घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Nov 2026 · Jun 2027 – Jul 2027
⭐
सबसे पास का शुभ समय: Nov 2026 – Feb 2027
आय और लाभ
🔱 ग्रन्थ से आपका सार
आपके 5 मुख्य भावों में से 0 सहारा देने वाले, 2 कठिन, और 1 मिला-जुला हैं।
कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
मिला-जुला · 37
नौकरी लगेगी, पदोन्नति या नया काम मिलेगा
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 37 हैं। इस भाव का स्वामी चन्द्र 12वें (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 10वें भाव में
· 10ve ghar mein Budh baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu theek hain (37)
· 10ve ghar ka malik Chandra mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· 10ve ghar mein Surya baitha hai — dabaav banata hai
इस भाव के स्वामी (Chandra) पर — kamzor — Chandra 12ve (dusthana) mein
Jo bhi kaam karo wo bekaar chala jaata hai, samman toot-ta hai, aur swabhav mein kharabi aati hai. (Ph 20.19b)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
जातक सदा व्यापार-प्रवृत्ति का रहता है। (JP 15.65) शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है। (BJ 20.11)
⭐ AAPKE CHART SE3
जातक सदा व्यापार-प्रवृत्ति का रहता है।JP 15.65◆
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
जीविका ब्राह्मण और देवताओं के आश्रय तथा धर्म के कामों से चलती है।BJ 10.3◆
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
कमज़ोर · 28
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Nov 2026 · ⭐ Jun 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 28 हैं।
गोचर: गुरु 4थे भाव पर दृष्टि, शनि 4थे भाव पर दृष्टि
· ghar aur maa ka mukhya grah Chandra bhi mushkil ghar mein hai
· is ghar par bindu kam hain (28)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
घर के सुख में कष्ट रहता है। (JP 12.139) वही चारों दुःख देते हैं; कारक, भावेश और भाव में बैठा ग्रह बलहीन हों तो अत्यन्त क्लेश। (JP 12.112)
⭐ AAPKE CHART SE3
घर के सुख में कष्ट रहता है।JP 12.139◆
वही चारों दुःख देते हैं; कारक, भावेश और भाव में बैठा ग्रह बलहीन हों तो अत्यन्त क्लेश।JP 12.112◆
सुख थोड़े समय का ही रहता है।JP 12.86◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
मिला-जुला · 27★
सन्तान का योग है, या बच्चे की पढ़ाई में बड़ी सफलता
Nov 2026 – Feb 2027 · Jul 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 27 हैं।
गोचर: गुरु 5वें भाव पर दृष्टि
· 5ve ghar mein Guru baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu kam hain (27)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
सन्तान न होने का कारण इसी ग्रह से जाना जाता है। (Phaladipika 12.19) शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है। (BJ 20.11)
⭐ AAPKE CHART SE3
सन्तान न होने का कारण इसी ग्रह से जाना जाता है।Phaladipika 12.19◆
शुभ फल क्रम से पूरा, तीन-चौथाई, आधा, एक-चौथाई, थोड़ा और शून्य मिलता है।BJ 20.11◆
जातक के लिये पुरुष देवता की आराधना अनुकूल कही गयी है।JP 13.2
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
कमज़ोर · 22
विवाह में देरी के संकेत — रिश्ता बनेगा पर मेहनत से
⭐ Jul 2027 – Nov 2027 · ⭐ Mar 2028 – May 2028
क्यों? ▾
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 22 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)।
गोचर: गुरु 7वें भाव पर दृष्टि, शनि 7वें भाव में
· shaadi aur saathi ka mukhya grah Shukra bhi mushkil ghar mein hai
· 7ve ghar mein Rahu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (22) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal VAKRI hai; Mangal SWA/MITRA raashi mein
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
आय और लाभ11वाँ भाव
कमज़ोर · 24★
लाभ रुक-रुक कर आएगा — इस समय कमाई का मौका है
⭐ Nov 2026 – Feb 2027 · ⭐ Jul 2027 – Dec 2027
क्यों? ▾
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी सूर्य 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु (11वें भाव का मुख्य ग्रह) वहीं बैठा है, गुरु 11वें भाव में
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Surya) पर — mazboot — Surya SWA/MITRA raashi mein; Surya achhe ghar mein (10ve)
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· is ghar par bindu kam hain (29)
इस भाव के स्वामी (Guru) पर — mazboot — Guru VAKRI hai; Guru achhe ghar mein (5ve)
Virodhiyon par jeet apni himmat se, achhi sehat, udaarta, koi dabaa nahi sakta, aur badi samriddhi. (Ph 20.7)
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
कमज़ोर · 26
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· 1ve ghar ka malik Shukra kamzor jagah par hai
· 1ve ghar ka malik Shukra mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· 1ve ghar mein Ketu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu kam hain (26)
भाग्य, पिता और धर्म9वाँ भाव
कमज़ोर · 24★
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
अब समय की बात —
इस समय गुरु/शनि का दौर चल रहा है (May 2026 – Dec 2028), और इसमें 10वें, 4थे, 5वें भाव खुलता है।
जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।
आगे का दौर
1.5 साल आगे
गुरु / शनि← अभी
Oct 2026 – Apr 2028
भूमि का लाभ, धन का लाभ, और संतान का लाभ — सुख देने वाला। गाय-भैंस आदि का लाभ, और श्रमिक/शूद्र वर्ग के माध्यम से धन।(BPHS 56.15-16)
धन-अनाज का नाश। ज्वर की पीड़ा, मन में रोग। पत्नी-संतान को कष्ट, या घाव जैसी तकलीफ़। घर में अशुभ कार्य, नौकर-चाकर को कष्ट, पशु की हानि, बन्धुओं से मनमुटाव।(BPHS 56.12-14)
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी · इस लग्न के लिए शुभ ग्रह (BPHS Ch.34)
पूरी रीडिंग में:
· आगे के सारे दौर — पूरे चलते हुए दौर तक, एक नहीं
· कब — गोचर की सँकरी खिड़कियाँ, महीने के नाम से
· सूक्ष्म दशा — जो साल को महीनों में तोड़ती है
· साढ़ेसाती और ढैय्या के आगे के दौर
· राजयोग — BPHS अध्याय 39, और वह पूरा/आधा/चौथाई है या नहीं
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।5 MD▾
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौर
काल
ग्रह की जगह
ग्रन्थ क्या कहता है
स्रोत
सूर्य महादशा
Aug 1986 – Apr 1989
सूर्य — 10वें भाव में, 11 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · कर्म, पद और प्रतिष्ठा · आय और लाभ
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: पाप
└ सूर्य/सूर्य
Aug 1986 – Sep 1986
सूर्य — 10वें भाव में, 11 का स्वामी
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
JP 18.61
└ सूर्य/चन्द्र
Sep 1986 – Dec 1986
चन्द्र — 12वें भाव में, 10 का स्वामी
पानी से डर या ख़तरा। बंधन जैसी स्थिति, रोग, अपनी जगह से हटना। मन बेचैन, दायाद/रिश्तेदारों से विरोध। खाना ख़राब मिलना, चोर और सत्ता से पीड़ा।
पत्नी-संतान को कष्ट। लोगों से मनमुटाव और बहस। नौकर-चाकर का साथ छूटना। विरोध, ऊपर वालों से झगड़ा, धन-अनाज-पशु की हानि।
BPHS 52.8-10
└ सूर्य/मंगल
Dec 1986 – Feb 1987
मंगल — 3रे भाव में, 7+2 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
BPHS 52.21-22
└ सूर्य/राहु
Feb 1987 – Jul 1987
राहु — 7वें भाव में
शुरू के दो महीने — धन की हानि और बड़ा भय, चोर का डर, घाव, पत्नी-संतान को कष्ट। उसके बाद सुख मिलता है। शुभ ग्रह के साथ/दृष्टि में हो तो शरीर स्वस्थ, मन संतुष्ट, और ऊपर वालों से प्रीति।
राजसम्मान। भाग्य की बढ़ोतरी, यश, पत्नी-संतान की वृद्धि, संतान का उत्सव, घर में कल्याण।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.23-25
└ सूर्य/गुरु
Jul 1987 – Nov 1987
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी
विवाह, बड़े लोगों से भेंट, धन-अनाज का लाभ, संतान लाभ, बड़ा सुख। बड़े की कृपा से मनचाहा काम और धन। ब्राह्मणों का प्रेम और सम्मान, अच्छे वस्त्र। भाग्येश/कर्मेश के वश से पद मिलना, नरवाहन योग (पालकी/सवारी), जगह की बढ़ोतरी। दान-धर्म का काम, देवता की आराधना, गुरु में भक्ति, मन की सिद्धि, पुण्य कर्म।
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
BPHS 52.32-36
└ सूर्य/शनि
Nov 1987 – Apr 1988
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
चारों तरफ़ विरोध, आलस, और जीविका का दर्जा गिरना। ऊपर वालों तथा चोरी का भय।
BPHS 52.45-46
└ सूर्य/बुध
Apr 1988 – Aug 1988
बुध — 10वें भाव में, 9+12 का स्वामी
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
बन्धुओं के पक्ष में चिन्ता, मन पर बोझ, उत्साह कम और धन का क्षय। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
BPHS 52.55-56
└ सूर्य/केतु
Aug 1988 – Oct 1988
केतु — 1ले भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्र
Oct 1988 – Apr 1989
शुक्र — 12वें भाव में, 8+1 का स्वामी
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
मनचाही स्त्री/जीवनसाथी का सुख और सम्पदा। दूसरे गाँव/शहर की यात्रा, विद्वानों और बड़े लोगों से भेंट। पद का लाभ और बड़ा उत्साह — छत्र-चामर जैसा वैभव। घर में कल्याण और सम्पत्ति, रोज़ मिष्ठान्न। मूँगा जैसे रत्न, मोती और अच्छे वस्त्र का लाभ। चौपायों का लाभ, बहुत अनाज और धन। उत्साह, कीर्ति, और नर-वाहन (पालकी/सवारी) की सम्पदा।
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशा
Apr 1989 – Apr 1999
चन्द्र — 12वें भाव में, 10 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · कर्म, पद और प्रतिष्ठा · व्यय, दूर देश और एकान्त
(चन्द्र "घर, भूमि और माता" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: योगकारक
└ चन्द्र/चन्द्र
Apr 1989 – Feb 1990
चन्द्र — 12वें भाव में, 10 का स्वामी
विद्या, संगीत और कला में मन लगता है। अच्छे वस्त्र, अच्छी संगति और शरीर का सुख। और बड़े लोगों तथा अधिकारियों से आदर मिलता है।
JP 18.73
└ चन्द्र/मंगल
Feb 1990 – Sep 1990
मंगल — 3रे भाव में, 7+2 का स्वामी
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
JP 18.74
└ चन्द्र/राहु
Sep 1990 – Mar 1992
राहु — 7वें भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
शुरू में फल बहुत कम — शत्रु से पीड़ा और बड़ा भय। चोर, साँप और सत्ता का डर, चौपायों को कष्ट। बन्धु का नुकसान, मित्र की हानि, मान की हानि और मन की व्यथा।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरु
Mar 1992 – Jul 1993
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी
काम में रुकावट, धन का व्यय। मन में ताप और अपनों से मतभेद। शरीर में शिथिलता।
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा।और मेहनत से काम बनता है।
BPHS 53.26-30
└ चन्द्र/शनि
Jul 1993 – Feb 1995
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी
शस्त्र से चोट का ख़तरा। धन की हानि, काम में रुकावट, अपनों से विरोध, शरीर में रोग।
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
BPHS 53.36-37
└ चन्द्र/बुध
Feb 1995 – Jul 1996
बुध — 10वें भाव में, 9+12 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतु
Jul 1996 – Feb 1997
केतु — 1ले भाव में
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं।
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
BPHS 53.47-49
└ चन्द्र/शुक्र
Feb 1997 – Oct 1998
शुक्र — 12वें भाव में, 8+1 का स्वामी
नया घर बनना। विवाह और मंगल कार्य, वाहन, आभूषण, अच्छे वस्त्र। पत्नी-संतान का सुख। कहीं गड़ा धन या अचानक बड़ा लाभ मिलना। नाच-गाने और उत्सव का सुख।
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
BPHS 53.53-59
└ चन्द्र/सूर्य
Oct 1998 – Apr 1999
सूर्य — 10वें भाव में, 11 का स्वामी
गर्भाधान और संतान से जुड़ा फल। पद और राजसम्मान, धन-अनाज, शत्रु का नाश। पिता की ओर से सुख।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.65-69
मंगल महादशा
Apr 1999 – Apr 2006
मंगल — 3रे भाव में, 7+2 का स्वामी · वक्री
★ इस पूरे दौर में खुला: paisa aur parivaar · भाई-बहन और पराक्रम · परिश्रम, विरोध और रोग · विवाह और जीवनसाथी
(मंगल 2रे भाव का स्वामी है)
अ.34: मारक
└ मंगल/मंगल
Apr 1999 – Sep 1999
मंगल — 3रे भाव में, 7+2 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
शरीर में गर्मी बढ़ती है, मित्रों से खिंचाव, माता के पक्ष में चिन्ता, और ऊपर वालों से भय। काम अटकते हैं।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहु
Sep 1999 – Sep 2000
राहु — 7वें भाव में
गंगा-स्नान और तीर्थ का फल। धन-अनाज, वाहन। ऊपर वालों से मेल, विदेश या दूर की यात्रा का लाभ।
ऊपर वालों और चोरी का भय, धन-अनाज का नुक़सान। और रास्ता ग़लत तरफ़ मुड़ने का ख़तरा।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 54.9-11
└ मंगल/गुरु
Sep 2000 – Aug 2001
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी
विद्वानों के रास्ते से धन, भूमि का लाभ, और निरोगता। सम्मान, जय और सुख।
JP 18.86
└ मंगल/शनि
Aug 2001 – Oct 2002
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी
बाहरी/ऊपरी सत्ता से भय। धन-अनाज का नाश। बन्धन जैसी स्थिति, बन्दिश, रोग — और अन्त में ज़मीन/जायदाद का नुकसान।
सेहत पर दबाव, और विरोधी, चोरी तथा ऊपर वालों से भय। धन का क्षय।
BPHS 54.26-27
└ मंगल/बुध
Oct 2002 – Oct 2003
बुध — 10वें भाव में, 9+12 का स्वामी
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख।खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
व्यापारी वर्ग से धन, घर, गाय और अनाज की सम्पदा। पर विरोध की बाधा और मन में क्लेश।
BPHS 54.36-38
└ मंगल/केतु
Oct 2003 – Feb 2004
केतु — 1ले भाव में
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
JP 18.89
└ मंगल/शुक्र
Feb 2004 – May 2005
शुक्र — 12वें भाव में, 8+1 का स्वामी
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्य
May 2005 – Sep 2005
सूर्य — 10वें भाव में, 11 का स्वामी
वाहन, कीर्ति और संतान का लाभ। धन-अनाज की समृद्धि, घर में कल्याण। कुशल और आरोग्य, बड़ा धैर्य, राजपूज्य, बड़ा सुख। कारोबार में फल की अधिकता, विदेश में बड़े से भेंट।
शरीर को कष्ट, मन में ताप, काम बिगड़ना, बड़ा भय। सिर का रोग, ज्वर, अतिसार।
BPHS 54.64-66
└ मंगल/चन्द्र
Sep 2005 – Apr 2006
चन्द्र — 12वें भाव में, 10 का स्वामी
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
JP 18.92
राहु महादशा
Apr 2006 – Apr 2024
राहु — 7वें भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: विवाह और जीवनसाथी
(राहु स्वयं 7वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहु
Apr 2006 – Dec 2008
राहु — 7वें भाव में
लगातार रोग और बड़ा कष्ट।
जीवनसाथी की सेहत, विवाद, सोच में उलझन और धन का क्षय। दूर की जगहों में भटकाव।
BPHS 55.7
└ राहु/गुरु
Dec 2008 – May 2011
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट।
जगह और पद मिलना, मन में धैर्य, शत्रु का नाश, बड़ा सुख। ऊपर वालों की प्रीति, और लोग बहुत प्रसन्न। दिन-ब-दिन बढ़ोतरी — जैसे शुक्ल पक्ष का चन्द्रमा। वाहन और बहुत धन, घर में गोधन। नैऋत्य और पश्चिम दिशा की यात्रा, बड़े से भेंट, काम सिद्ध, और अपने देश लौटना। ब्राह्मणों का उपकार, तीर्थयात्रा, वाहन और गाँव का लाभ, देव-ब्राह्मण पूजन। संतान का उत्सव, रोज़ मिष्ठान्न।
BPHS 55.17
└ राहु/शनि
May 2011 – Mar 2014
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।
हृदय का रोग, मान की हानि, विवाद, शत्रु से पीड़ा। दूसरे देश/जगह भटकना, गुल्म जैसा रोग। ख़राब भोजन, और अपनी जाति/समाज से दुख और भय।
BPHS 55.24
└ राहु/बुध
Mar 2014 – Oct 2016
बुध — 10वें भाव में, 9+12 का स्वामी
मन में उलझन और बहस। काम में अड़चन, धन का व्यय, अपनों से मतभेद।
बुध के महीने में बड़ा सुख, और अपने वार के दिन बड़े से भेंट। विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी। धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ।
BPHS 55.36-38
└ राहु/केतु
Oct 2016 – Oct 2017
केतु — 1ले भाव में
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें।
JP 18.100
└ राहु/शुक्र
Oct 2017 – Oct 2020
शुक्र — 12वें भाव में, 8+1 का स्वामी
पत्नी को कष्ट और घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि। प्रमेह/मूत्र और रक्त से जुड़ा रोग।
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें।
BPHS 55.53-58
└ राहु/सूर्य
Oct 2020 – Sep 2021
सूर्य — 10वें भाव में, 11 का स्वामी
पद और राजसम्मान। पिता की ओर से सुख, शत्रु का नाश। धन-अनाज, यश। तीर्थ और गंगा-स्नान का फल।
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश।
BPHS 55.60-66
└ राहु/चन्द्र
Sep 2021 – Mar 2023
चन्द्र — 12वें भाव में, 10 का स्वामी
माता को कष्ट, मन में दुख। धन की हानि, शरीर में शिथिलता।
भोग की सम्पदा हमेशा बनी रहती है, फ़सल-वृद्धि और धन का आगम। और अपनों से मेल।
BPHS 55.75
└ राहु/मंगल
Mar 2023 – Apr 2024
मंगल — 3रे भाव में, 7+2 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह।
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.76-82
गुरु महादशा
Apr 2024 – Apr 2040
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी · वक्री
★ इस पूरे दौर में खुला: paisa aur parivaar · भाई-बहन और पराक्रम · सन्तान, विद्या और बुद्धि · परिश्रम, विरोध और रोग · भाग्य, पिता और धर्म · आय और लाभ
(गुरु "paisa aur parivaar" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: मारक
└ गुरु/गुरु
Apr 2024 – May 2026
गुरु — 5वें भाव में, 3+6 का स्वामी
ऊपर वालों की प्रीति और उत्साह। सब काम और सब अर्थ सधते हैं। विद्या और विज्ञान की प्राप्ति।
JP 18.110
└ गुरु/शनि ← अभी
May 2026 – Dec 2028(अब तक Oct 2026)
शनि — 2रे भाव में, 4+5 का स्वामी
भूमि का लाभ, धन का लाभ, और संतान का लाभ — सुख देने वाला। गाय-भैंस आदि का लाभ, और श्रमिक/शूद्र वर्ग के माध्यम से धन।
धन-अनाज का नाश। ज्वर की पीड़ा, मन में रोग। पत्नी-संतान को कष्ट, या घाव जैसी तकलीफ़। घर में अशुभ कार्य, नौकर-चाकर को कष्ट, पशु की हानि, बन्धुओं से मनमुटाव।
BPHS 56.15-16
⚠️ ढैया
Jan 1988 – Jan 1991
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
May 1998 – Jun 2000
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती
Nov 2006 – Nov 2014
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Feb 2017 – Feb 2020
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris
गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।▾
🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग
BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।
राहु सोलह में से 13 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।
राहु13/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
केतु8/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Tulaकर्म और पहचान — Tulaपिछले कर्मों का जोड़ — Tula
बुध3/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Simhaकर्म और पहचान — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Meena
ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।
⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय
ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।
यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।
📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर
🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): October 2026🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): April 2027
Mercury (1st) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — February 2027 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।
पिछले ३ महीने
🟢 July 2026Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)
Jupiter → 10th
🟢 August 2026Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 10th · Mercury → 10th · Jupiter → 10th
🟢 September 2026Saturn / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)
Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.
🔒 त्रिकाल ने और भी देखा है
आपके नवांश में Rahu, Ketu वर्गोत्तम है — जन्म कुंडली और D9 दोनों में एक ही राशि। यह विशेष बल आपके लिए कब और कैसे काम करता है, वह पूरी रीडिंग में है।
आपकी कुंडली में दो भाव ऐसे हैं जिनका स्वामी एक ही ग्रह है — और उस एक ग्रह की स्थिति ही आपकी पूरी स्थिति की जड़ है। कौन से भाव, कौन सा ग्रह, और उसका क्या असर है — वह पूरी रीडिंग में है।
October 2026 आपका सबसे सहायक महीना है — लेकिन उससे पहले के महीनों में क्या सँभालना है, और उस महीने में ठीक क्या करना है, वह अंदर है।
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
📊 Complete Analysis
आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
💎 Gemstone + 4 Action Windows...
त्रिकाल ने और भी देखा है
आपकी Jupiter महादशा में Poori Kundali को लेकर त्रिकाल ने और भी देखा है... आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
This analysis is powered by Swiss Ephemeris — the same engine used by professional astrologers worldwide — combined with Brihat Parashara Hora Shastra, Bhrigu Nandi Nadi patterns, and Shadbala calculations. Payments secured by Razorpay.
15+ Years Vedic StudyParashara BPHSSwiss EphemerisRazorpay Secured