मुंबई में भाई दूज
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
भाई दूज इस साल 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व है, जिसमें बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन द्वितीया तिथि मध्याह्न काल में पूरी तरह से व्याप्त रहेगी। तिलक का शुभ मुहूर्त आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं।
🕐 मुंबई के लिए भाई दूज का समय
| तिथि | Dwitiya (Shukla Paksha) — 15:53 तक |
| नक्षत्र | Anuradha, पाद 4 — 11:38 तक |
| योग · करण | Atiganda · Kaulava |
| पूजा मुहूर्त | 11:15-13:29 (मध्याह्न) |
| अभिजित मुहूर्त | 11:59-12:44 |
| राहुकाल | 12:22-13:45 |
| यमगंड · गुलिक | 08:10-09:34 · 10:58-12:22 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:47 · 17:57 |
मुंबई (19.076, 72.8777) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ भाई दूज पर क्या करें
- पूजा की थाली में रोली, अक्षत, मिठाई और दीया तैयार कर लें।
- भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
- भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
- तिलक के बाद भाई की आरती उतारें।
- भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें।
- भाई अपनी बहन को सम्मानपूर्वक उपहार दें।
- पूजा के बाद परिवार के साथ भोजन ग्रहण करें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Dwitiya pervades madhyahna kaal on one day only (100% of the window). The Committee prescribes Yamadvitiya as madhyahna-vyapini and purvaviddha: the tilak day is fixed by Dwitiya pervading midday, and when two days qualify the earlier is taken.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में भाई दूज का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| मुंबई | 06:47 | 11:59-12:44 | 12:22-13:45 |
| दिल्ली एनसीआर | 06:44 | 11:43-12:25 | 12:04-13:24 |
| नोएडा | 06:43 | 11:42-12:24 | 12:03-13:23 |
| गुरुग्राम | 06:44 | 11:43-12:26 | 12:05-13:25 |
| बेंगलुरु | 06:20 | 11:40-12:25 | 12:03-13:28 |
| हैदराबाद | 06:22 | 11:37-12:22 | 11:59-13:23 |
| पुणे | 06:42 | 11:55-12:40 | 12:18-13:42 |
| कोलकाता | 05:50 | 10:58-11:42 | 11:20-12:42 |
| चेन्नई | 06:09 | 11:29-12:15 | 11:52-13:18 |
| अहमदाबाद | 06:54 | 12:01-12:44 | 12:23-13:45 |
भाई दूज क्यों मनाया जाता है
🪔 भाई दूज पूजा विधि
- स्नान और तैयारी — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थान की सफाई — पूजा के स्थान को साफ करके वहां एक छोटी चौकी रखें।
- चौकी सजाना — चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उस पर अष्टदल कमल या स्वास्तिक बनाएं।
- थाली तैयार करना — पूजा की थाली तैयार करें जिसमें रोली, अक्षत, कुमकुम, मिठाई और दीया हो।
- भाई को बैठाना — ऊपर दिए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार भाई को चौकी पर बैठाएं।
- दिशा का ध्यान — ध्यान रखें कि भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- तिलक लगाना — बहनें सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
- आरती करना — तिलक लगाने के बाद भाई की आरती उतारें।
- मुंह मीठा करना — आरती के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और पानी दें।
- उपहार देना — भाई अपनी बहन को अपनी क्षमता के अनुसार उपहार दें।
- आशीर्वाद लेना — अंत में घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।
⚡ 5-मिनट विधि
- पूजा की थाली में रोली, चावल, दीया और मिठाई सजा लें।
- भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठाएं।
- माथे पर तिलक लगाकर चावल लगाएं और आरती उतारें।
- भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें।
- भाई अपनी बहन को उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें।
🛒 भाई दूज पूजा सामग्री
आवश्यक
- रोली (कुमकुम)
- साबुत चावल (अक्षत)
- आरती के लिए दीया
- रुई की बाती
- घी या तेल
- मिठाई
- पूजा की चौकी
वैकल्पिक
- फूल
- पान का पत्ता
- सुपारी
- नारियल
- सूखे मेवे
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- अगर रोली उपलब्ध न हो, तो हल्दी पाउडर का उपयोग पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
- अगर मिठाई न हो, तो बताशे या चीनी का उपयोग किया जा सकता है।
- अगर चौकी न हो, तो साफ आसन या कुशन का उपयोग किया जा सकता है।
❓ भाई दूज: क्या करें और क्या न करें
क्या मैं बाल धो सकती हूँ?
हाँ, आप त्योहार के दिन बाल धो सकती हैं, इसमें कोई मनाही नहीं है।
क्या मैं नाखून काट सकती हूँ?
त्योहार के दिन नाखून काटना आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता, इसे एक दिन पहले कर लेना बेहतर है।
क्या तिलक के समय भाई का सिर ढका होना चाहिए?
हाँ, पारंपरिक रूप से तिलक करवाते समय भाई को अपने सिर पर रुमाल या कोई साफ कपड़ा रखना चाहिए।
क्या बहन तिलक करने से पहले कुछ खा सकती है?
कई परिवारों में बहनें तिलक करने तक व्रत रखती हैं, लेकिन यह आपकी पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?
हाँ, भाई दूज के दिन बहन के घर जाने के लिए यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है।
क्या पूजा रात में की जा सकती है?
तिलक का मुख्य समय मध्याह्न काल होता है, जो ऊपर टेबल में दिया गया है। रात में पूजा करना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता।
क्या मैं नया काम शुरू कर सकता हूँ?
हाँ, यह दिन शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है, खासकर पारिवारिक व्यवसायों के लिए।
क्या इस दिन खरीदारी की जा सकती है?
बिल्कुल, इस दिन उपहार, कपड़े और मिठाइयां खरीदना बहुत आम और शुभ है।
क्या मैं काले कपड़े पहन सकता हूँ?
पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है; लाल, पीले या चमकीले रंग पहनना बेहतर है।
क्या भाई को बहन के घर ही भोजन करना चाहिए?
हाँ, परंपरा के अनुसार भाई को अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन करना चाहिए।
अगर बहन दूर रहती है तो क्या करें?
अगर मिलना संभव न हो, तो बहनें मानसिक रूप से भाई का ध्यान करके भगवान से उनकी प्रार्थना कर सकती हैं।
क्या इस दिन नमक खा सकते हैं?
हाँ, इस त्योहार में नमक खाने पर कोई रोक नहीं है, आप सामान्य भोजन कर सकते हैं।
क्या चचेरे भाइयों को भी तिलक लगा सकते हैं?
हाँ, सगे भाइयों के अलावा चचेरे और ममेरे भाइयों को भी तिलक लगाने की परंपरा है।
⚠️ आम गलतियाँ
- तिलक करते समय भाई का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखना पूजा को अपूर्ण बनाता है।
- बिना सिर ढके तिलक करवाना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता है।
- पूजा की थाली में टूटे हुए चावल (अक्षत) का उपयोग करना अनुचित है।
- ऊपर दिए गए राहुकाल के समय में तिलक करना आमतौर पर वर्जित माना जाता है।
- बहन का भाई को तिलक करने से पहले ही भोजन कर लेना कई परिवारों में व्रत को खंडित मानता है।
- आरती के दौरान दीये में तेल या घी कम रखना, जिससे वह बीच में बुझ जाए, सही नहीं माना जाता।
- पूजा के बाद भाई द्वारा अपनी बहन का सम्मान न करना या उपहार न देना इस पर्व की भावना के खिलाफ है।
📖 भाई दूज कथा
🪔 आरती
भाई दूज पर आरती का विशेष महत्व है। जब बहन भाई के माथे पर तिलक लगा देती है और उसे मिठाई खिला देती है, उसके बाद आरती की जाती है। आरती के लिए थाली में एक घी का दीया जलाएं। भाई के चेहरे के सामने थाली को घड़ी की सुई की दिशा में घुमाते हुए आरती करें। यह आरती भाई के जीवन से अंधकार को दूर करने और उनके जीवन में प्रकाश, सुख और शांति लाने की कामना के साथ की जाती है।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार भाई दूज के उपाय
Money
आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए भाई दूज के दिन चंद्रमा की ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है। चंद्रमा धन और तरलता का प्रतीक है। इस दिन बहनें चांदी के एक छोटे सिक्के को रोली से तिलक करके अपने भाई को उपहार में दें। इसे भाई अपने पर्स में रखें।
Career
करियर में स्थिरता और शांति के लिए चंद्रमा का मजबूत होना आवश्यक है। यदि आप कार्यक्षेत्र में तनाव महसूस कर रहे हैं, तो भाई दूज के दिन सफेद रंग की मिठाई (जैसे रसगुल्ला या बर्फी) का दान करें। इससे चंद्रमा के शुभ प्रभाव से करियर में मानसिक शांति और सफलता मिलती है।
Marriage
वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए चंद्रमा की शीतलता बहुत काम आती है। भाई दूज के दिन पति-पत्नी मिलकर चंद्रमा को अर्घ्य दें (यदि संभव हो) या शाम के समय घर के मंदिर में सफेद फूल अर्पित करें। इससे रिश्तों में आने वाली कड़वाहट दूर होती है।
Children
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी एकाग्रता के लिए चंद्रमा की शांति बहुत जरूरी है। इस दिन बच्चों के माथे पर चंदन का तिलक लगाएं। चंदन की शीतलता और चंद्रमा का प्रभाव बच्चों के मन को शांत रखता है, जिससे पढ़ाई में उनका ध्यान लगता है और वे स्वस्थ रहते हैं।
Home
घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए भाई दूज के दिन घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक घी का दीपक जलाएं। चंद्रमा मन और घर के वातावरण का कारक है। इस उपाय से घर में क्लेश कम होता है और परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ता है।
Negativity
जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए चंद्रमा से जुड़े उपाय बहुत प्रभावी हैं। भाई दूज की शाम को थोड़ी सी सफेद चंदन की लकड़ी को पानी में घिसकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कें। यह चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और बुरी नजर से बचाता है।
क्या भाई दूज आपके लिए विशेष है?
मुंबई में भाई दूज — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भाई दूज 2026 में कब है और इसका सही समय क्या है?
भाई दूज इस साल 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व है जो दिवाली के दो दिन बाद आता है। तिलक करने का सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है। आपके शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त और राहुकाल का समय ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।
भाई दूज की पूजा में कौन-कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है?
इस पूजा के लिए मुख्य रूप से रोली, साबुत चावल, घी का दीया और मिठाई की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कई लोग फूल, पान के पत्ते और सूखे मेवे भी पूजा की थाली में रखते हैं। यह सभी सामग्री बहन के प्रेम और सम्मान को दर्शाती है। यदि कोई सामग्री न मिले तो उसके पारंपरिक विकल्प का उपयोग किया जा सकता है।
क्या भाई दूज के दिन बहन को व्रत रखना चाहिए?
कई पारंपरिक परिवारों में बहनें तब तक कुछ नहीं खातीं जब तक वे अपने भाई को तिलक नहीं कर देतीं। यह पूरी तरह से आपकी पारिवारिक परंपरा और आपकी शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। यदि आप गर्भवती हैं, बीमार हैं या किसी दवा पर हैं, तो कृपया व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। स्वास्थ्य हमेशा सबसे पहले आना चाहिए।
भाई को तिलक करते समय उनका मुख किस दिशा में होना चाहिए?
तिलक करते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा सूर्य के उदय होने की दिशा है जो नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। वहीं उत्तर दिशा को देवताओं की दिशा माना जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिलक करवाना पारंपरिक रूप से सही नहीं माना जाता है।
क्या मैं इस दिन अपने बाल धो सकती हूँ?
हाँ, आप भाई दूज के दिन बिना किसी संकोच के अपने बाल धो सकती हैं। इस दिन बाल धोने को लेकर कोई पारंपरिक मनाही नहीं है। त्योहार के दिन साफ-सुथरा रहना और अच्छे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसलिए आप अपनी सुविधा के अनुसार स्नान और बाल धोने का कार्य कर सकती हैं।
क्या भाई दूज और रक्षाबंधन में कोई अंतर है?
हाँ, दोनों त्योहार भाई-बहन के प्रेम को दर्शाते हैं, लेकिन इनके पीछे की भावना अलग है। रक्षाबंधन में भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है और बहन उसे राखी बांधती है। जबकि भाई दूज में बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। दोनों का पौराणिक महत्व और पूजा विधि भी अलग-अलग है।
क्या इस दिन नया काम या व्यवसाय शुरू किया जा सकता है?
भाई दूज का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है, इसलिए आप इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं। विशेष रूप से यदि वह काम परिवार या भाई-बहन के साथ मिलकर किया जा रहा हो, तो यह और भी अच्छा है। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव मन को शांति और स्थिरता देता है। कोई भी शुभ कार्य ऊपर दिए गए मुहूर्त के अनुसार करना बेहतर होता है।
भाई दूज के दिन कौन सी कथा पढ़नी या सुननी चाहिए?
इस दिन यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा सुनने की परंपरा है। यह कथा बताती है कि कैसे यमुना के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया था कि जो भाई इस दिन बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। यह कथा भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाती है। आप इस कथा को पूजा के समय परिवार के साथ पढ़ सकते हैं।
क्या राहुकाल में भाई को तिलक किया जा सकता है?
हिंदू परंपराओं में राहुकाल के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। तिलक करना एक बहुत ही पवित्र और शुभ कार्य है, इसलिए इसे राहुकाल में नहीं करना चाहिए। आपके शहर में राहुकाल का सही समय क्या है, यह आप ऊपर दी गई टेबल में देख सकते हैं। हमेशा शुभ मुहूर्त में ही पूजा संपन्न करनी चाहिए।
क्या चचेरे या ममेरे भाइयों को भी तिलक लगाया जा सकता है?
बिल्कुल, भाई दूज का त्योहार केवल सगे भाइयों तक सीमित नहीं है। आप अपने चचेरे, ममेरे, फुफेरे या मुंहबोले भाइयों को भी तिलक लगा सकती हैं। यह त्योहार परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और एकता बढ़ाने का अवसर है। भावनाएं सच्ची होनी चाहिए, रिश्ता चाहे कोई भी हो।
अगर भाई दूर रहता है और आ नहीं सकता, तो क्या करें?
अगर आपका भाई किसी कारणवश आपसे दूर है और आप मिल नहीं सकते, तो निराश न हों। आप मानसिक रूप से उनका ध्यान कर सकती हैं और भगवान से उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना कर सकती हैं। कई बहनें एक सूखे नारियल या तस्वीर को तिलक करके अपनी रस्म पूरी करती हैं। बाद में जब भी मिलना हो, तब आप उन्हें मिठाई खिला सकती हैं।
क्या इस दिन काले कपड़े पहनना सही है?
भारतीय त्योहारों में आमतौर पर पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचा जाता है। काला रंग उदासी या नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भाई दूज जैसे खुशी के मौके पर लाल, पीले, गुलाबी या कोई भी चमकीले रंग के कपड़े पहनना ज्यादा शुभ होता है। यह रंग उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
भाई दूज के दिन चंद्रमा का क्या महत्व है?
इस त्योहार का स्वामी ग्रह चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं और शीतलता का कारक है। भाई-बहन का रिश्ता पूरी तरह से भावनाओं और मानसिक जुड़ाव पर निर्भर करता है। चंद्रमा का प्रभाव इस दिन रिश्तों में मधुरता और शांति लाता है। यही कारण है कि इस दिन किए गए उपाय मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
क्या इस दिन खरीदारी करना शुभ होता है?
हाँ, भाई दूज के दिन खरीदारी करना बहुत आम और शुभ माना जाता है। भाई अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदते हैं और बहनें भी भाइयों के लिए चीजें ले सकती हैं। इस दिन नए कपड़े, मिठाइयां या घर का सामान खरीदने में कोई बुराई नहीं है। यह त्योहार की खुशी को और बढ़ाता है।
क्या भाई दूज के दिन नमक खाया जा सकता है?
जी हाँ, इस त्योहार में नमक खाने को लेकर कोई सख्त नियम या मनाही नहीं है। एक बार जब बहन अपने भाई को तिलक कर देती है, तो उसके बाद वह सामान्य भोजन ग्रहण कर सकती है। परिवार के सभी लोग एक साथ मिलकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हैं। यह एक खुशी का दिन है, कठोर तपस्या का नहीं।
आरती करते समय दीया किस चीज का होना चाहिए?
आरती के लिए आमतौर पर पीतल, तांबे या मिट्टी के दीये का उपयोग किया जाता है। इसमें रुई की बाती लगाकर शुद्ध घी जलाना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो आप तिल के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं। आरती करते समय दीये को भाई के चेहरे के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाना चाहिए।
क्या अलग-अलग शहरों में तिलक का समय अलग होता है?
हाँ, ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है। इसी कारण से मध्याह्न काल और शुभ मुहूर्त का समय भी शहर के अनुसार बदल जाता है। इसलिए किसी एक जगह का समय देखकर पूजा नहीं करनी चाहिए। आप ऊपर दी गई टेबल में अपने शहर का एकदम सटीक समय देख सकते हैं।
अगर रोली या कुमकुम न मिले तो तिलक कैसे करें?
अगर किसी कारण से पूजा के समय रोली या कुमकुम उपलब्ध नहीं है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप रसोई में रखी शुद्ध हल्दी के पाउडर में थोड़ा सा पानी या गंगाजल मिलाकर उसका उपयोग कर सकते हैं। हल्दी को भी हिंदू धर्म में बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। यह एक पारंपरिक रूप से स्वीकार्य विकल्प है।
भाई को तिलक करने के बाद क्या करना चाहिए?
तिलक लगाने के बाद बहन को अपने भाई की आरती उतारनी चाहिए। आरती के बाद भाई को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करें। इसके बाद भाई अपनी क्षमता और प्रेम के अनुसार बहन को उपहार देता है। अंत में घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
क्या इस दिन दान करना शुभ होता है?
किसी भी हिंदू त्योहार के दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान करना हमेशा शुभ फलदायी होता है। भाई दूज के दिन आप गरीबों को भोजन करा सकते हैं या मिठाई बांट सकते हैं। चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सफेद चीजों जैसे चावल, चीनी या दूध का दान करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है।
मुंबई में आने वाले त्योहार
- Janmashtami 20262026-09-04
- Hartalika Teej 20262026-09-13
- Ganesh Chaturthi 20262026-09-14
- Anant Chaturdashi 20262026-09-25
- Pitru Paksha 20262026-09-26
- Sharad Navratri 20262026-10-11
- Navratri Day 1 - Maa Shailputri 20262026-10-11
- Navratri Day 2 - Maa Brahmacharini 20262026-10-12
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