सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jul 2027
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सबसे पास का शुभ समय: Nov 2026 – Feb 2027
परिश्रम, विरोध और रोग
🔱 ग्रन्थ से आपका सार
आपके 5 मुख्य भावों में से 1 सहारा देने वाले, 2 कठिन, और 0 मिला-जुला हैं।
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
मज़बूत · 25
इस समय घर, ज़मीन या गाड़ी खरीद-बेच सकते हैं
Jun 2027 – Oct 2027 · Mar 2028 – May 2028
हमारा फ़ैसला:हाँ
क्यों? ▾
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 25 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 4थे (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 4थे भाव पर दृष्टि
· 4ve ghar ka malik Shukra apni mazboot jagah par hai
· 4ve ghar ka malik apne hi ghar mein hai
· 4ve ghar mein Budh baitha hai — sahara deta hai
· 4ve ghar mein Shukra baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu kam hain (25)
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra SWA/MITRA raashi mein; Shukra achhe ghar mein (4ve)
Rishton se madad, kheti mein safalta, gaadi, khet aur GHAR ka sukh, naya dhan, aur achhi jagah. (Ph 20.5)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
घर का पूरा सुख मिलता है। (BPHS 15.2) भूमि, वाहन और घर का सुख मिलता है। (BPHS 15.3)
⭐ AAPKE CHART SE3
घर का पूरा सुख मिलता है।BPHS 15.2◆
भूमि, वाहन और घर का सुख मिलता है।BPHS 15.3◆
जातक मन्त्री जैसा, सब धनों से युक्त, चतुर, शीलवान, मानी, ज्ञानवान और सुखी होता है।BPHS 24.40◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 18★
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 18 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी मंगल 6ठे (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 5वें भाव पर दृष्टि
· 5ve ghar ka malik Mangal mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· 5ve ghar mein Surya baitha hai — dabaav banata hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
· is ghar par bindu bahut kam hain (18) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 16.8) सन्तान ही शत्रु के समान हो जाती है; अथवा दत्तक या गोद ली हुई सन्तान होती है। (BPHS 24.54)
⭐ AAPKE CHART SE3
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 16.8◆
सन्तान ही शत्रु के समान हो जाती है; अथवा दत्तक या गोद ली हुई सन्तान होती है।BPHS 24.54◆
शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (BPHS Ch.16 सल.2) — अर्थात् सन्तान होने में बड़ी बाधा; इसके लिये उपाय अवश्य करें।BPHS 16.2◆
कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
कमज़ोर · 24
नौकरी/पदोन्नति में रुकावट है — यह समय सबसे अच्छा मौका है, इसी में ज़ोर लगाएँ
⭐ Jul 2027 – Oct 2027 · ⭐ Mar 2028 – May 2028
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी मंगल 6ठे (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 10वें भाव पर दृष्टि, शनि 10वें भाव में
· 10ve ghar mein Chandra baitha hai — sahara deta hai
· 10ve ghar ka malik Mangal mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — kamzor — Mangal 6ve (dusthana) mein
Jo bhi kaam karo wo bekaar chala jaata hai, samman toot-ta hai, aur swabhav mein kharabi aati hai. (Ph 20.19b)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 21.3) पिता का सुख नहीं मिलता; जातक चतुर होते हुए भी धन से हीन रहता है और शत्रुओं से पीड़ित होता है। (BPHS 24.114)
⭐ AAPKE CHART SE3
काम-काज में कमी रहती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 21.3◆
पिता का सुख नहीं मिलता; जातक चतुर होते हुए भी धन से हीन रहता है और शत्रुओं से पीड़ित होता है।BPHS 24.114◆
ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — लाभ की जगह हानि रहती है।BPHS 21.4
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
कमज़ोर · 30★
कर्ज़ और झगड़ा — इसी समय में निपटा लें
⭐ Nov 2026 – Feb 2027 · ⭐ Oct 2027 – Dec 2027
क्यों? ▾
आपका 6ठा भाव — परिश्रम, विरोध और रोग — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 30 हैं।
गोचर: गुरु 6ठे भाव पर दृष्टि, शनि 6ठे भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu theek hain (30)
· mehnat aur rukavat ka mukhya grah Mangal bhi mushkil ghar mein hai
· 6ve ghar mein Mangal baitha hai — dabaav banata hai
आय और लाभ11वाँ भाव
मिला-जुला · 28★
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
Oct 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Mar 2028
क्यों? ▾
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 28 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 4थे (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 11वें भाव पर दृष्टि, गुरु 11वें भाव पर दृष्टि
· 11ve ghar ka malik Shukra apni mazboot jagah par hai
· is ghar par bindu kam hain (28)
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra SWA/MITRA raashi mein; Shukra achhe ghar mein (4ve)
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।5 MD▾
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौर
काल
ग्रह की जगह
ग्रन्थ क्या कहता है
स्रोत
सूर्य महादशा
Nov 1980 – Mar 1986
सूर्य — 5वें भाव में, 2 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · paisa aur parivaar · सन्तान, विद्या और बुद्धि · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: सम
└ सूर्य/सूर्य
Nov 1980 – Feb 1981
सूर्य — 5वें भाव में, 2 का स्वामी
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.61
└ सूर्य/चन्द्र
Feb 1981 – Aug 1981
चन्द्र — 10वें भाव में, 1 का स्वामी
विवाह और शुभ कार्य होते हैं। धन-अनाज की समृद्धि, घर और ज़मीन की बढ़ोतरी, पशु और वाहन। पत्नी और संतान का सुख। बड़े लोगों से मेल, और उनकी कृपा से मनचाहा काम बनता है।
बेवक़्त खाना, और एक जगह से दूसरी जगह भटकना।
BPHS 52.4-6
└ सूर्य/मंगल
Aug 1981 – Dec 1981
मंगल — 6ठे भाव में, 10+5 का स्वामी
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
रत्न, सोना और धन की प्राप्ति। ऊपर वालों का स्नेह — शुभ समय। पित्त की तरफ़ ध्यान देना ज़रूरी।
BPHS 52.21-22
└ सूर्य/राहु
Dec 1981 – Sep 1982
राहु — 1ले भाव में
शुरू के दो महीने — धन की हानि और बड़ा भय, चोर का डर, घाव, पत्नी-संतान को कष्ट। उसके बाद सुख मिलता है। शुभ ग्रह के साथ/दृष्टि में हो तो शरीर स्वस्थ, मन संतुष्ट, और ऊपर वालों से प्रीति।
राजसम्मान। भाग्य की बढ़ोतरी, यश, पत्नी-संतान की वृद्धि, संतान का उत्सव, घर में कल्याण।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.23-25
└ सूर्य/गुरु
Sep 1982 – Jun 1983
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
पत्नी-संतान को कष्ट और शरीर को कष्ट, बड़ा भय। ऊपर वालों की नाराज़गी, मनचाही चीज़ का नाश। ग़लत रास्ते से आया धन नष्ट, शरीर गिरना, मन में ताप।
विवाह, बड़े लोगों से भेंट, धन-अनाज का लाभ, संतान लाभ, बड़ा सुख। बड़े की कृपा से मनचाहा काम और धन। ब्राह्मणों का प्रेम और सम्मान, अच्छे वस्त्र। भाग्येश/कर्मेश के वश से पद मिलना, नरवाहन योग (पालकी/सवारी), जगह की बढ़ोतरी। दान-धर्म का काम, देवता की आराधना, गुरु में भक्ति, मन की सिद्धि, पुण्य कर्म।
BPHS 52.37-39
└ सूर्य/शनि
Jun 1983 – Apr 1984
शनि — 3रे भाव में, 7+8 का स्वामी
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
चारों तरफ़ विरोध, आलस, और जीविका का दर्जा गिरना। ऊपर वालों तथा चोरी का भय।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.45-46
└ सूर्य/बुध
Apr 1984 – Jan 1985
बुध — 4थे भाव में, 12+3 का स्वामी
शरीर को कष्ट, मन में ताप, पत्नी-संतान को कष्ट।
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
BPHS 52.54-56
└ सूर्य/केतु
Jan 1985 – May 1985
केतु — 7वें भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्र
May 1985 – Mar 1986
शुक्र — 4थे भाव में, 11+4 का स्वामी
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
मनचाही स्त्री/जीवनसाथी का सुख और सम्पदा। दूसरे गाँव/शहर की यात्रा, विद्वानों और बड़े लोगों से भेंट। पद का लाभ और बड़ा उत्साह — छत्र-चामर जैसा वैभव। घर में कल्याण और सम्पत्ति, रोज़ मिष्ठान्न। मूँगा जैसे रत्न, मोती और अच्छे वस्त्र का लाभ। चौपायों का लाभ, बहुत अनाज और धन। उत्साह, कीर्ति, और नर-वाहन (पालकी/सवारी) की सम्पदा।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशा
Mar 1986 – Mar 1996
चन्द्र — 10वें भाव में, 1 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · घर, भूमि और माता · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(चन्द्र 1ले भाव का स्वामी है)
अ.34: शुभ
└ चन्द्र/चन्द्र
Mar 1986 – Jan 1987
चन्द्र — 10वें भाव में, 1 का स्वामी
विद्या, संगीत और कला में मन लगता है। अच्छे वस्त्र, अच्छी संगति और शरीर का सुख। और बड़े लोगों तथा अधिकारियों से आदर मिलता है।
JP 18.73
└ चन्द्र/मंगल
Jan 1987 – Aug 1987
मंगल — 6ठे भाव में, 10+5 का स्वामी
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
JP 18.74
└ चन्द्र/राहु
Aug 1987 – Feb 1989
राहु — 1ले भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
पुण्य-तीर्थ का फल, देवता का दर्शन। दूसरों का उपकार और पुण्य कर्म का संग्रह।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरु
Feb 1989 – Jun 1990
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
काम में रुकावट, धन का व्यय। मन में ताप और अपनों से मतभेद। शरीर में शिथिलता।
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा।और मेहनत से काम बनता है।
BPHS 53.26-30
└ चन्द्र/शनि
Jun 1990 – Jan 1992
शनि — 3रे भाव में, 7+8 का स्वामी
पद और सम्मान। धन-अनाज का लाभ, नौकर-चाकर और पशु। भुक्ति के शुरू में पवित्र तीर्थ में स्नान और दर्शन।
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.32-35
└ चन्द्र/बुध
Jan 1992 – Jun 1993
बुध — 4थे भाव में, 12+3 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
माता के पक्ष से धन, विद्वानों का साथ, और वस्त्र-आभूषण की प्राप्ति।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतु
Jun 1993 – Jan 1994
केतु — 7वें भाव में
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं।
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.47-49
└ चन्द्र/शुक्र
Jan 1994 – Sep 1995
शुक्र — 4थे भाव में, 11+4 का स्वामी
नया घर बनना। विवाह और मंगल कार्य, वाहन, आभूषण, अच्छे वस्त्र। पत्नी-संतान का सुख। कहीं गड़ा धन या अचानक बड़ा लाभ मिलना। नाच-गाने और उत्सव का सुख।
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
BPHS 53.53-59
└ चन्द्र/सूर्य
Sep 1995 – Mar 1996
सूर्य — 5वें भाव में, 2 का स्वामी
शरीर में ताप, ऊपर वालों से मतभेद, धन की हानि।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.70
मंगल महादशा
Mar 1996 – Mar 2003
मंगल — 6ठे भाव में, 10+5 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · सन्तान, विद्या और बुद्धि · परिश्रम, विरोध और रोग · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(मंगल "भाई-बहन और पराक्रम" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: योगकारक
└ मंगल/मंगल
Mar 1996 – Aug 1996
मंगल — 6ठे भाव में, 10+5 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
शरीर में गर्मी बढ़ती है, मित्रों से खिंचाव, माता के पक्ष में चिन्ता, और ऊपर वालों से भय। काम अटकते हैं।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहु
Aug 1996 – Sep 1997
राहु — 1ले भाव में
ऊपर वालों और चोरी का भय, धन-अनाज का नुक़सान। और रास्ता ग़लत तरफ़ मुड़ने का ख़तरा।
JP 18.85
└ मंगल/गुरु
Sep 1997 – Aug 1998
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
पद और सम्मान। विवाह और मंगल कार्य, संतान का लाभ। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ। धन-अनाज, वाहन और वस्त्र। विद्या और यश की बढ़ोतरी।
प्रेत-बाधा जैसा अनुभव, मन में भय। काम में रुकावट, धन का व्यय।
BPHS 54.15-21
└ मंगल/शनि
Aug 1998 – Sep 1999
शनि — 3रे भाव में, 7+8 का स्वामी
पद का सुख और यश की बढ़ोतरी। अपने गाँव/जगह में अनाज की बढ़ोतरी। संतान-पौत्र का साथ, घर में गोधन। अपने वार के दिन राजसम्मान, अपने महीने में संतान की वृद्धि।
विदेश या दूर की यात्रा मिलती है।
BPHS 54.23-25
└ मंगल/बुध
Sep 1999 – Sep 2000
बुध — 4थे भाव में, 12+3 का स्वामी
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख।खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
व्यापारी वर्ग से धन, घर, गाय और अनाज की सम्पदा। पर विरोध की बाधा और मन में क्लेश।
BPHS 54.36-38
└ मंगल/केतु
Sep 2000 – Feb 2001
केतु — 7वें भाव में
शरीर में रोग होगा। अपमान, मन में ताप, धन-अनाज का घटना।
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
BPHS 54.54
└ मंगल/शुक्र
Feb 2001 – Apr 2002
शुक्र — 4थे भाव में, 11+4 का स्वामी
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्य
Apr 2002 – Aug 2002
सूर्य — 5वें भाव में, 2 का स्वामी
शरीर को कष्ट, मन में ताप, काम बिगड़ना, बड़ा भय। सिर का रोग, ज्वर, अतिसार।
अपवाद, बड़ों से मनमुटाव, झगड़ा और सेहत पर दबाव। अपने ही वर्ग से मन को कष्ट।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 54.67-68
└ मंगल/चन्द्र
Aug 2002 – Mar 2003
चन्द्र — 10वें भाव में, 1 का स्वामी
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
JP 18.92
राहु महादशा
Mar 2003 – Mar 2021
राहु — 1ले भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव
(राहु स्वयं 1ले भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहु
Mar 2003 – Dec 2005
राहु — 1ले भाव में
राजसम्मान, वस्त्र-वाहन-आभूषण। कारोबार में फल की अधिकता। चौपायों का लाभ, पश्चिम दिशा की यात्रा, वाहन और वस्त्र का लाभ।
चोर का डर और घाव की पीड़ा। ऊपर वालों के दरवाज़े पर लोगों से मनमुटाव, अपने चाहने वालों का नुकसान, पत्नी-संतान को कष्ट — इसमें कोई संदेह नहीं।
BPHS 55.1-2
└ राहु/गुरु
Dec 2005 – May 2008
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
धन की हानि और शरीर को कष्ट।
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट।
BPHS 55.18
└ राहु/शनि
May 2008 – Mar 2011
शनि — 3रे भाव में, 7+8 का स्वामी
ऊपर वालों की सेवा और उनकी प्रीति — शुभ। विवाह और उत्सव के कार्य, बहुत पुण्य। बाग़ लगवाना, तालाब बनवाना। शूद्र/श्रमिक वर्ग के माध्यम से इष्ट लाभ, गोधन का संग्रह।
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.21-23
└ राहु/बुध
Mar 2011 – Sep 2013
बुध — 4थे भाव में, 12+3 का स्वामी
बुध के महीने में बड़ा सुख, और अपने वार के दिन बड़े से भेंट। विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी। धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ।
मित्र, बन्धु और जीवनसाथी का मेल, और धन का आगम। ऊपर वालों की प्रीति।
BPHS 55.30-35
└ राहु/केतु
Sep 2013 – Oct 2014
केतु — 7वें भाव में
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें।
JP 18.100
└ राहु/शुक्र
Oct 2014 – Oct 2017
शुक्र — 4थे भाव में, 11+4 का स्वामी
विवाह और मंगल कार्य। वाहन, वस्त्र, आभूषण, सुगन्ध। पत्नी-संतान का सुख, घर में लक्ष्मी। मौंजीबन्धन/संस्कार जैसे कार्य। नाच-गाने और उत्सव का सुख, अच्छा भोजन।
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें।
BPHS 55.46-52
└ राहु/सूर्य
Oct 2017 – Sep 2018
सूर्य — 5वें भाव में, 2 का स्वामी
पद और राजसम्मान। पिता की ओर से सुख, शत्रु का नाश। धन-अनाज, यश। तीर्थ और गंगा-स्नान का फल।
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.60-66
└ राहु/चन्द्र
Sep 2018 – Mar 2020
चन्द्र — 10वें भाव में, 1 का स्वामी
माता का सुख, घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। मन प्रसन्न, यश की बढ़ोतरी।
भोग की सम्पदा हमेशा बनी रहती है, फ़सल-वृद्धि और धन का आगम। और अपनों से मेल।
BPHS 55.68-74
└ राहु/मंगल
Mar 2020 – Mar 2021
मंगल — 6ठे भाव में, 10+5 का स्वामी
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।
सब तरफ़ अड़चनें, कामों में उलझन, और पैसे के मामलों में भूल-चूक।
BPHS 55.82
गुरु महादशा
Mar 2021 – Mar 2037
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: paisa aur parivaar · भाई-बहन और पराक्रम · सन्तान, विद्या और बुद्धि · परिश्रम, विरोध और रोग · भाग्य, पिता और धर्म · आय और लाभ
(गुरु "paisa aur parivaar" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: शुभ
└ गुरु/गुरु
Mar 2021 – May 2023
गुरु — 3रे भाव में, 6+9 का स्वामी
ऊपर वालों की प्रीति और उत्साह। सब काम और सब अर्थ सधते हैं। विद्या और विज्ञान की प्राप्ति।
JP 18.110
└ गुरु/शनि
May 2023 – Nov 2025
शनि — 3रे भाव में, 7+8 का स्वामी
भूमि का लाभ, धन का लाभ, और संतान का लाभ — सुख देने वाला। गाय-भैंस आदि का लाभ, और श्रमिक/शूद्र वर्ग के माध्यम से धन।
मन में विरोध और बोझ, संतान के कारण धन का व्यय, और काम में रुकावट।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 56.15-16
└ गुरु/बुध ← अभी
Nov 2025 – Mar 2028(अब तक Oct 2026)
बुध — 4थे भाव में, 12+3 का स्वामी
शुरू में शुभ — पत्नी का सुख और धन का आना। अन्त में धन की हानि, और अपने मन का सुख नहीं मिलता।
व्यापारी वर्ग से धन, ऊपर वालों का स्नेह और सुख। अच्छे कर्म और आचरण की सिद्धि।
BPHS 56.29-30
⚠️ ढैया
Dec 1984 – Dec 1987
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती
Jun 1995 – Apr 2003
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Sep 2004 – Jul 2007
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Nov 2014 – Nov 2017
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती ← अभी चल रही है
Apr 2025 – Jun 2032
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris
गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।▾
🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग
BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।
मंगल सोलह में से 6 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।
मंगल6/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Vrishabhaकर्म और पहचान — Kumbhaपिछले कर्मों का जोड़ — Dhanu
सूर्य4/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Simhaकर्म और पहचान — Simhaपिछले कर्मों का जोड़ — Tula
शुक्र4/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Vrishchikaकर्म और पहचान — Vrishchikaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishabha
ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।
⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय
ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।
यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।
📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर
🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): October 2026🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): February 2027
Mercury (4th) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — December 2026 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
📊 Complete Analysis
आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
💎 Gemstone + 4 Action Windows...
त्रिकाल ने और भी देखा है
आपकी Jupiter महादशा में Poori Kundali को लेकर त्रिकाल ने और भी देखा है... आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
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