पुणे · Maharashtra

पुणे में नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026· Read in English →

त्रिकाल संदेश — सीधा उत्तर

नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित है, जो इस वर्ष 17 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन आश्विन शुक्ल सप्तमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मुख्य रूप से माँ कालरात्रि की पूजा गुड़ और लाल गुड़हल के फूलों से की जाती है, जिससे शनि दोष और हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

🕐 पुणे के लिए नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि का समय

तिथिSaptami (Shukla Paksha) — 08:28 (18 Oct) तक
नक्षत्रMula, पाद 4 — 09:47 तक
योग · करणAtiganda · Garaja
अभिजित मुहूर्त11:56-12:42
राहुकाल09:25-10:52
यमगंड · गुलिक13:46-15:13 · 06:32-07:58
सूर्योदय · सूर्यास्त06:32 · 18:07

पुणे (18.5204, 73.8567) के लिए स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से गणना। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर।

मुफ़्त कुंडली — कोई भुगतान नहीं, कोई साइनअप नहीं →

✅ नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पर क्या करें

  1. पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें और पवित्रता सुनिश्चित करें।
  2. माँ कालरात्रि के सामने घी या सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. देवी को लाल गुड़हल के फूल और काले तिल अर्पित करें।
  4. प्रसाद के रूप में माँ को गुड़ का भोग लगाएं।
  5. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का भक्ति भाव से जाप करें।
  6. कपूर और घी के दीपक से माँ की आरती उतारें।
  7. पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों में गुड़ का प्रसाद बांटें।

समय कम है? → 5-मिनट पूजा विधि

📜 यह तारीख कैसे तय हुई

Day 7 of the nine Devi days, counted from Ghatasthapana on 11 Oct 2026 through Maha Navami on 19 Oct 2026, the day before Vijayadashami.

त्रिकाल वाणी द्वारा स्विस एफ़ेमेरिस और शास्त्रीय निर्णय नियमों से गणना — निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, और कैलेंडर रिफ़ॉर्म कमेटी की रिपोर्ट। किसी अन्य पंचांग से नकल नहीं।

🕐 भारत भर में नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि का समय

शहरसूर्योदयअभिजित मुहूर्तराहुकाल
पुणे06:3211:56-12:4209:25-10:52
दिल्ली एनसीआर06:2611:42-12:2809:15-10:40
मुंबई06:3611:59-12:4609:29-10:56
नोएडा06:2611:42-12:2809:15-10:40
गुरुग्राम06:2711:43-12:2909:16-10:41
बेंगलुरु06:1311:41-12:2709:08-10:36
हैदराबाद06:1311:37-12:2409:07-10:34
कोलकाता05:3710:58-11:4408:29-09:55
चेन्नई06:0311:30-12:1708:58-10:26
अहमदाबाद06:4012:01-12:4609:32-10:58

नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि क्यों मनाया जाता है

नवरात्रि का सातवां दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप, माँ कालरात्रि की पूजा का विधान है। माँ का यह रूप अत्यंत भयंकर और उग्र माना जाता है, लेकिन यह केवल दुष्टों के विनाश के लिए है। अपने भक्तों के लिए माँ हमेशा शुभ फल देने वाली हैं, इसीलिए इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। माँ कालरात्रि का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और उनके चार हाथ हैं। वह गधे (donkey) की सवारी करती हैं और उनकी सांसों से आग की लपटें निकलती हैं। यह स्वरूप देखने में भले ही डरावना लगे, लेकिन यह हमें सिखाता है कि जीवन में बुराई और नकारात्मकता का सामना पूरी निडरता के साथ करना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का बहुत गहरा महत्व है। माँ कालरात्रि को शनि ग्रह (Saturn) की नियंत्रक देवी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उन्हें नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना विशेष रूप से करनी चाहिए। माँ की कृपा से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। इसके अलावा, अज्ञात भय, भूत-प्रेत का डर या शत्रुओं से परेशानी होने पर माँ की पूजा अचूक मानी गई है। इस दिन नारंगी (Orange) रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। माँ कालरात्रि को गुड़ बहुत प्रिय है, इसलिए पूजा में गुड़ का भोग लगाना और उसे प्रसाद के रूप में बांटना बहुत महत्वपूर्ण है। यह दिन केवल बाहरी पूजा का नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की शक्ति और निडरता को जगाने का दिन है। जब हम माँ के इस स्वरूप का ध्यान करते हैं, तो हमारे मन से हर प्रकार का डर और असुरक्षा की भावना दूर हो जाती है। नवरात्रि के सातवें दिन साधक का मन 'सहस्रार चक्र' में स्थित होता है। यह आध्यात्मिक जागृति का सबसे ऊंचा स्तर है। जो लोग साधना के मार्ग पर हैं, उनके लिए यह दिन सिद्धियां प्राप्त करने का होता है। साधारण गृहस्थों के लिए यह दिन जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और परिवार की रक्षा के लिए प्रार्थना करने का अवसर है। माँ कालरात्रि हमें यह विश्वास दिलाती हैं कि चाहे कितना भी घना अंधेरा क्यों न हो, सत्य और साहस की रोशनी उसे हमेशा मिटा देती है।

🪔 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पूजा विधि

  1. स्नान और शुद्धि — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  2. दीपक प्रज्वलित करना — माँ के सामने सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती दिखाएं।
  3. कलश पूजन — नवरात्रि के पहले दिन स्थापित किए गए कलश और गणेश जी की पूजा सबसे पहले करें।
  4. माँ का आवाहन — माँ कालरात्रि का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
  5. फूल और माला — देवी को लाल रंग के फूल, विशेष रूप से लाल गुड़हल (hibiscus) की माला अर्पित करें।
  6. विशेष वस्तुएं अर्पित करना — माँ को काले तिल, नींबू और लोहे की कोई छोटी वस्तु अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  7. भोग लगाना — माँ कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। यह उनका सबसे प्रिय प्रसाद है।
  8. मंत्र जाप — रुद्राक्ष की माला से 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का पूरे भक्ति भाव से जाप करें।
  9. आरती करना — कपूर और घी के दीपक से माँ कालरात्रि की आरती पूरे श्रद्धा भाव से करें।
  10. क्षमा प्रार्थना — पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माँ से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
  11. प्रसाद वितरण — पूजा के बाद गुड़ का प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों और भक्तों में बांटें।

⚡ 5-मिनट विधि

  1. साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान पर सरसों के तेल का दीपक और धूप जलाएं।
  2. माँ कालरात्रि को लाल गुड़हल के फूल और काले तिल अर्पित करें।
  3. देवी को गुड़ का भोग लगाएं।
  4. 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
  5. कपूर से आरती करें और परिवार में गुड़ का प्रसाद बांट दें।

🛒 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि पूजा सामग्री

आवश्यक

  • माँ कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति
  • सरसों का तेल या घी
  • लाल गुड़हल के फूल
  • गुड़ (Jaggery)
  • काले तिल
  • धूप और कपूर

वैकल्पिक

  • नींबू
  • लोहे की कोई छोटी वस्तु (छल्ला या कील)
  • नारंगी वस्त्र
  • रुद्राक्ष की माला
  • गंगाजल

अगर कुछ उपलब्ध न हो

  • if लाल गुड़हल is unavailable, लाल गुलाब is traditionally accepted
  • if सरसों का तेल is unavailable, तिल का तेल या घी is traditionally accepted
  • if काले तिल is unavailable, सफेद तिल is traditionally accepted

🌙 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि व्रत विधि

व्रत कब शुरू करें: सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

क्या खा सकते हैं

  • कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, ताजे फल, दूध, दही, और मेवे खा सकते हैं। नमक में केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।

क्या नहीं खाना चाहिए

  • अन्न (गेहूं, चावल), साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब, और तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें।

पारण: अगले दिन (अष्टमी तिथि) सुबह पूजा के बाद या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद व्रत खोलें।

किन्हें परंपरागत रूप से व्रत नहीं रखना चाहिए: गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को यह निर्जला या कठिन व्रत नहीं करना चाहिए।

यदि आप गर्भवती हैं, अस्वस्थ हैं, या किसी भी प्रकार की दवा ले रही हैं, तो व्रत रखने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

❓ नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि: क्या करें और क्या न करें

क्या मैं नवरात्रि के सातवें दिन बाल धो सकती हूँ?

आमतौर पर व्रत रखने वालों को नवरात्रि के दौरान बाल धोने से मना किया जाता है। यदि बहुत जरूरी हो तो सादे पानी से धो लें।

क्या इस दिन नाखून काट सकते हैं?

नहीं, नवरात्रि के दौरान नाखून काटना वर्जित माना जाता है। इसे पूजा से पहले ही कर लेना चाहिए।

क्या व्रत में सेंधा नमक खा सकते हैं?

हां, व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग पूरी तरह से मान्य है।

क्या मैं इस दिन यात्रा कर सकता हूँ?

हां, यात्रा करने में कोई मनाही नहीं है, बस अपनी पूजा का समय और नियम ध्यान में रखें।

क्या सातवें दिन नया काम शुरू किया जा सकता है?

नवरात्रि के सभी दिन शुभ होते हैं, आप इस दिन नया काम शुरू कर सकते हैं, विशेषकर लोहे या मशीनरी से जुड़ा काम।

क्या हम इस दिन शॉपिंग कर सकते हैं?

हां, आप जरूरत का सामान खरीद सकते हैं, लेकिन चमड़े की चीजें खरीदने से बचें।

क्या पूजा के तुरंत बाद खाना खा सकते हैं?

यदि आपने व्रत नहीं रखा है, तो पूजा और आरती संपन्न होने के बाद आप सात्विक भोजन कर सकते हैं।

क्या कालरात्रि की पूजा रात में करनी चाहिए?

माँ कालरात्रि की विशेष पूजा मध्य रात्रि (निशिता काल) में बहुत फलदायी मानी जाती है, लेकिन आप सुबह भी पूजा कर सकते हैं।

क्या मैं पूजा में काले कपड़े पहन सकता हूँ?

नवरात्रि में काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इस दिन नारंगी या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ है।

क्या इस दिन दाढ़ी बना सकते हैं?

परंपरागत रूप से नवरात्रि के दौरान दाढ़ी-मूंछ या बाल कटवाने से मना किया जाता है।

क्या व्रत में चाय पी सकते हैं?

हां, व्रत के दौरान चाय पी जा सकती है, लेकिन कुछ लोग केवल फलाहार और पानी पर ही व्रत रखते हैं।

क्या महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजा करनी चाहिए?

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को सीधे मूर्ति स्पर्श या पूजा करने से बचना चाहिए, वे मानसिक रूप से मंत्र जाप कर सकती हैं।

क्या मैं इस दिन लहसुन-प्याज खा सकता हूँ अगर मेरा व्रत नहीं है?

भले ही आपका व्रत न हो, लेकिन घर में नवरात्रि की पूजा हो रही है तो लहसुन-प्याज और मांसाहार से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

✓ क्या करें

  • Worship Maa Kalaratri with devotion.
  • Chant Kalaratri Mantras regularly.
  • Maintain cleanliness and purity.
  • Offer jaggery as Prasad.
  • Meditate on inner strength.

✗ क्या न करें

  • Avoid consuming non-vegetarian food.
  • Do not engage in arguments.
  • Avoid alcohol and tobacco.
  • Do not disrespect elders.

⚠️ आम गलतियाँ

  • पूजा में बासी या मुरझाए हुए फूलों का उपयोग करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • माँ कालरात्रि को भोग में गुड़ न चढ़ाने से सातवें दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
  • घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार पकाने से नवरात्रि का व्रत और पूजा खंडित मानी जाती है।
  • बड़ों का अपमान करने या किसी से झगड़ा करने से देवी की कृपा प्राप्त नहीं होती।
  • पूजा के दौरान मन में डर या नकारात्मक विचार रखने से साधना अधूरी रह जाती है।
  • बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा के बर्तन या सामग्री छूने से पूजा दोषपूर्ण हो जाती है।
  • आरती के समय कपूर या घी का दीपक बीच में ही बुझ जाने को परंपरा में शुभ नहीं माना जाता।

📿 मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः

ॐ, ऐं, ह्रीं, क्लीं बीज मंत्रों के साथ मैं माँ कालरात्रि को नमन करता हूँ, जो अज्ञानता और अंधकार का नाश करने वाली हैं।

108 बार (एक रुद्राक्ष की माला) सुबह की पूजा के समय या मध्य रात्रि (निशिता काल) की साधना के दौरान।

📖 नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज नाम के राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था। उनके अत्याचारों से देवता भी परेशान हो गए थे। रक्तबीज नाम का राक्षस बहुत ही मायावी और शक्तिशाली था। उसे यह वरदान प्राप्त था कि जब भी उसके खून की एक बूंद जमीन पर गिरेगी, तो उस बूंद से एक नया और उतना ही शक्तिशाली रक्तबीज पैदा हो जाएगा। जब देवताओं ने देखा कि वे इन राक्षसों का सामना नहीं कर सकते, तो वे भगवान शिव के पास गए। भगवान शिव ने माता पार्वती से अनुरोध किया कि वे इन राक्षसों का वध करके देवताओं और मनुष्यों की रक्षा करें। तब माता पार्वती ने देवी दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ की सेना से युद्ध करने लगीं। युद्ध के दौरान जब देवी ने रक्तबीज पर प्रहार किया, तो उसके शरीर से खून की बूंदें जमीन पर गिरने लगीं। वरदान के कारण हर बूंद से एक नया रक्तबीज पैदा होने लगा। देखते ही देखते युद्ध के मैदान में लाखों रक्तबीज खड़े हो गए। यह देखकर माँ दुर्गा को अत्यंत क्रोध आया। क्रोध के कारण उनका रंग एकदम काला पड़ गया और उनके इसी भयंकर स्वरूप से माँ कालरात्रि का जन्म हुआ। माँ कालरात्रि का रूप बहुत ही डरावना था। उनके बाल बिखरे हुए थे, गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला थी और उनकी सांसों से आग निकल रही थी। माँ कालरात्रि ने अपने हाथ में एक खप्पर (कटोरा) लिया। जब माँ दुर्गा रक्तबीज पर प्रहार करतीं, तो माँ कालरात्रि उसका सारा खून अपने खप्पर में भर लेतीं और उसे जमीन पर गिरने ही नहीं देतीं। इसके साथ ही वे उन सभी रक्तबीजों को निगलने लगीं जो पहले से पैदा हो चुके थे। अंततः रक्तबीज के शरीर का सारा खून खत्म हो गया और उसका वध हो गया। इसके बाद माँ ने शुंभ और निशुंभ का भी अंत कर दिया। इस तरह माँ कालरात्रि ने देवताओं को राक्षसों के आतंक से मुक्त कराया। यह कथा हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, देवी की शक्ति के सामने वह टिक नहीं सकती।

🪔 आरती

माँ कालरात्रि की आरती पूजा के अंत में की जाती है। सबसे पहले एक साफ थाली में घी का दीपक या कपूर जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ माँ की आरती गाएं। आरती करते समय थाली को घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं। आरती पूरी होने के बाद दोनों हाथों से आरती लें और फिर माँ को अर्पित किया गया गुड़ का प्रसाद सभी में बांट दें।

🔮 आपकी समस्या के अनुसार नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि के उपाय

money

यदि व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है या धन की कमी बनी हुई है, तो माँ कालरात्रि की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें कुछ दाने काले तिल के डाल दें। देवी को गुड़ का भोग लगाकर उसे गरीबों में बांटने से आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

career

नौकरी में तरक्की रुक गई है या ऑफिस में परेशानियां आ रही हैं, तो इस दिन माँ कालरात्रि को एक नींबू और लोहे का एक छोटा छल्ला अर्पित करें। पूजा के बाद उस छल्ले को अपने पास रख लें। शनि ग्रह की कृपा से करियर में आ रही रुकावटें दूर होंगी।

marriage

विवाह में देरी हो रही है या रिश्ते बार-बार टूट रहे हैं, तो माँ कालरात्रि को लाल गुड़हल के फूलों की माला पहनाएं। साथ ही 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। माना जाता है कि इससे विवाह में आ रही सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।

children

बच्चों के स्वास्थ्य या उनकी पढ़ाई को लेकर चिंता बनी रहती है, तो माँ कालरात्रि के सामने बैठकर उनके उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करें। बच्चों के हाथ से देवी को गुड़ अर्पित करवाएं और फिर वही गुड़ उन्हें प्रसाद के रूप में खिलाएं। इससे बच्चों के मन से डर दूर होता है।

home

घर में कलह, अशांति या नकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, तो नवरात्रि के सातवें दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मकता आती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांति बनी रहती है।

negativity

यदि आपको अज्ञात भय सताता है, बुरे सपने आते हैं या किसी प्रकार की नजर दोष का शक है, तो माँ कालरात्रि के मंत्र का जाप करते हुए एक नींबू पर सिंदूर लगाकर देवी के चरणों में रखें। अगले दिन उस नींबू को किसी बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।

क्या नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि आपके लिए विशेष है?

त्योहारों के उपाय और ग्रह शांति के नियम हम सभी के लिए दिशा-निर्देश की तरह काम करते हैं। माँ कालरात्रि की पूजा और शनि ग्रह से जुड़े ये उपाय जीवन में सकारात्मकता लाते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि एक सामान्य लेख की जानकारी हर व्यक्ति की अपनी कुंडली के अनुसार नहीं हो सकती। शनि ग्रह आपकी जन्म कुंडली में कहाँ है, इसका प्रभाव पूरी तरह अलग होता है। यहीं पर व्यक्तिगत ज्योतिषीय विश्लेषण काम आता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी नौकरी या धन की स्थिति कब सुधरेगी, तो 'Kundli' रीडिंग इसमें मदद कर सकती है। विवाह के लिए सही जीवनसाथी की तलाश 'Kundali Milan' से स्पष्ट होती है। आपके हाथों की लकीरें आपके भविष्य के बारे में क्या कहती हैं, यह 'Hastrekha' से जाना जा सकता है। और यदि आपको अजीब सपने आते हैं, तो 'Swapna Shastra' उनका अर्थ समझा सकता है। त्रिकाल वाणी की ये सेवाएं आपकी व्यक्तिगत समस्याओं का सटीक उत्तर देती हैं।

पुणे में नवरात्रि दिवस 7 - माँ कालरात्रि — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

माँ कालरात्रि की पूजा कब की जाती है?

नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित होता है। इस वर्ष यह पूजा 17 अक्टूबर 2026 को की जाएगी। यह दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे पता करें?

पूजा का सटीक मुहूर्त, राहुकाल और अभिजित मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग-अलग होते हैं। ऊपर दी गई टेबल में आपके शहर के अनुसार आज का लाइव मुहूर्त दिखाया गया है। उसी समय के अनुसार अपनी पूजा की योजना बनाएं।

माँ कालरात्रि को कौन सा रंग पसंद है?

माँ कालरात्रि की पूजा में नारंगी (Orange) रंग का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तों को नारंगी रंग के वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। इससे देवी प्रसन्न होती हैं और जीवन में ऊर्जा का संचार होता है।

इस दिन देवी को क्या भोग लगाना चाहिए?

माँ कालरात्रि को गुड़ (Jaggery) का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। पूजा के बाद इस गुड़ को परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए। इससे स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।

माँ कालरात्रि का स्वरूप कैसा है?

माँ कालरात्रि का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है और उनके बाल बिखरे हुए हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और वे गधे की सवारी करती हैं। उनकी सांसों से आग की लपटें निकलती हैं, जो बुराई का नाश करने का प्रतीक है।

क्या मैं इस दिन बाल और नाखून काट सकता हूँ?

परंपरागत रूप से नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून काटने की सख्त मनाही होती है। यह नियम पूरे नौ दिनों तक लागू रहता है। इसलिए यह काम नवरात्रि शुरू होने से पहले ही कर लेना चाहिए।

व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए?

व्रत में आप कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, फल और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं। नमक में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करना चाहिए। बाजार में मिलने वाले व्रत के पैकेटबंद स्नैक्स से बचना बेहतर है।

क्या इस दिन नए काम की शुरुआत की जा सकती है?

नवरात्रि का हर दिन बहुत शुभ होता है, इसलिए आप कोई भी नया काम शुरू कर सकते हैं। चूंकि यह दिन शनि ग्रह से जुड़ा है, इसलिए लोहे या मशीनरी से जुड़े काम शुरू करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। बस राहुकाल के समय को टाल दें।

माँ कालरात्रि किस ग्रह को नियंत्रित करती हैं?

ज्योतिष के अनुसार माँ कालरात्रि शनि ग्रह (Saturn) को नियंत्रित करती हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

क्या मैं पूजा में लाल गुलाब चढ़ा सकता हूँ?

हां, यदि आपको लाल गुड़हल के फूल नहीं मिल रहे हैं, तो आप लाल गुलाब चढ़ा सकते हैं। लाल रंग देवी को बहुत प्रिय है और यह पूरी तरह से मान्य है। बस फूल ताजे होने चाहिए।

माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र क्या है?

माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः' है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करना चाहिए। यह मंत्र हर प्रकार के भय और नकारात्मकता को दूर करता है।

क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं को निर्जला या कठिन व्रत रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। वे केवल पूजा कर सकती हैं और सात्विक आहार ले सकती हैं। यदि व्रत रखना ही हो, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

पूजा में लोहे की वस्तु क्यों चढ़ाई जाती है?

माँ कालरात्रि शनि ग्रह की नियंत्रक हैं और शनि का संबंध लोहे से होता है। इसलिए इस दिन लोहे की कोई छोटी वस्तु या छल्ला चढ़ाने की परंपरा है। यह शनि दोषों को शांत करने में मदद करता है।

कालरात्रि और महाकाली में क्या अंतर है?

माँ कालरात्रि दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं जिनकी पूजा नवरात्रि में होती है, जबकि महाकाली दस महाविद्याओं में से एक हैं। दोनों का स्वरूप भयंकर है और दोनों ही राक्षसों का नाश करती हैं। हालांकि, उनकी पूजा विधियों और मंत्रों में अंतर होता है।

क्या हम इस दिन घर का सामान खरीद सकते हैं?

हां, आप घर की जरूरत का सामान, कपड़े या गहने खरीद सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि काले रंग के कपड़े या चमड़े का सामान खरीदने से बचें। शुभ मुहूर्त देखकर ही बड़ी खरीदारी करें।

व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?

व्रत का पारण आमतौर पर अगले दिन अष्टमी पूजा के बाद या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद किया जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। पारण का सही समय ऊपर दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

इस दिन दान में क्या देना चाहिए?

नवरात्रि के सातवें दिन गुड़, काले तिल और सरसों के तेल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन भी करा सकते हैं। इससे शनि देव और माँ कालरात्रि दोनों प्रसन्न होते हैं।

क्या रात में पूजा करना जरूरी है?

माँ कालरात्रि की पूजा सुबह भी की जा सकती है, लेकिन तांत्रिक और विशेष साधनाओं के लिए मध्य रात्रि (निशिता काल) का समय चुना जाता है। एक सामान्य गृहस्थ के लिए सुबह या शाम की पूजा भी पूरी तरह फलदायी होती है।

मेरे शहर में पूजा का समय अलग क्यों है?

सूर्य के उदय और अस्त होने का समय हर शहर में अलग होता है, जिससे तिथियों और मुहूर्तों का समय बदल जाता है। इसीलिए पंचांग की गणना आपके शहर के अक्षांश और देशांतर के आधार पर की जाती है। पेज पर दिया गया समय आपके शहर के लिए ही है।

अगर पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?

ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, इसलिए अनजाने में हुई गलती से घबराना नहीं चाहिए। पूजा के अंत में माँ कालरात्रि के सामने हाथ जोड़कर क्षमा याचना कर लें। देवी अपने भक्तों की गलतियों को माफ कर देती हैं।

पुणे में आने वाले त्योहार

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