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हनुमान जयंती

मंगलवार, 20 अप्रैल 2027· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

हनुमान जयंती 2027 में 20 अप्रैल, मंगलवार को है। इस दिन सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा रहेगी, साथ में चित्रा नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग है। सुबह स्नान करके हनुमान जी को सिंदूर का चोला, लाल फूल और बूंदी के लड्डू चढ़ाएं, दीपक जलाएं, हनुमान चालीसा पढ़ें और ॐ हं हनुमते नमः का जाप करें।

🕐 भारत के लिए हनुमान जयंती का समय

तिथिPurnima (Shukla Paksha) — 03:57 (21 Apr) तक
नक्षत्रChitra, पाद 1 — 04:28 (21 Apr) तक
योग · करणHarshana · Vishti
अभिजित मुहूर्त11:54-12:45
राहुकाल15:32-17:08
यमगंड · गुलिक09:07-10:43 · 12:20-13:56
सूर्योदय · सूर्यास्त05:55 · 18:45

भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ हनुमान जयंती पर क्या करें

  1. सूर्योदय से पहले स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र पहनें।
  2. पूजा से पहले उगते सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं।
  3. चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चोला अर्पित करें।
  4. लाल फूल, केले और बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
  5. सरसों के तेल या घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  6. हनुमान चालीसा पढ़ें और ॐ हं हनुमते नमः की एक माला जपें।
  7. किसी जरूरतमंद की सेवा करें और पूरे दिन वाद-विवाद से दूर रहें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Purnima pervades sunrise kaal on one day only (100% of the window). Suryodaya-vyapini: the tithi prevailing at sunrise governs the day, which is the general rule for vrats where no special kaal applies. Dharma Sindhu confirms it: “पूर्णिमामावास्ये तु सावित्रीव्रतं विना परे ग्राह्ये” — Purnima is taken on the later day.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में हनुमान जयंती का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
दिल्ली एनसीआर05:5511:54-12:4515:32-17:08
मुंबई06:2112:11-13:0215:45-17:19
नोएडा05:5411:53-12:4415:31-17:07
गुरुग्राम05:5511:54-12:4615:33-17:09
बेंगलुरु06:0811:53-12:4315:23-16:56
हैदराबाद06:0011:49-12:3915:21-16:55
पुणे06:1812:08-12:5815:41-17:15
कोलकाता05:1611:09-12:0014:44-16:19
चेन्नई05:5711:42-12:3215:12-16:45
अहमदाबाद06:1912:13-13:0315:48-17:23

हनुमान जयंती क्यों मनाया जाता है

हनुमान जयंती पवनपुत्र हनुमान जी के प्राकट्य का उत्सव है। माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र, वायु देव के आशीर्वाद से जन्मे हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं। उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। दिल्ली एनसीआर के मंदिरों में सुबह से ही सिंदूर का चोला चढ़ने लगता है और घर-घर हनुमान चालीसा का पाठ गूंजता है। चैत्र की पूर्णिमा को व्रत का दिन मानने की परंपरा बहुत पुरानी है। अथर्व परिशिष्ट में चैत्र पूर्णिमा पर तीन रात के तेजोव्रत का विधान बताया गया है।[2] हनुमान जयंती का संयम, उपवास और सेवा वाला स्वरूप इसी पुरानी परंपरा से मेल खाता है। ज्योतिष में इस पर्व का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल साहस, ऊर्जा और शारीरिक बल का ग्रह है। शास्त्र मंगल को काल पुरुष का सत्त्व यानी भीतर का बल और हिम्मत कहते हैं।[1] पराशर के अष्टकवर्ग अध्याय में भी कहा गया है कि भाई, पराक्रम और धैर्य का विचार मंगल से होता है।[3] आसान भाषा में, मंगल तीसरे भाव यानी मेहनत और भाई-बहन का कारक है, काम शुरू करने की ताकत और उसे पूरा करने का दम मंगल से आता है। एक छलांग में समुद्र पार करने वाले और पूरा पर्वत उठा लाने वाले हनुमान जी सधे हुए मंगल का जीता-जागता रूप हैं। इसीलिए जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर या उग्र हो, उन्हें हनुमान उपासना की सलाह दी जाती है। कमजोर मंगल में हिम्मत की कमी, टालमटोल और झगड़े से डर दिखता है। उग्र मंगल में वही ऊर्जा गुस्से, दुर्घटना और घर के कलह में बदल जाती है। दोनों का उपाय एक ही है, नियमित भक्ति, अनुशासित दिनचर्या और सेवा, जिससे मंगल की ऊर्जा आक्रामकता की जगह साहस बनती है। परंपरा में हनुमान जी को शनि की साढ़ेसाती में राहत देने वाला और भय दूर करने वाला माना गया है। लोक मान्यता है कि शनि देव हनुमान भक्त को कष्ट नहीं देते। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि शनि जिस धैर्य, अनुशासन और सेवा की मांग करते हैं, हनुमान भक्ति वही आदत बनाती है। इस दिन के शुभ रंग लाल और केसरिया हैं। भक्त ब्रह्मचर्य रखते हैं, मांसाहार नहीं करते, झगड़े से बचते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। बच्चों के साथ हनुमान चालीसा पढ़ने की आदत शुरू करने के लिए भी यह सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

🪔 हनुमान जयंती पूजा विधि

  1. स्नान और स्वच्छ वस्त्र — सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ, हो सके तो लाल या केसरिया वस्त्र पहनें।
  2. सूर्य को अर्घ्य — तांबे के लोटे में जल लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें, यह इस दिन के मुख्य नियमों में है।
  3. चौकी सजाएं — पूजा स्थान साफ करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र रखें, साथ में श्री राम दरबार का चित्र भी रखें।
  4. संकल्प — पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके दाहिने हाथ में जल और लाल फूल लें, अपना नाम और गोत्र बोलकर बल, साहस और भक्ति की कामना करें।
  5. पहले श्री राम का स्मरण — हनुमान पूजा से पहले भगवान राम और माता सीता को एक फूल अर्पित करें।
  6. सिंदूर का चोला — चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर मूर्ति पर लगाएं, चित्र हो तो सिंदूर चित्र के सामने रख दें।
  7. फूल और फल — लाल फूल, माला, केले और मौसमी फल श्रद्धा से अर्पित करें।
  8. भोग — बूंदी के लड्डू या कोई सादा मिठाई भोग में रखें।
  9. दीपक और धूप — घी या सरसों के तेल का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  10. चालीसा और मंत्र जाप — हनुमान चालीसा का पाठ करें और फिर ॐ हं हनुमते नमः की 108 बार माला जपें।
  11. आरती — कपूर या घी के दीपक से आरती करें, घंटी बजाएं और परिवार के साथ आरती गाएं।
  12. क्षमा प्रार्थना और प्रसाद — पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और प्रसाद परिवार व जरूरतमंदों में बांटें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. सुबह स्नान करके सूर्य को जल दें।
  2. हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल, केले और मिठाई चढ़ाएं।
  3. घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  4. हनुमान चालीसा पढ़ें और ॐ हं हनुमते नमः जपें।
  5. आरती करके प्रसाद जरूरतमंद को दें।

🛒 हनुमान जयंती पूजा सामग्री

आवश्यक

  • हनुमान जी की मूर्ति या चित्र
  • लाल सिंदूर
  • चमेली का तेल
  • लाल फूल
  • केले
  • बूंदी के लड्डू
  • घी या सरसों के तेल का दीपक
  • धूपबत्ती
  • तांबे का लोटा और जल
  • हनुमान चालीसा की पुस्तक

वैकल्पिक

  • चौकी के लिए लाल कपड़ा
  • श्री राम दरबार का चित्र
  • फूलों की माला
  • कपूर
  • घंटी
  • जाप के लिए माला
  • गुड़ और भुने चने

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • यदि चमेली का तेल न मिले, तो थोड़े घी में मिला सिंदूर पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि बूंदी के लड्डू न मिलें, तो गुड़ और भुने चने पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हैं।
  • यदि लाल फूल न मिलें, तो ताजे केसरिया या पीले फूल पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हैं।
  • यदि सरसों के तेल का दीपक न हो, तो घी का दीपक पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।
  • यदि मूर्ति न हो, तो हनुमान जी का साफ छपा हुआ चित्र पारंपरिक रूप से स्वीकार्य है।

🌙 हनुमान जयंती व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: व्रत सूर्योदय के साथ स्नान के बाद शुरू होता है। पूजा स्थान के सामने बैठकर दिनभर मन और शरीर को शुद्ध रखने, गुस्से से बचने और हनुमान जी व श्री राम का स्मरण करने का संकल्प लें।

क्या खा सकते हैं

  • केला, सेब, पपीता जैसे ताजे फल
  • दूध, दही और छाछ
  • नारियल पानी और सादा पानी
  • सेंधा नमक वाली साबूदाना खिचड़ी
  • भुने मखाने और सूखे मेवे
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का फलाहार
  • पूजा के बाद बूंदी का प्रसाद

क्या नहीं खाना चाहिए

  • मांस, मछली और अंडा
  • शराब, तंबाकू और हर तरह का नशा
  • लहसुन और प्याज
  • गेहूं और चावल जैसे साधारण अनाज
  • सफेद नमक
  • तला हुआ, बासी या पैकेट वाला खाना

पारण: ज्यादातर परिवार शाम की आरती के बाद पहले हनुमान जी का प्रसाद खाकर, फिर हल्का सात्विक भोजन लेकर व्रत खोलते हैं। कुछ घरों में अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण की परंपरा है।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग कठोर व्रत न रखें। वे हनुमान चालीसा, मंत्र जाप और सेवा से पूरी श्रद्धा के साथ पर्व मना सकते हैं।

यह पारंपरिक जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं। यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, डायबिटीज है या कोई नियमित दवा ले रहे हैं, तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

❓ हनुमान जयंती: क्या करें और क्या न करें

हनुमान जयंती पर बाल धो सकते हैं क्या?

हां। सूर्योदय से पहले सिर सहित स्नान इस दिन की शुरुआत है, क्योंकि पूजा की पहली शर्त शरीर की शुद्धि है।

हनुमान जयंती पर नाखून या बाल काट सकते हैं?

परंपरा में बड़े पर्व के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना टाला जाता है। यह काम एक दिन पहले कर लें।

व्रत में नमक खा सकते हैं?

व्रत रखने वाले सफेद नमक नहीं खाते। फलाहार और साबूदाना में थोड़ा सेंधा नमक चल जाता है।

हनुमान जयंती पर यात्रा कर सकते हैं?

हां, यात्रा मना नहीं है। बहुत लोग इस दिन हनुमान मंदिर दर्शन के लिए ही यात्रा करते हैं। रास्ते में हनुमान चालीसा पढ़ लें।

क्या हनुमान जयंती पर नया काम शुरू करना शुभ है?

साहस और मेहनत वाले नए काम, जैसे पढ़ाई की नई योजना, व्यायाम या नई जिम्मेदारी, इस दिन शुरू करना अच्छा माना जाता है। गृह प्रवेश या विवाह जैसे बड़े काम के लिए अलग से मुहूर्त देखें।

हनुमान जयंती पर गाड़ी या मकान खरीद सकते हैं?

कई परिवार इस दिन खरीदारी शुभ मानते हैं। फिर भी मकान या गाड़ी जैसी बड़ी खरीद के लिए अपनी कुंडली के हिसाब से मुहूर्त देखना बेहतर है।

हनुमान जयंती पर नॉनवेज खा सकते हैं?

नहीं। मांसाहार से बचना इस दिन के मुख्य नियमों में है। पूरे दिन सात्विक भोजन ही करें।

क्या महिलाएं हनुमान जयंती का व्रत और पूजा कर सकती हैं?

हां। महिलाएं व्रत रखती हैं, हनुमान चालीसा पढ़ती हैं और फूल व भोग चढ़ाती हैं। मूर्ति पर चोला चढ़ाने जैसी बातों में अपने परिवार की परंपरा मानें।

क्या इस दिन ब्रह्मचर्य रखना जरूरी है?

हां। हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी माने जाते हैं, इसलिए इस दिन ब्रह्मचर्य रखना मुख्य नियमों में है।

व्रत में दिन में सो सकते हैं?

व्रत के दिन दिन में सोना अच्छा नहीं माना जाता। उस समय सुंदरकांड, चालीसा या मंत्र जाप करें।

इस दिन गुस्सा या बहस हो जाए तो?

बहस से बचना इस दिन का नियम है। मन शांत करके हनुमान जी से क्षमा मांगें और ॐ हं हनुमते नमः का 11 बार जाप करें।

हनुमान जयंती पर उधार दे या ले सकते हैं?

कोई कठोर नियम नहीं है, पर कई परिवार पूजा के दिन नया कर्ज लेने से बचते हैं। जरूरतमंद की मदद और दान को अच्छा माना गया है।

हनुमान जयंती पर किस रंग के कपड़े पहनें?

लाल और केसरिया इस दिन के रंग हैं, जो मंगल ग्रह और सिंदूर से जुड़े हैं। ये न हों तो कोई भी साफ सादे कपड़े पहनें।

✓ क्या करें

  • Observe celibacy on this day.
  • Recite Hanuman Chalisa regularly.
  • Offer water to the Sun.
  • Serve the needy and poor.
  • Maintain devotion and purity.

✗ क्या न करें

  • Avoid consuming non-vegetarian food.
  • Do not engage in arguments.
  • Refrain from negative thoughts.
  • Do not disrespect elders.

⚠️ आम गलतियाँ

  • बिना स्नान और साफ कपड़ों के पूजा शुरू करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • हनुमान पूजा से पहले श्री राम का स्मरण भूल जाने से उपासना अधूरी मानी जाती है।
  • फोन देखते हुए जल्दबाजी में चालीसा पढ़ने से पाठ अधूरा रहता है।
  • व्रत रखकर मांसाहार या अनाज खाने से व्रत अधूरा माना जाता है।
  • दिन में झगड़ा करने से पर्व का संयम अधूरा रह जाता है।
  • आरती और प्रसाद अर्पित किए बिना व्रत खोल देने से संकल्प अधूरा रहता है।
  • गंदे हाथ या जूठे बर्तन से भोग लगाने से नैवेद्य अधूरा माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

हं बीज के साथ हनुमान जी को नमस्कार। यह मंत्र साहस, मन की स्थिरता और भय से रक्षा के लिए जपा जाता है।

108 बार (एक माला) सुबह पूजा में दीपक जलाने के बाद, और शाम आरती से पहले।

📖 हनुमान जयंती कथा

बहुत समय पहले अप्सरा पुंजिकस्थला ने पृथ्वी पर अंजना के रूप में जन्म लिया और वानरराज केसरी की पत्नी बनीं। संतान के लिए माता अंजना ने कठोर तप किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर पवन देव ने दिव्य तेज उन तक पहुंचाया और समय आने पर उन्होंने वायु जैसे बलशाली तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। बचपन में एक सुबह बालक हनुमान को भूख लगी। उन्होंने उगते लाल सूर्य को पका फल समझा और उसे खाने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। देवता घबरा गए और इंद्र ने वज्र से प्रहार किया। वज्र बालक की ठुड्डी यानी हनु पर लगा, इसी से उनका नाम हनुमान पड़ा। पुत्र को चोट लगने से दुखी पवन देव एक गुफा में चले गए और सारे लोकों में हवा रुक गई। सब जीव व्याकुल हो उठे। तब सभी देवताओं ने आकर बालक को वरदान दिए, किसी ने बल, किसी ने गति, किसी ने बुद्धि, किसी ने अस्त्रों से अभय और दीर्घ आयु। सूर्य देव उनके गुरु बने और हनुमान जी ने उनके सामने चलते हुए शास्त्र सीखे। बचपन की शरारतों से परेशान ऋषियों ने उन्हें हल्का सा श्राप दिया कि वे अपनी शक्ति भूल जाएंगे, जब तक कोई याद न दिलाए। बरसों बाद सीता माता की खोज में समुद्र किनारे जाम्बवंत ने उन्हें उनकी शक्ति याद दिलाई। हनुमान जी पर्वत जितने बड़े हो गए और एक छलांग में समुद्र लांघ गए। अशोक वाटिका में उन्होंने माता सीता को श्री राम की अंगूठी दी और उनका संदेश लेकर लौटे। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर वे पूरा द्रोणागिरि पर्वत उठा लाए ताकि संजीवनी मिल सके। इतना सब करके भी उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। हनुमान जयंती पर यह कथा इसीलिए सुनी जाती है कि बल तभी सबसे बड़ा है जब वह सेवा में लगे।

🪔 आरती

आरती पूजा के अंत में, हनुमान चालीसा और मंत्र जाप के बाद की जाती है। थाली में कपूर या घी का दीपक जलाएं, घंटी बजाएं और हनुमान जी व श्री राम के सामने धीरे-धीरे घड़ी की दिशा में दीपक घुमाएं। पूरा परिवार साथ खड़े होकर आरती गाए और फिर दोनों हथेलियों से दीपक की लौ लेकर प्रसाद ग्रहण करे। आरती के बाद सब मिलकर जय श्री राम और जय हनुमान का जयकारा लगाते हैं।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार हनुमान जयंती के उपाय

पैसे की रुकावट और अस्थिर आमदनी

हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर पांच केले चढ़ाएं और फिर वे केले किसी जरूरतमंद को दे दें। कब: हनुमान जयंती की शाम, फिर हर मंगलवार शाम। खर्च: 10–20 रुपये। कितने दिन: 11 मंगलवार। आपके लिए क्यों: सधा हुआ मंगल लगातार मेहनत देता है, जो कमाई को स्थिर बनाती है।

करियर में ठहराव और आत्मविश्वास की कमी

उगते सूर्य को जल देकर काम पर निकलने से पहले एक बार हनुमान चालीसा पढ़ें। कब: हनुमान जयंती की सुबह स्नान के बाद, फिर रोज सुबह। खर्च: मुफ्त। कितने दिन: 40 दिन। आपके लिए क्यों: मंगल साहस और पराक्रम का कारक है, यह आदत आगे बढ़कर बोलने और काम संभालने की हिम्मत देती है।

शादी में देरी या रिश्ते में तनाव

हनुमान मंदिर में लाल फूल और थोड़ा सिंदूर चढ़ाकर घर में सामंजस्य की प्रार्थना करें, और उस दिन घर में कोई बहस न करें। कब: हनुमान जयंती की सुबह, फिर हर मंगलवार सुबह। खर्च: 10–20 रुपये। कितने दिन: 7 मंगलवार। आपके लिए क्यों: शांत मंगल उस गुस्से और जल्दबाजी को कम करता है जो रिश्ते की बात बिगाड़ देती है।

बच्चों की पढ़ाई या आत्मविश्वास की चिंता

बच्चे के साथ बैठकर हनुमान चालीसा पढ़ें और उसे बूंदी के लड्डू का प्रसाद दें। कब: हनुमान जयंती की शाम, फिर हर मंगलवार शाम। खर्च: 10–20 रुपये। कितने दिन: 11 मंगलवार। आपके लिए क्यों: हनुमान जी बल और बुद्धि दोनों के प्रतीक हैं, साथ का पाठ बच्चे में एकाग्रता और हिम्मत बढ़ाता है।

घर में कलह और तनाव

पूजा स्थान में घी का दीपक जलाकर पूरे परिवार के साथ ॐ हं हनुमते नमः की एक माला जपें। कब: हनुमान जयंती की शाम सूर्यास्त पर, फिर हर शनिवार शाम। खर्च: 10–20 रुपये। कितने दिन: 21 दिन। आपके लिए क्यों: शाम का दीपक उग्र मंगल को शांत करता है और घर को एक लय में लाता है।

डर, बुरे सपने और नकारात्मकता

सोने से पहले हनुमान चालीसा पढ़ें और बिस्तर के पास हनुमान जी का छोटा चित्र रखें। कब: हनुमान जयंती की रात से, रोज सोने से पहले। खर्च: मुफ्त। कितने दिन: 21 दिन। आपके लिए क्यों: परंपरा हनुमान जयंती को भय से मुक्ति से जोड़ती है, और सोने से पहले की प्रार्थना मन को स्थिर करती है।

क्या हनुमान जयंती आपके लिए विशेष है?

पर्व का उपाय सब पर सामान्य रूप से काम करता है, पर यह नहीं बताता कि आपकी हिम्मत, नौकरी या शादी अभी क्यों अटकी है। इसका जवाब आपकी कुंडली में है, मंगल किस भाव में है, किस भाव का स्वामी है, शनि आपके चंद्रमा पर दबाव डाल रहे हैं या नहीं, और कौन सी दशा चल रही है। कुंडली रीडिंग यह सब देखकर बताती है कि आपके लिए कौन सा उपाय सबसे जरूरी है और कितने दिन करना है। शादी की चिंता हो तो कुंडली मिलान दोनों कुंडलियों को साथ देखता है, मांगलिक दोष और उसका परिहार भी। जन्म समय पक्का न हो तो हस्तरेखा से मेहनत और भाग्य की रेखाएं देखी जाती हैं। और अगर डर सपनों में दिखता है, तो स्वप्न शास्त्र बताता है कि बार-बार आने वाले सपने क्या संकेत देते हैं। हर रीडिंग रोहित गुप्ता स्विस एफेमेरिस और शास्त्रीय नियमों से खुद देखते हैं।

शब्दावली · Glossary

पूर्णिमा
शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जिस दिन चंद्रमा पूरा दिखता है।
चोला
तेल में मिले सिंदूर का लेप जो भक्ति भाव से हनुमान जी की मूर्ति पर चढ़ाया जाता है।
मंगल
ज्योतिष में साहस, ऊर्जा और पराक्रम का ग्रह, जिसका संबंध हनुमान जी से माना जाता है।
नक्षत्र
पंचांग के 27 चंद्र भागों में से एक, हर नक्षत्र का एक स्वामी ग्रह होता है।
साढ़ेसाती
जन्म के चंद्रमा से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि पर शनि का लगभग साढ़े सात साल का गोचर।
ज्योतिष
ग्रह, भाव और तिथि से जीवन की घटनाएं पढ़ने वाली वैदिक विद्या।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    सर्वात्मा च दिवानाथो मनः कुमुदबान्धवः । सत्त्वं कुजो बुधैः प्रोक्तो बुधो वाणीप्रदायकः
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 · श्लोक 12

    विद्वानों ने मंगल को सत्त्व यानी भीतरी बल और साहस का कारक कहा है।

    The wise declare Mars to be the sattva, the inner strength and courage, among the planets.

  2. [2]↑अथर्व परिशिष्ट
    अथ चैत्र्यां पौर्णमास्यां तेजोव्रतं त्रिरात्रम् अश्नातीत्य् उक्तम् ॥
    — अथर्व परिशिष्ट, अध्याय 18 — राजकर्मसांवत्सरीयम् · श्लोक 18b.14.1

    चैत्र की पूर्णिमा पर तीन रात का तेजोव्रत रखने का विधान है।

    On the full moon of Chaitra, a three-night vow called the Tejovrata is observed.

  3. [3]↑बृहत् पाराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    भौमाष्टवर्गे संचिन्त्यं भ्रातृविक्रमधैर्यकम्।ह् । कुजाश्रितात्।ह् तृतीयर्क्षं बुधैर्भ्रातृगृहं स्मृतम्।ह्
    — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 70 · श्लोक 24

    मंगल के अष्टकवर्ग से भाई, पराक्रम और धैर्य का विचार करना चाहिए।

    In the Ashtakavarga of Mars, brothers, valour and courage are to be judged.

भारत में हनुमान जयंती — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान जयंती 2027 कब है?

हनुमान जयंती 2027 में 20 अप्रैल, मंगलवार को है। त्रिकाल वाणी पंचांग के अनुसार इस दिन दिल्ली एनसीआर में सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा रहेगी। आपके शहर का सूर्योदय और राहुकाल इसी पेज की तालिका में लाइव दिखता है।

हनुमान जयंती 20 अप्रैल को ही क्यों है?

2027 में पूर्णिमा केवल 20 अप्रैल को ही सूर्योदय के समय रहेगी। व्रत में जहां कोई विशेष काल न हो, वहां सूर्योदय वाली तिथि मानी जाती है। धर्मसिंधु भी ऐसी स्थिति में पूर्णिमा को बाद वाले दिन लेने की बात कहता है।

हनुमान जयंती 2027 मंगलवार को पड़ना क्या खास है?

हां, भक्त इसे बहुत शुभ मानते हैं। मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है और हर हफ्ते हनुमान पूजा का दिन भी। 2027 में इस दिन सूर्योदय पर मंगल का ही चित्रा नक्षत्र और हर्षण योग भी है।

हनुमान जयंती का स्वामी ग्रह कौन सा है?

इस पर्व का स्वामी ग्रह मंगल है। शास्त्र मंगल को काल पुरुष का सत्त्व यानी भीतर का बल कहते हैं। इसलिए कमजोर या उग्र मंगल का पारंपरिक उपाय हनुमान उपासना है।

हनुमान जयंती का मंत्र क्या है?

इस दिन का मंत्र ॐ हं हनुमते नमः है। दीपक जलाने के बाद इसकी एक माला यानी 108 बार जाप करें। शाम को आरती से पहले भी जप सकते हैं।

हनुमान जी को क्या चढ़ाएं?

चमेली के तेल में मिला सिंदूर का चोला, लाल फूल, केले और बूंदी के लड्डू चढ़ाएं। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सच्चे मन से एक फूल और दीपक भी पर्याप्त है।

हनुमान जयंती का व्रत कैसे रखें?

सूर्योदय पर स्नान के बाद संकल्प लें और दिनभर फल, दूध और फलाहार लें। शाम की आरती के बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलें। गर्भवती, बीमार या दवा लेने वाले लोग पहले डॉक्टर से सलाह लें।

क्या हनुमान पूजा से साढ़ेसाती में राहत मिलती है?

परंपरा मानती है कि सच्ची हनुमान भक्ति से शनि की साढ़ेसाती का दबाव कम होता है और डर दूर होता है। हनुमान भक्ति का अनुशासन और सेवा वही है जो शनि मांगते हैं। आसान उपाय है हर शनिवार शाम सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ना।

हनुमान जयंती पर कितनी बार हनुमान चालीसा पढ़ें?

पूरे ध्यान से एक बार पढ़ना भी काफी है। बहुत से भक्त 7, 11 या 108 बार पढ़ते हैं। उतनी ही संख्या चुनें जितनी शांति से पूरी कर सकें।

हनुमान नाम कैसे पड़ा?

बचपन में वे सूर्य को फल समझकर उसकी ओर लपके थे। इंद्र का वज्र उनकी ठुड्डी पर लगा, जिसे संस्कृत में हनु कहते हैं। इसी से उनका नाम हनुमान पड़ा।

हनुमान जयंती पर क्या नहीं करना चाहिए?

मांसाहार, शराब, झगड़ा, नकारात्मक सोच और बड़ों का अपमान न करें। दिनभर ब्रह्मचर्य रखें। ये सब इस दिन के पारंपरिक नियम हैं।

क्या महिलाएं हनुमान जी को सिंदूर चढ़ा सकती हैं?

इसमें परिवारों और मंदिरों की परंपरा अलग-अलग है। कई घरों में महिलाएं फूल, भोग और चालीसा अर्पित करती हैं और चोला घर के पुरुष चढ़ाते हैं। अपने परिवार या मंदिर की परंपरा मानें, सबसे बड़ी बात भक्ति है।

क्या हनुमान जयंती पर सुंदरकांड पाठ शुरू कर सकते हैं?

हां, बहुत से परिवार इसी दिन सुंदरकांड शुरू करते हैं। पूरा पाठ एक दिन में लंबा लगे तो रोज कुछ दोहे पढ़कर एक हफ्ते में पूरा करें। नियमित पाठ एक दिन की जल्दबाजी से बेहतर है।

त्रिकाल वाणी पर हनुमान जयंती की तारीख कैसे निकाली जाती है?

तारीख स्विस एफेमेरिस से गणना करके निकाली जाती है, किसी कैलेंडर से कॉपी नहीं की जाती। इंजन देखता है कि किस दिन सूर्योदय पर चैत्र पूर्णिमा है। फिर आपके शहर के हिसाब से समय लाइव निकलते हैं।

क्या घर पर हनुमान पूजा कर सकते हैं?

हां। साफ कोना, हनुमान जी का चित्र, दीपक, एक फूल और चालीसा से घर की पूजा पूरी हो जाती है। मंदिर जाना अच्छा है, पर श्रद्धा से घर पर की गई पूजा भी पूरी मान्य है।

हनुमान जयंती पर आत्मविश्वास के लिए सबसे अच्छा उपाय क्या है?

हनुमान जयंती से शुरू करके 40 दिन रोज सुबह सूर्य को जल दें और एक बार हनुमान चालीसा पढ़ें। इसमें कोई खर्च नहीं है और यह मंगल का साहस बढ़ाता है। आपकी कुंडली के हिसाब से उपाय जानने के लिए व्यक्तिगत कुंडली रीडिंग मदद करती है।

क्या पूरे भारत में हनुमान जयंती एक ही दिन मनती है?

नहीं। उत्तर भारत में यह मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि कुछ क्षेत्रीय परंपराएं हनुमान जी का जन्मोत्सव साल के किसी और दिन मनाती हैं। यह पेज चैत्र पूर्णिमा की परंपरा पर आधारित है।

चोला किसे कहते हैं?

तेल में मिले सिंदूर का जो लेप हनुमान जी की मूर्ति पर चढ़ाया जाता है, उसे चोला कहते हैं। यह भक्ति और रक्षा का पारंपरिक प्रतीक है। घर पर चित्र के सामने सिंदूर रख देना भी काफी है।

हनुमान जयंती पर किस रंग के कपड़े पहनें?

लाल और केसरिया इस दिन के रंग हैं। ये मंगल ग्रह और हनुमान जी के सिंदूर से जुड़े हैं। ये न हों तो कोई भी साफ सादे कपड़े पहनें।

Hanuman Jayanti 2027 kab hai aur kis din hai?

Hanuman Jayanti 2027 mein 20 April, Mangalvar ko hai. Is din sunrise par Chaitra Purnima rahegi. Mangalvar Hanuman ji ka din hai, isliye yeh sanyog bahut shubh mana ja raha hai.

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