलक करेगी, उसे आपका (अकाल मृत्यु का) भय नहीं रहेगा।" यमराज ने अपनी बहन की इस बात को सहर्ष स्वीकार कर लिया और "तथास्तु" कहकर उन्हें वरदान दिया। इसी दिन से भाई दूज का यह पावन पर्व मनाया जाने लगा। इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भाई-बहन का रिश्ता कितना पवित्र होता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि व्यस्तता के बावजूद हमें अपने परिवार और रिश्तों के लिए समय निकालना चाहिए। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं।

🪔 आरती

भाई दूज पर आरती का विशेष महत्व है। जब बहन भाई के माथे पर तिलक लगा देती है और उसे मिठाई खिला देती है, उसके बाद आरती की जाती है। आरती के लिए थाली में एक घी का दीया जलाएं। भाई के चेहरे के सामने थाली को घड़ी की सुई की दिशा में घुमाते हुए आरती करें। यह आरती भाई के जीवन से अंधकार को दूर करने और उनके जीवन में प्रकाश, सुख और शांति लाने की कामना के साथ की जाती है।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार भाई दूज के उपाय

Money

आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए भाई दूज के दिन चंद्रमा की ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है। चंद्रमा धन और तरलता का प्रतीक है। इस दिन बहनें चांदी के एक छोटे सिक्के को रोली से तिलक करके अपने भाई को उपहार में दें। इसे भाई अपने पर्स में रखें।

Career

करियर में स्थिरता और शांति के लिए चंद्रमा का मजबूत होना आवश्यक है। यदि आप कार्यक्षेत्र में तनाव महसूस कर रहे हैं, तो भाई दूज के दिन सफेद रंग की मिठाई (जैसे रसगुल्ला या बर्फी) का दान करें। इससे चंद्रमा के शुभ प्रभाव से करियर में मानसिक शांति और सफलता मिलती है।

Marriage

वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए चंद्रमा की शीतलता बहुत काम आती है। भाई दूज के दिन पति-पत्नी मिलकर चंद्रमा को अर्घ्य दें (यदि संभव हो) या शाम के समय घर के मंदिर में सफेद फूल अर्पित करें। इससे रिश्तों में आने वाली कड़वाहट दूर होती है।

Children

बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी एकाग्रता के लिए चंद्रमा की शांति बहुत जरूरी है। इस दिन बच्चों के माथे पर चंदन का तिलक लगाएं। चंदन की शीतलता और चंद्रमा का प्रभाव बच्चों के मन को शांत रखता है, जिससे पढ़ाई में उनका ध्यान लगता है और वे स्वस्थ रहते हैं।

Home

घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए भाई दूज के दिन घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक घी का दीपक जलाएं। चंद्रमा मन और घर के वातावरण का कारक है। इस उपाय से घर में क्लेश कम होता है और परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ता है।

Negativity

जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए चंद्रमा से जुड़े उपाय बहुत प्रभावी हैं। भाई दूज की शाम को थोड़ी सी सफेद चंदन की लकड़ी को पानी में घिसकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कें। यह चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और बुरी नजर से बचाता है।

क्या भाई दूज आपके लिए विशेष है?

यह पेज भाई दूज के त्योहार, शुभ मुहूर्त और चंद्रमा के सामान्य प्रभावों की जानकारी देता है। लेकिन ज्योतिष में, एक ग्रह का प्रभाव सभी के लिए एक जैसा नहीं होता। चंद्रमा आपकी कुंडली में किस भाव में है, यह आपके जीवन के सवालों के जवाब बदल सकता है। एक सामान्य लेख आपकी व्यक्तिगत समस्याओं का सटीक समाधान नहीं दे सकता। यहीं पर एक व्यक्तिगत रीडिंग आपकी मदद करती है। यदि आप अपने करियर, पैसे या सही समय के बारे में जानना चाहते हैं, तो 'Kundli' रीडिंग आपकी मदद करेगी। विवाह और अनुकूलता के लिए 'Kundali Milan' सबसे सही है। अगर आप हाथों की लकीरों में छिपे भविष्य को समझना चाहते हैं, तो 'Hastrekha' रीडिंग चुनें। और यदि आपको अजीब सपने आते हैं, तो 'Swapna Shastra' आपके सपनों का अर्थ बता सकता है। त्रिकाल वाणी की ये सेवाएं आपको आपकी स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन देती हैं।

दिल्ली एनसीआर में भाई दूज — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भाई दूज 2026 में कब है और इसका सही समय क्या है?

भाई दूज इस साल 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व है जो दिवाली के दो दिन बाद आता है। तिलक करने का सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त और राहुकाल का समय ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

भाई दूज की पूजा में कौन-कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है?

इस पूजा के लिए मुख्य रूप से रोली, साबुत चावल, घी का दीया और मिठाई की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कई लोग फूल, पान के पत्ते और सूखे मेवे भी पूजा की थाली में रखते हैं। यह सभी सामग्री बहन के प्रेम और सम्मान को दर्शाती है। यदि कोई सामग्री न मिले तो उसके पारंपरिक विकल्प का उपयोग किया जा सकता है।

क्या भाई दूज के दिन बहन को व्रत रखना चाहिए?

कई पारंपरिक परिवारों में बहनें तब तक कुछ नहीं खातीं जब तक वे अपने भाई को तिलक नहीं कर देतीं। यह पूरी तरह से आपकी पारिवारिक परंपरा और आपकी शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। यदि आप गर्भवती हैं, बीमार हैं या किसी दवा पर हैं, तो कृपया व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। स्वास्थ्य हमेशा सबसे पहले आना चाहिए।

भाई को तिलक करते समय उनका मुख किस दिशा में होना चाहिए?

तिलक करते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा सूर्य के उदय होने की दिशा है जो नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। वहीं उत्तर दिशा को देवताओं की दिशा माना जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिलक करवाना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता है।

क्या मैं इस दिन अपने बाल धो सकती हूँ?

हाँ, आप भाई दूज के दिन बिना किसी संकोच के अपने बाल धो सकती हैं। इस दिन बाल धोने को लेकर कोई पारंपरिक मनाही नहीं है। त्योहार के दिन साफ-सुथरा रहना और अच्छे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसलिए आप अपनी सुविधा के अनुसार स्नान और बाल धोने का कार्य कर सकती हैं।

क्या भाई दूज और रक्षाबंधन में कोई अंतर है?

हाँ, दोनों त्योहार भाई-बहन के प्रेम को दर्शाते हैं, लेकिन इनके पीछे की भावना अलग है। रक्षाबंधन में भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है और बहन उसे राखी बांधती है। जबकि भाई दूज में बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। दोनों का पौराणिक महत्व और पूजा विधि भी अलग-अलग है।

क्या इस दिन नया काम या व्यवसाय शुरू किया जा सकता है?

भाई दूज का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है, इसलिए आप इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं। विशेष रूप से यदि वह काम परिवार या भाई-बहन के साथ मिलकर किया जा रहा हो, तो यह और भी अच्छा है। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव मन को शांति और स्थिरता देता है। कोई भी शुभ कार्य ऊपर दिए गए मुहूर्त के अनुसार करना बेहतर होता है।

भाई दूज के दिन कौन सी कथा पढ़नी या सुननी चाहिए?

इस दिन यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा सुनने की परंपरा है। यह कथा बताती है कि कैसे यमुना के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया था कि जो भाई इस दिन बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। यह कथा भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाती है। आप इस कथा को पूजा के समय परिवार के साथ पढ़ सकते हैं।

क्या राहुकाल में भाई को तिलक किया जा सकता है?

हिंदू परंपराओं में राहुकाल के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। तिलक करना एक बहुत ही पवित्र और शुभ कार्य है, इसलिए इसे राहुकाल में नहीं करना चाहिए। आपके शहर में राहुकाल का सही समय क्या है, यह आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं। हमेशा शुभ मुहूर्त में ही पूजा संपन्न करनी चाहिए।

क्या चचेरे या ममेरे भाइयों को भी तिलक लगाया जा सकता है?

बिल्कुल, भाई दूज का त्योहार केवल सगे भाइयों तक सीमित नहीं है। आप अपने चचेरे, ममेरे, फुफेरे या मुंहबोले भाइयों को भी तिलक लगा सकती हैं। यह त्योहार परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और एकता बढ़ाने का अवसर है। भावनाएं सच्ची होनी चाहिए, रिश्ता चाहे कोई भी हो।

अगर भाई दूर रहता है और आ नहीं सकता, तो क्या करें?

अगर आपका भाई किसी कारणवश आपसे दूर है और आप मिल नहीं सकते, तो निराश न हों। आप मानसिक रूप से उनका ध्यान कर सकती हैं और भगवान से उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना कर सकती हैं। कई बहनें एक सूखे नारियल या तस्वीर को तिलक करके अपनी रस्म पूरी करती हैं। बाद में जब भी मिलना हो, तब आप उन्हें मिठाई खिला सकती हैं।

क्या इस दिन काले कपड़े पहनना सही है?

भारतीय त्योहारों में आमतौर पर पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचा जाता है। काला रंग उदासी या नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भाई दूज जैसे खुशी के मौके पर लाल, पीले, गुलाबी या कोई भी चमकीले रंग के कपड़े पहनना ज्यादा शुभ होता है। यह रंग उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।

भाई दूज के दिन चंद्रमा का क्या महत्व है?

इस त्योहार का स्वामी ग्रह चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं और शीतलता का कारक है। भाई-बहन का रिश्ता पूरी तरह से भावनाओं और मानसिक जुड़ाव पर निर्भर करता है। चंद्रमा का प्रभाव इस दिन रिश्तों में मधुरता और शांति लाता है। यही कारण है कि इस दिन किए गए उपाय मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

क्या इस दिन खरीदारी करना शुभ होता है?

हाँ, भाई दूज के दिन खरीदारी करना बहुत आम और शुभ माना जाता है। भाई अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदते हैं और बहनें भी भाइयों के लिए चीजें ले सकती हैं। इस दिन नए कपड़े, मिठाइयां या घर का सामान खरीदने में कोई बुराई नहीं है। यह त्योहार की खुशी को और बढ़ाता है।

क्या भाई दूज के दिन नमक खाया जा सकता है?

जी हाँ, इस त्योहार में नमक खाने को लेकर कोई सख्त नियम या मनाही नहीं है। एक बार जब बहन अपने भाई को तिलक कर देती है, तो उसके बाद वह सामान्य भोजन ग्रहण कर सकती है। परिवार के सभी लोग एक साथ मिलकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हैं। यह एक खुशी का दिन है, कठोर तपस्या का नहीं।

आरती करते समय दीया किस चीज का होना चाहिए?

आरती के लिए आमतौर पर पीतल, तांबे या मिट्टी के दीये का उपयोग किया जाता है। इसमें रुई की बाती लगाकर शुद्ध घी जलाना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो आप तिल के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं। आरती करते समय दीये को भाई के चेहरे के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाना चाहिए।

क्या अलग-अलग शहरों में तिलक का समय अलग होता है?

हाँ, ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है। इसी कारण से मध्याह्न काल और शुभ मुहूर्त का समय भी शहर के अनुसार बदल जाता है। इसलिए किसी एक जगह का समय देखकर पूजा नहीं करनी चाहिए। आप ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर का एकदम सटीक समय देख सकते हैं।

अगर रोली या कुमकुम न मिले तो तिलक कैसे करें?

अगर किसी कारण से पूजा के समय रोली या कुमकुम उपलब्ध नहीं है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप रसोई में रखी शुद्ध हल्दी के पाउडर में थोड़ा सा पानी या गंगाजल मिलाकर उसका उपयोग कर सकते हैं। हल्दी को भी हिंदू धर्म में बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। यह एक पारंपरिक रूप से स्वीकार्य विकल्प है।

भाई को तिलक करने के बाद क्या करना चाहिए?

तिलक लगाने के बाद बहन को अपने भाई की आरती उतारनी चाहिए। आरती के बाद भाई को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें। इसके बाद भाई अपनी क्षमता और प्रेम के अनुसार बहन को उपहार देता है। अंत में घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

क्या इस दिन दान करना शुभ होता है?

किसी भी हिंदू त्योहार के दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान करना हमेशा शुभ फलदायी होता है। भाई दूज के दिन आप गरीबों को भोजन करा सकते हैं या मिठाई बांट सकते हैं। चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सफेद चीजों जैसे चावल, चीनी या दूध का दान करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है।

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