आपके 5 मुख्य भावों में से 1 सहारा देने वाले, 1 कठिन, और 1 मिला-जुला हैं।
विवाह और जीवनसाथी7वाँ भाव
मज़बूत · 30
विवाह या रिश्ता पक्का होगा
Feb 2027 – Jul 2027
हमारा फ़ैसला:हाँ
क्यों? ▾
आपका 7वाँ भाव — विवाह और जीवनसाथी — मज़बूत है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 30 हैं। इस भाव का स्वामी चन्द्र 4थे (शुभ) भाव में है।
गोचर: गुरु 7वें भाव में
· is ghar par bindu theek hain (30)
इस भाव के स्वामी (Chandra) पर — mazboot — Chandra achhe ghar mein (4ve)
Vastra, gehne, sukh ka bistar, jeevansaathi ka saath, mangal-utsav, aur ghoomne-firne ka sukh. (Ph 20.8)
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
विष-योग पूरी तरह नष्ट हो जाता है — इसमें सन्देह नहीं। (BPHS 80.46) पति कवि और भूमि का स्वामी कहा गया है। (JP 16.53)
⭐ AAPKE CHART SE3
विष-योग पूरी तरह नष्ट हो जाता है — इसमें सन्देह नहीं।BPHS 80.46
पति कवि और भूमि का स्वामी कहा गया है।JP 16.53◆
पति सुन्दर और अत्यन्त सौभाग्यशाली कहा गया है।BJ 24.11◆
घर, भूमि और माता4वाँ भाव
मिला-जुला · 30
इस समय घर, ज़मीन या गाड़ी खरीद-बेच सकते हैं
⭐ Jul 2027 – Nov 2027 · ⭐ Mar 2028 – Jun 2028
हमारा फ़ैसला:हो सकता है
क्यों? ▾
आपका 4था भाव — घर, भूमि और माता — मिला-जुला है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 30 हैं। इस भाव का स्वामी मंगल 6ठे (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 4थे भाव पर दृष्टि, शनि 4थे भाव में
· 4ve ghar mein Chandra baitha hai — sahara deta hai
· is ghar par bindu theek hain (30)
· 4ve ghar ka malik Mangal mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
घर ज्ञाति-बन्धुओं से मिलता है। (JP 12.141) वाहन का सुख नहीं मिलता; बलवान हो तो वाहन की सिद्धि होती है। (Bhrigu 2.23)
⭐ AAPKE CHART SE3
घर ज्ञाति-बन्धुओं से मिलता है।JP 12.141◆
वाहन का सुख नहीं मिलता; बलवान हो तो वाहन की सिद्धि होती है।Bhrigu 2.23◆
घर दिव्य अर्थात् अत्यन्त उत्तम कहा गया है।JP 12.149
व्यय, दूर देश और एकान्त12वाँ भाव
कमज़ोर · 24
खर्च भारी — विदेश और बड़े खर्च सँभाल कर
⭐ Nov 2026 – Feb 2027 · ⭐ Nov 2027 – Dec 2027
हमारा फ़ैसला:नहीं
क्यों? ▾
आपका 12वाँ भाव — व्यय, दूर देश और एकान्त — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 24 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)। इस भाव का स्वामी गुरु 12वें (कठिन) भाव में चला गया है।
गोचर: गुरु 12वें भाव पर दृष्टि, शनि 12वें भाव पर दृष्टि
· 12ve ghar ka malik Guru apni mazboot jagah par hai
· 12ve ghar ka malik apne hi ghar mein hai
· 12ve ghar mein Guru baitha hai — sahara deta hai
· 12ve ghar ka malik Guru mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· kharch aur videsh ka mukhya grah Shani bhi mushkil ghar mein hai
· 12ve ghar mein Shani baitha hai — dabaav banata hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
ग्रन्थ के श्लोक(3)▾
जीवनसाथी का सुख नहीं मिलता। (BPHS 23.5) जातक एक देश से दूसरे देश जाता है — ऐसा कहा गया है। (BPHS 23.11)
⭐ AAPKE CHART SE3
जीवनसाथी का सुख नहीं मिलता।BPHS 23.5◆
जातक एक देश से दूसरे देश जाता है — ऐसा कहा गया है।BPHS 23.11◆
हानि शत्रु के कारण होती है; व्यय भाव मित्र की राशि में हो तो मित्रों के कारण।JP 15.76◆
सन्तान, विद्या और बुद्धि5वाँ भाव
कमज़ोर · 23
सन्तान/पढ़ाई में देरी के संकेत — यही समय है जब बात बन सकती है
Nov 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Mar 2028
क्यों? ▾
आपका 5वाँ भाव — सन्तान, विद्या और बुद्धि — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 23 हैं (ग्रन्थ 25 से नीचे को कमज़ोर कहता है)।
गोचर: शनि 5वें भाव पर दृष्टि, गुरु 5वें भाव पर दृष्टि
· santan aur padhai ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (23) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
इस भाव के स्वामी (Shukra) पर — mazboot — Shukra achhe ghar mein (11ve)
Santan ka sukh, rishton mein khushi, bade logon ke saath kaam, samman, achha bhojan aur daan-dharm. (Ph 20.6)
भाग्य, पिता और धर्म9वाँ भाव
कमज़ोर · 31
भाग्य का सहारा कम — अपने दम पर इस समय बढ़ें
Nov 2026 – Jun 2027 · ⭐ Dec 2027 – Mar 2028
क्यों? ▾
आपका 9वाँ भाव — भाग्य, पिता और धर्म — कमज़ोर है, और इस पर अष्टकवर्ग के बिन्दु 31 हैं। इस भाव का स्वामी बुध 10वें (शुभ) भाव में है।
गोचर: शनि 9वें भाव पर दृष्टि, गुरु (9वें भाव का मुख्य ग्रह) वहीं बैठा है, गुरु 9वें भाव में
· is ghar par bindu theek hain (31)
· 9ve ghar ka malik Budh soorya ki aag mein daba hua hai
· bhagya aur pita ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
इस भाव के स्वामी (Budh) पर — mazboot — Budh VAKRI hai; Budh SWA/MITRA raashi mein; Budh achhe ghar mein (10ve)
Jeevansaathi, santan aur pote-potiyon ka sukh, rishtedaar, bhagya aur dhan, shubh kaam, upar walon se samman, aur dharm mein shraddha. (Ph 20.10)
स्वयं — शरीर और स्वभाव1वाँ भाव
कमज़ोर · 24
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· 1ve ghar ka malik Shani mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· is ghar par bindu bahut kam hain (24) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
परिश्रम, विरोध और रोग6वाँ भाव
कमज़ोर · 31
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· is ghar par bindu theek hain (31)
· 6ve ghar ka malik Budh soorya ki aag mein daba hua hai
· mehnat aur rukavat ka mukhya grah Mangal bhi mushkil ghar mein hai
· 6ve ghar mein Mangal baitha hai — dabaav banata hai
इस भाव के स्वामी (Budh) पर — mazboot — Budh VAKRI hai; Budh SWA/MITRA raashi mein; Budh achhe ghar mein (10ve)
Virodhiyon par jeet apni himmat se, achhi sehat, udaarta, koi dabaa nahi sakta, aur badi samriddhi. (Ph 20.7)
आय और लाभ11वाँ भाव
कमज़ोर · 22
अगले 18 महीनों में इस भाव पर गोचर की कोई खिड़की नहीं — जो है वह नीचे "क्यों?" में।
क्यों? ▾
· 11ve ghar mein Shukra baitha hai — sahara deta hai
· 11ve ghar ka malik Mangal mushkil wale ghar mein chala gaya hai
· kamai aur laabh ka mukhya grah Guru bhi mushkil ghar mein hai
· aur wo CHHATHE ghar mein hai — jhagde aur alagav ka ghar
· is ghar par bindu bahut kam hain (22) — granth 25 se neeche ko kamzor kehta hai
अब समय की बात —
इस समय राहु/मंगल का दौर चल रहा है (Nov 2026 – Nov 2027), और इसमें 7वें, 4थे, 12वें भाव खुलता है।
जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं।
आगे का दौर
12 महीने आगे
राहु / मंगल← अभी
Nov 2026 – Nov 2027
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह।(BPHS 55.76-82)
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।(BPHS 55.82)
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी · इस लग्न के लिए कठिन ग्रह (BPHS Ch.34)
पूरी रीडिंग में:
· आगे के सारे दौर — पूरे चलते हुए दौर तक, एक नहीं
· कब — गोचर की सँकरी खिड़कियाँ, महीने के नाम से
· सूक्ष्म दशा — जो साल को महीनों में तोड़ती है
· साढ़ेसाती और ढैय्या के आगे के दौर
· राजयोग — BPHS अध्याय 39, और वह पूरा/आधा/चौथाई है या नहीं
आपका अतीतजन्म से आज तक — हर दौर, ग्रन्थ से। खोलने के लिए टैप करें।6 MD▾
आपका अतीत
जन्म से आज तक — हर बड़ा दौर, ग्रन्थ से।
दौर
काल
ग्रह की जगह
ग्रन्थ क्या कहता है
स्रोत
केतु महादशा
Nov 1960 – Nov 1966
केतु — 2रे भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: paisa aur parivaar
(केतु स्वयं 2रे भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ केतु/केतु
Nov 1960 – Mar 1961
केतु — 2रे भाव में
सुख और धन में कमी, और विरोध का भय।
JP 18.145
└ केतु/शुक्र
Mar 1961 – Mar 1962
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में सेहत तथा झगड़ा, बन्धु-मित्रों का साथ कम, और पाचन की तरफ़ ध्यान।
विवाह और मंगल कार्य। वाहन, वस्त्र, आभूषण। पत्नी-संतान का सुख, घर में लक्ष्मी, संगीत और उत्सव।
JP 18.146
└ केतु/सूर्य
Mar 1962 – Jul 1962
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
मन टूटा-टूटा रहता है, शरीर पर दबाव, और विदेश जाने का योग तथा भय। कामों में विरोध।
पद और राजसम्मान, पिता का सुख, शत्रु का नाश, यश।
JP 18.147
└ केतु/चन्द्र
Jul 1962 – Jan 1963
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
साथी और संतान के पक्ष में आलस और ढील, धन-अनाज का नुक़सान, और मन पर बोझ।
JP 18.148
└ केतु/मंगल
Jan 1963 – May 1963
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
संतान, साथी और सहोदरों से खिंचाव; सेहत, विरोध और सत्ता की तरफ़ से दबाव।
ताप और ज़हर जैसा ज्वर। चोट का ख़तरा, भाइयों से मनमुटाव, धन की हानि।
JP 18.149
└ केतु/राहु
May 1963 – Apr 1964
राहु — 8वें भाव में
ऊपर वालों और चोरी का भय, दुख, और कामों में रुकावट। बुरे लोगों से वास्ता।
बहुमूत्र (बार-बार पेशाब) और शरीर का दुबला होना, शीत-ज्वर, चौथिया बुख़ार, प्रमेह और शूल। मन में बेचैनी, धन का व्यय।
JP 18.150
└ केतु/गुरु
Apr 1964 – Jan 1965
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
देव, विद्वान और बड़ों की प्रीति, ऊपर वालों का स्नेह और निरोगता। भूमि और संतान का लाभ।
JP 18.151
└ केतु/शनि
Jan 1965 – Jan 1966
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
मन में भय और बोझ, अपने बन्धुओं से खिंचाव। और अपना देश या जगह छोड़नी पड़ सकती है।
धन की हानि, काम में रुकावट, शरीर में शिथिलता, अपनों से विरोध।
JP 18.152
└ केतु/बुध
Jan 1966 – Nov 1966
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
बन्धु-मित्रों का मेल, संतान-साथी और धन का आगम। विद्या और सुख।
विद्या और व्यापार से लाभ, बुद्धि की तेज़ी, धन-अनाज, मित्रों का साथ।
JP 18.153
शुक्र महादशा
Nov 1966 – Nov 1986
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: सन्तान, विद्या और बुद्धि · विवाह और जीवनसाथी · कर्म, पद और प्रतिष्ठा · आय और लाभ
(शुक्र 5वें भाव का स्वामी है)
अ.34: योगकारक
└ शुक्र/शुक्र
Nov 1966 – Mar 1970
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
शय्या, जीवनसाथी, धन और वस्त्र की प्राप्ति; धर्म और सुख की सम्पदा। विरोधियों का नाश और यश का लाभ।
JP 18.158
└ शुक्र/सूर्य
Mar 1970 – Mar 1971
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
सिर, पेट और आँख की तरफ़ ध्यान; कृषि और गो-धन में नुक़सान। ऊपर वालों की नाराज़गी।
JP 18.159
└ शुक्र/चन्द्र
Mar 1971 – Nov 1972
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
सिर और गर्मी की तकलीफ़, और इच्छाओं से उपजा दबाव। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
JP 18.160
└ शुक्र/मंगल
Nov 1972 – Jan 1974
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
मन में उत्साह और धन का आगम। जीवनसाथी के पक्ष से लाभ। आँख और पित्त की तरफ़ ध्यान।
JP 18.161
└ शुक्र/राहु
Jan 1974 – Jan 1977
राहु — 8वें भाव में
नीली चीज़ों या उस तरह के काम से धन — पर बन्धुओं से खिंचाव और मित्रों से भय। अग्नि की सावधानी।
भुक्ति के शुरू के पाँच महीने भारी रहते हैं।
JP 18.162
└ शुक्र/गुरु
Jan 1977 – Sep 1979
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
धन, वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति, धर्म का आचरण और सुख। जीवनसाथी-संतान के पक्ष में थोड़ी असमानता।
JP 18.163
└ शुक्र/शनि
Sep 1979 – Nov 1982
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
पद और सम्मान, नौकर-चाकर और पशु, धन-अनाज का लाभ, ज़मीन से लाभ।
सन्तान (बेटी) के जन्म की सम्भावना।
BPHS 60.52-59
└ शुक्र/बुध
Nov 1982 – Sep 1985
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
संतान और मित्रों का सुख तथा अर्थ की प्राप्ति, ऊपर वालों की प्रीति और बड़ा सुख। शुभ और पूजनीय कार्य।
JP 18.165
└ शुक्र/केतु
Sep 1985 – Nov 1986
केतु — 2रे भाव में
झगड़ा, बन्धुओं का साथ कम, विरोध से दबाव और मन में भय। धन में कटौती।
JP 18.166
सूर्य महादशा
Nov 1986 – Nov 1992
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: स्वयं — शरीर और स्वभाव · आकस्मिक परिवर्तन और गुप्त बातें · कर्म, पद और प्रतिष्ठा
(सूर्य "स्वयं — शरीर और स्वभाव" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: सम
└ सूर्य/सूर्य
Nov 1986 – Mar 1987
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
ऊपर वाला फल उल्टा हो जाता है — बढ़ने की जगह घटती है।
बड़ों, विद्वानों और शास्त्र के रास्ते से धन आता है। मन पर बोझ रहता है, और दूर की जगहों तथा एकान्त की तरफ़ मन जाता है।
BPHS 52.2
└ सूर्य/चन्द्र
Mar 1987 – Sep 1987
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
विवाह और शुभ कार्य होते हैं। धन-अनाज की समृद्धि, घर और ज़मीन की बढ़ोतरी, पशु और वाहन। पत्नी और संतान का सुख। बड़े लोगों से मेल, और उनकी कृपा से मनचाहा काम बनता है।
बेवक़्त खाना, और एक जगह से दूसरी जगह भटकना।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.4-6
└ सूर्य/मंगल
Sep 1987 – Jan 1988
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
ऊपरी/सरकारी वजह से धन का क्षय।
रत्न, सोना और धन की प्राप्ति। ऊपर वालों का स्नेह — शुभ समय। पित्त की तरफ़ ध्यान देना ज़रूरी।
BPHS 52.21-22
└ सूर्य/राहु
Jan 1988 – Dec 1988
राहु — 8वें भाव में
राजसम्मान। भाग्य की बढ़ोतरी, यश, पत्नी-संतान की वृद्धि, संतान का उत्सव, घर में कल्याण।
बंधन, जगह का नुकसान, क़ानूनी उलझन। चोर का डर, घाव। पत्नी-संतान का कष्ट, चौपायों का नुकसान, घर-ज़मीन की हानि। पेट के रोग और अतिसार।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.25-27
└ सूर्य/गुरु
Dec 1988 – Sep 1989
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
पत्नी-संतान को कष्ट और शरीर को कष्ट, बड़ा भय। ऊपर वालों की नाराज़गी, मनचाही चीज़ का नाश। ग़लत रास्ते से आया धन नष्ट, शरीर गिरना, मन में ताप।
सब जगह आदर। संतान की तरफ़ से धन। देव और विद्वानों का पूजन, अच्छे कर्म और अच्छी संगति।
BPHS 52.37-39
└ सूर्य/शनि
Sep 1989 – Sep 1990
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
शुरू में — मित्र/साथी का साथ छूटना। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — क्लेश। और माता-पिता से दूरी, आना-जाना लगा रहना।
चारों तरफ़ विरोध, आलस, और जीविका का दर्जा गिरना। ऊपर वालों तथा चोरी का भय।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.45-46
└ सूर्य/बुध
Sep 1990 – Jul 1991
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
शुरू में — दुख। बीच में — थोड़ा सुख। अन्त में — ऊपर वालों से डर, और आना-जाना।
बन्धुओं के पक्ष में चिन्ता, मन पर बोझ, उत्साह कम और धन का क्षय। थोड़ा सुख फिर भी मिलता है।
BPHS 52.55-56
└ सूर्य/केतु
Jul 1991 – Nov 1991
केतु — 2रे भाव में
शरीर को कष्ट और मन में बेचैनी। धन का व्यय, ऊपर वालों की नाराज़गी, और अपने लोगों की ओर से परेशानी।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 52.58
└ सूर्य/शुक्र
Nov 1991 – Nov 1992
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
शुरू में — मध्यम, कुछ ख़ास नहीं। बीच में — लाभ और शुभ। अन्त में — यश का नुकसान, या अपनी जगह से हटना। बन्धुओं से मनमुटाव, और अपने ही कुल/परिवार की वजह से भोग-सुख में कमी।
ऊपर वालों की नाराज़गी, मन में उलझन, और संतान-पत्नी तथा धन का नुकसान।
BPHS 52.70-71
चन्द्र महादशा
Nov 1992 – Nov 2002
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: घर, भूमि और माता · विवाह और जीवनसाथी
(चन्द्र "घर, भूमि और माता" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: पाप
└ चन्द्र/चन्द्र
Nov 1992 – Sep 1993
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
विद्या, संगीत और कला में मन लगता है। अच्छे वस्त्र, अच्छी संगति और शरीर का सुख। और बड़े लोगों तथा अधिकारियों से आदर मिलता है।
JP 18.73
└ चन्द्र/मंगल
Sep 1993 – Apr 1994
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
सेहत और विरोध की बुद्धि, जगह से हटना, धन का क्षय। मित्रों और भाइयों के कारण क्लेश।
JP 18.74
└ चन्द्र/राहु
Apr 1994 – Oct 1995
राहु — 8वें भाव में
अपनी जगह से हटना, मन में दुख, संतान को क्लेश। कहीं पत्नी को कष्ट, कहीं अपने शरीर में रोग का डर। बिच्छू जैसे ज़हर का डर, और चोर का।
पुण्य-तीर्थ का फल, देवता का दर्शन। दूसरों का उपकार और पुण्य कर्म का संग्रह।
BPHS 53.17-18
└ चन्द्र/गुरु
Oct 1995 – Feb 1997
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
काम में रुकावट, धन का व्यय। मन में ताप और अपनों से मतभेद। शरीर में शिथिलता।
गर्भाधान और उससे जुड़ा फल। धन-अनाज की समृद्धि, विवाह और मंगल कार्य। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ, दान-धर्म। बड़े की कृपा से पद और सम्मान।
BPHS 53.26-30
└ चन्द्र/शनि
Feb 1997 – Sep 1998
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
शस्त्र से चोट का ख़तरा। धन की हानि, काम में रुकावट, अपनों से विरोध, शरीर में रोग।
मन पर बोझ, वात-पित्त की तरफ़ ध्यान, और बात रुक जाना — विरोध के साथ बहस।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 53.36-37
└ चन्द्र/बुध
Sep 1998 – Feb 2000
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
विद्या और बुद्धि की बढ़ोतरी। धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। बड़े लोगों से सम्मान, व्यापार में लाभ। सोमपान जैसा सुख — अच्छा खाना-पीना और आराम।
मन में उलझन, काम में अड़चन, अपनों से बहस।
BPHS 53.39-44
└ चन्द्र/केतु
Feb 2000 – Sep 2000
केतु — 2रे भाव में
जीवनसाथी की सेहत, बन्धुओं का साथ कम, पेट की तरफ़ ध्यान, और धन का नुक़सान।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.79
└ चन्द्र/शुक्र
Sep 2000 – May 2002
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
पत्नी को कष्ट, घर में कलह। धन का व्यय, कारोबार में हानि।
जीवनसाथी के पक्ष से धन, कृषि-पशु, जल और वस्त्र का लाभ और सुख। माता की सेहत का ध्यान रखें।
BPHS 53.60-62
└ चन्द्र/सूर्य
May 2002 – Nov 2002
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
गर्भाधान और संतान से जुड़ा फल। पद और राजसम्मान, धन-अनाज, शत्रु का नाश। पिता की ओर से सुख।
राजा जैसा ऐश्वर्य, रोग का नाश और विरोधियों का क्षय। सुख और शुभ।
BPHS 53.65-69
मंगल महादशा
Nov 2002 – Nov 2009
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
★ इस पूरे दौर में खुला: भाई-बहन और पराक्रम · घर, भूमि और माता · परिश्रम, विरोध और रोग · आय और लाभ
(मंगल "भाई-बहन और पराक्रम" का मुख्य (कारक) ग्रह है)
अ.34: मारक
└ मंगल/मंगल
Nov 2002 – Apr 2003
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
शरीर में जड़ता और मन में उलझन।
शरीर में गर्मी बढ़ती है, मित्रों से खिंचाव, माता के पक्ष में चिन्ता, और ऊपर वालों से भय। काम अटकते हैं।
BPHS 54.7
└ मंगल/राहु
Apr 2003 – May 2004
राहु — 8वें भाव में
वात-पित्त का रोग। धन का नाश, चोर और सत्ता का भय। अपनों से विरोध, मन में बेचैनी।
ऊपर वालों और चोरी का भय, धन-अनाज का नुक़सान। और रास्ता ग़लत तरफ़ मुड़ने का ख़तरा।
BPHS 54.12-13
└ मंगल/गुरु
May 2004 – Apr 2005
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
पद और सम्मान। विवाह और मंगल कार्य, संतान का लाभ। देवता-ब्राह्मण की पूजा, तीर्थ। धन-अनाज, वाहन और वस्त्र। विद्या और यश की बढ़ोतरी।
प्रेत-बाधा जैसा अनुभव, मन में भय। काम में रुकावट, धन का व्यय।
BPHS 54.15-21
└ मंगल/शनि
Apr 2005 – May 2006
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
बाहरी/ऊपरी सत्ता से भय। धन-अनाज का नाश। बन्धन जैसी स्थिति, बन्दिश, रोग — और अन्त में ज़मीन/जायदाद का नुकसान।
पद का सुख और यश की बढ़ोतरी। अपने गाँव/जगह में अनाज की बढ़ोतरी। संतान-पौत्र का साथ, घर में गोधन। अपने वार के दिन राजसम्मान, अपने महीने में संतान की वृद्धि।
BPHS 54.26-27
└ मंगल/बुध
May 2006 – May 2007
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
हृदय का रोग, मान की हानि, बन्दिश, बन्धुओं का नुकसान। पत्नी-संतान और धन का नुकसान, चौपायों की हानि। दशा-स्वामी के साथ हो तो शत्रु बढ़ते हैं और बड़ा भय, विदेश जाना, कई रोग।
सत्संग और अच्छी कथाएँ, दान। धर्म की बुद्धि और बड़ा यश। नीति के रास्ते पर काम, रोज़ अच्छा भोजन। वाहन, वस्त्र, पशु — और सरकारी/बड़े संस्थान का काम और उसका सुख।खेती/ज़मीन के काम में सफलता।
BPHS 54.38-40
└ मंगल/केतु
May 2007 – Oct 2007
केतु — 2रे भाव में
शरीर में रोग होगा। अपमान, मन में ताप, धन-अनाज का घटना।
पेट की तरफ़ ध्यान, बन्धु-सहोदरों के पक्ष में चिन्ता, और मान को लेकर विरोध।
BPHS 54.54
└ मंगल/शुक्र
Oct 2007 – Dec 2008
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
पद का लाभ और बड़ा सुख। हाथी-घोड़े, वस्त्र और आभूषण। लग्नेश से सम्बन्ध हो तो पत्नी-संतान की बढ़ोतरी, आयु और ऐश्वर्य की वृद्धि, भाग्य का सुख।
जीवनसाथी की तरफ़ से आभूषण और वस्त्र, और बन्धुओं से धन का आगम।
BPHS 54.55-56
└ मंगल/सूर्य
Dec 2008 – Apr 2009
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
वाहन, कीर्ति और संतान का लाभ। धन-अनाज की समृद्धि, घर में कल्याण। कुशल और आरोग्य, बड़ा धैर्य, राजपूज्य, बड़ा सुख। कारोबार में फल की अधिकता, विदेश में बड़े से भेंट।
अपवाद, बड़ों से मनमुटाव, झगड़ा और सेहत पर दबाव। अपने ही वर्ग से मन को कष्ट।
BPHS 54.64-66
└ मंगल/चन्द्र
Apr 2009 – Nov 2009
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
कई तरह से धन और सुख, वस्त्र, मोती-मणि के आभूषण। पर नींद और आलस बढ़ता है, और बेचैनी रहती है।
पूर्ण चन्द्र हो तो पूरा फल, क्षीण चन्द्र हो तो थोड़ा फल।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
JP 18.92
राहु महादशा
Nov 2009 – Nov 2027
राहु — 8वें भाव में
★ इस पूरे दौर में खुला: आकस्मिक परिवर्तन और गुप्त बातें
(राहु स्वयं 8वें भाव में बैठा है)
ग्रन्थ चुप
└ राहु/राहु
Nov 2009 – Aug 2012
राहु — 8वें भाव में
चोर का डर और घाव की पीड़ा। ऊपर वालों के दरवाज़े पर लोगों से मनमुटाव, अपने चाहने वालों का नुकसान, पत्नी-संतान को कष्ट — इसमें कोई संदेह नहीं।
जीवनसाथी की सेहत, विवाद, सोच में उलझन और धन का क्षय। दूर की जगहों में भटकाव।
BPHS 55.5-6
└ राहु/गुरु
Aug 2012 – Dec 2014
गुरु — 12वें भाव में, 12+3 का स्वामी
धन की हानि और शरीर को कष्ट।
भुक्ति के अन्त में — ऊपरी/सत्ता की नाराज़गी से दो महीने की शारीरिक तकलीफ़। बड़े भाई का नुकसान, माता-पिता को कष्ट।
BPHS 55.18
└ राहु/शनि
Dec 2014 – Nov 2017
शनि — 12वें भाव में, 1+2 का स्वामी
पश्चिम दिशा की यात्रा। मालिक/ऊपरी की वजह से धन का क्षय। शरीर में आलस, फल कम — और फिर अपने देश लौटना।
नीच/शत्रु और सत्ता का भय। पत्नी-संतान को कष्ट, अपने बन्धुओं से मन में ताप, दायाद/रिश्तेदारों से झगड़ा, कारोबार में कलह — और अचानक कोई आभूषण मिल जाना।
(1 बात नहीं दिखाई जा रही — ग्रन्थ वहाँ रोग की बात करता है)
BPHS 55.24
└ राहु/बुध
Nov 2017 – May 2020
बुध — 10वें भाव में, 6+9 का स्वामी
मन में उलझन और बहस। काम में अड़चन, धन का व्यय, अपनों से मतभेद।
मित्र, बन्धु और जीवनसाथी का मेल, और धन का आगम। ऊपर वालों की प्रीति।
BPHS 55.36-38
└ राहु/केतु
May 2020 – Jun 2021
केतु — 2रे भाव में
मान की हानि और सब तरफ़ अड़चनें।
JP 18.100
└ राहु/शुक्र
Jun 2021 – Jun 2024
शुक्र — 11वें भाव में, 5+10 का स्वामी
विदेश या दूर की जगह से वाहन की प्राप्ति, और छत्र-चामर जैसी सम्पदा (यानी पद के चिह्न)। सेहत और बन्धुओं का ध्यान रखें।
JP 18.101
└ राहु/सूर्य
Jun 2024 – May 2025
सूर्य — 10वें भाव में, 8 का स्वामी
दान और धर्म में मन, प्रीति, और सारी बाधाओं का नाश।
JP 18.102
└ राहु/चन्द्र
May 2025 – Nov 2026
चन्द्र — 4थे भाव में, 7 का स्वामी
माता का सुख, घर में शान्ति। विवाह और मंगल कार्य, धन-अनाज, वस्त्र-आभूषण। मन प्रसन्न, यश की बढ़ोतरी।
भोग की सम्पदा हमेशा बनी रहती है, फ़सल-वृद्धि और धन का आगम। और अपनों से मेल।
BPHS 55.68-74
└ राहु/मंगल ← अभी
Nov 2026 – Nov 2027(अब तक Nov 2026)
मंगल — 6ठे भाव में, 4+11 का स्वामी
भूमि और घर का लाभ। भाइयों से सुख, पराक्रम से कमाई, शत्रु पर जीत। साहस और उत्साह।
शुरू में क्लेश, बीच और अन्त में सुख।
BPHS 55.76-82
⚠️ साढ़े साती
May 1966 – Jul 1973
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Aug 1975 – Oct 1977
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Jan 1985 – Jan 1988
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती
Jun 1995 – May 2003
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Sep 2004 – Aug 2007
चन्द्र से 4था
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ ढैया
Nov 2014 – Nov 2017
चन्द्र से 8वाँ
शनि का बड़ा चक्कर
—
⚠️ साढ़े साती ← अभी चल रही है
Apr 2025 – Jun 2032
पहला चरण (उठाव), दूसरा चरण (सबसे भारी), तीसरा चरण (उतार)
शनि का बड़ा चक्कर
—
क्या यह सही था?
यहाँ तक जो लिखा है — क्या यह आपके साथ हुआ? अगर आप तीन तारीखें बता दें — नौकरी या काम का बड़ा मोड़, शादी या रिश्ता, और घर या सम्पत्ति — तो आपकी अगली रीडिंग और ठीक होगी।
⚖️ Shadbala classical 6-component system (BPHS Ch.27) · Swiss Ephemeris
गहराई मेंषोडशवर्ग, D9, D10, अष्टकवर्ग, तीन घड़ियाँ, वर्षफल, गोचर। खोलने के लिए टैप करें।▾
🔢 सोलह कुंडलियाँ — षोडशवर्ग
BPHS कहता है एक ही कुंडली को सोलह तरह से देखा जा सकता है — हर वर्ग एक अलग सवाल पूछता है। जो ग्रह कई वर्गों में एक ही राशि रखता है, वह शास्त्र के हिसाब से सबसे मज़बूत है।
चंद्र सोलह में से 8 वर्गों में वही राशि रखता है (कुल 15 में से) — यह इस कुंडली का सबसे मज़बूत ग्रह है।
चंद्र8/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Meshaपिछले कर्मों का जोड़ — Karka
बुध3/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Mithunaकर्म और पहचान — Karkaपिछले कर्मों का जोड़ — Mithuna
मंगल2/15 वर्गों में वही राशि
जीवनसाथी और आंतरिक बल — Meshaकर्म और पहचान — Makaraपिछले कर्मों का जोड़ — Mesha
ज़्यादा गिनती का मतलब शास्त्रीय बल है, अच्छा नतीजा नहीं। और किसी वर्ग का नाम उसका भविष्य नहीं बताता — D30 कठिनाइयों का वर्ग है, पर उसका ज़िक्र कठिनाई की भविष्यवाणी नहीं है।
⏳ तीन घड़ियाँ — तीन पद्धति, एक ही समय
ज्योतिष में समय नापने के कई तरीके हैं, और तीनों अलग गणित से चलते हैं। जहाँ तीनों एक ही बात कहें, वह संकेत ज़्यादा मज़बूत होता है।
यह ताजिक पद्धति का पहला चरण है — वर्ष प्रवेश, वर्ष लग्न और मुन्था। वर्षेश (साल का स्वामी), सहम और मुद्दा दशा अभी गणित में नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में यहाँ कुछ नहीं कहा गया।
📆 १० महीने की समय-रेखा — गोचर
🟢 सबसे सहायक महीना (गोचर): May 2027🔴 सबसे सावधानी वाला (गोचर): January 2027
पिछले ३ महीने
🟢 August 2026Moon / Venus (अंतर / प्रत्यंतर)
Sun → 7th · Mercury → 7th · Jupiter → 7th · Rahu → 2nd
🟢 September 2026Moon / Venus (अंतर / प्रत्यंतर)
Jupiter → 7th · Venus → 10th · Rahu → 2nd
🟢 October 2026Moon / Sun (अंतर / प्रत्यंतर)
Mars → 7th · Mercury → 10th · Jupiter → 7th · Venus → 10th · Rahu → 2nd
Transits indicate periods of support or pressure on a house. They do not predict specific events.
🔒 त्रिकाल ने और भी देखा है
आपके नवांश में Moon वर्गोत्तम है — जन्म कुंडली और D9 दोनों में एक ही राशि। यह विशेष बल आपके लिए कब और कैसे काम करता है, वह पूरी रीडिंग में है।
आपकी कुंडली में दो भाव ऐसे हैं जिनका स्वामी एक ही ग्रह है — और उस एक ग्रह की स्थिति ही आपकी पूरी स्थिति की जड़ है। कौन से भाव, कौन सा ग्रह, और उसका क्या असर है — वह पूरी रीडिंग में है।
May 2027 आपका सबसे सहायक महीना है — लेकिन उससे पहले के महीनों में क्या सँभालना है, और उस महीने में ठीक क्या करना है, वह अंदर है।
यह रीडिंग ग्रन्थ की शर्तें लगा कर बनी है — BPHS, फलदीपिका, जातक पारिजात और मुहूर्त चिन्तामणि। जहाँ ग्रन्थ चुप है, वहाँ हम भी चुप हैं। ये आसार हैं, फ़ैसला नहीं। फ़ैसला आपका है।
📊 Complete Analysis
आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
💎 Gemstone + 4 Action Windows...
त्रिकाल ने और भी देखा है
आपकी Rahu महादशा में Poori Kundali को लेकर त्रिकाल ने और भी देखा है... आपने एक दौर पढ़ा। ग्रंथ में आगे के सारे दौर, उनके महीने, और जहाँ ग्रंथ उपाय देता है — सब तैयार है।
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