घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Nov 2026 · Jan 2027 – Jun 2027
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सबसे पास का शुभ समय: Nov 2026 – Jan 2027
सन्तान, विद्या और बुद्धि
🔱 ग्रन्थ से आपका सार
आपके 5 मुख्य भावों में से 0 सहारा देने वाले, 1 कठिन, और 2 मिला-जुला हैं।
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
कमज़ोर · 24★
घर-ज़मीन का सौदा हो सकता है, पर रुकावट के साथ — जल्दबाज़ी नहीं
Oct 2026 – Nov 2026 · Jan 2027 – Jun 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी मंगल 1ले (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 4थे भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Mangal) पर — mazboot — Mangal SWA/MITRA raashi mein; Mangal achhe ghar mein (1ve)
Rishton se madad, kheti mein safalta, gaadi, khet aur GHAR ka sukh, naya dhan, aur achhi jagah. (Ph 20.5)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
वस्त्र जीर्ण-शीर्ण मिलते हैं। (JP 12.89) घर के सुख में कष्ट रहता है। (JP 12.139)
⭐ AAPKE CHART SE3
वस्त्र जीर्ण-शीर्ण मिलते हैं।JP 12.89◆
घर के सुख में कष्ट रहता है।JP 12.139◆
वही चारों दुःख देते हैं; कारक, भावेश और भाव में बैठा ग्रह बलहीन हों तो अत्यन्त क्लेश।JP 12.112◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 24
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
⭐ Nov 2026 – Jan 2027 · ⭐ Oct 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)।
गोचर: गुरु 5वें भाव पर दृष्टि, शनि 5वें भाव पर दृष्टि
· 5ve ghar mein Shani baitha hai — dabaav banata hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 16.8) दो विवाह का योग कहा गया है। (Bhrigu 7.24)
⭐ AAPKE CHART SE3
सन्तान कष्ट से प्राप्त होती है — ऐसा कहा गया है।BPHS 16.8◆
दो विवाह का योग कहा गया है।Bhrigu 7.24◆
सन्तान का क्षय देव-शाप से कहा गया है।JP 13.32◆
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
कमज़ोर · 21
विवाह में देरी के संकेत — रिश्ता बनेगा पर मेहनत से
Nov 2026 – Jan 2027 · Jun 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 21 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी शनि 5वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 7वें भाव पर दृष्टि
· 7ve ghar mein Rahu baitha hai — wo jodne ke bajaye ALAG karta hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (21) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Shani) पर — mazboot — Shani VAKRI hai; Shani achhe ghar mein (5ve)
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
एक से अधिक विवाह या एक से अधिक सम्बन्ध बनने का योग बनता है। (BPHS 18.5) पति अत्यन्त कठोर स्वभाव का, अथवा बहुत काम करने वाला होता है। (BPHS 80.24)
⭐ AAPKE CHART SE3
एक से अधिक विवाह या एक से अधिक सम्बन्ध बनने का योग बनता है।BPHS 18.5◆
पति अत्यन्त कठोर स्वभाव का, अथवा बहुत काम करने वाला होता है।BPHS 80.24◆
दाम्पत्य का फल मध्यम रहता है; ऐसा न हो तो सब शुभ रहता है।JP 14.2
कर्म, पद और प्रतिष्ठा10वाँ भाव
मिला-जुला · 36
नौकरी लगेगी, पदोन्नति या नया काम मिलेगा
Oct 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Feb 2028
क्यों? ▾
आपका 10वाँ भाव — कर्म, पद और प्रतिष्ठा — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 36 हैं। इस भाव का स्वामी शुक्र 1ले (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 10वें भाव पर दृष्टि, गुरु 10वें भाव पर दृष्टि
· is ghar par bindu theek hain (36)
· kaam aur pehchaan ka mukhya grah Surya bhi mushkil ghar mein hai
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — kamzor — Shukra SHATRU raashi mein
Jo bhi kaam karo wo bekaar chala jaata hai, samman toot-ta hai, aur swabhav mein kharabi aati hai. (Ph 20.19b)
आय और लाभ11वाँ भाव
मज़बूत · 41
आमदनी बढ़ेगी, बड़ा लाभ आएगा
Jun 2027 – Oct 2027 · Feb 2028 – May 2028
क्यों? ▾
आपका 11वाँ भाव — आय और लाभ — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 41 हैं। इस भाव का स्वामी बुध 1ले (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 11वें भाव पर दृष्टि
· 11ve ghar mein Guru baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu bahut hain (41) — granth 40 se upar ko bahut achha kehta hai
इस भाव के स्वामी (Budh) पर — mazboot — Budh SWA/MITRA raashi mein; Budh achhe ghar mein (1ve)
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।4 MD▾
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौर
काल
ग्रह की जगह
ग्रन्थ क्या कहता है
स्रोत
केतु महादशा
Aug 1989 – Dec 1994
केतु — 1ले भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव
(केतु स्वयं 1ले भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ केतु/केतु
Aug 1989 – Nov 1989
केतु — 1ले भाव में
सुख और धन में कमी, और विरोध का भय।
थोड़ा सुख, धन का आना, तीर्थ और पुण्य कर्म — पर फल छोटा ही।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.145
└ केतु/शुक्र
Nov 1989 – Oct 1990
शुक्र — 1ले भाव में, 10+3 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में सेहत तथा झगड़ा, बन्धु-मित्रों का साथ कम, और पाचन की तरफ़ ध्यान।
विवाह और मंगल कार्य। वाहन, वस्त्र, आभूषण। पत्नी-संतान का सुख, घर में लक्ष्मी, संगीत और उत्सव।
JP 18.146
└ केतु/सूर्य
Oct 1990 – Jan 1991
सूर्य — 12वें भाव में, 1 का स्वामी
मन टूटा-टूटा रहता है, शरीर पर दबाव, और विदेश जाने का योग तथा भय। कामों में विरोध।
JP 18.147
└ केतु/चन्द्र
Jan 1991 – Jul 1991
चन्द्र — 1ले भाव में, 12 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में आलस और ढील, धन-अनाज का नुक़सान, और मन पर बोझ।
माता का सुख, घर में शान्ति, विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, मन प्रसन्न।
JP 18.148
└ केतु/मंगल
Jul 1991 – Oct 1991
मंगल — 1ले भाव में, 9+4 का स्वामी
संतान, साथी और सहोदरों से खिंचाव; सेहत, विरोध और सत्ता की तरफ़ से दबाव।
ताप और ज़हर जैसा ज्वर। चोट का ख़तरा, भाइयों से मनमुटाव, धन की हानि।
JP 18.149
└ केतु/राहु
Oct 1991 – Aug 1992
राहु — 7वें भाव में
ऊपर वालों और चोरी का भय, दुख, और कामों में रुकावट। बुरे लोगों से वास्ता।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.150
└ केतु/गुरु
Aug 1992 – May 1993
गुरु — 11वें भाव में, 5+8 का स्वामी
देव, विद्वान और बड़ों की प्रीति, ऊपर वालों का स्नेह और निरोगता। भूमि और संतान का लाभ।
JP 18.151
└ केतु/शनि
May 1993 – Mar 1994
शनि — 5वें भाव में, 6+7 का स्वामी
मन में भय और बोझ, अपने बन्धुओं से खिंचाव। और अपना देश या जगह छोड़नी पड़ सकती है।
JP 18.152
└ केतु/बुध
Mar 1994 – Dec 1994
बुध — 1ले भाव में, 11+2 का स्वामी
बन्धु-मित्रों का मेल, संतान-साथी और धन का आगम। विद्या और सुख।
विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी, धन-अनाज, मित्रों का साथ।
JP 18.153
शुक्र महादशा
Dec 1994 – Dec 2014
शुक्र — 1ले भाव में, 10+3 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · भाई-बहन और पराक्रम · विवाह और जीवनसाथी · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(शुक्र स्वयं 1ले भाव में बैठा है)
अ.34: पाप
└ शुक्र/शुक्र
Dec 1994 – Apr 1998
शुक्र — 1ले भाव में, 10+3 का स्वामी
शय्या, जीवनसाथी, धन और वस्त्र की प्राप्ति; धर्म और सुख की सम्पदा। विरोधियों का नाश और यश का लाभ।
JP 18.158
└ शुक्र/सूर्य
Apr 1998 – Apr 1999
सूर्य — 12वें भाव में, 1 का स्वामी
सिर, पेट और आँख की तरफ़ ध्यान; कृषि और गो-धन में नुक़सान। ऊपर वालों की नाराज़गी।
JP 18.159
└ शुक्र/चन्द्र
Apr 1999 – Dec 2000
चन्द्र — 1ले भाव में, 12 का स्वामी
सिर और गर्मी की तकलीफ़, और इच्छाओं से उपजा दबाव। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
माता का सुख और घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण, मन प्रसन्न।
JP 18.160
└ शुक्र/मंगल
Dec 2000 – Feb 2002
मंगल — 1ले भाव में, 9+4 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ, भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत।
मन में उत्साह और धन का आगम। जीवनसाथी के पक्ष से लाभ। आँख और पित्त की तरफ़ ध्यान।
BPHS 60.30-35
└ शुक्र/राहु
Feb 2002 – Feb 2005
राहु — 7वें भाव में
नीली चीज़ों या उस तरह के काम से धन — पर बन्धुओं से खिंचाव और मित्रों से भय। अग्नि की सावधानी।
भुक्ति के शुरू के पाँच महीने भारी रहते हैं।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.162
└ शुक्र/गुरु
Feb 2005 – Oct 2007
गुरु — 11वें भाव में, 5+8 का स्वामी
धन, वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति, धर्म का आचरण और सुख। जीवनसाथी-संतान के पक्ष में थोड़ी असमानता।
JP 18.163
└ शुक्र/शनि
Oct 2007 – Dec 2010
शनि — 5वें भाव में, 6+7 का स्वामी
पद और सम्मान, नौकर-चाकर और पशु, धन-अनाज का लाभ, ज़मीन से लाभ।
सन्तान (बेटी) के जन्म की सम्भावना।
BPHS 60.52-59
└ शुक्र/बुध
Dec 2010 – Oct 2013
बुध — 1ले भाव में, 11+2 का स्वामी
विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी, धन-अनाज, वस्त्र, मित्रों का साथ।
संतान और मित्रों का सुख तथा अर्थ की प्राप्ति, ऊपर वालों की प्रीति और बड़ा सुख। शुभ और पूजनीय कार्य।
BPHS 60.60-66
└ शुक्र/केतु
Oct 2013 – Dec 2014
केतु — 1ले भाव में
झगड़ा, बन्धुओं का साथ कम, विरोध से दबाव और मन में भय। धन में कटौती।
JP 18.166
सूर्य महादशा
Dec 2014 – Dec 2020
सूर्य — 12वें भाव में, 1 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · कर्म, पद और प्रतिष्ठा · व्यय, दूर देश और एकान्त
(सूर्य 1ले भाव का स्वामी है)
अ.34: शुभ
└ सूर्य/सूर्य
Dec 2014 – Mar 2015
सूर्य — 12वें भाव में, 1 का स्वामी
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
JP 18.61
└ सूर्य/चन्द्र
Mar 2015 – Sep 2015
चन्द्र — 1ले भाव में, 12 का स्वामी
विवाह और शुभ कार्य होते हैं। धन-अनाज की समृद्धि, घर और ज़मीन की बढ़ोतरी, पशु और वाहन। पत्नी और संतान का सुख। बड़े लोगों से मेल, और उनकी कृपा से मनचाहा काम बनता है।
पत्नी-संतान को कष्ट। लोगों से मनमुटाव और बहस। नौकर-चाकर का साथ छूटना। विरोध, ऊपर वालों से झगड़ा, धन-अनाज-पशु की हानि।
BPHS 52.4-6
└ सूर्य/मंगल
Sep 2015 – Jan 2016
मंगल — 1ले भाव में, 9+4 का स्वामी
शुभ कार्य होते हैं। ज़मीन का लाभ, खेती से लाभ, धन-अनाज की बढ़ोतरी, घर-ज़मीन मिलना, लाल वस्त्र। लग्नेश के साथ हो तो सुख और ऊपर वालों की प्रीति। भाग्येश/लाभेश के साथ हो तो लाभ, बड़ा पद, शत्रु का नाश, मन की दृढ़ता, भाई-बन्धुओं का सुख।
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
BPHS 52.15-18
└ सूर्य/राहु
Jan 2016 – Dec 2016
राहु — 7वें भाव में
शुरू के दो महीने — धन की हानि और बड़ा भय, चोर का डर, घाव, पत्नी-संतान को कष्ट। उसके बाद सुख मिलता है। शुभ ग्रह के साथ/दृष्टि में हो तो शरीर स्वस्थ, मन संतुष्ट, और ऊपर वालों से प्रीति।
बंधन, जगह का नुकसान, क़ानूनी उलझन। चोर का डर, घाव। पत्नी-संतान का कष्ट, चौपायों का नुकसान, घर-ज़मीन की हानि। पेट के रोग और अतिसार।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.23-25
└ सूर्य/गुरु
Dec 2016 – Oct 2017
गुरु — 11वें भाव में, 5+8 का स्वामी
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
JP 18.65
└ सूर्य/शनि
Oct 2017 – Sep 2018
शनि — 5वें भाव में, 6+7 का स्वामी
शत्रु का नाश, बड़ा सुख — पर धन-अनाज का लाभ थोड़ा ही (ग्रंथ ख़ुद "स्वल्प" कहता है)। घर में विवाह जैसा शुभ कार्य। घर में कल्याण और सम्पत्ति, राजसम्मान और कीर्ति, अनेक वस्त्र और धन।
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.40-42
└ सूर्य/बुध
Sep 2018 – Aug 2019
बुध — 1ले भाव में, 11+2 का स्वामी
शरीर में जड़ता और ज्वर।
पद मिलना और बड़ा उत्साह। पत्नी-संतान का सुख। बड़े की कृपा से वाहन, वस्त्र, आभूषण। पुण्य-तीर्थ का फल, घर में गोधन। भाग्येश/लाभेश के साथ हो तो लाभ की वृद्धि। भाग्य/पंचम/कर्म भाव में हो तो सम्मान निश्चित — अच्छे कर्म और धर्म की बुद्धि, गुरु-देव-द्विज का आदर, धन-अनाज, विवाह और संतान का जन्म। यज्ञ-कर्म, दान-धर्म, जप। अपने नाम से रचना/पहचान।
BPHS 52.56-57
└ सूर्य/केतु
Aug 2019 – Dec 2019
केतु — 1ले भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
गाल और दाँत का रोग, पेशाब की तकलीफ़। अपनी जगह से हटना, धन और मित्र की हानि। विदेश/दूर जाना, शत्रु से पीड़ा, बड़ा भय।
(2 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्र
Dec 2019 – Dec 2020
शुक्र — 1ले भाव में, 10+3 का स्वामी
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
मनचाही स्त्री/जीवनसाथी का सुख और सम्पदा। दूसरे गाँव/शहर की यात्रा, विद्वानों और बड़े लोगों से भेंट। पद का लाभ और बड़ा उत्साह — छत्र-चामर जैसा वैभव। घर में कल्याण और सम्पत्ति, रोज़ मिष्ठान्न। मूँगा जैसे रत्न, मोती और अच्छे वस्त्र का लाभ। चौपायों का लाभ, बहुत अनाज और धन। उत्साह, कीर्ति, और नर-वाहन (पालकी/सवारी) की सम्पदा।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशा
Dec 2020 – Dec 2030
चन्द्र — 1ले भाव में, 12 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · घर, भूमि और माता · व्यय, दूर देश और एकान्त
(चन्द्र स्वयं 1ले भाव में बैठा है)
अ.34: सम
└ चन्द्र/चन्द्र
Dec 2020 – Oct 2021
चन्द्र — 1ले भाव में, 12 का स्वामी
हाथी-घोड़े-वस्त्र मिलते हैं। देवता और गुरु में भक्ति, पुण्य का कीर्तन। पद मिलना, बड़ा सुख, यश की बढ़ोतरी। पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा बल — बड़ा पद और बड़ा सुख।
बेवक़्त धन का नाश, या अपनी जगह से हटना। शरीर में आलस, मन में ताप, ऊपर वालों और सलाहकारों से विरोध। माता को कष्ट, मन में दुख, बन्धन जैसी स्थिति, बन्धुओं का नुकसान।
BPHS 53.1-3
└ चन्द्र/मंगल
Oct 2021 – May 2022
मंगल — 1ले भाव में, 9+4 का स्वामी
सौभाग्य, राजसम्मान, वस्त्र और आभूषण। मेहनत से काम बनता है — इसमें कोई संदेह नहीं। घर-ज़मीन की बढ़ोतरी, व्यापार में लाभ, काम का लाभ और बड़ा सुख।
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
BPHS 53.7-9
└ चन्द्र/राहु
May 2022 – Nov 2023
राहु — 7वें भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
पुण्य-तीर्थ का फल, देवता का दर्शन। दूसरों का उपकार और पुण्य कर्म का संग्रह।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरु
Nov 2023 – Mar 2025
गुरु — 11वें भाव में, 5+8 का स्वामी
वाहन और कई तरह के साधनों की प्राप्ति, वस्त्र-आभूषण की सम्पदा।और मेहनत से काम बनता है।
JP 18.76
└ चन्द्र/शनि
Mar 2025 – Oct 2026
शनि — 5वें भाव में, 6+7 का स्वामी
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.77
└ चन्द्र/बुध ← अभी
Oct 2026 – Mar 2028(अब तक Oct 2026)
बुध — 1ले भाव में, 11+2 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.39-44
⚠️ ढैया
Jun 1995 – May 1998
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती
Sep 2004 – Sep 2012
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Dec 2014 – Nov 2017
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया ← अभी चल रही है
Apr 2025 – Mar 2028
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris
गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।▾
🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग
BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।
चंद्र सोलह में से 5 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।
चंद्र5/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Kanyaपिछले कर्मों का जोड़ — Kumbha
बुध5/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Simhaपिछले कर्मों का जोड़ — Makara
केतु5/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Simhaपिछले कर्मों का जोड़ — Makara
ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।
⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय
ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।
यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।
📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर
🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): January 2027🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): October 2026
Mars (1st), Jupiter (1st), Rahu (7th), Ketu (1st) अभी आपके मुख्य भावों में हैं — March 2027 से यह स्थिति बदल जाती है, इसीलिए उससे पहले के महीने तुलना में भारी दिखते हैं।
पिछले ३ महीने
🔴 July 2026Saturn / Rahu (अंतर / प्रत्यंतर)
Mars → 10th · Venus → 1st · Rahu → 7th · Ketu → 1st
🟡 August 2026Saturn / Jupiter (अंतर / प्रत्यंतर)
Venus → 2nd · Rahu → 7th · Ketu → 1st
🔴 September 2026Saturn / Jupiter (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 1st · Mercury → 2nd · Rahu → 7th · Ketu → 1st
अभी
🔴 October 2026Mercury / Mercury (अंतर / प्रत्यंतर)
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
📊 Complete Analysis
आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
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त्रिकाल ने और भी देखा है
आपकी Moon महादशा में Poori Kundali को लेकर त्रिकाल ने और भी देखा है... आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
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