नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि
त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर
नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित है, जो इस वर्ष 17 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन आश्विन शुक्ल सप्तमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मुख्य रूप से माँ कालरात्रि की पूजा गुड़ और लाल गुड़हल के फूलों से की जाती है, जिससे शनि दोष और हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
🕐 भारत के लिए नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि का समय
| तिथि | Saptami (Shukla Paksha) — 08:28 (18 Oct) तक |
| नक्षत्र | Mula, पाद 4 — 09:47 तक |
| योग · करण | Atiganda · Garaja |
| अभिजित मुहूर्त | 11:42-12:28 |
| राहुकाल | 09:15-10:40 |
| यमगंड · गुलिक | 13:30-14:55 · 06:26-07:50 |
| सूर्योदय · सूर्यास्त | 06:26 · 17:45 |
भारत (28.6139, 77.209) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।
✅ नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पर क्या करें
- पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें और पवित्रता सुनिश्चित करें।
- माँ कालरात्रि के सामने घी या सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- देवी को लाल गुड़हल के फूल और काले तिल अर्पित करें।
- प्रसाद के रूप में माँ को गुड़ का भोग लगाएं।
- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का भक्ति भाव से जाप करें।
- कपूर और घी के दीपक से माँ की आरती उतारें।
- पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों में गुड़ का प्रसाद बांटें।
📜 यह तारीख कैसे तय हुई
Day 7 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.
त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।
🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि का समय
| शहर | सूर्योदय | अभिजित मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|---|
| दिल्ली एनसीआर | 06:26 | 11:42-12:28 | 09:15-10:40 |
| मुंबई | 06:36 | 11:59-12:46 | 09:29-10:56 |
| नोएडा | 06:26 | 11:42-12:28 | 09:15-10:40 |
| गुरुग्राम | 06:27 | 11:43-12:29 | 09:16-10:41 |
| बेंगलुरु | 06:13 | 11:41-12:27 | 09:08-10:36 |
| हैदराबाद | 06:13 | 11:37-12:24 | 09:07-10:34 |
| पुणे | 06:32 | 11:56-12:42 | 09:25-10:52 |
| कोलकाता | 05:37 | 10:58-11:44 | 08:29-09:55 |
| चेन्नई | 06:03 | 11:30-12:17 | 08:58-10:26 |
| अहमदाबाद | 06:40 | 12:01-12:46 | 09:32-10:58 |
नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि क्यों मनाया जाता है
🪔 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पूजा विधि
- स्नान और शुद्धि — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
- दीपक प्रज्वलित करना — माँ के सामने सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती दिखाएं।
- कलश पूजन — नवरात्रि के पहले दिन स्थापित किए गए कलश और गणेश जी की पूजा सबसे पहले करें।
- माँ का आवाहन — माँ कालरात्रि का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
- फूल और माला — देवी को लाल रंग के फूल, विशेष रूप से लाल गुड़हल (hibiscus) की माला अर्पित करें।
- विशेष वस्तुएं अर्पित करना — माँ को काले तिल, नींबू और लोहे की कोई छोटी वस्तु अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- भोग लगाना — माँ कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। यह उनका सबसे प्रिय प्रसाद है।
- मंत्र जाप — रुद्राक्ष की माला से 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का पूरे भक्ति भाव से जाप करें।
- आरती करना — कपूर और घी के दीपक से माँ कालरात्रि की आरती पूरे श्रद्धा भाव से करें।
- क्षमा प्रार्थना — पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माँ से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
- प्रसाद वितरण — पूजा के बाद गुड़ का प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों और भक्तों में बांटें।
⚡ 5-मिनट विधि
- साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान पर सरसों के तेल का दीपक और धूप जलाएं।
- माँ कालरात्रि को लाल गुड़हल के फूल और काले तिल अर्पित करें।
- देवी को गुड़ का भोग लगाएं।
- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
- कपूर से आरती करें और परिवार में गुड़ का प्रसाद बांट दें।
🛒 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पूजा सामग्री
आवश्यक
- माँ कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति
- सरसों का तेल या घी
- लाल गुड़हल के फूल
- गुड़ (Jaggery)
- काले तिल
- धूप और कपूर
वैकल्पिक
- नींबू
- लोहे की कोई छोटी वस्तु (छल्ला या कील)
- नारंगी वस्त्र
- रुद्राक्ष की माला
- गंगाजल
अगर कुछ उपलब्ध न हो
- if लाल गुड़हल is unavailable, लाल गुलाब is traditionally accepted
- if सरसों का तेल is unavailable, तिल का तेल या घी is traditionally accepted
- if काले तिल is unavailable, सफेद तिल is traditionally accepted
🌙 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि व्रत विधि
व्रत कब शुरू करें: सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
क्या खा सकते हैं
- कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, ताजे फल, दूध, दही, और मेवे खा सकते हैं। नमक में केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।
क्या नहीं खाना चाहिए
- अन्न (गेहूं, चावल), साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब, और तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें।
पारण: अगले दिन (अष्टमी तिथि) सुबह पूजा के बाद या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद व्रत खोलें।
किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को यह निर्जला या कठिन व्रत नहीं करना चाहिए।
यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
❓ नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि: क्या करें और क्या न करें
क्या मैं नवरात्रि के सातवें दिन बाल धो सकती हूँ?
आमतौर पर व्रत रखने वालों को नवरात्रि के दौरान बाल धोने से मना किया जाता है। यदि बहुत जरूरी हो तो सादे पानी से धो लें।
क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?
नहीं, नवरात्रि के दौरान नाखून काटना वर्जित माना जाता है। इसे पूजा से पहले ही कर लेना चाहिए।
क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?
हां, व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग पूरी तरह से मान्य है।
क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?
हां, यात्रा करने में कोई मनाही नहीं है, बस अपनी पूजा का समय और नियम ध्यान में रखें।
क्या सातवें दिन नया काम शुरू किया जा सकता है?
नवरात्रि के सभी दिन शुभ होते हैं, आप इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं, विशेषकर लोहे या मशीनरी से जुड़ा काम।
क्या हम इस दिन शॉपिंग कर सकते हैं?
हां, आप जरूरत का सामान खरीद सकते हैं, लेकिन चमड़े की चीजें खरीदने से बचें।
क्या पूजा के तुरंत बाद खाना खा सकते हैं?
यदि आपने व्रत नहीं रखा है, तो पूजा और आरती संपन्न होने के बाद आप सात्विक भोजन कर सकते हैं।
क्या कालरात्रि की पूजा रात में करनी चाहिए?
माँ कालरात्रि की विशेष पूजा मध्य रात्रि (निशिता काल) में बहुत फलदायी मानी जाती है, लेकिन आप सुबह भी पूजा कर सकते हैं।
क्या मैं पूजा में काले कपड़े पहन सकता हूँ?
नवरात्रि में काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इस दिन नारंगी या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ है।
क्या इस दिन दाढ़ी बना सकते हैं?
परंपरागत रूप से नवरात्रि के दौरान दाढ़ी-मूंछ या बाल कटवाने से मना किया जाता है।
क्या व्रत में चाय पी सकते हैं?
हां, व्रत के दौरान चाय पी जा सकती है, लेकिन कुछ लोग केवल फलाहार और पानी पर ही व्रत रखते हैं।
क्या महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजा करनी चाहिए?
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को सीधे मूर्ति स्पर्श या पूजा करने से बचना चाहिए, वे मानसिक रूप से मंत्र जाप कर सकती हैं।
क्या मैं इस दिन लहसुन-प्याज खा सकता हूँ अगर मेरा व्रत नहीं है?
भले ही आपका व्रत न हो, लेकिन घर में नवरात्रि की पूजा हो रही है तो लहसुन-प्याज और मांसाहार से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
✓ क्या करें
- Worship Maa Kalaratri with devotion.
- Chant Kalaratri Mantras regularly.
- Maintain cleanliness and purity.
- Offer jaggery as Prasad.
- Meditate on inner strength.
✗ क्या न करें
- Avoid consuming non-vegetarian food.
- Do not engage in arguments.
- Avoid alcohol and tobacco.
- Do not disrespect elders.
⚠️ आम गलतियाँ
- पूजा में बासी या मुरझाए हुए फूलों का उपयोग करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
- माँ कालरात्रि को भोग में गुड़ न चढ़ाने से सातवें दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
- घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार पकाने से नवरात्रि का व्रत और पूजा खंडित मानी जाती है।
- बड़ों का अपमान करने या किसी से झगड़ा करने से देवी की कृपा प्राप्त नहीं होती।
- पूजा के दौरान मन में डर या नकारात्मक विचार रखने से साधना अधूरी रह जाती है।
- बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा के बर्तन या सामग्री छूने से पूजा दोषपूर्ण हो जाती है।
- आरती के समय कपूर या घी का दीपक बीच में ही बुझ जाने को परंपरा में शुभ नहीं माना जाता।
📿 मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः
ॐ, ऐं, ह्रीं, क्लीं बीज मंत्रों के साथ मैं माँ कालरात्रि को नमन करता हूँ, जो अज्ञानता और अंधकार का नाश करने वाली हैं।
108 बार (एक रुद्राक्ष की माला) सुबह की पूजा के समय या मध्य रात्रि (निशिता काल) की साधना के दौरान।
📖 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि कथा
🪔 आरती
माँ कालरात्रि की आरती पूजा के अंत में की जाती है। सबसे पहले एक साफ थाली में घी का दीपक या कपूर जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ माँ की आरती गाएं। आरती करते समय थाली को घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं। आरती पूरी होने के बाद दोनों हाथों से आरती लें और फिर माँ को अर्पित किया गया गुड़ का प्रसाद सभी में बांट दें।
🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि के उपाय
money
यदि व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है या धन की कमी बनी हुई है, तो माँ कालरात्रि की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें कुछ दाने काले तिल के डाल दें। देवी को गुड़ का भोग लगाकर उसे गरीबों में बांटने से आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
career
नौकरी में तरक्की रुक गई है या ऑफिस में परेशानियां आ रही हैं, तो इस दिन माँ कालरात्रि को एक नींबू और लोहे का एक छोटा छल्ला अर्पित करें। पूजा के बाद उस छल्ले को अपने पास रख लें। शनि ग्रह की कृपा से करियर में आ रही रुकावटें दूर होंगी।
marriage
विवाह में देरी हो रही है या रिश्ते बार-बार टूट रहे हैं, तो माँ कालरात्रि को लाल गुड़हल के फूलों की माला पहनाएं। साथ ही 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। माना जाता है कि इससे विवाह में आ रही सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
children
बच्चों के स्वास्थ्य या उनकी पढ़ाई को लेकर चिंता बनी रहती है, तो माँ कालरात्रि के सामने बैठकर उनके उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करें। बच्चों के हाथ से देवी को गुड़ अर्पित करवाएं और फिर वही गुड़ उन्हें प्रसाद के रूप में खिलाएं। इससे बच्चों के मन से डर दूर होता है।
home
घर में कलह, अशांति या नकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, तो नवरात्रि के सातवें दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मकता आती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांति बनी रहती है।
negativity
यदि आपको अज्ञात भय सताता है, बुरे सपने आते हैं या किसी प्रकार की नजर दोष का शक है, तो माँ कालरात्रि के मंत्र का जाप करते हुए एक नींबू पर सिंदूर लगाकर देवी के चरणों में रखें। अगले दिन उस नींबू को किसी बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।
क्या नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि आपके लिए विशेष है?
भारत में नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
माँ कालरात्रि की पूजा कब की जाती है?
नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित होता है। इस वर्ष यह पूजा 17 अक्टूबर 2026 को की जाएगी। यह दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे पता करें?
पूजा का सटीक मुहूर्त, राहुकाल और अभिजित मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग-अलग होते हैं। ऊपर दी गई टेबल में आपके शहर के अनुसार आज का लाइव मुहूर्त दिखाया गया है। उसी समय के अनुसार अपनी पूजा की योजना बनाएं।
माँ कालरात्रि को कौन सा रंग पसंद है?
माँ कालरात्रि की पूजा में नारंगी (Orange) रंग का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तों को नारंगी रंग के वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। इससे देवी प्रसन्न होती हैं और जीवन में ऊर्जा का संचार होता है।
इस दिन देवी को क्या भोग लगाना चाहिए?
माँ कालरात्रि को गुड़ (Jaggery) का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। पूजा के बाद इस गुड़ को परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए। इससे स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।
माँ कालरात्रि का स्वरूप कैसा है?
माँ कालरात्रि का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है और उनके बाल बिखरे हुए हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और वे गधे की सवारी करती हैं। उनकी सांसों से आग की लपटें निकलती हैं, जो बुराई का नाश करने का प्रतीक है।
क्या मैं इस दिन बाल और नाखून काट सकता हूँ?
परंपरागत रूप से नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून काटने की सख्त मनाही होती है। यह नियम पूरे नौ दिनों तक लागू रहता है। इसलिए यह काम नवरात्रि शुरू होने से पहले ही कर लेना चाहिए।
व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए?
व्रत में आप कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, फल और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं। नमक में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करना चाहिए। बाजार में मिलने वाले व्रत के पैकेटबंद स्नैक्स से बचना बेहतर है।
क्या इस दिन नए काम की शुरुआत की जा सकती है?
नवरात्रि का हर दिन बहुत शुभ होता है, इसलिए आप कोई भी नया काम शुरू कर सकते हैं। चूंकि यह दिन शनि ग्रह से जुड़ा है, इसलिए लोहे या मशीनरी से जुड़े काम शुरू करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। बस राहुकाल के समय को टाल दें।
माँ कालरात्रि किस ग्रह को नियंत्रित करती हैं?
ज्योतिष के अनुसार माँ कालरात्रि शनि ग्रह (Saturn) को नियंत्रित करती हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
क्या मैं पूजा में लाल गुलाब चढ़ा सकता हूँ?
हां, यदि आपको लाल गुड़हल के फूल नहीं मिल रहे हैं, तो आप लाल गुलाब चढ़ा सकते हैं। लाल रंग देवी को बहुत प्रिय है और यह पूरी तरह से मान्य है। बस फूल ताजे होने चाहिए।
माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र क्या है?
माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करना चाहिए। यह मंत्र हर प्रकार के भय और नकारात्मकता को दूर करता है।
क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?
गर्भवती महिलाओं को निर्जला या कठिन व्रत रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। वे केवल पूजा कर सकती हैं और सात्विक आहार ले सकती हैं। यदि व्रत रखना ही हो, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
पूजा में लोहे की वस्तु क्यों चढ़ाई जाती है?
माँ कालरात्रि शनि ग्रह की नियंत्रक हैं और शनि का संबंध लोहे से होता है। इसलिए इस दिन लोहे की कोई छोटी वस्तु या छल्ला चढ़ाने की परंपरा है। यह शनि दोषों को शांत करने में मदद करता है।
कालरात्रि और महाकाली में क्या अंतर है?
माँ कालरात्रि दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं जिनकी पूजा नवरात्रि में होती है, जबकि महाकाली दस महाविद्याओं में से एक हैं। दोनों का स्वरूप भयंकर है और दोनों ही राक्षसों का नाश करती हैं। हालांकि, उनकी पूजा विधियों और मंत्रों में अंतर होता है।
क्या हम इस दिन घर का सामान खरीद सकते हैं?
हां, आप घर की जरूरत का सामान, कपड़े या गहने खरीद सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि काले रंग के कपड़े या चमड़े का सामान खरीदने से बचें। शुभ मुहूर्त देखकर ही बड़ी खरीदारी करें।
व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?
व्रत का पारण आमतौर पर अगले दिन अष्टमी पूजा के बाद या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद किया जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। पारण का सही समय ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।
इस दिन दान में क्या देना चाहिए?
नवरात्रि के सातवें दिन गुड़, काले तिल और सरसों के तेल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन भी करा सकते हैं। इससे शनि देव और माँ कालरात्रि दोनों प्रसन्न होते हैं।
क्या रात में पूजा करना जरूरी है?
माँ कालरात्रि की पूजा सुबह भी की जा सकती है, लेकिन तांत्रिक और विशेष साधनाओं के लिए मध्य रात्रि (निशिता काल) का समय चुना जाता है। एक सामान्य गृहस्थ के लिए सुबह या शाम की पूजा भी पूरी तरह फलदायी होती है।
मेरे शहर में पूजा का समय अलग क्यों है?
सूर्य के उदय और अस्त होने का समय हर शहर में अलग होता है, जिससे तिथियों और मुहूर्तों का समय बदल जाता है। इसीलिए पंचांग की गणना आपके शहर के अक्षांश और देशांतर के आधार पर की जाती है। पेज पर दिया गया समय आपके शहर के लिए ही है।
अगर पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?
ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, इसलिए अनजाने में हुई गलती से घबराना नहीं चाहिए। पूजा के अंत में माँ कालरात्रि के सामने हाथ जोड़कर क्षमा याचना कर लें। देवी अपने भक्तों की गलतियों को माफ कर देती हैं।
भारत में आने वाले त्योहार
- Navratri Day 6 - Maa Katyayani 20262026-10-16
- Durga Puja 20262026-10-16
- Navratri Day 8 - Maa Mahagauri 20262026-10-18
- Navratri Day 9 - Maa Siddhidatri 20262026-10-19
- Dussehra 20262026-10-20
- Karva Chauth 20262026-10-29
- Dhanteras 20262026-11-06
- Diwali 20262026-11-08
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