🔱 Mahakaal Ka Ashirwad

Vedic Astrology Analysis · Poori Kundali

Mohit Kumar singh की कुण्डली

चन्द्र महादशा · केतु अन्तर्दशा

चल रहा दौर: चन्द्र/केतु · Apr 2026 – Oct 2026

02 Feb 1990 · 03:30 · Jhinjhak

वृश्चिक लग्न · अश्विनी नक्षत्र · यह विवरण ग़लत हो तो रीडिंग दोबारा बनाएँ

⚡ Swiss Ephemeris📖 BPHS Classical🔮 Bhrigu Nandi⚖️ Shadbala
3 बातें जो आपके लिए सबसे ज़रूरी हैं
✅
नौकरी लगेगी, पदोन्नति या नया काम मिलेगा
Nov 2026 – Feb 2027 · Jul 2027 – Dec 2027
⚠️
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
Oct 2026 – Nov 2026 · Feb 2027 – Jun 2027
⭐
सबसे अच्छा समय: Oct 2026 – Nov 2026
सन्तान, विद्या और बुद्धि
🔱 ग्रन्थ से आपका सार

आपके 5 मुख्य भावों में से 0 सहारा देने वाले, 1 कठिन, और 2 मिला-जुला हैं।

कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
मज़बूत · 30
नौकरी लगेगी, पदोन्नति या नया काम मिलेगा
Nov 2026 – Feb 2027 · Jul 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 30 हैं।
गोचर: गुरु 10वें भाव में
· is ghar par bindu theek hain (30)
इस भाव के स्वामी (Surya) पर — kamzor — Surya SHATRU raashi mein
Jo bhi kaam karo wo bekaar chala jaata hai, samman toot-ta hai, aur swabhav mein kharabi aati hai. (Ph 20.19b)
ग्रन्थ के श्लोक(3)
भाई-बहन और सेवकों का सुख मिलता है; जातक पराक्रमी, गुणसम्पन्न, वाक्-पटु और सत्य में रत होता है। (BPHS 24.111) आरम्भ किये काम सिद्ध होते हैं। (JP 15.54)
⭐ AAPKE CHART SE3
भाई-बहन और सेवकों का सुख मिलता है; जातक पराक्रमी, गुणसम्पन्न, वाक्-पटु और सत्य में रत होता है।BPHS 24.111◆
आरम्भ किये काम सिद्ध होते हैं।JP 15.54◆
जातक सत्कर्म करने वाला होता है।JP 15.9◆
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
मिला-जुला · 32★
इस समय घर, ज़मीन या गाड़ी खरीद-बेच सकते हैं
Nov 2026 – Feb 2027 · Jul 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों?
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 32 हैं।
गोचर: गुरु 4थे भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu theek hain (32)
· ghar aur maa ka mukhya grah Chandra bhi mushkil ghar mein hai
ग्रन्थ के श्लोक(3)
पालकी जैसी सवारी मिलती है। (JP 12.100) घर दिव्य अर्थात् अत्यन्त उत्तम कहा गया है। (JP 12.149)
⭐ AAPKE CHART SE3
पालकी जैसी सवारी मिलती है।JP 12.100◆
घर दिव्य अर्थात् अत्यन्त उत्तम कहा गया है।JP 12.149
उसकी दशा के अन्त तक सम्पत्ति दूसरे के पास रहती है; पाप ग्रह के साथ हो तो दशा के अन्त में सब अपना भाग्य वापस मिल जाता है।JP 12.133
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 24
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
⭐ Oct 2026 – Nov 2026 · ⭐ Feb 2027 – Jun 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों?
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी गुरु 8वें (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 5वें भाव पर दृष्टि, शनि 5वें भाव में
· 5ve ghar ka malik Guru mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· santan aur padhai ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(3)
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 16.8) शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (BPHS Ch.16 सल.2) — अर्थात् सन्तान होने में बड़ी बाधा; इसके लिये उपाय अवश्य करें। (BPHS 16.2)
⭐ AAPKE CHART SE3
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 16.8◆
शास्त्र में यहाँ सन्तान पर कठिन योग कहा गया है (BPHS Ch.16 सल.2) — अर्थात् सन्तान होने में बड़ी बाधा; इसके लिये उपाय अवश्य करें।BPHS 16.2◆
सन्तान गोद ली हुई होती है।JP 13.38◆
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
कमज़ोर · 25
विवाह में देरी के संकेत — रिश्ता बनेगा पर मेहनत से
Oct 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Mar 2028
क्यों?
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 25 हैं।
गोचर: शनि 7वें भाव पर दृष्टि, गुरु 7वें भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu kam hain (25)
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra VAKRI hai
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
आय और लाभ11वाँ भाव
मिला-जुला · 35
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
Oct 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Mar 2028
क्यों?
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 35 हैं।
गोचर: शनि 11वें भाव पर दृष्टि, गुरु (11वें भाव का मुख्य ग्रह) वहीं बैठा है, गुरु 11वें भाव में
· is ghar par bindu theek hain (35)
· kamai aur laabh ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
मज़बूत · 34★
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· 6ve ghar mein Chandra baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu theek hain (34)
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal SWA/MITRA raashi mein
Virodhiyon par jeet apni himmat se, achhi sehat, udaarta, koi dabaa nahi sakta, aur badi samriddhi. (Ph 20.7)
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
कमज़ोर · 27
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· is ghar par bindu kam hain (27)
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal SWA/MITRA raashi mein
Duniya mein apni jagah banti hai, sukh se rehna, sharir mein bal, chehre par tej. Bhagya badhte chaand ki tarah badhta hai. (Ph 20.2)
भाग्य, पिता और धर्म9वाँ भाव
कमज़ोर · 23★
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों?
· 9ve ghar ka malik Chandra mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· bhagya aur pita ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
· 9ve ghar mein Ketu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
· is ghar par bindu bahut kam hain (23) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai

अब समय की बात — इस समय चन्द्र/केतु का दौर चल रहा है (Apr 2026 – Oct 2026), और इसमें 10वें, 4थे, 5वें भाव खुलता है।

जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।

आगे का दौर
1.5 साल आगे
चन्द्र / केतु← अभी
Oct 2026 – Oct 2026
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं। (BPHS 53.47-49)
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान। (JP 18.79)
केतु — 9वें भाव में · इस ग्रह पर ग्रन्थ चुप है
चन्द्र / शुक्र
Oct 2026 – Apr 2028
नया घर बनना। विवाह और मंगल कार्य, वाहन, आभूषण, अच्छे वस्त्र। पत्नी-संतान का सुख। कहीं गड़ा धन या अचानक बड़ा लाभ मिलना। नाच-गाने और उत्सव का सुख। (BPHS 53.53-59)
पत्नी को कष्ट, घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि। (BPHS 53.60-62)
शुक्र — 2रे भाव में, 7+12 का स्वामी · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
पूरी रीडिंग में:
· आगे के सारे दौर — पूरे चलते हुए दौर तक, एक नहीं
· कब — गोचर की सँकरी खिड़कियाँ, महीने के नाम से
· सूक्ष्म दशा — जो साल को महीनों में तोड़ती है
· साढ़ेसाती और ढैय्या के आगे के दौर
· राजयोग — BPHS अध्याय 39, और वह पूरा/आधा/चौथाई है या नहीं
· और उपाय — जहाँ ग्रन्थ देता है
पूरी रीडिंग लीजिए — ₹51
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।4 MD
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौरकालग्रह की जगहग्रन्थ क्या कहता हैस्रोत
केतु महादशाJan 1990 – Dec 1992केतु — 9वें भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: भाग्य, पिता और धर्म
(केतु स्वयं 9वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ केतु/केतुJan 1990 – Apr 1990केतु — 9वें भाव में
सुख और धन में कमी, और विरोध का भय।
JP 18.145
└ केतु/शुक्रApr 1990 – Sep 1990शुक्र — 2रे भाव में, 7+12 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में सेहत तथा झगड़ा, बन्धु-मित्रों का साथ कम, और पाचन की तरफ़ ध्यान।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.146
└ केतु/सूर्यSep 1990 – Nov 1990सूर्य — 3रे भाव में, 10 का स्वामी
मन टूटा-टूटा रहता है, शरीर पर दबाव, और विदेश जाने का योग तथा भय। कामों में विरोध।
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश।
JP 18.147
└ केतु/चन्द्रNov 1990 – Feb 1991चन्द्र — 6ठे भाव में, 9 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में आलस और ढील, धन-अनाज का नुक़सान, और मन पर बोझ।
माता का सुख, घर में शान्ति, विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, मन प्रसन्न।
JP 18.148
└ केतु/मंगलFeb 1991 – Apr 1991मंगल — 2रे भाव में, 6+1 का स्वामी
संतान, साथी और सहोदरों से खिंचाव; सेहत, विरोध और सत्ता की तरफ़ से दबाव।
ताप और ज़हर जैसा ज्वर। चोट का ख़तरा, भाइयों से मनमुटाव, धन की हानि।
JP 18.149
└ केतु/राहुApr 1991 – Sep 1991राहु — 3रे भाव में
ऊपर वालों और चोरी का भय, दुख, और कामों में रुकावट। बुरे लोगों से वास्ता।
बहुमूत्र (बार-बार पेशाब) और शरीर का दुबला होना, शीत-ज्वर, चौथिया बुख़ार, प्रमेह और शूल। मन में बेचैनी, धन का व्यय।
JP 18.150
└ केतु/गुरुSep 1991 – Feb 1992गुरु — 8वें भाव में, 2+5 का स्वामी
देव, विद्वान और बड़ों की प्रीति, ऊपर वालों का स्नेह और निरोगता। भूमि और संतान का लाभ।
JP 18.151
└ केतु/शनिFeb 1992 – Aug 1992शनि — 2रे भाव में, 3+4 का स्वामी
मन में भय और बोझ, अपने बन्धुओं से खिंचाव। और अपना देश या जगह छोड़नी पड़ सकती है।
धन की हानि, काम में रुकावट, शरीर में शिथिलता, अपनों से विरोध।
JP 18.152
└ केतु/बुधAug 1992 – Dec 1992बुध — 2रे भाव में, 8+11 का स्वामी
बन्धु-मित्रों का मेल, संतान-साथी और धन का आगम। विद्या और सुख।
JP 18.153
शुक्र महादशाDec 1992 – Dec 2012शुक्र — 2रे भाव में, 7+12 का स्वामी · वक्री
★ इस पूरे दौर में खुला: paisa aur parivaar · विवाह और जीवनसाथी · व्यय, दूर देश और एकान्त
(शुक्र स्वयं 2रे भाव में बैठा है)
अ.34: मारक
└ शुक्र/शुक्रDec 1992 – Apr 1996शुक्र — 2रे भाव में, 7+12 का स्वामी
शय्या, जीवनसाथी, धन और वस्त्र की प्राप्ति; धर्म और सुख की सम्पदा। विरोधियों का नाश और यश का लाभ।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.158
└ शुक्र/सूर्यApr 1996 – May 1997सूर्य — 3रे भाव में, 10 का स्वामी
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश और धन।
सिर, पेट और आँख की तरफ़ ध्यान; कृषि और गो-धन में नुक़सान। ऊपर वालों की नाराज़गी।
BPHS 60.12-18
└ शुक्र/चन्द्रMay 1997 – Dec 1998चन्द्र — 6ठे भाव में, 9 का स्वामी
सिर और गर्मी की तकलीफ़, और इच्छाओं से उपजा दबाव। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
माता का सुख और घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण, मन प्रसन्न।
JP 18.160
└ शुक्र/मंगलDec 1998 – Feb 2000मंगल — 2रे भाव में, 6+1 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ, भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत।
मन में उत्साह और धन का आगम। जीवनसाथी के पक्ष से लाभ। आँख और पित्त की तरफ़ ध्यान।
BPHS 60.30-35
└ शुक्र/राहुFeb 2000 – Mar 2003राहु — 3रे भाव में
नीली चीज़ों या उस तरह के काम से धन — पर बन्धुओं से खिंचाव और मित्रों से भय। अग्नि की सावधानी।
भुक्ति के शुरू के पाँच महीने भारी रहते हैं।
JP 18.162
└ शुक्र/गुरुMar 2003 – Oct 2005गुरु — 8वें भाव में, 2+5 का स्वामी
पद और सम्मान, विद्या और यश, विवाह और संतान लाभ, देव-ब्राह्मण पूजा, तीर्थ, दान-धर्म।
धन, वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति, धर्म का आचरण और सुख। जीवनसाथी-संतान के पक्ष में थोड़ी असमानता।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 60.45-51
└ शुक्र/शनिOct 2005 – Dec 2008शनि — 2रे भाव में, 3+4 का स्वामी
पद और सम्मान, नौकर-चाकर और पशु, धन-अनाज का लाभ, ज़मीन से लाभ।
सन्तान (बेटी) के जन्म की सम्भावना।
BPHS 60.52-59
└ शुक्र/बुधDec 2008 – Oct 2011बुध — 2रे भाव में, 8+11 का स्वामी
विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी, धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ।
संतान और मित्रों का सुख तथा अर्थ की प्राप्ति, ऊपर वालों की प्रीति और बड़ा सुख। शुभ और पूजनीय कार्य।
BPHS 60.60-66
└ शुक्र/केतुOct 2011 – Dec 2012केतु — 9वें भाव में
झगड़ा, बन्धुओं का साथ कम, विरोध से दबाव और मन में भय। धन में कटौती।
JP 18.166
सूर्य महादशाDec 2012 – Dec 2018सूर्य — 3रे भाव में, 10 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · भाई-बहन और पराक्रम · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: योगकारक
└ सूर्य/सूर्यDec 2012 – Apr 2013सूर्य — 3रे भाव में, 10 का स्वामी
ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — बढ़ने की जगह घटती है।
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
BPHS 52.2
└ सूर्य/चन्द्रApr 2013 – Oct 2013चन्द्र — 6ठे भाव में, 9 का स्वामी
पानी से डर या ख़तरा। बंधन जैसी स्थिति, रोग, अपनी जगह से हटना। मन बेचैन, दायाद/रिश्तेदारों से विरोध। खाना ख़राब मिलना, चोर और सत्ता से पीड़ा।
बेवक़्त खाना, और एक जगह से दूसरी जगह भटकना।
BPHS 52.8-10
└ सूर्य/मंगलOct 2013 – Feb 2014मंगल — 2रे भाव में, 6+1 का स्वामी
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
मन में क्रूरता आती है। बन्दी जैसी हालत या क़ानूनी उलझन। भाई-बन्धुओं का नुकसान, उनसे विरोध, और काम बिगड़ना।
BPHS 52.21-22
└ सूर्य/राहुFeb 2014 – Jan 2015राहु — 3रे भाव में
राजसम्मान। भाग्य की बढ़ोतरी, यश, पत्नी-संतान की वृद्धि, संतान का उत्सव, घर में कल्याण।
बंधन, जगह का नुकसान, क़ानूनी उलझन। चोर का डर, घाव। पत्नी-संतान का कष्ट, चौपायों का नुकसान, घर-ज़मीन की हानि। पेट के रोग और अतिसार।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.25-27
└ सूर्य/गुरुJan 2015 – Nov 2015गुरु — 8वें भाव में, 2+5 का स्वामी
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
JP 18.65
└ सूर्य/शनिNov 2015 – Oct 2016शनि — 2रे भाव में, 3+4 का स्वामी
वात का शूल, बड़ा रोग, ज्वर और अतिसार। बंधन, काम का बिगड़ना, धन का नाश, बड़ा भय। अचानक झगड़ा, दायाद/रिश्तेदारों से विरोध।
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
BPHS 52.43-44
└ सूर्य/बुधOct 2016 – Aug 2017बुध — 2रे भाव में, 8+11 का स्वामी
शरीर को कष्ट, मन में ताप, पत्नी-संतान को कष्ट।
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
BPHS 52.54-56
└ सूर्य/केतुAug 2017 – Dec 2017केतु — 9वें भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्रDec 2017 – Dec 2018शुक्र — 2रे भाव में, 7+12 का स्वामी
शरीर में जड़ता और रोग का भय।
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.71
चन्द्र महादशाDec 2018 – Dec 2028चन्द्र — 6ठे भाव में, 9 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · परिश्रम, विरोध और रोग · भाग्य, पिता और धर्म
(चन्द्र "घर, भूमि और माता" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: योगकारक
└ चन्द्र/चन्द्रDec 2018 – Oct 2019चन्द्र — 6ठे भाव में, 9 का स्वामी
विद्या, संगीत और कला में मन लगता है। अच्छे वस्त्र, अच्छी संगति और शरीर का सुख। और बड़े लोगों तथा अधिकारियों से आदर मिलता है।
JP 18.73
└ चन्द्र/मंगलOct 2019 – May 2020मंगल — 2रे भाव में, 6+1 का स्वामी
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
JP 18.74
└ चन्द्र/राहुMay 2020 – Nov 2021राहु — 3रे भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
पुण्य-तीर्थ का फल, देवता का दर्शन। दूसरों का उपकार और पुण्य कर्म का संग्रह।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरुNov 2021 – Apr 2023गुरु — 8वें भाव में, 2+5 का स्वामी
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा। और मेहनत से काम बनता है।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.76
└ चन्द्र/शनिApr 2023 – Oct 2024शनि — 2रे भाव में, 3+4 का स्वामी
शस्त्र से चोट का ख़तरा। धन की हानि, काम में रुकावट, अपनों से विरोध, शरीर में रोग।
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
BPHS 53.36-37
└ चन्द्र/बुधOct 2024 – Apr 2026बुध — 2रे भाव में, 8+11 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतु ← अभीApr 2026 – Oct 2026केतु — 9वें भाव में
शुरू में थोड़ा सुख, बीच में उलझन, अन्त में फिर सम्भलना। छोटा-मोटा लाभ, पर कुछ बड़ा नहीं।
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
BPHS 53.47-49
⚠️ साढ़े सातीJun 1995 – May 2003पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)शनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाSep 2004 – Aug 2007चन्द्र से 4थाशनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ ढैयाNov 2014 – Nov 2017चन्द्र से 8वाँशनि का बड़ा चक्कर—
⚠️ साढ़े साती ← अभी चल रही हैApr 2025 – Jun 2032पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)शनि का बड़ा चक्कर—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
तीन तारीखें भेजिए
जन्म कुण्डली + ९ ग्रहउत्तर भारतीय चक्र, लाहिरी अयनांश, षड्बल। खोलने के लिए टैप करें।

🪐 जन्म कुंडली — उत्तर भारतीय चक्र

12Mesh1VrshL2Mithमंगबुधशुकशनि11Meen3Karkसूरराह10Kumb9Makrकेत8Dhanगुर4Simh5Kany6Tulaचंद7VrscVrishchika Lagna

Lahiri Ayanamsha · Swiss Ephemeris · BPHS classical

⚡ ग्रह विश्लेषण — सभी ९ ग्रह

GrahaRashiHouseNakshatraDignityStrength
☉सूर्यMakara3rdShravanaNeutral Sign◐ Moderate
☽चंद्रMesha6thAshwiniEnemy Sign● Strong
♂मंगलDhanu2ndMulaNeutral Sign● Strong
☿बुधDhanu2ndPurva AshadhaEnemy Sign● Strong
♃गुरु® VakriMithuna8thArdraEnemy Sign● Strong
♀शुक्र® VakriDhanu2ndUttara AshadhaEnemy Sign● Strong
♄शनिDhanu2ndPurva AshadhaEnemy Sign●● Very Strong
☊राहु® VakriMakara3rdShravanaNeutral Sign—
☋केतुKarka9thAshleshaNeutral Sign—

⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris

गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।

🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग

BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।

राहु सोलह में से 2 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।

राहु2/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Karkaकर्म और पहचान — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishchika
चंद्र1/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Mithunaकर्म और पहचान — Mithunaपिछले कर्मों का जोड़ — Karka
मंगल1/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Mithunaकर्म और पहचान — Kumbhaपिछले कर्मों का जोड़ — Vrishabha
सारे सोलह वर्ग, सारे ग्रहों के लिए → ₹51

ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।

⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय

ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।

विंशोत्तरीचंद्र / केतु

१२० साल का चक्र, जन्म नक्षत्र से

योगिनीBhramari (मंगल)

३६ साल का चक्र — BPHS अध्याय १९५-१९९

चरVrishabha (शुक्र)

राशि पर चलती है, ग्रह पर नहीं — जैमिनि

हर पद्धति कब तक चलती है — तीनों की तारीख़ें → ₹51

ये तीनों अलग ग्रंथों से आती हैं और अलग गणित से चलती हैं — इसीलिए अलग जवाब देना इनका दोष नहीं, इनका स्वभाव है। कोई एक पद्धति अकेली सच नहीं होती।

📅 आपका वर्ष — वर्षफल

हर साल सूर्य ठीक उस जगह लौटता है जहाँ वह आपके जन्म के समय था। उस क्षण से आपका नया वर्ष शुरू होता है — जन्मदिन से नहीं, उस खगोलीय लौटने से।

यह वर्ष शुरू हुआ: 2 फ़र॰ 2026, 09:09

अगला वर्ष शुरू होगा: 2 फ़र॰ 2027, 15:16

भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा

मुन्था इस साल यहाँ है। शास्त्र कहता है साल का विषय इसी हिस्से के आस-पास घूमता है।

वर्ष के आरंभ का लग्न और उसका स्वामी → ₹51

यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।

📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर

🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): January 2027🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): October 2026

Mars (10th), Jupiter (10th), Rahu (4th), Ketu (10th) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — March 2027 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।

पिछले ३ महीने

🔴 July 2026Ketu / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)

Mars → 7th · Venus → 10th · Rahu → 4th · Ketu → 10th

🔴 August 2026Ketu / Jupiter (अंतर / प्रत्यंतर)

Rahu → 4th · Ketu → 10th

🔴 September 2026Ketu / Saturn (अंतर / प्रत्यंतर)

Sun → 10th · Rahu → 4th · Ketu → 10th

अभी

🔴 October 2026Ketu / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)

Rahu → 4th · Ketu → 10th

…और आगे के ६ महीने? → ₹51

Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.

🔒 त्रिकाल ने और भी देखा है

आपके नवांश में Venus वर्गोत्तम है — जन्म कुंडली और D9 दोनों में एक ही राशि। यह विशेष बल आपके लिए कब और कैसे काम करता है, वह पूरी रीडिंग में है।

January 2027 आपका सबसे सहायक महीना है — लेकिन उससे पहले के महीनों में क्या सँभालना है, और उस महीने में ठीक क्या करना है, वह अंदर है।

🔓 पूरा सच — ₹५१
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।

📊 Complete Analysis

आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।

💎 Gemstone + 4 Action Windows...

त्रिकाल ने और भी देखा है

आपकी Moon महादशा में Poori Kundali को लेकर त्रिकाल ने और भी देखा है... आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।

✓ नवांश (D9) — हर ग्रह का आंतरिक बल

✓ अगले ६ महीने का गोचर, महीने-दर-महीने

✓ हर ग्रह का षड्बल स्कोर

✓ सभी भाव + दशा सक्रियता श्रृंखला

✓ राजयोग — BPHS अध्याय ३९

✓ उपाय — सिर्फ़ वहाँ जहाँ ग्रंथ देता है

✓ सोलह वर्ग, नौ ग्रह, D9 और D10 के चार्ट

✓ चारों उपाय स्तर — व्यावहारिक से सेवा तक

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रोहित गुप्ता · Chief Vedic Architect · 16+ साल पराशर BPHS
Rohiit Gupta — Chief Vedic Architect

Rohiit Gupta

Chief Vedic Architect · Trikaal Vaani

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